if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) { /** * Gets views count. * * @param int $id The Post ID. * @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7]) * @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999) * @return string */ function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) { $attr = array( 'id' => $id, 'range' => $range, 'number_format' => $number_format, ); $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) ); $views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $views ) { $views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format ); wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' ); } return $views; } } if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) { /** * Do Query * * @param $instance * @return array */ function jnews_view_counter_query( $instance ) { $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) ); $query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $query ) { $query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance ); wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' ); } return $query; } } dhanteras puja vidhi in Hindi Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/dhanteras-puja-vidhi-in-hindi/ Daily Dose of Astrology Thu, 09 Nov 2023 19:37:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://astrodeeva.com/wp-content/uploads/2022/03/cropped-Logo-32x32.png dhanteras puja vidhi in Hindi Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/dhanteras-puja-vidhi-in-hindi/ 32 32 Dhanteras 2023: जाने तिथि , शुभ मुहूर्त, कथा और पूजा विधि https://astrodeeva.com/dhanteras-2023-date-auspicious-time/ https://astrodeeva.com/dhanteras-2023-date-auspicious-time/#comments Thu, 09 Nov 2023 19:37:00 +0000 https://astrodeeva.com/?p=3640 हिन्दू धर्म में दीपावली एक ऐसा त्यौहार है जिसका हर हिन्दू बेसब्री से इंतज़ार करता है और अपनी यथाशक्ति अनुसार इस पर्व को मनाता है। भारत सहित पूरे विश्व में दीपावली का त्यौहार 5 दिन चलता है और हिन्दू कलेंडर के अनुसार इसकी शुरुआत प्रतिवर्ष कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन […]

The post Dhanteras 2023: जाने तिथि , शुभ मुहूर्त, कथा और पूजा विधि appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.

]]>
हिन्दू धर्म में दीपावली एक ऐसा त्यौहार है जिसका हर हिन्दू बेसब्री से इंतज़ार करता है और अपनी यथाशक्ति अनुसार इस पर्व को मनाता है। भारत सहित पूरे विश्व में दीपावली का त्यौहार 5 दिन चलता है और हिन्दू कलेंडर के अनुसार इसकी शुरुआत प्रतिवर्ष कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन धनतेरस(Dhanteras 2023) पर्व से होती है।

धनतेरस को धनत्रयोदशी या धन्वंतरि जंयती के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि देवताओं और दैत्यों के मध्य समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन 14वें रत्न के रूप में धन्वंतरि देव प्रकट हुए थे। धन्वंतरि देव जब प्रकट हुए तो उनके हाथ में अमृत से भरा पीतल का कलश था। इसलिए धनतेरस के दिन पीतल का कोई बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।

धनतेरस 2023 तिथि और शुभ मुहूर्त – Dhanteras 2023

दिनांक: 10 नवम्बर 2023
वार : शुक्रवार
धनतेरस पूजा मुहूर्त : 05:47 पी एम से 07:43 पी एम

प्रदोष काल : 05:30 पी एम से 08:11 पी एम
वृषभ काल : 05:47 पी एम से 07:43 पी एम

त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ : 10 नवम्बर 2023 को 12:35 पी एम बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 11 नवम्बर 2021 को 01:57 पी एम बजे

धनतेरस की कथा- Legend of Dhanteras

एक बार, देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु से पृथ्वी पर अपनी एक यात्रा के दौरान उनका साथ देने का आग्रह किया। भगवान विष्णु ने उनका आग्रह मान लिया लेकिन इस शर्त पर कि वह सांसारिक प्रलोभनों की ओर आकर्षित नहीं होगी और दक्षिण दिशा में नहीं देखेंगी। देवी लक्ष्मी भगवान विष्णु की इस शर्त से सहमत हो गईं।

जब भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी पृथ्वी की यात्रा कर रहे थे, तब माता लक्ष्मी अपने चंचल प्रवृत्ति के कारण दक्षिण दिशा में देखने के लिए अपनी  इच्छा का विरोध नहीं कर पायी और देखने लगी अतः उन्होंने भगवान विष्णु को दिया हुआ वचन तोड़ दिया और दक्षिण की ओर बढ़ने लगीं। जैसे ही देवी लक्ष्मी ने दक्षिणी दिशा में बढ़ना शुरू किया, वह धरती पर पीले सरसों के फूलों और गन्ने के खेतों की सुंदरता से मंत्रमुग्ध हो गई। सरसों के फूलों की सुंदरता देख उन्होंने खेत से सरसों के फूलों को तोड़ कर खुद को फूलों से सजाया और गन्ने के रस का आनंद लेना शुरू कर दिया।

जब भगवान विष्णु ने ये देखा कि देवी लक्ष्मी ने उनकी प्रतिज्ञा तोड़ दी है, तो वे नाराज हो गए और उन्होंने लक्ष्मी जी को अगले बारह साल तपस्या के रूप में धरती पर बिताने को कहा और उस खेत के मालिक के यहाँ सेवा करने को कहा।

जिसके बाद माता लक्ष्मी ने एक बूढ़ी औरत का रूप धारण किया और उस किसान के घर चली गई। वह किसान बहुत गरीब था। जब वहां लक्ष्मी जी पहुंची तो उन्होंने किसान से उनके घर रहने के लिए आग्रह किया। किसान दयालु था इसलिए एक बूढ़ी औरत को देख उसने उन्हें अपने घर में रहने की हामी भर दी।

देवी लक्ष्मी के आगमन के साथ, धीरे-धीरे गरीब किसान का घर अन्न व धन से भर गया और वह किसान समृद्ध हो गया। इसतरह बारह वर्ष बीत गए और देवी लक्ष्मी के वापस वैकुंठ लौटने का समय आ गया। जब भगवान विष्णु देवी लक्ष्मी को वापस लेने के लिए एक साधारण व्यक्ति के भेष में पृथ्वी पर आए, तो किसान ने उनकी सेवाओं से देवी लक्ष्मी को राहत देने से इनकार कर दिया।

जब भगवान विष्णु के सभी प्रयास विफल हो गए और किसान अपनी सेवाओं से देवी लक्ष्मी को राहत देने के लिए सहमत नहीं हुए, तो देवी लक्ष्मी ने किसान को अपनी असली पहचान बताई और उसे कहा कि वह अब पृथ्वी पर नहीं रह सकती है और उन्हें वैकुंठ लोक लौटना होगा। देवी लक्ष्मी को साक्षात रूप में देख किसान मना नहीं कर सका पर उसने माता से आग्रह किया की वो उसके घर आती रहेंगी। किसान की भक्ति देख लक्ष्मी जी ने वादा किया कि वह हर साल दीवाली से पहले कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी की रात पृथ्वी पर आएँगी और किसान से मिलेंगी।

उसके बाद प्रति वर्ष दिवाली से पहले कृष्ण त्रयोदशी के दिन देवी लक्ष्मी के स्वागत के लिए उस किसान ने अपने घर की सफाई करना शुरू कर दिया और रात भर घी से भरा मिट्टी का दीपक जलाना शुरू कर दिया। देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के इन अनुष्ठानों ने किसान को साल-दर-साल समृद्ध और समृद्ध बना दिया।

यह देख अन्य लोग भी दीपावली से पहले कृष्ण त्रयोदशी की रात को देवी लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर की सफ़ाई करने लगे और उन्हें प्रसन्न कर अपने घर में स्वागत करने के लिए विधि-विधान से पूजा करने लगे।

ये भी पढ़ें: Dhanteras : श्री कुबेर संपूर्ण पूजा विधि

धनतेरस की पूजा विधि – Dhanteras 2023 Puja Vidhi

धनतेरस के दिन मानव जीवन की दो महत्वपूर्ण इच्छाओं की पूर्ति के लिए भगवान की विधी-विधान से पूजा की जाती है। इस दिन धन सम्पदा पाने हेतु माता लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा की जाती है और जीवन के दूसरे सबसे बड़े धन उत्तम स्वास्थ के लिए आयुर्वेद के देव धन्वंतरि से पूजा की जाती है।

संध्याकाल में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है|  पूजा के स्थान पर उत्तर दिशा की तरफ भगवान कुबेर और धन्वन्तरि की मूर्ति स्थापना कर उनकी पूजा करनी चाहिए| इनके साथ ही माता लक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश की पूजा का विधान है| ऐसी मान्‍यता है कि भगवान कुबेर को सफेद मिठाई का भोग और  धनवंतरि‍ को पीली मिठाई का भोग लगाना चाहिए | क्योंकि धन्वन्तरि को पीली वस्तु अधिक प्रिय है|  पूजा में फूल, फल, चावल, रोली, चंदन, धूप व दीप का इस्तेमाल करना फलदायक होता है|

इसी दिन परिवार के किसी भी सदस्य की असामयिक मृत्यु से बचने के लिए मृत्यु के देवता यमराज के लिए घर के बाहर दीपक जलाया जाता है जिसे यम दीपम के नाम से जाना जाता है और इस धार्मिक संस्कार को त्रयोदशी तिथि के दिन किया जाता है।

The post Dhanteras 2023: जाने तिथि , शुभ मुहूर्त, कथा और पूजा विधि appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.

]]>
https://astrodeeva.com/dhanteras-2023-date-auspicious-time/feed/ 1
Dhanteras 2021: धनतेरस को उत्तम फल के लिए राशि अनुसार खरीदे ये चीजें https://astrodeeva.com/dhanteras-%e0%a4%a7%e0%a4%a8%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%b8-2021-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae-%e0%a4%ab%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%b0%e0%a4%be/ https://astrodeeva.com/dhanteras-%e0%a4%a7%e0%a4%a8%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%b8-2021-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae-%e0%a4%ab%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%b0%e0%a4%be/#respond Sat, 30 Oct 2021 08:09:02 +0000 https://astrodeeva.com/?p=2640 Dhanteras 2021: धनतेरस का त्योहार 2 नवंबर 2021 को मंगलवार के दिन और हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाएगा। इस वर्ष कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी 02 नवम्बर 2021 को 11:31 ए एम बजे से प्रारम्भ होकर 03 नवम्बर 2021 को 09:02 ए एम बजे तक रहेगी। धनतेरस […]

The post Dhanteras 2021: धनतेरस को उत्तम फल के लिए राशि अनुसार खरीदे ये चीजें appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.

]]>
Dhanteras 2021: धनतेरस का त्योहार 2 नवंबर 2021 को मंगलवार के दिन और हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाएगा। इस वर्ष कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी 02 नवम्बर 2021 को 11:31 ए एम बजे से प्रारम्भ होकर 03 नवम्बर 2021 को 09:02 ए एम बजे तक रहेगी।

धनतेरस को धनत्रयोदशी या धन्वंतरिजयंती के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि देवताओं और दैत्यों के मध्य समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन 14वें रत्न के रूप में धन्वंतरि देव प्रकट हुए थे। धन्वंतरि देव जब प्रकट हुए तो उनके हाथ में अमृत से भरा पीतल का कलश था। इसलिए धनतेरस के दिन पीतल का कोई बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।आइये जानते है कि आप की जन्म राशि के अनुसार धनतेरस के दिन क्या खरीदना शुभ फल दायी होगा:

मेष राशि (Mesh Rashi) – मेष राशि के जातको को सोने-चांदी के आभूषण या सिक्के, बर्तन, लाल रंग के वस्त्र आदि की खरीदारी करना शुभ रहेगा |

वृषभ राशि (Vrishabh Rashi) – वृषभ राशि के जातको को सोना, चांदी, पीतल, कम्प्यूटर, बर्तन, केशर, चंदन, कलम आदि खरीदना अति शुभ रहेगा रहेगा |

मिथुन राशि (Mithun Rashi) – इस राशि के जातकों के लिए भूमि, मकान, सोना, चांदी, कांसे के बर्तन, हरे रंग के वस्त्र या इलेक्ट्रॉनिक समान खरीदना शुभ रहेगा |

कर्क राशि (Kark Rashi)- कर्क राशि के जातकों को सोना-चांदी, नया वाहन, आभूषण खरीदना शुभ रहेगा |

सिंह राशि (Singh Rashi)- सिंह राशि के जातकों के लिए नया वाहन, इलेक्ट्रानिक्स, सोना-चांदी, भूमि, तांबे-पीतल के बर्तन, फर्नीचर शुभ रहेगा |

ये भी पढ़ें :Dhanteras 2021: जाने तिथि , शुभ मुहूर्त, कथा और पूजा विधि

कन्या राशि (Kanya Rashi) – इस राशि के जातकों के लिए कांसे के बर्तन, भूमि, भवन, अनाज आदि के साथ हरे रंग के वस्त्र और इलेक्ट्रॉनिक्स समान की खरीदारी करना शुभ रहेगा |

तुला राशि (Tula Rashi) – तुला राशि के जातकों के लिए रजत यानी चांदी, वाइट गोल्ड, सफ़ेद धान और चमक धमक वाले वस्त्र खरीदना शुभ रहेगा |

वृश्चिक राशि (Vrishchik Rashi) – वृश्चिक राशि के जातको को धनतेरस के दिन सोना-चांदी, तांबे के बर्तन, लाल रंग के वस्त्र की खरीदनी करना शुभ रहेगा |

धनु राशि (Dhanu Rashi) – धनु राशि के जातको को पुस्तकें, जमीन-जायदाद, स्वर्ण या पीतल की धातु से बना कोई भी बर्तन जैसे कलश, पीले वस्त्र दोपहर के समय खरीदना शुभ रहेगा |

Dhanteras 2021: श्री कुबेर पूजा विधि

मकर राशि (Makar Rashi) –  मकर राशि के जातकों के लिए चांदी, घर की जरूरत की कोई भी चीज , वस्त्र खरीदना शुभ रहेगा |

कुम्भ राशि (Kumbh Rashi) – इस राशि के जातकों के लिए किताबें, वाहन, फर्नीचर, घर की जरूरी चीजें , मिश्रित धातु, सोना-चांदी खरीदना शुभ रहेगा |

मीन राशि (Meen Rashi) – मीन राशि के जातकों के लिए सोने-चांदी, रत्न , पीले वस्त्र, पीतल के बर्तन, ऊनी परिधान खरीदना शुभ रहेगा |

 

नोट:- ये सब समान खरीदना आपकी इच्छा पे निर्भर करता है जो लोग किसी वजह से समान नहीं खरीद सकते वो भगवान के हाथ जोड़ कर पूजा अर्चना कर प्रसाद ग्रहण करे | बताई गयी वस्तुओं के अलावा धनतेरस के दिन नमक ,हल्दी की गांठ ,लक्ष्मी गणेश जी की मिट्टी की मूर्ति ,साबुत धनिया और झाड़ू भी खरीदना अति शुभ माना जाता है |

The post Dhanteras 2021: धनतेरस को उत्तम फल के लिए राशि अनुसार खरीदे ये चीजें appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.

]]>
https://astrodeeva.com/dhanteras-%e0%a4%a7%e0%a4%a8%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%b8-2021-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae-%e0%a4%ab%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%b0%e0%a4%be/feed/ 0
Dhanteras 2021: जाने तिथि , शुभ मुहूर्त, कथा और पूजा विधि https://astrodeeva.com/dhanteras-2021-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a5%e0%a4%bf-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%ad-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%95/ https://astrodeeva.com/dhanteras-2021-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a5%e0%a4%bf-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%ad-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%95/#respond Sat, 30 Oct 2021 06:36:18 +0000 https://astrodeeva.com/?p=2634 हिन्दू धर्म में दीपावली एक ऐसा त्यौहार है जिसका हर हिन्दू बेसब्री से इंतज़ार करता है और अपनी यथाशक्ति अनुसार इस पर्व को मनाता है। भारत सहित पूरे विश्व में दीपावली का त्यौहार 5 दिन चलता है और हिन्दू कलेंडर के अनुसार इसकी शुरुआत प्रतिवर्ष कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन […]

The post Dhanteras 2021: जाने तिथि , शुभ मुहूर्त, कथा और पूजा विधि appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.

]]>
हिन्दू धर्म में दीपावली एक ऐसा त्यौहार है जिसका हर हिन्दू बेसब्री से इंतज़ार करता है और अपनी यथाशक्ति अनुसार इस पर्व को मनाता है। भारत सहित पूरे विश्व में दीपावली का त्यौहार 5 दिन चलता है और हिन्दू कलेंडर के अनुसार इसकी शुरुआत प्रतिवर्ष कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन धनतेरस(Dhanteras) पर्व से होती है।

धनतेरस को धनत्रयोदशी या धन्वंतरि जंयती के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि देवताओं और दैत्यों के मध्य समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन 14वें रत्न के रूप में धन्वंतरि देव प्रकट हुए थे। धन्वंतरि देव जब प्रकट हुए तो उनके हाथ में अमृत से भरा पीतल का कलश था। इसलिए धनतेरस के दिन पीतल का कोई बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।

धनतेरस 2021 तिथि और शुभ मुहूर्त – Dhanteras 2021

दिनांक: 02 नवम्बर 2021
वार : मंगलवार
धनतेरस पूजा मुहूर्त : 06:17 पी एम से 08:11 पी एम
प्रदोष काल : 05:35 पी एम से 08:11 पी एम
वृषभ काल : 06:17 पी एम से 08:12 पी एम
त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ : 02 नवम्बर 2021 को 11:31 ए एम बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 03 नवम्बर 2021 को 09:02 ए एम बजे

धनतेरस की कथा- Legend of Dhanteras

एक बार, देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु से पृथ्वी पर अपनी एक यात्रा के दौरान उनका साथ देने का आग्रह किया। भगवान विष्णु ने उनका आग्रह मान लिया लेकिन इस शर्त पर कि वह सांसारिक प्रलोभनों की ओर आकर्षित नहीं होगी और दक्षिण दिशा में नहीं देखेंगी। देवी लक्ष्मी भगवान विष्णु की इस शर्त से सहमत हो गईं।

जब भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी पृथ्वी की यात्रा कर रहे थे, तब माता लक्ष्मी अपने चंचल प्रवृत्ति के कारण दक्षिण दिशा में देखने के लिए अपनी  इच्छा का विरोध नहीं कर पायी और देखने लगी अतः उन्होंने भगवान विष्णु को दिया हुआ वचन तोड़ दिया और दक्षिण की ओर बढ़ने लगीं। जैसे ही देवी लक्ष्मी ने दक्षिणी दिशा में बढ़ना शुरू किया, वह धरती पर पीले सरसों के फूलों और गन्ने के खेतों की सुंदरता से मंत्रमुग्ध हो गई। सरसों के फूलों की सुंदरता देख उन्होंने खेत से सरसों के फूलों को तोड़ कर खुद को फूलों से सजाया और गन्ने के रस का आनंद लेना शुरू कर दिया।

जब भगवान विष्णु ने ये देखा कि देवी लक्ष्मी ने उनकी प्रतिज्ञा तोड़ दी है, तो वे नाराज हो गए और उन्होंने लक्ष्मी जी को अगले बारह साल तपस्या के रूप में धरती पर बिताने को कहा और उस खेत के मालिक के यहाँ सेवा करने को कहा।

जिसके बाद माता लक्ष्मी ने एक बूढ़ी औरत का रूप धारण किया और उस किसान के घर चली गई। वह किसान बहुत गरीब था। जब वहां लक्ष्मी जी पहुंची तो उन्होंने किसान से उनके घर रहने के लिए आग्रह किया। किसान दयालु था इसलिए एक बूढ़ी औरत को देख उसने उन्हें अपने घर में रहने की हामी भर दी।

देवी लक्ष्मी के आगमन के साथ, धीरे-धीरे गरीब किसान का घर अन्न व धन से भर गया और वह किसान समृद्ध हो गया। इसतरह बारह वर्ष बीत गए और देवी लक्ष्मी के वापस वैकुंठ लौटने का समय आ गया। जब भगवान विष्णु देवी लक्ष्मी को वापस लेने के लिए एक साधारण व्यक्ति के भेष में पृथ्वी पर आए, तो किसान ने उनकी सेवाओं से देवी लक्ष्मी को राहत देने से इनकार कर दिया।

जब भगवान विष्णु के सभी प्रयास विफल हो गए और किसान अपनी सेवाओं से देवी लक्ष्मी को राहत देने के लिए सहमत नहीं हुए, तो देवी लक्ष्मी ने किसान को अपनी असली पहचान बताई और उसे कहा कि वह अब पृथ्वी पर नहीं रह सकती है और उन्हें वैकुंठ लोक लौटना होगा। देवी लक्ष्मी को साक्षात रूप में देख किसान मना नहीं कर सका पर उसने माता से आग्रह किया की वो उसके घर आती रहेंगी। किसान की भक्ति देख लक्ष्मी जी ने वादा किया कि वह हर साल दीवाली से पहले कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी की रात पृथ्वी पर आएँगी और किसान से मिलेंगी।

उसके बाद प्रति वर्ष दिवाली से पहले कृष्ण त्रयोदशी के दिन देवी लक्ष्मी के स्वागत के लिए उस किसान ने अपने घर की सफाई करना शुरू कर दिया और रात भर घी से भरा मिट्टी का दीपक जलाना शुरू कर दिया। देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के इन अनुष्ठानों ने किसान को साल-दर-साल समृद्ध और समृद्ध बना दिया।

यह देख अन्य लोग भी दीपावली से पहले कृष्ण त्रयोदशी की रात को देवी लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर की सफ़ाई करने लगे और उन्हें प्रसन्न कर अपने घर में स्वागत करने के लिए विधि-विधान से पूजा करने लगे।

ये भी पढ़ें: Dhanteras : श्री कुबेर संपूर्ण पूजा विधि

धनतेरस की पूजा विधि – Dhanteras Puja Vidhi

धनतेरस के दिन मानव जीवन की दो महत्वपूर्ण इच्छाओं की पूर्ति के लिए भगवान की विधी-विधान से पूजा की जाती है। इस दिन धन सम्पदा पाने हेतु माता लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा की जाती है और जीवन के दूसरे सबसे बड़े धन उत्तम स्वास्थ के लिए आयुर्वेद के देव धन्वंतरि से पूजा की जाती है।

संध्याकाल में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है|  पूजा के स्थान पर उत्तर दिशा की तरफ भगवान कुबेर और धन्वन्तरि की मूर्ति स्थापना कर उनकी पूजा करनी चाहिए| इनके साथ ही माता लक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश की पूजा का विधान है| ऐसी मान्‍यता है कि भगवान कुबेर को सफेद मिठाई का भोग और  धनवंतरि‍ को पीली मिठाई का भोग लगाना चाहिए | क्योंकि धन्वन्तरि को पीली वस्तु अधिक प्रिय है|  पूजा में फूल, फल, चावल, रोली, चंदन, धूप व दीप का इस्तेमाल करना फलदायक होता है|

इसी दिन परिवार के किसी भी सदस्य की असामयिक मृत्यु से बचने के लिए मृत्यु के देवता यमराज के लिए घर के बाहर दीपक जलाया जाता है जिसे यम दीपम के नाम से जाना जाता है और इस धार्मिक संस्कार को त्रयोदशी तिथि के दिन किया जाता है।

The post Dhanteras 2021: जाने तिथि , शुभ मुहूर्त, कथा और पूजा विधि appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.

]]>
https://astrodeeva.com/dhanteras-2021-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a5%e0%a4%bf-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%ad-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%95/feed/ 0
Dhanteras 2020: उत्तम फल के लिए राशि अनुसार खरीदे ये चीजें https://astrodeeva.com/dhanteras-2020-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae-%e0%a4%ab%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a4%bf-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%81/ https://astrodeeva.com/dhanteras-2020-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae-%e0%a4%ab%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a4%bf-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%81/#respond Thu, 12 Nov 2020 19:03:26 +0000 https://astrodeeva.com/?p=1347 आज कार्तिक पक्ष की त्रयोदशी और शुक्रवार का दिन है आज त्रयोदशी शाम 05:59 तक रहेगी और उसके बाद रूप चतुर्दर्शी शाम 06:00 बजे से शुरू होकर शनिवार 14 नवम्बर दोपहर 2:17 तक रहेगी | धनतेरस को धनत्रयोदशी या धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि देवताओं और दैत्यों के मध्य समुद्र […]

The post Dhanteras 2020: उत्तम फल के लिए राशि अनुसार खरीदे ये चीजें appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.

]]>
आज कार्तिक पक्ष की त्रयोदशी और शुक्रवार का दिन है आज त्रयोदशी शाम 05:59 तक रहेगी और उसके बाद रूप चतुर्दर्शी शाम 06:00 बजे से शुरू होकर शनिवार 14 नवम्बर दोपहर 2:17 तक रहेगी |

धनतेरस को धनत्रयोदशी या धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि देवताओं और दैत्यों के मध्य समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन 14वें रत्न के रूप में धन्वंतरि देव प्रकट हुए थे। धन्वंतरि देव जब प्रकट हुए तो उनके हाथ में अमृत से भरा पीतल का कलश था। इसलिए धनतेरस के दिन पीतल का कोई बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।

आइये जानते है कि आप की जन्म राशि के अनुसार आज धनतेरस के दिन क्या खरीदना शुभ फल दायी होगा:

मेष राशि

मेष राशि वालों के लिए आज के दिन जमीन ,मकान ,सोना ,चांदी खरीदारी करना शुभ रहेगा |

वृषभ राशि

आज के दिन वृषभ राशि वालों के लिए वाहन खरीदना अति शुभ रहेगा और साथ साथ हीरे मोती के जवहारात खरीदना शुभ रहेगा |

मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों के लिए जमीन या इलेक्ट्रॉनिक समान खरीदना शुभ रहेगा|

कर्क राशि

कर्क राशि वालों को बैंक मे फिक्स डिपोसीट करना शुभ रहेगा |

सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए सोना, पीतल या तांबा खरीदना अति शुभ रहेगा |

ये भी पढ़ें : Dhanteras 2020: जाने तिथि , शुभ मुहूर्त, कथा और पूजा विधि

कन्या राशि

कन्या राशि वालों के लिए भूमि भवन आदि के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स समान की खरीदारी करना शुभ रहेगा |

तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए बैंक मे फिक्स डिपोसीट या चांदी की कोई वस्तु खरीदना शुभ रहेगा|

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के जातको को  आज के दिन किसी जमीन मे निवेश या चांदी की कोई वस्तु खरीदनी शुभ रहेगा|

धनु राशि

धनु राशि वालों को आज के दिन शेयर बाजार मे निवेश ,इलेक्ट्रॉनिक समान या जमीन मे निवेश करना शुभ रहेगा |

Dhanteras 2020: श्री कुबेर पूजा विधि

मकर राशि

मकर राशि के जातकों के लिए आज के दिन फर्नीचर चांदी या जमीन खरीदना शुभ रहेगा |

कुम्भ राशि

कुम्भ राशि के जातकों के लिए आज के दिन चांदी का समान खरीदना शुभ रहेगा |

मीन राशि

मीन राशि के जातकों के लिए आज के दिन कोई भी पीतल से बनी वस्तु या सोने का समान खरीदना शुभ रहेगा |

 

नोट:- ये सब समान खरीदना आपकी इच्छा पे निर्भर करता है जो लोग किसी वजह से समान नहीं खरीद सकते वो भगवान के हाथ जोड़ कर पूजा अर्चना कर प्रसाद ग्रहण करे | बताई गयी वस्तुओं के अलावा धनतेरस के दिन नमक ,हल्दी की गांठ ,लक्ष्मी गणेश जी की मिट्टी की मूर्ति ,साबुत धनिया और झाड़ू भी खरीदना अति शुभ माना जाता है |

The post Dhanteras 2020: उत्तम फल के लिए राशि अनुसार खरीदे ये चीजें appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.

]]>
https://astrodeeva.com/dhanteras-2020-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae-%e0%a4%ab%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a4%bf-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%81/feed/ 0
Dhanteras 2020: जाने तिथि , शुभ मुहूर्त, कथा और पूजा विधि https://astrodeeva.com/dhanteras-2020-%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a5%e0%a4%bf-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%ad-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c/ https://astrodeeva.com/dhanteras-2020-%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a5%e0%a4%bf-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%ad-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c/#comments Thu, 12 Nov 2020 02:32:07 +0000 https://astrodeeva.com/?p=1341 हिन्दू धर्म में दीपावली एक ऐसा त्यौहार है जिसका हर हिन्दू बेसब्री से इंतज़ार करता है और अपनी यथाशक्ति अनुसार इस पर्व को मनाता है। भारत सहित पूरे विश्व में दीपावली का त्यौहार 5 दिन चलता है और हिन्दू कलेंडर के अनुसार इसकी शुरुआत प्रतिवर्ष कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन […]

The post Dhanteras 2020: जाने तिथि , शुभ मुहूर्त, कथा और पूजा विधि appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.

]]>
हिन्दू धर्म में दीपावली एक ऐसा त्यौहार है जिसका हर हिन्दू बेसब्री से इंतज़ार करता है और अपनी यथाशक्ति अनुसार इस पर्व को मनाता है। भारत सहित पूरे विश्व में दीपावली का त्यौहार 5 दिन चलता है और हिन्दू कलेंडर के अनुसार इसकी शुरुआत प्रतिवर्ष कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन धनतेरस पर्व से होती है।

धनतेरस को धनत्रयोदशी या धन्वंतरि जंयती के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि देवताओं और दैत्यों के मध्य समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन 14वें रत्न के रूप में धन्वंतरि देव प्रकट हुए थे। धन्वंतरि देव जब प्रकट हुए तो उनके हाथ में अमृत से भरा पीतल का कलश था। इसलिए धनतेरस के दिन पीतल का कोई बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।

धनतेरस 2020 तिथि और शुभ मुहूर्त

दिनांक: 13 नवम्बर 2020

वार : शुक्रवार

धनतेरस पूजा मुहूर्त : 05:28 पी एम से 05:59 पी एम

प्रदोष काल : 05:28 पी एम से 08:07 पी एम

वृषभ काल : 05:32 पी एम से 07:28 पी एम

त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ : 12 नवम्बर 2020 को 09:30 पी एम बजे

त्रयोदशी तिथि समाप्त: 13 नवम्बर 2020 को 05:59 पी एम बजे

धनतेरस की कथा

एक बार, देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु से पृथ्वी पर अपनी एक यात्रा के दौरान उनका साथ देने का आग्रह किया। भगवान विष्णु ने उनका आग्रह मान लिया लेकिन इस शर्त पर कि वह सांसारिक प्रलोभनों की ओर आकर्षित नहीं होगी और दक्षिण दिशा में नहीं देखेंगी। देवी लक्ष्मी भगवान विष्णु की इस शर्त से सहमत हो गईं।

जब भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी पृथ्वी की यात्रा कर रहे थे, तब माता लक्ष्मी अपने चंचल प्रवृत्ति के कारण दक्षिण दिशा में देखने के लिए अपनी  इच्छा का विरोध नहीं कर पायी और देखने लगी अतः उन्होंने भगवान विष्णु को दिया हुआ वचन तोड़ दिया और दक्षिण की ओर बढ़ने लगीं। जैसे ही देवी लक्ष्मी ने दक्षिणी दिशा में बढ़ना शुरू किया, वह धरती पर पीले सरसों के फूलों और गन्ने के खेतों की सुंदरता से मंत्रमुग्ध हो गई। सरसों के फूलों की सुंदरता देख उन्होंने खेत से सरसों के फूलों को तोड़ कर खुद को फूलों से सजाया और गन्ने के रस का आनंद लेना शुरू कर दिया।

जब भगवान विष्णु ने ये देखा कि देवी लक्ष्मी ने उनकी प्रतिज्ञा तोड़ दी है, तो वे नाराज हो गए और उन्होंने लक्ष्मी जी को अगले बारह साल तपस्या के रूप में धरती पर बिताने को कहा और उस खेत के मालिक के यहाँ सेवा करने को कहा।

जिसके बाद माता लक्ष्मी ने एक बूढ़ी औरत का रूप धारण किया और उस किसान के घर चली गई। वह किसान बहुत गरीब था। जब वहां लक्ष्मी जी पहुंची तो उन्होंने किसान से उनके घर रहने के लिए आग्रह किया। किसान दयालु था इसलिए एक बूढ़ी औरत को देख उसने उन्हें अपने घर में रहने की हामी भर दी।

देवी लक्ष्मी के आगमन के साथ, धीरे-धीरे गरीब किसान का घर अन्न व धन से भर गया और वह किसान समृद्ध हो गया। इसतरह बारह वर्ष बीत गए और देवी लक्ष्मी के वापस वैकुंठ लौटने का समय आ गया। जब भगवान विष्णु देवी लक्ष्मी को वापस लेने के लिए एक साधारण व्यक्ति के भेष में पृथ्वी पर आए, तो किसान ने उनकी सेवाओं से देवी लक्ष्मी को राहत देने से इनकार कर दिया।

जब भगवान विष्णु के सभी प्रयास विफल हो गए और किसान अपनी सेवाओं से देवी लक्ष्मी को राहत देने के लिए सहमत नहीं हुए, तो देवी लक्ष्मी ने किसान को अपनी असली पहचान बताई और उसे कहा कि वह अब पृथ्वी पर नहीं रह सकती है और उन्हें वैकुंठ लोक लौटना होगा। देवी लक्ष्मी को साक्षात रूप में देख किसान मना नहीं कर सका पर उसने माता से आग्रह किया की वो उसके घर आती रहेंगी। किसान की भक्ति देख लक्ष्मी जी ने वादा किया कि वह हर साल दीवाली से पहले कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी की रात पृथ्वी पर आएँगी और किसान से मिलेंगी।

उसके बाद प्रति वर्ष दिवाली से पहले कृष्ण त्रयोदशी के दिन देवी लक्ष्मी के स्वागत के लिए उस किसान ने अपने घर की सफाई करना शुरू कर दिया और रात भर घी से भरा मिट्टी का दीपक जलाना शुरू कर दिया। देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के इन अनुष्ठानों ने किसान को साल-दर-साल समृद्ध और समृद्ध बना दिया।

ये भी पढ़ें: Dhanteras : श्री कुबेर पूजा विधि

 

यह देख अन्य लोग भी दीपावली से पहले कृष्ण त्रयोदशी की रात को देवी लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर की सफ़ाई करने लगे और उन्हें प्रसन्न कर अपने घर में स्वागत करने के लिए विधि-विधान से पूजा करने लगे।

धनतेरस की पूजा विधि

धनतेरस के दिन मानव जीवन की दो महत्वपूर्ण इच्छाओं की पूर्ति के लिए भगवान की विधी-विधान से पूजा की जाती है। इस दिन धन सम्पदा पाने हेतु माता लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा की जाती है और जीवन के दूसरे सबसे बड़े धन उत्तम स्वास्थ के लिए आयुर्वेद के देव धन्वंतरि से पूजा की जाती है।

संध्याकाल में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है|  पूजा के स्थान पर उत्तर दिशा की तरफ भगवान कुबेर और धन्वन्तरि की मूर्ति स्थापना कर उनकी पूजा करनी चाहिए| इनके साथ ही माता लक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश की पूजा का विधान है| ऐसी मान्‍यता है कि भगवान कुबेर को सफेद मिठाई का भोग और  धनवंतरि‍ को पीली मिठाई का भोग लगाना चाहिए | क्योंकि धन्वन्तरि को पीली वस्तु अधिक प्रिय है|  पूजा में फूल, फल, चावल, रोली, चंदन, धूप व दीप का इस्तेमाल करना फलदायक होता है|

इसी दिन परिवार के किसी भी सदस्य की असामयिक मृत्यु से बचने के लिए मृत्यु के देवता यमराज के लिए घर के बाहर दीपक जलाया जाता है जिसे यम दीपम के नाम से जाना जाता है और इस धार्मिक संस्कार को त्रयोदशी तिथि के दिन किया जाता है।

The post Dhanteras 2020: जाने तिथि , शुभ मुहूर्त, कथा और पूजा विधि appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.

]]>
https://astrodeeva.com/dhanteras-2020-%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a5%e0%a4%bf-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%ad-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c/feed/ 2
Dhanteras : श्री कुबेर पूजा विधि https://astrodeeva.com/dhanteras-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%bf/ https://astrodeeva.com/dhanteras-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%bf/#comments Tue, 10 Nov 2020 02:58:53 +0000 https://astrodeeva.com/?p=1333 श्री कुबेर महामुनि विश्रवा के पुत्र थे। कुबेर जी का जन्म विश्रवा की प्रथम पत्नी इलवती के गर्भ से हुआ था, जबकि उनकी दूसरी पत्नी कैकसी के गर्भ से रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण और शूर्पणखा का जन्म हुआ था। हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार माँ लक्ष्मी धन की देवी हैं उसी तरह कुबेर देव को धन का […]

The post Dhanteras : श्री कुबेर पूजा विधि appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.

]]>
श्री कुबेर महामुनि विश्रवा के पुत्र थे। कुबेर जी का जन्म विश्रवा की प्रथम पत्नी इलवती के गर्भ से हुआ था, जबकि उनकी दूसरी पत्नी कैकसी के गर्भ से रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण और शूर्पणखा का जन्म हुआ था। हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार माँ लक्ष्मी धन की देवी हैं उसी तरह कुबेर देव को धन का देवता माना गया है। ये देवताओं के भी कोषाध्यक्ष है और इस संसार में जो भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष ऐश्वर्य है उन सभी के अधिष्ठाता देव कुबेर को कहा गया है।

भारत और पूरे विश्व में हिंदुओं के सबसे प्रमुख त्यौहार दीपावली के पाँच दिवसीय पर्व का शुभ आरंभ धनतेरस से होता है। धनतेरस के दिन माँ लक्ष्मी , श्री गणेश और कुबेर देव की पूजा की जाती है। जो भक्त कुबेर देव की पूजा पूरे विधि-विधान से करता है उसको उदारता, सौम्यता, शांति और तृप्ति की प्राप्ति होती है। उस भक्त के लिए कुबेर देव अपने ख़ज़ाने के द्वार खोल देते है जिससे उसे कभी भी धन समस्याओं का सामना नही करना पड़ता है।

धनतेरस 2021 तिथि और शुभ मुहूर्त – Dhanteras 2021

दिनांक: 02 नवम्बर 2021
वार : मंगलवार
धनतेरस पूजा मुहूर्त : 06:17 पी एम से 08:11 पी एम
प्रदोष काल : 05:35 पी एम से 08:11 पी एम
वृषभ काल : 06:17 पी एम से 08:12 पी एम
त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ : 02 नवम्बर 2021 को 11:31 ए एम बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 03 नवम्बर 2021 को 09:02 ए एम बजे

धनतेरस के दिन लक्ष्मी पूजा को प्रदोष काल में किया जाना चाहिए जो कि सूर्यास्त के बाद प्रारम्भ होता है और लगभग 2 घण्टे 24 मिनट तक रहता है।

कुबेर देव की पूजा विधि

श्री कुबेर की मूर्ति है तो वह पूजा में उपयोग की जा सकती है। अगर आपके पास कुबेर की मूर्ति नहीं है तो आप तिजोरी या गहनों के बक्से को श्री कुबेर का रूप मान कर उनकी पूजा करनी चहिये। तिजोरी, बक्से आदि की पूजा से पहले सिन्दूर से स्वस्तिक-चिह्न बनाना चाहिए और उस पर ‘मौली’ बाँधना चाहिये।

1.सर्व प्रथम निम्नलिखित मन्त्र द्वारा श्री कुबेर जी का ध्यान करें।

मनुज –ब्रह्मा –विमान –स्थितम, 
गरुड़ –रत्न –निभं निधि –नायकम। 
शिव –सखम  मुकुटादि –विभूषिताम , 
वर –गड़े दधतं भजे  तुन्दिलम ॥

अर्थात –मानव-स्वरूप विमान पर विराजमान, श्रेष्ठ गरुड़ के समान सभी निधियों के स्वामी, भगवान् शिव के मित्र, मुकुट आदि से सुशोभित और हाथों में वर-मुद्रा एवं गदा धारण करनेवाले भव्य श्रीकुबेर जी की मैं वन्दना करता हूँ।

 

2.भगवान कुबेर का ध्यान करते हुए उनकी मूर्ति या तिजोरी या गहनों के बक्से सम्मुख निम्न मन्त्र द्वारा उनका आवाहन करें।

आवाहयामि  देव ! त्वामिहायाहि  कृपाम  कुरु ।

कोषम  वर्ध्दन्या  नित्यं , तवं  परी–रक्ष  सुरेश्वर ॥

॥ श्री  कुबेर –देवम  आवाहयामि ॥

अर्थात – हे देव, सुरेश्वर! मैं आपका आवाहन करता हूँ। आप कृपा कर यहाँ पधारें और सदा मेरे भण्डार की वृद्धि करें और रक्षा करें और कहें:

॥मैं श्रीकुबेर देव का आवाहन करता हूँ॥

 

3.आवाहन करने के उपरांत निम्न मन्त्र पढ़कर श्रीकुबेर देव के आसन के लिए पाँच पुष्प अञ्जलि( हथेलियों पर बनाया गया गड्ढा) में लेकर अपनेसामने श्री कुबेर की मूर्ति अथवा तिजोरी-बक्से आदि के निकट छोड़े।

नाना –रत्न –समायुक्तं  कर्त्य –स्वर –विभूषिताम । 
आसनं  देव –देवेश ! प्रीत्यर्थं  प्रति -गृह्यताम ॥ 
॥ श्री  कुबेर -देवाय  आसनार्थे  पंचा -पुष्पाणि  समर्पयामि ॥

अर्थात- हे देवताओं के ईश्वर! विविध प्रकार के रत्न से युक्त स्वर्ण-सज्जित आसन को प्रसन्नता पूर्वक ग्रहण करें और और कहें:
॥भगवान् श्रीकुबेर के आसन के लिए मैं पाँच पुष्प अर्पित करता हूँ॥

 

4.इसके बाद ‘चन्दन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य’ से भगवान् श्रीकुबेर का पूजन निम्न मन्त्रों द्वारा करें।

ॐ  श्री  कुबेराय  नमः  पद्यों  पद्यम  समर्पयामि । 
ॐ  श्री  कुबेराय  नमः शिरसि  अर्घ्यम  समर्पयामि । 
ॐ  श्री  कुबेराय  नमः गन्धाक्षतं समर्पयामि । 
ॐ  श्री  कुबेराय  नमः पुष्पम  समर्पयामि । 
ॐ  श्री  कुबेराय  नमः धूपं  घ्रापयामि । 
ॐ  श्री  कुबेराय  नमः दीपम  दर्शयामि । 
ॐ  श्री  कुबेराय  नमः नैवेद्यम  समर्पयामि । 
ॐ  श्री  कुबेराय  नमः आचमनीयं  समर्पयामि । 
ॐ  श्री  कुबेराय  नमः ताम्बूलं  समर्पयामि ।

 

5.बतायी गयी विधि से पूजन करने के बाद बाएँ हाथ में गन्ध, अक्षत, पुष्प लेकर दाहिने हाथ द्वारा निम्न मन्त्र पढ़ते हुए श्री कुबेर जी की मूर्ति ‘यातिजोरी-बक्से’ आदि पर छोड़े।

ॐ  श्री  कुबेराय  नमः । 
अनेन  पूजने  श्री  धनाध्यक्ष -श्री  कुबेर  प्रियतम ।
नमो  नमः ।

अर्थात – श्री कुबेर को नमस्कार! इस पूजन से श्रीकुबेर भगवान् प्रसन्न हों, उन्हें बारम्बार नमस्कार।

 

।।अब कुबेर जी की आरती करें।।

 

ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे,स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरे।
शरण पड़े भगतों के,भण्डार कुबेर भरे ।। ॐ।।

शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े,स्वामी भक्त कुबेर बड़े।
दैत्य दानव मानव से,कई-कई युद्ध लड़े ।। ॐ।।

स्वर्ण सिंहासन बैठे,सिर पर छत्र फिरे, स्वामी सिर पर छत्र फिरे।
योगिनी मंगल गावैं,सब जय जय कार करैं ।। ॐ।।

गदा त्रिशूल हाथ में,शस्त्र बहुत धरे, स्वामी शस्त्र बहुत धरे।
दख भय संकट मोचन,धनुष टंकार करें ।। ॐ।।

भांति भांति के व्यंजन बहुत बने,स्वामी व्यंजन बहुत बने।
मोहन भोग लगावैं,साथ में उड़द चने ।। ॐ।।

बल बुद्धि विद्या दाता,हम तेरी शरण पड़े, स्वामी हम तेरी शरण पड़े
अपने भक्त जनों के,सारे काम संवारे ।। ॐ।।

मुकुट मणी की शोभा,मोतियन हार गले, स्वामी मोतियन हार गले।
अगर कपूर की बाती,घी की जोत जले ।। ॐ।।

यक्ष कुबेर जी की आरती,जो कोई नर गावे, स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत प्रेमपाल स्वामी,मनवांछित फल पावे ।। ॐ।।

 

॥ इसके साथ श्री-कुबेर पूजा समाप्त हुयी ॥

The post Dhanteras : श्री कुबेर पूजा विधि appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.

]]>
https://astrodeeva.com/dhanteras-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%bf/feed/ 1