if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) { /** * Gets views count. * * @param int $id The Post ID. * @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7]) * @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999) * @return string */ function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) { $attr = array( 'id' => $id, 'range' => $range, 'number_format' => $number_format, ); $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) ); $views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $views ) { $views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format ); wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' ); } return $views; } } if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) { /** * Do Query * * @param $instance * @return array */ function jnews_view_counter_query( $instance ) { $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) ); $query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $query ) { $query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance ); wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' ); } return $query; } } Hanuman Puja Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/hanuman-puja/ Daily Dose of Astrology Tue, 19 Apr 2022 11:58:22 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://astrodeeva.com/wp-content/uploads/2022/03/cropped-Logo-32x32.png Hanuman Puja Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/hanuman-puja/ 32 32 Hanuman Bajrang Baan: इस तरह करें बजरंग बाण का पाठ, होगा सिद्ध और मिलेगा मनोवांछित फल https://astrodeeva.com/hanuman-bajrang-baan-do-this-way-the-recitation-of-bajrang-baan-will-be-proven-and-you-will-get-the-desired-result/ https://astrodeeva.com/hanuman-bajrang-baan-do-this-way-the-recitation-of-bajrang-baan-will-be-proven-and-you-will-get-the-desired-result/#comments Tue, 19 Apr 2022 11:58:19 +0000 https://astrodeeva.com/?p=3223 हिंदू मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी एक ऐसे देवता है जो कलयुग में भी पृथ्वी पर विराजमान हैं। भगवान हनुमान की पूजा आराधना करने से मनुष्य हर प्रकार के भय से मुक्त हो जाता है। इनकी पूजा करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। ज्यादातर लोग हनुमान चालीसा(Hanuman Chalisa) का पाठ करते हैं। यह तो […]

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हिंदू मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी एक ऐसे देवता है जो कलयुग में भी पृथ्वी पर विराजमान हैं। भगवान हनुमान की पूजा आराधना करने से मनुष्य हर प्रकार के भय से मुक्त हो जाता है। इनकी पूजा करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। ज्यादातर लोग हनुमान चालीसा(Hanuman Chalisa) का पाठ करते हैं। यह तो फायदेमंद होता ही है साथ ही अगर बजरंग बाण(Hanuman Bajrang Baan) का पाठ किया जाए तो इससे भक्तों को बजरंगबली की असीम कृपा प्राप्त होती है। इस पाठ को करने से आप कई तरह की समस्याओं से निजात पा सकते हैं।शास्त्रों में बजरंग बाण को बेहद प्रभावशाली माना गया है। भगवान हनुमान जी की कृपा पाने के लिए यह अत्यंत शुभ है। बजरंग बाण का मंत्र हनुमान जी की भक्ति, शक्ति और ऊर्जा का स्रोत माना जाता है।
इस लेख में हम हनुमान जी के बजरंग बाण के रात्रि में किये जाने वाले पाठ के विषय में बता रहे है। वैसे तो बजरंग बाण का नियमित रूप से पाठ आपको हर संकट से दूर रखता है। किन्तु अगर रात्रि में बजरंग बाण को इस प्रकार से सिद्ध किया जाये तो इसके चमत्कारी प्रभाव तुरंत ही आपके सामने आने लगते है। अगर आप चाहते है अपने शत्रु को परास्त करना या फिर व्यापर में उन्नति या किसी भी प्रकार के अटके हुए कार्य में पूर्णता तो रात्रि में नीचे बताए गए अनुसार बजरंग बाण पाठ को अवश्य करें।  हनुमान चालीसा की इन 5 चौपाइयों के जाप से, खत्म हो जायेंगे सभी कष्ट

बजरंग बाण सिद्ध करने की विधि 

किसी भी मंगलवार को रात्रि का 11 से रात्रि 1 बजे तक का समय सुनिश्चित कर ले, बजरंग बाण का पाठ आपको 11 से रात्रि 1 तक करना है, सबसे पहले आप एक चौकी को पूर्व दिशा की तरफ स्थापित करें अब इस चौकी पर एक पीला कपडा बिछा दे, अब आप इस मंत्र “ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ” को एक कागज पर लिख कर इसे फोल्ड करके इस चौकी पर रख दे।
अब आप चौकी के दायें तरफ एक मिटटी के दिए में घी का दीपक जला दे। आपको इस चौकी के सामने आसन पर बैठ जाना है। इस प्रकार आपका मुख पूर्व दिशा कर तरफ हो जायेगा और दीपक आपके बाएं तरफ होगा। अब आप परमपिता परमेश्वर का ध्यान करते हुए इस प्रकार बोले  “हे परमपिता परमेश्वर मै(अपना नाम बोले ) गोत्र (अपना गोत्र बोले ) आपकी कृपा से बजरंग बाण का यह पाठ कर रहा हु इसमें मुझे पूर्णता प्रदान करें।” अब आप ठीक 11 बजते ही ”ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ” मंत्र का जाप शुरू कर दे –
इस मंत्र को आप 15 मिनट तक जाप करें, ध्यान रहे मंत्र में जहाँ पर फट शब्द आता है वहाँ आप फट बोलने के साथ -साथ 2 उँगलियों से दुसरे हाथ की हथेली पर ताली बजानी है।
अब आप 11 बजकर 15 मिनट से और रात्रि 1 बजे तक लगातार बजरंग बाण (Hanuman Bajrang Baan) का पाठ करना प्रारंभ कर दे। ध्यान रहे बजरंग बाण पाठ आपको याद होना चाहिए। किताब से पढ़कर बिलकुल न करें जैसे ही 1 बजता है आप बजरंग बाण के पाठ को पूरा कर अब आप फिर से इस मंत्र
ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ” का जाप 15 मिनट तक करें। अब आप कागज पर लिखे हुए मंत्र को जला दे। इस प्रकार आपका यह बजरंग बाण का पाठ एक ही रात्रि में सिद्ध हो जाता है।

बजरंग बाण पाठ – Hanuman Bajrang Baan

दोहा
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥
सिया पति राम जय जय राम मेरे प्रभु राम जय जय राम।।
चौपाई
जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी।।
जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महासुख दीजै।।
जैसे कूदि सिन्धु महि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा।।
आगे जाई लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका।।
जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा।।
बाग़ उजारि सिन्धु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा।।
अक्षयकुमार को मारि संहारा। लूम लपेट लंक को जारा।।
लाह समान लंक जरि गई। जय जय जय धुनि सुरपुर में भई।।
अब विलम्ब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु उर अन्तर्यामी।।
जय जय लखन प्राण के दाता। आतुर होय दुख हरहु निपाता।।
जै गिरिधर जै जै सुखसागर। सुर समूह समरथ भटनागर।।
ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहिंं मारु बज्र की कीले।।
गदा बज्र लै बैरिहिं मारो। महाराज प्रभु दास उबारो।।
ऊँकार हुंकार महाप्रभु धावो। बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो।।
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा। ऊँ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा।।
सत्य होहु हरि शपथ पाय के। रामदूत धरु मारु जाय के।।
जय जय जय हनुमन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा।।
पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत हौं दास तुम्हारा।।
वन उपवन, मग गिरिगृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं।।
पांय परों कर ज़ोरि मनावौं। यहि अवसर अब केहि गोहरावौं।।
जय अंजनिकुमार बलवन्ता। शंकरसुवन वीर हनुमन्ता।।
बदन कराल काल कुल घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक।।
भूत प्रेत पिशाच निशाचर। अग्नि बेताल काल मारी मर।।
इन्हें मारु तोहिं शपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की।।
जनकसुता हरिदास कहावौ। ताकी शपथ विलम्ब न लावो।।
जय जय जय धुनि होत अकाशा। सुमिरत होत दुसह दुःख नाशा।।
चरण शरण कर ज़ोरि मनावौ। यहि अवसर अब केहि गोहरावौं।।
उठु उठु चलु तोहि राम दुहाई। पांय परों कर ज़ोरि मनाई।।
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता। ऊँ हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता।।
ऊँ हँ हँ हांक देत कपि चंचल। ऊँ सं सं सहमि पराने खल दल।।
अपने जन को तुरत उबारो। सुमिरत होय आनन्द हमारो।।
यह बजरंग बाण जेहि मारै। ताहि कहो फिर कौन उबारै।।
पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करै प्राण की।।
यह बजरंग बाण जो जापै। ताते भूत प्रेत सब कांपै।।
धूप देय अरु जपै हमेशा। ताके तन नहिं रहै कलेशा।।
दोहा
प्रेम प्रतीतहि कपि भजै, सदा धरैं उर ध्यान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्घ करैं हनुमान।।
सिया पति राम जय जय राम मेरे प्रभु राम जय जय राम।।

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भगवान राम पर हनुमान जी का कर्जा https://astrodeeva.com/%e0%a4%ad%e0%a4%97%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95/ https://astrodeeva.com/%e0%a4%ad%e0%a4%97%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95/#respond Sat, 20 Mar 2021 02:43:52 +0000 https://astrodeeva.com/?p=1791 राम जी लंका पर विजय प्राप्त करके आए तो कुछ दिन पश्चात राम जी ने विभीषण, जामवंत, सुग्रीव और अंगद आदि को अयोध्या से विदा कर दिया। तो सब ने सोचा हनुमान जी को प्रभु बाद में विदा करेंगे, लेकिन राम जी ने हनुमान जी को विदा ही नहीं किया। अब प्रजा में सुगबुगाहट होने […]

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राम जी लंका पर विजय प्राप्त करके आए तो कुछ दिन पश्चात राम जी ने विभीषण, जामवंत, सुग्रीव और अंगद आदि को अयोध्या से विदा कर दिया। तो सब ने सोचा हनुमान जी को प्रभु बाद में विदा करेंगे, लेकिन राम जी ने हनुमान जी को विदा ही नहीं किया।

अब प्रजा में सुगबुगाहट होने लगी कि क्या बात है कि सब अतिथि चले गए परन्तु अयोध्या से हनुमान जी नहीं गये।

अब दरबार में कानाफूसी शुरू हुई कि हनुमान जी से कौन जाने के लिए कहे , तो सबसे पहले माता सीता जी की बारी आई कि आप ही बोलो कि हनुमान जी चले जायें।

माता सीता बोलीं- मै तो लंका में विकल पड़ी थी, मेरा तो एक-एक दिन एक-एक यूग के समान बीत रहा था। वो तो हनुमान जी थे, जो प्रभु की मुद्रिका ले के आए, और धीरज बंधवाया कि…!

कछुक दिवस जननी धरु धीरा।

कपिन्ह सहित अइहहिं रघुबीरा।।

निसिचर मारि तोहि लै जैहहिं।

तिहुँ पुर नारदादि जसु गैहहिं॥

हनुमान को मैंने अपना पुत्र माना है, मैं तो अपने बेटे से बिल्कुल भी नहीं बोलूंगी अयोध्या छोड़कर जाने के लिए, आप किसी और से बुलावा लो।

अब बारी आई लक्ष्मण जी की। तो लक्ष्मण जी ने कहा, मै तो लंका के रणभूमि में वैसे ही मरणासन्न अवस्था में पड़ा था।  पूरा राम दल विलाप कर रहा था।

प्रभु प्रलाप सुनि कान बिकल भए बानर निकर।

आइ गयउ हनुमान जिमि करुना महँ बीर रस।।

ये तो जो आप सब के सामने खड़ा है, वो हनुमान जी का लक्ष्मण है। मैं किस मुंह से कैसे बोलूं, कि हनुमान जी अयोध्या से चले जाएं।

अब बारी आयी भरत जी की। भरत जी तो इतना रोये, कि राम जी को अयोध्या से निकलवाने का कलंक तो वैसे ही मुझ पर लगा है। आप सब मिलके हनुमान जी का और लगवा दो।

और दूसरी बात ये कि…!

बीतें अवधि रहहिं जौं प्राना।

अधम कवन जग मोहि समाना॥

मैंने तो नंदीग्राम में ही अपनी चिता लगा ली थी, वो तो हनुमान जी थे जिन्होंने आकर ये खबर दी कि…!

रिपु रन जीति सुजस सुर गावत।

सीता सहित अनुज प्रभु आवत॥

मैं तो बिल्कुल न बोलूं हनुमान जी से अयोध्या छोड़कर चले जाओ, आप किसी और से बुलवा लो।

अब बचा कौन..? सिर्फ शत्रुघ्न भैया। जैसे ही सब ने उनकी तरफ देखा,

तो शत्रुघ्न भैया बोल पड़े.. मैंने तो पूरी रामायण में कहीं नहीं बोला, तो आज ही क्यों बुलवा रहे हो, और वो भी हनुमान जी को अयोध्या से जाने के लिए। जिन्होंने ने माता सीता, लखन भैया, भरत भैया सब के प्राणों को संकट से उबारा हो, किसी अच्छे काम के लिए कहते तो बोल भी देता। मै तो बिल्कुल भी नहीं बोलूँगा।

अब बचे तो मेरे राम सरकार…

माता सीता ने कहा प्रभु! आप तो तीनों लोकों के स्वामी हो, और देखती हूं आप हनुमान जी से सकुचाते हैं। और आप खुद भी कहते हो कि…!

प्रति उपकार करौं का तोरा।

सनमुख होइ न सकत मन मोरा॥

आखिर आप के लिए क्या अदेय है प्रभु!

राम जी ने कहा, देवी मैं हनुमान जी का क़र्ज़दार जो हूं, , इसीलिए तो..

सनमुख होइ न सकत मन मोरा

देवी ! हनुमान जी का कर्ज़ा उतारना आसान नहीं है और इतना सामर्थ राम में नहीं है, जो “राम नाम” में है। क्योंकि कर्ज़ा उतारना भी तो बराबरी का ही पड़ेगा न…!

यदि सुनना चाहती हो तो सुनो – हनुमान जी का कर्ज़ा कैसे उतारा जा सकता है।

पहले हनुमान विवाह करें, लंकेश हरें इनकी जब नारी।

मुंदरी लै रघुनाथ चले, निज पौरुष लांघि अगम्य जे वारी।

आयि कहें, सुधि सोच हरें, तन से, मन से होई जाएं उपकारी।

तब रघुनाथ चुकायि सकें, ऐसी हनुमान की दिव्य उधारी।।

देवी ! इतना आसान नहीं है, हनुमान जी का कर्ज़ा चुकाना। मैंने ऐसे ही नहीं कहा था कि…!

  “सुनु सुत तोहि उरिन मैं नाहीं”

मैंने बहुत सोच विचार कर कहा था। लेकिन यदि आप कहती हो तो कल सभा में हनुमान जी से बोलूंगा कि वो भी कुछ मांग लें।

दूसरे दिन राज्य सभा में सब एकत्र हुए, सब बड़े उत्सुक थे कि हनुमान जी क्या मांगेंगे, और राम जी क्या देंगे।

राघव जी ने कहा– हनुमान सब लोगों ने मेरी बहुत सहायता की और मैंने, सब को कोई न कोई पद दे दिया। विभीषण और सुग्रीव को क्रमशः लंका और किष्कन्धा का राजपद, अंगद को युवराज पद। तो तुम भी अपनी इच्छा बताओ…?

हनुमान जी बोले – प्रभु आप ने जितने नाम गिनाए, उन सब को एक एक पद मिला है, और आप कहते हो…!

तैं मम प्रिय लछिमन ते दूना

तो फिर यदि मैं दो पद मांगू तो..?

सब लोग सोचने लगे बात तो हनुमान जी भी ठीक ही कह रहे हैं।

राम जी ने कहा ! ठीक है, मांग लो।

सब लोग बहुत खुश हुए कि आज हनुमान जी का कर्ज़ा चुकता हो जायेगा।

हनुमान जी ने कहा –  प्रभु जो पद आप ने सबको दिए हैं, उनके पद में राजमद हो सकता है, तो मुझे उस तरह के पद नहीं चाहिए, जिसमें राजमद की शंका हो।

राम जी ने पूछा – तो फिर…! आप को कौन सा पद चाहिए ?

हनुमान जी ने राम जी के दोनों चरण पकड़ लिए, प्रभु ..! हनुमान को तो बस यही दो पद चाहिए।

हनुमत सम नहीं कोउ बड़भागी।

नहीं कोउ रामचरण  अनुरागी।

 जानकी जी की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए राम जी बोले, लो उतर गया हनुमानजी का कर्जा! और अभी तक जिसको बोलना था, सब बोल चुके है, अब जो मै बोलता हूं उसे सब सुनो,

रामजी भरत भैया की तरफ देखते हुए बोले-

 हे! भरत भैया’ कपि से उऋण हम नाही”

हम चारों भाई चाहे जितनी बार जन्म ले लें, हनुमानजी से उऋण नहीं हो सकते।

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भक्त करने जा रहे हैं मंगलवार व्रत तो जानिए ये 8 काम की बातें, हनुमान जी चिंताओं से करेंगे मुक्त https://astrodeeva.com/do-hanuman-ji-fast-every-crisis-will-be-over-pur/ https://astrodeeva.com/do-hanuman-ji-fast-every-crisis-will-be-over-pur/#respond Tue, 02 Mar 2021 07:14:09 +0000 https://astrodeeva.com/?p=1732 हिंदू धर्म में मंगलवार के व्रत को बहुत महत्वपूर्ण बताया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि मंगलवार का व्रत करने से सभी प्रकार का भय दूर हो जाता है, इतना ही नहीं बल्कि मनुष्य की सभी चिंताएं भी खत्म हो जाती हैं। वर्तमान समय में ऐसे बहुत से लोग हैं जो महाबली हनुमान जी […]

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हिंदू धर्म में मंगलवार के व्रत को बहुत महत्वपूर्ण बताया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि मंगलवार का व्रत करने से सभी प्रकार का भय दूर हो जाता है, इतना ही नहीं बल्कि मनुष्य की सभी चिंताएं भी खत्म हो जाती हैं। वर्तमान समय में ऐसे बहुत से लोग हैं जो महाबली हनुमान जी की भक्ति करते हैं। मान्यता अनुसार अगर विधि विधान पूर्वक मंगलवार का व्रत किया जाए तो इससे बजरंगबली का विशेष आशीर्वाद मिलता है। शास्त्रों में इस बात का उल्लेख किया गया है कि जिन लोगों के ऊपर संकट मोचन हनुमान जी की कृपा दृष्टि बनी रहती है, उस व्यक्ति के जीवन की सभी समस्या दूर हो जाती हैं और व्यक्ति अपना जीवन सुखी पूर्वक व्यतीत करता है। आज हम आपको मंगलवार व्रत से जुड़ी हुई कुछ महत्वपूर्ण बातें बताने जा रहे हैं। अगर आप मंगलवार व्रत करने जा रहे हैं तो इन पर ध्यान जरूर दीजिए।

मंगलवार व्रत से जुड़ी हुई महत्वपूर्ण बातें

  • अगर आप महाबली हनुमान जी के भक्त हैं और मंगलवार का व्रत करने जा रहे हैं तो आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि मंगलवार के दिन आप सूर्य उदय से पहले ही उठ जाएँ।
  • मंगलवार को प्रातः काल उठकर आप अपने सभी नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नान कर लीजिए, इसके बाद आपको साफ-सुथरे कपड़े धारण करने होंगे।
  • अगर आप मंगलवार के दिन लाल रंग के वस्त्र धारण करते हैं तो यह बहुत ही शुभ माना जाता है, इसके बाद आप महाबली हनुमान जी को लाल पुष्प, सिंदूर, वस्त्र आदि अर्पित कीजिए।
  • मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा के दौरान श्रद्धा पूर्वक हनुमान प्रतिमा के समक्ष दीपक जलाएं और सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ कीजिए।
  • जो लोग मंगलवार का व्रत कर रहे हैं उनको इस बात का विशेष ध्यान देना होगा कि आप इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन कीजिए।
  • आप मंगलवार व्रत के दिन शाम के वक्त हनुमान जी को बेसन के लड्डू और खीर का भोग लगाएं, इसके बाद आप खुद नमक रहित भोजन का सेवन कीजिए।
  • अगर आप मंगलवार का व्रत करते हैं तो ऐसा माना जाता है कि इससे मांगलिक दोष से पीड़ित व्यक्तियों को लाभ मिलता है। मंगल ग्रह के दोष दूर हो जाते हैं।
  • मंगलवार का व्रत करने वाले व्यक्तियों को शनिदेव कभी भी परेशान नहीं करते हैं। यदि किसी व्यक्ति के ऊपर शनि की महादशा चल रही है या फिर कोई व्यक्ति शनि की साढ़ेसाती या ढैया से परेशान है तो मंगलवार का व्रत करना लाभकारी माना गया है। आपको इन सभी परेशानियों से छुटकारा प्राप्त होगा।

उपरोक्त मंगलवार का व्रत करने वाले भक्तों के लिए कुछ जरूरी काम की बातें बताई गई हैं। अगर आप इन बातों को ध्यान में रखते हुए मंगलवार व्रत करते हैं तो इससे बजरंगबली का आशीर्वाद आपके ऊपर हमेशा बना रहेगा और जीवन में चल रही सभी परेशानियां दूर होंगी। शास्त्रों के अनुसार महाबली हनुमान जी सबसे शक्तिशाली देवता माने गए हैं। कलयुग में यह अपने भक्तों से सबसे शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। जो भक्त अपने सच्चे मन से इनका स्मरण करता है, उसकी सहायता के लिए यह जरूर आते हैं। आप मंगलवार व्रत करके शुभ फल की प्राप्ति कर सकते हैं।

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