if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) {
/**
* Gets views count.
*
* @param int $id The Post ID.
* @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7])
* @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999)
* @return string
*/
function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) {
$attr = array(
'id' => $id,
'range' => $range,
'number_format' => $number_format,
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$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) );
$views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $views ) {
$views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format );
wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' );
}
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}
}
if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) {
/**
* Do Query
*
* @param $instance
* @return array
*/
function jnews_view_counter_query( $instance ) {
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) );
$query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $query ) {
$query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance );
wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' );
}
return $query;
}
}
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]]>इस दिन कई लोग व्रत रखते हैं। भजन-कीर्तन करते हैं। विधिपूर्वक कृष्ण भगवान की पूजा अर्चना की जाती है। कृष्ण भगवान के जन्म की कथा सुनी जाती है। लोग अपने घरों को सजाते हैं। इस दिन कृष्ण जी के मंदिरों में एक अलग ही रौनक देखने को मिलती है। कई जगह कृष्ण जी की लीलाओं का प्रदर्शन भी किया जाता है। क्योंकि भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था इसलिए रात में ही भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप को नहलाया जाता है और उन्हें नए वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। इस दिन बाल गोपाल को पालने में झुलाने की भी परंपरा है।
भगवान श्री कृष्ण जी के जन्मोत्सव को जन्माष्टमी के रूप मे मनाया जाता है | इस वर्ष ये त्यौहार 30 अगस्त 2021 को मनाया जाएगा और दही-हांडी का त्यौहार 31 अगस्त 2021 को मनाया जाएगा | ज्योतिष शास्त्र की गणना के अनुसार, इस वर्ष 101 साल बाद जयंती योग का यह अत्यंत दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस बार इसी जयंती योग में जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जायेगा। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, श्रीकृष्ण जी का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, दिन सोमवार, रोहिणी नक्षत्र व वृष राशि में मध्य रात्रि को हुआ था। ज्योतिष शास्त्र की गणना के अनुसार, इस बार भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 30 अगस्त को दिन सोमवार, भादो माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। चंद्रमा वर्ष राशि में रहेंगे। रोहिणी नक्षत्र का प्रवेश भी 30 अगस्त को सुबह 6 बजकर 39 मिनट पर हो जाएगा। अष्टमी तिथि भी सोमवार की मध्यरात्रि 31 अगस्त, 01 बजकर 59 मिनट तक रहेगी। तत्पश्चात बाद नवमी लग जाएगी। इस प्रकार से देखें तो अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और सोमवार दिन तीनों का एक साथ मिलना दुर्लभ है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 101 साल बाद या दुर्लभ संयोग बना है। पंचांग के मुताबिक़, अष्टमी तिथि 29 अगस्त को रात्रि 11 बजकर 25 मिनट पर लग जाएगी।
भगवान श्रीकृष्ण का 5248वाँ जन्मोत्सव
निशीथ पूजा – 11:59 पी एम से 12:44 ए एम, अगस्त 31( 45 मिनट )
पारण -09:44 ए एम, अगस्त 31 के बाद
अष्टमी तिथि प्रारम्भ -अगस्त 29, 2021 को 11:25 पी एम बजे अष्टमी तिथि समाप्त -अगस्त 31, 2021 को 01:59 ए एम बजे
जन्माष्टमी पर्व के दिन प्रातः काल उठकर नित्य कर्मों से निर्वत होकर घर पर ही स्नान आदि से निर्वत होकर जन्माष्टमी व्रत का संकल्प लिया जाता है | जन्माष्टमी पर पूरा दिन भक्त उपवास रखते है फिर शाम को फिर से सन्नान आदि से निर्वत होकर मंदिर को सजाते है और मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म समय के उपरांत दक्षिणवर्ती शंख से स्नान कराके और शृंगार करके उनको झूले पे विठाते है और शासत्रानुसार विधि पूर्वक पूजा करते है | मान्यता है कि जो कोई भी श्रद्धा से भगवान वासुदेव जी की पूजा करता है उस के सारे कष्ट मिट जाते हैं और उस सारी मनोकामना पूर्ण होती है।
इस दिन धनिया पंजीरी और माखन मिश्री का भोग लगाया जाता है | मथुरा मे बाँके बिहारी जी के मंदिर मे 56 भोग को चड़ाया जाता है और उसे बाद मै भक्तों मे प्रसाद के रूप में बाँट दिया जाता है |

जन्माष्टमी के अगले दिन दही हांडी का त्यौहार मनाया जाता है ये त्यौहार महाराष्ट्र और गुजरात मे अधिक प्रचलित है वेसे तो हम सभी जानते है की भगवान श्री कृष्ण को माखन कितना अधिक पसंद था वो गोपियों की मटकी से माखन चुरा कर खाया करते थे | श्री कृष्ण जी की इसी लीला को को भक्तों के मन मे जीवंत करने के लिए दही- हांडी का त्यौहार मनाया जाता है |
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]]>जन्माष्टमी 2020
भगवान श्री कृष्ण जी के जन्मोत्सव को जन्माष्टमी के रूप मे मनाया जाता है | इस वर्ष ये त्यौहार 11 अगस्त 2020 को मनाया जाएगा और दही-हांडी का त्यौहार 12 अगस्त 2020 को मनाया जाएगा |
जन्माष्टमी का मुहूर्त
निशीथ पूजा – 00:05 से 00:45 ( 45 मिनट )
पारण -11:15 ( 12 अगस्त ) के बाद
अष्टमी तिथि आरंभ -09:06 ( 11 अगस्त )
अष्टमी तिथि समाप्त -11:00 (12 अगस्त )
रोहिणी समाप्त –रोहिणी नक्षत्र रहित जन्माष्टमी
जन्माष्टमी पूजा विधि
जन्माष्टमी पर्व के दिन प्रातः काल उठकर नित्य कर्मों से निर्वत होकर घर पर ही स्नान आदि से निर्वत होकर जन्माष्टमी व्रत का संकल्प लिया जाता है | जन्माष्टमी पर पूरा दिन भक्त उपवास रखते है फिर शाम को फिर से सन्नान आदि से निर्वत होकर मंदिर को सजाते है और मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म समय के उपरांत दक्षिणवर्ती शंख से स्नान कराके और शृंगार करके उनको झूले पे विठाते है और शासत्रानुसार विधि पूर्वक पूजा करते है | मान्यता है कि जो कोई भी श्रद्धा से भगवान वासुदेव जी की पूजा करता है उस के सारे कष्ट मिट जाते हैं और उस सारी मनोकामना पूर्ण होती है।
भोग / प्रसाद
इस दिन धनिया पंजीरी और माखन मिश्री का भोग लगाया जाता है | मथुरा मे बाँके बिहारी जी के मंदिर मे 56 भोग को चड़ाया जाता है और उसे बाद मै भक्तों मे प्रसाद के रूप में बाँट दिया जाता है |
दही-हांडी

जन्माष्टमी के अगले दिन दही हांडी का त्यौहार मनाया जाता है ये त्यौहार महाराष्ट्र और गुजरात मे अधिक प्रचलित है वेसे तो हम सभी जानते है की भगवान श्री कृष्ण को माखन कितना अधिक पसंद था वो गोपियों की मटकी से माखन चुरा कर खाया करते थे | श्री कृष्ण जी की इसी लीला को को भक्तों के मन मे जीवंत करने के लिए दही- हांडी का त्यौहार मनाया जाता है |
वैसे तो जन्माष्टमी के पूरे दिन ही सर्वार्थ सिद्धि योग है जन्माष्टमी पर राहुकाल दोपहर 12:27 से 02:07 बजे तक रहेगा | इस बार जन्माष्टमी पर कर्तिक नक्षत्र तो रहेगा पर रोहिणी नक्षत्र नहीं होगा रोहिणी नक्षत्र 13 अगस्त की सुबह 03 :05 से 05 :45 तक रहेगा |
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