if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) {
/**
* Gets views count.
*
* @param int $id The Post ID.
* @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7])
* @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999)
* @return string
*/
function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) {
$attr = array(
'id' => $id,
'range' => $range,
'number_format' => $number_format,
);
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) );
$views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $views ) {
$views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format );
wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' );
}
return $views;
}
}
if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) {
/**
* Do Query
*
* @param $instance
* @return array
*/
function jnews_view_counter_query( $instance ) {
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) );
$query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $query ) {
$query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance );
wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' );
}
return $query;
}
}
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]]>अर्थ – घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर काय, करोड़ सूर्य के समान महान प्रतिभाशाली। मेरे प्रभु, हमेशा मेरे सारे कार्य बिना विघ्न के पूरे करने की कृपा करें॥
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को पूरे देश में गणेश चतुर्थी पर्व मनाया जाता हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र गणेश जी का जन्म भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन ही हुआ था , इसलिए इस दिन गणेश चतुर्थी या विनायक चतुर्थी का पर्व मनाया जाता हैं। इस वर्ष गणेश चतुर्थी 10 सितंबर 2021 , शुक्रवार को है। इस दिन लोग बप्पा का घर में स्वागत करते हैं और गणेश प्रतिमा की स्थापना कर के अगले 10 दिनों तक अपने सामर्थ के अनुसार विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं।
आम तौर पर 7 से 10 दिन के लिए भगवान गणेश जी की स्थापना करने की मान्यता है परंतु आज कल की अति व्यस्त दिनचर्या में यह बहुत मुश्किल है क्यूँकि गणपति जी की विधि-विधान से स्थापना नहीं करने पर विराजमान नहीं होते हैं और न ही उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है, इसलिए लोंग अपने सामर्थ के अनुसार 1.5 , 3, 5, 7, 10 दिन के लिए गणपति जी को अपने घर और दुकान में विराजमान करते हैं और विधि-विधान से पूजा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
आइये अब हम आप को बताते हैं की कैसे आप भी अपने घर में पूरे विधि-विधान से गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर सकते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
ऐसा माना जाता है की भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल के दौरान हुआ था इसीलिए मध्याह्न के समय को गणेश पूजा के लिए उपयुक्त माना जाता है।
मध्याहन गणेश पूजा मुहूर्त – सुबह 11 बजकर 03 मिनट से 01 बजकर 33 मिनट दोपहर तक (अभिजित मुहूर्त : 11:53 AM से 12:43 PM )
वर्जित चन्द्रदर्शन का समय – सुबह 9 बजकर 12 मिनट से रात 08 बजकर 53 मिनट तक
चतुर्थी तिथि आरम्भ – 10 सितंबर शुक्रवार को 12:18 ए एम बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त – 10 सितंबर शुक्रवार को 09:57 पी एम बजे
आवश्यक सामग्री : शुद्ध जल, गंगाजल, सिन्दूर, रोली, मौली , कपूर, घी, दही, शहद, दूर्वा , चीनी, पुष्प, पान, सुपारी, रूई, प्रसाद (मोदक / लड्डू गणेश जी को बहुत प्रिय है), पंचामृत, वस्त्र, जनेऊ, सुगंध( इत्र ), लाल चन्दन, अक्षत(चावल), पुष्प माला, सुगन्धित तेल, धूपबत्ती, दीपक इत्यादि|
गणेश चतुर्थी के दिन प्रात:काल स्नानादि से निवृत होकर गणेश पूजन की तैयारी करनी चाहिए | गणेश पूजन से पहले ध्यान रहे की गणेश जी की मूर्ति विराजमान या स्थापित करे | मूर्ति सोने, तांबे, चाँदी, मिट्टी या गाय के गोबर (अपने सामर्थ्य अनुसार) से बनाई जाती है | गणेश मूर्ति व गणपति पूजन सामग्री पूजा की थाली में रख कर पूजा विधि शुरू करे |
क्षमा-प्रार्थना मन्त्र
पूजा एवं आरती के बाद परिक्रमा करें और क्षमा मांगें कि पूजा में कोई भी कमी या भूल हुई तो उसके लिए माफ करें।
इस प्रकार आप अपने घर पर गणपति जी की विधि विधान से स्थापना करें ।
ॐ एकदन्ताय विद्धमहे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात ||
यह भगवान श्री गणेश का गायत्री मंत्र है इसमें कहा गया है कि हम उस परमात्मा स्वरुप एकदंत यानि एक दांत वाले भगवान श्री गणेश, जो कि सर्वव्यापी हैं, जिनकी सूंड हाथी के सूंड की तरह मुड़ी हुई है उनसे प्रार्थना करते हैं एवं सद्बुद्धि की कामना करते हैं। हम भगवान श्री गणेश को नमन करते हैं एवं प्रार्थना करते हैं कि वे अपने आशीर्वाद से हमारे मन-मस्तिष्क से अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान से प्रकाशित करें।
जरूरी बात:
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]]>मेष राशि – मेष राशि वाले लोग चतुर्थी के दिन सिंदूरी रंग के गणेशजी की आराधना करें। 11 दूर्वा हल्दी के जल में डालकर चढ़ाएं ऊं गं गणपतये नम: को दूर्वा से 108 बार भोजपत्र पर लिखे। ऐसी गणेश उपासना से समस्त विघ्न संकट का निवारण होता है और धन-धान्य की प्राप्ति होती है।
वृषभ राशि – वृषभ राशि वाले लोग चतुर्थी तिथि को दूधिया रंग के श्रीगणेशजी की आराधना करें। श्रीगणेश को सफेद फूल पर इत्र लगाकर नौ दूर्वा के साथ सफेद लड्डू का भोग लगाएं। पूजा करते समय ऊँ गं ऊँ गं मंत्र का जप करें। इस प्रकार श्रीगणेश का पूजन करने पर वृषभ राशि वाले लोगों को सभी कार्य में सफलता व सिद्धि प्राप्त हो सकती है।
मिथुन राशि – मिथुन राशि वाले लोगों के लिए हरी गणेश प्रतिमा की पूजा करना शुभ होता है। श्रीगणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए दूर्वा की माला बनाकर ऊं श्री गं गणाधिपतये नम: 108 बार उच्चारण करके चढ़ाना चाहिए श्रीगणेश को गुड़ का विशेष नैवैद्य अर्पण करना चाहिए।
कर्क राशि – कर्क राशि वाले लोगों के लिए सफेद रंग के गणेशजी की आराधना करना श्रेष्ठ रहता है। श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए सफेद आंकड़े के पुष्प की माला बनाकर साथ में दूर्वा की जड़ बांधकर अर्पित करें। ऊं श्री श्वेतार्क देवाय नम: का जाप कम से कम 108 बार करें। मोदक के नैवेद्य पर थोड़ा सा मक्खन चढ़ाएं। इस प्रकार भगवान गणेश की पूजा करने से समस्त मनोकामना पूर्ण होती है।
सिंह राशि – सिंह राशि वाले लोगों को मेहरून रंग की श्रीगणेश प्रतिमा की आराधना करना ज्यादा सफलता कारक माना गया है। सिंह राशि के लोग श्रीगणेश की विधि-विधान से पूजन करें। श्रीगणेश पर 108 दूर्वा कुंकुम में कर के चढ़ाएं। गुड़ की 11 गोली बनाकर श्री गणेशजी को नित्य अर्पण करें जिससे चहुंमुखी विकास होगा।
कन्या राशि – कन्या राशि वाले लोगों को इस दिन गहरे हरे रंग के श्री गणेशजी की आराधना करना श्रेष्ठ रहता है। हरे मूंग 108 संख्या में श्री गणेशजी की प्रतिमा पर चढ़ाएं। भगवान गणेश के मंदिर में हरे मूंग व गुड़ का दान करें। श्री वक्रतुंडाय नम: मंत्र का 108 बार जाप करें। इस तरह श्रीगणेश का पूजन करने से आपको सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होगी।
तुला राशि – तुला राशि वाले लोगों को इस दिन सफेद मिश्रित रंग के श्री गणेशजी की आराधना करना सर्वोत्तम होता है। सवाया लड्डू का भोग श्रीगणेश को लगाएं। दूर्वा व पुष्प भी सवा सौ ग्राम या सवा किलो चढाएं जिससे समस्त संकट का निवारण होकर इच्छित मनोकामना परिपूर्ण होती है। श्रीगणेश स्त्रोत का पाठ करना भी श्रेष्ठ होता है।
वृश्चिक राशि – चौथ के दिन वृश्चिक राशि वाले जातकों को लाल मिश्रित श्रीगणेशजी की आराधना करना सबसे अच्छा होता है। श्रीगणेशजी पर लाल रंग से रंगे चावल अर्पण करें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि चावलों की संख्या 108 से कम अथवा ज्यादा न हो। श्री विघ्नहरण संकट हरणायनम: मंत्र का जाप करें, जिससे समस्त मनोकामना परिपूर्ण हो सके।
धनु राशि – धनु राशि वाले लोगों को इस दिन पीले रंग की गणेशजी की आराधना करना चाहिए। हल्दी की पांच गठान श्री गणाधिपतये नम: मंत्र का उच्चारण कर चढ़ाएं। 108 दूर्वा पर गीली हल्दी लगाकर श्री गजवकत्रम नमो नम: का जाप करके चढ़ाएं। इस प्रकार पूजन करने पर भगवान श्रीगणेश सभी कामनाएं पूरी करते हैं।
मकर राशि – मकर राशि वाले लोगों को नीले रंग के श्रीगणेशजी की आराधना करना सर्वोत्तम होता है। भगवान श्रीगणेश को काले तिल अर्पण करें। दूर्वा व लाल रंग के फूल पर इत्र लगाकर श्री गणेशाय नम: का जप करके श्री गणेशजी को अर्पण करें। जिससे समस्त विघ्न का निवारण हो सके। गणपति अर्थवशीर्ष का पाठ करें।
कुंभ राशि – कुंभ राशि वाले लोगों को इस दिन आसमानी रंग की गणेश प्रतिमा की आराधना करनी चाहिए। श्रीगणेश को सिंदूर का तिलक लगाएं व उनके मस्तक के मध्य में हल्दी का तिलक लगाएं। हाथी को मोदक या गुड़ रोटी खिलाएं व 108 दूर्वा चढ़ाएं व ऊँ गं गणपतयै नम: का जप करें।
मीन राशि – मीन राशि वाले लोगों को चतुर्थी तिथि को हल्दी रंग के श्री गणेशजी की आराधना करना चाहिए। हल्दी की जड़ पर आठ बार ऊं गं गं गं गं गं श्री गजाय नम: लिखकर भगवान श्री गणेशजी के मस्तक पर अर्पण करें। पीले रंग के धागे में पीले पुष्प व दूर्वा की माला बनाकर श्री गणेशजी को अर्पण करें।
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