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हिन्दू धर्म में दीपावली एक ऐसा त्यौहार है जिसका हर हिन्दू बेसब्री से इंतज़ार करता है और अपनी यथाशक्ति अनुसार इस पर्व को मनाता है। भारत सहित पूरे विश्व में दीपावली का त्यौहार 5 दिन चलता है और हिन्दू कलेंडर के अनुसार इसकी शुरुआत प्रतिवर्ष कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन धनतेरस(Dhanteras 2023) पर्व से होती है।

धनतेरस को धनत्रयोदशी या धन्वंतरि जंयती के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि देवताओं और दैत्यों के मध्य समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन 14वें रत्न के रूप में धन्वंतरि देव प्रकट हुए थे। धन्वंतरि देव जब प्रकट हुए तो उनके हाथ में अमृत से भरा पीतल का कलश था। इसलिए धनतेरस के दिन पीतल का कोई बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।

धनतेरस 2023 तिथि और शुभ मुहूर्त – Dhanteras 2023

दिनांक: 10 नवम्बर 2023
वार : शुक्रवार
धनतेरस पूजा मुहूर्त : 05:47 पी एम से 07:43 पी एम

प्रदोष काल : 05:30 पी एम से 08:11 पी एम
वृषभ काल : 05:47 पी एम से 07:43 पी एम

त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ : 10 नवम्बर 2023 को 12:35 पी एम बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 11 नवम्बर 2021 को 01:57 पी एम बजे

धनतेरस की कथा- Legend of Dhanteras

एक बार, देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु से पृथ्वी पर अपनी एक यात्रा के दौरान उनका साथ देने का आग्रह किया। भगवान विष्णु ने उनका आग्रह मान लिया लेकिन इस शर्त पर कि वह सांसारिक प्रलोभनों की ओर आकर्षित नहीं होगी और दक्षिण दिशा में नहीं देखेंगी। देवी लक्ष्मी भगवान विष्णु की इस शर्त से सहमत हो गईं।

जब भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी पृथ्वी की यात्रा कर रहे थे, तब माता लक्ष्मी अपने चंचल प्रवृत्ति के कारण दक्षिण दिशा में देखने के लिए अपनी  इच्छा का विरोध नहीं कर पायी और देखने लगी अतः उन्होंने भगवान विष्णु को दिया हुआ वचन तोड़ दिया और दक्षिण की ओर बढ़ने लगीं। जैसे ही देवी लक्ष्मी ने दक्षिणी दिशा में बढ़ना शुरू किया, वह धरती पर पीले सरसों के फूलों और गन्ने के खेतों की सुंदरता से मंत्रमुग्ध हो गई। सरसों के फूलों की सुंदरता देख उन्होंने खेत से सरसों के फूलों को तोड़ कर खुद को फूलों से सजाया और गन्ने के रस का आनंद लेना शुरू कर दिया।

जब भगवान विष्णु ने ये देखा कि देवी लक्ष्मी ने उनकी प्रतिज्ञा तोड़ दी है, तो वे नाराज हो गए और उन्होंने लक्ष्मी जी को अगले बारह साल तपस्या के रूप में धरती पर बिताने को कहा और उस खेत के मालिक के यहाँ सेवा करने को कहा।

जिसके बाद माता लक्ष्मी ने एक बूढ़ी औरत का रूप धारण किया और उस किसान के घर चली गई। वह किसान बहुत गरीब था। जब वहां लक्ष्मी जी पहुंची तो उन्होंने किसान से उनके घर रहने के लिए आग्रह किया। किसान दयालु था इसलिए एक बूढ़ी औरत को देख उसने उन्हें अपने घर में रहने की हामी भर दी।

देवी लक्ष्मी के आगमन के साथ, धीरे-धीरे गरीब किसान का घर अन्न व धन से भर गया और वह किसान समृद्ध हो गया। इसतरह बारह वर्ष बीत गए और देवी लक्ष्मी के वापस वैकुंठ लौटने का समय आ गया। जब भगवान विष्णु देवी लक्ष्मी को वापस लेने के लिए एक साधारण व्यक्ति के भेष में पृथ्वी पर आए, तो किसान ने उनकी सेवाओं से देवी लक्ष्मी को राहत देने से इनकार कर दिया।

जब भगवान विष्णु के सभी प्रयास विफल हो गए और किसान अपनी सेवाओं से देवी लक्ष्मी को राहत देने के लिए सहमत नहीं हुए, तो देवी लक्ष्मी ने किसान को अपनी असली पहचान बताई और उसे कहा कि वह अब पृथ्वी पर नहीं रह सकती है और उन्हें वैकुंठ लोक लौटना होगा। देवी लक्ष्मी को साक्षात रूप में देख किसान मना नहीं कर सका पर उसने माता से आग्रह किया की वो उसके घर आती रहेंगी। किसान की भक्ति देख लक्ष्मी जी ने वादा किया कि वह हर साल दीवाली से पहले कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी की रात पृथ्वी पर आएँगी और किसान से मिलेंगी।

उसके बाद प्रति वर्ष दिवाली से पहले कृष्ण त्रयोदशी के दिन देवी लक्ष्मी के स्वागत के लिए उस किसान ने अपने घर की सफाई करना शुरू कर दिया और रात भर घी से भरा मिट्टी का दीपक जलाना शुरू कर दिया। देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के इन अनुष्ठानों ने किसान को साल-दर-साल समृद्ध और समृद्ध बना दिया।

यह देख अन्य लोग भी दीपावली से पहले कृष्ण त्रयोदशी की रात को देवी लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर की सफ़ाई करने लगे और उन्हें प्रसन्न कर अपने घर में स्वागत करने के लिए विधि-विधान से पूजा करने लगे।

ये भी पढ़ें: Dhanteras : श्री कुबेर संपूर्ण पूजा विधि

धनतेरस की पूजा विधि – Dhanteras 2023 Puja Vidhi

धनतेरस के दिन मानव जीवन की दो महत्वपूर्ण इच्छाओं की पूर्ति के लिए भगवान की विधी-विधान से पूजा की जाती है। इस दिन धन सम्पदा पाने हेतु माता लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा की जाती है और जीवन के दूसरे सबसे बड़े धन उत्तम स्वास्थ के लिए आयुर्वेद के देव धन्वंतरि से पूजा की जाती है।

संध्याकाल में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है|  पूजा के स्थान पर उत्तर दिशा की तरफ भगवान कुबेर और धन्वन्तरि की मूर्ति स्थापना कर उनकी पूजा करनी चाहिए| इनके साथ ही माता लक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश की पूजा का विधान है| ऐसी मान्‍यता है कि भगवान कुबेर को सफेद मिठाई का भोग और  धनवंतरि‍ को पीली मिठाई का भोग लगाना चाहिए | क्योंकि धन्वन्तरि को पीली वस्तु अधिक प्रिय है|  पूजा में फूल, फल, चावल, रोली, चंदन, धूप व दीप का इस्तेमाल करना फलदायक होता है|

इसी दिन परिवार के किसी भी सदस्य की असामयिक मृत्यु से बचने के लिए मृत्यु के देवता यमराज के लिए घर के बाहर दीपक जलाया जाता है जिसे यम दीपम के नाम से जाना जाता है और इस धार्मिक संस्कार को त्रयोदशी तिथि के दिन किया जाता है।

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Dhanteras 2021: धनतेरस को उत्तम फल के लिए राशि अनुसार खरीदे ये चीजें https://astrodeeva.com/dhanteras-%e0%a4%a7%e0%a4%a8%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%b8-2021-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae-%e0%a4%ab%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%b0%e0%a4%be/ https://astrodeeva.com/dhanteras-%e0%a4%a7%e0%a4%a8%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%b8-2021-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae-%e0%a4%ab%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%b0%e0%a4%be/#respond Sat, 30 Oct 2021 08:09:02 +0000 https://astrodeeva.com/?p=2640 Dhanteras 2021: धनतेरस का त्योहार 2 नवंबर 2021 को मंगलवार के दिन और हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाएगा। इस वर्ष कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी 02 नवम्बर 2021 को 11:31 ए एम बजे से प्रारम्भ होकर 03 नवम्बर 2021 को 09:02 ए एम बजे तक रहेगी। धनतेरस […]

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Dhanteras 2021: धनतेरस का त्योहार 2 नवंबर 2021 को मंगलवार के दिन और हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाएगा। इस वर्ष कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी 02 नवम्बर 2021 को 11:31 ए एम बजे से प्रारम्भ होकर 03 नवम्बर 2021 को 09:02 ए एम बजे तक रहेगी।

धनतेरस को धनत्रयोदशी या धन्वंतरिजयंती के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि देवताओं और दैत्यों के मध्य समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन 14वें रत्न के रूप में धन्वंतरि देव प्रकट हुए थे। धन्वंतरि देव जब प्रकट हुए तो उनके हाथ में अमृत से भरा पीतल का कलश था। इसलिए धनतेरस के दिन पीतल का कोई बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।आइये जानते है कि आप की जन्म राशि के अनुसार धनतेरस के दिन क्या खरीदना शुभ फल दायी होगा:

मेष राशि (Mesh Rashi) – मेष राशि के जातको को सोने-चांदी के आभूषण या सिक्के, बर्तन, लाल रंग के वस्त्र आदि की खरीदारी करना शुभ रहेगा |

वृषभ राशि (Vrishabh Rashi) – वृषभ राशि के जातको को सोना, चांदी, पीतल, कम्प्यूटर, बर्तन, केशर, चंदन, कलम आदि खरीदना अति शुभ रहेगा रहेगा |

मिथुन राशि (Mithun Rashi) – इस राशि के जातकों के लिए भूमि, मकान, सोना, चांदी, कांसे के बर्तन, हरे रंग के वस्त्र या इलेक्ट्रॉनिक समान खरीदना शुभ रहेगा |

कर्क राशि (Kark Rashi)- कर्क राशि के जातकों को सोना-चांदी, नया वाहन, आभूषण खरीदना शुभ रहेगा |

सिंह राशि (Singh Rashi)- सिंह राशि के जातकों के लिए नया वाहन, इलेक्ट्रानिक्स, सोना-चांदी, भूमि, तांबे-पीतल के बर्तन, फर्नीचर शुभ रहेगा |

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कन्या राशि (Kanya Rashi) – इस राशि के जातकों के लिए कांसे के बर्तन, भूमि, भवन, अनाज आदि के साथ हरे रंग के वस्त्र और इलेक्ट्रॉनिक्स समान की खरीदारी करना शुभ रहेगा |

तुला राशि (Tula Rashi) – तुला राशि के जातकों के लिए रजत यानी चांदी, वाइट गोल्ड, सफ़ेद धान और चमक धमक वाले वस्त्र खरीदना शुभ रहेगा |

वृश्चिक राशि (Vrishchik Rashi) – वृश्चिक राशि के जातको को धनतेरस के दिन सोना-चांदी, तांबे के बर्तन, लाल रंग के वस्त्र की खरीदनी करना शुभ रहेगा |

धनु राशि (Dhanu Rashi) – धनु राशि के जातको को पुस्तकें, जमीन-जायदाद, स्वर्ण या पीतल की धातु से बना कोई भी बर्तन जैसे कलश, पीले वस्त्र दोपहर के समय खरीदना शुभ रहेगा |

Dhanteras 2021: श्री कुबेर पूजा विधि

मकर राशि (Makar Rashi) –  मकर राशि के जातकों के लिए चांदी, घर की जरूरत की कोई भी चीज , वस्त्र खरीदना शुभ रहेगा |

कुम्भ राशि (Kumbh Rashi) – इस राशि के जातकों के लिए किताबें, वाहन, फर्नीचर, घर की जरूरी चीजें , मिश्रित धातु, सोना-चांदी खरीदना शुभ रहेगा |

मीन राशि (Meen Rashi) – मीन राशि के जातकों के लिए सोने-चांदी, रत्न , पीले वस्त्र, पीतल के बर्तन, ऊनी परिधान खरीदना शुभ रहेगा |

 

नोट:- ये सब समान खरीदना आपकी इच्छा पे निर्भर करता है जो लोग किसी वजह से समान नहीं खरीद सकते वो भगवान के हाथ जोड़ कर पूजा अर्चना कर प्रसाद ग्रहण करे | बताई गयी वस्तुओं के अलावा धनतेरस के दिन नमक ,हल्दी की गांठ ,लक्ष्मी गणेश जी की मिट्टी की मूर्ति ,साबुत धनिया और झाड़ू भी खरीदना अति शुभ माना जाता है |

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हिन्दू धर्म में दीपावली एक ऐसा त्यौहार है जिसका हर हिन्दू बेसब्री से इंतज़ार करता है और अपनी यथाशक्ति अनुसार इस पर्व को मनाता है। भारत सहित पूरे विश्व में दीपावली का त्यौहार 5 दिन चलता है और हिन्दू कलेंडर के अनुसार इसकी शुरुआत प्रतिवर्ष कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन धनतेरस(Dhanteras) पर्व से होती है।

धनतेरस को धनत्रयोदशी या धन्वंतरि जंयती के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि देवताओं और दैत्यों के मध्य समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन 14वें रत्न के रूप में धन्वंतरि देव प्रकट हुए थे। धन्वंतरि देव जब प्रकट हुए तो उनके हाथ में अमृत से भरा पीतल का कलश था। इसलिए धनतेरस के दिन पीतल का कोई बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।

धनतेरस 2021 तिथि और शुभ मुहूर्त – Dhanteras 2021

दिनांक: 02 नवम्बर 2021
वार : मंगलवार
धनतेरस पूजा मुहूर्त : 06:17 पी एम से 08:11 पी एम
प्रदोष काल : 05:35 पी एम से 08:11 पी एम
वृषभ काल : 06:17 पी एम से 08:12 पी एम
त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ : 02 नवम्बर 2021 को 11:31 ए एम बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 03 नवम्बर 2021 को 09:02 ए एम बजे

धनतेरस की कथा- Legend of Dhanteras

एक बार, देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु से पृथ्वी पर अपनी एक यात्रा के दौरान उनका साथ देने का आग्रह किया। भगवान विष्णु ने उनका आग्रह मान लिया लेकिन इस शर्त पर कि वह सांसारिक प्रलोभनों की ओर आकर्षित नहीं होगी और दक्षिण दिशा में नहीं देखेंगी। देवी लक्ष्मी भगवान विष्णु की इस शर्त से सहमत हो गईं।

जब भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी पृथ्वी की यात्रा कर रहे थे, तब माता लक्ष्मी अपने चंचल प्रवृत्ति के कारण दक्षिण दिशा में देखने के लिए अपनी  इच्छा का विरोध नहीं कर पायी और देखने लगी अतः उन्होंने भगवान विष्णु को दिया हुआ वचन तोड़ दिया और दक्षिण की ओर बढ़ने लगीं। जैसे ही देवी लक्ष्मी ने दक्षिणी दिशा में बढ़ना शुरू किया, वह धरती पर पीले सरसों के फूलों और गन्ने के खेतों की सुंदरता से मंत्रमुग्ध हो गई। सरसों के फूलों की सुंदरता देख उन्होंने खेत से सरसों के फूलों को तोड़ कर खुद को फूलों से सजाया और गन्ने के रस का आनंद लेना शुरू कर दिया।

जब भगवान विष्णु ने ये देखा कि देवी लक्ष्मी ने उनकी प्रतिज्ञा तोड़ दी है, तो वे नाराज हो गए और उन्होंने लक्ष्मी जी को अगले बारह साल तपस्या के रूप में धरती पर बिताने को कहा और उस खेत के मालिक के यहाँ सेवा करने को कहा।

जिसके बाद माता लक्ष्मी ने एक बूढ़ी औरत का रूप धारण किया और उस किसान के घर चली गई। वह किसान बहुत गरीब था। जब वहां लक्ष्मी जी पहुंची तो उन्होंने किसान से उनके घर रहने के लिए आग्रह किया। किसान दयालु था इसलिए एक बूढ़ी औरत को देख उसने उन्हें अपने घर में रहने की हामी भर दी।

देवी लक्ष्मी के आगमन के साथ, धीरे-धीरे गरीब किसान का घर अन्न व धन से भर गया और वह किसान समृद्ध हो गया। इसतरह बारह वर्ष बीत गए और देवी लक्ष्मी के वापस वैकुंठ लौटने का समय आ गया। जब भगवान विष्णु देवी लक्ष्मी को वापस लेने के लिए एक साधारण व्यक्ति के भेष में पृथ्वी पर आए, तो किसान ने उनकी सेवाओं से देवी लक्ष्मी को राहत देने से इनकार कर दिया।

जब भगवान विष्णु के सभी प्रयास विफल हो गए और किसान अपनी सेवाओं से देवी लक्ष्मी को राहत देने के लिए सहमत नहीं हुए, तो देवी लक्ष्मी ने किसान को अपनी असली पहचान बताई और उसे कहा कि वह अब पृथ्वी पर नहीं रह सकती है और उन्हें वैकुंठ लोक लौटना होगा। देवी लक्ष्मी को साक्षात रूप में देख किसान मना नहीं कर सका पर उसने माता से आग्रह किया की वो उसके घर आती रहेंगी। किसान की भक्ति देख लक्ष्मी जी ने वादा किया कि वह हर साल दीवाली से पहले कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी की रात पृथ्वी पर आएँगी और किसान से मिलेंगी।

उसके बाद प्रति वर्ष दिवाली से पहले कृष्ण त्रयोदशी के दिन देवी लक्ष्मी के स्वागत के लिए उस किसान ने अपने घर की सफाई करना शुरू कर दिया और रात भर घी से भरा मिट्टी का दीपक जलाना शुरू कर दिया। देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के इन अनुष्ठानों ने किसान को साल-दर-साल समृद्ध और समृद्ध बना दिया।

यह देख अन्य लोग भी दीपावली से पहले कृष्ण त्रयोदशी की रात को देवी लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर की सफ़ाई करने लगे और उन्हें प्रसन्न कर अपने घर में स्वागत करने के लिए विधि-विधान से पूजा करने लगे।

ये भी पढ़ें: Dhanteras : श्री कुबेर संपूर्ण पूजा विधि

धनतेरस की पूजा विधि – Dhanteras Puja Vidhi

धनतेरस के दिन मानव जीवन की दो महत्वपूर्ण इच्छाओं की पूर्ति के लिए भगवान की विधी-विधान से पूजा की जाती है। इस दिन धन सम्पदा पाने हेतु माता लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा की जाती है और जीवन के दूसरे सबसे बड़े धन उत्तम स्वास्थ के लिए आयुर्वेद के देव धन्वंतरि से पूजा की जाती है।

संध्याकाल में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है|  पूजा के स्थान पर उत्तर दिशा की तरफ भगवान कुबेर और धन्वन्तरि की मूर्ति स्थापना कर उनकी पूजा करनी चाहिए| इनके साथ ही माता लक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश की पूजा का विधान है| ऐसी मान्‍यता है कि भगवान कुबेर को सफेद मिठाई का भोग और  धनवंतरि‍ को पीली मिठाई का भोग लगाना चाहिए | क्योंकि धन्वन्तरि को पीली वस्तु अधिक प्रिय है|  पूजा में फूल, फल, चावल, रोली, चंदन, धूप व दीप का इस्तेमाल करना फलदायक होता है|

इसी दिन परिवार के किसी भी सदस्य की असामयिक मृत्यु से बचने के लिए मृत्यु के देवता यमराज के लिए घर के बाहर दीपक जलाया जाता है जिसे यम दीपम के नाम से जाना जाता है और इस धार्मिक संस्कार को त्रयोदशी तिथि के दिन किया जाता है।

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Dhanteras 2020: उत्तम फल के लिए राशि अनुसार खरीदे ये चीजें https://astrodeeva.com/dhanteras-2020-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae-%e0%a4%ab%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a4%bf-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%81/ https://astrodeeva.com/dhanteras-2020-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae-%e0%a4%ab%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a4%bf-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%81/#respond Thu, 12 Nov 2020 19:03:26 +0000 https://astrodeeva.com/?p=1347 आज कार्तिक पक्ष की त्रयोदशी और शुक्रवार का दिन है आज त्रयोदशी शाम 05:59 तक रहेगी और उसके बाद रूप चतुर्दर्शी शाम 06:00 बजे से शुरू होकर शनिवार 14 नवम्बर दोपहर 2:17 तक रहेगी | धनतेरस को धनत्रयोदशी या धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि देवताओं और दैत्यों के मध्य समुद्र […]

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आज कार्तिक पक्ष की त्रयोदशी और शुक्रवार का दिन है आज त्रयोदशी शाम 05:59 तक रहेगी और उसके बाद रूप चतुर्दर्शी शाम 06:00 बजे से शुरू होकर शनिवार 14 नवम्बर दोपहर 2:17 तक रहेगी |

धनतेरस को धनत्रयोदशी या धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि देवताओं और दैत्यों के मध्य समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन 14वें रत्न के रूप में धन्वंतरि देव प्रकट हुए थे। धन्वंतरि देव जब प्रकट हुए तो उनके हाथ में अमृत से भरा पीतल का कलश था। इसलिए धनतेरस के दिन पीतल का कोई बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।

आइये जानते है कि आप की जन्म राशि के अनुसार आज धनतेरस के दिन क्या खरीदना शुभ फल दायी होगा:

मेष राशि

मेष राशि वालों के लिए आज के दिन जमीन ,मकान ,सोना ,चांदी खरीदारी करना शुभ रहेगा |

वृषभ राशि

आज के दिन वृषभ राशि वालों के लिए वाहन खरीदना अति शुभ रहेगा और साथ साथ हीरे मोती के जवहारात खरीदना शुभ रहेगा |

मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों के लिए जमीन या इलेक्ट्रॉनिक समान खरीदना शुभ रहेगा|

कर्क राशि

कर्क राशि वालों को बैंक मे फिक्स डिपोसीट करना शुभ रहेगा |

सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए सोना, पीतल या तांबा खरीदना अति शुभ रहेगा |

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कन्या राशि

कन्या राशि वालों के लिए भूमि भवन आदि के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स समान की खरीदारी करना शुभ रहेगा |

तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए बैंक मे फिक्स डिपोसीट या चांदी की कोई वस्तु खरीदना शुभ रहेगा|

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के जातको को  आज के दिन किसी जमीन मे निवेश या चांदी की कोई वस्तु खरीदनी शुभ रहेगा|

धनु राशि

धनु राशि वालों को आज के दिन शेयर बाजार मे निवेश ,इलेक्ट्रॉनिक समान या जमीन मे निवेश करना शुभ रहेगा |

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मकर राशि

मकर राशि के जातकों के लिए आज के दिन फर्नीचर चांदी या जमीन खरीदना शुभ रहेगा |

कुम्भ राशि

कुम्भ राशि के जातकों के लिए आज के दिन चांदी का समान खरीदना शुभ रहेगा |

मीन राशि

मीन राशि के जातकों के लिए आज के दिन कोई भी पीतल से बनी वस्तु या सोने का समान खरीदना शुभ रहेगा |

 

नोट:- ये सब समान खरीदना आपकी इच्छा पे निर्भर करता है जो लोग किसी वजह से समान नहीं खरीद सकते वो भगवान के हाथ जोड़ कर पूजा अर्चना कर प्रसाद ग्रहण करे | बताई गयी वस्तुओं के अलावा धनतेरस के दिन नमक ,हल्दी की गांठ ,लक्ष्मी गणेश जी की मिट्टी की मूर्ति ,साबुत धनिया और झाड़ू भी खरीदना अति शुभ माना जाता है |

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