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जैसा आप जानते हैं कि यदि व्यक्ति की कुंडली में राहु और केतु के मध्य अन्य सभी ग्रह आ जाते हैं तो उससे कालसर्प दोष का निर्माण होता है। ऐसी स्तिथि में अन्य सारे ग्रह इन दोनो के बीच में फस जाते हैं जिससे उन ग्रहों से आ रहे फल रुक जाते हैं और जातक के लिए समस्या उत्पन हो जाती है। इस दोष के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में काम में बाधा, नौकरी में रूकावट, शादी में देरी और धन संबंधित परेशानियाँ उत्पन्न होने लगती हैं।

अपने पहले लेख “कालसर्प दोष : क्या होता है और कैसे पहचाने” में हम ने कालसर्प दोष क्या होता है और इस के प्रकार एवं प्रभाव के बारे में विस्तार से बताया है ।

इस लेख में हम आप को कालसर्प दोष के लक्षण एवं सरल उपाय बताएँगे।

पूर्ण कालसर्प दोष : यदि जातक की जन्म कुंडली में समस्त सात ग्रह राहु और केतु के अक्ष में एक ही तरफ़ हो तो पूर्ण कालसर्प सर्प दोष बनता है।

आंशिक कालसर्प दोष : यदि जातक की जन्म कुंडली में एक भी ग्रह राहु और केतु के अक्ष से बाहर हो तो आंशिक कालसर्प सर्प दोष बनता है।

कालसर्प दोष के लक्षण 

कालसर्प दोष के अनेकों लक्षण होते हैं सामान्य प्राथमिक लक्षण इस प्रकार के होते है :

  • यदि कुंडली में कालसर्प योग होता है तो जातक कितनी भी मेहनत कर ले उसको मेहनत का पूरा फल नहीं मिलता है।
  • कारोबार में व्यवधान उत्पन्न होते हैंसौदे टूटने लगते हैं तथा कारोबार में हानि होती है। 
  • जिंदगी में कोई ना कोई काला धब्बा एक बार अवश्य लगता है।
  • विवाह में काफी दिक्कतें आती हैं।
  • जातक को संतान प्राप्ति की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है ।
  • वैवाहिक जीवन में तनाव उत्पन्न होता है और तलाक तक की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
  • जातक बीमारियों से घिरा रहता है।
  • यदि कुंडली में कालसर्प योग है तो पीड़ित व्यक्ति को मृत्यु होने के सपने अधिक आते हैं। 
  • सोते समय ऐसा अनुभव होता है जैसा कोई उसे मारने की कोशिश कर रहा हो। उसे सपने में नदीतालाब, समुद्र आदि दिखाई देते हैं।
  • पीड़ित व्यक्ति को रात को सोते समय सर्प के सपने आते हैं और अपने शरीर पर सांप लिपटे हुए दिखाई देते हैं।
  • पढाई – लिखाई में रुकावट होना या पढ़ाई में मन न लगना पढ़ाई बीच में ही छूट जाना। किसी तरह की कोई आर्थिक, सामाजिक, और शारीरिक बाधा उत्पन्न होने के कारण से पढाई – लिखाई में व्यवधान उत्पन्न हो जाता है।
  • घर के सदस्यों का स्वास्थ्य सही नहीं रहता है अस्पतालों के चक्कर काटते रहते हैं परंतु किसी भी बीमारी का पता नहीं चलता है। आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
  • हमेशा घर परिवार में क्लेश का माहौल बना हुआ रहता है।
  • घर के किसी भी सदस्य पर भूतप्रेत का साया या घर के सभी सदस्य चिड़चड़े स्वभाव के हो जाते हैं।
  • जातक की कुंडली में कालसर्प दोष के कारण जातक के मातापिता को कष्ट उत्पन्न होता है।

कालसर्प दोष निवारण 

कालसर्प दोष की पूजा नाशिक के त्रंबकेश्वर मंदिर या उज्जैन में करना सर्वोतम कहा गया है, इसके शुभ फल बहुत जल्दी प्राप्त होते हैं। परंतु अगर किसी कारण वश नाशिक अथवा उज्जैन जाना सम्भव ना हो तो भी आप ज्योतिष शास्त्र में बताये गए सरल उपाय करके कालसर्प दोष का निवारण कर सकते हैं।

  • शिवलिंग पर प्रतिदिन जल एवं बेलपत्र चढ़ाए।
  • प्रतिदिन महा मृत्युंजय मंत्र की कम से कम 1 माला का जाप करें।

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌॥

  • प्रतिदिन भगवान श्री कृष्ण का पूजन करें तथा ओम नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • राहु एवं केतु की पूजा करें तथा राहु एवं केतु के मंत्रों का प्रतिदिन 108 जाप करें।

राहु के मंत्र– ।।ऊँ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम:।।

केतु के मंत्र – ।। ऊँ स्त्रां स्त्रीं स्त्रों सः केतवे नमः।।

  • शिव जी का रुद्राभिषेक करें या करवायें।
  • नागपंचमी का व्रत करें और नाग देवता की पूजा अर्चना करें।
  • सोने चांदी के या तांबे के बने हुए नाग नागिन के जोड़े को तांबे के छोटे से लोटे में रखकर दूध से स्नान कराएं तत्पश्चात इन्हें भगवान शिव को अर्पित कर दें।
  • एक नारियल लीजिए और इसमें एक छोटा सा छेद कर इसमें सात प्रकार के अनाज डालकर किसी बहते हुए जल में प्रवाहित कीजिए।
  • एक सर्प आकारकी अंगूठी विधिवत पूजा कर दाएं हाथ की मध्यमा अंगुली में धारण कीजिए।
  • हनुमान चालीसा का प्रतिदिन 108 बार जप करें।
  • मंगलवार एवं शनिवार को सुंदरकाण्ड का पाठ श्रध्दापूर्वक करें।
  • मोर का पंख सदा अपने निवास स्थान पर रखें। 
  • श्रावण मास में 30 दिनों तक भगवान महादेव का दूध-दही से अभिषेक करें।

 उपरोक्त कालसर्प दोष के उपाय सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ करके आप कालसर्प दोष का असर कम कर सकते हैं या पूर्ण रूप से ख़त्म भी कर सकते हैं।

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