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Dhanteras 2021: धनतेरस का त्योहार हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाएगा। इस वर्ष कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी 10 नवम्बर 2023 को दोपहर 12:35 बजे से प्रारम्भ होकर 11 नवम्बर 2023 को दोपहर 01:57 बजे तक रहेगी।

धनतेरस को धनत्रयोदशी या धन्वंतरिजयंती के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि देवताओं और दैत्यों के मध्य समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन 14वें रत्न के रूप में धन्वंतरि देव प्रकट हुए थे। धन्वंतरि देव जब प्रकट हुए तो उनके हाथ में अमृत से भरा पीतल का कलश था। इसलिए धनतेरस के दिन पीतल का कोई बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।आइये जानते है कि आप की जन्म राशि के अनुसार धनतेरस के दिन क्या खरीदना शुभ फल दायी होगा:

मेष राशि (Mesh Rashi) –इस राशि का स्वामी मंगल है। धनतरेस के शुभ मुहूर्त पर मेष राशि के जातकों के लिए ताबें की वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। इस दिन आप चाहें तो भूमि में भी निवेश कर सकते हैं। अगर आप इस दिन तांबे की कोई वस्तु नहीं खरीदना चाहते तो आप चांदी या इलेक्ट्रॉनिक का भी कोई समान खरीद सकते हैं। वहीं इस राशि के लोगों को शेयर, केमिकल, चमड़े, लोहे से संबंधित काम में निवेश करने से बचना चाहिए।

वृषभ राशि (Vrishabh Rashi) – वृषभ राशि का स्वामी शुक्र है। इन राशि के लोग धनतेरस के दिन चांदी का कोई सामान खरीद सकते हैं। इसके अलावा धनतेरस के दिन चावल अवश्य खरीदने चाहिए। इस खास मौके पर अनाज, कपड़ा, चांदी, चीनी, चावल, ब्यूटी प्रोडक्ट्स, परफ्यूम, दूध और उससे बने पदार्थ, प्लास्टिक, खाद्य तेल, कपड़े, और रत्नों में निवेश करने या खरीदने से लाभ होगा। इससे मां लक्ष्मी हमेशा कृपा बरसाती रहेंगी।

मिथुन राशि (Mithun Rashi) –मिथुन राशि के जातकों का स्वामी बुध है। बुध व्यापारियों को लाभ देने वाला ग्रह है। मिथुन राशि के जातक धनतेरस पर स्टील के बर्तन खरीद सकते हैं। धनतेरस के दिन आपका वाहन खरीदना या सोने में निवेश करना भी शुभ माना जाता है। इस दिन आप सफेद वस्त्र का दान करें, जिससे आपकी वित्तीय स्थिति बेहतर हो जाएगी। इसके अलावा धनतेरस के दिन कागज, लकड़ी, पीतल, गेहूं, दालें, कपड़ा, स्टील, प्लास्टिक, तेल, सौदर्य सामग्री, सीमेंट, खनिज पदार्थ आदि का व्यापार करने वाले और खरीदने वाले को लाभ मिलेगा।

कर्क राशि (Kark Rashi)-कर्क राशि का स्वामी चंद्र है। धनतेरस के दिन आपका कंपनियों के शेयर और फाइनेंस कंपनियों में निवेश करना लाभदायी होगा। कर्क राशि के लोग धनतेरस के दिन चांदी की वस्तुएं खरीद सकते हैं। इसके अलावा चाहें तो आप स्टील के बर्तन भी खरीद सकते हैं। इस दिन इलेक्ट्रॉनिक का आइटम खरीदना आपके लिए शुभ होगा, यदि आप ऐसा करते हैं तो आपके घर में मां लक्ष्मी का वास हमेशा बना रहेगा।

सिंह राशि (Singh Rashi)-सिंह राशि का स्वामी सूर्य है। धनतेरस के दिन आप शेयर या जमीन-जायदाद में निवेश कर सकते हैं। इस दिन सिंह राशि के जातक तांबे या कांसे की वस्तुओं को खरीद सकते हैं। आप चाहें तो इस खास मौके पर सोने मे निवेश कर सकते हैं या इलेक्ट्रॉनिक का कोई आइटम खरीद सकते हैं। इस दिन आप नए कपड़े भी खरीद सकते हैं ऐसा करने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद आप पर हमेशा बना रहेगा।

ये भी पढ़ें :Dhanteras 2023: जाने तिथि , शुभ मुहूर्त, कथा और पूजा विधि

कन्या राशि (Kanya Rashi) –कन्या राशि का स्वामी बुध है, जिसे चंद्रमा का शत्रु माना जाता है। इन राशि के लोगों के लिए धनतेरस के दिन तांबे के गणेश जी खरीदना शुभ माना जाता है। वहीं इस खास मौके पर आप रसोई के लिए कोई आइटम भी खरीद सकते हैं। इस खास मौके पर अगर आप चाहें तो कांसे या हाथी के दांत से बनी चीजें भी खरीद सकते हैं।

तुला राशि (Tula Rashi) –तुला राशि का स्वामी शुक्र है। इस ऱाशि वालों को इलेक्ट्रॉनिक सामान और तेल में निवेश करना शुभ माना जाता है। तुला राशि के जातक धनतेरस के दिन चांदी या स्टील से बनी कोई भी चीजें खरीद सकते हैं। इसके अलावा आप कोई ब्यूटी प्रोडक्ट्स या घर को सजाने वाली किसी वस्तु को खरीद सकते हैं। ऐसा करने से आपको ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

वृश्चिक राशि (Vrishchik Rashi) –इस राशि के जातकों का स्वामी मंगल है। इस राशि वाले लोगों को धनतेरस के दिन जमीन, मकान, दुकान और वस्त्रों में निवेश करना चाहिए। इस खास मौके पर सोने की वस्तु को खरीदना काफी शुभ माना जाता है। यदि आप चाहें तो इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं भी खरीद सकते हैं। यदि आप इन वस्तुओं को खरीदते हैं तो आपको धनलाभ के कई योग बनेंगे।

धनु राशि (Dhanu Rashi) –इस राशि के लोगों का स्वामी गुरु है। गुरु व्यापारियों को लाभ प्रदान कराने वाला ग्रह है। धनतेरस के दिन सोने का आइटम और अनाज खरीदना शुभ माना जाता है। इसके अलावा आप इस दिन आभूषण, रत्न, अनाज, चांदी और ब्यूटी प्रोडक्टस भी खरीद सकते हैं। यदि आप इस दिन कोई पीली वस्तु खरीद लें तो आपके ऊपर लक्ष्मी के साथ-साथ बृहस्पति देव का भी आशीर्वाद बना रहेगा।

Dhanteras 2023: श्री कुबेर पूजा विधि

मकर राशि (Makar Rashi) – मकर राशि का स्वामी शनि है। धनतेरस के दिन इलेक्ट्रॉनिक सामान, वाहन, इत्र, स्टील और ब्यूटी प्रोडक्ट्स में निवेश से लाभ प्राप्त होता है। मकर राशि के लोग धनतेरस के दिन वाहन खरीद सकते हैं क्योंकि उनके लिए यह दिन काफी शुभ है। इसके अलावा आप मां लक्ष्मी के पूजन के लिए वस्त्र और चांदी का सिक्का भी खरीद सकते हैं। इस पावन अवसर पर यह सब चीजें खरीदने से आपके घर में समृद्धि का वास होगा।

कुम्भ राशि (Kumbh Rashi) –इस राशि के जातकों का स्वामी शनि है। धनतेरस के दिन लोहे, इलेक्ट्रॉनिक सामान, वाहन, इत्र, स्टील आदि वस्तुएं खऱीद सकते हैं। इस दिन आप चाहें तो नीलम रत्न भी खरीद सकते हैं। यह काफी शुभ माना जाता है। यदि आप चाहें तो इस दिन भगवान गणेश और धन की देवी लक्ष्मी के चित्र वाला सोने का सिक्का भी खरीद सकते हैं। ऐसा करने से आपकी आर्थिक स्थिति बेहतर रहेगी।

मीन राशि (Meen Rashi) –मीन राशि वालों का स्वामी गुरु है। चंद्रमा का घनिष्ठ मित्र माना जाता है। धनतेरस के दिन सोना, चांदी, रत्न, आभूषण आदि सामग्रियों को खरीदना शुभ माना जाता है। इसके अलावा आप इस दिन चांदी के बर्तन भी खरीद सकते हैं। अगर आप चाहें तो कोई इलेक्ट्रॉनिक आइटम भी खरीद सकते हैं। ये सब खरीदते हैं तो आप पर मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है।

 

नोट:- ये सब समान खरीदना आपकी इच्छा पे निर्भर करता है जो लोग किसी वजह से समान नहीं खरीद सकते वो भगवान के हाथ जोड़ कर पूजा अर्चना कर प्रसाद ग्रहण करे | बताई गयी वस्तुओं के अलावा धनतेरस के दिन नमक ,हल्दी की गांठ ,लक्ष्मी गणेश जी की मिट्टी की मूर्ति ,साबुत धनिया और झाड़ू भी खरीदना अति शुभ माना जाता है |

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Dhanteras 2023: जाने तिथि , शुभ मुहूर्त, कथा और पूजा विधि https://astrodeeva.com/dhanteras-2023-date-auspicious-time/ https://astrodeeva.com/dhanteras-2023-date-auspicious-time/#comments Thu, 09 Nov 2023 19:37:00 +0000 https://astrodeeva.com/?p=3640 हिन्दू धर्म में दीपावली एक ऐसा त्यौहार है जिसका हर हिन्दू बेसब्री से इंतज़ार करता है और अपनी यथाशक्ति अनुसार इस पर्व को मनाता है। भारत सहित पूरे विश्व में दीपावली का त्यौहार 5 दिन चलता है और हिन्दू कलेंडर के अनुसार इसकी शुरुआत प्रतिवर्ष कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन […]

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हिन्दू धर्म में दीपावली एक ऐसा त्यौहार है जिसका हर हिन्दू बेसब्री से इंतज़ार करता है और अपनी यथाशक्ति अनुसार इस पर्व को मनाता है। भारत सहित पूरे विश्व में दीपावली का त्यौहार 5 दिन चलता है और हिन्दू कलेंडर के अनुसार इसकी शुरुआत प्रतिवर्ष कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन धनतेरस(Dhanteras 2023) पर्व से होती है।

धनतेरस को धनत्रयोदशी या धन्वंतरि जंयती के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि देवताओं और दैत्यों के मध्य समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन 14वें रत्न के रूप में धन्वंतरि देव प्रकट हुए थे। धन्वंतरि देव जब प्रकट हुए तो उनके हाथ में अमृत से भरा पीतल का कलश था। इसलिए धनतेरस के दिन पीतल का कोई बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।

धनतेरस 2023 तिथि और शुभ मुहूर्त – Dhanteras 2023

दिनांक: 10 नवम्बर 2023
वार : शुक्रवार
धनतेरस पूजा मुहूर्त : 05:47 पी एम से 07:43 पी एम

प्रदोष काल : 05:30 पी एम से 08:11 पी एम
वृषभ काल : 05:47 पी एम से 07:43 पी एम

त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ : 10 नवम्बर 2023 को 12:35 पी एम बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 11 नवम्बर 2021 को 01:57 पी एम बजे

धनतेरस की कथा- Legend of Dhanteras

एक बार, देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु से पृथ्वी पर अपनी एक यात्रा के दौरान उनका साथ देने का आग्रह किया। भगवान विष्णु ने उनका आग्रह मान लिया लेकिन इस शर्त पर कि वह सांसारिक प्रलोभनों की ओर आकर्षित नहीं होगी और दक्षिण दिशा में नहीं देखेंगी। देवी लक्ष्मी भगवान विष्णु की इस शर्त से सहमत हो गईं।

जब भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी पृथ्वी की यात्रा कर रहे थे, तब माता लक्ष्मी अपने चंचल प्रवृत्ति के कारण दक्षिण दिशा में देखने के लिए अपनी  इच्छा का विरोध नहीं कर पायी और देखने लगी अतः उन्होंने भगवान विष्णु को दिया हुआ वचन तोड़ दिया और दक्षिण की ओर बढ़ने लगीं। जैसे ही देवी लक्ष्मी ने दक्षिणी दिशा में बढ़ना शुरू किया, वह धरती पर पीले सरसों के फूलों और गन्ने के खेतों की सुंदरता से मंत्रमुग्ध हो गई। सरसों के फूलों की सुंदरता देख उन्होंने खेत से सरसों के फूलों को तोड़ कर खुद को फूलों से सजाया और गन्ने के रस का आनंद लेना शुरू कर दिया।

जब भगवान विष्णु ने ये देखा कि देवी लक्ष्मी ने उनकी प्रतिज्ञा तोड़ दी है, तो वे नाराज हो गए और उन्होंने लक्ष्मी जी को अगले बारह साल तपस्या के रूप में धरती पर बिताने को कहा और उस खेत के मालिक के यहाँ सेवा करने को कहा।

जिसके बाद माता लक्ष्मी ने एक बूढ़ी औरत का रूप धारण किया और उस किसान के घर चली गई। वह किसान बहुत गरीब था। जब वहां लक्ष्मी जी पहुंची तो उन्होंने किसान से उनके घर रहने के लिए आग्रह किया। किसान दयालु था इसलिए एक बूढ़ी औरत को देख उसने उन्हें अपने घर में रहने की हामी भर दी।

देवी लक्ष्मी के आगमन के साथ, धीरे-धीरे गरीब किसान का घर अन्न व धन से भर गया और वह किसान समृद्ध हो गया। इसतरह बारह वर्ष बीत गए और देवी लक्ष्मी के वापस वैकुंठ लौटने का समय आ गया। जब भगवान विष्णु देवी लक्ष्मी को वापस लेने के लिए एक साधारण व्यक्ति के भेष में पृथ्वी पर आए, तो किसान ने उनकी सेवाओं से देवी लक्ष्मी को राहत देने से इनकार कर दिया।

जब भगवान विष्णु के सभी प्रयास विफल हो गए और किसान अपनी सेवाओं से देवी लक्ष्मी को राहत देने के लिए सहमत नहीं हुए, तो देवी लक्ष्मी ने किसान को अपनी असली पहचान बताई और उसे कहा कि वह अब पृथ्वी पर नहीं रह सकती है और उन्हें वैकुंठ लोक लौटना होगा। देवी लक्ष्मी को साक्षात रूप में देख किसान मना नहीं कर सका पर उसने माता से आग्रह किया की वो उसके घर आती रहेंगी। किसान की भक्ति देख लक्ष्मी जी ने वादा किया कि वह हर साल दीवाली से पहले कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी की रात पृथ्वी पर आएँगी और किसान से मिलेंगी।

उसके बाद प्रति वर्ष दिवाली से पहले कृष्ण त्रयोदशी के दिन देवी लक्ष्मी के स्वागत के लिए उस किसान ने अपने घर की सफाई करना शुरू कर दिया और रात भर घी से भरा मिट्टी का दीपक जलाना शुरू कर दिया। देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के इन अनुष्ठानों ने किसान को साल-दर-साल समृद्ध और समृद्ध बना दिया।

यह देख अन्य लोग भी दीपावली से पहले कृष्ण त्रयोदशी की रात को देवी लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर की सफ़ाई करने लगे और उन्हें प्रसन्न कर अपने घर में स्वागत करने के लिए विधि-विधान से पूजा करने लगे।

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धनतेरस की पूजा विधि – Dhanteras 2023 Puja Vidhi

धनतेरस के दिन मानव जीवन की दो महत्वपूर्ण इच्छाओं की पूर्ति के लिए भगवान की विधी-विधान से पूजा की जाती है। इस दिन धन सम्पदा पाने हेतु माता लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा की जाती है और जीवन के दूसरे सबसे बड़े धन उत्तम स्वास्थ के लिए आयुर्वेद के देव धन्वंतरि से पूजा की जाती है।

संध्याकाल में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है|  पूजा के स्थान पर उत्तर दिशा की तरफ भगवान कुबेर और धन्वन्तरि की मूर्ति स्थापना कर उनकी पूजा करनी चाहिए| इनके साथ ही माता लक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश की पूजा का विधान है| ऐसी मान्‍यता है कि भगवान कुबेर को सफेद मिठाई का भोग और  धनवंतरि‍ को पीली मिठाई का भोग लगाना चाहिए | क्योंकि धन्वन्तरि को पीली वस्तु अधिक प्रिय है|  पूजा में फूल, फल, चावल, रोली, चंदन, धूप व दीप का इस्तेमाल करना फलदायक होता है|

इसी दिन परिवार के किसी भी सदस्य की असामयिक मृत्यु से बचने के लिए मृत्यु के देवता यमराज के लिए घर के बाहर दीपक जलाया जाता है जिसे यम दीपम के नाम से जाना जाता है और इस धार्मिक संस्कार को त्रयोदशी तिथि के दिन किया जाता है।

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