if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) {
/**
* Gets views count.
*
* @param int $id The Post ID.
* @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7])
* @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999)
* @return string
*/
function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) {
$attr = array(
'id' => $id,
'range' => $range,
'number_format' => $number_format,
);
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) );
$views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $views ) {
$views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format );
wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' );
}
return $views;
}
}
if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) {
/**
* Do Query
*
* @param $instance
* @return array
*/
function jnews_view_counter_query( $instance ) {
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) );
$query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $query ) {
$query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance );
wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' );
}
return $query;
}
}
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]]>शास्त्रों और बुधिजीवो के अनुसार भागवत में अपार ज्ञान भरा हुआ है। भागवत को धर्म-अध्यात्म से परिपूर्ण अनमोल ग्रंथ कहा जाता है। भागवत में सभी शास्त्रों का सार समाया हुआ है। भागवत का नियमित पाठ करने से मनुष्य को सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान करने का ज्ञान प्राप्त होता है और उसका आत्मविश्वास बढ़ने के साथ नकारात्मकता दूर होती है।
जैसा हम जानते है की भागवत का नियमित पाठ अतिफल दायी होता है परंतु वर्तमान में समय के अभाव के कारण सम्पूर्ण भागवत का नियमित पाठ सामान्य मनुष्य के लिए संभव नहीं हो पाता। ऐसे में विद्वानों के अनुसार इस का उपाय भी भागवत पुराण में उपलब्ध है।
श्री कृष्ण की लीलाओं को समर्पित भागवत पुराण एक श्लोक ऐसा भी है जिस के नियमित विधि-विधान से पाठ करने से सम्पूर्ण भागवत पाठ का फल प्राप्त होता है। इस मंत्र को एक श्लोकी भागवत भी कहते हैं।
।।एक श्लोकी भागवत।।
आदौ देवकीदेवी गर्भजननं गोपीगृहे वर्द्धनम् ।
मायापूतन जीविताप हरणम् गोवर्धनोद्धरणम् ।।
कंसच्छेदन कौरवादि हननं कुंतीतनुजावनम् ।
एतद् भागवतम् पुराणकथनम् श्रीकृष्णलीलामृतम् ।।
भावार्थ: मथुरा में राजा कंस के बंदीगृह में भगवान विष्णु का श्री कृष्ण के रुप में माता देवकी के गर्भ से अवतार हुआ। देव लीला से पिता वासुदेव ने उन्हें गोकुल पहुंचाया। कंस ने मृत्यु भय से श्री कृष्ण को मारने के लिए पूतना राक्षसी को भेजा। भगवान श्री कृष्ण ने उसका अंत कर दिया। यहीं भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्रदेव के अहंकार को चूर कर गोवर्धन पर्वत को अपनी ऊंगली पर उठाकर गोकुल वासियों की रक्षा की। बाद में मथुरा आकर भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी कंस का वध कर दिया। कुरुक्षेत्र के युद्ध में कौरव वंश का नाश हुआ। पाण्डवों की रक्षा की। भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद्भागवत गीता के माध्यम से कर्म का संदेश जगत को दिया। अंत में प्रभास क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण का लीला संवरण हुआ।
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निर्जला एकादशी के विशेष दिन एक श्लोकि भागवत मंत्र का विधि-विधान से पाठ करने से साधक को मनोवांछित फल के साथ ही धन – संपदा की प्राप्ति होती है।
अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्ण:दामोदरं वासुदेवं हरे।
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकी नायकं रामचन्द्रं भजे।।
।।ॐ नमों नारायण।।
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]]>हिन्दू धर्म में रामायण का पाठ करने के अनेकों लाभ बताए गए हैं। मान्यता है की जो भी मनुष्य रामायण का पाठ करता है वो जीवन्नोंपरंत धर्म के मार्ग पर चलता है और उस के जीवन में सकारात्मकता का प्रवेश होता है तथा नकारात्मकता नष्ट हो जाती है, आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है और हरप्रकार के संकट दूर होते हैं।
रामायण सबसे पहले महर्षि वाल्मीकि द्वारा संस्कृत भाषा में लिखी गई जो “वाल्मीकि रामायण” के नाम से प्रसिद्ध है । उस के पश्चात तुलसीदासजी ने रामायण को अवधी में लिखा जो रामचरित मानस के नाम से प्रसिद्ध है । हालांकि रामचरितमानस की भाषा के बारे में विद्धान एकमत नहीं हैं, कोई इसे अवधि मानता है तो कोई भोजपुरी। तत् पश्चात अनेक विद्वानों ने रामायण को अनेक भाषाओं में अलग अलग नाम से लिखा।
आज के समय में महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण को पढ़ना और समझना साधारण मनुष्य के लिए कठिन है क्योंकि यह संस्कृत में है जबकि रामचरित मानस को आम बोल चाल की भाषा में लिखा गया है।
रामायण को संस्कृत काव्य की भाषा में लिखा गया जिसमें सर्ग और श्लोक होते हैं, जबकि रामचरित मानस में दोहो और चौपाइयों है। रामायण में 24000 हजार श्लोक और 500 सर्ग है। रामचरित मानस में श्लोक संख्या 27 है, चौपाई संख्या 4608 है, दोहा 1074 है, सोरठा संख्या 207 है और 86 छन्द है।
आज कल की भाग दौड़ भरी दिनचर्या में व्यक्ति के पास इतना समय नहीं है की वो रामायण का प्रतिदिन पाठ कर सके क्योंकि यह काफ़ी बड़ा है । इसी समस्या के समाधान के लिए आज हम आप को एक ऐसे श्लोक के बारे में बता रहे हैं जिसे “एकश्लोकि रामायण” कहा जाता है । मान्यताओं के अनुसार इस के पाठ से सम्पूर्ण रामायण के पाठ करने के समान फल प्राप्त होता है।
॥ एकश्लोकि रामायणम् ॥
आदौ राम तपोवनादि गमनं, हत्वा मृगं कांचनम्।
वैदीहीहरणं जटायुमरणं, सुग्रीवसंभाषणम्।।
बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं, लंकापुरीदाहनम्।
पश्चाद् रावण कुम्भकर्ण हननम्, एतद्धि रामायणम्।।
भावार्थ :
एक बार श्री राम वनवास में गए | वहां उन्होंने स्वर्ण मृग का पीछा किया और उसका वध किया | इसी दौरान उनकी पत्नी वैदेही यानि सीता जी का रावण द्वारा हरण किया गया | उनकी रक्षा करते हुए पक्षिराज जटायु ने अपने प्राण गवाएं | श्रीराम की मित्रता सुग्रीव से हुई | उन्होंने उसके दुष्ट भाई बालि का वध किया | समुद्र पर पुल बनाकर पार किया | लंकापुरी का दहन हुआ | इसके पश्चात् रावण और कुम्भकरण का वध किया | यही पूरी रामायण की संक्षिप्त कहानी है |
मंत्र जाप की विधि
प्रात: काल और संध्या काल में सम्पूर्ण रूप से शुद्ध हो कर ही एक श्लोकि रामायण का पाठ करें।
एक श्लोकि रामायण का पाठ आप किसी भी दिन कर सकते हैं।
कहा जाता है कि एक श्लोकि रामायण का पाठ 108 बार नित्य नियम से करना चाहिए अपितु १०८ बार सम्भव न हो तो 7,14 या 21 बार भी पाठ किया जा सकता है।
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