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*
* @param $instance
* @return array
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The post Ganesh Chaturthi 2021: घर में गणेश स्थापना, जानें शुभ मुहूर्त एवं पूजन विधि appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>अर्थ – घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर काय, करोड़ सूर्य के समान महान प्रतिभाशाली। मेरे प्रभु, हमेशा मेरे सारे कार्य बिना विघ्न के पूरे करने की कृपा करें॥
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को पूरे देश में गणेश चतुर्थी पर्व मनाया जाता हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र गणेश जी का जन्म भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन ही हुआ था , इसलिए इस दिन गणेश चतुर्थी या विनायक चतुर्थी का पर्व मनाया जाता हैं। इस वर्ष गणेश चतुर्थी 10 सितंबर 2021 , शुक्रवार को है। इस दिन लोग बप्पा का घर में स्वागत करते हैं और गणेश प्रतिमा की स्थापना कर के अगले 10 दिनों तक अपने सामर्थ के अनुसार विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं।
आम तौर पर 7 से 10 दिन के लिए भगवान गणेश जी की स्थापना करने की मान्यता है परंतु आज कल की अति व्यस्त दिनचर्या में यह बहुत मुश्किल है क्यूँकि गणपति जी की विधि-विधान से स्थापना नहीं करने पर विराजमान नहीं होते हैं और न ही उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है, इसलिए लोंग अपने सामर्थ के अनुसार 1.5 , 3, 5, 7, 10 दिन के लिए गणपति जी को अपने घर और दुकान में विराजमान करते हैं और विधि-विधान से पूजा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
आइये अब हम आप को बताते हैं की कैसे आप भी अपने घर में पूरे विधि-विधान से गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर सकते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
ऐसा माना जाता है की भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल के दौरान हुआ था इसीलिए मध्याह्न के समय को गणेश पूजा के लिए उपयुक्त माना जाता है।
मध्याहन गणेश पूजा मुहूर्त – सुबह 11 बजकर 03 मिनट से 01 बजकर 33 मिनट दोपहर तक (अभिजित मुहूर्त : 11:53 AM से 12:43 PM )
वर्जित चन्द्रदर्शन का समय – सुबह 9 बजकर 12 मिनट से रात 08 बजकर 53 मिनट तक
चतुर्थी तिथि आरम्भ – 10 सितंबर शुक्रवार को 12:18 ए एम बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त – 10 सितंबर शुक्रवार को 09:57 पी एम बजे
आवश्यक सामग्री : शुद्ध जल, गंगाजल, सिन्दूर, रोली, मौली , कपूर, घी, दही, शहद, दूर्वा , चीनी, पुष्प, पान, सुपारी, रूई, प्रसाद (मोदक / लड्डू गणेश जी को बहुत प्रिय है), पंचामृत, वस्त्र, जनेऊ, सुगंध( इत्र ), लाल चन्दन, अक्षत(चावल), पुष्प माला, सुगन्धित तेल, धूपबत्ती, दीपक इत्यादि|
गणेश चतुर्थी के दिन प्रात:काल स्नानादि से निवृत होकर गणेश पूजन की तैयारी करनी चाहिए | गणेश पूजन से पहले ध्यान रहे की गणेश जी की मूर्ति विराजमान या स्थापित करे | मूर्ति सोने, तांबे, चाँदी, मिट्टी या गाय के गोबर (अपने सामर्थ्य अनुसार) से बनाई जाती है | गणेश मूर्ति व गणपति पूजन सामग्री पूजा की थाली में रख कर पूजा विधि शुरू करे |
क्षमा-प्रार्थना मन्त्र
पूजा एवं आरती के बाद परिक्रमा करें और क्षमा मांगें कि पूजा में कोई भी कमी या भूल हुई तो उसके लिए माफ करें।
इस प्रकार आप अपने घर पर गणपति जी की विधि विधान से स्थापना करें ।
ॐ एकदन्ताय विद्धमहे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात ||
यह भगवान श्री गणेश का गायत्री मंत्र है इसमें कहा गया है कि हम उस परमात्मा स्वरुप एकदंत यानि एक दांत वाले भगवान श्री गणेश, जो कि सर्वव्यापी हैं, जिनकी सूंड हाथी के सूंड की तरह मुड़ी हुई है उनसे प्रार्थना करते हैं एवं सद्बुद्धि की कामना करते हैं। हम भगवान श्री गणेश को नमन करते हैं एवं प्रार्थना करते हैं कि वे अपने आशीर्वाद से हमारे मन-मस्तिष्क से अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान से प्रकाशित करें।
जरूरी बात:
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]]>The post भगवान गणेश ने मूषक को अपना वाहन क्यों चुना? appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>इस प्रश्न का उत्तर दो पौराणिक कथाओं में मिलता है। आइये जानते हैं मूषक के गणेश जी का वाहन बनने के पीछे की कथा :
गणेश पुराण के अनुसार द्वापर युग में एक दिन देवराज इंद्र के दरबार में गहन चर्चा चल रही थी। दरबार में उपस्थित समस्त देवगण चर्चा में लीन थे किंतु क्रौंच नामक गंधर्व अप्सराओं के साथ हँसी-ठिठोली कर रहा था। जब देवराज इंद्र की दृष्टि क्रौंच पर पड़ी, तो वे क्रोधित हो उठे और उसकी चंचलता भरी हरकत के कारण उसे मूषक बन जाने का श्राप दे दिया।
क्रौंच इंद्र के श्राप के कारण मूषक बना और स्वर्गलोक से पृथ्वीलोक में पराशर ऋषि के आश्रम में आ गिरा। स्वभाव से चंचल मूषक रूपी क्रौंच ने ऋषि आश्रम में उत्पात मचा दिया। उसने मिट्टी के समस्त पात्र तोड़ डाले, उसमें रखे अन्न का भक्षण कर लिया, ऋषियों के वस्त्र कुतर दिए और आश्रम की सुंदर वाटिका भी उजाड़ दी।
मूषक के इस उत्पात से पराशर ऋषि चिंतित हो गए और उससे छुटकारा दिलाने की प्रार्थना हेतु गणेश जी की शरण में पहुँचे।
गणेश जी ने पराशर ऋषि की प्रार्थना स्वीकार कर ली और मूषक रूपी क्रौंच को पकड़ने के लिए एक तेजस्वी पाश फेंका। पाश के बंधन से बचने के लिए क्रौंच पाताल लोक भाग गया। किंतु पाश ने पाताल लोक तक उसका पीछा किया और उसे बांधकर गणेश जी के समक्ष ला खड़ा किया।
साक्षात गणेश जी को अपन समक्ष देख मूषक रूपी क्रौंच भयभीत हो गया और वो भगवान गणेश जी से अपने प्राणों की भिक्षा मांगने लगा। तब गणेश जी बोले, “तूने पराशर ऋषि के आश्रम में बहुत उत्पात मचाया है, और तेरा ये क्र्त क्षमायोग्य तो नहीं है। किंतु शरणागत की रक्षा मेरा धर्म है। तुम्हें जो वरदान चाहिए मांग लो।”
गणेश जी की इस बात पर क्रौंच का अहंकार जाग उठा और वह बोला, “मुझे किसी वरदान की आवश्यकता नहीं है। आप चाहे तो मुझसे कोई वर मांग लें।”
अहंकारी क्रौंच के इस कथन पर गणेश जी मंद-मंद मुस्कुराये और बोले, “ऐसा ही सही। मैं तुझसे अपना वाहन बन जाने का वर मांगता हूँ।”
क्रौंच के पास कोई अन्य विकल्प न था। अपने कथन अनुसार वह गणेश जी का वाहन बन गया। गणेश जी जैसे ही मूषक रुपी क्रौंच पर सवार हुए, उनके भारी भरकम शरीर से वह दबने लगा और उसके प्राणों पर बन आई। उसका सारा अहंकार चूर-चूर हो गया। उसने गणेश जी से क्षमा माँगी और याचना की कि वे अपना वजन वहन करने योग्य कर लें। गणेश जी ने वैसा ही किया।
उस दिन से मूषक गणेश जी का वाहन बन गया। गणेश जी के वाहन के रूप में उसका नाम ‘डिंक’ पड़ा। गणेश जी की मूषक पर सवारी स्वार्थ पर विजय का संकेत है।
पौराणिक कथा के अनुसार गजमुखासुर नामक दैत्य ने देव लोक में उत्पात मचा रखा था। समस्त देवता उससे तंग थे। एक दिन सभी देवगण एकत्रित होकर गणेश जी की शरण में पहुँचे और उनसे गजमुखासुर दैत्य से मुक्ति दिलाने हेतु प्रार्थना करने लगे।
देवताओं की रक्षा के लिए गणेश जी ने गजमुखासुर से युद्ध किया। इस युद्ध में गणेश जी का एक दांत टूट गया। इसी दांत से गणेश जी ने गजमुखासुर पर प्रहार किया, जिससे बचने के लिए गजमुखासुर में मूषक का रूप धारण किया और युद्धस्थल से भाग खड़ा हुआ। किंतु गणेश जी ने उसे पकड़ लिया।
तब गजमुखासुर गणेश जी से क्षमायाचना करते हुए अपने प्राणों की भीख मांगने लगा। गणेश जी ने उसे क्षमा कर अपना वाहन बना लिया।
करें अष्टविनायक मंदिरों के दर्शन, मिलेगा विघ्नहर्ता का आर्शिवाद
मस्तक पर तिलक का दिन ओर रंग का असर
The post भगवान गणेश ने मूषक को अपना वाहन क्यों चुना? appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>The post Ganesh Chaturthi 2020: घर में गणपति स्थापना, जानें शुभ मुहूर्त एवं पूजन विधि appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा ||
अर्थ – घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर काय, करोड़ सूर्य के समान महान प्रतिभाशाली।
मेरे प्रभु, हमेशा मेरे सारे कार्य बिना विघ्न के पूरे करने की कृपा करें॥
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को पूरे देश में गणेश चतुर्थी पर्व मनाया जाता हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र गणेश जी का जन्म भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन ही हुआ था , इसलिए इस दिन गणेश चतुर्थी या विनायक चतुर्थी का पर्व मनाया जाता हैं। इस वर्ष गणेश चतुर्थी 22 अगस्त 2020 , शनिवार को है। इस दिन लोग बप्पा का घर में स्वागत करते हैं और गणेश प्रतिमा की स्थापना कर के अगले ११ दिनो तक अपने सामर्थ के अनुसार विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं।
आम तौर पर 7 से 10 दिन के लिए भगवान गणेश जी की स्थापना करने की मान्यता है परंतु आज कल की अति व्यस्त दिनचर्या में यह बहुत मुश्किल है क्यूँकि गणपति जी की विधि-विधान से स्थापना नहीं करने पर विराजमान नहीं होते हैं और न ही उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है, इसलिए लोंग अपने सामर्थ के अनुसार 1.5 , 3, 5, 7, 10 दिन के लिए गणपति जी को अपने घर और दुकान में विराजमान करते हैं और विधि-विधान से पूजा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
आइये अब हम आप को बताते हैं की कैसे आप भी अपने घर में पूरे विधि-विधान से गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर सकते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
गणपति स्थापना और पूजा मुहूर्त
ऐसा माना जाता है की भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल के दौरान हुआ था इसीलिए मध्याह्न के समय को गणेश पूजा के लिए उपयुक्त माना जाता है।
मध्याहन गणेश पूजा मुहूर्त – सुबह 11 बजकर 07 मिनट से 01 बजकर 41 मिनट दोपहर तक (अभिजित मुहूर्त : 11:58 AM से 12:41PM )
वर्जित चन्द्रदर्शन का समय – सुबह 9 बजकर 07 मिनट से रात 09 बजकर 26 मिनट तक
चतुर्थी तिथि आरम्भ – 21 अगस्त शुक्रवार 11 बजकर 02 मिनट पर
चतुर्थी तिथि समाप्त – 22 अगस्त शनिवार – शाम 07 बजकर 57 मिनट तक
ये भी पढ़ें : संकट हरण गणेश चतुर्थी व्रत की विधी एवं लाभ
गणेश पूजन / गणपति पूजन सामग्री
आवश्यक सामग्री : शुद्ध जल, गंगाजल, सिन्दूर, रोली, मौली , कपूर, घी, दही, शहद, दूर्वा , चीनी, पुष्प, पान, सुपारी, रूई, प्रसाद (मोदक / लड्डू गणेश जी को बहुत प्रिय है), पंचामृत, वस्त्र, जनेऊ, सुगंध( इत्र ), लाल चन्दन, अक्षत(चावल), पुष्प माला, सुगन्धित तेल, धूपबत्ती, दीपक इत्यादि |
गणेश / गणपति पूजन विधि
गणेश चतुर्थी के दिन प्रात:काल स्नानादि से निवृत होकर गणेश पूजन की तैयारी करनी चाहिए | गणेश पूजन से पहले ध्यान रहे की गणेश जी की मूर्ति विराजमान या स्थापित करे | मूर्ति सोने, तांबे, चाँदी, मिट्टी या गाय के गोबर (अपने सामर्थ्य अनुसार) से बनाई जाती है | गणेश मूर्ति व गणपति पूजन सामग्री पूजा की थाली में रख कर पूजा विधि शुरू करे |
क्षमा-प्रार्थना मन्त्र
पूजा एवं आरती के बाद परिक्रमा करें और क्षमा मांगें कि पूजा में कोई भी कमी या भूल हुई तो उसके लिए माफ करें।
गणेशपूजने कर्म यत् न्यूनमधिकम कृतम।
तेन सर्वेण सर्वात्मा प्रसन्न अस्तु गणपति सदा मम।।
इस प्रकार आप अपने घर पर गणपति जी की विधि विधान से स्थापना करें ।
ये भी पढ़े : गणेशोत्सव में करें अष्टविनायक मंदिरों के दर्शन, मिलेगा विघ्नहर्ता का आर्शिवाद
गणेश गायत्री मंत्र
ॐ एकदन्ताय विद्धमहे, वक्रतुण्डाय धीमहि
तन्नो दन्ति प्रचोदयात ||
यह भगवान श्री गणेश का गायत्री मंत्र है इसमें कहा गया है कि हम उस परमात्मा स्वरुप एकदंत यानि एक दांत वाले भगवान श्री गणेश, जो कि सर्वव्यापी हैं, जिनकी सूंड हाथी के सूंड की तरह मुड़ी हुई है उनसे प्रार्थना करते हैं एवं सद्बुद्धि की कामना करते हैं। हम भगवान श्री गणेश को नमन करते हैं एवं प्रार्थना करते हैं कि वे अपने आशीर्वाद से हमारे मन-मस्तिष्क से अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान से प्रकाशित करें।
जरूरी बात:
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