if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) {
/**
* Gets views count.
*
* @param int $id The Post ID.
* @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7])
* @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999)
* @return string
*/
function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) {
$attr = array(
'id' => $id,
'range' => $range,
'number_format' => $number_format,
);
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) );
$views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $views ) {
$views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format );
wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' );
}
return $views;
}
}
if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) {
/**
* Do Query
*
* @param $instance
* @return array
*/
function jnews_view_counter_query( $instance ) {
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) );
$query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $query ) {
$query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance );
wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' );
}
return $query;
}
}
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]]>माँ आदिशक्ति के नौ स्वरूप है और वो अपने पहले स्वरूप में शैलपुत्री के नाम से जानी जाती हैं। शैलपुत्री एक संस्कृत शब्द है और इस का शाब्दिक अर्थ “पर्वत की बेटी “ होता है। नवरात्र के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है।
पौराणिक कथा के अनुसार माँ शैलपुत्री अपने पूर्वजन्म में राजा दक्ष की पुत्री और भगवान शिव की अर्धांगनी ( सती) थी। एक बार राजा दक्ष में महायज्ञ का आयोजन किया और इसमें सभी देवताओं को निमंत्रण दिया, पर भोलेनाथ को इस का आमंत्रित नहीं किया। देवी सती अपने पिता के यहाँ महायज्ञ में जाने के लिए अति व्याकुल हो रही थी और उन्होंने अपनी यह इच्छा भगवान शंकर के समक्ष रखी। भोलेनाथ ने उनसे कहा “हे देवी, आप के पिता ने सारे देवताओं को निमंत्रित किया है लेकिन हमें नहीं, ऐसे में वहाँ जाना उचित शिष्टाचार नहीं है।” ये जानने के बाद भी देवी सती भगवान के आग्रह करती रही, देवी की प्रबल इच्छा को देखते हुए भगवान शंकर ने उन्हें जाने की अनुमति दे दी।
जब देवी सती अपने पिता के घर पहुँची हो उन्होंने भगवान शंकर के प्रति तिरस्कार का भाव देखा और देवी के पिता राजा दक्ष ने भी स्वयं अपने दामाद भोलेनाथ के प्रति अपमानजनक शब्द कहे। यह सब देख- सुन देवी सती को बहुत पीड़ा हुई और वो अपने प्राणनाथ का अपमान सह ना सकी और योगाग्नि द्वारा स्वयं को जलाकर भस्म कर लिया। इस कठोर दुःख से व्यग्र हो कर भगवान ने रुद्र रूप धारण किया और दक्ष के उस यज्ञ को विध्वंस कर दिया। अगले जन्म में यही देवी सती ने शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया और शैलपुत्री कहलायी। हिमालय के राजा का नाम हिमावत था इसलिए उन को हेमवती के नाम से भी जाना जाता है। पूर्वजन्म के भाँति इस जन्म में भी देवी ने शिव जी की कठोर तपस्या की और उन की अर्द्धागिनी बनी।
माँ शैलपुत्री श्री दुर्गा जी का प्रथम रूप हैं। इनकी पूजा बड़े विधि-विधान से करनी चाहिये, अतः नवरात्र के प्रथम दिन ब्रह्म मुहुर्त में उठ कर, नियमित कार्यों के निवृत्त होकर, माँ के निमित्त विविध प्रकार की विहित पूजन की सामग्री को संग्रहित करके षोड़षोपचार से पूजन करना चाहिये और दुर्गसप्तशती का पाठ करें या ब्राह्मण से करवाएँ।
माँ शैलपुत्री के अनेक मंत्र है, अतः ज़रूरतों के अनुसार उपयुक्त मंत्र का उच्चारण व जाप किए जाने का विधान है। यहाँ हम माँ के कुछ उपयोगी मंत्र बता रहे हैं जिन के जप से माँ का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
ऐश्वर्यं यत्प्रसादेन सौभाग्यारोग्यसम्पदः।
शत्रुहानि परो मोक्षः स्तूयते सा न किं जनैः॥
न तेषां जायते किंचिदशुभं रणसंकटे।
नापदं तस्य पश्यामि शोकदुःखभयं न हि॥
स्तुति: या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
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शैलपुत्री मां बैल असवार। करें देवता जय जयकार॥
शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी॥
पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सुमिरे सो सुख पावे॥
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू॥
सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी॥
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिटा दो॥
घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के॥
श्रद्धा भाव से मंत्र जपायें। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं॥
जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे॥
मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो॥
ज्योतिष के अनुसार माँ शैलपुत्री चंद्रमा को दर्शाती हैं, इसलिए उनकी विधिवत उपासना करने से चंद्रमा के द्वारा पड़ने वाले बुरे प्रभाव भी निष्क्रिय हो जाते हैं।
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