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Trinetra Ganesh – त्रिनेत्र गणेश मंदिर भारत के राजस्थान प्रांत में सवाई माधोपुर जिले में स्थित है। यह मंदिर विश्व धरोहर में शामिल “रणथम्भौर दुर्ग” के भीतर बना हुआ है। अरावली और विन्ध्याचल पहाड़ियों के बीच स्थित रणथम्भौर दुर्ग में त्रिनेत्र गणेश मंदिर प्रकृति व आस्था का अनूठा संगम है। यहाँ गणेश जी अपने भक्तों की मनोकामना लड्डू, दुर्वा, फल, फूल या पूजा पाठ से नहीं, अपितु चिट्ठी लिखकर चढ़ाने से पूरी करते हैं और भक्तों की अर्जी स्वीकार करते हैं। यहां अर्जी लगाने वाला कभी निराश नहीं होता उसकी मनोकामना पूरी होकर ही रहती है।

देश भर से भक्‍त अपने घर में होने वाले हर मंगल कार्य का पहला निमंत्रण यहां भगवान गणेश के लिए भेजते हैं। इन निमंत्रण पत्रों पर पता लिखा जाता है “श्री गणेश जी, रणथंभौर का किला, जिला- सवाई माधोपुर (राजस्थान)”, और निमंत्रण आराम से गणपति के पास पहुंच जाता है। इतना ही नहीं मंदिर के पुजारी इन निमंत्रण पत्रों को भगवान को पढ़ कर सुनाते भी हैा ताकि भगवान को निमंत्रण भेजने वाले के कार्यक्रम की सूचना मिल जाये।

इस गणेश मंदिर का निर्माण महाराजा हम्मीरदेव चौहान ने करवाया था लेकिन मंदिर के अंदर भगवान गणेश की प्रतिमा स्वयंभू है। इस मंदिर में भगवान गणेश त्रिनेत्र रूप में विराजमान है जिसमें तीसरा नेत्र ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।

विराजमान है गणपति का पूरा परिवार

पूरी दुनिया में यह एक ही मंदिर है जहाँ भगवान गणेश जी अपने पूर्ण परिवार, दो पत्नी- रिद्दि और सिद्दि एवं दो पुत्र- शुभ और लाभ, के साथ विराजमान है। भारत में चार स्वयंभू गणेश मंदिर माने जाते है, जिनमें रणथम्भौर स्थित त्रिनेत्र गणेश जी प्रथम है। इस मंदिर के अलावा सिद्दपुर गणेश मंदिर गुजरात, अवंतिका गणेश मंदिर उज्जैन एवं सिद्दपुर सिहोर मंदिर मध्यप्रदेश में स्थित है।

त्रिनेत्र गणेश प्रतिमा का इतिहास – History Of Trinetra Ganesh

प्रतिमा का इतिहास है कि भगवान राम ने लंका कूच करते समय इसी गणेश का अभिषेक कर पूजन किया था। अत: त्रेतायुग में यह प्रतिमा रणथम्भौर में स्वयंभू रूप में स्थापित हुई और लुप्त हो गई। एक और मान्यता के अनुसार जब द्वापर युग में भगवान कृष्ण का विवाह रूकमणी से हुआ था तब भगवान कृष्ण गलती से गणेश जी को बुलाना भूल गए जिससे भगवान गणेश नाराज हो गए और अपने मूषक को आदेश दिया की विशाल चूहों की सेना के साथ जाओं और कृष्ण के रथ के आगे सम्पूर्ण धरती में बिल खोद डालो। इस प्रकार भगवान कृष्ण का रथ धरती में धँस गया और आगे नहीं बढ़ पाये। मूषकों के बताने पर भगवान श्रीकृष्ण को अपनी गलती का अहसास हुआ और रणथम्भौर स्थित जगह पर गणेश को लेने वापस आए, तब जाकर कृष्ण का विवाह सम्पन्न हुआ। तब से भगवान गणेश को विवाह व मांगलिक कार्यों में प्रथम आमंत्रित किया जाता है। यही कारण है कि रणथम्भौर गणेश को भारत का प्रथम गणेश कहते है।

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तीसरे नेत्र की मान्यता

रणथम्भौर स्थित त्रिनेत्र गणेश जी दुनिया के एक मात्र गणेश है जो तीसरा नयन धारण करते है। गजवंदनम् चितयम् में विनायक के तीसरे नेत्र का वर्णन किया गया है, लोक मान्यता है कि भगवान शिव ने अपना तीसरा नेत्र उत्तराधिकारी स्वरूप सौम पुत्र गणपति को सौंप दिया था और इस तरह महादेव की सारी शक्तियाँ गजानन में निहित हो गई।महागणपति षोड्श स्त्रौतमाला में विनायक के सौलह विग्रह स्वरूपों का वर्णन है। महागणपति अत्यंत विशिष्ट व भव्य है जो त्रिनेत्र धारण करते है, इस प्रकार ये माना जाता है कि रणथम्भौर के रणतभंवर महागणपति का ही स्वरूप है।

त्रिनेत्र गणेश मंदिर कैसे पहुंचे ? – How to Reach Trinetra Ganesh Temple Ranthambore Rajasthan

त्रिनेत्र गणेश मंदिर सवाई माधोपुर जिले में स्थित है, यहाँ पर ट्रेन और बस द्वारा देश के अन्य क्षेत्रों से काफी आसानी से पहुंचना जा सकता है। तो आइए जानते हैं कि फ्लाइट, ट्रेन और बस से त्रिनेत्र गणेश मंदिर कैसे पहुंचे ?

हवाई जहाज से –By Flight

रणथंबोर में स्थित त्रिनेत्र गणेश मंदिर का नजदीकी हवाई अड्डा जयपुर में है, जो इस मंदिर से करीब 182 किमी. की दूरी पर स्थित है। जयपुर एयरपोर्ट से आप टैक्सी बस या ट्रेन द्वारा सवाई माधोपुर आ सकते हैं और वहां से आपको त्रिनेत्र गणेश मंदिर जाने के लिए कैब की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, जिससे आप मंदिर में आसानी से पहुंच सकते हैं।

ट्रेन से कैसे पहुंचे ? – By Train

निकटतम रेलवे स्टेशन सवाई माधोपुर है, जहां पर आप देश के प्रमुख शहरों से ट्रेन द्वारा पहुंच सकते हैं और वहां से कैब द्वारा त्रिनेत्र गणेश मंदिर तक जा सकते हैं।

बस कैसे पहुंचे– By Bus

गणेश जी के इस मंदिर का सबसे नजदीकी बस स्टैंड सवाई माधोपुर है, जहां आने के लिए राजस्थान के अन्य क्षेत्रों से रेगुलर बसें चलती हैं।

मैं आशा करता हूं कि इस जानकारी से आपको त्रिनेत्र गणेश मंदिर के बारे में कुछ बातें जानने को मिली होगी। अन्य तीर्थ स्थलों के बारे में जानने के लिए आप हमारे वेबसाइट के कैटेगरी को चेक आउट करना ना भूलें।

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चतुर्थी तिथि – गणेश जी को प्रसन्न करने के राशि अनुसार उपाय https://astrodeeva.com/%e0%a4%9a%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a5%e0%a4%bf-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%aa%e0%a5%8d/ https://astrodeeva.com/%e0%a4%9a%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a5%e0%a4%bf-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%aa%e0%a5%8d/#respond Mon, 14 Jun 2021 03:19:40 +0000 https://astrodeeva.com/?p=2174 पुराणों के अनुसार चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान श्रीगणेश हैं इसलिए अगर इस तिथि पर श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए राशि अनुसार कुछ विशेष उपाय किए जाएं तो बहुत ही शुभ फल प्राप्त होता है। जानिए राशि अनुसार उपाय मेष राशि – मेष राशि वाले लोग चतुर्थी के दिन सिंदूरी रंग के गणेशजी की […]

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पुराणों के अनुसार चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान श्रीगणेश हैं इसलिए अगर इस तिथि पर श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए राशि अनुसार कुछ विशेष उपाय किए जाएं तो बहुत ही शुभ फल प्राप्त होता है। जानिए राशि अनुसार उपाय

मेष राशि – मेष राशि वाले लोग चतुर्थी के दिन सिंदूरी रंग के गणेशजी की आराधना करें। 11 दूर्वा हल्दी के जल में डालकर चढ़ाएं ऊं गं गणपतये नम: को दूर्वा से 108 बार भोजपत्र पर लिखे। ऐसी गणेश उपासना से समस्त विघ्न संकट का निवारण होता है और धन-धान्य की प्राप्ति होती है।

वृषभ राशि – वृषभ राशि वाले लोग चतुर्थी तिथि को दूधिया रंग के श्रीगणेशजी की आराधना करें। श्रीगणेश को सफेद फूल पर इत्र लगाकर नौ दूर्वा के साथ सफेद लड्डू का भोग लगाएं। पूजा करते समय ऊँ गं ऊँ गं मंत्र का जप करें। इस प्रकार श्रीगणेश का पूजन करने पर वृषभ राशि वाले लोगों को सभी कार्य में सफलता व सिद्धि प्राप्त हो सकती है।

मिथुन राशि – मिथुन राशि वाले लोगों के लिए हरी गणेश प्रतिमा की पूजा करना शुभ होता है। श्रीगणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए दूर्वा की माला बनाकर ऊं श्री गं गणाधिपतये नम: 108 बार उच्चारण करके चढ़ाना चाहिए श्रीगणेश को गुड़ का विशेष नैवैद्य अर्पण करना चाहिए।

कर्क राशि – कर्क राशि वाले लोगों के लिए सफेद रंग के गणेशजी की आराधना करना श्रेष्ठ रहता है। श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए सफेद आंकड़े के पुष्प की माला बनाकर साथ में दूर्वा की जड़ बांधकर अर्पित करें। ऊं श्री श्वेतार्क देवाय नम: का जाप कम से कम 108 बार करें। मोदक के नैवेद्य पर थोड़ा सा मक्खन चढ़ाएं। इस प्रकार भगवान गणेश की पूजा करने से समस्त मनोकामना पूर्ण होती है।

सिंह राशि – सिंह राशि वाले लोगों को मेहरून रंग की श्रीगणेश प्रतिमा की आराधना करना ज्यादा सफलता कारक माना गया है। सिंह राशि के लोग श्रीगणेश की विधि-विधान से पूजन करें। श्रीगणेश पर 108 दूर्वा कुंकुम में कर के चढ़ाएं। गुड़ की 11 गोली बनाकर श्री गणेशजी को नित्य अर्पण करें जिससे चहुंमुखी विकास होगा।

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कन्या राशि – कन्या राशि वाले लोगों को इस दिन गहरे हरे रंग के श्री गणेशजी की आराधना करना श्रेष्ठ रहता है। हरे मूंग 108 संख्या में श्री गणेशजी की प्रतिमा पर चढ़ाएं। भगवान गणेश के मंदिर में हरे मूंग व गुड़ का दान करें। श्री वक्रतुंडाय नम: मंत्र का 108 बार जाप करें। इस तरह श्रीगणेश का पूजन करने से आपको सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होगी।

तुला राशि – तुला राशि वाले लोगों को इस दिन सफेद मिश्रित रंग के श्री गणेशजी की आराधना करना सर्वोत्तम होता है। सवाया लड्डू का भोग श्रीगणेश को लगाएं। दूर्वा व पुष्प भी सवा सौ ग्राम या सवा किलो चढाएं जिससे समस्त संकट का निवारण होकर इच्छित मनोकामना परिपूर्ण होती है। श्रीगणेश स्त्रोत का पाठ करना भी श्रेष्ठ होता है।

वृश्चिक राशिचौथ के दिन वृश्चिक राशि वाले जातकों को लाल मिश्रित श्रीगणेशजी की आराधना करना सबसे अच्छा होता है। श्रीगणेशजी पर लाल रंग से रंगे चावल अर्पण करें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि चावलों की संख्या 108 से कम अथवा ज्यादा न हो। श्री विघ्नहरण संकट हरणायनम: मंत्र का जाप करें, जिससे समस्त मनोकामना परिपूर्ण हो सके।

धनु राशि – धनु राशि वाले लोगों को इस दिन पीले रंग की गणेशजी की आराधना करना चाहिए। हल्दी की पांच गठान श्री गणाधिपतये नम: मंत्र का उच्चारण कर चढ़ाएं। 108 दूर्वा पर गीली हल्दी लगाकर श्री गजवकत्रम नमो नम: का जाप करके चढ़ाएं। इस प्रकार पूजन करने पर भगवान श्रीगणेश सभी कामनाएं पूरी करते हैं।

मकर राशि – मकर राशि वाले लोगों को नीले रंग के श्रीगणेशजी की आराधना करना सर्वोत्तम होता है। भगवान श्रीगणेश को काले तिल अर्पण करें। दूर्वा व लाल रंग के फूल पर इत्र लगाकर श्री गणेशाय नम: का जप करके श्री गणेशजी को अर्पण करें। जिससे समस्त विघ्न का निवारण हो सके। गणपति अर्थवशीर्ष का पाठ करें।

कुंभ राशि – कुंभ राशि वाले लोगों को इस दिन आसमानी रंग की गणेश प्रतिमा की आराधना करनी चाहिए। श्रीगणेश को सिंदूर का तिलक लगाएं व उनके मस्तक के मध्य में हल्दी का तिलक लगाएं। हाथी को मोदक या गुड़ रोटी खिलाएं व 108 दूर्वा चढ़ाएं व ऊँ गं गणपतयै नम: का जप करें।

मीन राशि – मीन राशि वाले लोगों को चतुर्थी तिथि को हल्दी रंग के श्री गणेशजी की आराधना करना चाहिए। हल्दी की जड़ पर आठ बार ऊं गं गं गं गं गं श्री गजाय नम: लिखकर भगवान श्री गणेशजी के मस्तक पर अर्पण करें। पीले रंग के धागे में पीले पुष्प व दूर्वा की माला बनाकर श्री गणेशजी को अर्पण करें।

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भगवान गणेश ने मूषक को अपना वाहन क्यों चुना? https://astrodeeva.com/%e0%a4%ad%e0%a4%97%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%b7%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a4%be/ https://astrodeeva.com/%e0%a4%ad%e0%a4%97%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%82%e0%a4%b7%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a4%be/#comments Wed, 28 Apr 2021 04:46:42 +0000 https://astrodeeva.com/?p=1979 हम सब जानते हैं कि गणेश जी मूषक पर विराजमान होते हैं। उनका वाहन ‘डिंक’ नामक मूषक है। गणेश जी की विशाल शारीरिक संरचना के समक्ष मूषक आकार में अत्यंत छोटा है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि गणेश जी ने इतने छोटे से जीव को ही अपना वाहन क्यों चुना? इस प्रश्न का उत्तर […]

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हम सब जानते हैं कि गणेश जी मूषक पर विराजमान होते हैं। उनका वाहन ‘डिंक’ नामक मूषक है। गणेश जी की विशाल शारीरिक संरचना के समक्ष मूषक आकार में अत्यंत छोटा है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि गणेश जी ने इतने छोटे से जीव को ही अपना वाहन क्यों चुना?

इस प्रश्न का उत्तर दो पौराणिक कथाओं में मिलता है। आइये जानते हैं मूषक के गणेश जी का वाहन बनने के पीछे की कथा :

प्रथम कथा

गणेश पुराण के अनुसार द्वापर युग में एक दिन देवराज इंद्र के दरबार में गहन चर्चा चल रही थी। दरबार में उपस्थित समस्त देवगण चर्चा में लीन थे किंतु क्रौंच नामक गंधर्व अप्सराओं के साथ हँसी-ठिठोली कर रहा था। जब देवराज इंद्र की दृष्टि क्रौंच पर पड़ी, तो वे क्रोधित हो उठे और उसकी चंचलता भरी हरकत के कारण उसे मूषक बन जाने का श्राप दे दिया।

क्रौंच इंद्र के श्राप के कारण मूषक बना और स्वर्गलोक से पृथ्वीलोक में पराशर ऋषि के आश्रम में आ गिरा। स्वभाव से चंचल मूषक रूपी क्रौंच ने ऋषि आश्रम में उत्पात मचा दिया। उसने मिट्टी के समस्त पात्र तोड़ डाले, उसमें रखे अन्न का भक्षण कर लिया, ऋषियों के वस्त्र कुतर दिए और आश्रम की सुंदर वाटिका भी उजाड़ दी।

मूषक के इस उत्पात से पराशर ऋषि चिंतित हो गए और उससे छुटकारा दिलाने की प्रार्थना हेतु गणेश जी की शरण में पहुँचे।

गणेश जी ने पराशर ऋषि की प्रार्थना स्वीकार कर ली और मूषक रूपी क्रौंच को पकड़ने के लिए एक तेजस्वी पाश फेंका। पाश के बंधन से बचने के लिए क्रौंच पाताल लोक भाग गया। किंतु पाश ने पाताल लोक तक उसका पीछा किया और उसे बांधकर गणेश जी के समक्ष ला खड़ा किया।

साक्षात गणेश जी को अपन समक्ष देख मूषक रूपी क्रौंच भयभीत हो गया और वो भगवान गणेश जी से अपने प्राणों की भिक्षा मांगने लगा। तब गणेश जी बोले, “तूने पराशर ऋषि के आश्रम में बहुत उत्पात मचाया है, और तेरा ये क्र्त क्षमायोग्य तो नहीं है। किंतु शरणागत की रक्षा मेरा धर्म है। तुम्हें जो वरदान चाहिए मांग लो।”

गणेश जी की इस बात पर क्रौंच का अहंकार जाग उठा और वह बोला, “मुझे किसी वरदान की आवश्यकता नहीं है। आप चाहे तो मुझसे कोई वर मांग लें।”

अहंकारी क्रौंच के इस कथन पर गणेश जी मंद-मंद मुस्कुराये और बोले, “ऐसा ही सही। मैं तुझसे अपना वाहन बन जाने का वर मांगता हूँ।”

क्रौंच के पास कोई अन्य विकल्प न था। अपने कथन अनुसार वह गणेश जी का वाहन बन गया। गणेश जी जैसे ही मूषक रुपी क्रौंच पर सवार हुए, उनके भारी भरकम शरीर से वह दबने लगा और उसके प्राणों पर बन आई। उसका सारा अहंकार चूर-चूर हो गया। उसने गणेश जी से क्षमा माँगी और याचना की कि वे अपना वजन वहन करने योग्य कर लें। गणेश जी ने वैसा ही किया।

उस दिन से मूषक गणेश जी का वाहन बन गया। गणेश जी के वाहन के रूप में उसका नाम ‘डिंक’ पड़ा। गणेश जी की मूषक पर सवारी स्वार्थ पर विजय का संकेत है।   

दूसरी कथा

पौराणिक कथा के अनुसार गजमुखासुर नामक दैत्य ने देव लोक में उत्पात मचा रखा था। समस्त देवता उससे तंग थे। एक दिन सभी देवगण एकत्रित होकर गणेश जी की शरण में पहुँचे और उनसे गजमुखासुर दैत्य से मुक्ति दिलाने हेतु प्रार्थना करने लगे।

देवताओं की रक्षा के लिए गणेश जी ने गजमुखासुर से युद्ध किया। इस युद्ध में गणेश जी का एक दांत टूट गया। इसी दांत से गणेश जी ने गजमुखासुर पर प्रहार किया, जिससे बचने के लिए गजमुखासुर में मूषक का रूप धारण किया और युद्धस्थल से भाग खड़ा हुआ। किंतु गणेश जी ने उसे पकड़ लिया।

तब गजमुखासुर गणेश जी से क्षमायाचना करते हुए अपने प्राणों की भीख मांगने लगा। गणेश जी ने उसे क्षमा कर अपना वाहन बना लिया।

**(इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैंजिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)

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गणेश पूजा में तुलसी क्यों वर्जित हैं ? https://astrodeeva.com/%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82/ https://astrodeeva.com/%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82/#comments Tue, 25 Aug 2020 12:29:21 +0000 https://astrodeeva.com/?p=553 हिन्दू धर्म प्रकृति से जुड़ा धर्म है। इस धर्म में कई पेड़-पौधों को देवी-देवताओं जैसा माना जाता है और उन की पूजा भी की जाती है, उन सब पेड़-पौधों में तुलसी को सबसे पवित्र माना गया हैं और इस की पूजा भी की जाती हैं। हर हिन्दू देवता की पूजा में तुलसी को चढ़ाने की […]

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हिन्दू धर्म प्रकृति से जुड़ा धर्म है। इस धर्म में कई पेड़-पौधों को देवी-देवताओं जैसा माना जाता है और उन की पूजा भी की जाती है, उन सब पेड़-पौधों में तुलसी को सबसे पवित्र माना गया हैं और इस की पूजा भी की जाती हैं। हर हिन्दू देवता की पूजा में तुलसी को चढ़ाने की प्रथा हैं। विष्णु जी को तुलसी समर्पित करने से विशेष फल की प्राप्ति होती हैं। परंतु क्या आप जानते हैं की गणेश जी को तुलसी चढ़ना वर्जित है और इसे अशुभ माना जाता है।

पौराणिक कथा :

कथा के अनुसार एक बार तुलसी जी भ्रमण कर रहीं थी। भ्रमण करते-करते वो गंगा जी के तट के समीप पहुँची जहाँ भगवान गणेश तपस्या में लीन थे। उनके तेज को देख कर तुलसी बहुत प्रभावित हुई और उन्होंने गणेश जी से विवाह करने का मन बनाय और गणेश जी की तपस्या पूर्ण होने तक वहाँ इंतज़ार किया। जब गणेश जी की तपस्या पूर्ण हुई तो अपनी 

इस इच्छा को तुलसी ने गणेश जी के सामने विनय पूर्वक रखा और कहा “हे देव! मैं उचित वर प्राप्ति की कामना लेकर बहुत काल से भटक रही हूँ। आज आपको देख कर लगा कि मेरी तपस्या पूर्ण हुई। आपका ये तेजस्वी रूप देख कर मैंने मन ही मन आपको अपना पति मान लिया है इसीलिए कृपा कर मुझे अपनी भार्या के रूप में स्वीकार करें।”

गणेश जी उस समय विवाह नहीं करना चाहते थे इस लिए तुलसी की इस इच्छा को सुन कर उन्हें समझ नहीं आया कि क्या उत्तर दें, इसी कारण गणेश जी ने बड़ी मधुरता से कहा “हे देवी! आप अद्वितीय सौंदर्य की धनी हैं और आप का सौंदर्य देखकर मैं भी अभिभूत हूँ। विश्व में कदाचित ही कोई ऐसा होगा जो आपके अपनी भार्या के रूप में स्वीकार  ना करे। किन्तु आप कृपया मुझे क्षमा करें क्यूँकि मैं अभी विवाह नहीं कर सकता।“ इस वचन को सुन तुलसी जी ने कहा “हे देव! अगर आप अभी विवाह नहीं करना चाहते तो में आप की प्रतीक्षा करूँगी” तब गणेश जी ने विनम्रता से कहा “हे देवी! आप मेरी बात नहीं समझी। मैं ब्रह्मचारी हूँ इसलिए मैं विवाह नहीं कर सकता। अत: आप मुझे क्षमा करें और अपने योग्य कोई अन्य वर ढूँढ लें।“

यह सुन तुलसी को अति दुःख हुआ और वो दुखी मन से वहाँ से वापिस लौट गयी। थोड़ी दूर जाने के बाद तुलसी को नारद देव मिले, तुलसी से उन्हें प्रणाम किया। तुलसी को उदास देख कर देवर्षि नारद ने कहा – “हे देवी! आप उदास क्यों हैं?” इसपर तुलसी ने देवर्षि नारद को पूरी बात बतायी। बात सब देवर्षि नारद हसने लगे और कहा “हे देवी, आप भोली हैं और किन की बात में आ गयी? सत्य तो ये है कि वे ब्रह्मचारी नहीं हैं। उन्होंने आपसे ठिठोलि की हैं।“

देवर्षि नारद का यह कथन सुन तुलसी को बहुत क्रोध आया। वो गणेश जी के पास वापस लौटी और कहा “हे देव! मैं आप से सच्चे मन से विवाह करना चाहती थी किन्तु आप ने असत्य कहकर मेरा मज़ाक़ बनाया और मेरी निष्ठा का अपमान किया। मैं आप को श्राप देती हूँ की आप एक विवाह से बच रहें हैं, अब आप की इच्छा के विरूद्ध आप के दो विवाह होंगे।“ इस श्राप को पा कर गणेश जी भी क्रोधित हो गए और उन्होंने भी तुलसी को श्राप दे दिया कि उसका विवाह एक राक्षस के साथ होगा और उस का वध अल्प काल में महादेव भगवान शंकर के हाथों से होगा। यह सुन तुलसी को बहुत पछतावा हुआ और उस ने भगवान गणेश जी से क्षमा याचना की। तब गणेश जी ने कहा “हे देवी! मेरा श्राप विफल नहीं हो सकता किन्तु मैं आपको वरदान देता हूँ कि अगले जन्म में आप को नारायण की पत्नी बनने का सौभाग्य प्राप्त होगा और कलयुग में तुम्हें पूजा जाएगा एवं तुम मनुष्य के मोक्ष प्राप्ति में सहायक होगी। परन्तु मेरी पूजा में तुम्हारा प्रयोग वर्जित होगा।

भगवान गणेश और तुलसी को अपना-अपना श्राप भोगना पड़ा। गणेश जी का विवाह रिद्धि और सिद्धि से हुआ। तुलसी का विवाह शंखचूड(जलंधर) नामक राक्षक से हुआ जिसका वध महादेव के हाथों से हुआ। अगले जन्म में तुलसी अपनी राख से एक पौधे के रूप में उत्पन हुई और उन का विवाह नारायण के रूप शालिग्राम से हुआ। 

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Ganesh Chaturthi 2020 And Today Horoscope: गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएँ, आज का राशिफल https://astrodeeva.com/ganesh-chaturthi-2020-and-today-horoscope-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%9a%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%ad%e0%a4%95/ https://astrodeeva.com/ganesh-chaturthi-2020-and-today-horoscope-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%9a%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%ad%e0%a4%95/#respond Sat, 22 Aug 2020 04:06:32 +0000 https://astrodeeva.com/?p=535 आज भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है. आज विश्व भर मे  गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा | मेष राशि वालों को आज विशेष ध्यान देने  की जरुरत है. आज बुराई से बचें. आज कुछ लोग आपकी छवि खराब करने का प्रयास कर सकते हैं. वृष राशि वाले आज क्रोध न करें. नई जिम्मेदारियों के लिए तैयार […]

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आज भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है. आज विश्व भर मे  गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा | मेष राशि वालों को आज विशेष ध्यान देने  की जरुरत है. आज बुराई से बचें. आज कुछ लोग आपकी छवि खराब करने का प्रयास कर सकते हैं. वृष राशि वाले आज क्रोध न करें. नई जिम्मेदारियों के लिए तैयार रहें. वहीं मिथुन राशि वाले आज संबंधों से धन अर्जित कर सकते हैं.

मेष राशि : आज धन प्राप्ति का योग बना हुआ है | आज के दिन किसी भी प्रकार की नकारात्मकता अपने भीतर न आने दें। वहीं ऑफिस में भी नकारात्मक सोच आपकी प्रगति में बाधक बन सकती है इसलिए साकारात्मक रहना होगा | व्यापारी वर्ग अगर लोन लेने का विचार बना रहें हैं तो वर्तमान स्थिति को देखते हुए इससे बचना चाहिए  आज  चिकनाई युक्त भोजन का सेवन करने से  परहेज करें | 

शुभ अंक : 2 

शुभ रंग : गुलाबी 

वर्षभ राशि : आज के दिन आगे बढ़ने और जीवन का भरपूर आनंद उठाने का अवसर प्राप्त हो सकता है। कार्य क्षेत्र  की बात करें तो जो लोग प्रोमोशन के लिए प्रयासरत है, उनको मेहनत पर फोकस करना चाहिए | युवा वर्ग अपनी रचनात्मकता का सर्वश्रेष्ठ उपयोग कर सकेंगे। स्वास्थ्य की दृष्टि से आज बीमारी न होते हुए भी बीमारी होने की शंका आपको काफी परेशान कर सकती है। परिवार में किसी बात को लेकर अपनों से संवादहीनता न बनाएं बातचीत जारी रखने से आपसी मनमुटाव भी धीरे-धीरे मिट सकते हैं |

शुभ अंक :5 

शुभ रंग : ग्रे 

मिथुन राशि: आज के दिन आगे बढ़ने और जीवन का भरपूर आनंद उठाने का अवसर प्राप्त हो सकता है| लेकिन आज के दिन स्वभाव में सहजता बनाकर रखना अति आवश्यक है, क्योंकि कभी-कभी अधिक प्रैक्टिल होना भी संबंधों को खराब कर सकता है। ऑफिशियल कार्यों के लिए दिन सामान्य रहने वाला है, चल रहे कार्यों को ही वरीयता दें। व्यापारी वर्ग डील पक्की करते समय उसकी जांच-पड़ताल अवश्य कर लें अन्यथा भविष्य में आपको आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। सेहत की बात करें तो आज ओवर इटिंग से बचना चाहिए, अन्यथा पेट का दर्द आपको परेशान कर सकता है |

शुभ अंक : 6 

शुभ रंग : गोल्डन 

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कर्क राशि: आपके लिए आज का दिन अच्छा रहेगा। आप अपने प्रेम जीवन में काफी खुश रहेंगे और अपने प्रिय से अपने दिल की बात कहेंगे। शादीशुदा लोगों का गृहस्थ जीवन तनावपूर्ण रहेगा। जीवनसाथी किसी बात को लेकर गुस्सा हो सकता है। आपकी सेहत अच्छी रहेगी। उल्टा सीधा भोजन करने से बचें। काम के सिलसिले में दिनमान अच्छा है परिवार में एक दूसरे से नोक-झोंक हो सकती है लेकिन यही नोक-झोंक बाद में आपसी संबंधों को और अधिक मजबूत भी करेगी

शुभ अंक : 7 

शुभ रंग : आसमानी 

सिंह राशि : आपके लिए आज का दिन अच्छा रहेगा। आप अपने परिवार पर ध्यान देंगे। जरूरी कामों में सहयोग करेंगे। सेहत अच्छी रहेगी। शादीशुदा जीवन में प्रेम और रोमांस बढ़ेगा। प्रेम जीवन बिता रहे लोगों के लिए भी दिन अच्छा है। आपका प्रिय आपको दिल से प्यार करेगा और आपको यह सब महसूस करना बड़ा अच्छा लगेगा। काम के सिलसिले में आपका दिन मजबूत है। आपके प्रमोशन की बात चल सकती है |

शुभ अंक : 1 

शुभ रंग : हरा 

कन्या राशि : आपके लिए आज का दिन मध्यम फलदायक रहेगा। धन की आवक होगी। खर्चे भी रहेंगे लेकिन चिंता नहीं होगी। मन से मजबूत होंगे। काम के सिलसिले में बेहद अच्छे नतीजे मिलेंगे। आपको प्रमोशन मिल सकता है। शादीशुदा लोगों का गृहस्थ जीवन अच्छा रहेगा। आप अपनी जिम्मेदारियों को समझेंगे। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। 

शुभ अंक : 4 

शुभ रंग : नीला 

तुला राशि : आज के दिन जल्दबाजी में कोई भी फैसला न लें, वहीं दूसरी ओर यदि धन पर्याप्त मात्रा में हो तो बीमा पॉलिसी में निवेश करना फायदेमंद हो सकता है। ऑफिस में मिटिंग का दौर चलेगा जिसमें अपनी बातों को मुखरता से कहने का अवसर भी मिलेगा। थोक का व्यापार करने वालों की आय में बढ़ोत्तरी होने की संभावना है, साथ ही व्यापार के सिलसिले में यात्रा भी करनी पड़ सकती है। सेहत में जिन लोगों को अक्सर कमर दर्द रहता है, उन्हें आज इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है, जीवनसाथी के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान रखें, कार्य को पूर्ण करने में उनकी सलाह काम आएगी |

शुभ अंक : 3

शुभ रंग : नारंगी 

वृश्चिक राशि आज के दिन क्रोध जीवन में बड़ी समस्या खड़ी कर सकता है, इसलिए छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करना ठीक नहीं है. घर और ऑफिस सभी जगह प्रेम और सौहार्दपूर्ण वातावरण बना कर रखना सही रहेगा। व्यापारियों को परिश्रम के मुताबिक फल न मिल रहा हो, तो वर्तमान समय में धैर्य का परिचय दें, चिंतित न हों, भविष्य में स्थितियां सुखद हो जाएंगी। विद्यार्थियों को पिछले दिनों बनाई गई विषय सुची से पढ़ना ज्यादा बेहतर रहेगा। हेल्थ में मौसम का बदलाव स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, इसलिए सर्द गर्म की स्थिति से बचें। घर की सुख-सुविधाओं से संबंधित कार्यों में दिन व्यतीत होगा |

शुभ अंक : 8

शुभ रंग : गोल्डन 

धनु राशि : भाग्य वृद्धि भी जल्दी हो सकती है. ऑफिशियल कामों को तेजी से करने का अभ्यास करना फायदेमंद साबित होगा। हैण्डलूम से संबंधित कारोबार करने वालों को छोटे-मोटे मुनाफे हाथ लग सकते हैं। युवाओं का सारा समय सोशल मिडिया में जा सकता है, अनावश्यक रूप से इसका प्रयोग करने से बचें। सेहत में जिन लोगों को डायबटीज की प्रॉब्लम है उनको अपने खान-पान में सतर्कता बरतनी चाहिए। घर से संबंधित अधिक खर्चों पर अंकुश लगाना चाहिए, साथ ही गैर नियोजित खर्चों को स्थगित करने में ही भलाई है |

शुभ अंक : 6 

शुभ रंग : आसमानी 

मकर राशि : आज के दिन बीती बातों को लेकर थोड़े परेशान हो सकते हैं, लेकिन दिन के अंत तक स्थितियां सामान्य हो सकती है। नौकरी पेशे से जुड़े लोगों को जन्म स्थान से अन्य जगह स्थानांतरण की संभावनाएं बन रही है। लोहें का कारोबार करने वालों को अधिक माल डंप नहीं करना चाहिए, अन्यथा माल फंस सकता है। विद्यार्थी वर्ग कठिन विषयों को बदलने की सोच रहें है तो एक बार और विचार अवश्य कर लें। स्वास्थ्य की दृष्टि से देखे तो आज भी महिलाओं को कार्य करते समय सावधानी रखनी होगी, क्योंकि ग्रहीय स्थिति चोट लगाने वाली बनी हुई है। घरेलू मामलों में पिता से सलाह मशवरा अवश्य करना चाहिए |

शुभ अंक : 2 

शुभ रंग : बेगनी 

कुम्भ राशि : आज के दिन अगर काम बनते-बनते बिगड़ रहें हों तो परेशान न हो, सही समय के आते ही स्थितियां ठीक होती नजर आएगी। कर्मक्षेत्र में चल रहे प्रयास सफलता की ओर ले जाएंगे, वहीं जीवनसाथी यदि जॉब करने की इच्छुक है तो उन्हें इस ओर सफलता मिलने की संभावना दिखाई दे रही है। व्यापारियों को कानूनी पचड़ो से दूर रहना सही रहेगा अन्यथा उन्हें बड़ी मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है। हेल्थ की बात करें तो जिनको उच्च रक्तचाप की समस्या है उनको तनाव लेने से बचना होगा, अन्यथा रक्तचाप बढ़ सकता है। परिवार में धार्मिक कार्यक्रम की संभावनाएं बढ़ रही हैं |

शुभ अंक : 9 

शुभ रंग : पीला 

मीन राशि : आज के दिन मान प्रतिष्ठा बनाएं रखने के लिए समाजिक कार्यों में सहयोग देना होगा। कार्य समय पर पूरा करें, वहीं उच्चधिकारियों से किसी बात को लेकर विवाद होने की आशंका बनी हुई है। व्यापारी वर्ग नई डील के लिए यदि योजना बना रहे हैं तो वर्तमान समय में रुक जाना ही उत्तम रहेगा। युवा वर्ग गलत आदतों व संगति से दूर रहें, प्रतियोगिता में यदि हिस्सा लेने का विचार है तो किसी जानकार व्यक्ति से मार्गदर्शन लेना चाहिए। हेल्थ में कार्य का अधिक बोझ होने के कारण मानसिक तनाव रहेगा इसलिए योग व मेडिटेशन का सहारा ले। पुराने मित्रों के साथ भावनात्मक संबंध मजबूत होंगे

शुभ अंक : 5 

शुभ रंग : नीला 

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अष्‍टविनायक मंदिरों के दर्शन, मिलेगा विघ्‍नहर्ता का आर्शिवाद https://astrodeeva.com/%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%b5-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%b7/ https://astrodeeva.com/%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%b5-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%b7/#comments Wed, 19 Aug 2020 19:56:17 +0000 https://astrodeeva.com/?p=495 देश भर में अनेक प्रसिद्ध गणेश मंदिर हैं और गणपति महोत्सव के मौके पर उन सब मंदिरो में दर्शनो के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। अब हमआपको गणेश जी के 8 मंदिरो के बारे में बता रहें जो बहुत प्राचीन है। महाराष्ट्र के पुणे के विभिन्न स्थानो में गणेश जी के आठ मंदिर हैं, इन्हें अष्टविनायक कहा जाता है। इन मंदिरों में गणेश जी की स्वयंभू (अपने आप प्रकट हुई) प्रतिमा है और कहा जाता है की यहाँ भगवान गणेश स्वयं विराजते हैं और इन अष्ट स्वरूप के दर्शन मात्र से कई जन्मों का पुण्य मिलता है। गणपति महोत्सव के मौके पर अष्टविनायक यात्रा का अपना महत्व है। पुणे के आस-पास स्थित गणपति जी के आठ स्वयभू मंदिरों के दर्शन के लिए यूंतो हमेशा ही श्रद्धालुओं की भीड़ रहती हैं, लेकिन गणेशोत्सव के दौरान यहां का माहौल अलग ही निराला होता है। इन अष्टविनायकों के साथ कईदिलचस्प कहानियां जुड़ी हुई हैं। माना जाता है कि ब्रह्मा जी के वरदान के बाद श्री गणेश ने हर युग में अलग-अलग रुपों में अवतार लिया और लोगोंको आशीर्वाद दिया।  ।। अष्टविनायक मंत्र ।। स्वस्ति श्रीगणनायकं गजमुखं मोरेश्वरं सिद्धिदम् ॥१॥बल्लाळं मुरुडे विनायकमहं चिन्तामणिं थेवरे ॥२॥लेण्याद्रौ गिरिजात्मजं सुवरदं विघ्नेश्वरं ओझरे ॥३॥ग्रामे रांजणनामके गणपतिं कुर्यात् सदा मङ्गलम् ॥४॥ श्री मयूरेश्वर मंदिर (मोरगांव, पुणे) मयूरेश्वर (मोरेश्वर) मंदिर पुणे से ८० किलोमीटर मोरगाँव में स्थित है। इस मंदिर के चारों कोनों में मीनारें और दीवारें हैं। यहाँ चार द्वार हैं जो चारों युग ( सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग) के प्रतीक हैं। यहाँ गणेशजी बैठी हुई मुद्रा  विराजमान  है। कहते हैं कि इसी स्‍थान पर गणेश जी नेसिंधुरासुर नाम के राक्षस का वध मोर पर सवार होकर उससे युद्ध करते हुए किया था। इसी कारण उनको मयूरेश्वर कहा जाता है। ये भी पढ़े : Ganesh Chaturthi 2020: घर में गणपति स्थापना, जानें शुभ मुहूर्त एवं पूजन विधि सिद्धिविनायक मंदिर (करजत तहसील, अहमदनगर)  सिद्धिविनायक मंदिर पुणे से 200 किलोमीटर सिद्धटेक गाँव में स्थित है। सिद्धिविनायक अष्टविनायक में दूसरे गणेश हैं। पौराणिक मन्यताओ के अनुसारयहाँ भगवान विष्णु ने सिद्धियाँ प्राप्त की थी। यह मंदिर एक पहाड़ की चोटी पर स्थित है जिससे इस मंदिर की परिक्रमा करने के लिए पहाड़ कीपरिक्रमा करनी होती हैं। श्री बल्लालेश्वर मंदिर (पाली गाँव, रायगढ़) श्री बल्लालेश्वर मंदिर गोवा राजमार्ग पर नागोथाने से पहले से 11 किलोमीटर, मुंबई पुणे हाइवे बांद, पाली से टोयन में स्थित है। प्राचीन काल मेंबल्लाल नामक एक बालक था, वह गणेश जी का परमभक्त था उसने एक दिन पाली गाँव में विशेष पूजा का आयोजन किया और सभी बच्चों कोआमंत्रित किया। पूजा कई दिनों तक चली और बच्चों ने पूजा पूर्ण होने से पहले घर लोटने से माना कर दिया इससे बच्चों के माता पिता ने नाराजहोकर बल्लाल के पिता कल्याणी सेठ से शिकायत की तो उन्होंने जगंल जाकर जहाँ पूजा चल रही वहाँ बल्लाल को पीटा और गणेश जी की मुर्ती केसाथ उसे भी जंगल में फेंक दिया। बल्लाल गंभीर हालत में भी भगवान गणेश जी की पूजा करता रहा। इस भक्ति से प्रसन्न होकर गणेश जी ने उसेदर्शन दिए और वरदान माँगने को कहा, तब बल्लाल ने गणेश जी से आग्रह किया अब वे इसी स्थान पर निवास करें। तब से गणपति यहां निवास करने लगे। श्री वरदविनायक (कोल्हापुर, रायगढ़) श्री वरदविनायक का मंदिर महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में कोल्हापुर क्षेत्र के महाड़ में स्थित हैं। मान्यता है कि वरदविनायक गणेश अपने नाम के समानसभी भक्तों की मनोकामन पूर्ण करते हैं। इस मंदिर में नंददीप नाम का दीपक निरंतर वर्षों से प्रज्जवलित है। चिंतामणि गणपति (थेऊर गांव, पुणे) चिंतामणि गणपति मंदिर पुणे जिले के हवेली तालुका में स्थित है। इस मंदिर के निकट तीन नदियों (भीम, मूला और मुथा) का संगम है। मान्यता है किभगवान ब्रमहा जी ने अपने विचलित मन को शांत करने के लिए इसी स्थान पर तपस्या की थी। अगर आपका मन विचलित रहता हो और चिंताएंआपको घेरे रहती हों तो आप थेयूर आएं और श्री चिंतामणि गणपति की पूजा करें सभी चिंताओं से मुक्ति मिल जाएगी।  ये भी पढ़े: Ganesh Visarjan 2021: गणेश विसर्जन कब, कैसे, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि श्री गिरजात्मज गणपति (लेण्याद्री गांव, पुणे) गिरजात्मज गणेश मंदिर पुणे-नासिक राजमार्ग पर पुणे से 90 किलोमीटर लेण्याद्री गांव में स्थित है। यह एक पहाड़ पर है और बौद्ध गुफाओं के स्थान पर बनाया गया है। इस पहाड़ पर १८ बौद्ध गुफाएँ हैं जिसमें से ८वीं गुफा में गिरजात्मजविनायक मंदिर है। मंदिर तक पहुंचने के लिए 307 सिढ़ियों चढ़नी पड़ती हैं । पूरा मंदिर ही एक बड़े पत्थर को काट कर बनाया गया है । मंदिर कामुख्य द्वार दक्षिण की ओर है। विघ्नेश्वर गणपति मंदिर (ओझर)  विघ्नेश्वर गणपति मंदिर पुणे नासिक रोड पर नारायणगावं (जूनर या ओजर […]

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देश भर में अनेक प्रसिद्ध गणेश मंदिर हैं और गणपति महोत्सव के मौके पर उन सब मंदिरो में दर्शनो के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। अब हमआपको गणेश जी के 8 मंदिरो के बारे में बता रहें जो बहुत प्राचीन है।

महाराष्ट्र के पुणे के विभिन्न स्थानो में गणेश जी के आठ मंदिर हैं, इन्हें अष्टविनायक कहा जाता है। इन मंदिरों में गणेश जी की स्वयंभू (अपने आप प्रकट हुई) प्रतिमा है और कहा जाता है की यहाँ भगवान गणेश स्वयं विराजते हैं और इन अष्ट स्वरूप के दर्शन मात्र से कई जन्मों का पुण्य मिलता है।

गणपति महोत्सव के मौके पर अष्टविनायक यात्रा का अपना महत्व है। पुणे के आस-पास स्थित गणपति जी के आठ स्वयभू मंदिरों के दर्शन के लिए यूंतो हमेशा ही श्रद्धालुओं की भीड़ रहती हैं, लेकिन गणेशोत्सव के दौरान यहां का माहौल अलग ही निराला होता है। इन अष्टविनायकों के साथ कईदिलचस्प कहानियां जुड़ी हुई हैं। माना जाता है कि ब्रह्मा जी के वरदान के बाद श्री गणेश ने हर युग में अलग-अलग रुपों में अवतार लिया और लोगोंको आशीर्वाद दिया। 

।। अष्टविनायक मंत्र ।।


स्वस्ति श्रीगणनायकं गजमुखं मोरेश्वरं सिद्धिदम् ॥१॥
बल्लाळं मुरुडे विनायकमहं चिन्तामणिं थेवरे ॥२॥
लेण्याद्रौ गिरिजात्मजं सुवरदं विघ्नेश्वरं ओझरे ॥३॥
ग्रामे रांजणनामके गणपतिं कुर्यात् सदा मङ्गलम् ॥४॥

श्री मयूरेश्वर मंदिर (मोरगांव, पुणे)

मयूरेश्वर (मोरेश्वर) मंदिर पुणे से ८० किलोमीटर मोरगाँव में स्थित है। इस मंदिर के चारों कोनों में मीनारें और दीवारें हैं। यहाँ चार द्वार हैं जो चारों युग ( सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग) के प्रतीक हैं। यहाँ गणेशजी बैठी हुई मुद्रा  विराजमान  है। कहते हैं कि इसी स्‍थान पर गणेश जी नेसिंधुरासुर नाम के राक्षस का वध मोर पर सवार होकर उससे युद्ध करते हुए किया था। इसी कारण उनको मयूरेश्वर कहा जाता है।

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सिद्धिविनायक मंदिर (करजत तहसील, अहमदनगर) 

सिद्धिविनायक मंदिर पुणे से 200 किलोमीटर सिद्धटेक गाँव में स्थित है। सिद्धिविनायक अष्टविनायक में दूसरे गणेश हैं। पौराणिक मन्यताओ के अनुसारयहाँ भगवान विष्णु ने सिद्धियाँ प्राप्त की थी। यह मंदिर एक पहाड़ की चोटी पर स्थित है जिससे इस मंदिर की परिक्रमा करने के लिए पहाड़ कीपरिक्रमा करनी होती हैं।

श्री बल्लालेश्वर मंदिर (पाली गाँव, रायगढ़)

श्री बल्लालेश्वर मंदिर गोवा राजमार्ग पर नागोथाने से पहले से 11 किलोमीटर, मुंबई पुणे हाइवे बांद, पाली से टोयन में स्थित है। प्राचीन काल मेंबल्लाल नामक एक बालक था, वह गणेश जी का परमभक्त था उसने एक दिन पाली गाँव में विशेष पूजा का आयोजन किया और सभी बच्चों कोआमंत्रित किया। पूजा कई दिनों तक चली और बच्चों ने पूजा पूर्ण होने से पहले घर लोटने से माना कर दिया इससे बच्चों के माता पिता ने नाराजहोकर बल्लाल के पिता कल्याणी सेठ से शिकायत की तो उन्होंने जगंल जाकर जहाँ पूजा चल रही वहाँ बल्लाल को पीटा और गणेश जी की मुर्ती केसाथ उसे भी जंगल में फेंक दिया। बल्लाल गंभीर हालत में भी भगवान गणेश जी की पूजा करता रहा। इस भक्ति से प्रसन्न होकर गणेश जी ने उसेदर्शन दिए और वरदान माँगने को कहा, तब बल्लाल ने गणेश जी से आग्रह किया अब वे इसी स्थान पर निवास करें। तब से गणपति यहां निवास करने लगे।

श्री वरदविनायक (कोल्हापुर, रायगढ़)

श्री वरदविनायक का मंदिर महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में कोल्हापुर क्षेत्र के महाड़ में स्थित हैं। मान्यता है कि वरदविनायक गणेश अपने नाम के समानसभी भक्तों की मनोकामन पूर्ण करते हैं। इस मंदिर में नंददीप नाम का दीपक निरंतर वर्षों से प्रज्जवलित है।

चिंतामणि गणपति (थेऊर गांव, पुणे)

चिंतामणि गणपति मंदिर पुणे जिले के हवेली तालुका में स्थित है। इस मंदिर के निकट तीन नदियों (भीम, मूला और मुथा) का संगम है। मान्यता है किभगवान ब्रमहा जी ने अपने विचलित मन को शांत करने के लिए इसी स्थान पर तपस्या की थी। अगर आपका मन विचलित रहता हो और चिंताएंआपको घेरे रहती हों तो आप थेयूर आएं और श्री चिंतामणि गणपति की पूजा करें सभी चिंताओं से मुक्ति मिल जाएगी। 

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श्री गिरजात्मज गणपति (लेण्याद्री गांव, पुणे)

गिरजात्मज गणेश मंदिर पुणे-नासिक राजमार्ग पर पुणे से 90 किलोमीटर लेण्याद्री गांव में स्थित है। यह एक पहाड़ पर है और बौद्ध गुफाओं के स्थान पर बनाया गया है। इस पहाड़ पर १८ बौद्ध गुफाएँ हैं जिसमें से ८वीं गुफा में गिरजात्मजविनायक मंदिर है। मंदिर तक पहुंचने के लिए 307 सिढ़ियों चढ़नी पड़ती हैं । पूरा मंदिर ही एक बड़े पत्थर को काट कर बनाया गया है । मंदिर कामुख्य द्वार दक्षिण की ओर है।

विघ्नेश्वर गणपति मंदिर (ओझर) 

विघ्नेश्वर गणपति मंदिर पुणे नासिक रोड पर नारायणगावं (जूनर या ओजर से होकर ) 85 किलोमीटर की दूरी पर है । ओजर अष्टविनायक सातवें मंदिरके लिए निर्धारित है । मंदिर विघनेश्वर कुकदेश्वर नदी के तट पर ओजर में है। पौराणिक कथा के अनुसार हेमवती के राजा अभिनंदना ने स्वर्ग की गददीपाने के लिए घोर तपस्या की उस की तपस्या में बाधा डालने के लिए इंद्र ने विघनासुर को भेजा। वह संतो और आम जनो को परेशान करने लगा तबगणपति जी ने लोगों के अनुरोध पर विघनासुर का वध इसी स्थान पर किया। जिसके बाद से ये मंदिर विघ्नेश्वर, विघ्नहर्ता और विघ्नहार के रूप में जानाजाने लगा है।

महागणपति मंदिर (राजणगांव)

महागणपति मंदिर पुणे-अहमदनगर राजमार्ग पर 50 किलोमीटर दूरी पे पुणे के रांजणगांव में स्थित है। यह मंदिर इतिहास के अनुसार 9 – 10वीं सदी केबीच माना जाता है। इस मंदिर का प्रवेश द्धार बहुत विशाल और सुंदर है। यहां गणपति की मूर्ति को माहोतक नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता हैकि महागणपति जी की असली मूर्ति मंदिर के अंदर एक तहखाने में रखी गई है. जब भारत पर मुगल हमला कर मंदिरों को लूट रहे थेउस वक्त मंदिर के तहखाने में मूर्ति को छिपा के रख दिया गया था. इस मंदिर का निर्माण भगवान शिव ने कराया था. कहते हैं कित्रिपुरासुर के साथ युद्ध से पहले शिव भगवान ने इस मंदिर में पूजा की थी.

 

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संकट हरण गणेश चतुर्थी व्रत की विधी एवं लाभ https://astrodeeva.com/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%9f-%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%a3-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%9a%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b0/ https://astrodeeva.com/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%9f-%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%a3-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%9a%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b0/#respond Fri, 07 Aug 2020 04:02:01 +0000 https://astrodeeva.com/?p=364 आज भाद्रपद के कृष्ण  पक्ष की चतुर्थी तिथि है | आज से १५ वे दिन बाद गणेश स्थापना होती है , चलिए जानते है की आज कैसे हम गणपति जी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते है | संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत भी आज के दिन ही किया जाएगा |और आने वाली २२ अगस्त को गणेश स्थापना की […]

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आज भाद्रपद के कृष्ण  पक्ष की चतुर्थी तिथि है | आज से १५ वे दिन बाद गणेश स्थापना होती है , चलिए जानते है की आज कैसे हम गणपति जी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते है | संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत भी आज के दिन ही किया जाएगा |और आने वाली २२ अगस्त को गणेश स्थापना की जाएगी , हर भक्त अपने अपने तरीके से और प्रेमपूर्वक इसे करता है |

व्रत की विधि : घर के सभी कार्यों से निर्वित होकर स्नानं आदि से निर्वित होकर घर के मंदिर को साफ करके और फिर एक पाटे पे लाल रंग का आसन देकर उसपे गणेश लक्ष्मी जी को स्थापित करे और व्रत का संकल्प ले। जो लोग व्रत नहीं कर सकते वो लोग भगवान की श्रद्धा पूर्वक पूजा करे गणेश जी की प्रतिमा को स्थापित करके रोली,अक्षत ,मोली ,पुष्प ,लड्डू या खीर से गणपती जी को भोग लगाए और शाम को चंद्रमा को अर्घ देकर ( ध्यान रखें कि चंद्रमा को किसी ओट से देखे जेसे छलनी की सहायता से ) और फिर चंद्रमा को भी रोली और पुष्प अर्पित करे | इस व्रत को घर के बुजुर्ग से लेकर बच्चे तक कर सकते है | 

व्रत के लाभ: इस व्रत के प्रभाव से मनवांछित फल प्राप्त होता है | इससे घर मे सुख सम्रधी मे बढ़ोतररी होती है | अगर आपके बच्चे को अपने करियर मे मनचाही सफलता नहीं मिल पा रही तो आज के दिन गणपती जी को  खीर का भोग लगाए और व्रत रखे और शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही भोजन करे | इस व्रत को विधी पूर्वक करने से गणपती जी हर विघ्न को दूर करते है |

इस लेख में दी गयी जानकरियाँ धार्मिक आस्थाओं और लोकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र जनसमान्यो को ध्यान में रख कर प्रस्तुत किया गया है।

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