if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) { /** * Gets views count. * * @param int $id The Post ID. * @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7]) * @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999) * @return string */ function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) { $attr = array( 'id' => $id, 'range' => $range, 'number_format' => $number_format, ); $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) ); $views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $views ) { $views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format ); wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' ); } return $views; } } if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) { /** * Do Query * * @param $instance * @return array */ function jnews_view_counter_query( $instance ) { $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) ); $query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $query ) { $query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance ); wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' ); } return $query; } } Ekadashi Vrat 2024 Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/ekadashi-vrat-2024/ Daily Dose of Astrology Mon, 15 Jan 2024 19:06:13 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://astrodeeva.com/wp-content/uploads/2022/03/cropped-Logo-32x32.png Ekadashi Vrat 2024 Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/ekadashi-vrat-2024/ 32 32 पौष पुत्रदा एकादशी 2024: जाने कब है एवं कथा, महत्व और सिद्ध मंत्र https://astrodeeva.com/know-when-is-pausha-putrada-ekadashi-2024-story/ https://astrodeeva.com/know-when-is-pausha-putrada-ekadashi-2024-story/#respond Mon, 15 Jan 2024 19:06:13 +0000 https://astrodeeva.com/?p=3797 पौष पुत्रदा एकादशी 2024-पुत्रदा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। पौष मास में शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को पौष पुत्रदा एकादशी कहते हैं।यह व्रत आमतौर पर विवाहित जोड़ों द्वारा संतान प्राप्ति के लिए किया जाता हैं। विवाहित जोड़े जो संतान की चाहत रखते हैं, पुत्रदा एकादशी व्रत का पालन करते […]

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पौष पुत्रदा एकादशी 2024-पुत्रदा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। पौष मास में शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को पौष पुत्रदा एकादशी कहते हैं।यह व्रत आमतौर पर विवाहित जोड़ों द्वारा संतान प्राप्ति के लिए किया जाता हैं। विवाहित जोड़े जो संतान की चाहत रखते हैं, पुत्रदा एकादशी व्रत का पालन करते हैं और भगवान विष्णु का दिव्य आशीर्वाद पाने के लिए इस त्योहार से जुड़े विभिन्न अनुष्ठान भी करते हैं।

पुत्रदा एकादशी साल में दो बार मनाई जाती है। हिन्दू पंचांग के अनुसार पहली पुत्रदा एकादशी पौष माह के शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को मनायी जाती है इसे पौष पुत्रदा एकादशी या पौष शुक्ल पुत्रदा एकादशी कहा जाता है, जिसे अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार जनवरी या दिसंबर महीने में मनाया जाता है। और दूसरी पुत्रदा एकादशी श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को मनायी जाती है और इसे श्रावण पुत्रदा एकादशी कहा जाता है जो इंग्लिश कैलेंडर वर्ष के अनुसार जुलाई या अगस्त के महीने में आती है।

पौष पुत्रदा एकादशी का महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार महाभारत काल के समय श्री कृष्ण ने अर्जुन के पूछने पर पुत्रदा एकादशी का महत्व बताते हुए कहा था। “हे अर्जुन! संसार में पुत्रदा एकादशी उपवास के समान अन्य दूसरा व्रत नहीं है। इसके पुण्य से प्राणी तपस्वी, विद्वान और धनवान बनता है। पुत्र की प्राप्ति के लिए पुत्रदा एकादशी का उपवास करना चाहिए पुत्र प्राप्ति के लिए इससे बढ़कर दूसरा कोई व्रत नहीं है। जो कोई व्यक्ति पुत्रदा एकादशी के माहात्म्य को पढ़ता व श्रवण करता है तथा विधानानुसार इसका उपवास करता है, उसे सर्वगुण सम्पन्न पुत्ररत्न की प्राप्ति होती है। श्रीहरि की अनुकम्पा से वह मनुष्य मोक्ष को प्राप्त करता है।”

पौष पुत्रदा एकादशी 2024

दिनांक – 21 जनवरी 2024
वार – रविवार 
एकादशी तिथि प्रारम्भ – 20 जनवरी 2024 को 07:26 पी एम बजे से
एकादशी तिथि समाप्त – 
जनवरी 21, 2024 को 07:26 पी एम बजे तक 
पारण (व्रत तोड़ने का) समय – 22 जनवरी 2024 को 07:14 ए एम से 09:21 ए एम तक 
पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्ति समय – 07:51 पी एम

पुत्रदा एकादशी की कथा

पुत्रदा एकादशी की महत्ता सुन अर्जुन के मन में और जिज्ञासा जाग उठी और उस ने भगवान श्री कृष्ण से कहा – हे कमलनयन! आप कृप्या कर इस व्रत की कथा भी मुझे विस्तारपूर्वक बताएं।

श्रीकृष्ण ने कहा– “हे पाण्डुनंदन! इस एकादशी से सम्बंधित जो कथा प्रचलित है, उसे मैं तुम्हें सुनाता हूँ, श्रद्धापूर्वक श्रवण करो-

प्राचीन समय में भद्रावती नगरी में सुकेतुमान नाम का एक राजा राज्य करता था। उसके कोई संतान नहीं थी। उसकी पत्नी का नाम शैव्या था। पुत्र ना होने के कारण राजा के मन में इस बात की बड़ी चिंता थी कि उसके बाद उसे और उसके पूर्वजों को कौन पिंडदान देगा। राजा रात-दिन इसी चिंता में घुला करता था। इस चिंता के कारण एक दिन वह इतना दुखी हो गया कि उसके मन में अपने शरीर को त्याग देने की इच्छा उत्पन्न हुई , किंतु वह सोचने लगा कि आत्महत्या करना तो महापाप है, अतः उसने इस विचार को मन से निकाल दिया। एक दिन इन्हीं विचारों में डूबा हुआ वह घोड़े पर सवार होकर वन को चल दिया।

घोड़े पर सवार राजा वन, पक्षियों और वृक्षों को देखने लगा। उसने वन में देखा कि मृग, बाघ, सिंह, बंदर आदि विचरण कर रहे हैं। हाथी शिशुओं और हथिनियों के बीच में विचर रहा है। उस वन में राजा ने देखा कि कहीं तो सियार कर्कश शब्द निकाल रहे हैं और कहीं मोर अपने परिवार के साथ नाच रहे हैं। वन के दृश्यों को देखकर राजा और ज्यादा दुखी हो गया कि उसके पुत्र क्यों नहीं हैं? इसी सोच-विचार में दोपहर हो गई। वह सोचने लगा कि मैंने अनेक यज्ञ किए हैं और ब्राह्मणों को स्वादिष्ट भोजन करा सामर्थ्य के अनुसार दान दक्षिण दी है, किंतु फिर भी मुझे यह दुख क्यों मिल रहा है? आखिर इसका कारण क्या है? मैं अपनी व्यथा किससे कहूं? और कौन मेरी व्यथा का समाधान कर सकता है?

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अपने विचारों में खोए राजा को प्यास लगी। वह पानी की तलाश में आगे बढ़ा। कुछ दूर जाने पर उसे एक सरोवर मिला। उस सरोवर में कमल पुष्प खिले हुए थे। सारस, हंस, घड़ियाल आदि जल-क्रीड़ा में मग्न थे। सरोवर के चारों तरफ ऋषियों के आश्रम बने हुए थे। अचानक राजा के दाहिने अंग फड़कने लगे। इसे शुभ शगुन समझकर राजा मन में प्रसन्न होता हुआ घोड़े से नीचे उतरा और सरोवर के किनारे बैठे हुए ऋषियों को प्रणाम करके उनके पूछा ‘हे विप्रो! आप कौन हैं? और किसलिए यहां रह रहे हैं?’

ऋषि बोले – ‘राजन! आज पुत्र की इच्छा करने वालो को श्रेष्ठ पुत्र प्रदान करने वाली पुत्रदा एकादशी है। आज से पांच दिन बाद माघ स्नान है और हम सब इस सरोवर में स्नान करने आए हैं।’

ऋषियों की बात सुन राजा ने कहा – ‘हे मुनियो! मेरा भी कोई पुत्र नहीं है, कृपा कर मुझे भी इस एकादशी व्रत के बारे में बताएं।

ऋषि बोले – ‘हे राजन! आज पुत्रदा एकादशी है। आप इसका उपवास करें। भगवान श्रीहरि की अनुकम्पा से आपके घर अवश्य ही पुत्र होगा।’

राजा ने मुनि के वचनों के अनुसार उस दिन उपवास किया और द्वादशी को व्रत का पारण किया और ऋषियों को प्रणाम कर उन का आशीर्वाद प्राप्त कर वापस अपनी नगरी आ गया। भगवान श्रीहरि की कृपा से कुछ दिनों बाद ही रानी ने गर्भ धारण किया और नौ माह के पश्चात उसने एक तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया। यह राजकुमार बड़ा होने पर अत्यंत वीर, धनवान, यशस्वी और प्रजापालक बना।

पौष पुत्रदा एकादशी 2024 के मंत्र

  • ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र
  • विष्णु सहस्रनाम स्तोत्रम
  • विष्णु अष्टोत्रम
  • संतान गोपाल मन्त्र
    देवकीसुतं गोविन्दम् वासुदेव जगत्पते
    देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:

डिसक्लेमर

इस लेख में प्रदान की गई जानकारी की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की कोई गारंटी नहीं है। यह सूचना विभिन्न स्रोतों, जैसे कि ज्योतिष, पंचांग, प्रवचन, धार्मिक मान्यताएं, और धर्मग्रंथों से संकलित कर यहाँ प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है, और पाठक या उपयोगकर्ता से अपील है कि वे इसे सिर्फ सूचना के रूप में ही समझें और उपयोग करें।

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Ekadashi Vrat 2024 – साल 2024 एकादशी व्रत कब और कौनसी, जाने पूरी लिस्ट https://astrodeeva.com/ekadashi-vrat-2024-year-2024-know-when-and-which-ekadashi-fast-complete-list/ https://astrodeeva.com/ekadashi-vrat-2024-year-2024-know-when-and-which-ekadashi-fast-complete-list/#respond Wed, 03 Jan 2024 09:38:04 +0000 https://astrodeeva.com/?p=3756 हिन्दू धर्म में हर तिथि किसी न किसी भगवान या देवता को समर्पित होती है। उसी तरह एकादशी(Ekadashi Vrat 2024) तिथि भगवान विष्णु को समर्पित तिथि है और इसका हिन्दू धर्म में बड़ा महत्व है। एकादशी के दिन भक्तजन संतान, धन-धान्य और घर की प्राप्ति के लिए उपवास करते है। कभी कभी एकादशी व्रत लगातार […]

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हिन्दू धर्म में हर तिथि किसी न किसी भगवान या देवता को समर्पित होती है। उसी तरह एकादशी(Ekadashi Vrat 2024) तिथि भगवान विष्णु को समर्पित तिथि है और इसका हिन्दू धर्म में बड़ा महत्व है। एकादशी के दिन भक्तजन संतान, धन-धान्य और घर की प्राप्ति के लिए उपवास करते है। कभी कभी एकादशी व्रत लगातार दो दिनों के लिए हो जाता है। जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब स्मार्थ-परिवारजनों को पहले दिन एकादशी व्रत करना चाहिए। दुसरे दिन वाली एकादशी को दूजी एकादशी कहते हैं। सन्यासियों, विधवाओं और मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक श्रद्धालुओं को दूजी एकादशी के दिन व्रत करना चाहिए। जब-जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब-तब दूजी एकादशी और वैष्णव एकादशी एक ही दिन होती हैं।

Ekadashi Vrat 2024 – एकादशी व्रत तिथि 2024

 

2024 एकादशी व्रत की तिथि

एकादशी

दिनांक, वार

हिंदी मास

पक्ष

 

एकादशी समय

सफला एकादशी

(Saphala
Ekadashi)

जनवरी 7, 2024
रविवार 
पौष कृष्ण पक्ष

 

प्रारम्भ – जनवरी 7, 12:41 ए एम से 
समाप्त – जनवरी 8, 12:46 ए एम तक 

पौष पुत्रदा एकादशी

(Pausha
Putrada Ekadashi)

जनवरी 21, 2024 रविवार  पौष शुक्ल पक्ष प्रारम्भ – जनवरी 20, 07:26 पी एम से 
समाप्त – जनवरी 21, 07:26 पी एम तक 
षटतिला एकादशी

(Shattila Ekadashi)

फरवरी 6, 2024, मंगलवार  माघ कृष्ण पक्ष प्रारम्भ – फरवरी 05, 05:24 पी एम से
समाप्त -फरवरी 06, 04:07 पी एम तक 

जया एकादशी

(Jaya Ekadashi)

फरवरी 20, 2024, मंगलवार 

माघ

शुक्ल पक्ष

प्रारम्भ – फरवरी 19, 08:49 ए एम से 
समाप्त – फरवरी 20, 09:55 ए एम तक 

विजया एकादशी

(Vijaya Ekadashi)

मार्च 6, 2024, बुधवार 

फाल्गुन

कृष्ण पक्ष

प्रारम्भ – मार्च 06, 06:30 ए एम से 
समाप्त – मार्च 07, 04:13 ए एम तक 

आमलकी एकादशी

(Amalaki Ekadashi)

मार्च 20, 2024, बुधवार  फाल्गुन शुक्ल पक्ष प्रारम्भ – मार्च 20, 12:21 ए एम से 
समाप्त – मार्च 21, 02:22 ए एम तक 

पापमोचिनी एकादशी

(Papmochani Ekadashi)

अप्रैल 5, 2024, शुक्रवार  चैत्र कृष्ण पक्ष प्रारम्भ – अप्रैल 04, 04:14 पी एम से 
समाप्त – अप्रैल 05, 01:28 पी एम तक 

कामदा एकादशी

(Kamada Ekadashi)

अप्रैल 19, 2024, शुक्रवार 

चैत्र

शुक्ल पक्ष

प्रारम्भ – अप्रैल 18, 05:31 पी एम से  
समाप्त – अप्रैल 19, 08:04 पी एम तक  

बरूथिनी एकादशी

(Varuthini Ekadashi)

मई 4, 2022, शनिवार 

वैशाख

कृष्ण पक्ष

प्रारम्भ – मई 03, 11:24 पी एम से 
समाप्त – मई 04, 08:38 पी एम तक  

मोहिनी एकादशी

(Mohini Ekadashi)

मई 19, 2024, रविवार 

वैशाख

शुक्ल पक्ष

प्रारम्भ – मई 18, 11:22 ए एम से 
समाप्त – मई 19, 01:50 पी एम तक 

अपरा एकादशी

(Apara Ekadashi)

जून 2, 2024,
रविवार

ज्येष्ठ

कृष्ण पक्ष

प्रारम्भ – जून 02, 05:04 ए एम से  
समाप्त – जून 03, 02:41 ए एम तक 

निर्जला एकादशी

(Nirjala Ekadashi)

जून 18, 2024, मंगलवार 

ज्येष्ठ

शुक्ल पक्ष

प्रारम्भ – जून 17, 04:43 ए एम पर  
समाप्त – जून 18, 06:24 ए एम पर 

योगिनी एकादशी

(Yogini Ekadashi)

जुलाई 02,
2024,
मंगलवार 

आषाढ़

कृष्ण पक्ष

प्रारम्भ – जुलाई 01, 10:26 ए एम से  
समाप्त – जुलाई 02, 08:42 ए एम तक  

देवशयनी एकादशी

(Devshayani Ekadashi)

जुलाई 17, 2024, बुधवार 

आषाढ़

शुक्ल पक्ष

प्रारम्भ – जुलाई 16, 08:33 पी एम से  
समाप्त – जुलाई 17, 09:02 पी एम तक  

कामिका एकादशी

(Kamika Ekadashi)

जुलाई 31, 2024,
बुधवार 

श्रावण

कृष्ण पक्ष

प्रारम्भ –  जुलाई 30, 04:44 पी एम से 
समाप्त – जुलाई 31, 03:55 पी एम तक 

श्रावण पुत्रदा एकादशी

(Shravana Putrada Ekadashi)

अगस्त 16, 2024, शुक्रवार 

श्रावण

शुक्ल पक्ष

प्रारम्भ –  अगस्त 15, 10:26 ए एम से 
समाप्त – अगस्त 16, 09:39 ए एम तक 

अजा एकादशी

(Aja Ekadashi)

अगस्त 29, 2024, गुरुवार 

भाद्रपद

कृष्ण पक्ष

प्रारम्भ – अगस्त 29, 01:19 ए एम से  
समाप्त – अगस्त 30, 01:37 ए एम तक 

परिवर्तिनी एकादशी

(Parivartini Ekadashi)

सितम्बर 14, 2024, शनिवार 

भाद्रपद

शुक्ल पक्ष

प्रारम्भ – सितम्बर 13, 10:30 पी एम से  
समाप्त – सितम्बर 14, 08:41 पी एम तक 

इन्दिरा एकादशी

(Indira Ekadashi)

सितम्बर 28
,2024, शनिवार 

आश्विन

कृष्ण पक्ष

प्रारम्भ –  सितम्बर 27, 01:20 पी एम से 
समाप्त – सितम्बर 28, 02:49 पी एम तक  

पापांकुशा एकादशी

(Papankusha Ekadashi)

 अक्टूबर 13, 2024, रविवार 

आश्विन

शुक्ल पक्ष

प्रारम्भ –  अक्टूबर 13, 09:08 ए एम से 
समाप्त – अक्टूबर 14, 06:41 ए एम तक 

रमा एकादशी

(Rama Ekadashi)

अक्टूबर 28, 2024, सोमवार 

कार्तिक

कृष्ण पक्ष

प्रारम्भ – अक्टूबर 27, 05:23 ए एम से 
समाप्त – अक्टूबर 28, 07:50 ए एम तक 

देवुत्थान एकादशी

(Devutthana Ekadashi)

नवम्बर 12, 2024, मंगलवार 

कार्तिक

शुक्ल पक्ष

प्रारम्भ – नवम्बर 11, 06:46 पी एम से  
समाप्त – नवम्बर 12, 04:04 पी एम तक 

उत्पन्ना एकादशी

(Utpanna Ekadashi)

 नवम्बर 26, 2024, मंगलवार 

मार्गशीर्ष

कृष्ण पक्ष

प्रारम्भ –  नवम्बर 26, 01:01 ए एम से 
समाप्त – नवम्बर 27, 03:47 ए एम तक  

मोक्षदा एकादशी

(Mokshada Ekadashi)

दिसम्बर 11, 2024, बुधवार 

मार्गशीर्ष

शुक्ल पक्ष

प्रारम्भ – दिसम्बर 11, 03:42 ए एम से  
समाप्त – दिसम्बर 12, 01:09 ए एम तक 

सफला एकादशी

(Saphala Ekadashi)

दिसम्बर 26, 2024, गुरुवार 

 

पौष कृष्ण पक्ष
प्रारम्भ – दिसम्बर 25, 10:29 पी एम से  
समाप्त – दिसम्बर 27, 12:43 ए एम तक 

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