if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) {
/**
* Gets views count.
*
* @param int $id The Post ID.
* @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7])
* @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999)
* @return string
*/
function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) {
$attr = array(
'id' => $id,
'range' => $range,
'number_format' => $number_format,
);
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) );
$views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $views ) {
$views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format );
wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' );
}
return $views;
}
}
if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) {
/**
* Do Query
*
* @param $instance
* @return array
*/
function jnews_view_counter_query( $instance ) {
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) );
$query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $query ) {
$query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance );
wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' );
}
return $query;
}
}
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]]>मान्यता है त्रेतायुग में प्रभु श्रीराम के साथ ही सभी देवी-देवतागण अपने-अपने लोकों को प्रस्थान कर गये थे किन्तु प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से हनुमानजी प्रभु के भजन और जनकल्याण हेतु पृथ्वी पर ही रह गये थे। अपनी प्रत्यक्षता का प्रमाण वे समय-समय पर पृथ्वी वासियों को भिन्न-भिन्न रूपों में देते रहते हैं। जहाँ भी रामकथा, रामचरितमानस सुन्दरकाण्ड आदि का आयोजन किया जाता है वहाँ हनुमानजी के लिये एक पृथक आसन की व्यवस्था की जाती है। जहाँ भी प्रभु श्रीराम का स्मरण किया जाता है वहाँ हनुमानजी प्रत्यक्ष उपस्थित रहते हैं। हनुमानजी देवता होने के साथ-साथ सर्वश्रेष्ठ गुरू भी हैं। प्रभु श्रीराम को शीघ्र पाने का सबसे सरल और सुगम मार्ग स्वयं हनुमानजी ही हैं। हनुमान जन्मोत्सव के दिन बजरंगबली की विधिवत पूजा करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है साथ ही सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
ऐसा माना जाता है कि हनुमान जी का जन्म सूर्योदय के समय हुआ था। हनुमान जयन्ती के दिन मन्दिरों में प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में आध्यात्मिक प्रवचनों का आयोजन किया जाता है और यह आयोजन सूर्योदय के साथ ही समाप्त हो जाते हैं।
दिनांक : 16 अप्रैल 2022
वार : शनिवार
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ: 16 अप्रैल 2022 को 02:25 ए एम बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 17 अप्रैल 2022 को 12:24 पी एम बजे
हनुमान जी को भगवान शिव का 11वां रूद्र अवतार माना जाता हैं| इनके जन्म के बारे में पुराणों में उल्लेख है की जब अमरत्व की प्राप्ति के लिये देवताओं व असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था तब समुद्र से निकले अमृत को असुरों ने छीन लिया और आपस में ही लड़ने लगे। तब भगवान विष्णु मोहिनी के रूप में अवतरित हुए। मोहनी रूप देख देवता व असुर तो क्या स्वयं भगवान शिवजी कामातुर हो गए। इस समय भगवान शिव ने जो वीर्य त्याग किया उसे पवनदेव ने वानरराज केसरी की पत्नी अंजना के गर्भ में प्रविष्ट कर दिया। जिसके फलस्वरूप माता अंजना के गर्भ से केसरी नंदन मारुती संकट मोचन रामभक्त श्री हनुमान का जन्म हुआ।
हनुमान भगवान राम के आराध्य भक्त हैं। वह भगवान की भक्ति के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में बरकरार है। वह एक ब्रह्मचारी है और उन्हें बजरंग बली, पवनपुत्र, महावीर और मारुति जैसे कई नामों से जाना जाता है। हनुमान शक्ति, भक्ति, निस्वार्थ सेवा और समर्पण के प्रतीक है।
माना जाता है कि हनुमान जन्मोत्सव पर हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने से जीवन में संकटों से मुक्ति और सुख शान्ति की प्राप्ति होती है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि या मंगल ग्रह का अशुभ प्रभाव होता है, तो उसे विधिपूर्वक हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए। इनकी विधि पूर्वक पूजा करने से इन दोनों ग्रहों से जुड़ी समस्याएं भी दूर हो जाती हैं। साथ ही साथ नकारात्मक ऊर्जा, भूत-प्रेत बाधा जैसी परेशानियों से भी मुक्ति मिल जाती है। इस दिन हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ अवश्य करना चाहिए।
इस व्रत को रखने वालों के लिए कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है।
भक्तगण अपनी स्थानीय मान्यताओं एवं कैलेण्डर के आधार पर वर्ष में भिन्न-भिन्न समय पर हनुमान जयन्ती का त्यौहार मनाते हैं। उत्तर भारतीय राज्यों में चैत्र पूर्णिमा की हनुमान जयन्ती सर्वाधिक लोकप्रिय है।
आन्ध्र प्रदेश तथा तेलंगाना में, हनुमान जयन्ती 41 दिनों तक मनायी जाती है, जो चैत्र पूर्णिमा से प्रारम्भ होती है तथा वैशाख माह में कृष्ण पक्ष के दौरान दसवें दिन समाप्त होती है। आन्ध्र प्रदेश में भक्त चैत्र पूर्णिमा पर 41 दिनों की दीक्षा आरम्भ करते हैं तथा हनुमान जयन्ती के दिन इसका समापन करते हैं।
तमिलनाडु में, हनुमान जयन्ती को हनुमथ जयन्ती के नाम से जाना जाता है और मार्गशीर्ष अमावस्या के दौरान मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेण्डर में तमिल हनुमान जयन्ती जनवरी या दिसम्बर माह में आती है।
कर्नाटक में, मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष त्रयोदशी को हनुमान जयन्ती मनाई जाती है। इस शुभ दिन को हनुमान व्रतम के नाम से जाना जाता है।
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