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* @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999)
* @return string
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* Do Query
*
* @param $instance
* @return array
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The post अंक ज्योतिष से जाने मूलांक 7 वालों के लिए नया साल कैसा रहने वाला है। appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 7 तारीख को, 16 तारीख को या 25 तारीख को हुआ है उनका नंबर है 7 और सात है केतु का अंक। क्या कहता है यह साल 2024 आपके लिए?
वर्ष 2024 कुछ मामलों में अच्छा होगा और कुछ मामलों में सात अंक वालों के लिए यह वर्ष सामान्य रहेगा।
स्वास्थ्य: स्वास्थ्य में थोड़ा उतार चढ़ाव इस वर्ष रह सकता है। सेहत को लेकर हर दो-तीन महीने पर थोड़ी दिक्कतें आपको झेलनी पड़ सकती है। हड्डियों, आंखों और रक्तचाप की समस्या का ध्यान रखना होगा। इस वर्ष आपको हड्डियों की समस्या आंखों की समस्या और ब्लड प्रेशर की समस्या परेशान कर सकती है।
करियर: इस वर्ष में आपके करियर में उन्नति होगी, करियर का मामला शानदार है। नई जिम्मेदारियां आपको मिल सकती हैं। इस साल करियर में आपको पद प्रतिष्ठा का और धन का लाभ भी होता हुआ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2024 में आपका करियर बहुत बढ़िया होगा और कैरियर से जो उम्मीदें आप रखते हैं वह उम्मीदें आपकी पूरी होगी। इस साल पैसा भी आपका बढ़ेगा आप नौकरी में हो या व्यापार में हो पैसे के मामले में इस साल आपको फायदा होगा। लेकिन इन्वेस्टमेंट में निवेश में आपको सावधानी रखनी होगी। इन्वेस्टमेंट के मामले में हड़बड़ी मत करिएगा, अगर कोई प्रॉपर्टी खरीदने जा रहे हैं, कहीं पर पैसा लगाने जा रहे हैं तो उसमें थोड़ा ध्यान रखिएगा। ऐसा लगता है कि इस साल में आप अपनी पुरानी संपत्ति बेच करके नई संपत्ति खरीद सकते हैं और नई जगह पर शिफ्ट हो सकते हैं। चेंज ऑफ प्लेस हो सकता है इस तरह की संभावना आपके लिए बन रही है।
रिलेशनशिप: इस वर्ष नंबर 7 वालों के लिए विवाह के योग भी है। इस साल आपकी शादी हो सकती है और उनके संतान प्राप्ति के योग भी इस साल में बना रहे हैं। यानी अविवाहितों के लिए विवाह का अवसर है और जो लोग विवाहित हैं और संतान प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील हैं उनको इस वर्ष संतान की प्रति इस हो सकती है।
उपाय: सात अंक वाले रोज सवेरे सूर्य भगवान को जल सदा जल(प्लेन वाटर) अर्पित करेंगे और रोज सवेरे 108 बार नमः शिवाय मंत्र का जाप करेंगे तो उनके जीवन की मुश्किलें हल हो जाएगी और अंक सात वालों को विशेष सलाह यही है कि पैसे की बर्बादी मत करिएगा और स्वास्थ्य में समस्या होने पर उसे टालियेगा नहीं लापरवाही मत करिएगा।
नोट:इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। यह सूचना विभिन्न स्रोतों से संकलित की गई है, जैसे कि विभिन्न माध्यम, ज्योतिषीय भविष्यवाणियाँ, पंचांग, प्रवचन, धार्मिक मान्यताएँ, और धर्मग्रंथों से। हमारा उद्देश्य केवल सूचना प्रसार करना है, और इसका उपयोग किसी भी प्रकार से बाहरी उपयोगकर्ता या पाठक की जिम्मेदारी होगी, जो केवल सूचना के रूप में समझेगा।
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]]>जिन लोगों का जन्म महीने की 6 तारीख, 15 तारीख या 24 तारीख को है उनका नंबर है 6। 6 का अंक है शुक्र का अंक। इस अंक वालों के लिए यह साल मिले-जुले परिणाम दिखा रहा है बहुत सारी चीजों में बदलाव भी होता हुआ दिख रहा है।
स्वास्थ्य: इस साल आपके स्वास्थ्य में समस्याएं रह सकती हैं। इसलिए इस वर्ष 6 अंक वालों को अपने स्वास्थ्य का ध्यान देना होगा। हड्डियों की समस्याएं चोट चपेट की दुर्घटना की समस्याएं और मानसिक समस्याएं आपको परेशान कर सकती हैं।
करियर: करियर में साल की शुरुआत में थोड़ी समस्याएं रह सकती हैं। वर्ष के आरंभ में करियर में दिक्कतें हो सकते हैं। साल ऐसा लग रहा है कि करियर में आपको जल्दबाजी में परिवर्तन करना पड़ेगा और कोई नई शुरुआत करनी पड़ेगी, यह बात जरूर है कि जो नई शुरुआत आप करेंगे वह आपके लिए अच्छी होगी। धन की स्थिति आपके लिए संतोषजनक रहेगी, पैसा रूपया पर्याप्त मात्रा में आपके पास बना रहेगा। लेकिन इस साल में शेयर बाजार और सट्टा आदि से बचना होगा अन्यथा इस स्पेक्युलेटिव सेक्टर में आपको नुकसान हो सकता है। जहां अचानक उतार चढ़ाव हो ऐसे क्षेत्र से बचने की सलाह दी जा रही है।
रिलेशनशिप: अगर आप अविवाहित हैं तो अविवाहितों का विवाह इस साल में जरूर हो सकता है और जो लोग विवाहित हैं उन्हें अपने वैवाहिक जीवन में रिश्तों का ध्यान रखना होगा।
तो मोटे तौर पे 6 अंक वाले इस वर्ष 2024 में स्वास्थ्य को लेकर के और करियर को लेकर के शुरुआत में परेशान होंगे लेकिन बाद में स्तिथि बेहतर हो जाएगी। करियर में कुछ नया करेंगे तो उनका लाभ होगा, धन का मामला उनके लिए ठीक दिखाई दे रहा है और विवाह भी इस साल हो सकता है लेकिन अगर आपका 6 का अंक है तो अपने वैवाहिक जीवन में इस साल में आपके रिश्तों का ध्यान बनाए रखना होगा।
उपाय: इस वर्ष शनि मंत्र “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का पूरे वर्ष भर जाप करें तो आपके लिए बहुत बेहतर होगा।
नोट:इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। यह सूचना विभिन्न स्रोतों से संकलित की गई है, जैसे कि विभिन्न माध्यम, ज्योतिषीय भविष्यवाणियाँ, पंचांग, प्रवचन, धार्मिक मान्यताएँ, और धर्मग्रंथों से। हमारा उद्देश्य केवल सूचना प्रसार करना है, और इसका उपयोग किसी भी प्रकार से बाहरी उपयोगकर्ता या पाठक की जिम्मेदारी होगी, जो केवल सूचना के रूप में समझेगा।
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]]>स्वास्थ्य: अगर आपका अंक पांच है तो साल 2024 आपके स्वास्थ्य के लिहाज़ से अत्तम रहने वाला है। आपका स्वास्थ्य कुल मिलाकर अच्छा बना रहेगा। इस साल में स्वास्थ्य की मुश्किलें नहीं रहेगी। जीवनचार्य में आपके रूटीन में सुधार होगा और चुकी आप अपने जीवन में सुधार करेंगे इसीलिए आपको रोगों से मुक्ति मिलेगी।
करियर: इस साल आपके करियर में उन्नति होगी। अगर बहुत दिनों से प्रमोशन नहीं हुआ है तो इस वर्ष होने की पूरी संभावना है। अगर व्यापार में तरक्की बहुत समय से नहीं हुई है तो इस वर्ष होगी। करियर में उन्नति होगी और सफलता के योग बनेंगे। इस साल आपका स्थान परिवर्तन हो सकता है किसी नए शहर में किसी नए स्थान में जाकर के आप बस सकते हैं। आर्थिक स्थिति आपकी अच्छी बनी रहेगी यानी पैसों की समस्या आपके लिए वर्ष 2024 में दिखाई नहीं दे रही है। इस वर्ष कोई पुरानी संपत्ति बेचेंगे और नई संपत्ति खरीदेंगे। संपत्ति बेचने और खरीदने के योग इस साल में आपके लिए दिख रहे हैं।
रिलेशनशिप: आगर आपका नंबर पांच है तो यह साल आपके विवाह के लिए उपयुक्त है। विवाह होने के योग इस साल में आपके लिए बन रहे हैं। लेकिन विवाह के निर्णय में सावधानी रखिएगा क्योंकि यह साल आपके निर्णय में गलतियां करवा सकता है इसलिए शादी करिए बहुत सोच समझ कर। बहुत ठंडे दिमाग से विवाह का निर्णय लीजिएगा तो आपके लिए बहुत अच्छा होगा।
तो देखिए इस वर्ष पांच वाले जीवन में बहुत तरक्की करेंगे। इस साल पांच वालों को दो बातों का ध्यान रखना है पहले जल्दबाजी में इस साल निर्णय मत लीजिएगा और दूसरा जो भी आप बड़े-बड़े परिवर्तन करने जा रहे हैं उसको आराम से करियेगा और उस परिवर्तन को लेकर के परेशान मत होइएगा। परिवर्तन आपके लिए अच्छा होगा।
उपाय: पूरे साल भर गणपति अथर्व शीर्ष का पाठ करें। गणपति अथर्व शीर्ष का अगर आप पूरे वर्ष भर पाठ करें तो बहुत अच्छा होगा और अगर गणपति अथर्व शीर्ष नहीं पढ़ पाते तो पूरे साल भर रोज सुबह 108 बार “ॐ गं गणपतये नमो नम:” मंत्र का अगर आप पूरे साल भर जप करेंगे तो आपको लाभ जरूर होगा।
नोट:इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। यह सूचना विभिन्न स्रोतों से संकलित की गई है, जैसे कि विभिन्न माध्यम, ज्योतिषीय भविष्यवाणियाँ, पंचांग, प्रवचन, धार्मिक मान्यताएँ, और धर्मग्रंथों से। हमारा उद्देश्य केवल सूचना प्रसार करना है, और इसका उपयोग किसी भी प्रकार से बाहरी उपयोगकर्ता या पाठक की जिम्मेदारी होगी, जो केवल सूचना के रूप में समझेगा।
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]]>नंबर चार राहु का अंक है। जिनका जन्म किसी भी महीने की चार तारीख को, 13 तारीख को, 22 तारीख को या 31 तारीख को हुआ है उनका नंबर है चार। जानते हैं चार नंबर वालों के लिए साल 2024 कैसा रहेगा? चार अंक वालों के लिए साल 2024 उपलब्धियां से भरा रहेगा।
स्वास्थ्य: स्वास्थ्य के लिहाज़ से आपका यह साल सामान्यतः पिछले सालों की तुलना में इस वर्ष अच्छा बना रहेगा। थोड़ी बहुत पेट की और सर्दी जुकाम की समस्या इस साल परेशान कर सकती है। इस साल डाइजेशन को लेकर के और कोल्ड कफ को लेकर के प्रॉब्लम हो सकती है। साथ ही लंबी यात्राओं में अथवा वाहन चलाते समय सावधानी रखने की ज़रूरत है।
करियर: इस साल आप अपने करियर में परिवर्तन जरूर करेंगे और यह परिवर्तन आपके लिए लाभकारी होगा। और इस परिवर्तन से आपको बहुत सारे फायदे होंगे, आपका वर्क प्रेशर कम होगा। किसी नए काम की शुरुआत इस साल में आप कर सकते हैं और अगर ऐसा करना चाहते हैं तो इस साल में नए काम की शुरुआत जरूर की जा सकती है। करियर की स्थिति कुल मिलाकर ठीक रहेगी पैसों को लेकर के या प्रॉपर्टी को लेकर के किसी तरह की दिक्कत नहीं दिख रही है।
रिलेशनशिप: आप के जीवन में इस साल में नए रिश्तों की शुरुआत हो सकती है। प्रेम संबंध शुरू हो सकते हैं। जीवन में किसी की मित्रता आ सकती है और आपका गहरा जुड़ाव हो सकता है। अगर आप अविवाहित हैं तो इस साल आपका विवाह हो सकता है। जो आपके लिए बहुत बेहतर होगा।
अंक ज्योतिष के अनुसार ज्यादातर चार नंबर वालों के जीवन में यह साल परिवर्तन तो करेगा लेकिन यह परिवर्तन लाभकारी होगा और सबसे महत्वपूर्ण बात स्वास्थ्य बेहतर होगा और करियर अच्छा रहेगा और अगर कुछ नया शुरू करना चाहते हैं तो इस साल में आप रिस्क लेकर के जीवन में आगे बढ़ सकते हैं।
उपाय: आपका बेसिक अंक 4 नंबर है तो पूरे साल भर अगर आप शनि मंत्र का जाप करें रोज शाम को 108 बार “ॐ शं शनैश्चराय नमः।“ मंत्र का जाप करें। अगर आप ऐसा पूरे साल करें तो यह वर्ष आपके लिए बहुत बेहतर होगा।
नोट:इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। यह सूचना विभिन्न स्रोतों से संकलित की गई है, जैसे कि विभिन्न माध्यम, ज्योतिषीय भविष्यवाणियाँ, पंचांग, प्रवचन, धार्मिक मान्यताएँ, और धर्मग्रंथों से। हमारा उद्देश्य केवल सूचना प्रसार करना है, और इसका उपयोग किसी भी प्रकार से बाहरी उपयोगकर्ता या पाठक की जिम्मेदारी होगी, जो केवल सूचना के रूप में समझेगा।
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]]>जिन लोगों का जन्म महीने की 3 तारीख 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है उनका मुख्य अंक है तीन। आइये जानते हैं नंबर तीन वालों के लिए वर्ष 2024 कैसा रहेगा।
देखिए अगर आपका नंबर तीन है तो आने वाला वर्ष आपके लिए परिवर्तनों से भरा हुआ है बहुत सारे परिवर्तन इस साल में आपके जीवन में होंगे और ज्यादातर परिवर्तन आपके लिए सुखद होंगे अच्छे होंगे।
स्वास्थ्य: साल 2024 में आपके स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार होता चला जाएगा। इस साल आपका स्वास्थ्य बेहतर होगा और पुरानी जो स्वास्थ्य की समस्याएं थी उन समस्याओं से भी आपको इस साल में छुटकारा मिलेगा। स्वास्थ्य का मामला आपका अच्छा है।
करियर – करियर में और स्थान में परिवर्तन के योग हैं अगर आप व्यापार करते हैं तो कुछ नया करने का प्रयास करेंगे और अगर आप नौकरी करते हैं तो इस साल में आपका ट्रांसफर हो सकता है। नया साल में स्थान परिवर्तन के योग आपके लिए बनते दिख रहे हैं। इस साल में आपको उच्च पद की प्रतिष्ठा की प्राप्ति हो सकती है। तो करियर का मामला बड़े परिवर्तन करवा देगा लेकिन परिवर्तन आपके लिए लाभकारी रहेंगे। धन की स्थिति आपके लिए कुल मिलाकर संतोषजनक रहेगी। बहुत अच्छा भी नहीं और बहुत बुरा भी नहीं, ठीक-ठाक तरीके से पैसा आता रहेगा। ऐसा लगता है कि इस साल में आप कहीं पर प्रॉपर्टी खरीदेंगे या जमीन खरीदेंगे।
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रिलेशनशिप: अगर आप अविवाहित हैं तो इस वर्ष आपका विवाह आपकी इच्छा से फाइनल हो सकता है। आपकी शादी तय हो सकती है और इंगेजमेंट भी हो सकती है परंतु इस साल में विवाह हो पाना अभी आपके लिए कठिन होगा, यानी शादी फाइनल तो होगी, जीवन में किसी महिला का या पुरुष का आगमन होगा, इंगेजमेंट होगी और शादी का कमिटमेंट होगा लेकिन विवाह इस साल में नंबर तीन वालों का हो पाना थोड़ा सा कठिन है।
उपाय: नंबर तीन वाले पूरे साल भर शनिवार को खाने पीने की वस्तु का अगर दान करें और किसी निर्धन को हर शनिवार को दान दें तो आपके लिए बहुत बेहतर होगा। इसके साथ प्रति शनिवार को पूरे साल भर शनि मंत्र “ॐ शं शनैश्चराय नमः।“ का जप करेंगे तो आपके लिए बहुत बेहतर होगा।
नोट:इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। यह सूचना विभिन्न स्रोतों से संकलित की गई है, जैसे कि विभिन्न माध्यम, ज्योतिषीय भविष्यवाणियाँ, पंचांग, प्रवचन, धार्मिक मान्यताएँ, और धर्मग्रंथों से। हमारा उद्देश्य केवल सूचना प्रसार करना है, और इसका उपयोग किसी भी प्रकार से बाहरी उपयोगकर्ता या पाठक की जिम्मेदारी होगी, जो केवल सूचना के रूप में समझेगा।
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]]>नंबर दो यानी चंद्रमा का अंक। जिन लोगों का जन्म महीने की 2 तारीख को, 11 तारीख को, 20 तारीख को या 29 तारीख को हुआ है उनका मूलांक है दो या उनका मुख्य नंबर है दो। उनके लिए साल 2024 कैसा रहेगा। आने वाला वर्ष आपके लिए मिला-जुला रहेगा।
स्वास्थ्य: इस साल आपके स्वास्थ्य में समस्याएं रह सकती हैं। यह वर्ष आपके स्वास्थ्य के मामले में बहुत अच्छा नहीं दिख रहा है। आप को सतर्क रहने की ज़रूरत होगी। नसों और हड्डियों की समस्या इस साल में आपको हो सकती है और ऐसा हो सकता है की आवश्यकता पड़ने पर आपकी कोई सर्जरी भी हो। अगर आप महिला है तो युटेरस रिमूवल और अगर आप पुरुष हैं तो आंखों की, पेट की कोई सर्जरी होने की संभावना बन रही है।
करियर स्वास्थ्य तो बहुत अच्छा नहीं है लेकिन करियर की स्थिति आपकी बहुत अच्छी दिख रही है। करियर का मामला आपका शानदार नज़र आ रहा है और कैरियर के मामले में आपको सफलता मिलेगी। करियर में स्थिरता आएगी कैरियर स्टेबल होगा। करियर का उतार चढ़ाव बंद होगा और आपको लाभ होता हुआ दिखाई देगा। यानी करियर का मामला आपका बढ़िया है। धन के जो मामले हैं यह आपके लिए काफी अच्छे बने रहेंगे यानी पैसों को लेकर के इस साल में आपको कष्ट नहीं होगा। निरंतर आपके पास पैसा आता रहेगा और धन की स्थितियां आपकी बढ़िया बनी रहेगी। संपत्ति या वाहन खरीदने के योग बन रहे हैं। इस साल हो सकता है कि आप कोई प्रॉपर्टी खरीदे आप कोई गाड़ी खरीदे ।
रिलेशनशिप: अगर आप अविवाहित हैं तो आपके लिए यह वर्ष विवाह का वर्ष है। इस साल आपका विवाह होने की पूरी संभावना बन सकती है। और ऐसा लगता है कि चट मंगनी पट ब्याह टाइप शादी होगी, यानी तुरंत शादी तय होगी और तुरंत शादी हो जाएगी।
अंक ज्योतिष के अनुसार जिनका नंबर दो है वह लोग केवल अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें बाकी मामले उनके पूरे साल के लिए बहुत ही अच्छे हैं।
उपाय: नंबर दो वाले पूरे साल भर भगवान शिव की उपासना करें और ॐ नमः शिवाय मंत्र का सुबह-शाम रोज जाप करें। इसके साथ पूरे साल नियमित रूप से पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाइ। अगर आप ऐसा पूरे साल भर ऐसा करेंगे तो आपका स्वास्थ्य बेहतर होगा और जो बाकी मामले हैं जिनमें आपको सफलता मिलनी है उनमें आपको सफलता अवश्य मिलेगी।
नोट:इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। यह सूचना विभिन्न स्रोतों से संकलित की गई है, जैसे कि विभिन्न माध्यम, ज्योतिषीय भविष्यवाणियाँ, पंचांग, प्रवचन, धार्मिक मान्यताएँ, और धर्मग्रंथों से। हमारा उद्देश्य केवल सूचना प्रसार करना है, और इसका उपयोग किसी भी प्रकार से बाहरी उपयोगकर्ता या पाठक की जिम्मेदारी होगी, जो केवल सूचना के रूप में समझेगा।
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]]>The post अगर घर में होता है क्लेश और रहती है अशांति तो निवारक के लिए करें ये सरल प्रयोग appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>– हमेशा मिट्टी के जल पात्र (मटकी, घड़ा, सुराही) का ही जल पियें। इससे शनि, राहु, केतु ग्रह शांत रहते हैं।
– घर में तुलसी का पौधा लगाएं। प्रतिदिन प्रातः व सायं घी का दीपक करें। इससे घर का वास्तु दोष संतुलित रहता है तथा बुध, चंद्र व आंशिक शुक्रादि ग्रह शांत रहते हैं। घर की छत पर ईशान कोण में तुलसी का पौधा रखें, नित्य जल चढ़ाएं (रविवार को छोड़कर)। इससे मंगल व सूर्य ग्रह शांत व प्रसन्न रहते हैं जिससे धंधा एवं भवन संबंधी कार्य होता है।
– परिवार में शयन कक्ष हमेशा स्वच्छ व सुगंधित रखें। लकड़ी के ही पलंग पर शयन करें तथा उसके सभी पायों के नीचे ताम्बे के प्लेट रखें। इससे बुध, शुक्र व केतु ग्रह शांत व प्रसन्न रहते हैं तथा परिवार में रोग निवारण होता है।
– यदि आपकी रसोई उचित दिशा आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) कोण में नहीं है तो रसोई के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में सिन्दूरी रंग के गणपति स्थापित करें, धन-धान्य एवं समृद्धि की बहार रहेगी और दुर्घटनाओं का खतरा भी नहीं होगा।
– घर की छत पर नैर्ऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) में लाल, पीली, नीली, सफेद व हरे पंचरंगी पताका (ध्वजा) फहराएं। इससे सूर्य व गुरु ग्रह ही नहीं बल्कि सभी नवग्रह प्रसन्न व शांत रहते हैं तथा समस्त पीड़ाकारक दोषों का निवारण होता है।
– पितृ दोष निवारण के लिए बुजुर्गों की प्रसन्नता के लिए और आपके घर में शांति के लिए, नौकरी कारोबार में उन्नति के लिए प्रतिदिन प्रातः और सायंकाल परिण्डे (पीने के पानी रखने का स्थान) के पास दीपक जलायें।
– प्रत्येक रविवार को जल में इत्र मिलाकर प्रातःकाल सूर्योदय वेला एवं सूर्योदय होने पर सूर्य को अघ्र्य दें तथा ‘ऊँ हिरण्यगर्भाय नमः’ मंत्र का जाप करते हुए एक माला (108 नाम) फेरें।
– प्रत्येक शनिवार को सायं काल पीपल वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
– राहु की शांति के लिए तथा पितरों की शांति के लिए परिण्डे पर प्रतिदिन सायं काल घी का दीपक जलायें। बुजुर्गों का सम्मान करें।
– प्रत्येक मंगलवार को शुद्ध होकर प्रातः काल श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें। हनुमानजी के मंदिर में दर्शन करें तथा गुड़ के प्रसाद का भोग लगायें। लोबान धूप कर सकें तो और भी अच्छा होगा।
– प्रत्येक शनिवार को श्री हनुमानजी को गुलकंद युक्त मीठा पान चढ़ायें तथा ‘ऊँ पवनपुत्राय नमः‘ मंत्र की एक माला (108 नाम) जपें।
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]]>The post शास्त्रों के अनुसार जाने किन कार्यों में पत्नी को दायीं और कब बाईं ओर होना चाहिए…? appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>शास्त्रों में स्त्री पुरुष की वामांगी होती है इसलिए सिंदूर दान करते समय, द्विरागमन, भोजन करते समय, सोते समय, सेवा के समय, आशीर्वाद ग्रहण करते समय और ब्राह्मणों के पांव धोते समय पत्नी को पति के बायीं ओर रहना चाहिए। इससे शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
वामांगी होने के बाद भी कुछ विशेष कार्यों में पत्नी को दायीं ओर रहकर कार्य करने के लिए शास्त्र कहता हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि कन्यादान करते समय, विवाह, यज्ञकर्म एवं जातकर्म, नामकरण और अन्न प्राशन के शुभ अवसर पर पत्नी को पति के दाहिने भाग की ओर बैठना चाहिए।
पत्नी के पति के दाएं और बायीं ओर बैठने संबंधी मान्यता के पीछे तर्क यह है कि जो कार्य सांसारिक होते हैं अथवा जो कर्म इह लौकिक होते हैं, उसमें पत्नी को पुरुष के बायीं ओर बैठना चाहिए। जैसे मांग में सिंदूर भरते समय, सेवा करते समय, सोने के समय आदि कार्यों में पत्नी वामांगी का कार्य करती है। यज्ञ, कन्या दान करते समय, विवाह आदि ये सभी शुभ कार्य पुरुष प्रधान होते हैं। इसलिए इन कार्यों में पत्नी को पुरुष के दायीं ओर बैठने का नियम शास्त्रों में बताया गया है।
भगवान शिव की अर्धनारीश्वर रूप में पूजा की जाती है क्योंकि मान्यता है कि भगवान शिव के बायीं हिस्से से स्त्री की उत्पत्ती हुई थी। भगवान का यह अवतार स्त्री और पुरुष की समानता का संदेश देता है। शिव ने यह रूप अपनी इच्छा से लिया था ताकि वह संसार को संदेश दे सकें कि बिना स्त्री के पुरुष अधूरा है और बिना पुरुष के स्त्री अधूरी है। ईश्वर की नजर में स्त्री और पुरुष दोनों एक समान हैं और दोनों का बराबर सम्मान है।
शिवपुराण में एक कथा मिलती है कि किस तरह भगवान शिव ने अपनी वामांगी को अधिकारी बताया। कथा के अनुसार, जब भगवान राम 14 वर्ष के लिए वनवास गए थे तब देवी सती ने उनकी परिक्षा लेने के लिए सीता का रूप धारण कर लिया था। लेकिन भगवान राम माता सती को पहचान लेते हैं और उनकी प्रार्थना करते हैं।
जब देवी सति वापस कैलाश आती हैं तब भगवान शिव नाराज हो जाते हैं। भगवान शिव माता सती से कहते हैं कि आपने मेरे आराध्य देव की परिक्षा लेकर गलत कार्य किया है। ऐसा करके आपने भगवान राम का अपमान किया है। इसलिए आपने वामांगी होने का अधिकार खो दिया है।
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]]>विवाह = वि + वाह, अत: इसका शाब्दिक अर्थ है – विशेष रूप से (उत्तरदायित्व का) वहन करना। पाणिग्रहण संस्कार (Vivah Sanskar) को सामान्य रूप से हिंदू विवाह के नाम से जाना जाता है। अन्य धर्मों में विवाह पति और पत्नी के बीच एक प्रकार का करार होता है जिसे कि विशेष परिस्थितियों में तोड़ा भी जा सकता है, परंतु हिंदू विवाह पति और पत्नी के बीच जन्म-जन्मांतरों का सम्बंध होता है जिसे किसी भी परिस्थिति में नहीं तोड़ा जा सकता। अग्नि के सात फेरे लेकर और ध्रुव तारा को साक्षी मान कर दो तन, मन तथा आत्मा एक पवित्र बंधन में बंध जाते हैं। हिंदू विवाह में पति और पत्नी के बीच शारीरिक संम्बंध से अधिक आत्मिक संम्बंध होता है और इस संम्बंध को अत्यंत पवित्र माना गया है।
विवाह एक ऐसा मौक़ा होता है जब दो इंसानो के साथ-साथ दो परिवारों का जीवन भी पूरी तरह बदल जाता है। हिंदू विवाह में विवाह की परंपराओं में सात फेरों का भी एक चलन है। जो सबसे मुख्य रस्म होती है। हिन्दू धर्म के अनुसार सात फेरों के बाद ही शादी की रस्म पूर्ण होती है। सात फेरों में दूल्हा व दुल्हन दोनों से सात वचन लिए जाते हैं। यह सात फेरे ही पति-पत्नी के रिश्ते को सात जन्मों तक बांधते हैं। हिंदू विवाह संस्कार के अंतर्गत वर-वधू अग्नि को साक्षी मानकर इसके चारों ओर घूमकर पति-पत्नी के रूप में एक साथ सुख से जीवन बिताने के लिए प्रण करते हैं और इसी प्रक्रिया में दोनों सात फेरे लेते हैं, जिसे सप्तपदी भी कहा जाता है। और यह सातों फेरे या पद सात वचन के साथ लिए जाते हैं। हर फेरे का एक वचन होता है, जिसे पति-पत्नी जीवनभर साथ निभाने का वादा करते हैं। यह सात फेरे ही हिन्दू विवाह की स्थिरता का मुख्य स्तंभ होते हैं।
विवाह के बाद कन्या वर के वाम अंग में बैठने से पूर्व उससे सात वचन लेती है। कन्या द्वारा वर से लिए जाने वाले सात वचन इस प्रकार है।
तीर्थव्रतोद्यापन यज्ञकर्म मया सहैव प्रियवयं कुर्या:,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति वाक्यं प्रथमं कुमारी !!
(यहाँ कन्या वर से कहती है कि यदि आप कभी तीर्थयात्रा को जाओ तो मुझे भी अपने संग लेकर जाना। कोई व्रत-उपवास अथवा अन्य धर्म कार्य आप करें तो आज की भांति ही मुझे अपने वाम भाग में अवश्य स्थान दें। यदि आप इसे स्वीकार करते हैं तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।)
किसी भी प्रकार के धार्मिक कृ्त्यों की पूर्णता हेतु पति के साथ पत्नि का होना अनिवार्य माना गया है। जिस धर्मानुष्ठान को पति-पत्नि मिल कर करते हैं, वही सुखद फलदायक होता है। पत्नि द्वारा इस वचन के माध्यम से धार्मिक कार्यों में पत्नि की सहभागिता, उसके महत्व को स्पष्ट किया गया है।
पुज्यौ यथा स्वौ पितरौ ममापि तथेशभक्तो निजकर्म कुर्या:,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं द्वितीयम !!
(कन्या वर से दूसरा वचन मांगती है कि जिस प्रकार आप अपने माता-पिता का सम्मान करते हैं, उसी प्रकार मेरे माता-पिता का भी सम्मान करें तथा कुटुम्ब की मर्यादा के अनुसार धर्मानुष्ठान करते हुए ईश्वर भक्त बने रहें तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।)
यहाँ इस वचन के द्वारा कन्या की दूरदृष्टि का आभास होता है। आज समय और लोगों की सोच कुछ इस प्रकार की हो चुकी है कि अमूमन देखने को मिलता है–गृहस्थ में किसी भी प्रकार के आपसी वाद-विवाद की स्थिति उत्पन होने पर पति अपनी पत्नि के परिवार से या तो सम्बंध कम कर देता है अथवा समाप्त कर देता है। उपरोक्त वचन को ध्यान में रखते हुए वर को अपने ससुराल पक्ष के साथ सदव्यवहार के लिए अवश्य विचार करना चाहिए।
जीवनम अवस्थात्रये मम पालनां कुर्यात,
वामांगंयामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं तृ्तीयं !!
(तीसरे वचन में कन्या कहती है कि आप मुझे ये वचन दें कि आप जीवन की तीनों अवस्थाओं (युवावस्था, प्रौढावस्था, वृद्धावस्था) में मेरा पालन करते रहेंगे, तो ही मैं आपके वामांग में आने को तैयार हूँ।)
कुटुम्बसंपालनसर्वकार्य कर्तु प्रतिज्ञां यदि कातं कुर्या:,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं चतुर्थं !!
(कन्या चौथा वचन ये माँगती है कि अब तक आप घर-परिवार की चिन्ता से पूर्णत: मुक्त थे। अब जबकि आप विवाह बंधन में बँधने जा रहे हैं तो भविष्य में परिवार की समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति का दायित्व आपके कंधों पर है। यदि आप इस भार को वहन करने की प्रतीज्ञा करें तो ही मैं आपके वामांग में आ सकती हूँ।)
इस वचन में कन्या वर को भविष्य में उसके उतरदायित्वों के प्रति ध्यान आकृ्ष्ट करती है। विवाह पश्चात कुटुम्ब पौषण हेतु पर्याप्त धन की आवश्यकता होती है। अब यदि पति पूरी तरह से धन के विषय में पिता पर ही आश्रित रहे तो ऐसी स्थिति में गृहस्थी भला कैसे चल पाएगी। इसलिए कन्या चाहती है कि पति पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर होकर आर्थिक रूप से परिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ति में सक्षम हो सके। इस वचन द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि पुत्र का विवाह तभी करना चाहिए जब वो अपने पैरों पर खडा हो, पर्याप्त मात्रा में धनार्जन करने लगे।
स्वसद्यकार्ये व्यवहारकर्मण्ये व्यये मामापि मन्त्रयेथा,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: पंचमत्र कन्या !!
(इस वचन में कन्या जो कहती है वो आज के परिपेक्ष में अत्यंत महत्व रखता है। वो कहती है कि अपने घर के कार्यों में, विवाहादि, लेन-देन अथवा अन्य किसी हेतु खर्च करते समय यदि आप मेरी भी मन्त्रणा लिया करें तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।)
यह वचन पूरी तरह से पत्नि के अधिकारों को रेखांकित करता है। बहुत से व्यक्ति किसी भी प्रकार के कार्य में पत्नी से सलाह करना आवश्यक नहीं समझते। अब यदि किसी भी कार्य को करने से पूर्व पत्नी से मंत्रणा कर ली जाए तो इससे पत्नी का सम्मान तो बढता ही है, साथ साथ अपने अधिकारों के प्रति संतुष्टि का भी आभास होता है।
न मेपमानमं सविधे सखीनां द्यूतं न वा दुर्व्यसनं भंजश्चेत,
वामाम्गमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं च षष्ठम !!
(कन्या कहती है कि यदि मैं अपनी सखियों अथवा अन्य स्त्रियों के बीच बैठी हूँ तब आप वहाँ सबके सम्मुख किसी भी कारण से मेरा अपमान नहीं करेंगे। यदि आप जुआ अथवा अन्य किसी भी प्रकार के दुर्व्यसन से अपने आप को दूर रखें तो ही मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।)
वर्तमान परिपेक्ष्य में इस वचन में गम्भीर अर्थ समाहित हैं। विवाह पश्चात कुछ पुरुषों का व्यवहार बदलने लगता है। वे जरा जरा सी बात पर सबके सामने पत्नी को डाँट-डपट देते हैं। ऐसे व्यवहार से पत्नी का मन कितना आहत होता होगा। यहाँ पत्नी चाहती है कि बेशक एकांत में पति उसे जैसा चाहे डांटे किन्तु सबके सामने उसके सम्मान की रक्षा की जाए, साथ ही वो किन्हीं दुर्व्यसनों में फँसकर अपने गृ्हस्थ जीवन को नष्ट न कर ले।
परस्त्रियं मातृसमां समीक्ष्य स्नेहं सदा चेन्मयि कान्त कुर्या,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: सप्तममत्र कन्या !!
(अन्तिम वचन के रूप में कन्या ये वर मांगती है कि आप पराई स्त्रियों को माता के समान समझेंगें और पति-पत्नि के आपसी प्रेम के मध्य अन्य किसी को भागीदार न बनाएंगें। यदि आप यह वचन मुझे दें तो ही मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।)
विवाह पश्चात यदि व्यक्ति किसी बाह्य स्त्री के आकर्षण में बँध पगभ्रष्ट हो जाए तो उसकी परिणिति क्या होती है। इसलिए इस वचन के माध्यम से कन्या अपने भविष्य को सुरक्षित रखने का प्रयास करती है।
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]]>भाई दूज का त्यौहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है| भाई दूज का त्यौहार भाई- बहन के रिश्ते पर आधारित त्यौहार है। भाई दूज दीपावली के दो दिन बाद आने वाला एक ऐसा त्यौहार है, जिसमें बहन अपने भाई के प्रति अगाध प्रेम और स्नेह को अभिव्यक्त करती है| इस दिन बहनें अपने भाईयों की खुशहाली के लिए कामना करती हैं| भाई दूज या भैया दूज त्यौहार को भाई टीका, यम द्वितीया, भ्रातृ द्वितीया आदि नामों से भी जाना जाता है।
दिनांक : 06 नवम्बर 2021
वार : शनिवार
द्वितीया तिथि प्रारम्भ : 5 नवम्बर 2021 को 11:14 पी एम बजे
द्वितीया तिथि समाप्त : 6 नवम्बर 2021 को 07:44 पी एम बजे
भाई दूज तिलक शुभ मुहूर्त :दोपहर 1:10 से 3:21 तक
अवधि :2 घंटे 11 मिनट
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान सूर्य की पत्नी छाया के कोख से यमराज और यमुना का जन्म हुआ था। दोनो भाई बहन में बहुत स्नेह था। यमुना स्नेहवश अनेको बार अपने भ्राता यमराज से निवेदन करती की वो उनके घर आकर भोजन ग्रहण करें| परंतु यमराज अपनी व्यस्ता के कारण यमुना की बात को टाल देते अथवा भूल जाते थे| यमुना के अनेकों बार बुलाने पर एक दिन यमराज यमुना के घर पहुंचे। इस मौके पर यमुना ने अपने भाई यमराज के लिए अनेको प्रकार के स्वादिष्ट पकवान बनाये और भ्राता यमराज को आदर और स्नेह से भोजन कराया और तिलक कर उनके खुशहाल जीवन की कामना की। बहन यमुना के प्रेम, स्नेह और समर्पण को देख यमराज बहुत प्रसन्न हुए और बहन यमुना से वरदान मांगने को कहा, तो यमुना ने कहा कि, आप हर वर्ष इसी दिन मेरे घर भोजन करने आया करो तथा इस दिन जो भी बहन अपने भाई का तिलक करे और स्नेह पूर्वक भोजन कराए उसे तुम्हारा भय नहीं रहे। बहन यमुना के वचन सुनकर यमराज अति प्रसन्न हुए और तथास्तु’ कहकर यमलोक चले गए। इसी दिन से भाई दूज पर्व की शुरुआत हुई। इस दिन यमुना नदी में स्नान का बड़ा महत्व है क्योंकि कहा जाता है कि भाई दूज के मौके पर जो भाई-बहन यमुना नदी में स्नान करते हैं उन्हें पुण्य की प्राप्ति होती है। Also read – Laabh Panchami 2021: लाभ पंचमी, जाने शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
उत्तर भारत में भाई दूज का त्यौहार बहुत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। पंजाब प्रांत में तो इस पर्व को रक्षाबंधन से ज़्यादा महत्व दिया जाता है। उत्तर भारत में इस त्यौहार के दिन बहनें भाई का तिलक कर उन्हें बताशे खिलाती हैं और सूखा नरियल( गोला) भी देती हैं। तिलक के बाद भाई भेंट स्वरूप बहन को उपहार देता है।
महाराष्ट्र और गोवा में भाई दूज को भाऊ बीज के नाम से जाना जाता है। मराठी में भाऊ का अर्थ है भाई। इस मौके पर बहनें तिलक लगाकर भाई के खुशहाल जीवन की कामना करती हैं।
पश्चिम बंगाल में भाई दूज को भाई फोटा पर्व के नाम से मनाया जाता है। इस दिन बहनें व्रत रखती हैं और भाई का तिलक करने के बाद भोजन करती हैं। तिलक के बाद भाई भेंट स्वरूप बहन को उपहार देता है।
बिहार में भाई दूज पर एक सबसे अनोखी परंपरा निभाई जाती है। इस दिन बहनें भाइयों को डांटती हैं और उन्हें भला बुरा कहती हैं और फिर उनसे माफी मांगती हैं। दरअसल यह परंपरा भाइयों द्वारा पहले की गई गलतियों के चलते निभाई जाती है। इस रस्म के बाद बहनें भाइयों को तिलक लगाकर उन्हें मिठाई खिलाती हैं।
नेपाल में भाई दूज पर्व भाई तिहार के नाम से जाना जाता है। तिहार का मतलब तिलक या टीका होता है। इसके अलावा इसे भाई टीका के नाम से भी मनाया जाता है। नेपाल में इस दिन बहनें भाइयों के माथे पर सात रंग से बना तिलक लगाती हैं और उनकी लंबी आयु व सुख, समृद्धि की कामना करती हैं।
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