if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) { /** * Gets views count. * * @param int $id The Post ID. * @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7]) * @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999) * @return string */ function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) { $attr = array( 'id' => $id, 'range' => $range, 'number_format' => $number_format, ); $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) ); $views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $views ) { $views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format ); wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' ); } return $views; } } if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) { /** * Do Query * * @param $instance * @return array */ function jnews_view_counter_query( $instance ) { $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) ); $query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $query ) { $query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance ); wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' ); } return $query; } } ek shloki mahabharat Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/ek-shloki-mahabharat/ Daily Dose of Astrology Tue, 24 Nov 2020 03:18:38 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://astrodeeva.com/wp-content/uploads/2022/03/cropped-Logo-32x32.png ek shloki mahabharat Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/ek-shloki-mahabharat/ 32 32 Gita Jayanti : गीता जयंती 2020, महत्व और पूजा दिनांक https://astrodeeva.com/gita-jayanti-%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%80-2020-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c/ https://astrodeeva.com/gita-jayanti-%e0%a4%97%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%80-2020-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c/#respond Tue, 24 Nov 2020 03:18:38 +0000 https://astrodeeva.com/?p=1433 गीता सनातन धर्म का पौराणिक और सभी ग्रंथो में सबसे सम्मानित ग्रंथ है। यह सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति की आधारशिला है। गीता में सम्पूर्ण वेदों का सार है । लोकप्रियता में गीता से बढ़कर कोई और ग्रंथ नहीं है। गीता वैसे तो हिन्दू धर्म का ग्रंथ है अपितु इसमें बतायी गयी सीख जाति व […]

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गीता सनातन धर्म का पौराणिक और सभी ग्रंथो में सबसे सम्मानित ग्रंथ है। यह सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति की आधारशिला है। गीता में सम्पूर्ण वेदों का सार है । लोकप्रियता में गीता से बढ़कर कोई और ग्रंथ नहीं है। गीता वैसे तो हिन्दू धर्म का ग्रंथ है अपितु इसमें बतायी गयी सीख जाति व प्रांत से परे सम्पूर्ण मानव जाति का मार्गदर्शन करती है।

गीता जयंती कब मनायी जाती है?

सनातन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ के जन्म दिवस को गीता जयंती कहा जाता हैं। ब्रह्मपुराण के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत के युद्ध के दौरान अपने सखा अर्जुन को मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन गीता का उपदेश दिया था। इसीलिए प्रतिवर्ष इस दिन को गीता जयंती के रूप में मनाया जाता है।

श्रीमद्भागवत गीता

गीता का दूसरा नाम गीतोपनिषद है। श्रीमद्भागवत गीता में 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं, इन श्लोकों में कर्म, धर्म, कर्मफल, जन्म, मृत्यु, सत्य, असत्य आदि जीवन से जुड़े मूलभूत प्रश्नों के उत्तर मौजूद हैं।

भगवत गीता के सभी 18 अध्याय के नाम इस प्रकार है:

अध्याय 1: अर्जुनविषादयोगः – कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्यनिरीक्षण

अध्याय 2: साङ्ख्ययोगः – गीता का सार

अध्याय 3: कर्मयोगः – कर्मयोग

अध्याय 4: ज्ञानकर्मसंन्यासयोगः – दिव्य ज्ञान

अध्याय 5: कर्मसंन्यासयोगः – कर्मयोग-कृष्णभावनाभावित कर्म

अध्याय 6: आत्मसंयमयोगः – ध्यानयोग

अध्याय 7: ज्ञानविज्ञानयोगः – भगवद्ज्ञान

अध्याय 8: अक्षरब्रह्मयोगः – भगवत्प्राप्ति

अध्याय 9: राजविद्याराजगुह्ययोगः – परम गुह्य ज्ञान

अध्याय 10: विभूतियोगः – श्री भगवान् का ऐश्वर्य

अध्याय 11: विश्वरूपदर्शनयोगः – विराट रूप

अध्याय 12: भक्तियोगः – भक्तियोग

अध्याय 13: क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोगः – प्रकृति, पुरुष तथा चेतना

अध्याय 14: गुणत्रयविभागयोगः – प्रकृति के तीन गुण

अध्याय 15: पुरुषोत्तमयोगः – पुरुषोत्तम योग

अध्याय 16: दैवासुरसम्पद्विभागयोगः – दैवी तथा आसुरी स्वभाव

अध्याय 17: श्रद्धात्रयविभागयोगः – श्रद्धा के विभाग

अध्याय 18: मोक्षसंन्यासयोगः – उपसंहार-संन्यास की सिद्धि

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गीता का महत्व

गीता के महत्व को शब्दों में वर्णन करना असम्भव है ।यह स्वय भगवान कृष्ण के मुखारविन्द से निकली है । स्वयं भगवान कृष्ण इसका महत्व बताते हुए कहते हैं- कि जो पुरुष प्रेमपूर्वक निष्काम भाव से भक्तों को पढ़ाएगा अर्थात् उनमें इसका प्रचार करेगा वह निश्चय ही मुझको (परमात्मा) प्राप्त होगा।

विश्व में ऐसा कोई धर्म नहीं है जिसमें किसी धर्म ग्रंथ की जयंती मनायी जाती है। हिन्दू धर्म ही एक ऐसा धर्म हैं जिसमे किसी ग्रन्थ की जयंती मनाई जाती हैं, इसका उद्देश्य मनुष्य में गीता के महत्व को जगाये रखना हैं। कलयुग में गीता ही एक ऐसा ग्रन्थ हैं जो मनुष्य को सही गलत का बोध करा सकता हैं।

गीता जयंती 2020

दिनांक : 25 दिसम्बर 2020

वार: शुक्रवार

वर्षगाँठ : 5157वी

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गीता में दिया गया कुछ परम ज्ञान

  • परिवर्तन ही संसार का नियम है।
  • जो हुआ अच्छे के लिए हुआ। जो हो रहा है वो अच्छे के लिए हो रहा है और जो होगा वो भी अच्छे के लिए होगा।
  • मनुष्य को कर्म कर्म करना चहिये, फल की चिंता नहीं।
  • आत्मा अमर है, वो न जन्म लेती है और ना ही मरती है।
  • मनुष्य खाली हाथ आया था और खाली हाथ ही जाएगा।

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एक मंत्र जो देता है सम्पूर्ण भागवत पाठ का फल ! Shrimad Bhagwat https://astrodeeva.com/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a5%8b-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0/ https://astrodeeva.com/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a5%8b-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0/#respond Tue, 22 Sep 2020 07:44:35 +0000 https://astrodeeva.com/?p=815 हिन्दू धर्म ग्रंथों का एक विशाल समुद्र है। जो जातक इस को जितना खोजता है उसे उतना ही ज़्यादा इन ग्रंथों के बारे में पता चलता है। शास्त्रों और बुधिजीवो के अनुसार भागवत में अपार ज्ञान भरा हुआ है। भागवत को धर्म-अध्यात्म से परिपूर्ण अनमोल ग्रंथ कहा जाता है। भागवत में सभी शास्त्रों का सार […]

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हिन्दू धर्म ग्रंथों का एक विशाल समुद्र है। जो जातक इस को जितना खोजता है उसे उतना ही ज़्यादा इन ग्रंथों के बारे में पता चलता है।

शास्त्रों और बुधिजीवो के अनुसार भागवत में अपार ज्ञान भरा हुआ है। भागवत को धर्म-अध्यात्म से परिपूर्ण अनमोल ग्रंथ कहा जाता है। भागवत में सभी शास्त्रों का सार समाया हुआ है। भागवत का नियमित पाठ करने से मनुष्य को सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान करने का ज्ञान प्राप्त होता है और उसका आत्मविश्वास बढ़ने के साथ नकारात्मकता दूर होती है।

जैसा हम जानते है की भागवत का नियमित पाठ अतिफल दायी होता है परंतु वर्तमान में समय के अभाव के कारण सम्पूर्ण भागवत का नियमित पाठ सामान्य मनुष्य के लिए संभव नहीं हो पाता। ऐसे में विद्वानों के अनुसार इस का उपाय भी भागवत पुराण में उपलब्ध है। 

श्री कृष्ण की लीलाओं को समर्पित भागवत पुराण एक श्लोक ऐसा भी है जिस के नियमित विधि-विधान से पाठ करने से सम्पूर्ण भागवत पाठ का फल प्राप्त होता है। इस मंत्र को एक श्लोकी भागवत भी कहते हैं।

।।एक श्लोकी भागवत।।

आदौ देवकीदेवी गर्भजननं गोपीगृहे वर्द्धनम् ।

मायापूतन जीविताप हरणम् गोवर्धनोद्धरणम् ।।

कंसच्छेदन कौरवादि हननं कुंतीतनुजावनम् ।

एतद् भागवतम् पुराणकथनम् श्रीकृष्णलीलामृतम् ।।

भावार्थ: मथुरा में राजा कंस के बंदीगृह में भगवान विष्णु का श्री कृष्ण के रुप में माता देवकी के गर्भ से अवतार हुआ। देव लीला से पिता वासुदेव ने उन्हें गोकुल पहुंचाया। कंस ने मृत्यु भय से श्री कृष्ण को मारने के लिए पूतना राक्षसी को भेजा। भगवान श्री कृष्ण ने उसका अंत कर दिया। यहीं भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्रदेव के अहंकार को चूर कर गोवर्धन पर्वत को अपनी ऊंगली पर उठाकर गोकुल वासियों की रक्षा की। बाद में मथुरा आकर भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी कंस का वध कर दिया। कुरुक्षेत्र के युद्ध में कौरव वंश का नाश हुआ। पाण्डवों की रक्षा की। भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद्भागवत गीता के माध्यम से कर्म का संदेश जगत को दिया। अंत में प्रभास क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण का लीला संवरण हुआ। 

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मंत्र पाठ की विधि 

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें। ब्रह्म मुहूर्त : सफलता की कुंजी,जाने महत्व
  • सुबह जल्दी नहाकर, साफ वस्त्र पहने।
  • भगवान श्रीकृष्ण के चित्र का विधिवत पूजन करें।
  • भगवान श्रीकृष्ण के चित्र के सामने आसन लगाकर रुद्राक्ष की माला लेकर इस मंत्र का जप करें। (आसन कुश का हो तो अच्छा रहता है।)
  • प्रतिदिन पांच माला जप करने से उत्तम फल मिलता है। 
  • रोजना एक ही समय, एक ही आसन पर व एक ही माला हो तो यह मंत्र जल्दी ही सिद्ध हो जाता है।

निर्जला एकादशी के विशेष दिन एक श्लोकि भागवत मंत्र का विधि-विधान से पाठ करने से साधक को मनोवांछित फल के साथ ही धन – संपदा की प्राप्ति होती है।

अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्ण:दामोदरं वासुदेवं हरे।
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकी नायकं रामचन्द्रं भजे।।

।।ॐ नमों नारायण।।

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