if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) {
/**
* Gets views count.
*
* @param int $id The Post ID.
* @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7])
* @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999)
* @return string
*/
function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) {
$attr = array(
'id' => $id,
'range' => $range,
'number_format' => $number_format,
);
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) );
$views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
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$views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format );
wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' );
}
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}
}
if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) {
/**
* Do Query
*
* @param $instance
* @return array
*/
function jnews_view_counter_query( $instance ) {
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) );
$query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $query ) {
$query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance );
wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' );
}
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}
}
The post Sharad Purnima 2023: इस वर्ष शरद पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का साया, चंद्रमा को खीर का भोग लगाने से पहले जान लें ये खास बातें appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इसे रास पूर्णिमा, कौमुदी या कोजगिरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार वर्ष भर में इसी दिन चंद्रमा सोलह कलाओं से परी पूर्ण होता है और इससे निकलने वाली किरणे अमृत समान मानी जाती है। इस दिन रात्रि को दूध की खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने की प्रथा है, मान्यता है कि चंद्रमा की किरणे पड़ने से यह सेहत के लिए कई गुना लाभकारी हो जाती है।
शरद पूर्णिमा वर्ष भर में वह दिन होता है जिस दिन चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब होता है और सबसे ज़्यादा चमकता है। इस दिन आकाश में धूल और मिट्टी नहीं होती और वातावरण निर्मल होता है। इस दिन से धार्मिक स्नान और व्रत प्रारम्भ होते है। माताएं संतान की मंगल कामना के लिए देवी-देवताओं का पूजन करती है। इस दिन चंद्रमा की किरणो का शरीर पर पड़ना बहुत ही शुभ माना जाता है और इसका स्वास्थ्य पर लाभकारी प्रभाव पड़ता है।
माना जाता है की द्वापर यूग में भगवान विष्णु जब श्री कृष्ण के रूप में धरती पर आए तो माता लक्ष्मी भी राधा के रूप में उन के साथ आई थीं। लेकिन जब श्राप के कारण श्री कृष्ण राधा और गोपियों से दूर हो गए थे, तब राधा और सभी गोपियों ने श्री कृष्ण को वापस बुलाने के लिए मां कात्यायनी की आराधना की। शरद पूर्णिमा की रात को ही श्री कृष्ण ने बंसी बजाकर गोपियों और राधा जी को अपने पास बुलाया और उनके साथ महारास किया था। इसी कारण इस दिन को रास पूर्णिमा और कामुदी महोत्सव के नाम से भी जाना जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार बहुत समय पूर्व एक नगर में प्रसिद्ध साहूकार रहता था। उसकी दो पुत्रियां थी, जिसमें बड़ी पुत्री सीधी- सधी, संस्कारी और पूजा-पाठ करने वाली थी। उसकी छोटी पुत्री स्वभाव में चंचल थी और उस का पूजा-पाठ में मन नहीं लगता था। साहूकार अपनी छोटी पुत्री को उसकी बड़ी बहन की तरह धार्मिक कार्यों में ध्यान लगने के लिए कहता था । छोटी पुत्री अपने पिता के दबाव के कारण व्रत करती पर उसको अधूरा छोड़ दिया करती थी।
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समयोपरंत साहूकार ने अच्छा रिश्ता ढूंढ बड़े धूम-धाम से अपनी दोनो पुत्रियों का विवाह किया। विवाह उपरांत बड़ी पुत्री का जीवन अत्यंत ही खुशहाल व सुखमय बीतने लगा परंतु उसकी छोटी बेटी के जीवन में हर समय कलह और परेशनियाँ रहती थी। कुछ वर्षों के पश्चात दोनो पुत्रीयों ने गर्भ धारण किया और बड़ी पुत्री को हष्ट पुष्ट संतान की प्राप्ति हुई परंतु छोटी बेटी की संतान जन्म लेते के साथ मृत्यु के गाल में समा गयी। वो जब भी संतान प्राप्ति के प्रयास करती तब संतान की बात सिरे नहीं चढ़ती या फिर संतान जीवित नहीं बचती। इस कारण वह अत्यंत दुखी रहती। यह देख उसके ससुराल वालों ने पंडितों को उसकी कुंडली दिखायी और उपाय सुझाने का अनुरोध किया। पंडितों ने कुंडली देख कर बताया की इसने विवाह के पूर्व पूर्णिमा के अधूरे व्रत किये हैं ईसी कारण ऐसा हो रहा है। अतः इसके निवारण हेतु तुम्हें शरद पूर्णिमा के व्रत को पूरे विधि-विधान से करने की सलाह दी और व्रत की विधि बताई।
तत्पश्चात साहूकार की छोटी बेटी ने शरद पूर्णिमा का व्रत पूरे विधि-विधान से किया पर इस बार संतान जन्म के पश्चात कुछ दिनो तक ही जीवित रही। इस से दुखी हो कर उसने मृत शीशु को पीढ़े पर लिटाकर उस पर कपड़ा रख दिया और अपनी बहन को बुला । सारी बात अपनी बड़ी बहन को बता उससे अपने मृत शीशु को स्पर्श करने का आग्रह किया। बड़ी बहन ने जैसे ही छोटी बेटी के संतान को छुआ वो रोने लगा और उसमें प्राण वापस आ गये। बस फिर क्या था, पूर्णिमा व्रत की शक्ति का महत्व पूरे नगर में फैल गया और तब से नगरवासी पूर्णिमा का व्रत विधि विधान से करने लगे।
शरद पूर्णिमा व्रत विधि
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]]>The post Lunar Eclipse 2022 : इस वर्ष लगने वाले चंद्र ग्रहण और उनका प्रभाव appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>वहीं विज्ञान के अनुसार जब कभी पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है तो इससे ही चंद्र ग्रहण ( Lunar Eclipse) की उत्पत्ति होती है। चलिए जानते हैं साल 2022 में लगने वाले चंद्र ग्रहण का भारत में समय (Chandra Grahan 2022 In India)और सूतक काल-
वर्ष 2022 का पहला चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार सोमवार, 16 मई 2022 की सुबह 08 बजकर 59 मिनट से शुरु होकर 10 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण रहेगा। वहीं इस चंद्रग्रहण की भारत में दृश्यता शून्य होने के चलते इसका सूतक काल (Sutak Kaal) मान्य नहीं होगा।

वर्ष 2022 का प्रथम चंद्रग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा, जबकि यह दक्षिणी-पश्चिमी एशिया,अफ्रीका,दक्षिणी-पश्चिमी यूरोप और उत्तरी अमेरिका के अधिकांश हिस्सों में दिखेगा साथ ही यह हिंद महासागर, दक्षिण अमेरिका, अटलांटिक, अंटार्कटिका और प्रशांत महासागर में भी दिखाई देगा।
वर्ष 2022 का दूसरा चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार मंगलवार, 8 नवंबर 2022 को शाम 05 बजकर 28 मिनट से शाम 07 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। पहले चंद्रग्रहण से अलग यह चंद्र ग्रहण भारत में कुछ स्थानों पर दिखेगा। ऐसे में इस ग्रहण का धार्मिक प्रभाव और सूतक भारत में मान्य रहेगा।

दूसरे व वर्ष के अंतिम चंद्रग्रहण को हिंद महासागर, एशिया, उत्तर-पूर्वी यूरोप, अधिकांश दक्षिण अमेरिका, उत्तर अमेरिका, अटलांटिक, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, आर्कटिक सहित प्रशांत महासागर में दिखाई देगा। भारत में भी इस चंद्रग्रहण के दिखाई देने के चलते इसका सूतक देश में भी लगेगा।
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