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हिंदू धर्म शास्त्रों में कुछ ऐसे कार्य बताए गए है जीनको धार्मिक महत्‍व के कारण प्रति हिंदू जन को निभाना जरूरी हैं। इन कार्यों को करने से मनुष्य को आध्यतिमिक लाभ तो प्राप्त होते ही हैं साथ ही साथ इनके पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं। ऐसा कहा जाता है कि इन मान्‍यताओं और परंपराओं को मानने से हमें स्‍वास्‍थ्‍य लाभ भी होते हैं और हमारे घर में धन व समृद्धि भी आती है। आइए जानते हैं क्‍या हैं वो कार्य और उनके पीछे छिपे वैज्ञानिक कारण….

1. मंदिर के बाहर चप्पल क्यों उतारते हैं?

मंदिर में प्रवेश नंगे पैर ही करना पड़ता है, यह नियम दुनिया के हर हिंदू मंदिर में है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि मंदिर की फर्शों का निर्माण पुराने समय से अब तक इस प्रकार किया जाता है कि ये इलेक्ट्रिक और मैग्नैटिक तरंगों का सबसे बड़ा स्त्रोत होती हैं। जब इन पर नंगे पैर चला जाता है तो अधिकतम ऊर्जा पैरों के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाती है।

2. दीपक के ऊपर हाथ घुमा कर आरती क्यों ली जाती है?

आरती के बाद सभी लोग दिए पर या कपूर के ऊपर हाथ रखते हैं और उसके बाद सिर से लगाते हैं और आंखों पर स्पर्श करते हैं। ऐसा करने से हल्के गर्म हाथों से दृष्टि इंद्री सक्रिय हो जाती है और बेहतर महसूस होता है।

3. मंदिर में घंटा क्यों लगाया जाता है?

जब भी मंदिर में प्रवेश किया जाता है तो दरवाजे पर घंटा लगा होता है जिसे बजाना होता है। मुख्य मंदिर (जहां भगवान की मूर्ति होती है) में भी प्रवेश करते समय घंटा या घंटी बजानी होती है, इसके पीछे कारण यह है कि इसे बजाने से निकलने वाली आवाज से सात सेकंड तक गूंज बनी रहती है जो शरीर के सात हीलिंग सेंटर्स को सक्रिय कर देती है।

4. भगवान की मूर्ति गर्भ गृह के मध्य क्यों स्थापित की जाती है?

मंदिर में भगवान की मूर्ति को गर्भ गृह के बिल्कुल बीच में रखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस जगह पर सबसे अधिक ऊर्जा होती है जहां सकारात्मक सोच से खड़े होने पर शरीर में सकारात्मक ऊर्जा पहुंचती है और नकारात्मकता दूर भाग जाती है।

5. मंदिर की परिक्रमा क्यों की जाती है?

हर मुख्य मंदिर में दर्शन करने और पूजा करने के बाद परिक्रमा करनी होती है। परिक्रमा 8 से 9 बार करनी होती है। जब मंदिर में परिक्रमा की जाती है तो सारी सकारात्मक ऊर्जा, शरीर में प्रवेश कर जाती है और मन को शांति मिलती है।

6. माथे पर तिलक क्यों लगाया जाता है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार मस्तक के बीचोंबीच भगवान विष्णु का निवास होता है। इसके अलावा इस स्थान को त्रिवेणी या संगम भी कहा जाता है क्योंकि यहां पर शरीर की तीन नाड़ियां एक साथ मिलती हैं। इस स्थान पर तिलक लगाने से मन की एकाग्रता बढ़ती है और व्यक्ति का तेज बढ़ता है। यदि आप हर दिन चंदन का तिलक अपने माथे पर लगाते हैं तो दिमाग में सेराटोनिन और बीटा एंडोर्फिन का स्राव संतुलित तरीके से होता है, जिससे उदासी दूर होती है और मन में उत्साह जगता है।

7. दोनो हथेलि को जोड़ नमस्कार क्यों किया जाता है?

इस परम्परा का पालन तो कोविड काल में पूरे संसार ने किया जो इस का पहले मजाक उड़ाते थे। दोनो हथेलि को जोड़ नमस्कार करने से सामने वाला व्यक्ति अपने आप ही विनम्र हो जाता है। किसी को प्रणाम करने के फलस्वरूप आशीर्वाद की प्राप्ति होती है और उसका आध्यामिक विकास होता है। दाहिना हाथ आचार अर्थात धर्म और बायां हाथ विचार अर्थात दर्शन का होता है। शरीर में दाईं ओर झड़ा और बांईं ओर पिंगला नाड़ी होती है अत: नमस्कार करते समय झड़ा, पिंगला के पास पहुंचती है तथा सिर श्रृद्धा से झुका हुआ होता है। मनुष्य के आधे शरीर में सकारात्मक आयन और आधे में नकारात्मक आयन विद्यमान होते हैं। हाथ जोड़ने पर दोनों आयनों के मिलने से ऊर्जा का प्रवाह होता है। जिससे शरीर में सकारात्मकता का समावेश होता है।

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