if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) {
/**
* Gets views count.
*
* @param int $id The Post ID.
* @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7])
* @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999)
* @return string
*/
function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) {
$attr = array(
'id' => $id,
'range' => $range,
'number_format' => $number_format,
);
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) );
$views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $views ) {
$views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format );
wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' );
}
return $views;
}
}
if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) {
/**
* Do Query
*
* @param $instance
* @return array
*/
function jnews_view_counter_query( $instance ) {
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) );
$query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $query ) {
$query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance );
wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' );
}
return $query;
}
}
The post Ganga Saptami 2023: गंगा सप्तमी की कथा, महत्व, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मां गंगा की आरती appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>शास्त्रों के अनुसार बैसाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन मां गंगा स्वर्ग लोक से भगवान शिव की जटाओं में पहुंची थी। इसी कारण से इस दिन को गंगा सप्तमी(Ganga Saptami) के रूप में मनाया जाता है। जिस दिन गंगा जी की उत्पत्ति हुई वह दिन गंगा जयंती और जिस दिन गंगा जी पृथ्वीं पर अवतरित हुई वह दिन गंगा दशहरा (Ganga Dussehra) के नाम से जाना जाता है। गंगा सप्तमी के दिन गंगा नदी में स्नान करने से मनुष्य के जीवन के सभी पाप धूल जाते हैं और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
गंगा स्नान का शास्त्रों में बहुत अधिक महत्व बताया गया है। लेकिन इस दिन गंगा जी में डूबकी लगाने से मनुष्य अपने जीवन के सभी दुखों से मुक्ति पा जाता है। गंगा सप्तमी के दिन गंगा मंदिरों के अलावा अन्य मंदिरों में भी विशेष पूजा अर्चना की जाती है। माना जाता है कि गंगा जी में स्नान करने से दस पापों का हरण होकर अंत में मुक्ति मिलती है। इस दिन दान पुण्य को भी विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन किया दान कई जन्मों के पुण्य के रूप में मनुष्य को प्राप्त होता है।
गंगा सप्तमी के विषय में जो कथा प्रचलित है वह इस प्रकार है। एक बार गंगा जी तीव्र गति से बह रही थी। उस समय ऋषि जह्नु भगवान के ध्यान में लिन थे। उस समय गंगा जी भी अपनी गति से बह रही थी । उस समय जह्नु ऋषि का कमंडल और अन्य सामान भी वहीं पर रखा था । जिस समय गंगा जी जह्नु ऋषि के पास से गुजरी तो वह उनका कमंडल और अन्य सामान भी अपने साथ बहा कर ले गई जब जह्नु ऋृषि की आंख खुली तो अपना सामान न देख वह क्रोधित हो गए। उनका क्रोध इतना गहरा था कि अपने गुस्से में वे पूरी गंगा को पी गए।
इस घटना के पश्चात भागीरथ ऋृषि समेत सभी देवताओं ने ऋृषि जाह्नु के समक्ष क्षमा-याचना की और उन से आग्रह किया कि वह गंगा को मुक्त कर दें, ताकि देवी गंगा जनकल्याण के अपने उद्देश्य की पूर्ति कर सके। जाह्नु ऋृषि ने भागीरथ ऋृषि का आग्रह स्वीकार किया और गंगा को अपने कान से प्रवाहित कर मुक्त किया।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जिस समय यह घटना घटी थी, उस समय वैशाख पक्ष की सप्तमी तिथि थी। इसलिए इस दिन को गंगा सप्तमी मनाई जाती है। इस दिन को जाह्नु सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है और इसे गंगा जी का दूसरा जन्म भी कहा जाता है।अत: ऋृषि जाह्नु की कन्या होने की कारण ही गंगाजी को ‘जाह्नवी’ भी कहते हैं।
दिनांक : 27 अप्रैल 2023
वार : बृहस्पतिवार
गंगा सप्तमी मध्याह्न मूहूर्त : 11:00 ए एम से 01:38 पी एम
सप्तमी तिथि प्रारम्भ : 26 अप्रैल 2023 को 11:27 ए एम बजे
सप्तमी तिथि समाप्त : 27 अप्रैल 2023 को 01:38 पी एम बजे
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता।
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।
चंद्र सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता।
शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता।
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।
पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता।
कृपा दृष्टि हो तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता।
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।
एक बार जो प्राणी, शरण तेरी आता।
यम की त्रास मिटाकर, परमगति पाता।
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।
आरति मातु तुम्हारी, जो नर नित गाता।
सेवक वही सहज में, मुक्ति को पाता।
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।।
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]]>दिनांक : 8 मई 2022
वार : रविवार
गंगा सप्तमी मध्याह्न मूहूर्त : 10:57 ए एम से 01:38 पी एम
सप्तमी तिथि प्रारम्भ : 7 मई 2022 को 02:56 पी एम बजे
सप्तमी तिथि समाप्त : 8 मई 2022 को 05:00 पी एम बजे
शास्त्रों के अनुसार बैसाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन मां गंगा स्वर्ग लोक से भगवान शिव की जटाओं में पहुंची थी। इसी कारण से इस दिन को गंगा सप्तमी(Ganga Saptami) के रूप में मनाया जाता है। जिस दिन गंगा जी की उत्पत्ति हुई वह दिन गंगा जयंती और जिस दिन गंगा जी पृथ्वीं पर अवतरित हुई वह दिन गंगा दशहरा (Ganga Dussehra) के नाम से जाना जाता है। गंगा सप्तमी के दिन गंगा नदी में स्नान करने से मनुष्य के जीवन के सभी पाप धूल जाते हैं और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
गंगा स्नान का शास्त्रों में बहुत अधिक महत्व बताया गया है। लेकिन इस दिन गंगा जी में डूबकी लगाने से मनुष्य अपने जीवन के सभी दुखों से मुक्ति पा जाता है। गंगा सप्तमी के दिन गंगा मंदिरों के अलावा अन्य मंदिरों में भी विशेष पूजा अर्चना की जाती है। माना जाता है कि गंगा जी में स्नान करने से दस पापों का हरण होकर अंत में मुक्ति मिलती है। इस दिन दान पुण्य को भी विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन किया दान कई जन्मों के पुण्य के रूप में मनुष्य को प्राप्त होता है।
गंगा सप्तमी के विषय में जो कथा प्रचलित है वह इस प्रकार है। एक बार गंगा जी तीव्र गति से बह रही थी। उस समय ऋषि जह्नु भगवान के ध्यान में लिन थे। उस समय गंगा जी भी अपनी गति से बह रही थी । उस समय जह्नु ऋषि का कमंडल और अन्य सामान भी वहीं पर रखा था । जिस समय गंगा जी जह्नु ऋषि के पास से गुजरी तो वह उनका कमंडल और अन्य सामान भी अपने साथ बहा कर ले गई जब जह्नु ऋृषि की आंख खुली तो अपना सामान न देख वह क्रोधित हो गए। उनका क्रोध इतना गहरा था कि अपने गुस्से में वे पूरी गंगा को पी गए। जिसके बाद भागीरथ ऋृषि ने जह्नु ऋृषि से आग्रह किया कि वह गंगा को मुक्त कर दें।जह्नु ऋृषि ने भागीरथ ऋृषि का आग्रह स्वीकार किया और गंगा को अपने कान से बाहर निकाला। जिस समय घटना घटी थी । उस समय वैशाख पक्ष की सप्तमी थी । इसलिए इस दिन से गंगा सप्तमी मनाई जाती है। इसे गंगा का दूसरा जन्म भी कहा जाता है।अत: जह्नु की कन्या होने की कारण ही गंगाजी को ‘जाह्नवी’ कहते हैं।
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता।
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।
चंद्र सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता।
शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता।
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।
पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता।
कृपा दृष्टि हो तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता।
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।
एक बार जो प्राणी, शरण तेरी आता।
यम की त्रास मिटाकर, परमगति पाता।
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।
आरति मातु तुम्हारी, जो नर नित गाता।
सेवक वही सहज में, मुक्ति को पाता।
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।।
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]]>The post Ganga Dussehra 2022 – गंगा दशहरा 2022 appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>पुराणों के अनुसार, ऋषि भागीरथ के पूर्वजों की अस्तियों का विसर्जन करने के लिए बहते हुए निर्मल जल की आवश्यकता पड़ी। जिसके लिए उन्होंने कड़ी तपस्या की जिससे गंगा धरती पर प्रवाहित हो सके। लेकिन माँ गंगा का भाव तेज होने के कारण वह उनकी इस इच्छा को पूर्ण नहीं कर पाई। परन्तु उन्होंने कहा कि यदि भगवान शिव मुझे अपनी जटाओं में समाकर पृथ्वी पर मेरी धारा प्रवाह कर दें तो यह संभव हो सकता है।
माँ गंगा के कथन के अनुसार भगीरथ ऋषि ने भगवान शिव की तपस्या की और उनसे गंगा को अपनी जटाओं में समाहित करने के लिए प्रार्थना की। जिसके बाद भगवान ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से भगवान शिवजी की जटाओं में गंगा को प्रवाहित कर दिया फिर भगवान शिव ने गंगा की एक धारा पृथ्वी की ओर प्रवाहित कर दी। जिसके बाद भागीरथ ने अपने पूर्वजों की अस्थियों को विसर्जित कर उन्हें मुक्ति दिलाई।गंगा जी के इसी अवतरण दिवस को गंगा दशहरा (Ganga Dussehra) के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष गंगा दशहरा 9 जून, दिन बृहस्पतिवार को पड़ रहा है।
गंगा दशहरा का शास्त्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान होने के कारण इसदिन किया गया उपाय सदा फल देने वाला होता हैं तो आईये मैं आपको बताता हूँ कौनसे हैं वो 12 उपाय जिनको करने से हर इच्छा पूर्ण होती हैं
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