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Laabh Panchami 2023 – हिन्दू कैलेंडर का कार्तिक महीना तीज त्योहारों से भरा होता है। इसी माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को लाभ पंचमी या सौभाग्य पंचमी के रूप में मनाया जाता है। Laabh Panchami को सौभाग्य पंचमी, ज्ञान पंचमी और लेचनी पंचमी के नाम से भी जाना जाता है।

वैसे तो लाभ पंचमी का पर्व पूरे भारत में मनाया जाता है परंतु यह गुजरात राज्य का एक लोकप्रिय त्यौहार है। गुजरात में लाभ पंचमी को पाँच दिवसीय दीपावली उत्सव का समापन होता है। गुजराती नव वर्ष दीपावली के दूसरे दिन होता है अतः लाभ पंचमी का दिन गुजराती नववर्ष का पहला कामकाजी दिन होता है। गुजरात में अधिकतर व्यवसायी दिवाली के पश्चात  लाभ पंचमी के दिन वापस अपने काम को प्रारंभ करते हैं। इस दिन भक्त धन और समृद्धि के लिए भगवान शिव, लक्ष्मी जी और भगवान गणेश जी की पूजा अर्चना करते हैं। इसी दिन व्यापारी गण, नया बही खाता प्रारम्भ करते है।

लाभ पंचमी का महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार लाभ पंचमी  दिन भगवान गणेश की उपासना करने से सौभाग्य की प्राप्ती होती है। कार्तिक शुक्ल पंचमी के दिन जो जातक पूरे भक्ति भाव से भगवान शिव, माता लक्ष्मी और गणेश जी को पूजता है उसकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। कुछ जगहों पर दीपावली के दिन नए साल की शुरुआत होती है और सौभाग्य पंचमी वाले दिन व्यापार और कारोबार में तरक्की-विस्तार के लिए शुभ माना जाता है।

Laabh Panchami 2023 दिनांक और शुभ मुहूर्त

दिनांक : 18 नवम्बर 2023
वार: शनिवार
पंचमी तिथि प्रारम्भ : 17 नवम्बर 2023 को 11:03 ए एम बजे
पंचमी तिथि समाप्त : 18 नवम्बर 2023 को 09:18 ए एम बजे
लाभ पंचमी पूजा शुभ मुहूर्त : प्रातःकाल 06:46 ए एम से 10:19 ए एम
अवधि : 03 घण्टे 34 मिनट्स

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Laabh Panchami 2023 पूजन विधि

  • लाभ पंचमी के दिन प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठ कर स्नान आदि से निवृत होकर सर्वप्रथम भगवान सूर्य देव को जलाभिषेक करें।
  • इसके बाद भगवान शिव जी, लक्ष्मी जी और गणेश जी की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित कर पूजा प्रारम्भ करें। गणेश जी की प्रतिमा या तस्वीर ना हो तो सुपारी पर मौली लपेटकर चावल के अष्दल पर श्रीगणेश के रूप में विराजित कर सकते हैं।
  • एक कलश स्थापित कर उसमें द्रव्य, अक्षत आदि डालकर उसको लाल वस्त्र से ढँकें।
  • तत्पश्चात भगवान शिव जी को भस्म, बेलपत्र, धतूरा सफ़ेद अंगोछा अर्पित कर पूजा करें एवम भगवान गणेश जी की पूजा फल, फूल, चन्दन, अक्षत, दूर्वा आदि से करें। भगवान शिव जी को दूध से बने मिष्ठान एवम गणेश जी को मोदक का भोग लगाएं।
  • भोलेनाथ, माता लक्ष्मी और भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए नीचे दिए मंत्रो का जाप करें।

        गणेश मंत्र

         लम्बोदरं महाकायं गजवक्त्रं चतुर्भुजम्। आवाहयाम्यहं देवं गणेशं सिद्धिदायकम्।।

         शिव मंत्र 

          त्रिनेत्राय नमस्तुभ्यं उमादेहार्धधारिणे। त्रिशूलधारिणे तुभ्यं भूतानां पतये नम:।।

         लक्ष्मी गायत्री मंत्र

         ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥

 

  • मन्त्र स्मरण के पश्चात धुप, दीप से आरती करें। आरती सम्पन्न होने पर भगवान से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करें।

इस प्रकार लाभ-पंचमी की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए भगवान शिव जी, माता लक्ष्मी एवं गणेश जी की जय।

 

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Trinetra Ganesh : पूरे विश्व का एक मात्र मंदिर जहाँ है गणेश जी की 3 आँखें, जाने तीसरी आँख का रहस्य https://astrodeeva.com/trinetra-ganesh-is-the-only-temple-in-the-whole-world-where-3-eyes-of-ganesh-ji-know-the-secret-of-third-eye/ https://astrodeeva.com/trinetra-ganesh-is-the-only-temple-in-the-whole-world-where-3-eyes-of-ganesh-ji-know-the-secret-of-third-eye/#comments Thu, 17 Feb 2022 18:59:32 +0000 https://astrodeeva.com/?p=2890 Trinetra Ganesh – त्रिनेत्र गणेश मंदिर भारत के राजस्थान प्रांत में सवाई माधोपुर जिले में स्थित है। यह मंदिर विश्व धरोहर में शामिल “रणथम्भौर दुर्ग” के भीतर बना हुआ है। अरावली और विन्ध्याचल पहाड़ियों के बीच स्थित रणथम्भौर दुर्ग में त्रिनेत्र गणेश मंदिर प्रकृति व आस्था का अनूठा संगम है। यहाँ गणेश जी अपने भक्तों की […]

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Trinetra Ganesh – त्रिनेत्र गणेश मंदिर भारत के राजस्थान प्रांत में सवाई माधोपुर जिले में स्थित है। यह मंदिर विश्व धरोहर में शामिल “रणथम्भौर दुर्ग” के भीतर बना हुआ है। अरावली और विन्ध्याचल पहाड़ियों के बीच स्थित रणथम्भौर दुर्ग में त्रिनेत्र गणेश मंदिर प्रकृति व आस्था का अनूठा संगम है। यहाँ गणेश जी अपने भक्तों की मनोकामना लड्डू, दुर्वा, फल, फूल या पूजा पाठ से नहीं, अपितु चिट्ठी लिखकर चढ़ाने से पूरी करते हैं और भक्तों की अर्जी स्वीकार करते हैं। यहां अर्जी लगाने वाला कभी निराश नहीं होता उसकी मनोकामना पूरी होकर ही रहती है।

देश भर से भक्‍त अपने घर में होने वाले हर मंगल कार्य का पहला निमंत्रण यहां भगवान गणेश के लिए भेजते हैं। इन निमंत्रण पत्रों पर पता लिखा जाता है “श्री गणेश जी, रणथंभौर का किला, जिला- सवाई माधोपुर (राजस्थान)”, और निमंत्रण आराम से गणपति के पास पहुंच जाता है। इतना ही नहीं मंदिर के पुजारी इन निमंत्रण पत्रों को भगवान को पढ़ कर सुनाते भी हैा ताकि भगवान को निमंत्रण भेजने वाले के कार्यक्रम की सूचना मिल जाये।

इस गणेश मंदिर का निर्माण महाराजा हम्मीरदेव चौहान ने करवाया था लेकिन मंदिर के अंदर भगवान गणेश की प्रतिमा स्वयंभू है। इस मंदिर में भगवान गणेश त्रिनेत्र रूप में विराजमान है जिसमें तीसरा नेत्र ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।

विराजमान है गणपति का पूरा परिवार

पूरी दुनिया में यह एक ही मंदिर है जहाँ भगवान गणेश जी अपने पूर्ण परिवार, दो पत्नी- रिद्दि और सिद्दि एवं दो पुत्र- शुभ और लाभ, के साथ विराजमान है। भारत में चार स्वयंभू गणेश मंदिर माने जाते है, जिनमें रणथम्भौर स्थित त्रिनेत्र गणेश जी प्रथम है। इस मंदिर के अलावा सिद्दपुर गणेश मंदिर गुजरात, अवंतिका गणेश मंदिर उज्जैन एवं सिद्दपुर सिहोर मंदिर मध्यप्रदेश में स्थित है।

त्रिनेत्र गणेश प्रतिमा का इतिहास – History Of Trinetra Ganesh

प्रतिमा का इतिहास है कि भगवान राम ने लंका कूच करते समय इसी गणेश का अभिषेक कर पूजन किया था। अत: त्रेतायुग में यह प्रतिमा रणथम्भौर में स्वयंभू रूप में स्थापित हुई और लुप्त हो गई। एक और मान्यता के अनुसार जब द्वापर युग में भगवान कृष्ण का विवाह रूकमणी से हुआ था तब भगवान कृष्ण गलती से गणेश जी को बुलाना भूल गए जिससे भगवान गणेश नाराज हो गए और अपने मूषक को आदेश दिया की विशाल चूहों की सेना के साथ जाओं और कृष्ण के रथ के आगे सम्पूर्ण धरती में बिल खोद डालो। इस प्रकार भगवान कृष्ण का रथ धरती में धँस गया और आगे नहीं बढ़ पाये। मूषकों के बताने पर भगवान श्रीकृष्ण को अपनी गलती का अहसास हुआ और रणथम्भौर स्थित जगह पर गणेश को लेने वापस आए, तब जाकर कृष्ण का विवाह सम्पन्न हुआ। तब से भगवान गणेश को विवाह व मांगलिक कार्यों में प्रथम आमंत्रित किया जाता है। यही कारण है कि रणथम्भौर गणेश को भारत का प्रथम गणेश कहते है।

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तीसरे नेत्र की मान्यता

रणथम्भौर स्थित त्रिनेत्र गणेश जी दुनिया के एक मात्र गणेश है जो तीसरा नयन धारण करते है। गजवंदनम् चितयम् में विनायक के तीसरे नेत्र का वर्णन किया गया है, लोक मान्यता है कि भगवान शिव ने अपना तीसरा नेत्र उत्तराधिकारी स्वरूप सौम पुत्र गणपति को सौंप दिया था और इस तरह महादेव की सारी शक्तियाँ गजानन में निहित हो गई।महागणपति षोड्श स्त्रौतमाला में विनायक के सौलह विग्रह स्वरूपों का वर्णन है। महागणपति अत्यंत विशिष्ट व भव्य है जो त्रिनेत्र धारण करते है, इस प्रकार ये माना जाता है कि रणथम्भौर के रणतभंवर महागणपति का ही स्वरूप है।

त्रिनेत्र गणेश मंदिर कैसे पहुंचे ? – How to Reach Trinetra Ganesh Temple Ranthambore Rajasthan

त्रिनेत्र गणेश मंदिर सवाई माधोपुर जिले में स्थित है, यहाँ पर ट्रेन और बस द्वारा देश के अन्य क्षेत्रों से काफी आसानी से पहुंचना जा सकता है। तो आइए जानते हैं कि फ्लाइट, ट्रेन और बस से त्रिनेत्र गणेश मंदिर कैसे पहुंचे ?

हवाई जहाज से –By Flight

रणथंबोर में स्थित त्रिनेत्र गणेश मंदिर का नजदीकी हवाई अड्डा जयपुर में है, जो इस मंदिर से करीब 182 किमी. की दूरी पर स्थित है। जयपुर एयरपोर्ट से आप टैक्सी बस या ट्रेन द्वारा सवाई माधोपुर आ सकते हैं और वहां से आपको त्रिनेत्र गणेश मंदिर जाने के लिए कैब की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, जिससे आप मंदिर में आसानी से पहुंच सकते हैं।

ट्रेन से कैसे पहुंचे ? – By Train

निकटतम रेलवे स्टेशन सवाई माधोपुर है, जहां पर आप देश के प्रमुख शहरों से ट्रेन द्वारा पहुंच सकते हैं और वहां से कैब द्वारा त्रिनेत्र गणेश मंदिर तक जा सकते हैं।

बस कैसे पहुंचे– By Bus

गणेश जी के इस मंदिर का सबसे नजदीकी बस स्टैंड सवाई माधोपुर है, जहां आने के लिए राजस्थान के अन्य क्षेत्रों से रेगुलर बसें चलती हैं।

मैं आशा करता हूं कि इस जानकारी से आपको त्रिनेत्र गणेश मंदिर के बारे में कुछ बातें जानने को मिली होगी। अन्य तीर्थ स्थलों के बारे में जानने के लिए आप हमारे वेबसाइट के कैटेगरी को चेक आउट करना ना भूलें।

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Ganesh Visarjan 2021: गणेश विसर्जन कब, कैसे, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि https://astrodeeva.com/ganesh-visarjan-2021-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b6%e0%a5%81/ https://astrodeeva.com/ganesh-visarjan-2021-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b6%e0%a5%81/#respond Sun, 12 Sep 2021 06:58:17 +0000 https://astrodeeva.com/?p=2411 Ganesh Visarjan 2021: गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश जी की स्थापना पूरे देश में धूम-धाम से की जाएगी और 10 दिन के गणेशोत्सव का आरम्भ हो जाएगा। इस वर्ष COVID-19 के कारण पंडालो ने श्रधालुओ की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उत्सव के दौरान ऑनलाइन दर्शन की व्यवस्था की है। गणेशोत्सव में गणेश चतुर्थी पर […]

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Ganesh Visarjan 2021: गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश जी की स्थापना पूरे देश में धूम-धाम से की जाएगी और 10 दिन के गणेशोत्सव का आरम्भ हो जाएगा। इस वर्ष COVID-19 के कारण पंडालो ने श्रधालुओ की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उत्सव के दौरान ऑनलाइन दर्शन की व्यवस्था की है।

गणेशोत्सव में गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश जी की स्थापना का जितना महत्व है उतना ही भगवान गणेश जी के विसर्जन को महत्व दिया जाता है। भक्त जन भगवान गणेश जी को अपने घर डेढ़, तीन, पांच, सात या ग्यारह दिनों तक विराजित करते हैं और उनकी यथा शक्ति पूरे विधी विधान से पूजा करते हैं। उसके बाद भगवान गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन तिथि के अनुसार किया जाता है और प्रार्थना की जाती है की भगवान गणेश इसी तरह अगले साल भी आएं और सब को आशीर्वाद प्रदान करें।गणेशोत्सव में

गणेश विसर्जन की कथा ( Story of Ganesh Visarjan)

पौराणिक कथा के अनुसार वेद व्यास जी ने लगातार दस दिनो तक भगवान गणेश जी को गणेश चतुर्थी से लेकर महाभारत तक की कथा सुनाई और गणेश जी इसे लगातार लिखा। दसवें दिन जब वेद व्यास जी ने अपने नेत्र खोले तो पाया कि गणेश जी का शरीर तप रहा है, जिसके बाद वेद व्यास जी ने पास के सरोवर के जल से गणेश जी के शरीर को ठंडा किया था। इसी वजह से चतुर्दशी के दिन जल में प्रवाहित किया जाता है।

Also Read- भगवान गणेश ने मूषक को अपना वाहन क्यों चुना?

गणेश विसर्जन तिथि एवं शुभ मुहूर्त (Auspicious Time Of Ganesh Visarjan )

गणेशोत्सव  का प्रारम्भ चतुर्थी से होता है एवं इसका समापन चतुर्दशी तिथि के दिन होता है। गणेश विसर्जन के लिए अनन्त चतुर्दशी तिथि सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है परंतु आज कल की भाग दौड़ भरी दिनचर्या में पूरे 10 दिनो के लिए घर में विराजमान करना और उनकी पूरे विधी विधान से पूजा अर्चना करना आम इंसान के लिए मुश्किल है इसलिए लोग अपने सामर्थ्य के अनुसार डेढ़, तीन, पांच, सात या ग्यारह दिनों तक  गणेश जी को विराजित करते हैं और उनकी यथा शक्ति पूरे विधी विधान से पूजा करते हैं। उसके बाद भगवान गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है।

डेढ़ दिन के बाद गणेश विसर्जन 

जो भक्त अगले दिन गणेश विसर्जन करते हैं, वे गणेश पूजा करने के बाद प्रतिमा को मध्याह्न के अगले पहर विसर्जित करते हैं। चूँकि, गणेश स्थापना चतुर्थी तिथि के दिन मध्याह्न में होती है, और विसर्जन, मध्याह्न के बाद, इसलिए इसे डेढ़ दिन में गणेश विसर्जन कहा जाता है।

एक और आधा दिन (डेढ़ दिन) के बाद गणेश विसर्जन शनिवार, 11 सितम्बर 2021 को

गणेश विसर्जन के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त अपराह्न मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) – 12:17 पी एम से 04:58 पी एम सायाह्न मुहूर्त (लाभ) – 06:31 पी एम से 07:58 पी एम रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) – 09:24 पी एम से 01:44 ए एम, 12 सितम्बर उषाकाल मुहूर्त (लाभ) – 04:38 ए एम से 06:04 ए एम, 12 सितम्बर 

तीसरे दिन गणेश विसर्जन 

तीसरे दिन गणेश विसर्जन रविवार , 12 सितम्बर 2021 को

गणेश विसर्जन के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त

प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) – 07:38 ए एम से 12:17 पी एम
अपराह्न मुहूर्त (शुभ) – 01:50 पी एम से 03:23 पी एम
सायाह्न मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) – 06:30 पी एम से 10:50 पी एम
रात्रि मुहूर्त (लाभ) – 01:44 ए एम से 03:11 ए एम, 13 सितम्बर 
उषाकाल मुहूर्त (शुभ) – 04:38 ए एम से 06:05 ए एम, 13 सितम्बर 

पांचवे दिन गणेश विसर्जन 

पांचवें दिन गणेश विसर्जन मंगलवार, 14 सितम्बर 2021 को

गणेश विसर्जन के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त

प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) – 09:11 ए एम से 01:49 पी एम
अपराह्न मुहूर्त (शुभ) – 03:22 पी एम से 04:55 पी एम
सायाह्न मुहूर्त (लाभ) – 07:55 पी एम से 09:22 पी एम
रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) – 10:49 पी एम से 03:11 ए एम, 15 सितम्बर 

सातवे दिन गणेश विसर्जन 

सातवें दिन गणेश विसर्जन बृहस्पतिवार, 16 सितम्बर 2021 को

गणेश विसर्जन के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त

प्रातः मुहूर्त (शुभ) – 06:06 ए एम से 07:39 ए एम
प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) – 10:43 ए एम से 03:20 पी एम
अपराह्न मुहूर्त (शुभ) – 04:53 पी एम से 06:25 पी एम
सायाह्न मुहूर्त (अमृत, चर) – 06:25 पी एम से 09:20 पी एम
रात्रि मुहूर्त (लाभ) – 12:16 ए एम से 01:44 ए एम, सितम्बर 17

अनन्त चतुर्दशी पर गणेश जी का विसर्जन 

अनन्त चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन रविवार, 19 सितम्बर 2021 को

गणेश विसर्जन के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त

प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) – 07:40 ए एम से 12:15 पी एम
अपराह्न मुहूर्त (शुभ) – 01:46 पी एम से 03:18 पी एम
सायाह्न मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) – 06:21 पी एम से 10:46 पी एम
रात्रि मुहूर्त (लाभ) – 01:43 ए एम से 03:12 ए एम, सितम्बर 20
उषाकाल मुहूर्त (शुभ) – 04:40 ए एम से 06:08 ए एम, सितम्बर 20
 
चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ – 19 सितम्बर 2021 को 05:59 ए एम बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त – 20 सितम्बर 2021 को 05:28 ए एम बजे

गणेश विसर्जन पूजा विधि ( Ganesh Visarjan Pooja Vidhi)

1. विसर्जन से पहले उनका तिलक किया जाता है।

2. उसके बाद उन्हें फूलों का हार, फल, फूल,मोदक लड्डू आदि चढ़ाए जाते हैं।

3.इसके बाद भगवान गणेश के मंत्रों का उच्चारण किया जाता है और उनकी आरती उतारी जाती है।

4. उपर्युक्त प्रकार पूजा करने के बाद, पूजा में उपस्थित सभी बालक-पुरुष-महिलाएँ अपने हाथों में पुष्प लेकर भगवान गणेश, महा-लक्ष्मी, महा-काली, महा-सरस्वती, कुबेर की जय-जयकार बोलें तथा छोटे-बड़े के क्रम से उनके सम्मुख पुष्प अर्पित करते हुए दण्डवत् प्रणाम करें।

5.भगवान गणेश को पूजा में जो भी सामग्री चढ़ाई जाती है। उसे एक पोटली में बांध लिया जाता है। 6. इस पोटली में सभी सामग्री के साथ एक सिक्का भी रखा जाता है और उसके बाद गणेश जी का विसर्जन कर दिया जाता है। भगवान गणेश के विसर्जन के साथ ही इस पोटली को भी बहा दिया जाता है।

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अष्टविनायक दर्शन https://astrodeeva.com/%e0%a4%85%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%a8/ https://astrodeeva.com/%e0%a4%85%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%a8/#respond Thu, 27 Aug 2020 11:37:15 +0000 https://astrodeeva.com/?p=575 The post अष्टविनायक दर्शन appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.

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अष्‍टविनायक मंदिरों के दर्शन, मिलेगा विघ्‍नहर्ता का आर्शिवाद https://astrodeeva.com/%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%b5-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%b7/ https://astrodeeva.com/%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%b5-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%b7/#comments Wed, 19 Aug 2020 19:56:17 +0000 https://astrodeeva.com/?p=495 देश भर में अनेक प्रसिद्ध गणेश मंदिर हैं और गणपति महोत्सव के मौके पर उन सब मंदिरो में दर्शनो के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। अब हमआपको गणेश जी के 8 मंदिरो के बारे में बता रहें जो बहुत प्राचीन है। महाराष्ट्र के पुणे के विभिन्न स्थानो में गणेश जी के आठ मंदिर हैं, इन्हें अष्टविनायक कहा जाता है। इन मंदिरों में गणेश जी की स्वयंभू (अपने आप प्रकट हुई) प्रतिमा है और कहा जाता है की यहाँ भगवान गणेश स्वयं विराजते हैं और इन अष्ट स्वरूप के दर्शन मात्र से कई जन्मों का पुण्य मिलता है। गणपति महोत्सव के मौके पर अष्टविनायक यात्रा का अपना महत्व है। पुणे के आस-पास स्थित गणपति जी के आठ स्वयभू मंदिरों के दर्शन के लिए यूंतो हमेशा ही श्रद्धालुओं की भीड़ रहती हैं, लेकिन गणेशोत्सव के दौरान यहां का माहौल अलग ही निराला होता है। इन अष्टविनायकों के साथ कईदिलचस्प कहानियां जुड़ी हुई हैं। माना जाता है कि ब्रह्मा जी के वरदान के बाद श्री गणेश ने हर युग में अलग-अलग रुपों में अवतार लिया और लोगोंको आशीर्वाद दिया।  ।। अष्टविनायक मंत्र ।। स्वस्ति श्रीगणनायकं गजमुखं मोरेश्वरं सिद्धिदम् ॥१॥बल्लाळं मुरुडे विनायकमहं चिन्तामणिं थेवरे ॥२॥लेण्याद्रौ गिरिजात्मजं सुवरदं विघ्नेश्वरं ओझरे ॥३॥ग्रामे रांजणनामके गणपतिं कुर्यात् सदा मङ्गलम् ॥४॥ श्री मयूरेश्वर मंदिर (मोरगांव, पुणे) मयूरेश्वर (मोरेश्वर) मंदिर पुणे से ८० किलोमीटर मोरगाँव में स्थित है। इस मंदिर के चारों कोनों में मीनारें और दीवारें हैं। यहाँ चार द्वार हैं जो चारों युग ( सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग) के प्रतीक हैं। यहाँ गणेशजी बैठी हुई मुद्रा  विराजमान  है। कहते हैं कि इसी स्‍थान पर गणेश जी नेसिंधुरासुर नाम के राक्षस का वध मोर पर सवार होकर उससे युद्ध करते हुए किया था। इसी कारण उनको मयूरेश्वर कहा जाता है। ये भी पढ़े : Ganesh Chaturthi 2020: घर में गणपति स्थापना, जानें शुभ मुहूर्त एवं पूजन विधि सिद्धिविनायक मंदिर (करजत तहसील, अहमदनगर)  सिद्धिविनायक मंदिर पुणे से 200 किलोमीटर सिद्धटेक गाँव में स्थित है। सिद्धिविनायक अष्टविनायक में दूसरे गणेश हैं। पौराणिक मन्यताओ के अनुसारयहाँ भगवान विष्णु ने सिद्धियाँ प्राप्त की थी। यह मंदिर एक पहाड़ की चोटी पर स्थित है जिससे इस मंदिर की परिक्रमा करने के लिए पहाड़ कीपरिक्रमा करनी होती हैं। श्री बल्लालेश्वर मंदिर (पाली गाँव, रायगढ़) श्री बल्लालेश्वर मंदिर गोवा राजमार्ग पर नागोथाने से पहले से 11 किलोमीटर, मुंबई पुणे हाइवे बांद, पाली से टोयन में स्थित है। प्राचीन काल मेंबल्लाल नामक एक बालक था, वह गणेश जी का परमभक्त था उसने एक दिन पाली गाँव में विशेष पूजा का आयोजन किया और सभी बच्चों कोआमंत्रित किया। पूजा कई दिनों तक चली और बच्चों ने पूजा पूर्ण होने से पहले घर लोटने से माना कर दिया इससे बच्चों के माता पिता ने नाराजहोकर बल्लाल के पिता कल्याणी सेठ से शिकायत की तो उन्होंने जगंल जाकर जहाँ पूजा चल रही वहाँ बल्लाल को पीटा और गणेश जी की मुर्ती केसाथ उसे भी जंगल में फेंक दिया। बल्लाल गंभीर हालत में भी भगवान गणेश जी की पूजा करता रहा। इस भक्ति से प्रसन्न होकर गणेश जी ने उसेदर्शन दिए और वरदान माँगने को कहा, तब बल्लाल ने गणेश जी से आग्रह किया अब वे इसी स्थान पर निवास करें। तब से गणपति यहां निवास करने लगे। श्री वरदविनायक (कोल्हापुर, रायगढ़) श्री वरदविनायक का मंदिर महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में कोल्हापुर क्षेत्र के महाड़ में स्थित हैं। मान्यता है कि वरदविनायक गणेश अपने नाम के समानसभी भक्तों की मनोकामन पूर्ण करते हैं। इस मंदिर में नंददीप नाम का दीपक निरंतर वर्षों से प्रज्जवलित है। चिंतामणि गणपति (थेऊर गांव, पुणे) चिंतामणि गणपति मंदिर पुणे जिले के हवेली तालुका में स्थित है। इस मंदिर के निकट तीन नदियों (भीम, मूला और मुथा) का संगम है। मान्यता है किभगवान ब्रमहा जी ने अपने विचलित मन को शांत करने के लिए इसी स्थान पर तपस्या की थी। अगर आपका मन विचलित रहता हो और चिंताएंआपको घेरे रहती हों तो आप थेयूर आएं और श्री चिंतामणि गणपति की पूजा करें सभी चिंताओं से मुक्ति मिल जाएगी।  ये भी पढ़े: Ganesh Visarjan 2021: गणेश विसर्जन कब, कैसे, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि श्री गिरजात्मज गणपति (लेण्याद्री गांव, पुणे) गिरजात्मज गणेश मंदिर पुणे-नासिक राजमार्ग पर पुणे से 90 किलोमीटर लेण्याद्री गांव में स्थित है। यह एक पहाड़ पर है और बौद्ध गुफाओं के स्थान पर बनाया गया है। इस पहाड़ पर १८ बौद्ध गुफाएँ हैं जिसमें से ८वीं गुफा में गिरजात्मजविनायक मंदिर है। मंदिर तक पहुंचने के लिए 307 सिढ़ियों चढ़नी पड़ती हैं । पूरा मंदिर ही एक बड़े पत्थर को काट कर बनाया गया है । मंदिर कामुख्य द्वार दक्षिण की ओर है। विघ्नेश्वर गणपति मंदिर (ओझर)  विघ्नेश्वर गणपति मंदिर पुणे नासिक रोड पर नारायणगावं (जूनर या ओजर […]

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देश भर में अनेक प्रसिद्ध गणेश मंदिर हैं और गणपति महोत्सव के मौके पर उन सब मंदिरो में दर्शनो के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। अब हमआपको गणेश जी के 8 मंदिरो के बारे में बता रहें जो बहुत प्राचीन है।

महाराष्ट्र के पुणे के विभिन्न स्थानो में गणेश जी के आठ मंदिर हैं, इन्हें अष्टविनायक कहा जाता है। इन मंदिरों में गणेश जी की स्वयंभू (अपने आप प्रकट हुई) प्रतिमा है और कहा जाता है की यहाँ भगवान गणेश स्वयं विराजते हैं और इन अष्ट स्वरूप के दर्शन मात्र से कई जन्मों का पुण्य मिलता है।

गणपति महोत्सव के मौके पर अष्टविनायक यात्रा का अपना महत्व है। पुणे के आस-पास स्थित गणपति जी के आठ स्वयभू मंदिरों के दर्शन के लिए यूंतो हमेशा ही श्रद्धालुओं की भीड़ रहती हैं, लेकिन गणेशोत्सव के दौरान यहां का माहौल अलग ही निराला होता है। इन अष्टविनायकों के साथ कईदिलचस्प कहानियां जुड़ी हुई हैं। माना जाता है कि ब्रह्मा जी के वरदान के बाद श्री गणेश ने हर युग में अलग-अलग रुपों में अवतार लिया और लोगोंको आशीर्वाद दिया। 

।। अष्टविनायक मंत्र ।।


स्वस्ति श्रीगणनायकं गजमुखं मोरेश्वरं सिद्धिदम् ॥१॥
बल्लाळं मुरुडे विनायकमहं चिन्तामणिं थेवरे ॥२॥
लेण्याद्रौ गिरिजात्मजं सुवरदं विघ्नेश्वरं ओझरे ॥३॥
ग्रामे रांजणनामके गणपतिं कुर्यात् सदा मङ्गलम् ॥४॥

श्री मयूरेश्वर मंदिर (मोरगांव, पुणे)

मयूरेश्वर (मोरेश्वर) मंदिर पुणे से ८० किलोमीटर मोरगाँव में स्थित है। इस मंदिर के चारों कोनों में मीनारें और दीवारें हैं। यहाँ चार द्वार हैं जो चारों युग ( सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग) के प्रतीक हैं। यहाँ गणेशजी बैठी हुई मुद्रा  विराजमान  है। कहते हैं कि इसी स्‍थान पर गणेश जी नेसिंधुरासुर नाम के राक्षस का वध मोर पर सवार होकर उससे युद्ध करते हुए किया था। इसी कारण उनको मयूरेश्वर कहा जाता है।

ये भी पढ़े : Ganesh Chaturthi 2020: घर में गणपति स्थापना, जानें शुभ मुहूर्त एवं पूजन विधि

सिद्धिविनायक मंदिर (करजत तहसील, अहमदनगर) 

सिद्धिविनायक मंदिर पुणे से 200 किलोमीटर सिद्धटेक गाँव में स्थित है। सिद्धिविनायक अष्टविनायक में दूसरे गणेश हैं। पौराणिक मन्यताओ के अनुसारयहाँ भगवान विष्णु ने सिद्धियाँ प्राप्त की थी। यह मंदिर एक पहाड़ की चोटी पर स्थित है जिससे इस मंदिर की परिक्रमा करने के लिए पहाड़ कीपरिक्रमा करनी होती हैं।

श्री बल्लालेश्वर मंदिर (पाली गाँव, रायगढ़)

श्री बल्लालेश्वर मंदिर गोवा राजमार्ग पर नागोथाने से पहले से 11 किलोमीटर, मुंबई पुणे हाइवे बांद, पाली से टोयन में स्थित है। प्राचीन काल मेंबल्लाल नामक एक बालक था, वह गणेश जी का परमभक्त था उसने एक दिन पाली गाँव में विशेष पूजा का आयोजन किया और सभी बच्चों कोआमंत्रित किया। पूजा कई दिनों तक चली और बच्चों ने पूजा पूर्ण होने से पहले घर लोटने से माना कर दिया इससे बच्चों के माता पिता ने नाराजहोकर बल्लाल के पिता कल्याणी सेठ से शिकायत की तो उन्होंने जगंल जाकर जहाँ पूजा चल रही वहाँ बल्लाल को पीटा और गणेश जी की मुर्ती केसाथ उसे भी जंगल में फेंक दिया। बल्लाल गंभीर हालत में भी भगवान गणेश जी की पूजा करता रहा। इस भक्ति से प्रसन्न होकर गणेश जी ने उसेदर्शन दिए और वरदान माँगने को कहा, तब बल्लाल ने गणेश जी से आग्रह किया अब वे इसी स्थान पर निवास करें। तब से गणपति यहां निवास करने लगे।

श्री वरदविनायक (कोल्हापुर, रायगढ़)

श्री वरदविनायक का मंदिर महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में कोल्हापुर क्षेत्र के महाड़ में स्थित हैं। मान्यता है कि वरदविनायक गणेश अपने नाम के समानसभी भक्तों की मनोकामन पूर्ण करते हैं। इस मंदिर में नंददीप नाम का दीपक निरंतर वर्षों से प्रज्जवलित है।

चिंतामणि गणपति (थेऊर गांव, पुणे)

चिंतामणि गणपति मंदिर पुणे जिले के हवेली तालुका में स्थित है। इस मंदिर के निकट तीन नदियों (भीम, मूला और मुथा) का संगम है। मान्यता है किभगवान ब्रमहा जी ने अपने विचलित मन को शांत करने के लिए इसी स्थान पर तपस्या की थी। अगर आपका मन विचलित रहता हो और चिंताएंआपको घेरे रहती हों तो आप थेयूर आएं और श्री चिंतामणि गणपति की पूजा करें सभी चिंताओं से मुक्ति मिल जाएगी। 

ये भी पढ़े: Ganesh Visarjan 2021: गणेश विसर्जन कब, कैसे, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

श्री गिरजात्मज गणपति (लेण्याद्री गांव, पुणे)

गिरजात्मज गणेश मंदिर पुणे-नासिक राजमार्ग पर पुणे से 90 किलोमीटर लेण्याद्री गांव में स्थित है। यह एक पहाड़ पर है और बौद्ध गुफाओं के स्थान पर बनाया गया है। इस पहाड़ पर १८ बौद्ध गुफाएँ हैं जिसमें से ८वीं गुफा में गिरजात्मजविनायक मंदिर है। मंदिर तक पहुंचने के लिए 307 सिढ़ियों चढ़नी पड़ती हैं । पूरा मंदिर ही एक बड़े पत्थर को काट कर बनाया गया है । मंदिर कामुख्य द्वार दक्षिण की ओर है।

विघ्नेश्वर गणपति मंदिर (ओझर) 

विघ्नेश्वर गणपति मंदिर पुणे नासिक रोड पर नारायणगावं (जूनर या ओजर से होकर ) 85 किलोमीटर की दूरी पर है । ओजर अष्टविनायक सातवें मंदिरके लिए निर्धारित है । मंदिर विघनेश्वर कुकदेश्वर नदी के तट पर ओजर में है। पौराणिक कथा के अनुसार हेमवती के राजा अभिनंदना ने स्वर्ग की गददीपाने के लिए घोर तपस्या की उस की तपस्या में बाधा डालने के लिए इंद्र ने विघनासुर को भेजा। वह संतो और आम जनो को परेशान करने लगा तबगणपति जी ने लोगों के अनुरोध पर विघनासुर का वध इसी स्थान पर किया। जिसके बाद से ये मंदिर विघ्नेश्वर, विघ्नहर्ता और विघ्नहार के रूप में जानाजाने लगा है।

महागणपति मंदिर (राजणगांव)

महागणपति मंदिर पुणे-अहमदनगर राजमार्ग पर 50 किलोमीटर दूरी पे पुणे के रांजणगांव में स्थित है। यह मंदिर इतिहास के अनुसार 9 – 10वीं सदी केबीच माना जाता है। इस मंदिर का प्रवेश द्धार बहुत विशाल और सुंदर है। यहां गणपति की मूर्ति को माहोतक नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता हैकि महागणपति जी की असली मूर्ति मंदिर के अंदर एक तहखाने में रखी गई है. जब भारत पर मुगल हमला कर मंदिरों को लूट रहे थेउस वक्त मंदिर के तहखाने में मूर्ति को छिपा के रख दिया गया था. इस मंदिर का निर्माण भगवान शिव ने कराया था. कहते हैं कित्रिपुरासुर के साथ युद्ध से पहले शिव भगवान ने इस मंदिर में पूजा की थी.

 

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Ganesh Chaturthi 2020: घर में गणपति स्थापना, जानें शुभ मुहूर्त एवं पूजन विधि https://astrodeeva.com/ganesh-chaturthi-2020-%e0%a4%98%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%be/ https://astrodeeva.com/ganesh-chaturthi-2020-%e0%a4%98%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%be/#respond Tue, 18 Aug 2020 02:19:21 +0000 https://astrodeeva.com/?p=479 श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा | निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा || अर्थ – घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर काय, करोड़ सूर्य के समान महान प्रतिभाशाली।मेरे प्रभु, हमेशा मेरे सारे कार्य बिना विघ्न के पूरे करने की कृपा करें॥ हिन्दू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को पूरे देश में गणेश […]

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श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा |

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा ||

अर्थ – घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर काय, करोड़ सूर्य के समान महान प्रतिभाशाली।
मेरे प्रभु, हमेशा मेरे सारे कार्य बिना विघ्न के पूरे करने की कृपा करें॥

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को पूरे देश में गणेश चतुर्थी पर्व मनाया जाता हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र गणेश जी का जन्म भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन ही हुआ था , इसलिए इस दिन गणेश चतुर्थी या विनायक चतुर्थी का पर्व मनाया जाता हैं। इस वर्ष गणेश चतुर्थी 22 अगस्त 2020 , शनिवार को है। इस दिन लोग बप्पा का घर में स्वागत करते हैं और गणेश प्रतिमा की स्थापना कर के अगले ११ दिनो तक अपने सामर्थ के अनुसार विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं।

आम तौर पर 7 से 10 दिन के लिए भगवान गणेश जी की स्थापना करने की मान्यता है परंतु आज कल की अति व्यस्त दिनचर्या में यह बहुत मुश्किल है क्यूँकि गणपति जी की विधि-विधान से स्थापना नहीं करने पर विराजमान नहीं होते हैं और न ही उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है, इसलिए लोंग अपने सामर्थ के अनुसार 1.5 , 3, 5, 7, 10 दिन के लिए गणपति जी को अपने घर और दुकान में विराजमान करते हैं और विधि-विधान से पूजा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

आइये अब हम आप को बताते हैं की कैसे आप भी अपने घर में पूरे विधि-विधान से गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर सकते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

 गणपति स्थापना और पूजा मुहूर्त 

ऐसा माना जाता है की भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल के दौरान हुआ था इसीलिए मध्याह्न के समय को गणेश पूजा के लिए उपयुक्त माना जाता है। 

मध्याहन गणेश पूजा मुहूर्त – सुबह 11 बजकर 07 मिनट से 01 बजकर 41 मिनट दोपहर तक (अभिजित मुहूर्त : 11:58 AM से  12:41PM )

वर्जित चन्द्रदर्शन का समय – सुबह 9 बजकर 07 मिनट से रात 09 बजकर 26 मिनट तक

चतुर्थी तिथि आरम्भ – 21 अगस्त शुक्रवार 11 बजकर 02 मिनट पर

चतुर्थी तिथि समाप्त – 22 अगस्त शनिवार – शाम 07 बजकर 57 मिनट तक

ये भी पढ़ें : संकट हरण गणेश चतुर्थी व्रत की विधी एवं लाभ 

 गणेश पूजन / गणपति पूजन सामग्री

आवश्यक सामग्री : शुद्ध जल, गंगाजल, सिन्दूर, रोली, मौली , कपूर, घी, दही, शहद, दूर्वा , चीनी, पुष्प, पान, सुपारी, रूई, प्रसाद (मोदक / लड्डू गणेश जी को बहुत प्रिय है), पंचामृत, वस्त्र, जनेऊ, सुगंध( इत्र ), लाल चन्दन, अक्षत(चावल), पुष्प माला, सुगन्धित तेल, धूपबत्ती, दीपक इत्यादि |

 गणेश / गणपति पूजन विधि

गणेश चतुर्थी के दिन प्रात:काल स्नानादि से निवृत होकर गणेश पूजन की तैयारी करनी चाहिए | गणेश पूजन से पहले ध्यान रहे की गणेश जी की मूर्ति विराजमान या स्थापित करे | मूर्ति सोने, तांबे, चाँदी, मिट्टी या गाय के गोबर (अपने सामर्थ्य अनुसार) से बनाई जाती है | गणेश मूर्ति व गणपति पूजन सामग्री पूजा की थाली में रख कर पूजा विधि शुरू करे |

  • गणेश जी की मूर्ती सामने रखकर और श्रद्धा पूर्वक उस पर पुष्प छोड़े यदि मूर्ती न हो तो सुपारी पर मौली लपेटकर चावल पर स्थापित करें |
  • गणपति मूर्ति स्थापित करने के बाद गणेश जी को दूध, दही, घी,शहद, चीनी, पंचामृत, शुद्ध जल व गंगा जल से स्नान करवाए व वस्त्र अर्पित करे |
  • गणेश मूर्ति पर सुंगंधित तेल या इत्र छिड़क कर लाल चन्दन, रोली व सिंदूर से तिलक करे |
  • गणेश जी को आभूषण व पुष्प माला पहनाकर फूल व दूर्वा उनकी प्रतिमा पर अप्रीत करे |
  • घी का दीपक व धुप – अगरबत्ती करे |
  • और अब गणेश जी को मोदक / लड्डू का भोग लगाकर आरती करे | 

क्षमा-प्रार्थना मन्त्र

पूजा एवं आरती के बाद परिक्रमा करें और क्षमा मांगें कि पूजा में कोई भी कमी या भूल हुई तो उसके लिए माफ करें।

गणेशपूजने कर्म यत् न्यूनमधिकम कृतम।

तेन सर्वेण सर्वात्मा प्रसन्न अस्तु गणपति सदा मम।।

 इस प्रकार आप अपने घर पर गणपति जी की विधि विधान से स्थापना करें । 

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गणेश गायत्री मंत्र

ॐ एकदन्ताय विद्धमहे, वक्रतुण्डाय धीमहि
तन्नो दन्ति प्रचोदयात ||

 यह भगवान श्री गणेश का गायत्री मंत्र है इसमें कहा गया है कि हम उस परमात्मा स्वरुप एकदंत यानि एक दांत वाले भगवान श्री गणेश, जो कि सर्वव्यापी हैं, जिनकी सूंड हाथी के सूंड की तरह मुड़ी हुई है उनसे प्रार्थना करते हैं एवं सद्बुद्धि की कामना करते हैं। हम भगवान श्री गणेश को नमन करते हैं एवं प्रार्थना करते हैं कि वे अपने आशीर्वाद से हमारे मन-मस्तिष्क से अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान से प्रकाशित करें।

 जरूरी बात:

  1. गणेश जी की पूजा में तुलसी के पत्तों का कतई प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  2. गणेश चतुर्थी को चंद्र दर्शन नहीं किये जाते क्योंकि पौराणिक कथा के अनुसार भगवान गणेश ने चंद्रमा को श्राप दिया था। श्राप के मुताबिक गणेश जी ने कहा था कि आज के दिन जो भी चंद्रमा देखेगा उस पर कलंक लगेगा। इतना ही नहीं, कृष्ण जी पर भी शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन चांद देखने के कारण मणि चोरी करने का कलंक लगा था। तो अगर आप भी गणपति जी की स्थापना करने वाले हैं तो इस दिन बिल्कुल भी चंद्रमा ना देखें।
  3. घर में गणेश जी की स्थापना कर रहे हैं तो सुबह-शाम भगवान गणेश जी की पूजा-अर्चना  करें, भोग लगाएं और आरती करें। भगवान गणेश आपके घर में मेहमान बनकर आए हैं तो उनकी आवभगत में कोई कमी न होने दें।

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संकट हरण गणेश चतुर्थी व्रत की विधी एवं लाभ https://astrodeeva.com/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%9f-%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%a3-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%9a%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b0/ https://astrodeeva.com/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%9f-%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%a3-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%9a%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b0/#respond Fri, 07 Aug 2020 04:02:01 +0000 https://astrodeeva.com/?p=364 आज भाद्रपद के कृष्ण  पक्ष की चतुर्थी तिथि है | आज से १५ वे दिन बाद गणेश स्थापना होती है , चलिए जानते है की आज कैसे हम गणपति जी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते है | संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत भी आज के दिन ही किया जाएगा |और आने वाली २२ अगस्त को गणेश स्थापना की […]

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आज भाद्रपद के कृष्ण  पक्ष की चतुर्थी तिथि है | आज से १५ वे दिन बाद गणेश स्थापना होती है , चलिए जानते है की आज कैसे हम गणपति जी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते है | संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत भी आज के दिन ही किया जाएगा |और आने वाली २२ अगस्त को गणेश स्थापना की जाएगी , हर भक्त अपने अपने तरीके से और प्रेमपूर्वक इसे करता है |

व्रत की विधि : घर के सभी कार्यों से निर्वित होकर स्नानं आदि से निर्वित होकर घर के मंदिर को साफ करके और फिर एक पाटे पे लाल रंग का आसन देकर उसपे गणेश लक्ष्मी जी को स्थापित करे और व्रत का संकल्प ले। जो लोग व्रत नहीं कर सकते वो लोग भगवान की श्रद्धा पूर्वक पूजा करे गणेश जी की प्रतिमा को स्थापित करके रोली,अक्षत ,मोली ,पुष्प ,लड्डू या खीर से गणपती जी को भोग लगाए और शाम को चंद्रमा को अर्घ देकर ( ध्यान रखें कि चंद्रमा को किसी ओट से देखे जेसे छलनी की सहायता से ) और फिर चंद्रमा को भी रोली और पुष्प अर्पित करे | इस व्रत को घर के बुजुर्ग से लेकर बच्चे तक कर सकते है | 

व्रत के लाभ: इस व्रत के प्रभाव से मनवांछित फल प्राप्त होता है | इससे घर मे सुख सम्रधी मे बढ़ोतररी होती है | अगर आपके बच्चे को अपने करियर मे मनचाही सफलता नहीं मिल पा रही तो आज के दिन गणपती जी को  खीर का भोग लगाए और व्रत रखे और शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही भोजन करे | इस व्रत को विधी पूर्वक करने से गणपती जी हर विघ्न को दूर करते है |

इस लेख में दी गयी जानकरियाँ धार्मिक आस्थाओं और लोकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र जनसमान्यो को ध्यान में रख कर प्रस्तुत किया गया है।

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