if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) { /** * Gets views count. * * @param int $id The Post ID. * @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7]) * @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999) * @return string */ function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) { $attr = array( 'id' => $id, 'range' => $range, 'number_format' => $number_format, ); $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) ); $views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $views ) { $views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format ); wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' ); } return $views; } } if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) { /** * Do Query * * @param $instance * @return array */ function jnews_view_counter_query( $instance ) { $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) ); $query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $query ) { $query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance ); wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' ); } return $query; } } Durga Puja 2020 Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/durga-puja-2020/ Daily Dose of Astrology Sat, 21 Oct 2023 04:13:50 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://astrodeeva.com/wp-content/uploads/2022/03/cropped-Logo-32x32.png Durga Puja 2020 Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/durga-puja-2020/ 32 32 Chaitra Navratri 2021 – चैत्र नवरात्र में किस देवी को लगायें कौन-सा भोग? https://astrodeeva.com/chaitra-navratri-2021-%e0%a4%9a%e0%a5%88%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8-%e0%a4%a6/ https://astrodeeva.com/chaitra-navratri-2021-%e0%a4%9a%e0%a5%88%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8-%e0%a4%a6/#respond Thu, 15 Apr 2021 09:58:34 +0000 https://astrodeeva.com/?p=1906 चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2021) के पावन व्रत चल रहें हैं। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व में देवी दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है। इस व्रत के दौरान तिथि और देवी के अनुसार उन्हें अलग-अलग चीजों का भोग लगाया जाता है। 13 अप्रैल चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2021) के पहले […]

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चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2021) के पावन व्रत चल रहें हैं। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व में देवी दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है। इस व्रत के दौरान तिथि और देवी के अनुसार उन्हें अलग-अलग चीजों का भोग लगाया जाता है।

13 अप्रैल चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2021) के पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की जाती है। इस दिन माता को गाय के दूध से बने पकवानों का भोग लगाया जाता है। पिपरमिंट युक्त मीठा मसाला पान, अनार और गुड़ से बने पकवान भी देवी को अर्पण किए जाते हैं। वहीं फल में देवी शैलपुत्री को एक अनार का फल जरूर चढ़ाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि अनार चढ़ाने से देवी जल्द प्रसन्न होती हैं। अनार उनका प्रिय फल भी माना जाता है।

14 अप्रैल नवरात्र (Chaitra Navratri 2021) के दूसरे दिन मां दुर्गा की ब्रह्मचारिणी के रूप में पूजा होती है। मातारानी को को चीनी, मिश्री और पंचामृत का भोग लगाया जाता है। देवी को इस दिन पान-सुपाड़ी भी चढ़ाएं। इस दिन प्रसाद के तौर पर देवी को 2 सेब का भोग लगाया जाता है।

15 अप्रैल नवरात्र (Chaitra Navratri 2021) के तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा को दूध या दूध से बनी चीजें अर्पित करनी चाहिए। गुड़ और लाल सेब भी मैय्या को बहुत पसंद है। ऐसा करने से सभी बुरी शक्तियां दूर भाग जाती हैं। देवी चंद्रघंटा को 3 केले भी अर्पण करें।

16 अप्रैल नवरात्र (Chaitra Navratri 2021) के चौथे दिन माता के चौथे स्वरूप यानि इस दिन देवी कुष्मांडा की पूजा होती है। इनकी उपासना करने से जटिल से जटिल रोगों से मुक्ति मिलती है और सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इस दिन माता को मालपुए का भोग लगाएं। चौथे दिन देवी कुष्मांडा को 4 नाशपाती का भोग लगाया जाता है।

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17 अप्रैल नवरात्र (Chaitra Navratri 2021) के पांचवे दिन देवी स्कंदमाता की की गई पूजा से भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति होती है। नवरात्र के पांचवे दिन देवी को लगाएं केले का भोग या फिर इसे प्रसाद के रूप में दान करें। इस दिन बुद्धि में वृद्धि के लिए माता को मंत्रों के साथ छह इलायची भी चढ़ाएं। फल में देवी स्कंदमाता को अंगूर के 5 गुच्छे चढ़ाएं।

18 अप्रैल नवरात्र (Chaitra Navratri 2021) के छ्ठे दिन देवी कात्यायनी की आराधना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। शहद का भोग लगाकर मां कात्यायनी को प्रसन्न किया जाता है। कात्यायनी माता को फल में 6 अमरूद भी अर्पित कर उन्हें प्रसन्न करें।

19 अप्रैल नवरात्र (Chaitra Navratri 2021) के सांतवे दिन कालरात्रि की पूजा  की जाती है। भूत-प्रेतों से मुक्ति दिलवाने वाली देवी कालरात्रि की उपासना करने से सभी दुख दूर होते हैं। माता को लगाएं गुड़ के नैवेद्य का भोग। नवरात्र के सांतवे दिन 7 चीकू का प्रसाद लगाएं।

20 अप्रैल नवरात्र (Chaitra Navratri 2021) के आंठवें दिन महागौरी के स्वरूप का वंदन किया जाता है। इस दिन देवी को नारियल प्रसाद चढ़ाने से घर में सुख-समृद्धि आती है। महागौरी की पूजा करने के बाद पूरी, हलवा और चना कन्याओं को खिलाना शुभ माना जाता है। महागौरी को फल में शरीफा का प्रसाद चढ़ाएं। इनकी पूजा से संतान संबंधी परेशानियों से छुटकारा मिलता है।

21 अप्रैल नवरात्र (Chaitra Navratri 2020) के आखिरी दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री को जगत को संचालित करने वाली देवी कहा जाता है। इस दिन माता को हलवा, पूरी, चना, खीर, पुए आदि का भोग लगाएं। नवरात्र के आखिरी दिन मां सिद्धिदात्री को 9 संतरे का प्रसाद लगाना शुभ माना जाता है।

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Horoscope 22 October 2020 : छठा नवरात्र , जाने अपने ग्रहों की चाल https://astrodeeva.com/horoscope-22-october-2020-%e0%a4%9b%e0%a4%a0%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%87/ https://astrodeeva.com/horoscope-22-october-2020-%e0%a4%9b%e0%a4%a0%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%87/#respond Thu, 22 Oct 2020 07:42:12 +0000 https://astrodeeva.com/?p=984 महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति माँ दुर्गा ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया और उनका कात्यायनी नाम पड़ा। छठे नवरात्र में माँ के इसी रूप की पूजा की जाती है। माँ की कृपा से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष आदि चारों फलों की जहां प्राप्ति होती है। वहीं वह आलौकिक तेज से अलंकृत होकर हर प्रकार के भय, शोक एवं संतापों से मुक्त होकर खुशहाल जीवन व्यतीत करता है। और माँ को शहद अति प्रिय है। आज 22 ऑक्टोबर 2020 का राशिफल  मेष राशि  इस राशि के जातकों का स्वास्थ्य उत्तम रहेगा |  पारिवारिक जीवन सुखी रहेगा | अपने अहम को नियंत्रण मे रखे नहीं तो वाद विवाद की संभावना हो सकती है | व्यापारियों को लाभ मिलेगा, छात्रों को प्रगति के अवसर प्राप्त होंगे | कही बाहर घूमने […]

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महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति माँ दुर्गा ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया और उनका कात्यायनी नाम पड़ा। छठे नवरात्र में माँ के इसी रूप की पूजा की जाती है। माँ की कृपा से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष आदि चारों फलों की जहां प्राप्ति होती है। वहीं वह आलौकिक तेज से अलंकृत होकर हर प्रकार के भय, शोक एवं संतापों से मुक्त होकर खुशहाल जीवन व्यतीत करता है। और माँ को शहद अति प्रिय है।

आज 22 ऑक्टोबर 2020 का राशिफल 

मेष राशि 

इस राशि के जातकों का स्वास्थ्य उत्तम रहेगा |  पारिवारिक जीवन सुखी रहेगा | अपने अहम को नियंत्रण मे रखे नहीं तो वाद विवाद की संभावना हो सकती है | व्यापारियों को लाभ मिलेगा, छात्रों को प्रगति के अवसर प्राप्त होंगे | कही बाहर घूमने जा सकते है |

वृषभ राशि 

आज आपका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा | आपका मन भी प्रफुलित रहेगा जिसके कारण आज आपके सारे कार्य योजनवध तरीके से पूर्ण होंगे| आपको कही से कोई शुभ समाचार मिल सकता है  |

मिथुन राशि 

आज स्वास्थ्य कुछ नरम गरम रहेगा जिसके कारण मन मे अलग अलग विचार आएंगे |आज कोई भी नया कार्य शुरू न करें | आज अगर आप माता –पिता है  तो बच्चों की चिंता रहेगी | जहा तक संभव हो वाद विवाद टाल दे नहीं तो आर्थिक तंगी के साथ साथ मान हानी भी हो सकती है  |

कर्क राशि 

आज जहां  तक हो सके ध्यान करे नहीं तो शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से आप परेशान हो सकते है |आपको आँख या पेट से संभन्दित कोई परेशानी हो सकती है | मानहानी और धनहानी दोनों ही आज आपके लिए कष्टकर है | जहां  तक हो सके वाद विवाद टाल दे |

सिंह राशि 

आज का लिए दिन अच्छा रहेगा, नए कार्य का प्रारंभ हो सकता है | आर्थिक लाभ होगा परिवारजनों के साथ साथ सोहार्द बना रहेगा | पर्यटन के लिए कही बहार जा सकते है | मन मे प्रसंता बनी रहेगी | शारीरक और मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा |

कन्या राशि 

आज का दिन शुभ रहेगा | आज वाणी की मधुरता बनी रहेगी पारिवारिक वातावरण खुशनुमा  बना  रहेगा  आर्थिक कार्य से लाभ होगा |  फिर भी आपको ध्यान रखना है  की आप अपनी वाणी को नियंत्रण मे रखे नहीं तो वाद विवाद हो सकता है  |

तुला राशि 

आज आपके सारे कार्यों मे आत्मविश्वास छलकता रहेगा जो भी कार्य आप आज हाथ मे लेंगे हो सकता है वो पूर्ण हो जाए पर इस बात की कोई गारंटी नहीं है | आज आपका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा | आपका मन भी प्रफुलित रहेगा जिसके कारण आज आपके सारे कार्य योजनवध तरीके से पूर्ण होंगे आपको कही से कोई शुभ समाचार मिल सकता है  

वृश्चिक राशि  

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य अस्वस्थ रहेगा दुर्घटना से बचे | मन के अंदर चिंता की भावना रहेगी | व्यय अधिक होगा | वाद विवाद से बचे और कोर्ट कचहरी से दूर रहे नहीं तो मुसीबत मे पड़ सकते है  |

धनु राशि 

आज का दिन समान्य ही रहेगा मन बेवजह की बातों से परेशान रहेंगे और अपने आस पास का माहौल खराव कर देंगे जिससे आप और आप के पार्टनर के बीच बहस का कारण बन सकती है  खर्चों पे नियंत्रण रखे |

मकर राशि 

आप के लिए आज का दिन विशेष फलदाई रहेने वाला है | आप घर परिवार और काम मे अच्छा बेलेन्स बना कर रखते है |दुश्मन परास्त होंगे ग्रस्थ जीवन मे प्रेम बना रहेगा |

कुम्भ राशि 

आज का दिन मिला – जुला  रहेगा | पार्टनर गलतफहमी का शिकार हो सकते है | इसलिए बेठकर बात को सुलझाए |  कही जाने की सोच रहे है | तो सही समय हे ग्रहस्थ जीवन मे दिक्कत या सकती है |

मीन राशि 

आज का दिन बहुत बड़िया रहेगा आर्थिक लाभ व्यपार मे लाभ परिवार का सयोग मिलेगा आपके आधिकारिक वर्ग आपके काम से प्रसन्न रहेगा जिससे आपके रिश्ते मजबूत होंगे पारिवारिक जीवन खुशनुमा रहेगा |

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Horoscope 21 October 2020 | आज पंचम नवरात्र, जाने कैसा रहेगा दिन https://astrodeeva.com/horoscope-21-october-2020-%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%aa%e0%a4%82%e0%a4%9a%e0%a4%ae-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95/ https://astrodeeva.com/horoscope-21-october-2020-%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%aa%e0%a4%82%e0%a4%9a%e0%a4%ae-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95/#respond Wed, 21 Oct 2020 04:37:40 +0000 https://astrodeeva.com/?p=980 आज पंचम नवरात्र के दिन आदिशक्ति माँ दुर्गा की स्कंदमाता के रूप में पूजा होती है। कुमार कार्तिकेय की माता होने के कारण इनका नाम स्कंदमाता पड़ा। इनकी पूजा करने वाले साधक संसार के सभी सुखों को भोगते हुए अंत में मोक्ष पद को प्राप्त होते हैं। उनके जीवन में किसी भी प्रकार की वस्तु का कोई अभाव कभी नहीं रहता। इन्हें पद्मासनादेवी भी कहते हैं। माँ का वाहन सिंह है और इन्हें केले का भोग अति प्रिय है। आज 21 ऑक्टोबर 2020 का राशिफल   मेष राशि  आज का दिन मध्यम फल देने वाला है |किसी के साथ वाद विवाद को टाल दे |आपकी चिंताओं में वृद्धि, दोस्तों के साथ कही घूमने के लिए जा सकते है |नौकरी और व्यापार मे लाभ की संभावना है, परिवार के साथ हंसी […]

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आज पंचम नवरात्र के दिन आदिशक्ति माँ दुर्गा की स्कंदमाता के रूप में पूजा होती है। कुमार कार्तिकेय की माता होने के कारण इनका नाम स्कंदमाता पड़ा। इनकी पूजा करने वाले साधक संसार के सभी सुखों को भोगते हुए अंत में मोक्ष पद को प्राप्त होते हैं। उनके जीवन में किसी भी प्रकार की वस्तु का कोई अभाव कभी नहीं रहता। इन्हें पद्मासनादेवी भी कहते हैं। माँ का वाहन सिंह है और इन्हें केले का भोग अति प्रिय है।

आज 21 ऑक्टोबर 2020 का राशिफल 

 मेष राशि 

आज का दिन मध्यम फल देने वाला है |किसी के साथ वाद विवाद को टाल दे |आपकी चिंताओं में वृद्धि, दोस्तों के साथ कही घूमने के लिए जा सकते है |नौकरी और व्यापार मे लाभ की संभावना है, परिवार के साथ हंसी खुशी समय बिताएंगे, स्वास्थ्य का ध्यान रखे |

वृषभ राशि

आज का दिन अति उत्तम फल देने वाला रहेगा|आर्थिक लाभ के योग हैं | दिन अच्छा रहेगा, परिवार के साथ आनंद पूर्वक समय बिताएंगे । स्वास्थ्य का ध्यान रखे, बाहर का खाना नजरअंदाज करे वरना स्वास्थ्य मे गिरावट और मानसिक परेशान हो सकती है। उत्तम फल के लिए ज़रूरी कार्य मध्यान से पूर्व ही सम्पन्न कर ले |

मिथुन राशि 

आज का दिन संभलकर रहे |घर मे ही वाद –विवाद की संभावना है शारीरिक अस्वस्थता रहेगी कोई भी कार्य सही तरीके से पूर्ण करने मे असफल रहेंगे | यात्रा के योग बन रहे हे पेर अभी जितना हो सके यात्रा टाल दे अपनी तरफ से कोई गलती की गुंजाइश न छोड़े वरना आगे चलकर आपकी परेशानी का कारण बन सकती है  |

कर्क राशि 

आज का दिन काफी फलदायी रहेगा ग्रस्थ जीवन सोहर्द पूर्ण रहेगा नॉकरी और व्यपार मे लाभ मिलेगा बड़ों का आशीर्वाद ले सारे कार्य निर्व घिन तरीके से पूर्ण होंगे प्यार आपके सर चड़कर बोलेगा | लेकिन मध्यान के बाद अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखे |

सिंह राशि 

आज का दिन कोई भी नई गतिविधि शुरू करने के लिए सर्वोत्तम है | सारे अधूरे कार्य पूर्ण होंगे |मित्रों से मेल –मिलाप की संभावना है |  आप आज खुश रहेंगे इंकम बड़िया रहेगी खर्चों मे कमी आएगी परिवार के साथ समय अच्छा बीतेगा पार्टनर के साथ समय बिताएंगे कुछ परेशान हो तो घर के बड़ों के साथ बात करके समस्या का निदान निकलेगा |

कन्या राशि 

आज का दिन आपके लिए ज्यादा अच्छा नहीं रहेगा मानसिक तनाव और शारीरिक कष्ट आपके चारों और आपको घेरे रहेंगे लकीं दुपहर के बाद सब कुछ समान्य होने लगेगा | स्वास्थ्य का ध्यान रखे |लंबे प्रवास का योग बन रहा है |कोई भी कार्य संभलकर करे |

तुला राशि 

आज का दिन भाग्य  आपका साथ नहीं देगा  फालतू खर्च होगा। स्वास्थ्य  कमजोर रहेगा। धन की तंगी होगी। बेकार बातों पर ध्यान न दें। विचारों की स्पष्टता न होने से उलझनें रहेंगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। नौकरी में स्थानांतरण या परिवर्तन संभव है। चिंता तथा तनाव रहेंगे। व्यापार-व्यवसाय ठीक-ठीक ही रहेगा |

वृश्चिक राशि 

भूमि व भवन आदि के कार्य मनोनुकूल रहेंगे। परीक्षा व साक्षात्कार आदि में सफलता प्राप्त होगी। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। नौकरी में सफलता प्राप्त होगी  शत्रु परास्त होंगे। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। सभी कार्य पूर्ण होंगे |

धनु राशि 

पार्टी व पिकनिक का कार्यक्रम बन सकता है। शैक्षणिक व शोध कार्य अनुकूल  रहेंगे। किसी घर के बड़े व्यक्ति का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। उत्साह व प्रसन्नता में वृद्धि होगी। नौकरी में कोई नया कार्य कर पाएंगे। अधिकारी प्रसन्न रहेंगे। व्यापार ठीक चलेगा।

मकर राशि 

प्रियजनों के साथ बेवजह रिश्तों में खटास आ सकती है। लोगों की अपेक्षाएं बढ़ेंगी। हताशा का अनुभव होगा। मन की बात किसी को न बतलाएं। संवेदनशीलता बढ़ेगी। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। अपरिचित व्यक्तियों पर अंधविश्वास न करें |

कुम्भ राशि 

नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। मेहनत का फल प्राप्त होगा। अपेक्षित कार्य समय पर पूरे होंगे। मित्रों का सहयोग कर पाएं  सुख के साधन जुटेंगे। कारोबारी लाभ बढ़ेगा कोई भी नया निवेश करने से बचे |

मीन राशि 

साथी तथा रिश्तेदारों से मुलाकात होगी। आत्मसम्मान बना रहेगा। अच्छी खबर प्राप्त होगी। कोई बड़ा काम करने का मन बनेगा। मान-सम्मान मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा  आर्थिक लाभ होगा |

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Horoscope 20 October 2020: चतुर्थ नवरात्र मंगलवार , जाने कैसा रहेगा आज का दिन https://astrodeeva.com/horoscope-20-october-2020-%e0%a4%9a%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%b5%e0%a4%be/ https://astrodeeva.com/horoscope-20-october-2020-%e0%a4%9a%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%b5%e0%a4%be/#respond Tue, 20 Oct 2020 04:31:14 +0000 https://astrodeeva.com/?p=977 अपने उदर से ब्रह्मांड को उत्पन्न करने वाली माँ कुष्मांडा की पूजा चौथे नवरात्र में करने का विधान है। इनकी आराधना करने वाले भक्तों के सभी प्रकार के रोग एवं कष्ट मिट जाते हैं तथा साधक को माँ की भक्ति के साथ ही आयु, यश और बल की प्राप्ति भी सहज ही हो जाती है। माँ को भोग में मालपुआ अति प्रिय है। आज 20 ऑक्टोबर 2020 का राशिफल  मेष राशि  मेष राशि के जातकों के लिए आज आपका दिन मिलाजुला रहेगा। आप प्रेम प्रसंग के चक्कर मे न फसे, आर्थिक नुकसान हो सकता है | अपनी वाणी पे ध्यान दे वरना किसी अपने से भी झगड़ा हो सकता है | वृषभ राशि वृषभ राशि के जातकों के […]

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अपने उदर से ब्रह्मांड को उत्पन्न करने वाली माँ कुष्मांडा की पूजा चौथे नवरात्र में करने का विधान है। इनकी आराधना करने वाले भक्तों के सभी प्रकार के रोग एवं कष्ट मिट जाते हैं तथा साधक को माँ की भक्ति के साथ ही आयु, यश और बल की प्राप्ति भी सहज ही हो जाती है। माँ को भोग में मालपुआ अति प्रिय है।

आज 20 ऑक्टोबर 2020 का राशिफल 

मेष राशि 

मेष राशि के जातकों के लिए आज आपका दिन मिलाजुला रहेगा। आप प्रेम प्रसंग के चक्कर मे न फसे, आर्थिक नुकसान हो सकता है | अपनी वाणी पे ध्यान दे वरना किसी अपने से भी झगड़ा हो सकता है |

वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों के लिए आज का दिन समान्य रहेगा |  आप अपनी अलग पहचान बनाएंगे, व्यवसाय मे पैसा  लगाने से पहले कई बार सोचे क्योंकि अभी सही वक्त नहीं है। ग्रस्थ जीवन अच्छा बीतेगा, नोकरी मे प्रमोशन मिलने के योग है |

मिथुन राशि 

मिथुन राशि के जातकों के लिए आज का दिन उत्तम रहेगा | छात्रों को परिणाम अच्छे  मिलेंगे । आर्थिक लाभ के सयोग बन रहे है, खर्चों पे नियंत्रण रखे कुछ मानसिक तनाव हो सकता है। आप धार्मिक कार्यों मे सयोग देंगे ,परिवार वालों से आर्थिक सपोर्ट मिलेगा ।

कर्क राशि 

कर्क राशि के जातकों के लिए आज का दिन उत्तम रहेगा | नॉकरी वालों को तरक्की के अवसर प्राप्त होंगे। आप आय से अधिक व्यय की अपनी आदत को बदलने की कोशिश करे। पति पत्नी मे गिट पीट हो सकती है लेकिन बच्चों के साथ समय बिताना आपको सुकून के पल देगा |

सिंह राशि 

सिंह राशि के जातकों के लिए आज का दिन अच्छा रहेगा | नॉकरी मे स्थिरता बनी रहेगी । दूसरों को ध्यान मे रख कर के ही अपने कामों को करे। फिजूल खर्च से बचे ,उधार देने से बचे ,अपनी वाणी पे स्यंम रखे और परिवार मे आपकी कोई बात कड़वाहट पेदा कर सकती है |

कन्या राशि 

कन्या राशि के जातकों के लिए आज का दिन कठिनाई भरा रहेगा | आर्थिक मामलों के कारण  घर मे तना  तनी का माहौल  रहेगा| अपने व्यय की आदत को बदलने की कोशिश करे | वाणी में मधुरता रखें और बड़ों का आशीर्वाद लें।

तुला राशि 

तुला राशि के जातकों के लिए आज का दिन मिलाजुल रहेगा | सुनी सुनाई बातों पर और किसी पे भी आँख मूँद कर विश्वास मत करिए । आर्थिक लाभ के सयोग है पर वो कठिन परिश्रम से प्राप्त होंगे |

वृश्चिक राशि  

वृश्चिक राशि के जातकों के लिए आज का दिन कम फलदायी होने के कारण आप का  मन अशांत हो सकता है | वाहन दुर्घटना हो सकती है , सावधानी पूर्वक चलाए। बाहर का खाना न खाए , स्वास्थ्य खराब हो सकता है | नकारात्मक बातों को मन मे घर न करने दे |

धनु राशि 

धनु राशि के जातकों के लिए आज का दिन बहुत अच्छा बीतेगा। आज आपके प्रयास रंग लाएंगे जिससे आपके उन्नति के रास्ते खुलेंगे , कोई सुखद परिवर्तन आपके जीवन मे आने वाला है | कोई शुभ समाचार प्राप्त होगा |

मकर राशि 

मकर राशि के जातक आज अपने आप को आलस्य से बचाय आज। आपको धन लाभ और यश समान्न मे व्रधि के योग बन रहे है, लेकिन ये सब आपके अथक प्रयास से ही संभव है। आपका कही अटक हुआ पैसा वापस मिल सकता हे |

कुम्भ राशि 

कुम्भ राशि के जातकों के लिए आज का दिन फलदायी सिद्ध होने वाला है।  इंकम मे बढ़ोतरी के योग है, स्थान परिवर्तन भी हो सकता है| मान सम्मान मे व्रधि होगी | परिवार और दोस्तों के साथ खुशनुमा माहौल रहेगा जिससे मन प्रसन्न रहेगा |

मीन राशि 

मीन राशि के जातकों के लिए आज का दिन कम फलदायी रहने के कारण मन अप्रसन्न रहेगा। सुबह से ही मन खिन्न रहेगा, शारीरिक अस्वास्थत हो सकती है | वाणी पे नियंत्रण और वाद विवाद से बचना होगा। आज घर मे कुछ भी करने से पहले बड़ों की राय जरूर ले।

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Mata Siddhidatri | माँ सिद्धिदात्री – जाने माता की कथा, मंत्र, पूजा विधि और आरती https://astrodeeva.com/mata-siddhidatri-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87/ https://astrodeeva.com/mata-siddhidatri-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87/#respond Fri, 16 Oct 2020 17:15:47 +0000 https://astrodeeva.com/?p=964 जब-जब संसार में दैत्यों का अत्याचार बढ़ता है और लोगों का धर्म से विश्वास कम होने लगता है तब-तब दुराचारियों का अंत करने दैविय शक्ति का किसी न किसी रूप में पदार्पण होता है। सनातन धर्म में माँ आदिशक्ति का एक महत्वपूर्ण स्थान है। शास्त्रों के अनुसार माँ आदिशक्ति ने इस संसार में अलग- अलग […]

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जब-जब संसार में दैत्यों का अत्याचार बढ़ता है और लोगों का धर्म से विश्वास कम होने लगता है तब-तब दुराचारियों का अंत करने दैविय शक्ति का किसी न किसी रूप में पदार्पण होता है। सनातन धर्म में माँ आदिशक्ति का एक महत्वपूर्ण स्थान है। शास्त्रों के अनुसार माँ आदिशक्ति ने इस संसार में अलग- अलग रूपों में अवतार ले कर जनमानस का कल्याण किया है। माँ दुर्गा के रूप इतने कल्याणकारी है कि इनके दर्शन एवं पूजन मात्र से भक्तों के संकट दूर हो जाते हैं और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।

शास्त्रों में माता के नौ स्वरूप बताए गये है और इन स्वरूपों कि विधिवत सच्चे मन से पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होता है। हमने आप को अपने पूर्व लेखों में देवी के प्रथम आठ रूपों (माँ शैलपुत्रीमाँ ब्रह्मचारिणीमाँ चंद्रघंटामाँ कुष्मांडामाँ स्कंदमातामाँ कात्यायनी, माँ कालरात्रि और माँ महागौरी) के बारे में विस्तार से बताया है। इस लेख में हम दुर्गा जी के नवम स्वरूप के बारे में बता रहे है।  देवी अपने नवम स्वरूप में सिद्धिदात्री  के नाम से जानी जाती हैं। देवी के इस स्वरूप के नाम का अर्थ- सिद्धि अर्थात आध्यात्मिक शक्ति और दात्री अर्थात् देने वाली है। सिद्धिदात्री  के नाम का शाब्दिक अर्थ है सिद्धि को प्रदान करने वाली है। इनकी भक्ति से भक्तों के अंदर की बुराइयाँ नष्ट होती हैं और प्रकाश रूपी ज्ञान का संचार होता है। 

माँ सिद्धिदात्री  का स्वरूप 

देवी सिद्धिदात्री का स्वरूप सौम्य एवं आकर्षक है। देवी कमल के पुष्प पर विराजमान है और सिंह की सवारी करती है। इनकी चार भुजाएँ है देवी अपने बाएँ हाथों में कमल का फूल और शंख धारण किए हुए है तथा अपने दाएँ एक हाथ में गदा धारण करती है और दूसरे दाहिने हाथ चक्र धारण किए हुए है। देवी का यह स्वरूप सभी प्रकार की सिद्धि देने वाला है।

यह भी पढ़े : चैत्र नवरात्र 2022 , जानिए तिथि और कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

माँ सिद्धिदात्री की कथा 

देवीपुराण के अनुसार भगवान शिव ने सभी प्रकार की सिद्धियाँ पाने के लिए देवी सिद्धिदात्री की उपासना की थी। ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मांड के प्रारम्भ में भगवान शिव ने सृजन के लिए आदि पराशक्ति की उपासना की थी। लेकिन आदि पराशक्ति का कोई स्वरूप नहीं है इसलिए देवी, भगवान शिव के वाम अंग से सिद्धिदात्री के रूप में प्रकट हुईं हैं। इसलिए भगवान शिव को अर्धनारीश्वर कहा गया। 

माँ सिद्धिदात्री  की पूजा का विधान 

श्री माँ दुर्गा जी के इस नवम रूप में सिद्धिदात्री  की पूजा नवरात्रि के नवे और आख़री दिन होती है। इनकी पूजा बड़े विधि-विधान से करनी चहिये, अतः नवरात्र की नवमी के दिन ब्रह्म मुहुर्त में उठ कर, नियमित कार्यों के निवृत्त होकर, माँ के निमित्त विविध प्रकार की विहित पूजन की सामाग्री को संग्रहित करके पूजा करनी चाहिए। सर्व प्रथम एक चौकी पर माँ सिद्धिदात्री  की तस्वीर या मूर्ति रखें और भक्तिभाव से हवन एवं आरती करें। नवरात्र के नवमी के दिन हवन करना चहिए  हवन करते वक्त सभी देवियों के नाम से आहुति देनी चहिये फिर माता के नाम से आहुति देनी चहिए। अगर हवन के सही श्लोक मालूम न हो तो दुर्गा सप्तशती के सभी श्लोक मंत्र रूप में हैं अतः सप्तशती के श्लोक वाचन करते हुए आहुति दी जा सकती है। देवी के बीज मंत्र ऊँ ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमो नम:” से कम से कम 108 बार आहुति दें। और फिर प्रसाद का भोग लगा कर माँ की आरती करें। 

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माँ सिद्धिदात्री के मंत्र

माँ सिद्धिदात्री  के अनेक मंत्र है, अतः ज़रूरतों के अनुसार उपयुक्त मंत्र का उच्चारण व जाप करने का अपना ही महत्व है। यहाँ हम माँ के कुछ उपयोगी मंत्र बता रहे हैं जिन के जप से माँ का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है 

ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥

प्रार्थना मंत्र

सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

स्तुति

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

ध्यान मंत्र

वन्दे वाञ्छित मनोरथार्थ चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
कमलस्थिताम् चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्विनीम्॥
स्वर्णवर्णा निर्वाणचक्र स्थिताम् नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम्।
शङ्ख, चक्र, गदा, पद्मधरां सिद्धीदात्री भजेम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोला पीन पयोधराम्।
कमनीयां लावण्यां श्रीणकटिं निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

स्त्रोत

कञ्चनाभा शङ्खचक्रगदापद्मधरा मुकुटोज्वलो।
स्मेरमुखी शिवपत्नी सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते॥
पटाम्बर परिधानां नानालङ्कार भूषिताम्।
नलिस्थिताम् नलनार्क्षी सिद्धीदात्री नमोऽस्तुते॥
परमानन्दमयी देवी परब्रह्म परमात्मा।
परमशक्ति, परमभक्ति, सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते॥
विश्वकर्ती, विश्वभर्ती, विश्वहर्ती, विश्वप्रीता।
विश्व वार्चिता, विश्वातीता सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते॥
भुक्तिमुक्तिकारिणी भक्तकष्टनिवारिणी।
भवसागर तारिणी सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते॥
धर्मार्थकाम प्रदायिनी महामोह विनाशिनीं।
मोक्षदायिनी सिद्धीदायिनी सिद्धिदात्री नमोऽस्तुते॥

कवच मंत्र

ॐकारः पातु शीर्षो माँ, ऐं बीजम् माँ हृदयो।
हीं बीजम् सदापातु नभो गृहो च पादयो॥
ललाट कर्णो श्रीं बीजम् पातु क्लीं बीजम् माँ नेत्रम्‌ घ्राणो।
कपोल चिबुको हसौ पातु जगत्प्रसूत्यै माँ सर्ववदनो॥

माँ सिद्धिदात्री  की आरती

जय सिद्धिदात्री मां तू सिद्धि की दाता ।

तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता ।।

तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि ।

तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि ।।

कठिन काम सिद्ध करती हो तुम ।

जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम ।।

तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है ।

तू जगदंबे दाती तू सर्व सिद्धि है ।।

रविवार को तेरा सुमिरन करे जो ।

तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो ।।

तू सब काज उसके करती है पूरे ।

कभी काम उसके रहे ना अधूरे ।।

तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया ।

रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया ।।

सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली ।

जो है तेरे दर का ही अंबे सवाली ।।

हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा ।

महा नंदा मंदिर में है वास तेरा ।।

मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता ।

भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता ।।

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ज्योतिषीय पहलू

ज्योतिष के अनुसार देवी सिद्धिदात्री  केतु ग्रह को नियंत्रित करती , इसलिए उनकी विधिवत उपासना करने से केतु ग्रह के द्वारा पड़ने वाले बुरे प्रभाव भी निष्क्रिय हो जाते हैं।

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Mata Mahagauri | माँ महागौरी – जाने माता की कथा, मंत्र, पूजा विधि और आरती https://astrodeeva.com/mata-mahagauri-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95/ https://astrodeeva.com/mata-mahagauri-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95/#respond Fri, 16 Oct 2020 09:35:24 +0000 https://astrodeeva.com/?p=958 जब-जब संसार में दैत्यों का अत्याचार बढ़ता है और लोगों का धर्म से विश्वास कम होने लगता है तब-तब दुराचारियों का अंत करने दैविय शक्ति का किसी न किसी रूप में पदार्पण होता है। सनातन धर्म में माँ आदिशक्ति का एक महत्वपूर्ण स्थान है। शास्त्रों के अनुसार माँ आदिशक्ति ने इस संसार में अलग- अलग […]

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जब-जब संसार में दैत्यों का अत्याचार बढ़ता है और लोगों का धर्म से विश्वास कम होने लगता है तब-तब दुराचारियों का अंत करने दैविय शक्ति का किसी न किसी रूप में पदार्पण होता है। सनातन धर्म में माँ आदिशक्ति का एक महत्वपूर्ण स्थान है। शास्त्रों के अनुसार माँ आदिशक्ति ने इस संसार में अलग- अलग रूपों में अवतार ले कर जनमानस का कल्याण किया है। माँ दुर्गा के रूप इतने कल्याणकारी है कि इनके दर्शन एवं पूजन से भक्त के संकट नष्ट हो जाते हैं और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।

शास्त्रों में माता के नौ स्वरूप बताए गये है और इन स्वरूपों कि पूजा करने से लाभ होता है। हमने आप को अपने पूर्व लेखों में देवी के प्रथम सात रूपों (माँ शैलपुत्रीमाँ ब्रह्मचारिणीमाँ चंद्रघंटामाँ कुष्मांडामाँ स्कंदमातामाँ कात्यायनी और माँ कालरात्रि) के बारे में विस्तार से बताया है। इस लेख में हम दुर्गा जी के अष्टम स्वरूप के बारे में बता रहे है।  देवी अपने अष्टम स्वरूप में महागौरी के नाम से जानी जाती हैं। देवी के इस स्वरूप के नाम का अर्थ- महा अर्थात महान और बड़ा है और गौरी अर्थात् गोरी है। महागौरी के नाम का शाब्दिक अर्थ है सबसे गोरी/ सुंदर।

माँ महागौरी का स्वरूप 

देवी महागौरी का वर्ण पूर्णतः गोरा है, इस गौरता की उपमा शंख और चंद्र से दी गई है। इनके समस्त वस्त्र एवं आभूषण आदि भी श्वेत हैं। इसलिए इन्हें महागौरी कहा गया है। इनकी चार भुजाएँ है । माता अपने एक बाएँ हाथ में डमरू धारण किए हुए है तथा दूसरा बायां हाथ वर मुद्रा में है। देवी अपने दाएँ एक हाथ में त्रिशूल धारण करती है और दूसरा दाहिना हाथ अभय मुद्रा धारण किए हुए है। देवी महागौरी वृषभ की सवारी करती हैं। 

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माँ महागौरी की कथा 

पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए देवी ने अपने बाल्यकाल से ही कठोर तपस्या प्रारम्भ की और कई वर्षों के कठोर तप के बाद भगवान शिव प्रसन्न हुए और देवी को अपनी भार्या के रूप में स्वीकार किया। इतने वर्षों की कठोर तपस्या के कारण देवी का शरीर अत्यंत जीर्ण व कमजोर होकर काले रंग का हो गया था। देवी की ऐसी दशा को देख कर भोलेनाथ ने अपने कमंडल से गंगा जल निकाल कर देवी पे छिड़क दिया और देवी को गंगा जल से स्नान करवाया। जिसके प्रभाव व शिव की इच्छा से देवी का वर्ण विद्युत के समान अत्यंत कांतिमान हो गया। तभी से इनका नाम महागौरी पड़ा। 

देवी का नाम महागौरी क्यों पड़ा इस पर एक और पौराणिक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि एक बार माता और शिव जी बातें कर रहे थे इसी बीच बातों बातों में भगवान शिव ने माता से कुछ कह दिया। जिसे माता ने अपने मन में लगा लिया और वहाँ से चली गयी और तपस्या में लीन हो गयी। जब माता कई वर्षों तक नहीं लौटी तो भगवान शिव उन्हें खोजने के लिए निकल पड़े। खोजते खोजते शिव वहाँ पहुँच गये जहाँ माता तपस्या में लीन थी। तपस्या के कारण माता का शरीर अति तेज से युक्त हो गया जिसे देख शिव जी में माता को गौरी कह कर संबोधित किया तभी से इन्हें माँ महागौरी के रूप में जाना जाने लगा।

माँ महागौरी की पूजा का विधान 

श्री माँ दुर्गा जी के इस अष्टम रूप में महागौरी की पूजा नवरात्रि के आठवे दिन होती है। इनकी पूजा बड़े विधि-विधान से करनी चहिये, अतः नवरात्र के आठवे दिन ब्रह्म मुहुर्त में उठ कर, नियमित कार्यों के निवृत्त होकर, माँ के निमित्त विविध प्रकार की विहित पूजन की सामाग्री को संग्रहित करके पूजा करनी चाहिए। सर्व प्रथम एक चौकी पर सफ़ेद वस्त्र बिछाकर उस पर महागौरी यंत्र रखें और यंत्र की स्थापना कर माँ महागौरी की पूजा करनी चाहिए। और दुर्गसप्तशती का पाठ करें या ब्राह्मण से करवाएँ। 

दुर्गा पूजा में अष्टमी तिथि का बहुत बड़ा महत्व बताया गया है। इस दिन महिलाएँ अपने सुहाग के लिए देवी माँ को चुनरी भेंट करती हैं। अष्टमी के दिन कन्या पूजन करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। कन्याओं की संख्या 9 होनी चाहिए। कन्याओं की आयु 2 साल से ऊपर और 10 साल से अधिक न हो। भोजन कराने के बाद कन्याओं को दक्षिणा देनी चाहिए।

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माँ महागौरी के मंत्र

माँ महागौरी के अनेक मंत्र है, अतः ज़रूरतों के अनुसार उपयुक्त मंत्र का उच्चारण व जाप करने का अपना ही महत्व है। यहाँ हम माँ के कुछ उपयोगी मंत्र बता रहे हैं जिन के जप से माँ का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है:

ॐ देवी महागौर्यै नमः॥

॥ प्रार्थना मंत्र ॥

श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥

॥ स्तुति ॥

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

॥ ध्यान मंत्र ॥

वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहारूढा चतुर्भुजा महागौरी यशस्विनीम्॥
पूर्णन्दु निभाम् गौरी सोमचक्रस्थिताम् अष्टमम् महागौरी त्रिनेत्राम्।
वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् त्रैलोक्य मोहनम्।
कमनीयां लावण्यां मृणालां चन्दन गन्धलिप्ताम्॥

॥ स्त्रोत ॥

सर्वसङ्कट हन्त्री त्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्।
ज्ञानदा चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥
सुख शान्तिदात्री धन धान्य प्रदायनीम्।
डमरूवाद्य प्रिया अद्या महागौरी प्रणमाम्यहम्॥
त्रैलोक्यमङ्गल त्वंहि तापत्रय हारिणीम्।
वददम् चैतन्यमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥

॥ कवच मंत्र ॥

ॐकारः पातु शीर्षो माँ, हीं बीजम् माँ, हृदयो।
क्लीं बीजम् सदापातु नभो गृहो च पादयो॥
ललाटम् कर्णो हुं बीजम् पातु महागौरी माँ नेत्रम्‌ घ्राणो।
कपोत चिबुको फट् पातु स्वाहा माँ सर्ववदनो॥

॥ माँ महागौरी की आरती ॥

जय महागौरी जगत की माया।
जया उमा भवानी जय महामाया॥

हरिद्वार कनखल के पासा।
महागौरी तेरी वहां निवासा॥

चंद्रकली ओर ममता अंबे।
जय शक्ति जय जय माँ जगंदबे॥

भीमा देवी विमला माता।
कौशिकी देवी जग विख्यता॥

हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा।
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥

सती {सत} हवन कुंड में था जलाया।
उसी धुएं ने रूप काली बनाया॥

बना धर्म सिंह जो सवारी में आया।
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥

तभी माँ ने महागौरी नाम पाया।
शरण आनेवाले का संकट मिटाया॥

शनिवार को तेरी पूजा जो करता।
माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता॥

भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो।
महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो॥

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ज्योतिषीय पहलू

ज्योतिष के अनुसार देवी महागौरी राहु ग्रह को नियंत्रित करती , इसलिए उनकी विधिवत उपासना करने से राहु ग्रह के द्वारा पड़ने वाले बुरे प्रभाव भी निष्क्रिय हो जाते हैं।

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Mata Kalaratri | माँ कालरात्रि – जाने माता की कथा, मंत्र, पूजा विधि और आरती https://astrodeeva.com/mata-kalaratri-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4/ https://astrodeeva.com/mata-kalaratri-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4/#respond Thu, 15 Oct 2020 08:52:15 +0000 https://astrodeeva.com/?p=949 जब-जब संसार में दैत्यों का अत्याचार बढ़ता है और लोगों का धर्म से विश्वास कम होने लगता है तब-तब दुराचारियों का अंत करने दैविय शक्ति का किसी न किसी रूप में पदार्पण होता है। सनातन धर्म में माँ आदिशक्ति का एक महत्वपूर्ण स्थान है। शास्त्रों के अनुसार माँ आदिशक्ति ने इस संसार में अलग- अलग रूपों […]

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जब-जब संसार में दैत्यों का अत्याचार बढ़ता है और लोगों का धर्म से विश्वास कम होने लगता है तब-तब दुराचारियों का अंत करने दैविय शक्ति का किसी न किसी रूप में पदार्पण होता है। सनातन धर्म में माँ आदिशक्ति का एक महत्वपूर्ण स्थान है। शास्त्रों के अनुसार माँ आदिशक्ति ने इस संसार में अलग- अलग रूपों में अवतार ले कर जनमानस का कल्याण किया है। माँ दुर्गा के रूप इतने कल्याणकारी है कि इनके दर्शन एवं पूजन से भक्त के संकट नष्ट हो जाते हैं और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।

शास्त्रों में माता के नौ स्वरूप बताए गये है और इन स्वरूपों कि पूजा करने से लाभ होता है। हमने आप को अपने पूर्व लेखों में देवी के प्रथम छःरूपों (माँ शैलपुत्रीमाँ ब्रह्मचारिणीमाँ चंद्रघंटामाँ कुष्मांडामाँ स्कंदमाता और माँ कात्यायनी ) के बारे में विस्तार से बताया है। इस लेख में हम दुर्गा जी के सातवें स्वरूप के बारे में बता रहे है। देवी अपने सातवें स्वरूप में कालरात्रि के नाम से जानी जाती हैं। देवी के इस स्वरूप के नाम का अर्थ- काल अर्थात मृत्यु और समय है और रात्रि अर्थात् रात है। कालरात्रि के नाम का शाब्दिक अर्थ है रात/ अंधेरे को ख़त्म करने वाली। 

माँ कालरात्रि का स्वरूप 

देवी कालरात्रि का शरीर रात के अंधकार की तरह कृष्ण वर्ण का है इनके बाल बिखरे हुए हैं तथा इनके गले में विधुत की माला है। इनके चार भुजाएँ है अपनी बाएँ एक हाथ में कटार तथा एक हाथ में खगड धारण किया हुआ है। देवी के दोनो दाहिने हाथ वरमुद्रा और अभय मुद्रा में है। कालरात्रि का वाहन गर्दभ(गधा) है। इनके तीन नेत्र है तथा इनके श्वास से अग्नि निकलती है। ये तीनों ही नेत्र ब्रह्मांड के समान गोल हैं। माँ कालरात्रि भक्तों का हमेशा कल्याण करती हैं, अतः इन्हें शुभंकरी भी कहते हैं।

यह भी पढ़े : Navratri Kanya Pujan: शारदीय नवरात्रि में कब होगा कन्या पूजन? जानें अष्टमी और नवमी की सही तारीख व शुभ समय

माँ कालरात्रि की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार तीनों लोकों में शुम्भ निशुम्भ नामक दानवो ने आतंक मचा रखा था और देवलोक पर दानवो का राज हो गया था। इससे परेशान होकर सभी देवता माँ पार्वती के पास इस समस्या के समाधान के लिए पहुंचे। माँ उस समय अपने घर में स्नान कर रहीं थीं, इसलिए उन्होंने उनकी मदद के लिए चण्डी को भेजा।

जब देवी चण्डी दानवो से युद्ध करने पहुँची तो दानवो की तरफ़ से चण्ड-मुण्ड नामक दानव आए। देवी ने उनका वध किया जिसके कारण उनका नाम चामुंडा पड़ा। इसके बाद रक्तबीज नामक राक्षस आया। उस को वरदान था की जैसे ही उसके रक्त की बूँद धरती पर गिरेगी तो एक नया रक्तबीज उत्पन होगा। तब देवी ने उसे मारकर उसका रक्त पान करने का निर्णय किया और माँ कालरात्रि को उत्पन्न किया। ताकि माँ कालरात्रि रक्तबीज का वध कर उस का सारा रक्तपान कर ले ताकि रक्त की एक बूँद भी धरती पर ना गिरे और नया रक्तबीज उत्पन ना हो सके।

माँ कालरात्रि की पूजा का विधान 

श्री माँ दुर्गा जी के इस सप्तम रूप में माँ कालरात्रि की पूजा नवरात्रि के सातवें दिन होती है। इनकी पूजा बड़े विधि-विधान से करनी चहिये, अतः नवरात्र के सातवें दिन ब्रह्म मुहुर्त में उठ कर, नियमित कार्यों के निवृत्त होकर, माँ के निमित्त विविध प्रकार की विहित पूजन की सामाग्री को संग्रहित करके नवग्रह, दशदिक्पाल, देवी के परिवार में उपस्थित देवी देवता की पूजा करनी चाहिए, फिर मां कालरात्रि की पूजा करनी चाहिए। और दुर्गसप्तशती का पाठ करें या ब्राह्मण से करवाएँ। 

दुर्गा पूजा में सप्तमी तिथि का बहुत बड़ा महत्व बताया गया है। सप्तमी की पूजा अन्य दिनों की तरह ही होती परंतु रात्रि में विशेष विधान के साथ देवी की पूजा करने का विधान है। इस दिन कहीं कहीं तांत्रिक विधि से पूजा होने पर मदिरा भी देवी को अर्पित कि जाती है। सप्तमी की रात्रि ‘को सिद्धियों’ की रात भी कहा जाता है। इनकी साधना यदि शास्त्रीय विधि से की जाए तो तत्काल फल प्राप्त होता है। इसमे तनिक भी संदेह नहीं हैं। काली कलकत्ते वाली का नाम कौन नहीं जानता? वैसे तो माँ काली की पूजा व अर्चना सम्पूर्ण भारत व विश्व के अन्य देशों में होती है। किन्तु बंगाल व असम में उनकी पूजा बड़े ही धूम-धाम से की जाती है।

Must Read: दुर्गा सप्तशती सम्पूर्ण पाठ का फल पायें इस एक मंत्र के जाप से।Durga Saptashati

माँ कालरात्रि के मंत्र

माँ कालरात्रि के अनेक मंत्र है, अतः ज़रूरतों के अनुसार उपयुक्त मंत्र का उच्चारण व जाप करने का अपना ही महत्व है। यहाँ हम माँ के कुछ उपयोगी मंत्र बता रहे हैं जिन के जप से माँ का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है:

ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

प्रार्थना मंत्र

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा।
वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

स्तुति

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

ध्यान मंत्र

करालवन्दना घोरां मुक्तकेशी चतुर्भुजाम्।
कालरात्रिम् करालिंका दिव्याम् विद्युतमाला विभूषिताम्॥
दिव्यम् लौहवज्र खड्ग वामोघोर्ध्व कराम्बुजाम्।
अभयम् वरदाम् चैव दक्षिणोध्वाघः पार्णिकाम् मम्॥
महामेघ प्रभाम् श्यामाम् तक्षा चैव गर्दभारूढ़ा।
घोरदंश कारालास्यां पीनोन्नत पयोधराम्॥
सुख पप्रसन्न वदना स्मेरान्न सरोरूहाम्।
एवम् सचियन्तयेत् कालरात्रिम् सर्वकाम् समृध्दिदाम्॥

स्त्रोत

हीं कालरात्रि श्रीं कराली च क्लीं कल्याणी कलावती।
कालमाता कलिदर्पध्नी कमदीश कुपान्विता॥
कामबीजजपान्दा कमबीजस्वरूपिणी।
कुमतिघ्नी कुलीनर्तिनाशिनी कुल कामिनी॥
क्लीं ह्रीं श्रीं मन्त्र्वर्णेन कालकण्टकघातिनी।
कृपामयी कृपाधारा कृपापारा कृपागमा॥

कवच मंत्र

ऊँ क्लीं मे हृदयम् पातु पादौ श्रीकालरात्रि।
ललाटे सततम् पातु तुष्टग्रह निवारिणी॥
रसनाम् पातु कौमारी, भैरवी चक्षुषोर्भम।
कटौ पृष्ठे महेशानी, कर्णोशङ्करभामिनी॥
वर्जितानी तु स्थानाभि यानि च कवचेन हि।
तानि सर्वाणि मे देवीसततंपातु स्तम्भिनी॥

माँ कालरात्रि की आरती

कालरात्रि जय-जय-महाकाली।
काल के मुह से बचाने वाली॥

दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा।
महाचंडी तेरा अवतार॥

पृथ्वी और आकाश पे सारा।
महाकाली है तेरा पसारा॥

खडग खप्पर रखने वाली।
दुष्टों का लहू चखने वाली॥

कलकत्ता स्थान तुम्हारा।
सब जगह देखूं तेरा नजारा॥

सभी देवता सब नर-नारी।
गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥

रक्तदंता और अन्नपूर्णा।
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥

ना कोई चिंता रहे बीमारी।
ना कोई गम ना संकट भारी॥

उस पर कभी कष्ट ना आवें।
महाकाली माँ जिसे बचाबे॥

तू भी भक्त प्रेम से कह।
कालरात्रि माँ तेरी जय॥

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ज्योतिषीय पहलू

ज्योतिष के अनुसार देवी कालरात्रि शनि ग्रह को नियंत्रित करती , इसलिए उनकी विधिवत उपासना करने से शनि के द्वारा पड़ने वाले बुरे प्रभाव भी निष्क्रिय हो जाते हैं।

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Mata Katyayani | माँ कात्यायनी – जाने माता की कथा, मंत्र, पूजा विधि और आरती https://astrodeeva.com/mata-katyayani-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4/ https://astrodeeva.com/mata-katyayani-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4/#comments Tue, 13 Oct 2020 04:08:49 +0000 https://astrodeeva.com/?p=935 जब-जब संसार में दैत्यों का अत्याचार बढ़ता है और लोगों का धर्म से विश्वास कम होने लगता है तब-तब दुराचारियों का अंत करने दैविय शक्ति का किसी न किसी रूप में पदार्पण होता है। सनातन धर्म में माँ आदिशक्ति का एक महत्वपूर्ण स्थान है। शास्त्रों के अनुसार माँ आदिशक्ति ने इस संसार में अलग- अलग […]

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जब-जब संसार में दैत्यों का अत्याचार बढ़ता है और लोगों का धर्म से विश्वास कम होने लगता है तब-तब दुराचारियों का अंत करने दैविय शक्ति का किसी न किसी रूप में पदार्पण होता है। सनातन धर्म में माँ आदिशक्ति का एक महत्वपूर्ण स्थान है। शास्त्रों के अनुसार माँ आदिशक्ति ने इस संसार में अलग- अलग रूपों में अवतार ले कर जनमानस का कल्याण किया है। माँ भवानी के रूप इतने कल्याणकारी है कि इनके दर्शन एवं पूजन से भक्त के संकट नष्ट हो जाते हैं और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।

शास्त्रों में माता के नौ स्वरूप है और इन स्वरूपों कि पूजा करने से लाभ होता है। वो अपने छठे स्वरूप में कात्यायनी के नाम से जानी जाती हैं। देवी ने यह रूप महिषासुर नामक राक्षक का वध करने के लिए धारण किया था। माँ कात्यायनी को उनके हिंसक रूप के कारण युद्ध की देवी भी कहा जाता है।

माँ कात्यायनी का स्वरूप

माँ कात्यायनी शेर पे सवार हैं। इनकी चार भुजाएँ है ये अपने बाएँ एक हाथ ने कमल और दूसरे बाएँ हाथ में तलवार धारण करती हैं वहीं माता अपने दाएँ एक हाथ में अभय मुद्रा और दूसरे हाथ से माँ सब को आशीर्वाद प्रदान करती है। 

माँ कात्यायनी की कथा 

पौराणिक कथा के अनुसार प्रसिद्ध महर्षि  कात्यायन ने अनेक वर्षों तक भगवती पराम्बा की कठिन तपस्या की और उन्होंने भगवती को प्रसन्न कर उन्हें अपने घर में पुत्री रूप में जन्म लेने का वरदान माँगा। माता ने उनकी भक्ति और तपस्या से प्रसन्न हो कर उनकी यह इच्छा स्वीकार कर ली और देवताओं, ऋषियों के संकट दूर करने हेतु महर्षि कात्यायन के घर अश्विन कृष्णचतुर्दशी के दिन पुत्री रूप में जन्म लिया। इसलिए माता का नाम कात्यायनी पड़ा। 

कुछ समय पश्चात जब पूरी दुनिया में महिषासुर नामक राक्षस ने अपना उत्पात व तांडव मचाया था तब देवी ने दशमी के दिन महिषासुर का वध कर देवों और ऋषियों को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया। 

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माँ कात्यायनी की पूजा का विधान 

श्री माँ दुर्गा जी के इस छठे रूप में माँ कात्यायनी  की पूजा नवरात्रि के छठवें दिन होती है। इनकी पूजा बड़े विधि-विधान से करनी चहिये, अतः नवरात्र के छठवें दिन ब्रह्म मुहुर्त में उठ कर, नियमित कार्यों के निवृत्त होकर, माँ के निमित्त विविध प्रकार की विहित पूजन की सामाग्री को संग्रहित करके भक्ति-भाव से पूजन करना चहिये और दुर्गसप्तशती का पाठ करें या ब्राह्मण से करवाएँ। माँ को केले का भोग लगना चहिये।

माँ कात्यायनी की पूरे भक्ति भाव से पूजा करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है तथा शारीरिक बल और समृद्ध होता है। भक्त रोग और भय से मुक्त होता है तथा प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष शत्रुओं से छुटकारा प्राप्त करता है। 

ऐसी भी मान्यता है की ब्रज की गोपियों ने भगवान कृष्ण को प्रियतम के रूप में पाने के लिए माँ कात्यायनी की पूजा कालिंदी यमुनाके तट पर की थी। 

माँ कात्यायनी के मंत्र

माँ कात्यायनी के अनेक मंत्र है, अतः ज़रूरतों के अनुसार उपयुक्त मंत्र का उच्चारण व जाप किए जाने का विधान है। यहाँ हम माँ के कुछ उपयोगी मंत्र बता रहे हैं जिन के जप से माँ का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है 

ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥

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प्रार्थना मंत्र

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥

स्तुति

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

ध्यान

वन्दे वाञ्छित मनोरथार्थ चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहारूढा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्विनीम्॥
स्वर्णवर्णा आज्ञाचक्र स्थिताम् षष्ठम दुर्गा त्रिनेत्राम्।
वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥
पटाम्बर परिधानां स्मेरमुखी नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रसन्नवदना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम्।
कमनीयां लावण्यां त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम्॥

माँ कात्यायनी की स्तोत्र पाठ (Mata Katyayani Stotra)

कञ्चनाभां वराभयं पद्मधरा मुकटोज्जवलां।
स्मेरमुखी शिवपत्नी कात्यायनेसुते नमोऽस्तुते॥
पटाम्बर परिधानां नानालङ्कार भूषिताम्।
सिंहस्थिताम् पद्महस्तां कात्यायनसुते नमोऽस्तुते॥
परमानन्दमयी देवी परब्रह्म परमात्मा।
परमशक्ति, परमभक्ति, कात्यायनसुते नमोऽस्तुते॥
विश्वकर्ती, विश्वभर्ती, विश्वहर्ती, विश्वप्रीता।
विश्वाचिन्ता, विश्वातीता कात्यायनसुते नमोऽस्तुते॥
कां बीजा, कां जपानन्दकां बीज जप तोषिते।
कां कां बीज जपदासक्ताकां कां सन्तुता॥
कांकारहर्षिणीकां धनदाधनमासना।
कां बीज जपकारिणीकां बीज तप मानसा॥
कां कारिणी कां मन्त्रपूजिताकां बीज धारिणी।
कां कीं कूंकै क: ठ: छ: स्वाहारूपिणी॥

माँ कात्यायनी की कवच ( Mata Katyayani Kavach)

कात्यायनौमुख पातु कां स्वाहास्वरूपिणी।
ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी॥
कल्याणी हृदयम् पातु जया भगमालिनी॥

|| माँ कात्यायनी की आरती ||

जय कात्यायनी माँ, मैया जय कात्यायनी माँ ।
उपमा  रहित  भवानी,   दूँ   किसकी  उपमा ॥
मैया जय कात्यायनी….

गिरजापति शिव का तप, असुर रम्भ कीन्हाँ ।
वर-फल जन्म रम्भ  गृह,  महिषासुर  लीन्हाँ ॥
मैया जय कात्यायनी….

कर  शशांक-शेखर   तप,  महिषासुर   भारी ।
शासन   कियो   सुरन  पर,  बन   अत्याचारी ॥
मैया जय कात्यायनी….

त्रिनयन  ब्रह्म  शचीपति,  पहुँचे, अच्युत  गृह ।
महिषासुर   बध   हेतू,   सुर   कीन्हौं   आग्रह ॥
मैया जय कात्यायनी….

सुन  पुकार  देवन मुख,  तेज  हुआ  मुखरित ।
जन्म लियो कात्यायनी, सुर-नर-मुनि के हित ॥
मैया जय कात्यायनी….

अश्विन कृष्ण-चौथ  पर,  प्रकटी  भवभामिनि ।
पूजे  ऋषि   कात्यायन,  नाम  काऽऽत्यायिनि ॥
मैया जय कात्यायनी….

अश्विन  शुक्ल-दशी    को,   महिषासुर  मारा ।
नाम   पड़ा   रणचण्डी,   मरणलोक    न्यारा ॥
मैया जय कात्यायनी….

दूजे      कल्प    संहारा,    रूप     भद्रकाली ।
तीजे    कल्प    में    दुर्गा,   मारा   बलशाली ॥
मैया जय कात्यायनी….

दीन्हौं पद  पार्षद  निज,  जगतजननि  माया ।
देवी   सँग    महिषासुर,  रूप   बहुत   भाया ॥
मैया जय कात्यायनी….

उमा     रमा     ब्रह्माणी,    सीता    श्रीराधा ।
तुम  सुर-मुनि  मन-मोहनि, हरिये  भव-बाधा ॥
मैया जय कात्यायनी….

जयति   मङ्गला  काली,  आद्या  भवमोचनि ।
सत्यानन्दस्वरूपणि,        महिषासुर-मर्दनि ॥
मैया जय कात्यायनी….

जय-जय  अग्निज्वाला,   साध्वी   भवप्रीता ।
करो  हरण   दुःख   मेरे,   भव्या    सुपुनीता॥
मैया जय कात्यायनी….

अघहारिणि भवतारिणि, चरण-शरण  दीजै ।
हृदय-निवासिनि    दुर्गा,   कृपा-दृष्टि  कीजै ॥
मैया जय कात्यायनी….

ब्रह्मा  अक्षर  शिवजी,  तुमको   नित  ध्यावै ।
करत ‘अशोक’ नीराजन, वाञ्छितफल पावै॥
मैया जय कात्यायनी….

(आरती रचना-अशोक कुमार खरे)

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ज्योतिषीय पहलू

ज्योतिष के अनुसार देवी कात्यायनि बृहस्पति ग्रह को नियंत्रित करती , इसलिए उनकी विधिवत उपासना करने से बृहस्पति के द्वारा पड़ने वाले बुरे प्रभाव भी निष्क्रिय हो जाते हैं।

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Mata Skandmata | माँ स्कंदमाता- जाने माता के मंत्र, पूजा विधि और आरती https://astrodeeva.com/mata-skandmata-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4/ https://astrodeeva.com/mata-skandmata-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4/#comments Sat, 10 Oct 2020 09:12:53 +0000 https://astrodeeva.com/?p=917 सनातन धर्म में माँ आदिशक्ति का एक महत्वपूर्ण स्थान है। माँ अपने हर रूप में अपने भक्तों का कल्याण करती है। माँ भवानी के रूप इतने कल्याणकारी है कि इनके दर्शन एवं पूजन से भक्त के संकट नष्ट हो जाते हैं और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार माँ आदिशक्ति के नौ […]

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सनातन धर्म में माँ आदिशक्ति का एक महत्वपूर्ण स्थान है। माँ अपने हर रूप में अपने भक्तों का कल्याण करती है। माँ भवानी के रूप इतने कल्याणकारी है कि इनके दर्शन एवं पूजन से भक्त के संकट नष्ट हो जाते हैं और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।

शास्त्रों के अनुसार माँ आदिशक्ति के नौ स्वरूप है और इन स्वरूपों कि पूजा करने से लाभ होता है। वो अपने पांचवें स्वरूप में स्कंदमाता के नाम से जानी जाती हैं। माता के इस रूप का शाब्दिक अर्थ है स्कंद मतलब भगवान कार्तिकेय/मुरुगन और माता मतलब माता है, अतः इनके नाम का मतलब स्कंद की माता है। 

माँ स्कंदमाता का स्वरूप 

माता का यह ममतामयी स्वरूप है शास्त्रों के अनुसार इनकी चार भुजाएँ हैं। माँ ने एक हाथ से अपने पुत्र भगवान कार्तिकेय(स्कंद) को अपने गोद में बैठाया हुआ है, दो भुजाओं में माँ कमल के फूल को धारण किये हुए है और एक भुजा से अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान कर रही हैं। माँ शक्ति अपने इस रूप से संदेश देती है की वो अपना वात्सल्य सभी को एक समान प्रदान करती है परंतु अगर कोई उनके संतान/भक्त को किसी प्रकार का कष्ट देता है तो माँ उग्र रूप में आकर दुष्टों का संहार भी करती हैं।

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माँ स्कंदमाता की पूजा का विधान 

श्री माँ दुर्गा जी के इस पंचम रूप में माँ स्कंदमाता  की पूजा नवरात्रि के पाँचवें दिन होती है। इनकी पूजा बड़े विधि-विधान से करनी चहिये, अतः नवरात्र के पाँचवें दिन ब्रह्म मुहुर्त में उठ कर, नियमित कार्यों के निवृत्त होकर, माँ के निमित्त विविध प्रकार की विहित पूजन की सामाग्री को संग्रहित करके भक्ति-भाव से पूजन करना चहिये और दुर्गसप्तशती का पाठ करें या ब्राह्मण से करवाएँ। माँ को केले का भोग लगना चहिये।

माँ स्कंदमाता की पूजा करने से भगवान स्कंद की पूजा भी स्वतः हो जाती है। जो भक्त भक्ति-भाव से माता की पूजा आराधना करता है तो माँ उसे ज्ञान, शक्ति और समृद्धि प्रदान करती है। 

माँ स्कंदमाता के मंत्र (Mata Skandmata Mantra)

माँ स्कंदमाता के अनेक मंत्र है, अतः ज़रूरतों के अनुसार उपयुक्त मंत्र का उच्चारण व जाप किए जाने का विधान है। यहाँ हम माँ के कुछ उपयोगी मंत्र बता रहे हैं जिन के जप से माँ का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है 

ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥

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प्रार्थना मंत्र

सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

स्तुति

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

ध्यान

वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा स्कन्दमाता यशस्वनीम्।।
धवलवर्णा विशुध्द चक्रस्थितों पंचम दुर्गा त्रिनेत्रम्।
अभय पद्म युग्म करां दक्षिण उरू पुत्रधराम् भजेम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानांलकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल धारिणीम्॥
प्रफुल्ल वंदना पल्ल्वांधरा कांत कपोला पीन पयोधराम्।
कमनीया लावण्या चारू त्रिवली नितम्बनीम्॥

स्कंदमाता की स्तोत्र पाठ (Mata Skandmata Stotra)

नमामि स्कन्दमाता स्कन्दधारिणीम्।
समग्रतत्वसागररमपारपार गहराम्॥
शिवाप्रभा समुज्वलां स्फुच्छशागशेखराम्।
ललाटरत्नभास्करां जगत्प्रीन्तिभास्कराम्॥
महेन्द्रकश्यपार्चिता सनंतकुमाररसस्तुताम्।
सुरासुरेन्द्रवन्दिता यथार्थनिर्मलादभुताम्॥
अतर्क्यरोचिरूविजां विकार दोषवर्जिताम्।
मुमुक्षुभिर्विचिन्तता विशेषतत्वमुचिताम्॥
नानालंकार भूषितां मृगेन्द्रवाहनाग्रजाम्।
सुशुध्दतत्वतोषणां त्रिवेन्दमारभुषताम्॥
सुधार्मिकौपकारिणी सुरेन्द्रकौरिघातिनीम्।
शुभां पुष्पमालिनी सुकर्णकल्पशाखिनीम्॥
तमोन्धकारयामिनी शिवस्वभाव कामिनीम्।
सहस्त्र्सूर्यराजिका धनज्ज्योगकारिकाम्॥
सुशुध्द काल कन्दला सुभडवृन्दमजुल्लाम्।
प्रजायिनी प्रजावति नमामि मातरं सतीम्॥
स्वकर्मकारिणी गति हरिप्रयाच पार्वतीम्।
अनन्तशक्ति कान्तिदां यशोअर्थभुक्तिमुक्तिदाम्॥
पुनःपुनर्जगद्वितां नमाम्यहं सुरार्चिताम्।
जयेश्वरि त्रिलोचने प्रसीद देवीपाहिमाम्॥


स्कंदमाता की कवच ( Mata Skandmata Kavach)

ऐं बीजालिंका देवी पदयुग्मघरापरा।
हृदयं पातु सा देवी कार्तिकेययुता॥
श्री हीं हुं देवी पर्वस्या पातु सर्वदा।
सर्वांग में सदा पातु स्कन्धमाता पुत्रप्रदा॥
वाणंवपणमृते हुं फ्ट बीज समन्विता।
उत्तरस्या तथाग्नेव वारुणे नैॠतेअवतु॥
इन्द्राणां भैरवी चैवासितांगी च संहारिणी।
सर्वदा पातु मां देवी चान्यान्यासु हि दिक्षु वै॥

माँ स्कंदमाता की आरती :

जय तेरी हो स्कन्द माता। पांचवां नाम तुम्हारा आता॥

सबके मन की जानन हारी। जग जननी सबकी महतारी॥

तेरी जोत जलाता रहूं मैं। हरदम तुझे ध्याता रहूं मै॥

कई नामों से तुझे पुकारा। मुझे एक है तेरा सहारा॥

कही पहाड़ों पर है डेरा। कई शहरों में तेरा बसेरा॥

हर मन्दिर में तेरे नजारे। गुण गाए तेरे भक्त प्यारे॥

भक्ति अपनी मुझे दिला दो। शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो॥

इन्द्र आदि देवता मिल सारे। करे पुकार तुम्हारे द्वारे॥

दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए। तू ही खण्ड हाथ उठाए॥

दासों को सदा बचाने आयी। भक्त की आस पुजाने आयी॥

ज्योतिषीय पहलू

ज्योतिष के अनुसार देवी स्कंदमाता बुध ग्रह को नियंत्रित करती , इसलिए उनकी विधिवत उपासना करने से बुध  के द्वारा पड़ने वाले बुरे प्रभाव भी निष्क्रिय हो जाते हैं।

 

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Mata kushmanda | माँ कुष्मांडा- जाने माता की कथा, मंत्र, पूजा विधि और आरती https://astrodeeva.com/mata-kushmanda-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4/ https://astrodeeva.com/mata-kushmanda-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4/#comments Thu, 08 Oct 2020 10:28:25 +0000 https://astrodeeva.com/?p=904 माँ आदिशक्ति सम्पूर्ण जगत का कल्याण करती है | माँ भवानी के रूप इतने कल्याणकारी है की इनके दर्शन एवं पूजन से भक्तों के संकट नष्ट हो जाते है और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है | माँ आदिशक्ति के नौ स्वरूप है और वो अपने चौथे स्वरूप मे कुष्मांडा के नाम से जानी जाती है […]

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माँ आदिशक्ति सम्पूर्ण जगत का कल्याण करती है | माँ भवानी के रूप इतने कल्याणकारी है की इनके दर्शन एवं पूजन से भक्तों के संकट नष्ट हो जाते है और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है | माँ आदिशक्ति के नौ स्वरूप है और वो अपने चौथे स्वरूप मे कुष्मांडा के नाम से जानी जाती है | कुष्मांडा एक संस्कृत शब्द है और इस का शाब्दिक अर्थ कुसुम का अर्थ है फूलों के समान हसीं और आँड का अर्थ है ब्रह्मांड वो देवी जिन्होंने अपनी मुस्कान से सम्पूर्ण ब्रह्मांड को अपने गर्भ से उत्पन्न किया है वही माँ कूष्माण्डा है | माँ कुष्मांडा की आठ भुजाये है | जिनमे कमुण्डल ,धनुष ,कमल का फूल ,अमृत से भरा कलश चक्र गदा वा कमल पुष्प की माल को अपने हाथों मे धारण किए हुए है | 

माँ कुष्मांडा की कथा 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब सृष्टि कि रचना नहि हुई थी और हर जग अंधकार का राज था तब देवी कूष्माण्डा ने अपनी मुस्कुराहट से इस सृष्टि की उत्पति की। तब से देवी कूष्माण्डा का निवास सूर्यमंडल के मध्य में है और यह सूर्य मंडल को अपने संकेत से नियंत्रित करती हैं।

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माँ कुष्मांडा की पूजा का विधान 

माँ कुष्मांडा को लाल रंग अति प्रिय है | माँ कुष्मांडा श्री दुर्गा का चौथा स्वरूप है | इनकी पूजा नवरात्र के चौथे दिन चतुर्थी को बड़े विधि विधान से करनी चाहिए | अतः नवरात्र के चौथे दिन ब्रह्म मुहुर्त मे उठ कर नियमित कार्यों से निर्वित होकर माँ की निमित विविध प्रकार की पूजन की सामग्री को संग्रहीत करके पूजन करना चाहिए और दुर्गसप्तशती का पाठ करें या ब्राह्मण से करवाएँ। माँ को लाल पुष्प रोली ,अक्षत और लाल महावर और लाल चूड़ी अवश्य चढ़ाये और मालपुए से माँ कुष्मांडा को भोग लगाना चाहिए |

माँ कुष्मांडा के मंत्र 

ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥

प्रार्थना मंत्र

सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

स्तुति

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

ध्यान मंत्र

वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्विनीम्॥
भास्वर भानु निभाम् अनाहत स्थिताम् चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्।
कमण्डलु, चाप, बाण, पद्म, सुधाकलश, चक्र, गदा, जपवटीधराम्॥
पटाम्बर परिधानां कमनीयां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल, मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वदनांचारू चिबुकां कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम्।
कोमलाङ्गी स्मेरमुखी श्रीकंटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

स्त्रोत

दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दरिद्रादि विनाशनीम्।
जयंदा धनदा कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
जगतमाता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्।
चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
त्रैलोक्यसुन्दरी त्वंहि दुःख शोक निवारिणीम्।
परमानन्दमयी, कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥

कवच मंत्र

हंसरै में शिर पातु कूष्माण्डे भवनाशिनीम्।
हसलकरीं नेत्रेच, हसरौश्च ललाटकम्॥
कौमारी पातु सर्वगात्रे, वाराही उत्तरे तथा,
पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम।
दिग्विदिक्षु सर्वत्रेव कूं बीजम् सर्वदावतु॥

माँ कुष्मांडा की आरती 

चौथा जब नवरात्र हो, कुष्मांडा को ध्याते।
जिसने रचा ब्रह्माण्ड यह, पूजन है
आध्शक्ति कहते जिन्हें, अष्टभुजी है रूप।
इस शक्ति के तेज से कहीं छाव कही धुप॥
कुम्हड़े की बलि करती है तांत्रिक से स्वीकार।
पेठे से भी रीज्ती सात्विक करे विचार॥
क्रोधित जब हो जाए यह उल्टा करे व्यवहार।
उसको रखती दूर माँ, पीड़ा देती अपार॥
सूर्य चन्द्र की रौशनी यह जग में फैलाए।
शरणागत की मैं आया तू ही राह दिखाए॥
नवरात्रों की माँ कृपा करदो माँ।
नवरात्रों की माँ कृपा करदो माँ॥
जय माँ कुष्मांडा मैया।

ज्योतिषीय  पहलू 

ज्योतिष के अनुसार माँ कुष्मांडा सूर्य मंडल में विराजित है और सूर्य का मार्गदर्शन करती है अतः इनकी उपासना करने से सूर्य के कुप्रभावों से बचा जा सकता है। माँ कभी अपने भक्तों को निराश नहीं करती।

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