if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) { /** * Gets views count. * * @param int $id The Post ID. * @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7]) * @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999) * @return string */ function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) { $attr = array( 'id' => $id, 'range' => $range, 'number_format' => $number_format, ); $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) ); $views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $views ) { $views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format ); wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' ); } return $views; } } if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) { /** * Do Query * * @param $instance * @return array */ function jnews_view_counter_query( $instance ) { $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) ); $query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $query ) { $query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance ); wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' ); } return $query; } } astrology remedies Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/astrology-remedies/ Daily Dose of Astrology Tue, 26 Dec 2023 16:44:34 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://astrodeeva.com/wp-content/uploads/2022/03/cropped-Logo-32x32.png astrology remedies Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/astrology-remedies/ 32 32 Astrology – अपनी कुण्डली से जानें आपको व्यवसाय में सफलता या विफलता https://astrodeeva.com/astrology-know-from-your-horoscope-whether-you-will-be-successful-or-unsuccessful-in-business/ https://astrodeeva.com/astrology-know-from-your-horoscope-whether-you-will-be-successful-or-unsuccessful-in-business/#respond Tue, 26 Dec 2023 16:44:33 +0000 https://astrodeeva.com/?p=3718 जातक के व्यवसाय में कैसी स्थिति रहेगी इस विषय का आंकलन ज्योतिष द्वारा किया जा सकता है। ग्रहों की किस प्रकार की दृष्टि, युति या स्थान परिवर्तन कैसा हो रहा है, इन सभी तथ्यों के आधार पर कारोबार में सफलता-असफलता एवं लाभ हानि को ज्ञात किया जा सकता है। जन्म कुण्डली के अनुसार व्यक्ति में […]

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जातक के व्यवसाय में कैसी स्थिति रहेगी इस विषय का आंकलन ज्योतिष द्वारा किया जा सकता है। ग्रहों की किस प्रकार की दृष्टि, युति या स्थान परिवर्तन कैसा हो रहा है, इन सभी तथ्यों के आधार पर कारोबार में सफलता-असफलता एवं लाभ हानि को ज्ञात किया जा सकता है। जन्म कुण्डली के अनुसार व्यक्ति में कार्यनिष्ठा का भाव देखने के लिये दशम घर से शनि का संबन्ध देखा जाता है।

जातक की कुण्डली के आधार पर इस बात का पता लगाया जा सकता है कि वह कैरियर के क्षेत्र में कौन सी लाईन पकडेगा। कई व्यक्ति जीवन में दूसरों के अधीन रहकर कार्य करते हैं अर्थात नौकरी से अपनी आजीविका प्राप्त करते हैं तो कुछ व्यक्ति स्वतंत्र रुप से कार्य करना पसन्द करते हैं। कुण्डली में व्यापार करने के लिए योग मौजूद होते हैं। यह योग निम्नलिखित हैं।

  • चन्द्रमा, गुरु तथा शुक्र परस्पर दो या बारह भावों में स्थित हों तो व्यक्ति स्वयं के व्यवसाय से जीविकोपार्जन करता है।
  • यदि चन्द्र कुण्डली में शुभ ग्रह केन्द्र में हो तो जातक बिजनेस से धन कमाता है।
  • कुण्डली में बुध, राहु या शनि से दृष्ट अथवा युति है तो व्यक्ति स्वतंत्र रुप से व्यवसाय करने की चाह रखता है। लेकिन शनि कुण्डली में बली होकर बुध को दृष्ट कर रहा है तो व्यक्ति नौकरी करता है।
  • चन्द्र कुण्डली से गुरु तृतीय भाव में स्थित हो तथा शुक्र लाभ भाव में स्थित हो तो व्यक्ति अपना स्वयं का व्यवसाय कर सकता है।
  • कुण्डली में सप्तम भाव का स्वामी यदि धन भाव में स्थित है और बुध सप्तम भाव में स्थित हो व्यक्ति बिजनेस कर सकता है।
  • कुण्डली में बुध तथा शुक्र द्वितीय भाव अथवा सप्तम भाव में स्थित हों और शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तब जातक व्यापार की ओर झुकाव रख सकता है।
  • बुध को बिजनेस का कारक ग्रह माना जाता है। बुध कुण्डली में यदि सप्तम भाव में द्वितीयेश के साथ है तब जातक बिजनेस करता है।
  • दूसरे भाव का स्वामी शुभ ग्रह की राशि में स्थित हो और बुध या सप्तमेश उसे देख रहें हों तब व्यक्ति व्यापार करता है।
  • यदि गुरु की द्वितीय भाव के स्वामी पर दृष्टि हो तो व्यक्ति व्यापार कर सकता है।
  • उच्च के बुध पर द्वितीयेश की दृष्टि होने पर जातक व्यापार करने में रूचि रखता है।
  • यदि लग्नेश तथा दशमेश की परस्पर एक दूसरे पर दृष्टि हो, युति या दोनों का स्थान परिवर्तन हो रहा हो तब व्यक्ति बिजनेस कर सकता है।
  • दशम भाव पर शुभ ग्रहों की दृष्टि होने से व्यापार करता है। उसे बिजनेस में धन लाभ होता है।
  • दशम भाव में बुध की स्थिति से व्यक्ति व्यापारी बनता है।
  • कुण्डली में आत्मकारक ग्रह के नवाँश में शनि स्थित है तब व्यक्ति व्यापार में समृद्धि पाता है।
  • सप्तम भाव से द्वादश भाव तक या दशम भाव से तृतीय भाव तक पाँच या पाँच से अधिक ग्रह स्थित हैं तब व्यक्ति स्वतंत्र व्यापार करता है।
  • दशम भाव का स्वामी केन्द्र या त्रिकोण भाव में स्थित है तब भी व्यक्ति स्वतंत्र रुप से व्यापार कर सकता है।

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कौन सा व्यवसाय चुने?

  • मंगल और चतुर्थ भाव का स्वामी केन्द्र या त्रिकोण भाव में स्थित हो या लाभ भाव में स्थित हो और दशमेश के साथ शुक्र तथा चन्द्रमा की युति हो तब व्यक्ति कृषि तथा पशुपालन से धन प्राप्त करता है।
  • कुण्डली के नवम भाव में बुध, शुक्र तथा शनि स्थित है तब व्यक्ति कृषि कार्य से धन प्राप्त करता है।
  • कुण्डली में सूर्य ग्रह से लेकर शनि ग्रह तक सभी ग्रह परस्पर त्रिकोण भाव में स्थित हैं, तब जातक कृषि से संबंधित कार्यों से अपनी आजीविका कमा सकता है।
  • गुरु अष्टम भाव में स्थित हो और पाप ग्रह केन्द्र में हों और किसी भी शुभ ग्रह का संबंध इनसे नहीं हो तो व्यक्ति माँस – मछली आदि का व्यापार करता है।
  • बुध या शुक्र दशम भाव में दशमेश का नवाँशपति होकर स्थित हो तो व्यक्ति कपडे़ का व्यवसाय कर सकता है।
  • लग्न तथा सप्तम भाव में सभी ग्रह स्थित हो तब शकट योग बनता है और व्यक्ति ट्राँसपोर्ट से या लकडी़ के सामान के व्यापार से धनोपार्जन करता है।
  • राहु-केतु को छोड़कर कुण्डली में सातों ग्रह किन्हीं चार भावों में स्थित है तो व्यक्ति भूमि अर्थात कृषि कार्य से लाभ पाता है।
  • कुण्डली में चन्द्रमा या शुक्र की युति लग्नेश से हो जातक लेखक, कवि या पत्रकार बन सकता है।
  • मंगल तथा सूर्य के दशम भाव में स्थित होने के कारण जातक अपनी कार्य कुशलता के आधार पर एक अच्छा कारीगर बनता है और धन पाता है।
  • चन्द्रमा, बुध के नवाँश में स्थित हो और सूर्य से दृष्ट हो तब व्यक्ति अभिनय के क्षेत्र में सफलता हासिल करता है।
  • दशम भाव में चन्द्रमा तथा राहु की युति व्यक्ति को कूटनीतिज्ञ बनाती है।
  • कुण्डली में दशम भाव में मंगल स्थित हो या मंगल का दशम भाव के स्वामी के साथ दृष्टि या युति संबंध हो तब व्यक्ति कुशल प्रशासक बनता है या सेना में अधिकारी का पद प्राप्त कर सकता है।

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मोरपंख का महत्त्व और इससे जुड़े अचूक उपाय https://astrodeeva.com/importance-of-peacock-feathers-and-surefire-remedies-related-to-it/ https://astrodeeva.com/importance-of-peacock-feathers-and-surefire-remedies-related-to-it/#respond Tue, 22 Mar 2022 09:13:11 +0000 https://astrodeeva.com/?p=3026 ज्योतिष में मोरपंख को सभी नौ ग्रहों का प्रतिनिधि माना गया है, विशेष तौर पर मोरपंख के कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं जिन्हें किसी शुभ मुहूर्त में करने से सभी समस्याओं से तुरंत छुटकारा मिल जाता है। श्रीकृष्ण का श्रृंगार मोर पंख के बिना अधूरा ही लगता है। वे अपने मुकुट में मोर पंख भी […]

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ज्योतिष में मोरपंख को सभी नौ ग्रहों का प्रतिनिधि माना गया है, विशेष तौर पर मोरपंख के कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं जिन्हें किसी शुभ मुहूर्त में करने से सभी समस्याओं से तुरंत छुटकारा मिल जाता है। श्रीकृष्ण का श्रृंगार मोर पंख के बिना अधूरा ही लगता है। वे अपने मुकुट में मोर पंख भी विशेष रूप से धारण करते हैं। मोर पंख का संबंध केवल श्रीकृष्ण से नहीं, बल्कि अन्य देवी-देवताओं से भी है। शास्त्रों के अनुसार मोर के पंखों में सभी देवी-देवताओं और सभी नौ ग्रहों का वास होता है।

प्राचीन काल में एक मोर के माध्यम से देवताओं ने संध्या नाम के असुर का वध किया था। पक्षी शास्त्र में मोर और गरुड़ के पंखों का विशेष महत्व बताया गया है। आइये जानते हैं मोर पंख आपके जीवन को किस तरह सुख- समृद्धि से भर देता है।

मोरपंख के अचूक उपाय

  • मोर का शत्रु सर्प है. अत: ज्योतिष में जिन लोगों को राहू की स्थिति शुभ नहीं हो उन्हें मोर पंख सदैव अपने साथ रखना चाहिए।
  • आयुर्वेद में मोर पंख से तपेदिक, दमा, लकवा, नजला और बांझपन जैसे दुसाध्य रोगों में सफलता पूर्वक चिकित्सा बताई गई है।
  • जीवन में मोर पंख से कई तरह के संकट दूर किये जा सकते हैं. अचानक कष्ट या विपत्ति आने पर घर अथवा शयनकक्ष के अग्नि कोण में मोर पंख लगाना चाहिए. थोड़े ही समय में सकारात्मक असर होगा।
  • धन-वैभव में वृद्धि की कामना से निवेदन पूर्वक नित्य पूजित मन्दिर में श्रीराधा-कृष्ण के मुकुट में मोर पंख की स्थापना करके/करवाकर 40वें दिन उस मोर पंख को लाकर अपनी तिजोरी या लॉकर में रख दें. धन-संपत्ति में वृद्धि होना प्रारम्भ हो जायेगी। सभी प्रकार के रुके हुए कार्य भी इस प्रयोग से बन जाते हैं।
  • जिन लोगों की कुण्डली में राहू-केतु कालसर्प योग का निर्माण कर रहे हों उन्हें अपने तकिये के खोल में 7 मोर पंख सोमवार की रात्रि में डालकर उस तकिये का उपयोग करना चाहिए साथ ही शयनकक्ष की पश्चिम दिशा की दीवार पर मोर पंखों का पंखा जिसमें कम से कम 11 मोर पंख लगे हों लगा देना चाहिए। इससे कुण्डली में अच्छे ग्रह अपनी शुभ प्रभाव देने लगेंगे और राहू-केतु का अशुभत्व कम हो जायेगा।
  • अगर बच्चा जिद्दी होता जा रहा हो तो उसे नित्य मोर पंखों से बने पंखे से हवा करनी चाहिए या अपने सीलिंग फैन पर ही मोर पंख पंखुड़ियों पर चिपका देना चाहिए।
  • नवजात शिशु के सिरहाने चांदी के तावीज में एक मोर पंख भरकर रखने से शिशु को डर नहीं लगेगा और नजर इत्यादि का डर भी नहीं रहेगा।

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