if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) {
/**
* Gets views count.
*
* @param int $id The Post ID.
* @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7])
* @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999)
* @return string
*/
function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) {
$attr = array(
'id' => $id,
'range' => $range,
'number_format' => $number_format,
);
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) );
$views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $views ) {
$views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format );
wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' );
}
return $views;
}
}
if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) {
/**
* Do Query
*
* @param $instance
* @return array
*/
function jnews_view_counter_query( $instance ) {
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) );
$query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $query ) {
$query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance );
wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' );
}
return $query;
}
}Bhole Shankar Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव
https://astrodeeva.com/tag/bhole-shankar/
Daily Dose of AstrologyFri, 15 Jul 2022 05:13:10 +0000en-US
hourly
1 https://wordpress.org/?v=7.0https://astrodeeva.com/wp-content/uploads/2022/03/cropped-Logo-32x32.pngBhole Shankar Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव
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3232Sawan 2022: पवित्र श्रावण मास में भोलेनाथ को प्रसन्न करने लिये सहज उपाय..
https://astrodeeva.com/sawan-2022-easy-way-to-please-bholenath-from-holy-shravan-month/
https://astrodeeva.com/sawan-2022-easy-way-to-please-bholenath-from-holy-shravan-month/#commentsFri, 15 Jul 2022 05:08:04 +0000https://astrodeeva.com/?p=3528सनातन धर्म में भगवान भोलेनाथ से जुड़े कई पर्व मनाए जाते हैं और इनमें श्रावण मास (sawan 2022) यानी सावन का अपना अलग ही विशेष महत्व है। भगवान शिव को यह मास अत्यधिक प्रिय है व इस माह में भगवान शिव की पूजा करने से अच्छा व शुभ फल प्राप्त होता है। हम हमेशा से […]
सनातन धर्म में भगवान भोलेनाथ से जुड़े कई पर्व मनाए जाते हैं और इनमें श्रावण मास (sawan 2022) यानी सावन का अपना अलग ही विशेष महत्व है। भगवान शिव को यह मास अत्यधिक प्रिय है व इस माह में भगवान शिव की पूजा करने से अच्छा व शुभ फल प्राप्त होता है।
हम हमेशा से भगवान शिव की पूजा अर्चना के बारे में ही सुनते आ रहे हैं कि शिव पूजन के बारे में कहा जाता है कि शिव पूजन में विधि विधान से मंत्रों का जाप करना अनिवार्य होता है , यदि आप विधि विधान से मंत्रों का जाप करते हैं तभी आपको इसका फल मिलता है। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है| भगवान भोलेनाथ सिर्फ यह देखते हैं कि जो व्यक्ति उनकी पूजा कर रहा है उसका मन कैसा है ,उसकी श्रद्धा का भाव कैसा है, भगवान शिव या कोई भी भगवान यह नहीं देखते हैं कि किसी व्यक्ति ने उनके मंत्र का कितनी बार जाप किया या उनकी पूजा पर कितना खर्चा किया। अगर हम सही शब्दों में जाने तो भगवान भोलेनाथ यह देखते हैं कि इंसान की भक्ति का भाव कैसा है और वह कैसी भावना रखता है अगर उसकी भावना अच्छी होगी तो भगवान भोलेनाथ अवश्य प्रसन्न होंगे और उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण करेंगे |
भगवान के भक्त सच्चे मन से बिना मंत्र पढ़े भी सभी पूजन सामग्री अर्पित कर सकते हैं। उसके लिए उसमें सच्ची श्रद्धा और विश्वास होना चाहिए।
अगर हम सच्ची श्रद्धा और भक्ति से एक फूल भी भगवान को अर्पित करते हैं तो सारे पूज्य देवी- देवता व भोलेनाथ हमारे सभी कार्य सिद्ध करने के लिए मदद करते हैं और हमारा साथ देते हैं | हम जब खुद की रक्षा करेंगे तो भगवान भोलेनाथ हमारी स्वयं रक्षा करेंगे| भगवान भोलेनाथ ने स्वयं कहा है –
“न मे प्रियष्चतुर्वेदी मद्भभक्तः ष्वपचोऽपि यः।
तस्मै देयं ततो ग्राह्यं स च पूज्यो यथा ह्यहम्।
पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति।
तस्याहं न प्रणस्यामि स च मे न प्रणस्यति। “
(अर्थात: जो भक्त सच्चे मन ,श्रद्धा और भक्ति भाव से बिना किसी वैदिक मंत्र का जाप किए भगवान शिव को सिर्फ एक पुष्प अथवा जल समर्पित करता है भगवान शिव उस व्यक्ति से भी उतना ही प्रसन्न होते हैं जितना कि किसी वैदिक मंत्रों के उच्चारण करने वाले व्यक्ति से खुश होते हैं।भगवान शिव कभी उस व्यक्ति की नजरों से दूर नहीं होते और न ही वह व्यक्ति भगवान शिव की नजरों से कभी दूर होता है। भगवान शिव एवं सभी देवी देवताओं के लिए किसी भी मंत्र के जाप से ज्यादा सच्चे मन से की जाने वाली पूजा ज्यादा मायने रखती है।)
sawan 2022 पूजा -अर्चना की विधि:
1. भगवान शिव का दूध, दही, शहद , और मिश्री, मिलाकर जलाभिषेक करें।
2. भगवान शिव को पांच प्रकार के फल चढ़ाएं।
3. भगवान शिव को धतूरा अर्पित करें व चंदन से तिलक करें।
4. भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करें और उस बेलपत्र पर ओम नमः शिवाय या राम लिखकर अर्पित करें।
]]>https://astrodeeva.com/sawan-2022-easy-way-to-please-bholenath-from-holy-shravan-month/feed/1स्कंद पुराण के अनुसार यहाँ है भगवान शिव की आरामगाह
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]]>सनातन धर्म के अनुसार भगवान ब्रह्मा सृजन के देव हैं , भगवान विष्णु को पालनहार कहा गया है और भगवान शिव को संहार का देवता कहा गया है। भगवान शिव अपने भोलेपन एवं रौद्ररूप के लिए विख्यात हैं। जिस प्रकार इस ब्रह्मण्ड का ना कोई अंत है, न कोई छोर और न ही कोई शूरुआत, उसी प्रकार शिव अनादि है सम्पूर्ण ब्रह्मांड शिव के अंदर समाया हुआ है जब कुछ नहीं था तब भी शिव थे जब कुछ न होगा तब भी शिव ही होंगे।
भगवान शिव को हेमेशा तपस्वी के रूप में जाना जाता है देवभूमि उत्तराखंड को महादेव की तपस्थली कहा जाता है। यहाँ हम आप को ऐसे तीर्थस्थान के बारे में बताने जा रहे हे जो की देश में ही नहीं अपितु विदेशों में भी प्रख्यात है, यहाँ हर वर्ष लाखों की संख्या में तीर्थयात्री आते हैं।
यह स्थान उत्तराखंड,पौड़ी जनपद के अंतर्गत लैन्सडौन डेरियाखाल – रिखणीखाल मार्ग पर स्थित चखुलाखाल गांव से 4 किलोमीटर की दूरी पर पर्वत श्रृंखलाओं के बीच एक बेहद ही मनमोहक शांत जगह है। यह स्थान देवदार के घने जंगलो के मध्य में स्थित ताड़केश्वर भगवान का पौराणिक मंदिर मौजूद है।
स्कंद पुराण के केदारखंड में इस स्थान का वर्णन मिलता है
समुद्र तल से 1800 मीटर की ऊँचाई पर स्थित इस स्थल को भगवान शिव का आरामगाह कहा जाता है। इस मंदिर परिसर में त्रिशुल के आकार के देवदार के वृक्ष हैं जो श्रद्धालुओं की आस्था को और भी ज्यादा मजबूत करते हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार ताड़कासुर दैत्य का वध करने के बाद भगवान शिव ने इसी जगह पर आकर विश्राम किया। विश्राम के दौरान जब सूर्य की तेज किरणें भगवान शिव के चेहरे पर पड़ीं, तो मां पार्वती ने शिवजी के चारों ओर देवदार के सात वृक्ष लगाए। ये विशाल वृक्ष आज भी ताड़केश्वर धाम के अहाते में मौजूद हैं।
यहां तक पहुंचने के लिए कोटद्वार पौड़ी से चखुलियाखाल तक जीप-टैक्सी जाती रहती हैं। यहां से 5 किमी पैदल दूरी पर ताड़केश्वर धाम है। ये एक ऐसा मंदिर है, जहां हर साल देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां की खूबसूरती बेमिसाल है और इसे देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है। खासतौर पर श्रावण मास पर तो यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।