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हिन्दू धर्म में दीपावली (Deepawali) एक ऐसा त्यौहार है जिसका हर हिन्दू वर्ष भर बेसब्री से इंतज़ार करता है और अपनी यथाशक्ति अनुसार इस पर्व को मनाता है। यह पर्व हर वर्ष हिन्दू  पंचांग  के अनुसार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्तजन माता लक्ष्मी, सरस्वती  और भगवान गणेश की विधि विधान से पूजा कर उनको प्रसन्न करते है और उन से धन-संपत्ती, बुद्धि  और सुख-समृद्धि प्रदान करने की कामना करते हैं।

Deepawali 2021 शुभ मुहूर्त

दिनांक – 04 नवम्बर 2021
वार – गुरूवार/ बृहस्पतिवार
अमावस्या तिथि प्रारम्भ – 04 नवम्बर 2021 को 06:03 ए एम बजे
अमावस्या तिथि समाप्त – 05 नवम्बर 2021 को 02:44 ए एम बजे
प्रदोष काल – 05:43 पी एम से 08:10 पी एम
वृषभ लग्न – 06:09 पी एम से 08:04 पी एम
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त – 04 नवम्बर 2021 को 06:09 पी एम से 08:04 पी एम

Deepawali लक्ष्मी पूजा के लिये शुभ चौघड़िया मुहूर्त

प्रातः मुहूर्त (शुभ) – 06:35 ए एम से 07:58 ए एम
प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) – 10:42 ए एम से 02:49 पी एम
अपराह्न मुहूर्त (शुभ) – 04:11 पी एम से 05:34 पी एम
सायाह्न मुहूर्त (अमृत, चर) – 05:34 पी एम से 08:49 पी एम
रात्रि मुहूर्त (लाभ) – 12:05 ए एम से 01:43 ए एम, नवम्बर 05

निशिता काल मुहूर्त

निशिता काल – 11:39 पी एम से 12:31 ए एम, नवम्बर 05
सिंह लग्न – 12:39 ए एम से 02:56 ए एम, नवम्बर 05

Deepawali पूजन सामग्री

दीपावली पूजन की सभी सामग्री लगभग घर में ही मिल जाती हैं लेकिन कुछ अतिरिक्त चीजों को बाहर से लाया जा सकता है। ये वस्तुएं हैं- लक्ष्मी, सरस्वती व गणेश जी की प्रतिमा या चित्र, रोली, कुमकुम, चावल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, अगरबत्तियां, मिट्टी तथा तांबे के दीपक, रुई, कलावा (मौलि), नारियल, शहद, दही, गंगाजल, गुड़, धनिया, फल, फूल( कमल और गुलाब के फूल भी मां को बहुत प्रिय हैं), जौ, गेहूँ, दूर्वा, चंदन, सिंदूर, घृत, पंचामृत, दूध, मेवे, खील, बताशे, गंगाजल, जनेऊ,वस्त्र, लाल कपड़ा,चौकी, कलश, कमल गट्टे की माला, शंख, आसन, थाली, चांदी का सिक्का, भोग व प्रसाद हेतु मिष्ठान्न।

Deepawali पूजन विधि 

दीपावली की पूजा में सबसे पहले एक चौकी पर सफेद या लाल वस्त्र बिछा कर उस पर मां लक्ष्मी, सरस्वती व गणेश जी को प्रतिमा या चित्र को विराजमान करें। इसके बाद हाथ में थोड़ा सा जल लेकर उसे प्रतिमा के ऊपर निम्न मंत्र पढ़ते हुए छिड़कें।

ऊँ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा।
य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: वाह्याभंतर: शुचि:।।

इसके बाद में इसी तरह से स्वयं को तथा अपने पूजा के आसन को भी इसी तरह जल छिड़ककर पवित्र कर लें।

अब पृथ्वी मां को प्रणाम करके निम्न मंत्र बोलें तथा उनसे क्षमा प्रार्थना करते हुए अपने आसन पर विराजमान हों

पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग ऋषिः सुतलं छन्दः कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥

ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता।
त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्‌॥
पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः

अब पुष्प या चम्मच से अपनी दायी अंजुलि में जल ले कर निम्न मंत्र बोलते हुए आचमन करें

ॐ केशवाय नमः
ॐ नारायणाय नमः
ॐ वासुदेवाय नमः

अब हृषिकेशाय नमः मंत्र कहते हुए हाथों को धो लें। इस प्रक्रिया को आचमन कहते हैं इससे विद्या, आत्म और बुद्धि तत्व का शोधन हो जाता है। तत्पश्चात तिलक लगाएँ। अब आप पूजा के लिये पूरी तरह पवित्र हैं।

ध्यान व संकल्प

अब मन को एकाग्र कर प्रभु में ध्यान लगाएँ और संकल्प करें।

संकल्प के लिये हाथ में अक्षत, पुष्प और जल लें साथ में कुछ द्रव्य यानि पैसे भी लें और संकल्प मंत्र का जाप करते हुए संकल्प करें कि मैं अमुक व्यक्ति( अपना नाम), अमुक गोत्र( आप का गोत्र),अमुक स्थान( जिस शहर व स्थान में पूजा की जा रही है) , दिनांक, समय पर सपरिवार  मां लक्ष्मी, सरस्वती तथा गणेश जी का पूजन करने जा रहा हूं, जिससे मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त हों।”

 इसके बाद भगवान गणेश और माँ गौरी की पूजा करें। इसके बाद कलश पूजन करें। अब फिर नवग्रहों का पूजन कीजिए। हाथ में अक्षत और पुष्प ले कर नवग्रह स्तोत्र बोलिए। इसके बाद भगवती षोडश मातृकाओं ( १. गौरी, २. पद्मा, ३. शची, ४. मेधा, ५. सावित्री, ६. विजया, ७. जया, ८. देव सेना, ९. स्वधा, १०. स्वाहा, ११. मातरः, १२. लोकमातरः, १३. धृतिः, १४. पुष्टिः, १५. तुष्टिः, १६. आत्मनः कुलदेवताः ) का पूजन किया जाता है। इन सभी के पूजन के बाद मातृकाओं को गंध, अक्षत व पुष्प प्रदान करते हुए पूजन करें। अब मौलि लेकर गणपति जी , माता लक्ष्मी व सरस्वती को अर्पण कर और स्वयं के हाथ पर भी बंधवा लें। अब सभी देवी-देवताओं के तिलक लगाकर स्वयं को भी तिलक लगवाएं। इसके बाद मां महालक्ष्मी की पूजा आरंभ करें।

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लक्ष्मी पूजन

सर्व प्रथम माता लक्ष्मी का ध्यान करें और निम्न मंत्र बोलें

ॐ या सा पद्मासनस्था, विपुल-कटि-तटी, पद्म-दलायताक्षी।
गम्भीरावर्त-नाभिः, स्तन-भर-नमिता, शुभ्र-वस्त्रोत्तरीया।।

लक्ष्मी दिव्यैर्गजेन्द्रैः। मणि-गज-खचितैः, स्नापिता हेम-कुम्भैः।
नित्यं सा पद्म-हस्ता, मम वसतु गृहे, सर्व-मांगल्य-युक्ता।।

 अर्थात – भगवती लक्ष्मी कमल के आसन पर विराजमान हैं, कमल की पंखुड़ियों के समान सुन्दर बड़े-बड़े जिनके नेत्र हैं, जिनकी विस्तृत कमर और गहरे आवर्तवाली नाभि है, जो पयोधरों के भार से झुकी हुई और सुन्दर वस्त्र के उत्तरीय से सुशोभित हैं, जो मणि-जटित दिव्य स्वर्ण-कलशों के द्वारा स्नान किए हुए हैं, वे कमल-हस्ता सदा सभी मङ्गलों के सहित मेरे घर में निवास करें।

देवी की प्रतिष्ठा करें

हाथ में अक्षत लेकर बोलें “ॐ भूर्भुवः स्वः महालक्ष्मी, इहागच्छ इह तिष्ठ, एतानि पाद्याद्याचमनीय-स्नानीयं, पुनराचमनीयम्।

स्नान कराएं

ॐ मन्दाकिन्या समानीतैः, हेमाम्भोरुह-वासितैः स्नानं कुरुष्व देवेशि, सलिलं च सुगन्धिभिः।। ॐ लक्ष्म्यै नमः।।

इदं रक्त चंदनम् लेपनम्  से रक्त चंदन लगाएं।

इदं सिन्दूराभरणं  से सिन्दूर लगाएं।

ॐ मन्दार-पारिजाताद्यैः, अनेकैः कुसुमैः शुभैः। पूजयामि शिवे, भक्तया, कमलायै नमो नमः।। ॐ लक्ष्म्यै नमः, पुष्पाणि समर्पयामि।’ इस मंत्र से पुष्प चढ़ाएं फिर माला पहनाएं। अब लक्ष्मी देवी को इदं रक्त वस्त्र समर्पयामि कहकर लाल वस्त्र पहनाएं।

लक्ष्मी देवी की अंग पूजा

बायें हाथ में अक्षत लेकर दायें हाथ से थोड़ा-थोड़ा छोड़ते जायें—

ॐ चपलायै नम: पादौ पूजयामि।
ॐ चंचलायै नम: जानूं पूजयामि ।
ॐ कमलायै नम: कटि पूजयामि ।
ॐ कात्यायिन्यै नम: नाभि पूजयामि ।
ॐ जगन्मातरे नम: जठरं पूजयामि ।
ॐ विश्ववल्लभायै नम: वक्षस्थल पूजयामि ।
ॐ कमलवासिन्यै नम: भुजौ पूजयामि ।
ॐ कमल पत्राक्ष्य नम: नेत्रत्रयं पूजयामि ।
ॐ श्रियै नम: शिरं: पूजयामि।

अष्ट-सिद्धि पूजा

अङ्ग-देवताओं की पूजा करने के बाद पुनः बाएँ हाथ में अक्षत लेकर मंत्रोच्चारण करें.

ॐ अणिम्ने नम:।
ॐ महिम्न नम:।
ॐ गरिम्णे नम:।
ॐ लघिम्ने नम:।
ॐ प्राप्त्यै नम:।
ॐ प्राकाम्यै नम:।
ॐ ईशितायै नम:।
ॐ वशितायै नम:।

अष्टलक्ष्मी पूजन

पुनः बाएँ हाथ में अक्षत लेकर मंत्रोच्चारण करें.

ॐ आद्ये लक्ष्म्यै नम:।
ॐ विद्यालक्ष्म्यै नम:।
ॐ सौभाग्य लक्ष्म्यै नम:।
ॐ अमृत लक्ष्म्यै नम:।
ॐ लक्ष्म्यै नम:।
ॐ सत्य लक्ष्म्यै नम:।
ॐ भोगलक्ष्म्यै नम:।
ॐ योग लक्ष्म्यै नम:।

नैवैद्य अर्पण

पूजन के पश्चात देवी को “इदं नानाविधि नैवेद्यानि ॐ महालक्ष्मियै समर्पयामि” मंत्र से नैवैद्य अर्पित करें।

मिष्टान अर्पित करने के लिए मंत्र: “इदं शर्करा घृत समायुक्तं नैवेद्यं ॐ महालक्ष्मियै समर्पयामि” बालें।

प्रसाद अर्पित करने के बाद “इदं आचमनयं ॐ महालक्ष्मियै नम: ” मंत्र बोले और आचमन करायें.

अब पान सुपारी चढ़ायें: इदं ताम्बूल पुगीफल समायुक्तं ॐ महालक्ष्मियै समर्पयामि।

अब एक फूल लेकर लक्ष्मी देवी पर चढ़ाएं और बोलें: एष: पुष्पान्जलि ॐ महालक्ष्मियै नम:।

लक्ष्मी जी की पूजा के बाद भगवान विष्णु एवं शिव जी की पूजा करनी चाहिए और फिर गल्ले की पूजा करें। पूजन के पश्चात सपरिवार आरती और क्षमा प्रार्थना करें।

क्षमा प्रार्थना मंत्र

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर।।
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर।
यत्पूजितं माया देवं परिपूर्ण तदस्तु में।

अर्थात- हे ईश्वर मैं आपका “आवाह्न” करना नहीं जानता हूं न ही विसर्जन अर्थात् न ही आपको विदा करना जानता हूं मुझे आपकी पूजा भी करनी नहीं आती है। अगर मेरे से आप की पूजा में कोई भूल हो गयी है तो कृपा करके मुझे क्षमा करें। न मुझे मंत्र का ज्ञान है न ही क्रिया का, मैं तो आपकी भक्ति करना भी नहीं जानता। मैं यथा संभव पूजा कर रहा हूं, कृपा करके मेरी भूल को क्षमा कर दें और पूजा को पूर्णता प्रदान करें।

अब अपने बड़ों का आशीर्वाद लें और छोटों को भेंट व उपहार दें और सब के साथ पर्व मनाएँ।

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घर में लानी है बरकत तो दीपावली की पूजा में माता लक्ष्मी को जरुर अर्पण करें ये खास चीजें https://astrodeeva.com/diwali-2020-%e0%a4%98%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ac%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%a4-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%aa/ https://astrodeeva.com/diwali-2020-%e0%a4%98%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ac%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%a4-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%aa/#respond Sat, 14 Nov 2020 06:12:30 +0000 https://astrodeeva.com/?p=1365 भारत और विश्व में मनाया जाने वाला हिंदुओं का सबसे खास और सबसे बड़ा त्यौहार दिवाली है। हर हिन्दू इस त्यौहार का बेसब्री से इंतज़ार करता है क्योंकि इस दिन उसे धन- धान्य की देवी मां लक्ष्मी की पूजा आराधना कर उन्हें प्रसन्न करने का अवसर प्राप्त होता है। पूजा की तैयारी में वह अपने घर […]

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भारत और विश्व में मनाया जाने वाला हिंदुओं का सबसे खास और सबसे बड़ा त्यौहार दिवाली है। हर हिन्दू इस त्यौहार का बेसब्री से इंतज़ार करता है क्योंकि इस दिन उसे धन- धान्य की देवी मां लक्ष्मी की पूजा आराधना कर उन्हें प्रसन्न करने का अवसर प्राप्त होता है। पूजा की तैयारी में वह अपने घर व व्यवसाय स्थल में मां लक्ष्मी के लिए साफ-सफाई औऱ बाकि चीजों का ध्यान रखाता है ताकि मां जब आए तब वो अपना प्यार और आर्शीवाद देकर उसे सुख समृद्धि प्रदान करे। हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को देश दुनिया में दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है. इस साल दिवाली का त्योहार 14 नवंबर शनिवार को है।

दीपावली की रात को माता लक्ष्मी, सरस्वती और रिद्धि सिद्धि के स्वामी भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि जो मनुष्य इस दिन लक्ष्मी माता औऱ गणेश भगवान की पूजा करता है उसे पूरे वर्ष सौभाग्य की प्राप्ति होती है और उसके घर में हमेशा बरकत रहती है। आइए जानते हैं कि माता लक्ष्मी को दिवाली के दिन किन चीजों को अर्पित करके उन्हें खुश कर सकते हैं ताकि वो आपके घर में हमेशा सुख समृद्धि बनाएं रखें।

बताशे

बताशे चंद्रमा का द्योतक हैं औऱ इसलिए मां लक्ष्मी को बताशे बहुत पसंद है। दीपावली के खास दिन मां लक्ष्मी को खील बताशे औऱ मीठे खिलाने अर्पित करने चहिये।

कमल का फूल

मां लक्ष्मी कमल पे विराजमान होती है इसलिए माता को कमल का फूल बहुत प्रिय है। उनकी पूजा करते समय कमल के फूल को जरूर अर्पित करना चहिये। लेकिन अगर आपके कमल का फूल नहीं मिलता तो आप बाजार से कमलगट्टे भी खरीद कर उन्हें अर्पित कर सकते हैं।

ये भी पढ़ें: शुभ दीपावली, जाने पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

सफेद फूल

जब आप अपनी पूजा की थाली तैयार करें तो आप बाजार से सफेद फूल लेकर जरुर आएं. मां लक्ष्मी को सफेद फूल चढ़ाए जाते हैं, आप चाहें तो मां को मोगरा अर्पित कर सकते हैं, उन्हें ये फूल पसंद है.

कौड़ियां

दीपावली की रात मां लक्ष्मी की पूजा में सफेद कौड़ियां जरूर रखनी चाहिए।  मां लक्ष्मी को सफेद कौड़ियां बहुत प्रिय हैं। और इससे मां लक्ष्मी बहुत जल्दी खुश होकर घर में सुख-समृद्धि प्रदान करती है। रात को पूजा में कौड़ियां रखिए और सुबह नहा धोकर उन कौड़ियों को अपनी तिजोरी या किसी शुद्ध स्थान पर रख दीजिए। कौड़ियों को घर में बरकत लाने के लिए भाग्यशाली माना जाता है।

हल्दी की गांठ

माँ लक्ष्मी को साबुत हल्दी यानी हल्दी की गांठ बहुत प्रिय है। हल्दी की गांठ घर में मंगलकार्यो का मौका लाती है औऱ धन की आवक बढ़ाती है। इन्हें किसी लाल कपड़े में बांधकर मां लक्ष्मी के चरणों में रखकर पूजा कीजिए और सुबह होने पर तिजोरी में रख दीजिए।

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Diwali 2020: शुभ दीपावली, जाने पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि https://astrodeeva.com/diwali-2020-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%ad-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be/ https://astrodeeva.com/diwali-2020-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%ad-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be/#respond Sat, 14 Nov 2020 03:42:23 +0000 https://astrodeeva.com/?p=1362 हिन्दू धर्म में दीपावली एक ऐसा त्यौहार है जिसका हर हिन्दू वर्ष भर बेसब्री से इंतज़ार करता है और अपनी यथाशक्ति अनुसार इस पर्व को मनाता है। यह पर्व हर वर्ष हिन्दू  पंचांग  के अनुसार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्तजन माता लक्ष्मी, सरस्वती  और भगवान गणेश […]

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हिन्दू धर्म में दीपावली एक ऐसा त्यौहार है जिसका हर हिन्दू वर्ष भर बेसब्री से इंतज़ार करता है और अपनी यथाशक्ति अनुसार इस पर्व को मनाता है। यह पर्व हर वर्ष हिन्दू  पंचांग  के अनुसार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्तजन माता लक्ष्मी, सरस्वती  और भगवान गणेश की विधि विधान से पूजा कर उनको प्रसन्न करते है और उन से धन-संपत्ती, बुद्धि  और सुख-समृद्धि प्रदान करने की कामना करते हैं।

दीपावली 2020 शुभ मुहूर्त

दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजा को प्रदोष काल के दौरान किया जाना चाहिये, जो कि सूर्यास्त के बाद प्रारम्भ होता है और लगभग 2 घण्टे 24 मिनट तक रहता है। कुछ जानकार लक्ष्मी पूजा के लिए महानिशिता काल का सुझाव भी देते हैं। हमारे विचार में महानिशिता काल तांत्रिक समुदायों और पण्डितों के लिए अधिक उपयुक्त होता है। सामान्य जन के लिए प्रदोष काल मुहूर्त ही उपयुक्त माना गया है।

दिनांक – 14 नवम्बर 2020

वार – शनिवार

अमावस्या तिथि प्रारम्भ – 14 नवम्बर 2020 को 02:17 पी एम बजे

अमावस्या तिथि समाप्त – 15 नवम्बर 2020 को 10:36 ए एम बजे

प्रदोष काल – 05:28 पी एम से 08:07 पी एम

वृषभ लग्न – 05:28 पी एम से 07:24 पी एम

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त – 14 नवम्बर 2020 को 05:28 पी एम से 07:24 पी एम

दीपावली लक्ष्मी पूजा के लिये शुभ चौघड़िया मुहूर्त

अपराह्न मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) – 02:17 पी एम से 04:07 पी एम

सायाह्न मुहूर्त (लाभ) – 05:28 पी एम से 07:07 पी एम

रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) – 14 नवम्बर 08:47 पी एम से 15 नवम्बर 01:45 ए एम

उषाकाल मुहूर्त (लाभ) – 15 नवम्बर 05:04 ए एम से 06:44 ए एम

निशिता काल मुहूर्त

निशिता काल – 14 नवम्बर 11:39 पी एम से 15 नवम्बर 12:32 ए एम

सिंह लग्न – 14 नवम्बर 11:59 पी एम से 15 नवम्बर 02:16 ए एम

 

दीपावली पूजन सामग्री

दीवाली पूजन की सभी सामग्री लगभग घर में ही मिल जाती हैं लेकिन कुछ अतिरिक्त चीजों को बाहर से लाया जा सकता है। ये वस्तुएं हैं- लक्ष्मी, सरस्वती व गणेश जी की प्रतिमा या चित्र, रोली, कुमकुम, चावल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, अगरबत्तियां, मिट्टी तथा तांबे के दीपक, रुई, कलावा (मौलि), नारियल, शहद, दही, गंगाजल, गुड़, धनिया, फल, फूल( कमल और गुलाब के फूल भी मां को बहुत प्रिय हैं), जौ, गेहूँ, दूर्वा, चंदन, सिंदूर, घृत, पंचामृत, दूध, मेवे, खील, बताशे, गंगाजल, जनेऊ,वस्त्र, लाल कपड़ा,चौकी, कलश, कमल गट्टे की माला, शंख, आसन, थाली, चांदी का सिक्का, भोग व प्रसाद हेतु मिष्ठान्न।

 

दीपावली पूजन विधि

दीवाली की पूजा में सबसे पहले एक चौकी पर सफेद या लाल वस्त्र बिछा कर उस पर मां लक्ष्मी, सरस्वती व गणेश जी को प्रतिमा या चित्र को विराजमान करें। इसके बाद हाथ में थोड़ा सा जल लेकर उसे प्रतिमा के ऊपर निम्न मंत्र पढ़ते हुए छिड़कें।

ऊँ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा।

य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: वाह्याभंतर: शुचि:।।

इसके बाद में इसी तरह से स्वयं को तथा अपने पूजा के आसन को भी इसी तरह जल छिड़ककर पवित्र कर लें।

अब मां पृथ्वी को प्रणाम करके निम्न मंत्र बोलें तथा उनसे क्षमा प्रार्थना करते हुए अपने आसन पर विराजमान हों

पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग ऋषिः सुतलं छन्दः कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥

ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता। त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्‌॥ पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः

अब पुष्प या चम्मच से अपनी दायी अंजुलि में जल ले कर निम्न मंत्र बोलते हुए आचमन करें

ॐ केशवाय नमः

ॐ नारायणाय नमः

ॐ वासुदेवाय नमः

अब हृषिकेशाय नमः मंत्र कहते हुए हाथों को धो लें। इस प्रक्रिया को आचमन कहते हैं इससे विद्या, आत्म और बुद्धि तत्व का शोधन हो जाता है। तत्पश्चात तिलक लगाएँ। अब आप पूजा के लिये पूरी तरह पवित्र हैं।

ध्यान व संकल्प

अब मन को एकाग्र कर प्रभु में ध्यान लगाएँ और संकल्प करें।

संकल्प के लिये हाथ में अक्षत, पुष्प और जल लें साथ में कुछ द्रव्य यानि पैसे भी लें और संकल्प मंत्र का जाप करते हुए संकल्प करें कि “मैं अमुक व्यक्ति( अपना नाम), अमुक गोत्र( आप का गोत्र),अमुक स्थान( जिस शहर व स्थान में पूजा की जा रही है) , दिनांक, समय पर सपरिवार  मां लक्ष्मी, सरस्वती तथा गणेश जी का पूजन करने जा रहा हूं, जिससे मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त हों।”

 इसके बाद भगवान गणेश और माँ गौरी की पूजा करें। इसके बाद कलश पूजन करें। अब फिर नवग्रहों का पूजन कीजिए। हाथ में अक्षत और पुष्प ले कर नवग्रह स्तोत्र बोलिए। इसके बाद भगवती षोडश मातृकाओं ( १. गौरी, २. पद्मा, ३. शची, ४. मेधा, ५. सावित्री, ६. विजया, ७. जया, ८. देव सेना, ९. स्वधा, १०. स्वाहा, ११. मातरः, १२. लोकमातरः, १३. धृतिः, १४. पुष्टिः, १५. तुष्टिः, १६. आत्मनः कुलदेवताः ) का पूजन किया जाता है। इन सभी के पूजन के बाद मातृकाओं को गंध, अक्षत व पुष्प प्रदान करते हुए पूजन करें। अब मौलि लेकर गणपति जी , माता लक्ष्मी व सरस्वती को अर्पण कर और स्वयं के हाथ पर भी बंधवा लें। अब सभी देवी-देवताओं के तिलक लगाकर स्वयं को भी तिलक लगवाएं। इसके बाद मां महालक्ष्मी की पूजा आरंभ करें।

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लक्ष्मी पूजन

सर्व प्रथम माता लक्ष्मी का ध्यान करें और निम्न मंत्र बोलें

ॐ या सा पद्मासनस्था, विपुल-कटि-तटी, पद्म-दलायताक्षी।

गम्भीरावर्त-नाभिः, स्तन-भर-नमिता, शुभ्र-वस्त्रोत्तरीया।।

लक्ष्मी दिव्यैर्गजेन्द्रैः। मणि-गज-खचितैः, स्नापिता हेम-कुम्भैः।

नित्यं सा पद्म-हस्ता, मम वसतु गृहे, सर्व-मांगल्य-युक्ता।।

 अर्थात – भगवती लक्ष्मी कमल के आसन पर विराजमान हैं, कमल की पंखुड़ियों के समान सुन्दर बड़े-बड़े जिनके नेत्र हैं, जिनकी विस्तृत कमर और गहरे आवर्तवाली नाभि है, जो पयोधरों के भार से झुकी हुई और सुन्दर वस्त्र के उत्तरीय से सुशोभित हैं, जो मणि-जटित दिव्य स्वर्ण-कलशों के द्वारा स्नान किए हुए हैं, वे कमल-हस्ता सदा सभी मङ्गलों के सहित मेरे घर में निवास करें।

 

देवी की प्रतिष्ठा करें

हाथ में अक्षत लेकर बोलें “ॐ भूर्भुवः स्वः महालक्ष्मी, इहागच्छ इह तिष्ठ, एतानि पाद्याद्याचमनीय-स्नानीयं, पुनराचमनीयम्।

स्नान कराएं

ॐ मन्दाकिन्या समानीतैः, हेमाम्भोरुह-वासितैः स्नानं कुरुष्व देवेशि, सलिलं च सुगन्धिभिः।। ॐ लक्ष्म्यै नमः।।

इदं रक्त चंदनम् लेपनम् से रक्त चंदन लगाएं।

इदं सिन्दूराभरणं से सिन्दूर लगाएं।

ॐ मन्दार-पारिजाताद्यैः, अनेकैः कुसुमैः शुभैः। पूजयामि शिवे, भक्तया, कमलायै नमो नमः।। ॐ लक्ष्म्यै नमः, पुष्पाणि समर्पयामि।’ इस मंत्र से पुष्प चढ़ाएं फिर माला पहनाएं। अब लक्ष्मी देवी को इदं रक्त वस्त्र समर्पयामि कहकर लाल वस्त्र पहनाएं।

 

लक्ष्मी देवी की अंग पूजा

बायें हाथ में अक्षत लेकर दायें हाथ से थोड़ा-थोड़ा छोड़ते जायें—

ॐ चपलायै नम: पादौ पूजयामि।

ॐ चंचलायै नम: जानूं पूजयामि ।

ॐ कमलायै नम: कटि पूजयामि ।

ॐ कात्यायिन्यै नम: नाभि पूजयामि ।

ॐ जगन्मातरे नम: जठरं पूजयामि ।

ॐ विश्ववल्लभायै नम: वक्षस्थल पूजयामि ।

ॐ कमलवासिन्यै नम: भुजौ पूजयामि ।

ॐ कमल पत्राक्ष्य नम: नेत्रत्रयं पूजयामि ।

ॐ श्रियै नम: शिरं: पूजयामि।

 

अष्ट-सिद्धि पूजा

अङ्ग-देवताओं की पूजा करने के बाद पुनः बाएँ हाथ में अक्षत लेकर मंत्रोच्चारण करें.

ॐ अणिम्ने नम:। ॐ महिम्न नम:।

ॐ गरिम्णे नम:। ॐ लघिम्ने नम:।

ॐ प्राप्त्यै नम:। ॐ प्राकाम्यै नम:।

ॐ ईशितायै नम:। ॐ वशितायै नम:।

 

अष्टलक्ष्मी पूजन

पुनः बाएँ हाथ में अक्षत लेकर मंत्रोच्चारण करें.

ॐ आद्ये लक्ष्म्यै नम:। ॐ विद्यालक्ष्म्यै नम:।

ॐ सौभाग्य लक्ष्म्यै नम:। ॐ अमृत लक्ष्म्यै नम:।

ॐ लक्ष्म्यै नम:। ॐ सत्य लक्ष्म्यै नम:।

ॐ भोगलक्ष्म्यै नम:। ॐ योग लक्ष्म्यै नम:।

 

नैवैद्य अर्पण

पूजन के पश्चात देवी को “इदं नानाविधि नैवेद्यानि ॐ महालक्ष्मियै समर्पयामि” मंत्र से नैवैद्य अर्पित करें।

मिष्टान अर्पित करने के लिए मंत्र: “इदं शर्करा घृत समायुक्तं नैवेद्यं ॐ महालक्ष्मियै समर्पयामि” बालें।

प्रसाद अर्पित करने के बाद “इदं आचमनयं ॐ महालक्ष्मियै नम: ” मंत्र बोले और आचमन करायें.

अब पान सुपारी चढ़ायें: इदं ताम्बूल पुगीफल समायुक्तं ॐ महालक्ष्मियै समर्पयामि।

अब एक फूल लेकर लक्ष्मी देवी पर चढ़ाएं और बोलें: एष: पुष्पान्जलि ॐ महालक्ष्मियै नम:।

लक्ष्मी जी की पूजा के बाद भगवान विष्णु एवं शिव जी की पूजा करनी चाहिए और फिर गल्ले की पूजा करें। पूजन के पश्चात सपरिवार आरती और क्षमा प्रार्थना करें।

क्षमा प्रार्थना मंत्र

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम।

पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर।।

मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर।

यत्पूजितं माया देवं परिपूर्ण तदस्तु में।

अर्थात- हे ईश्वर मैं आपका “आवाह्न” करना नहीं जानता हूं न ही विसर्जन अर्थात् न ही आपको विदा करना जानता हूं मुझे आपकी पूजा भी करनी नहीं आती है। अगर मेरे से आप की पूजा में कोई भूल हो गयी है तो कृपा करके मुझे क्षमा करें। न मुझे मंत्र का ज्ञान है न ही क्रिया का, मैं तो आपकी भक्ति करना भी नहीं जानता। मैं यथा संभव पूजा कर रहा हूं, कृपा करके मेरी भूल को क्षमा कर दें और पूजा को पूर्णता प्रदान करें।

अब अपने बड़ों का आशीर्वाद लें और छोटों को भेंट व उपहार दें और सब के साथ पर्व मनाएँ।

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