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माँ आदिशक्ति सम्पूर्ण जगत का कल्याण करती है | माँ भवानी के रूप इतने कल्याणकारी है की इनके दर्शन एवं पूजन से भक्तों के संकट नष्ट हो जाते है और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है | माँ आदिशक्ति के नौ स्वरूप है और वो अपने चौथे स्वरूप मे कूष्मांडा के नाम से जानी जाती है | कूष्मांडा एक संस्कृत शब्द है और इस का शाब्दिक अर्थ (कुसुम का अर्थ है फूलों के समान हसीं और आँड का अर्थ है ब्रह्मांड ) वो देवी जिन्होंने अपनी मुस्कान से सम्पूर्ण ब्रह्मांड को अपने गर्भ से उत्पन्न किया है वही माँ कूष्मांडा है | माँ कूष्मांडा की आठ भुजाये है | जिनमे कमण्डल ,धनुष ,कमल का फूल ,अमृत से भरा कलश चक्र गदा वा कमल पुष्प की माल को अपने हाथों मे धारण किए हुए है |

माँ कूष्मांडा की कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब सृष्टि कि रचना नहीं हुई थी और हर जग अंधकार का राज था तब देवी कूष्माण्डा ने अपनी मुस्कुराहट से इस सृष्टि की उत्पति की। तब से देवी कूष्माण्डा का निवास सूर्यमंडल के मध्य में है और यह सूर्य मंडल को अपने संकेत से नियंत्रित करती हैं।

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नवरात्रि 2022 के चौथे दिन के शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त- 04:37 ए एम से 05:25 ए एम.
अभिजित मुहूर्त- 11:47 ए एम से 12:35 पी एम.
विजय मुहूर्त-02:11 पी एम से 02:58 पी एम.
गोधूलि मुहूर्त- 05:58 पी एम से 06:22 पी एम.
अमृत काल- 08:39 पी एम से 10:13 पी एम.
निशिता मुहूर्त-11:47 पी एम से 12:36 ए एम, 30 सितम्बर.
सर्वार्थ सिद्धि योग- 05:13 ए एम, सितम्बर 30 से 06:13 ए एम,  30 सितम्बर.
रवि योग- 06:13 ए एम से 05:13 ए एम,  30 सितम्बर.

माँ कूष्मांडा की पूजा का विधान

माँ कूष्मांडा को लाल रंग अति प्रिय है | माँ कुष्मांडा श्री दुर्गा का चौथा स्वरूप है | इनकी पूजा नवरात्र के चौथे दिन चतुर्थी को बड़े विधि विधान से करनी चाहिए | अतः नवरात्र के चौथे दिन ब्रह्म मुहुर्त मे उठ कर नियमित कार्यों से निर्वित होकर माँ की निमित विविध प्रकार की पूजन की सामग्री को संग्रहीत करके पूजन करना चाहिए और दुर्गसप्तशती का पाठ करें या ब्राह्मण से करवाएँ। माँ को लाल पुष्प रोली ,अक्षत और लाल महावर और लाल चूड़ी अवश्य चढ़ाये और मालपुए से माँ कुष्मांडा को भोग लगाना चाहिए |

माँ कूष्मांडा के मंत्र

ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥

प्रार्थना मंत्र

सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

स्तुति

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

ध्यान मंत्र

वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्। सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्विनीम्॥ भास्वर भानु निभाम् अनाहत स्थिताम् चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्। कमण्डलु, चाप, बाण, पद्म, सुधाकलश, चक्र, गदा, जपवटीधराम्॥ पटाम्बर परिधानां कमनीयां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्। मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल, मण्डिताम्॥ प्रफुल्ल वदनांचारू चिबुकां कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम्। कोमलाङ्गी स्मेरमुखी श्रीकंटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

स्त्रोत

दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दरिद्रादि विनाशनीम्। जयंदा धनदा कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥ जगतमाता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्। चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥ त्रैलोक्यसुन्दरी त्वंहि दुःख शोक निवारिणीम्। परमानन्दमयी, कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥

कवच मंत्र

हंसरै में शिर पातु कूष्माण्डे भवनाशिनीम्। हसलकरीं नेत्रेच, हसरौश्च ललाटकम्॥ कौमारी पातु सर्वगात्रे, वाराही उत्तरे तथा, पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम। दिग्विदिक्षु सर्वत्रेव कूं बीजम् सर्वदावतु॥

माँ कूष्मांडा की आरती

चौथा जब नवरात्र हो, कूष्मांडा को ध्याते। जिसने रचा ब्रह्माण्ड यह, पूजन है आध्शक्ति कहते जिन्हें, अष्टभुजी है रूप। इस शक्ति के तेज से कहीं छाव कही धुप॥ कुम्हड़े की बलि करती है तांत्रिक से स्वीकार। पेठे से भी रीज्ती सात्विक करे विचार॥ क्रोधित जब हो जाए यह उल्टा करे व्यवहार। उसको रखती दूर माँ, पीड़ा देती अपार॥ सूर्य चन्द्र की रौशनी यह जग में फैलाए। शरणागत की मैं आया तू ही राह दिखाए॥ नवरात्रों की माँ कृपा करदो माँ। नवरात्रों की माँ कृपा करदो माँ॥ जय माँ कुष्मांडा मैया।

ज्योतिषीय  पहलू

ज्योतिष के अनुसार माँ कूष्मांडा सूर्य मंडल में विराजित है और सूर्य का मार्गदर्शन करती है अतः इनकी उपासना करने से सूर्य के कुप्रभावों से बचा जा सकता है। माँ कभी अपने भक्तों को निराश नहीं करती।

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