if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) {
/**
* Gets views count.
*
* @param int $id The Post ID.
* @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7])
* @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999)
* @return string
*/
function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) {
$attr = array(
'id' => $id,
'range' => $range,
'number_format' => $number_format,
);
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) );
$views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $views ) {
$views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format );
wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' );
}
return $views;
}
}
if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) {
/**
* Do Query
*
* @param $instance
* @return array
*/
function jnews_view_counter_query( $instance ) {
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) );
$query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $query ) {
$query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance );
wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' );
}
return $query;
}
}
The post Vivah Sanskar: हिंदू विवाह संस्कार में सात फेरों संग सात वचन, जानिए हर वचन का महत्व appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>विवाह = वि + वाह, अत: इसका शाब्दिक अर्थ है – विशेष रूप से (उत्तरदायित्व का) वहन करना। पाणिग्रहण संस्कार (Vivah Sanskar) को सामान्य रूप से हिंदू विवाह के नाम से जाना जाता है। अन्य धर्मों में विवाह पति और पत्नी के बीच एक प्रकार का करार होता है जिसे कि विशेष परिस्थितियों में तोड़ा भी जा सकता है, परंतु हिंदू विवाह पति और पत्नी के बीच जन्म-जन्मांतरों का सम्बंध होता है जिसे किसी भी परिस्थिति में नहीं तोड़ा जा सकता। अग्नि के सात फेरे लेकर और ध्रुव तारा को साक्षी मान कर दो तन, मन तथा आत्मा एक पवित्र बंधन में बंध जाते हैं। हिंदू विवाह में पति और पत्नी के बीच शारीरिक संम्बंध से अधिक आत्मिक संम्बंध होता है और इस संम्बंध को अत्यंत पवित्र माना गया है।
विवाह एक ऐसा मौक़ा होता है जब दो इंसानो के साथ-साथ दो परिवारों का जीवन भी पूरी तरह बदल जाता है। हिंदू विवाह में विवाह की परंपराओं में सात फेरों का भी एक चलन है। जो सबसे मुख्य रस्म होती है। हिन्दू धर्म के अनुसार सात फेरों के बाद ही शादी की रस्म पूर्ण होती है। सात फेरों में दूल्हा व दुल्हन दोनों से सात वचन लिए जाते हैं। यह सात फेरे ही पति-पत्नी के रिश्ते को सात जन्मों तक बांधते हैं। हिंदू विवाह संस्कार के अंतर्गत वर-वधू अग्नि को साक्षी मानकर इसके चारों ओर घूमकर पति-पत्नी के रूप में एक साथ सुख से जीवन बिताने के लिए प्रण करते हैं और इसी प्रक्रिया में दोनों सात फेरे लेते हैं, जिसे सप्तपदी भी कहा जाता है। और यह सातों फेरे या पद सात वचन के साथ लिए जाते हैं। हर फेरे का एक वचन होता है, जिसे पति-पत्नी जीवनभर साथ निभाने का वादा करते हैं। यह सात फेरे ही हिन्दू विवाह की स्थिरता का मुख्य स्तंभ होते हैं।
विवाह के बाद कन्या वर के वाम अंग में बैठने से पूर्व उससे सात वचन लेती है। कन्या द्वारा वर से लिए जाने वाले सात वचन इस प्रकार है।
तीर्थव्रतोद्यापन यज्ञकर्म मया सहैव प्रियवयं कुर्या:,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति वाक्यं प्रथमं कुमारी !!
(यहाँ कन्या वर से कहती है कि यदि आप कभी तीर्थयात्रा को जाओ तो मुझे भी अपने संग लेकर जाना। कोई व्रत-उपवास अथवा अन्य धर्म कार्य आप करें तो आज की भांति ही मुझे अपने वाम भाग में अवश्य स्थान दें। यदि आप इसे स्वीकार करते हैं तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।)
किसी भी प्रकार के धार्मिक कृ्त्यों की पूर्णता हेतु पति के साथ पत्नि का होना अनिवार्य माना गया है। जिस धर्मानुष्ठान को पति-पत्नि मिल कर करते हैं, वही सुखद फलदायक होता है। पत्नि द्वारा इस वचन के माध्यम से धार्मिक कार्यों में पत्नि की सहभागिता, उसके महत्व को स्पष्ट किया गया है।
पुज्यौ यथा स्वौ पितरौ ममापि तथेशभक्तो निजकर्म कुर्या:,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं द्वितीयम !!
(कन्या वर से दूसरा वचन मांगती है कि जिस प्रकार आप अपने माता-पिता का सम्मान करते हैं, उसी प्रकार मेरे माता-पिता का भी सम्मान करें तथा कुटुम्ब की मर्यादा के अनुसार धर्मानुष्ठान करते हुए ईश्वर भक्त बने रहें तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।)
यहाँ इस वचन के द्वारा कन्या की दूरदृष्टि का आभास होता है। आज समय और लोगों की सोच कुछ इस प्रकार की हो चुकी है कि अमूमन देखने को मिलता है–गृहस्थ में किसी भी प्रकार के आपसी वाद-विवाद की स्थिति उत्पन होने पर पति अपनी पत्नि के परिवार से या तो सम्बंध कम कर देता है अथवा समाप्त कर देता है। उपरोक्त वचन को ध्यान में रखते हुए वर को अपने ससुराल पक्ष के साथ सदव्यवहार के लिए अवश्य विचार करना चाहिए।
जीवनम अवस्थात्रये मम पालनां कुर्यात,
वामांगंयामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं तृ्तीयं !!
(तीसरे वचन में कन्या कहती है कि आप मुझे ये वचन दें कि आप जीवन की तीनों अवस्थाओं (युवावस्था, प्रौढावस्था, वृद्धावस्था) में मेरा पालन करते रहेंगे, तो ही मैं आपके वामांग में आने को तैयार हूँ।)
कुटुम्बसंपालनसर्वकार्य कर्तु प्रतिज्ञां यदि कातं कुर्या:,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं चतुर्थं !!
(कन्या चौथा वचन ये माँगती है कि अब तक आप घर-परिवार की चिन्ता से पूर्णत: मुक्त थे। अब जबकि आप विवाह बंधन में बँधने जा रहे हैं तो भविष्य में परिवार की समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति का दायित्व आपके कंधों पर है। यदि आप इस भार को वहन करने की प्रतीज्ञा करें तो ही मैं आपके वामांग में आ सकती हूँ।)
इस वचन में कन्या वर को भविष्य में उसके उतरदायित्वों के प्रति ध्यान आकृ्ष्ट करती है। विवाह पश्चात कुटुम्ब पौषण हेतु पर्याप्त धन की आवश्यकता होती है। अब यदि पति पूरी तरह से धन के विषय में पिता पर ही आश्रित रहे तो ऐसी स्थिति में गृहस्थी भला कैसे चल पाएगी। इसलिए कन्या चाहती है कि पति पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर होकर आर्थिक रूप से परिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ति में सक्षम हो सके। इस वचन द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि पुत्र का विवाह तभी करना चाहिए जब वो अपने पैरों पर खडा हो, पर्याप्त मात्रा में धनार्जन करने लगे।
स्वसद्यकार्ये व्यवहारकर्मण्ये व्यये मामापि मन्त्रयेथा,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: पंचमत्र कन्या !!
(इस वचन में कन्या जो कहती है वो आज के परिपेक्ष में अत्यंत महत्व रखता है। वो कहती है कि अपने घर के कार्यों में, विवाहादि, लेन-देन अथवा अन्य किसी हेतु खर्च करते समय यदि आप मेरी भी मन्त्रणा लिया करें तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।)
यह वचन पूरी तरह से पत्नि के अधिकारों को रेखांकित करता है। बहुत से व्यक्ति किसी भी प्रकार के कार्य में पत्नी से सलाह करना आवश्यक नहीं समझते। अब यदि किसी भी कार्य को करने से पूर्व पत्नी से मंत्रणा कर ली जाए तो इससे पत्नी का सम्मान तो बढता ही है, साथ साथ अपने अधिकारों के प्रति संतुष्टि का भी आभास होता है।
न मेपमानमं सविधे सखीनां द्यूतं न वा दुर्व्यसनं भंजश्चेत,
वामाम्गमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं च षष्ठम !!
(कन्या कहती है कि यदि मैं अपनी सखियों अथवा अन्य स्त्रियों के बीच बैठी हूँ तब आप वहाँ सबके सम्मुख किसी भी कारण से मेरा अपमान नहीं करेंगे। यदि आप जुआ अथवा अन्य किसी भी प्रकार के दुर्व्यसन से अपने आप को दूर रखें तो ही मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।)
वर्तमान परिपेक्ष्य में इस वचन में गम्भीर अर्थ समाहित हैं। विवाह पश्चात कुछ पुरुषों का व्यवहार बदलने लगता है। वे जरा जरा सी बात पर सबके सामने पत्नी को डाँट-डपट देते हैं। ऐसे व्यवहार से पत्नी का मन कितना आहत होता होगा। यहाँ पत्नी चाहती है कि बेशक एकांत में पति उसे जैसा चाहे डांटे किन्तु सबके सामने उसके सम्मान की रक्षा की जाए, साथ ही वो किन्हीं दुर्व्यसनों में फँसकर अपने गृ्हस्थ जीवन को नष्ट न कर ले।
परस्त्रियं मातृसमां समीक्ष्य स्नेहं सदा चेन्मयि कान्त कुर्या,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: सप्तममत्र कन्या !!
(अन्तिम वचन के रूप में कन्या ये वर मांगती है कि आप पराई स्त्रियों को माता के समान समझेंगें और पति-पत्नि के आपसी प्रेम के मध्य अन्य किसी को भागीदार न बनाएंगें। यदि आप यह वचन मुझे दें तो ही मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।)
विवाह पश्चात यदि व्यक्ति किसी बाह्य स्त्री के आकर्षण में बँध पगभ्रष्ट हो जाए तो उसकी परिणिति क्या होती है। इसलिए इस वचन के माध्यम से कन्या अपने भविष्य को सुरक्षित रखने का प्रयास करती है।
ये भी पढ़ें – शादी में हो रही है देरी तो अपनाए ये उपाय
इन राशियों की लड़कियाँ करती है ससुराल मे राज
The post Vivah Sanskar: हिंदू विवाह संस्कार में सात फेरों संग सात वचन, जानिए हर वचन का महत्व appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>The post इन राशियों की लड़कियाँ करती है ससुराल मे राज appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>मेष राशि : मेष राशि की महिला नियंत्रण करने वाली और शक्तिशाली और बोल्ड होती है |वे खुद के नियम बनाने वाली होती है |क्योकि इनमे जन्मजात लोगो को नियन्त्रण करने के गुण होते है |वह बिना सोचे समझे कोई भी कार्य नही करती जिससे उन्हें हानि उठानी पड़े | ये कम बजट मे भी अच्छे से घर सम्भालने की योग्यता रखती है तभी इन्हें मायके के साथ साथ ससुराल मे भी खूब प्यार मिलता है |
वर्षभ राशि : वर्षभ राशि की महिलाओ में चरित्र और संकल्प की शक्ति जबरदस्त होती है| इनमे हिम्मत कूट-कूट कर भरी होती है इनका दिल एक दम खरे सोने के समान होता है भले ही दिखने मे कितनी भी कठोर क्यों न हो| इस राशि की महिला देखभाल और प्यार करने वाली होती है और ये हमेशा जरूरत मन्दो की मदद के लिए कार्य करती रहती है | इन महिलाओ के प्यार और संघर्ष की दुनिया मिसाल देती है | इस राशि वाली लडकियों के पति इनकी कोई बात नही टालते इसलिए इन्हें कभी ससुराल मे परेशानी का सामना नही करना पड़ता |
कर्क राशि : कर्क राशि की महिलाओ को समझना मुश्किल ही नही नमुमकिन होता है | इनका उग्र और जुनूनी स्वभाव लोगो को ही नही और दूसरी तरफ भावुक और उदार स्वभाव लोगो को समझने ही नही देता की वो कोन से पहलू को समझे। एक मित्र और पार्टनर के रूप मे मरते दम तक वफादार होती है क्योकि इनके लिए वफादारी से बढकर कुछ नही होता| दुसरो को इन राशियों की महिलाओ को धोखा देने से पहले सावधान रहना चाहिए |क्योकि धोखा देने वाले को ये कभी नही छोडती| ये अपने मायके के साथ ससुराल के माहौल को भी खुशनुमा बना कर रखती है |
सिंह राशि : इस राशि की कन्या जन्मजात लीडर होती है |हर काम को अपने हाथ में लेती है |किसी के भी सामने इन्हें झुकना पसंन्द नही होता |सूर्य के स्वामित्व के कारण इनके मुख पर अलग प्रकार का तेज होता है |इनके पति इनसे खूब प्यार करते है प्रतिकूल परिस्थिति मे भी ये आक्रामक हो जाती है |और सब कुछ अपने अनुकूल कर लेती है |इस राशि की महिला सर्वगुण सम्पन्न होने के कारण ससुराल मे राज करती है | ये हर जगह राज करती है चाहे मायका हो या ससुराल |
कन्या राशि : कन्या राशि की लडकियाँ यह अच्छी तरह से जानती है कि वे अपनी बात केसे मनवा सकती है बुद्ध के प्रभाव वाली राशी होने से इस राशि की लडकियाँ अपनी बातो से अपने पति को अपने काबू में कर लेती है और उनका पति भी हाँ में हाँ मिलाता है |ये लडकियाँ इमोशनल ब्लैकमेल करने में भी आगे होती है साम ,दाम ,दंड भेद ये सारे हत्यार अपनाती है |साथ ही ये अपने पति पर पूरी निगरानी भी रखती है |इनके पति इनके दीवाने होते है |
वर्श्चिक राशि: इस राशि की लडकियाँ चालाक होती है |चाहे कैसी भी परिस्थिति क्यों न हो ,ये अपने पक्ष मे हर किसी को खड़ा कर लेती है |इनमे हर काम को अपने हाथ में लेने की योग्यता होती है |यदि इनके साथ गलत किया जाये तो ये साजिश करने में भी पीछे नही रहती |कोई भी रूप रख कर ये अपना काम निकलवा ही लेती है |इनके पति इन्हें न तो कभी समझ पाते है और न ही कभी हावी हो पाते है |ससुराल में सिर्फ इनके ही चलती है |पति हमेशा इनके साथ खड़ा रहता है |
धनु राशि : इस राशि पर गुरु का प्रभाव होता है इस लिहाज से इनका ज्ञान अद्भुत होता है |अपने ज्ञान से ये पूरे परिवार को अपना दीवाना बना लेती है | अगर मन में किसी बात की ठान ले तो उसे सही तरीके से हासिल करने के लिए लग जाती है |इनकी एक खासियत होती है की चाहे मायका हो या ससुराल सब को साथ लेकर चलने मे विश्वास रखती है इनकी यही बात इन्हें दुसरो से अलग करती है |इसलिए इनके पति इनके साथ खड़े रहते है |
The post इन राशियों की लड़कियाँ करती है ससुराल मे राज appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>