if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) {
/**
* Gets views count.
*
* @param int $id The Post ID.
* @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7])
* @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999)
* @return string
*/
function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) {
$attr = array(
'id' => $id,
'range' => $range,
'number_format' => $number_format,
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$views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $views ) {
$views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format );
wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' );
}
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}
}
if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) {
/**
* Do Query
*
* @param $instance
* @return array
*/
function jnews_view_counter_query( $instance ) {
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) );
$query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $query ) {
$query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance );
wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' );
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}
}
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]]>ये भी पढ़ें : नाग पंचमी – जानिये महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा की सही विधि
स्कंद पुराण के अनुसार यहाँ है भगवान शिव की आरामगाह
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]]>हिंदु धर्म में नाग को देवता का रूप माना जाता है और उनकी पूजा का विधान है। दरअसल, नाग को आदि देव भगवान शिव शंकर के अंश के रूप में , शिव जी के आभूषण के रूप में और सृष्टि के पालनकर्ता श्री हरि विष्णु की शैय्या के रूप में माना जाता है। इसके अलावा नागों का लोगों के जीवन से भी नाता है। सावन के महीने में हमेशा जमकर बारिश होती है और इस वजह से नाग जमीन से निकलकर बाहर आ जाते हैं, माना जाता है कि इस समय नाग देवता पूजा की जाए तो वो किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। यही नहीं कुंडली दोष दूर करने के लिए भी नाग पंचमी का अत्यधिक महत्व है.
अगर कुंडली में राहु-केतु की स्थिति ठीक ना हो तो इस दिन विशेष पूजा का लाभ पाया जा सकता है। जिनकी कुंडली में विषकन्या या अश्वगंधा योग हो, ऐसे लोगों को भी इस दिन पूजा-उपासना करनी चाहिए. जिनको सांप के सपने आते हों या सर्प से डर लगता हो तो ऐसे लोगों को इस दिन नागों की पूजा विशेष रूप से करना चाहिए।
नागपंचमी के दिन नक्षत्र हस्त 07:59 AM के बाद चित्रा लगेगा और साध्य योग 01:46 PM तक रहेगा
पचंमी तिथि का आरंभ- 12 अगस्त-15.24 से
पचंमी तिथि का समापन- 13 अगस्त 13.42 तक
पूजा का शुभ मुहूर्त- 13 अगस्त 05.24 AM से 08.31 AM तक।
अभिजीत मुहूर्त – 12:05 PM से 12:57 PM
अमृत काल – 12:49 AM – 02:20 AM
ब्रह्म मुहूर्त – 04:30 AM से 05:18AM
विजय मुहूर्त- 02:13 PM से 03:06 PM
गोधूलि बेला- 06:22 PM से 06:46 PM
निशिता काल- 11:41 PM से 12:25 AM, 14 अगस्त
रवि योग – 08:00 AM से 05:31 AM 14 अगस्त
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शंखपाल धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा।।
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।
सायंकाले पठेन्नित्यं प्रात:काले विशेषत:।।
तस्मै विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्।।
सर्वे नागा: प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथिवीतले।।
ये च हेलिमरीचिस्था येन्तरे दिवि संस्थिता।
ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिन:।
ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नम:।।
ऊँ नागकुलाय विद्महे विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्प: प्रचोदयात्।
ब्रह्मलोकुषु ये सर्पा: शेषनाग पुरोगमा:।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
इन्द्रलोकेषु ये सर्पा: वासुकि प्रमुखादय:।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
कद्रवेयाश्च ये सर्पा: मातृभक्ति परायणा।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
इंद्रलोकेषु ये सर्पा: तक्षका प्रमुखादय:।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
सत्यलोकेषु ये सर्पा: वासुकिना च रक्षिता।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
मलये चैव ये सर्पा: कर्कोटक प्रमुखादय:।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
पृथिव्यांचैव ये सर्पा: ये साकेत वासिता।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
सर्वग्रामेषु ये सर्पा: वसंतिषु संच्छिता।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
ग्रामे वा यदिवारण्ये ये सर्पा प्रचरन्ति च।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
समुद्रतीरे ये सर्पा ये सर्पा जलवासिन:।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
रसातलेषु या सर्पा: अनन्तादि महाबला:।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा।।
नागदेवता की आरती करें और प्रसाद वीतरन करें । इस प्रकार पूजा करने से नाग देवता प्रसन्न होते हैं और हर मनोकामना पूरी करते हैं।
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]]>सर्प दूध को पचा नहीं सकते तो उन्हें दूध नहीं पिलाना चाहिए
नाग पंचमी का महत्व
नाग पंचमी की पूजा का संबंध धन से जुड़ा हुआ है | शास्त्रों के अनुसार नाग देव गुप्त धन की रक्षा करते हैं | इस कारण ही नागपंचमी के दिन नागों की पूजा करने से धन सम्पदा का भी लाभ होता है |
इस दिन जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प योग होता है उसके अचूक उपाय करके मुक्ति पायी जाती है | और साथ ही साथ इस पूजा से पित्र दोष, शनि दोष , राहु दोष आदि से मुक्ति मिलती है |
नाग पंचमी का शुभ मुहूर्त
पंचमी तिथि प्रारंभ – 14:34 ( 24 जुलाई 2020)
पंचमी तिथि समाप्त – 12:02 ( 25 जुलाई 2020)
नाग पंचमी पूजा मुहूर्त : 05:39 AM to 08:22 AM ( 25 जुलाई 2020)
अवधि : 2h 44 min
पूजा विधी
नाग पंचमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद पूजा के स्थान पर गोबर से नाग बनायें
मंदिर में दूध, दही, घी, शहद और चीनी का पंचामृत बना कर नाग-नागिन के जोडे को स्नान करायें
लकड़ी के पाटे (पटरे) पर साफ लाल या पीला कपड़ा बिछाकर उस पर नाग-नागिन के जोडे को विराजें |
जल, पुष्प , लाल सिंदूर, चंदन, धूप-दीप और फल अर्पण करें |
इसके उपरांत प्रसाद स्वरूप सिवई की खीर का भोग लगाएँ और आरती करें |
नाग पंचमी पूजा मन्त्र :
सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले।
ये च हेलिमरीचिस्था येऽन्तरे दिवि संस्थिताः॥
ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिनः।
ये च वापीतडगेषु तेषु सर्वेषु वै नमः॥
मन्त्र अर्थ – इस संसार में, आकाश, स्वर्ग, झीलें, कुएँ, तालाब तथा सूर्य-किरणों में निवास करने वाले सर्प, हमें आशीर्वाद दें तथा हम सभी आपको बारम्बार नमन करते हैं।
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शङ्ख पालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।
सायङ्काले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः।
तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्॥
मन्त्र अर्थ – नौ नाग देवताओं के नाम अनन्त, वासुकी, शेष, पद्मनाभ, कम्बल, शङ्खपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक तथा कालिया हैं। यदि प्रतिदिन प्रातःकाल नियमित रूप से इनका जप किया जाता है, तो नाग देवता आपको समस्त पापों से सुरक्षित रखेंगे तथा आपको जीवन में विजयी बनायें।
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