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* Gets views count.
*
* @param int $id The Post ID.
* @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7])
* @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999)
* @return string
*/
function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) {
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if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) {
/**
* Do Query
*
* @param $instance
* @return array
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function jnews_view_counter_query( $instance ) {
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The post Lunar Eclipse 2022 : इस वर्ष लगने वाले चंद्र ग्रहण और उनका प्रभाव appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>वहीं विज्ञान के अनुसार जब कभी पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है तो इससे ही चंद्र ग्रहण ( Lunar Eclipse) की उत्पत्ति होती है। चलिए जानते हैं साल 2022 में लगने वाले चंद्र ग्रहण का भारत में समय (Chandra Grahan 2022 In India)और सूतक काल-
वर्ष 2022 का पहला चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार सोमवार, 16 मई 2022 की सुबह 08 बजकर 59 मिनट से शुरु होकर 10 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण रहेगा। वहीं इस चंद्रग्रहण की भारत में दृश्यता शून्य होने के चलते इसका सूतक काल (Sutak Kaal) मान्य नहीं होगा।

वर्ष 2022 का प्रथम चंद्रग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा, जबकि यह दक्षिणी-पश्चिमी एशिया,अफ्रीका,दक्षिणी-पश्चिमी यूरोप और उत्तरी अमेरिका के अधिकांश हिस्सों में दिखेगा साथ ही यह हिंद महासागर, दक्षिण अमेरिका, अटलांटिक, अंटार्कटिका और प्रशांत महासागर में भी दिखाई देगा।
वर्ष 2022 का दूसरा चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार मंगलवार, 8 नवंबर 2022 को शाम 05 बजकर 28 मिनट से शाम 07 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। पहले चंद्रग्रहण से अलग यह चंद्र ग्रहण भारत में कुछ स्थानों पर दिखेगा। ऐसे में इस ग्रहण का धार्मिक प्रभाव और सूतक भारत में मान्य रहेगा।

दूसरे व वर्ष के अंतिम चंद्रग्रहण को हिंद महासागर, एशिया, उत्तर-पूर्वी यूरोप, अधिकांश दक्षिण अमेरिका, उत्तर अमेरिका, अटलांटिक, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, आर्कटिक सहित प्रशांत महासागर में दिखाई देगा। भारत में भी इस चंद्रग्रहण के दिखाई देने के चलते इसका सूतक देश में भी लगेगा।
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]]>The post Solar Eclipse 2022 : इस वर्ष लगने वाले सूर्य ग्रहण और उनका प्रभाव appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>ऐसी मान्यता है कि जब भी सूर्यग्रहण लगता है तो इसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ता है, लेकिन साल का पहला सूर्य ग्रहण आंशिक है। आइए जानते हैं कि इस सूर्य ग्रहण का प्रभाव कहां-कहां रहेगा, किस राशि पर लगेगा और कितने समय के लिए रहेगा यह सूर्य ग्रहण।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 30 अप्रैल 2022 को पहला सूर्य ग्रहण लग रहा है। भारतीय समय के अनुसार 30 अप्रैल 2022 शनिवार को लगने वाला पहला सूर्य ग्रहण रात 12:15 से प्रारंभ होकर सुबह 4:07 पर समाप्त होगा। वृषभ राशि में लगने वाले इस सूर्य ग्रहण का प्रभाव आंशिक रहेगा।
यह सूर्य ग्रहण दक्षिण और वेस्ट साउथ अमेरिका, प्रशांत महासागर, अटलांटिका और अंटार्कटिका महासागर जैसे क्षेत्र में दिखाई देगा। पहला सूर्यग्रहण आंशिक होने के चलते भारत पर इसका प्रभाव नहीं रहेगा। इसी कारण सूतक के नियमों का पालन नहीं करना होगा, क्योंकि जब पूर्ण ग्रहण लगता है तो सूतक के नियमों का पालन किया जाता है।
25 अक्टूबर मंगलवार को साल 2022 का दूसरा सूर्य ग्रहण लगेगा। भारतीय समय के अनुसार इसका समय शांम 4:29:10 से शुरू होकर 5:42:01 पर समाप्त होगा।

ये ग्रहण अफ्रीका महाद्वीप के उत्तरपूर्वी भाग, यूरोप, एशिया के दक्षिण-पश्चिमी भाग और अटलांटिक में देखा जा सकेगा। साथ ही इस सूर्य ग्रहण को भारत के कुछ जगहों पर देखा जा सकेगा। इसलिए भारत में इस सूर्य ग्रहण का धार्मिक प्रभाव और सूतक मान्य होगा।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब ग्रहण आंशिक होता है, उस दौरान सूतक काल के नियमों का पालन करना अनिवार्य नहीं होता है, परंतु अगर ग्रहण पूर्ण लगा हो तो सूतक प्रभावी माना जाता है। इसमें कई नियम होते हैं जिनका पालन किया जाना अनिवार्य होता है।
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]]>The post Holi 2022 : होली की रात को किए जाने वाले कुछ ज्योतिष उपाय appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>भारत समेत दुनियाभर में होली (Holi 2022) की तैयारी जोरों पर है। हमारे देश में प्राचीन समय से ही टोटके और उपायों का बहुत ही प्रचलित है। अक्सर हम देखते हैं कि किसी भी तरह के शुभ कार्यों की शुरुआत करने से पहले कुछ न कुछ उपाय जरूर किये जाते हैं ताकि काम सफलतापूर्वक पूर्ण हो। ज्योतिष शास्त्रों में होली (Holi) की रात को सिद्धि की रात कहा गया है और दिन किए गए उपाय बहुत ही जल्दी शुभ फल प्रदान करते हैं।
मान्यता है कि इस दिन ( Holi 2022) नकारात्मक और सकारात्मक उर्जा दोनों ही बहुत सक्रिय रहते हैं। इसलिए इस दिन का प्रयोग सदियों से सिद्धियां हासिल करने के लिए लोग करते आए हैं। अगर आप भी किसी परेशानी से जूझ रहे हैं तो इस दिन नीचे बताए उपायों को आजमाकर लाभ और उन्नति प्राप्त कर सकते हैं।
होली की रात चंद्रमा के उदय होने के बाद अपने घर की छत पर या खुली जगह, जहां से चांद नजर आए, वहां खड़े हो जाएं। फिर चंद्रमा का स्मरण करते हुए चांदी की प्लेट में सूखे छुहारे तथा कुछ मखाने रखकर शुद्ध घी के दीपक के साथ धूप एवं अगरबत्ती अर्पित करें। अब दूध से चंद्रमा को अर्घ्य दें।
अर्घ्य के बाद सफेद मिठाई तथा केसर मिश्रित साबूदाने की खीर अर्पित करें। चंद्रमा से समृद्धि प्रदान करने का निवेदन करें। बाद में प्रसाद और मखानों को बच्चों में बांट दें। फिर लगातार आने वाली प्रत्येक पूर्णिमा की रात चंद्रमा को दूध का अर्घ्य दें। कुछ ही दिनों में आप महसूस करेंगे कि आर्थिक संकट दूर होकर समृद्धि निरंतर बढ़ रही है।
होली ( Holi 2022) की रात उत्तर दिशा में बाजोट (पटिए) पर सफेद कपड़ा बिछाकर उस पर मूंग, चने की दाल, चावल, गेहूं, मसूर, काले उड़द एवं तिल की ढेरी बनाएं। अब उस पर नवग्रह यंत्र स्थापित करें। उस पर केसर का तिलक करें, घी का दीपक लगाएं एवं नीचे लिखे मंत्र का जाप करें। जाप स्फटिक की माला से करें। जाप पूरा होने पर यंत्र को पूजा स्थान पर स्थापित करें, ग्रह अनुकूल होने लगेंगे।
मंत्र- ब्रह्मा मुरारी स्त्रीपुरान्तकारी भानु शशि भूमि-सुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतव: सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु ..
एकाक्षी नारियल को लाल कपड़े में गेहूं के आसन पर स्थापित करें और सिंदूर का तिलक करें। अब मूंगे की माला से नीचे लिखे मंत्र का जाप करें। 21 माला जाप होने पर इस पोटली को दुकान में ऐसे स्थान पर टांग दें, जहां ग्राहकों की नजर इस पर पड़ती रहे। इससे व्यापार में सफलता मिलने के योग बन सकते हैं।
मंत्र- ऊं श्रीं श्रीं श्रीं परम सिद्धि व्यापार वृद्धि नम :.
दूसरे पान के पत्ते से उस पत्ते को ढक दें और 7 बार होलिका की परिक्रमा करते हुए ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। परिक्रमा समाप्त होने पर सारी सामग्री होलिका में अर्पित कर दें तथा पूजन के बाद प्रणाम करके घर वापस आ जाएं। अगले दिन पान के पत्ते वाली सारी नई सामग्री ले जाकर पुन: यही क्रिया करें। जो धातुएं आपने दबाई हैं, उनको निकाल लाएं।
फिर किसी सुनार से तीनों धातुओं को मिलाकर अपनी मध्यमा उंगली के माप का छल्ला बनवा लें। 15 दिन बाद आने वाले शुक्ल पक्ष के गुरुवार को छल्ला धारण कर लें। इस उपाय से धन लाभ के योग बन सकते हैं।
होली के दिन सुबह एक साबूत पान पर साबूत सुपारी एवं हल्दी की गांठ शिवलिंग पर चढ़ाएं तथा पीछे पलटे बगैर अपने घर आ जाएं। यही प्रयोग अगले दिन भी करें। जल्दी ही आपके विवाह के योग बन सकते हैं।
होलिका दहन से पूर्व जब गड्ढा खोदें, तो सबसे पहले उसमें थोड़ी चांदी, पीतल व लोहा दबा दें। यह तीनों धातु सिर्फ इतनी मात्रा में होनी चाहिए, जिससे आपकी मध्यमा उंगली के नाप का छल्ला बन सके। इसके बाद विधि-विधान से दाण्डा रोपे। जब आप होलिका पूजन को जाएं, तो पान के एक पत्ते पर कपूर, थोड़ी-सी हवन सामग्री, शुद्ध घी में डुबोया लौंग का जोड़ा तथा बताशे रखें।
दूसरे पान के पत्ते से उस पत्ते को ढक दें और 7 बार होलिका की परिक्रमा करते हुए ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। परिक्रमा समाप्त होने पर सारी सामग्री होलिका में अर्पित कर दें तथा पूजन के बाद प्रणाम करके घर वापस आ जाएं। अगले दिन पान के पत्ते वाली सारी नई सामग्री ले जाकर पुन: यही क्रिया करें। जो धातुएं आपने दबाई हैं, उनको निकाल लाएं।
फिर किसी सुनार से तीनों धातुओं को मिलाकर अपनी मध्यमा उंगली के माप का छल्ला बनवा लें। 15 दिन बाद आने वाले शुक्ल पक्ष के गुरुवार को छल्ला धारण कर लें। इस उपाय से धन लाभ के योग बन सकते हैं।
अगर आप किसी बीमारी से पीडि़त हैं, तो इसके लिए भी होली की रात को खास उपाय करने से आपकी बीमारी दूर हो सकती है। होली की रात आप नीचे लिखे मंत्र का जाप तुलसी की माला से करें।
मंत्र- ऊं नमो भगवते रुद्राय मृतार्क मध्ये संस्थिताय मम शरीरं अमृतं कुरु कुरु स्वाहा
The post Holi 2022 : होली की रात को किए जाने वाले कुछ ज्योतिष उपाय appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>The post Rahu Kaal : राहु काल क्या है, इसमें शुभ कार्य करना वर्जित क्यों है? appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>राहु काल, प्रत्येक दिवस की एक निश्चित समयावधि होती है, जो लगभग डेढ़ घण्टे (एक घण्टा तीस मिनट) तक रहती है। राहु काल, सूर्योदय तथा सूर्यास्त के मध्य, दिन के आठ खण्डों में से एक खण्ड है। एक निश्चित स्थान के अनुसार, सूर्योदय तथा सूर्यास्त के मध्य की कुल समयावधि को निकालकर, उस अवधि को आठ से विभाजित करने के पश्चात्, दिन के आठ खण्डों की गणना की जाती है।
सूर्योदय तथा सूर्यास्त के स्थानीय समय में अन्तर के कारण, राहु काल का समय व अवधि दो स्थानों के लिये समान नहीं होती है। यहाँ तक कि, एक स्थान के लिये भी राहु काल का समय व अवधि सभी दिनों के लिये समान नहीं होती है, क्योंकि प्रतिदिन सूर्योदय तथा सूर्यास्त का समय परिवर्तित होता रहता है। अन्य शब्दों में कहें तो, राहु काल प्रत्येक स्थान तथा दिन के अनुसार परिवर्तित होता रहता है। इसलिये, राहु काल प्रत्येक दिन देखना चाहिये।
सूर्योदय के पश्चात् प्रथम खण्ड (सूर्योदय एवं सूर्यास्त के बीच के आठ खण्डो में से एक) सदैव शुभः होता है, यह लगभग डेढ़ घण्टे तक रहता है। माना जाता है कि, यह अवधि सदैव राहु के प्रभाव से मुक्त रहती है। सोमवार को राहु काल दूसरे खण्ड में, शनिवार को तीसरे खण्ड में, शुक्रवार को चौथे खण्ड में, बुधवार को पाँचवें खण्ड में, गुरुवार को छठे खण्ड में, मंगलवार को सातवें तथा रविवार को आठवें खण्ड में रहता है।
कुछ लोग, राहु काल को रात्रि की अवधि के लिये भी मानते हैं, जो कि कम लोकप्रिय है, क्योंकि अधिकांश महत्वपूर्ण एवं शुभः कार्य दिन के समय आरम्भ किये जाते हैं। रात्रि के समय राहु काल की गणना सूर्यास्त तथा अगले दिन सूर्योदय के बीच की अवधि को आठ से विभाजित करके भी की जा सकती है। मंगलवार, शुक्रवार तथा रविवार के दिन राहु काल का सप्ताह के अन्य दिनों की तुलना में अधिक प्रभाव पड़ता है। मुख्यतः दक्षिण भारत में, राहु काल को अत्यधिक महत्व दिया जाता है।
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