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/**
* Gets views count.
*
* @param int $id The Post ID.
* @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7])
* @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999)
* @return string
*/
function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) {
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/**
* Do Query
*
* @param $instance
* @return array
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]]>श्राद्ध कैसे शुरू हुआ?
महाभारत में गंगा पुत्र भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को श्राद्ध के विषय में खास बातें बताई थी की श्राद्ध की परंपरा कैसे शुरू हुई और फिर कैसे जनमानस तक पहुंची । महाभारत के अनुसार सबसे पहले श्राद्ध का उपदेश महातपस्वी अत्रि मुनि ने महर्षि निमि को दिया था और निमि ने ही श्राद्ध का प्रारम्भ किया था , उसके बाद अन्य महर्षि भी श्राद्ध करने लगे और तत्पशचात धीरे-धीरे चारों वर्णो के लोग श्राद्ध में पितरों को अन्न प्रदान करने लगे।
महाभारत में कर्ण अपनी मृत्यु के बाद स्वर्ग पहुंचे तो उन्हें खाने में सोना, चाँदी और हीरे जवाहरात भोजन के रूप में परोसे गये। इस पर, कर्ण ने स्वर्ग के स्वामी इंद्र से इस का कारण पूछा। इंद्र ने कर्ण को बताया कि पूरे जीवन भर उन्होंने सोने, चाँदी और हीरे-जवाहरात का ही दान किया है, परंतु कभी भी अपने पितरों के नाम से भोजन का दान नहीं किया। कर्ण ने इंद्र को इस का कारण बताया और कहा “हे देवराज! मुझे अपने पूर्वजों के बारे में कोई ज्ञान नहीं था, इसलिए मैं ऐसा करने में असमर्थ रहा।“
तब, इंद्र ने कर्ण को पृथ्वी पर वापस जाने के सलाह दी, जहां उन्होंने इन्हीं सोलह दिनों के दौरान भोजन दान किया तथा अपने पूर्वजों का तर्पण किया। और इस प्रकार दानवीर कर्ण पित्र ऋण से मुक्त हुए।
श्राद्ध पक्ष के नियम :
श्राद्ध पक्ष की महत्वपूर्ण तिथियाँ
हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार जिस तिथि को जिसके पूर्वज गमन करते हैं, उसी तिथि को उनका श्राद्ध करना चाहिए। परंतु निम्नलिखित तिथियाँ भी निर्धारित है जिस से अगर सही तिथि नहीं मालूम हो तो भी आप इन तिथियों को श्राद्ध कर सकते हैं:
श्राद्ध कर्म करने की विधि
प्रातः काल जल्दी उठकर नित्य कर्म करने के उपरांत स्नानादि के पश्चात गायत्री मंत्र का जाप करते हुए सूर्य देव को जल अर्पित करें। उसके बाद पितरों को याद करते हुए उन को जो भोजन पसंद था वो भोजन बनाएँ। बनाये गये भोजन से गाय, कुत्ते, देव/पथिक , कौए और चिंटियो के लिए भोजन का अंश निकल कर उन्हें प्रदान करें। इसके पश्चात अपने पितरों का तर्पण करते हुए अपने परिवार के मंगल की कामना करनी चाहिए तथा पितरों का आशीर्वाद लेना चाहिए। अपने द्वारा कोई भूल हुई है तो उसकी क्षमा मांगनी चाहिए। योग्य ब्राह्मण या किसी गरीब जरूरतमंद को भोजन करवाना चाहिए तथा अपने सामर्थ्य के अनुसार दान-दक्षिणा भी देनी चाहिए।
श्राद्ध पक्ष 2020
इस वर्ष श्राद्ध पक्ष 1 सितंबर से शुरू होगा और सर्वपितृ अमावस्या 17 सितंबर को हैं।
दिनांक वार श्राद्ध मास
1 सितंबर मंगलवार पूर्णिमा श्राद्ध भाद्रपद
2 सितंबर बुधवार प्रतिपदा श्राद्ध अश्विन
3 सितंबर गुरुवार द्वितीया श्राद्ध अश्विन
5 सितंबर शनिवार तृतीया श्राद्ध अश्विन
6 सितंबर रविवार चतुर्थी श्राद्ध अश्विन
7 सितंबर सोमवार महाभरणी/ पंचमी श्राद्ध अश्विन
8 सितंबर मंगलवार षष्ठी श्राद्ध अश्विन
9 सितंबर बुधवार सप्तमी श्राद्ध अश्विन
10 सितंबर गुरुवार अष्टमी श्राद्ध अश्विन
11 सितंबर शुक्रवार नवमी श्राद्ध अश्विन
12 सितंबर शनिवार दशमी श्राद्ध अश्विन
13 सितंबर रविवार एकादशी श्राद्ध अश्विन
14 सितंबर सोमवार द्धादशी श्राद्ध अश्विन
15 सितंबर मंगलवार त्रयोदशी श्राद्ध अश्विन
16 सितंबर बुधवार चतुर्दशी श्राद्ध अश्विन
17 सितंबर गुरुवार सर्वपितृ अमावस्या अश्विन
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