if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) { /** * Gets views count. * * @param int $id The Post ID. * @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7]) * @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999) * @return string */ function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) { $attr = array( 'id' => $id, 'range' => $range, 'number_format' => $number_format, ); $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) ); $views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $views ) { $views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format ); wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' ); } return $views; } } if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) { /** * Do Query * * @param $instance * @return array */ function jnews_view_counter_query( $instance ) { $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) ); $query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $query ) { $query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance ); wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' ); } return $query; } } शैलपुत्री Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/शैलपुत्री/ Daily Dose of Astrology Wed, 30 Mar 2022 11:37:49 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://astrodeeva.com/wp-content/uploads/2022/03/cropped-Logo-32x32.png शैलपुत्री Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/शैलपुत्री/ 32 32 Mata Shailputri | माँ शैलपुत्री- जाने माता की कथा, मंत्र, पूजा विधि और आरती https://astrodeeva.com/mata-shailputri-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%b6%e0%a5%88%e0%a4%b2%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4/ https://astrodeeva.com/mata-shailputri-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%b6%e0%a5%88%e0%a4%b2%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4/#comments Thu, 01 Oct 2020 10:12:15 +0000 https://astrodeeva.com/?p=862 माँ आदिशक्ति सम्पूर्ण जगत का कल्याण करती है। माँ भवानी के रूप इतने कल्याणकारी है कि इनके दर्शन एवं पूजन से भक्त के संकट नष्ट हो जाते हैं और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। माँ आदिशक्ति के नौ स्वरूप है और वो अपने पहले स्वरूप में शैलपुत्री के नाम से जानी जाती हैं। शैलपुत्री […]

The post Mata Shailputri | माँ शैलपुत्री- जाने माता की कथा, मंत्र, पूजा विधि और आरती appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.

]]>
माँ आदिशक्ति सम्पूर्ण जगत का कल्याण करती है। माँ भवानी के रूप इतने कल्याणकारी है कि इनके दर्शन एवं पूजन से भक्त के संकट नष्ट हो जाते हैं और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।

माँ आदिशक्ति के नौ स्वरूप है और वो अपने पहले स्वरूप में शैलपुत्री के नाम से जानी जाती हैं। शैलपुत्री एक संस्कृत शब्द है और इस का शाब्दिक अर्थ “पर्वत की बेटी “ होता है। नवरात्र के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है।

माँ शैलपुत्री की कथा 

पौराणिक कथा के अनुसार माँ शैलपुत्री अपने पूर्वजन्म में राजा दक्ष की पुत्री और भगवान शिव की अर्धांगनी ( सती) थी। एक बार राजा दक्ष में महायज्ञ का आयोजन किया और इसमें सभी देवताओं को निमंत्रण दिया, पर भोलेनाथ को इस का आमंत्रित नहीं किया। देवी सती अपने पिता के यहाँ महायज्ञ में जाने के लिए अति व्याकुल हो रही थी और उन्होंने अपनी यह इच्छा भगवान शंकर के समक्ष रखी। भोलेनाथ ने उनसे कहा “हे देवी, आप के पिता ने सारे देवताओं को निमंत्रित किया है लेकिन हमें नहीं, ऐसे में वहाँ जाना उचित शिष्टाचार नहीं है।” ये जानने के बाद भी देवी सती भगवान के आग्रह करती रही, देवी की प्रबल इच्छा को देखते हुए भगवान शंकर ने उन्हें जाने की अनुमति दे दी।

जब देवी सती अपने पिता के घर पहुँची हो उन्होंने भगवान शंकर के प्रति तिरस्कार का भाव देखा और देवी के पिता राजा दक्ष ने भी स्वयं अपने दामाद भोलेनाथ के प्रति अपमानजनक शब्द कहे। यह सब देख- सुन देवी सती को बहुत पीड़ा हुई और वो अपने प्राणनाथ का अपमान सह ना सकी और योगाग्नि द्वारा स्वयं को जलाकर भस्म कर लिया। इस कठोर दुःख से व्यग्र हो कर भगवान ने रुद्र रूप धारण किया और दक्ष के उस यज्ञ को विध्वंस कर दिया। अगले जन्म में यही देवी सती ने शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया और शैलपुत्री कहलायी। हिमालय के राजा का नाम हिमावत था इसलिए उन को हेमवती के नाम से भी जाना जाता है। पूर्वजन्म के भाँति इस जन्म में भी देवी ने शिव जी की कठोर तपस्या की और उन की अर्द्धागिनी बनी। 

माँ शैलपुत्री की पूजा का विधान

माँ शैलपुत्री श्री दुर्गा जी का प्रथम रूप हैं। इनकी पूजा बड़े विधि-विधान से करनी चाहिये, अतः नवरात्र के प्रथम दिन ब्रह्म मुहुर्त में उठ कर, नियमित कार्यों के निवृत्त होकर, माँ के निमित्त विविध प्रकार की विहित पूजन की सामग्री को संग्रहित करके षोड़षोपचार से पूजन करना चाहिये और दुर्गसप्तशती का पाठ करें या ब्राह्मण से करवाएँ।

ये भी पढ़े : Ghat Sthapana 2022 – चैत्र नवरात्रि घट स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

शैलपुत्री के मंत्र

माँ शैलपुत्री के अनेक मंत्र है, अतः ज़रूरतों के अनुसार उपयुक्त मंत्र का उच्चारण व जाप किए जाने का विधान है। यहाँ हम माँ के कुछ उपयोगी मंत्र बता रहे हैं जिन के जप से माँ का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है 

ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

ऐश्वर्यं यत्प्रसादेन सौभाग्यारोग्यसम्पदः। 
शत्रुहानि परो मोक्षः स्तूयते सा न किं जनैः॥

न तेषां जायते किंचिदशुभं रणसंकटे। 
नापदं तस्य पश्यामि शोकदुःखभयं न हि॥

स्तुति: या देवी सर्वभू‍तेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

Must read: माँ ब्रह्मचारिणी- जाने माता की कथा, मंत्र, पूजा विधि और आरती

|| मां शैलपुत्री की आरती: ||

 

शैलपुत्री मां बैल असवार। करें देवता जय जयकार॥

शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी॥

पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सुमिरे सो सुख पावे॥

ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू॥

सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी॥

उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिटा दो॥

घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के॥

श्रद्धा भाव से मंत्र जपायें। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं॥

जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे॥

मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो॥

ज्योतिषीय पहलू

ज्योतिष के अनुसार माँ शैलपुत्री चंद्रमा को दर्शाती हैं, इसलिए उनकी विधिवत उपासना करने से चंद्रमा के द्वारा पड़ने वाले बुरे प्रभाव भी निष्क्रिय हो जाते हैं।

https://www.youtube.com/embed/pwCTnGZm4rQ

The post Mata Shailputri | माँ शैलपुत्री- जाने माता की कथा, मंत्र, पूजा विधि और आरती appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.

]]>
https://astrodeeva.com/mata-shailputri-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%b6%e0%a5%88%e0%a4%b2%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4/feed/ 1
Shardiya Navaratri 2020: नवरात्रि, जानिए तिथि और शुभ मुहूर्त https://astrodeeva.com/shardiya-navaratri-2020-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a5%e0%a4%bf-%e0%a4%94%e0%a4%b0/ https://astrodeeva.com/shardiya-navaratri-2020-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a5%e0%a4%bf-%e0%a4%94%e0%a4%b0/#comments Sat, 19 Sep 2020 19:00:15 +0000 https://astrodeeva.com/?p=764 नवरात्रि या नौदुर्गा नाम के अनुसार नौ दिनो का भक्ति पूर्ण उत्सव होता है। इन नौ दिनो में माँ  आदि शक्ति के नौ रूपों की आराधना की जाती हैऔर उन्हें प्रसन्न किया जाता है । नवरात्रि पर्व वर्ष में चार बार मनाया जाता है, जिनमे से दो मुख्य रूप से और दो गुप्त रूप से मनाई जाती है। मुख्य रूप की नवरात्रि को चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि कहते है। चैत्र नवरात्रि हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारम्भ होकर रामनवमी तक मनायी जाती है और शारदीय नवरात्रि आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारम्भ होकर नवमी तिथि तक मनायी जाती है। माँ दुर्गा […]

The post Shardiya Navaratri 2020: नवरात्रि, जानिए तिथि और शुभ मुहूर्त appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.

]]>
नवरात्रि या नौदुर्गा नाम के अनुसार नौ दिनो का भक्ति पूर्ण उत्सव होता है। इन नौ दिनो में माँ  आदि शक्ति के नौ रूपों की आराधना की जाती हैऔर उन्हें प्रसन्न किया जाता है । नवरात्रि पर्व वर्ष में चार बार मनाया जाता है, जिनमे से दो मुख्य रूप से और दो गुप्त रूप से मनाई जाती है। मुख्य रूप की नवरात्रि को चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि कहते है। चैत्र नवरात्रि हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारम्भ होकर रामनवमी तक मनायी जाती है और शारदीय नवरात्रि आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारम्भ होकर नवमी तिथि तक मनायी जाती है।

माँ दुर्गा के नौ रूप 

वैसे तो दुर्गा जी के 108 नाम बताये जाते हैं लेकिन नवरात्रि में उन के नौ रूपों की स्तुति और पूजा-पाठ की जाती है। स्वयं ब्रह्मा जी ने माँ दुर्गा के नौ रूपों का उल्लेख संक्षेप में इस श्लोक द्वारा किया है।

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।

तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्।।

पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।

सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्।।

नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:।

उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना:।।

माँ शैलपुत्री

प्रथम नवरात्र में माँ दुर्गा की शैलपुत्री के रूप में पूजा की जाती है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री शैलपुत्री की पूजा करने से मूलाधार चक्र जागृत होजाता है और साधकों को सभी प्रकार की सिद्धियां स्वत: ही प्राप्त हो जाती हैं। माँ का वाहन सिंह है तथा इन्हें गाय का घी अथवा उससे बने पदार्थोंका भोग लगाया जाता है।

माँ ब्रह्मचारिणी

दूसरे नवरात्र में माँ के ब्रह्मचारिणी एवं तपश्चारिणी रूप को पूजा जाता है। जो साधक माँ के इस रूप की पूजा करते हैं उन्हें तप, त्याग, वैराग्य, संयम और सदाचार की प्राप्ति होती है और जीवन में वे जिस बात का संकल्प कर लेते हैं उसे पूरा करके ही रहते हैं। माँ ब्रह्मचारिणी का कोई भी वाहन नहीं है पैर ही वाहन है माँ को शक्कर का भोग प्रिय है।

ये भी पढ़ें : अधिक मास धार्मिक एवं वैज्ञानिक आधार और महत्व

माँ चंद्रघंटा

माँ के इस रूप में मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चन्द्र बना होने के कारण इनका नाम चन्द्रघंटा पड़ा तथा तीसरे नवरात्र में माँ के इसी रूप की पूजा की जाती है तथा माँ की कृपा से साधक को संसार के सभी कष्टों से छुटकारा मिल जाता है। शेर पर सवारी करने वाली माता को दूध का भोग प्रिय है।

माँ कुष्मांडा

अपने उदर से ब्रह्मांड को उत्पन्न करने वाली माँ  कुष्मांडा की पूजा चौथे नवरात्र में करने का विधान है। इनकी आराधना करने वाले भक्तों केसभी प्रकार के रोग एवं कष्ट मिट जाते हैं तथा साधक को माँ की भक्ति के साथ ही आयु, यश और बल की प्राप्ति भी सहज ही हो जाती है। माँ को भोग में मालपुआ अति प्रिय है।

माँ स्कंदमाता

पंचम नवरात्र में आदिशक्ति माँ दुर्गा की स्कंदमाता के रूप में पूजा होती है। कुमार कार्तिकेय की माता होने के कारण इनका नाम स्कंदमातापड़ा। इनकी पूजा करने वाले साधक संसार के सभी सुखों को भोगते हुए अंत में मोक्ष पद को प्राप्त होते हैं। उनके जीवन में किसी भी प्रकार कीवस्तु का कोई अभाव कभी नहीं रहता। इन्हें पद्मासनादेवी भी कहते हैं। माँ का वाहन सिंह है और इन्हें केले का भोग अति प्रिय है

पंचम नवरात्र में आदिशक्ति माँ दुर्गा की स्कंदमाता के रूप में पूजा होती है। कुमार कार्तिकेय की माता होने के कारण इनका नाम स्कंदमाता पड़ा। इनकी पूजा करने वाले साधक संसार के सभी सुखों को भोगते हुए अंत में मोक्ष पद को प्राप्त होते हैं। उनके जीवन में किसी भी प्रकार की वस्तु का कोई अभाव कभी नहीं रहता। इन्हें पद्मासनादेवी भी कहते हैं। माँ का वाहन सिंह है और इन्हें केले का भोग अति प्रिय है।

Must Read : Vastu: घर में समृद्धि लानी है तो लगाएँ ये पेड़ -पौधे

माँ कात्यायनी

महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति माँ दुर्गा ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया और उनका कात्यायनी नाम पड़ा। छठे नवरात्र में माँ के इसी रूप की पूजा की जाती है। माँ की कृपा से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष आदि चारों फलों की जहां प्राप्ति होती है। वहीं वह आलौकिक तेज से अलंकृत होकर हर प्रकार के भय, शोक एवं संतापों से मुक्त होकर खुशहाल जीवन व्यतीत करता है। और माँ को शहद अति प्रिय है।

माँ कालरात्रि

सभी राक्षसों के लिए कालरूप बनकर आई माँ दुर्गा के इस रूप की पूजा सातवें नवरात्र में की जाती है। माँ के स्मरण मात्र से ही सभी प्रकार के भूत, पिशाच एवं भय समाप्त हो जाते हैं। माँ की कृपा से भानूचक्र जागृत होता है और भक्त हमेशा भयमुक्त रहता हैं। माँ गधे की  सवारी करती है और माँ को गुड़ का भोग अतिप्रिय है।

माँ महागौरी

आदिशक्ति माँ दुर्गा के महागौरी रूप की पूजा आठवें नवरात्र में की जाती है। माँ ने काली रूप में आने के पश्चात घोर तपस्या की और पुन: गौरवर्ण पाया और महागौरी कहलाई। माँ का वाहन बैल है और माँ को हलवे का भोग लगाया जाता है।

माँ सिद्धिदात्री

नौवें नवरात्र में माँ के इस रूप की पूजा एवं आराधना की जाती है, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है माँ का यह रूप साधक को सभी प्रकार कीऋद्धियां एवं सिद्धियां प्रदान करने वाला है। जिस पर माँ की कृपा हो जाती है उसके लिए जीवन में कुछ भी पाना असंभव नहीं रहता। माँ शेर परबिराजमान है माँ को खीर अति प्रिय है अत: माँ को खीर का भोग लगाना चाहिए।

आप के लिए : ब्रह्म मुहूर्त : सफलता की कुंजी,जाने महत्व

नवरात्रि 2020

हर वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत श्राद्ध की सर्वपित्र अमावस्या के बाद ही हो जाती है। लेकिन इस वर्ष अधिकमास लगने के कारण नवरात्रि एक माह विलम्ब से शुरू होगी। इस बार  शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूबर से शुरू होकर २५ अक्टूबर नवमी तिथि को सम्पन होगी।

शारदीय नवरात्रि 2020 तिथि 

17 अक्टूबर 2020:  प्रतिपदा घटस्थापना
18 अक्टूबर 2020:  द्वितीया मां ब्रह्मचारिणी पूजा
19 अक्टूबर 2020: तृतीय मां चंद्रघंटा पूजा
20 अक्टूबर 2020 :  चतुर्थी मां कुष्मांडा पूजा
21 अक्टूबर 2020: पंचमी मां स्कंदमाता पूजा
22 अक्टूबर 2020: षष्ठी मां कात्यायनी पूजा
23 अक्टूबर 2020: सप्तमी मां कालरात्रि पूजा
24 अक्टूबर 2020 :अष्टमी मां महागौरी दुर्गा महा नवमी पूजा दुर्गा महा अष्टमी पूजा
25 अक्टूबर 2020 : नवमी मां सिद्धिदात्री नवरात्रि पारण 

घटस्थापना 

नवरात्रि के दौरान घटस्थापना एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। यह नौ दिनों के उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है। घटस्थापना देवी शक्ति का आह्वान है और शास्त्रों में नवरात्रि की शुरुआत में एक निश्चित अवधि के दौरान घटस्थापना करने के लिए नियमों और दिशानिर्देशों को अच्छी तरह से परिभाषित किया है। घटस्थापना करने का शुभ मुहूर्त प्रतिपदा के दिन एक तिहाई होता है। यदि किसी कारण इस मुहूर्त में घटस्थापना नहीं कर पाते तो अभिजीत मुहूर्त के दौरान घटस्थापना की जा सकती है।

घटस्थापना शुभ मुहूर्त 

दिनांक : 17 अक्टूबर 2020

घटस्थापना मुहूर्त – 06:23 ए एम से 10:12 ए एम

(अवधि – 03 घण्टे 49 मिनट्स)

घटस्थापना अभिजित मुहूर्त – 11:43 ए एम से 12:29 पी एम

(अवधि – 00 घण्टे 46 मिनट्स)

The post Shardiya Navaratri 2020: नवरात्रि, जानिए तिथि और शुभ मुहूर्त appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.

]]>
https://astrodeeva.com/shardiya-navaratri-2020-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a5%e0%a4%bf-%e0%a4%94%e0%a4%b0/feed/ 1