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*
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* @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999)
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* Do Query
*
* @param $instance
* @return array
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The post अष्टविनायक मंदिरों के दर्शन, मिलेगा विघ्नहर्ता का आर्शिवाद appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>महाराष्ट्र के पुणे के विभिन्न स्थानो में गणेश जी के आठ मंदिर हैं, इन्हें अष्टविनायक कहा जाता है। इन मंदिरों में गणेश जी की स्वयंभू (अपने आप प्रकट हुई) प्रतिमा है और कहा जाता है की यहाँ भगवान गणेश स्वयं विराजते हैं और इन अष्ट स्वरूप के दर्शन मात्र से कई जन्मों का पुण्य मिलता है।
गणपति महोत्सव के मौके पर अष्टविनायक यात्रा का अपना महत्व है। पुणे के आस-पास स्थित गणपति जी के आठ स्वयभू मंदिरों के दर्शन के लिए यूंतो हमेशा ही श्रद्धालुओं की भीड़ रहती हैं, लेकिन गणेशोत्सव के दौरान यहां का माहौल अलग ही निराला होता है। इन अष्टविनायकों के साथ कईदिलचस्प कहानियां जुड़ी हुई हैं। माना जाता है कि ब्रह्मा जी के वरदान के बाद श्री गणेश ने हर युग में अलग-अलग रुपों में अवतार लिया और लोगोंको आशीर्वाद दिया।


मयूरेश्वर (मोरेश्वर) मंदिर पुणे से ८० किलोमीटर मोरगाँव में स्थित है। इस मंदिर के चारों कोनों में मीनारें और दीवारें हैं। यहाँ चार द्वार हैं जो चारों युग ( सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग) के प्रतीक हैं। यहाँ गणेशजी बैठी हुई मुद्रा विराजमान है। कहते हैं कि इसी स्थान पर गणेश जी नेसिंधुरासुर नाम के राक्षस का वध मोर पर सवार होकर उससे युद्ध करते हुए किया था। इसी कारण उनको मयूरेश्वर कहा जाता है।
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सिद्धिविनायक मंदिर पुणे से 200 किलोमीटर सिद्धटेक गाँव में स्थित है। सिद्धिविनायक अष्टविनायक में दूसरे गणेश हैं। पौराणिक मन्यताओ के अनुसारयहाँ भगवान विष्णु ने सिद्धियाँ प्राप्त की थी। यह मंदिर एक पहाड़ की चोटी पर स्थित है जिससे इस मंदिर की परिक्रमा करने के लिए पहाड़ कीपरिक्रमा करनी होती हैं।

श्री बल्लालेश्वर मंदिर गोवा राजमार्ग पर नागोथाने से पहले से 11 किलोमीटर, मुंबई पुणे हाइवे बांद, पाली से टोयन में स्थित है। प्राचीन काल मेंबल्लाल नामक एक बालक था, वह गणेश जी का परमभक्त था उसने एक दिन पाली गाँव में विशेष पूजा का आयोजन किया और सभी बच्चों कोआमंत्रित किया। पूजा कई दिनों तक चली और बच्चों ने पूजा पूर्ण होने से पहले घर लोटने से माना कर दिया इससे बच्चों के माता पिता ने नाराजहोकर बल्लाल के पिता कल्याणी सेठ से शिकायत की तो उन्होंने जगंल जाकर जहाँ पूजा चल रही वहाँ बल्लाल को पीटा और गणेश जी की मुर्ती केसाथ उसे भी जंगल में फेंक दिया। बल्लाल गंभीर हालत में भी भगवान गणेश जी की पूजा करता रहा। इस भक्ति से प्रसन्न होकर गणेश जी ने उसेदर्शन दिए और वरदान माँगने को कहा, तब बल्लाल ने गणेश जी से आग्रह किया अब वे इसी स्थान पर निवास करें। तब से गणपति यहां निवास करने लगे।

श्री वरदविनायक का मंदिर महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में कोल्हापुर क्षेत्र के महाड़ में स्थित हैं। मान्यता है कि वरदविनायक गणेश अपने नाम के समानसभी भक्तों की मनोकामन पूर्ण करते हैं। इस मंदिर में नंददीप नाम का दीपक निरंतर वर्षों से प्रज्जवलित है।

चिंतामणि गणपति मंदिर पुणे जिले के हवेली तालुका में स्थित है। इस मंदिर के निकट तीन नदियों (भीम, मूला और मुथा) का संगम है। मान्यता है किभगवान ब्रमहा जी ने अपने विचलित मन को शांत करने के लिए इसी स्थान पर तपस्या की थी। अगर आपका मन विचलित रहता हो और चिंताएंआपको घेरे रहती हों तो आप थेयूर आएं और श्री चिंतामणि गणपति की पूजा करें सभी चिंताओं से मुक्ति मिल जाएगी।
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गिरजात्मज गणेश मंदिर पुणे-नासिक राजमार्ग पर पुणे से 90 किलोमीटर लेण्याद्री गांव में स्थित है। यह एक पहाड़ पर है और बौद्ध गुफाओं के स्थान पर बनाया गया है। इस पहाड़ पर १८ बौद्ध गुफाएँ हैं जिसमें से ८वीं गुफा में गिरजात्मजविनायक मंदिर है। मंदिर तक पहुंचने के लिए 307 सिढ़ियों चढ़नी पड़ती हैं । पूरा मंदिर ही एक बड़े पत्थर को काट कर बनाया गया है । मंदिर कामुख्य द्वार दक्षिण की ओर है।

विघ्नेश्वर गणपति मंदिर पुणे नासिक रोड पर नारायणगावं (जूनर या ओजर से होकर ) 85 किलोमीटर की दूरी पर है । ओजर अष्टविनायक सातवें मंदिरके लिए निर्धारित है । मंदिर विघनेश्वर कुकदेश्वर नदी के तट पर ओजर में है। पौराणिक कथा के अनुसार हेमवती के राजा अभिनंदना ने स्वर्ग की गददीपाने के लिए घोर तपस्या की उस की तपस्या में बाधा डालने के लिए इंद्र ने विघनासुर को भेजा। वह संतो और आम जनो को परेशान करने लगा तबगणपति जी ने लोगों के अनुरोध पर विघनासुर का वध इसी स्थान पर किया। जिसके बाद से ये मंदिर विघ्नेश्वर, विघ्नहर्ता और विघ्नहार के रूप में जानाजाने लगा है।

महागणपति मंदिर पुणे-अहमदनगर राजमार्ग पर 50 किलोमीटर दूरी पे पुणे के रांजणगांव में स्थित है। यह मंदिर इतिहास के अनुसार 9 – 10वीं सदी केबीच माना जाता है। इस मंदिर का प्रवेश द्धार बहुत विशाल और सुंदर है। यहां गणपति की मूर्ति को माहोतक नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता हैकि महागणपति जी की असली मूर्ति मंदिर के अंदर एक तहखाने में रखी गई है. जब भारत पर मुगल हमला कर मंदिरों को लूट रहे थेउस वक्त मंदिर के तहखाने में मूर्ति को छिपा के रख दिया गया था. इस मंदिर का निर्माण भगवान शिव ने कराया था. कहते हैं कित्रिपुरासुर के साथ युद्ध से पहले शिव भगवान ने इस मंदिर में पूजा की थी.
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]]>निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा ||
अर्थ – घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर काय, करोड़ सूर्य के समान महान प्रतिभाशाली।
मेरे प्रभु, हमेशा मेरे सारे कार्य बिना विघ्न के पूरे करने की कृपा करें॥
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को पूरे देश में गणेश चतुर्थी पर्व मनाया जाता हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र गणेश जी का जन्म भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन ही हुआ था , इसलिए इस दिन गणेश चतुर्थी या विनायक चतुर्थी का पर्व मनाया जाता हैं। इस वर्ष गणेश चतुर्थी 22 अगस्त 2020 , शनिवार को है। इस दिन लोग बप्पा का घर में स्वागत करते हैं और गणेश प्रतिमा की स्थापना कर के अगले ११ दिनो तक अपने सामर्थ के अनुसार विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं।
आम तौर पर 7 से 10 दिन के लिए भगवान गणेश जी की स्थापना करने की मान्यता है परंतु आज कल की अति व्यस्त दिनचर्या में यह बहुत मुश्किल है क्यूँकि गणपति जी की विधि-विधान से स्थापना नहीं करने पर विराजमान नहीं होते हैं और न ही उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है, इसलिए लोंग अपने सामर्थ के अनुसार 1.5 , 3, 5, 7, 10 दिन के लिए गणपति जी को अपने घर और दुकान में विराजमान करते हैं और विधि-विधान से पूजा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
आइये अब हम आप को बताते हैं की कैसे आप भी अपने घर में पूरे विधि-विधान से गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर सकते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
गणपति स्थापना और पूजा मुहूर्त
ऐसा माना जाता है की भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल के दौरान हुआ था इसीलिए मध्याह्न के समय को गणेश पूजा के लिए उपयुक्त माना जाता है।
मध्याहन गणेश पूजा मुहूर्त – सुबह 11 बजकर 07 मिनट से 01 बजकर 41 मिनट दोपहर तक (अभिजित मुहूर्त : 11:58 AM से 12:41PM )
वर्जित चन्द्रदर्शन का समय – सुबह 9 बजकर 07 मिनट से रात 09 बजकर 26 मिनट तक
चतुर्थी तिथि आरम्भ – 21 अगस्त शुक्रवार 11 बजकर 02 मिनट पर
चतुर्थी तिथि समाप्त – 22 अगस्त शनिवार – शाम 07 बजकर 57 मिनट तक
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गणेश पूजन / गणपति पूजन सामग्री
आवश्यक सामग्री : शुद्ध जल, गंगाजल, सिन्दूर, रोली, मौली , कपूर, घी, दही, शहद, दूर्वा , चीनी, पुष्प, पान, सुपारी, रूई, प्रसाद (मोदक / लड्डू गणेश जी को बहुत प्रिय है), पंचामृत, वस्त्र, जनेऊ, सुगंध( इत्र ), लाल चन्दन, अक्षत(चावल), पुष्प माला, सुगन्धित तेल, धूपबत्ती, दीपक इत्यादि |
गणेश / गणपति पूजन विधि
गणेश चतुर्थी के दिन प्रात:काल स्नानादि से निवृत होकर गणेश पूजन की तैयारी करनी चाहिए | गणेश पूजन से पहले ध्यान रहे की गणेश जी की मूर्ति विराजमान या स्थापित करे | मूर्ति सोने, तांबे, चाँदी, मिट्टी या गाय के गोबर (अपने सामर्थ्य अनुसार) से बनाई जाती है | गणेश मूर्ति व गणपति पूजन सामग्री पूजा की थाली में रख कर पूजा विधि शुरू करे |
क्षमा-प्रार्थना मन्त्र
पूजा एवं आरती के बाद परिक्रमा करें और क्षमा मांगें कि पूजा में कोई भी कमी या भूल हुई तो उसके लिए माफ करें।
गणेशपूजने कर्म यत् न्यूनमधिकम कृतम।
तेन सर्वेण सर्वात्मा प्रसन्न अस्तु गणपति सदा मम।।
इस प्रकार आप अपने घर पर गणपति जी की विधि विधान से स्थापना करें ।
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गणेश गायत्री मंत्र
ॐ एकदन्ताय विद्धमहे, वक्रतुण्डाय धीमहि
तन्नो दन्ति प्रचोदयात ||
यह भगवान श्री गणेश का गायत्री मंत्र है इसमें कहा गया है कि हम उस परमात्मा स्वरुप एकदंत यानि एक दांत वाले भगवान श्री गणेश, जो कि सर्वव्यापी हैं, जिनकी सूंड हाथी के सूंड की तरह मुड़ी हुई है उनसे प्रार्थना करते हैं एवं सद्बुद्धि की कामना करते हैं। हम भगवान श्री गणेश को नमन करते हैं एवं प्रार्थना करते हैं कि वे अपने आशीर्वाद से हमारे मन-मस्तिष्क से अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान से प्रकाशित करें।
जरूरी बात:
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