if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) {
/**
* Gets views count.
*
* @param int $id The Post ID.
* @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7])
* @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999)
* @return string
*/
function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) {
$attr = array(
'id' => $id,
'range' => $range,
'number_format' => $number_format,
);
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) );
$views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $views ) {
$views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format );
wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' );
}
return $views;
}
}
if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) {
/**
* Do Query
*
* @param $instance
* @return array
*/
function jnews_view_counter_query( $instance ) {
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) );
$query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $query ) {
$query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance );
wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' );
}
return $query;
}
}
The post Hal Shashthi 2022: आज संतान को लंबी आयु दिलाने वाला हल षष्ठी व्रत है, जाने महत्व, पौराणिक एवं प्रचलित व्रत कथा appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>हल षष्ठी/ हल छठ की पूजा का हिन्दू पर्व में बहुत अधिक महत्व हैं | आमतौर पर यह उत्तर भारत में मनाया जाता हैं | यह व्रत पुत्रवती स्त्रियाँ अपने पुत्र की लंबी आयु के लिए करती हैं | यह हर छठ का व्रत बहुत नियम कायदों के साथ किया जाता हैं|
हल छठ का त्यौहार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता हैं, कुछ लोग हल छठ का त्यौहार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाते हैं | महिलायें अपने पुत्र की रक्षा के लिए यह त्यौहार बड़े उत्साह के साथ पुरे विधि विधान से करती हैं |
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 2022 में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि 16 अगस्त, मंगलवार को रात 08.19 से शुरू होगी और 17 अगस्त, बुधवार रात 09.21 मिनट तक रहेगी। 17 अगस्त को उदया तिथि होने के चलते आज हल षष्ठी का व्रत किया जाएगा। इस पूरे दिन हल षष्ठी की पूजा की जा सकेगी।
प्रातः काल उठकर महुयें से दांत साफ़ किये जाते हैं| इस दिन बिना हल से जूते खाद्य पदार्थ खाये जाते हैं | पसई धान के चावल, भेंस के दूध का उपयोग भोजन में किया जाता हैं | भोजन पूजा के बाद किया जाता हैं | यह व्रत पुत्रवती स्त्रियाँ ही करती हैं | इस व्रत की पूजा हेतु भेंस के गोबर से पूजा घर में घर की दिवार पर हर छठ माता का चित्र बनाया जाता हैं | एपन तैयार किया जाता हैं | उससे चित्र का श्रृंगार किया जाता हैं |
ऐपन (चित्र)बनाने की विधि : पूजा के चावल को पानी में भीगा कर रखा जाता हैं | फिर उसे सिल बट्टे पर पिस कर उसमे हल्दी मिलाई जाती हैं | एक लेप की तरह घोल तैयार होता हैं उसे ऐपन कहते हैं | इस चित्र में हल, सप्त ऋषि, पशु ,किसान मान्यतानुसार कई चित्र बनाये जाते हैं | कई परिवार केवल हाथों के छापे बनाकर उनकी पूजा करते हैं |हाथो में ऐपन लगाकर उसके छापे दीवार पर बनाकर उनकी पूजा की जाती हैं |
पूजा के लिए पाटे पर कलश सजाया जाता हैं | गणेश जी एवम माता गौरा को स्थापित किया जाता हैं | साथ ही मिट्टी के कुल्वे में ज्वार की धानी एवम महुआ का फल भरा जाता हैं | एक मटकी में देवली छेवली को रखा जाता हैं | सबसे पहले कलश की पूजा कर गणेश जी एवम माता गौरा की पूजा की जाती हैं | फिर हर छठ माता की पूजा की जाती हैं | उसके बाद कुल्वे एवम मटकी की पूजा की जाती हैं |
पूजा के बाद हर छठ की कथा पढ़ी जाती हैं | माता जी की आरती की जाती हैं | आरती के बाद वही बैठकर महुयें के पत्ते पर महुये का फल रख कर उसे भेस के दूध से बने दही के साथ खाया जाता हैं | पूजा के बाद व्रत पूरा करने हेतु भोजन में पसई धान के चावल एवम भेंस के दूध से बनी वस्तुयें खाई जाती हैlभाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता श्री बलरामजी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन श्री बलरामजी का जन्म हुआ था।
The post Hal Shashthi 2022: आज संतान को लंबी आयु दिलाने वाला हल षष्ठी व्रत है, जाने महत्व, पौराणिक एवं प्रचलित व्रत कथा appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>The post Balaram Jayanti 2022 : भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई शेषनाग के अवतार बलराम का अवतरण दिवस appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रति वर्ष भाद्रपद्र माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को बलराम जी के जन्मोत्सव या बलराम जयंती (Balaram Jayanti) के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं अनुसार जब-जब धरती पर अधर्म बड़ा है तब-तब भगवान विष्णु ने अवतार लिया है और उनका साथ किसी न किसी रूप में शेषनाग ने दिया है। द्वापर युग में श्रीकृष्ण के जन्म से पहले उनके शेषनाग ने बलराम के रुप में जन्म लिया। बलराम जंयती को हलषष्ठी और हलछठ के नाम से भी जाना जाता है।
जन्माष्टमी से दो दिन पहले यानी आज बुधवार, 17 अगस्त 2022 को बलराम जयंती मनाई जायेगी।
इस दिन कई स्त्रियां व्रत रखती है। संतान प्राप्ति की इच्छुक महिलाओं के लिए ये व्रत फलदायी माना जाता है। इस दिन व्रत रखने वाले जातक को पूरे दिन निराहार रहना होता है और फिर शाम के समय पूजा करने के बाद फलहार ग्रहण कर सकते हैं। इस जयंती के दिन धरती से पैदा हुए अन्न को ग्रहण किया जाता है। साथ ही कई जगह लोग इस दिन पर दूध और दही का सेवन नहीं करते हैं।
बलराम जयंती पर व्रत रखने वाली महिलाओं को महुआ के दातुन से दांत साफ करना होता है। बलराम जंयती पर महिलाएं तालाब के किनारे या घर में ही तालाब बनाकर, उसमें झरबेरी, पलाश और कांसी के पेड़ लगाती हैं। फल का प्रसाद चढ़ाने के बाद कथा सुनी जाती है। इस दिन गणेश जी और माता गौरा की पूजा होती है।
जब कंस को पता चला की वासुदेव और देवकी की संतान उसकी मृत्यु का कारण बनेंगी तो उसने उन्हें कारागार में डाल दिया और उनकी सभी 6 जन्मी संतानों का वध कर डाला। देवकी को जब सांतवा पुत्र होना था तब उनकी रक्षा के लिए नारद मुनी ने उन्हे हलष्ठी माता की व्रत करने की सलाह दी। जिससे उनका पुत्र कंस के कोप से सुरक्षित हो जाए। देवकी ने हलष्ठी का व्रत किया। जिसके प्रभाव से भगवान ने योगमाया से कह कर देवकी के गर्भ में पल रहे बच्चे को वासुदेव की बड़ी रानी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया जिससे कंस को भी धोखा हो गया और उसने समझा देवकी का संतवा पुत्र जिंदा नहीं हैं। उधर रोहिणी के गर्भ से भगवान बलराम का जन्म हुआ। इसके बाद देवकी के गर्भ से आठवें पुत्र के रुप में श्री कृष्ण का जन्म हुआ। देवकी के व्रत करने से दोनों पुत्रों की रक्षा हुई।
The post Balaram Jayanti 2022 : भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई शेषनाग के अवतार बलराम का अवतरण दिवस appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>