if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) { /** * Gets views count. * * @param int $id The Post ID. * @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7]) * @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999) * @return string */ function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) { $attr = array( 'id' => $id, 'range' => $range, 'number_format' => $number_format, ); $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) ); $views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $views ) { $views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format ); wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' ); } return $views; } } if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) { /** * Do Query * * @param $instance * @return array */ function jnews_view_counter_query( $instance ) { $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) ); $query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $query ) { $query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance ); wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' ); } return $query; } } Ganesh Chaturthi 2021 Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/ganesh-chaturthi-2021/ Daily Dose of Astrology Fri, 10 Sep 2021 03:37:56 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://astrodeeva.com/wp-content/uploads/2022/03/cropped-Logo-32x32.png Ganesh Chaturthi 2021 Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/ganesh-chaturthi-2021/ 32 32 Ganesh Chaturthi 2021: घर में गणेश स्थापना, जानें शुभ मुहूर्त एवं पूजन विधि https://astrodeeva.com/ganesh-chaturthi-2021-%e0%a4%98%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8/ https://astrodeeva.com/ganesh-chaturthi-2021-%e0%a4%98%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8/#respond Fri, 10 Sep 2021 03:37:56 +0000 https://astrodeeva.com/?p=2403 श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा | निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा || अर्थ – घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर काय, करोड़ सूर्य के समान महान प्रतिभाशाली। मेरे प्रभु, हमेशा मेरे सारे कार्य बिना विघ्न के पूरे करने की कृपा करें॥ हिन्दू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को पूरे देश में […]

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श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा |
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा ||

अर्थ – घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर काय, करोड़ सूर्य के समान महान प्रतिभाशाली। मेरे प्रभु, हमेशा मेरे सारे कार्य बिना विघ्न के पूरे करने की कृपा करें॥

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को पूरे देश में गणेश चतुर्थी पर्व मनाया जाता हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र गणेश जी का जन्म भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन ही हुआ था , इसलिए इस दिन गणेश चतुर्थी या विनायक चतुर्थी का पर्व मनाया जाता हैं। इस वर्ष गणेश चतुर्थी 10 सितंबर 2021 , शुक्रवार को है। इस दिन लोग बप्पा का घर में स्वागत करते हैं और गणेश प्रतिमा की स्थापना कर के अगले 10 दिनों तक अपने सामर्थ के अनुसार विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं।

आम तौर पर 7 से 10 दिन के लिए भगवान गणेश जी की स्थापना करने की मान्यता है परंतु आज कल की अति व्यस्त दिनचर्या में यह बहुत मुश्किल है क्यूँकि गणपति जी की विधि-विधान से स्थापना नहीं करने पर विराजमान नहीं होते हैं और न ही उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है, इसलिए लोंग अपने सामर्थ के अनुसार 1.5 , 3, 5, 7, 10 दिन के लिए गणपति जी को अपने घर और दुकान में विराजमान करते हैं और विधि-विधान से पूजा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

आइये अब हम आप को बताते हैं की कैसे आप भी अपने घर में पूरे विधि-विधान से गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर सकते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

गणेश स्थापना 2021 पूजा मुहूर्त 

ऐसा माना जाता है की भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल के दौरान हुआ था इसीलिए मध्याह्न के समय को गणेश पूजा के लिए उपयुक्त माना जाता है।

मध्याहन गणेश पूजा मुहूर्त – सुबह 11 बजकर 03 मिनट से 01 बजकर 33 मिनट दोपहर तक (अभिजित मुहूर्त : 11:53 AM से  12:43 PM )

वर्जित चन्द्रदर्शन का समय – सुबह 9 बजकर 12 मिनट से रात 08 बजकर 53 मिनट तक

चतुर्थी तिथि आरम्भ – 10 सितंबर शुक्रवार को 12:18 ए एम बजे

चतुर्थी तिथि समाप्त – 10 सितंबर शुक्रवार को 09:57 पी एम बजे

ये भी पढ़ें : संकट हरण गणेश चतुर्थी व्रत की विधी एवं लाभ 

 गणेश पूजन / गणपति पूजन सामग्री

आवश्यक सामग्री : शुद्ध जल, गंगाजल, सिन्दूर, रोली, मौली , कपूर, घी, दही, शहद, दूर्वा , चीनी, पुष्प, पान, सुपारी, रूई, प्रसाद (मोदक / लड्डू गणेश जी को बहुत प्रिय है), पंचामृत, वस्त्र, जनेऊ, सुगंध( इत्र ), लाल चन्दन, अक्षत(चावल), पुष्प माला, सुगन्धित तेल, धूपबत्ती, दीपक इत्यादि|

 गणेश / गणपति पूजन विधि

गणेश चतुर्थी के दिन प्रात:काल स्नानादि से निवृत होकर गणेश पूजन की तैयारी करनी चाहिए | गणेश पूजन से पहले ध्यान रहे की गणेश जी की मूर्ति विराजमान या स्थापित करे | मूर्ति सोने, तांबे, चाँदी, मिट्टी या गाय के गोबर (अपने सामर्थ्य अनुसार) से बनाई जाती है | गणेश मूर्ति व गणपति पूजन सामग्री पूजा की थाली में रख कर पूजा विधि शुरू करे |

  • गणेश जी की मूर्ती सामने रखकर और श्रद्धा पूर्वक उस पर पुष्प छोड़े यदि मूर्ती न हो तो सुपारी पर मौली लपेटकर चावल पर स्थापित करें |
  • गणपति मूर्ति स्थापित करने के बाद गणेश जी को दूध, दही, घी,शहद, चीनी, पंचामृत, शुद्ध जल व गंगा जल से स्नान करवाए व वस्त्र अर्पित करे |
  • गणेश मूर्ति पर सुंगंधित तेल या इत्र छिड़क कर लाल चन्दन, रोली व सिंदूर से तिलक करे |
  • गणेश जी को आभूषण व पुष्प माला पहनाकर फूल व दूर्वा उनकी प्रतिमा पर अप्रीत करे |
  • घी का दीपक व धुप – अगरबत्ती करे |
  • और अब गणेश जी को मोदक / लड्डू का भोग लगाकर आरती करे |

क्षमा-प्रार्थना मन्त्र

पूजा एवं आरती के बाद परिक्रमा करें और क्षमा मांगें कि पूजा में कोई भी कमी या भूल हुई तो उसके लिए माफ करें।

गणेशपूजने कर्म यत् न्यूनमधिकम कृतम।
तेन सर्वेण सर्वात्मा प्रसन्न अस्तु गणपति सदा मम।।

इस प्रकार आप अपने घर पर गणपति जी की विधि विधान से स्थापना करें ।

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गणेश गायत्री मंत्र

ॐ एकदन्ताय विद्धमहे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात ||

 यह भगवान श्री गणेश का गायत्री मंत्र है इसमें कहा गया है कि हम उस परमात्मा स्वरुप एकदंत यानि एक दांत वाले भगवान श्री गणेश, जो कि सर्वव्यापी हैं, जिनकी सूंड हाथी के सूंड की तरह मुड़ी हुई है उनसे प्रार्थना करते हैं एवं सद्बुद्धि की कामना करते हैं। हम भगवान श्री गणेश को नमन करते हैं एवं प्रार्थना करते हैं कि वे अपने आशीर्वाद से हमारे मन-मस्तिष्क से अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान से प्रकाशित करें।

जरूरी बात:

  1. गणेश जी की पूजा में तुलसी के पत्तों का कतई प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  2. गणेश चतुर्थी को चंद्र दर्शन नहीं किये जाते क्योंकि पौराणिक कथा के अनुसार भगवान गणेश ने चंद्रमा को श्राप दिया था। श्राप के मुताबिक गणेश जी ने कहा था कि आज के दिन जो भी चंद्रमा देखेगा उस पर कलंक लगेगा। इतना ही नहीं, कृष्ण जी पर भी शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन चांद देखने के कारण मणि चोरी करने का कलंक लगा था। तो अगर आप भी गणपति जी की स्थापना करने वाले हैं तो इस दिन बिल्कुल भी चंद्रमा ना देखें।
  3. घर में गणेश जी की स्थापना कर रहे हैं तो सुबह-शाम भगवान गणेश जी की पूजा-अर्चना  करें, भोग लगाएं और आरती करें। भगवान गणेश आपके घर में मेहमान बनकर आए हैं तो उनकी आवभगत में कोई कमी न होने दें।

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