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हल षष्ठी (Hal Shashthi ) एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम को समर्पित है। भगवान बलराम माता देवकी और वासुदेव जी के सातवें संतान थे। हल षष्ठी का त्योहार भगवान बलराम की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है आज के दिन भगवान श्री कृष्ण के बड़े भ्राता बलराम जी का जन्म हुआ था बलराम जी का शस्त्र हल था इसलिए इस दिन हल की पूजा की जाती हैं साथ ही बैलों की भी पूजा की जाती हैं इसलिए इसे किसानो का त्यौहार भी कहते हैं।

हल षष्ठी/ हल छठ की पूजा का हिन्दू पर्व में बहुत अधिक महत्व हैं | आमतौर पर यह उत्तर भारत में मनाया जाता हैं | यह व्रत पुत्रवती स्त्रियाँ अपने पुत्र की लंबी आयु के लिए करती हैं | यह हर छठ का व्रत बहुत नियम कायदों के साथ किया जाता हैं|

इसे राजस्थान मध्यप्रदेश में ललही छठ जैसे अन्य राज्यों में विभिन्न नामों से जाना जाता है, इसे गुजरात में चंद्र षष्ठी के रूप में जाना जाता है, और ब्रज क्षेत्र में बलदेव छठ को रंधन छठ के रूप में जाना जाता है। भगवान बलराम को शेषनाग के अवतार के रूप में पूजा जाता है, जो क्षीर सागर में भगवान विष्णु के हमेशा साथ रहिने वाली शैया के रूप में जाने जाते हैं।

संबंधित अन्य नाम भी प्रचलित हैं।

बलराम जयन्ती, ललही छठ, बलदेव छठ, रंधन छठ, हलछठ, हरछठ व्रत, चंदन छठ, तिनछठी, तिन्नी छठ आदि नामों से जाना जाता है।

कब मनायी जाती हैं या बलराम जयंती?

हल छठ का त्यौहार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता हैं, कुछ लोग हल छठ का त्यौहार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाते हैं | महिलायें अपने पुत्र की रक्षा के लिए यह त्यौहार बड़े उत्साह के साथ पुरे विधि विधान से करती हैं |

हल षष्ठी 2022 – Hal Shashthi 2022

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 2022 में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि 16 अगस्त, मंगलवार को रात 08.19 से शुरू होगी और 17 अगस्त, बुधवार रात 09.21 मिनट तक रहेगी। 17 अगस्त को उदया तिथि होने के चलते आज हल षष्ठी का व्रत किया जाएगा। इस पूरे दिन हल षष्ठी की पूजा की जा सकेगी।

हल षष्ठी व्रत और पूजा सामग्री(Hal Shashthi 2022 Puja Samagri)

  •  भेंस का दूध, घी, दही गोबर।
  • महुये का फल, फुल एवम पत्ते
  • जवार की धानी
  • ऐपन
  • कुल्वे (छोते से मिट्टी के कुल्हड़)
  • देवली छेवली (बांस और महुये के पत्ते से बना होते हैं।)
  • कुशा

इस विधि से करें हल षष्ठी व्रत और पूजा (Hal Shashthi 2022 Puja Vidhi)

प्रातः काल उठकर महुयें से दांत साफ़ किये जाते हैं| इस दिन बिना हल से जूते खाद्य पदार्थ खाये जाते हैं | पसई धान के चावल, भेंस के दूध का उपयोग भोजन में किया जाता हैं | भोजन पूजा के बाद किया जाता हैं | यह व्रत पुत्रवती स्त्रियाँ ही करती हैं | इस व्रत की पूजा हेतु भेंस के गोबर से पूजा घर में घर की दिवार पर हर छठ माता का चित्र बनाया जाता हैं | एपन तैयार किया जाता हैं | उससे चित्र का श्रृंगार किया जाता हैं |

ऐपन (चित्र)बनाने की विधि : पूजा के चावल को पानी में भीगा कर रखा जाता हैं | फिर उसे सिल बट्टे पर पिस कर उसमे हल्दी मिलाई जाती हैं | एक लेप की तरह घोल तैयार होता हैं उसे ऐपन कहते हैं | इस चित्र में हल, सप्त ऋषि, पशु ,किसान मान्यतानुसार कई चित्र बनाये जाते हैं | कई परिवार केवल हाथों के छापे बनाकर उनकी पूजा करते हैं |हाथो में ऐपन लगाकर उसके छापे दीवार पर बनाकर उनकी पूजा की जाती हैं |

पूजा के लिए पाटे पर कलश सजाया जाता हैं | गणेश जी एवम माता गौरा को स्थापित किया जाता हैं | साथ ही मिट्टी के कुल्वे में ज्वार की धानी एवम महुआ का फल भरा जाता हैं | एक मटकी में देवली छेवली को रखा जाता हैं | सबसे पहले कलश की पूजा कर गणेश जी एवम माता गौरा की पूजा की जाती हैं | फिर हर छठ माता की पूजा की जाती हैं | उसके बाद कुल्वे एवम मटकी की पूजा की जाती हैं |

पूजा के बाद हर छठ की कथा पढ़ी जाती हैं | माता जी की आरती की जाती हैं | आरती के बाद वही बैठकर महुयें के पत्ते पर महुये का फल रख कर उसे भेस के दूध से बने दही के साथ खाया जाता हैं | पूजा के बाद व्रत पूरा करने हेतु भोजन में पसई धान के चावल एवम भेंस के दूध से बनी वस्तुयें खाई जाती हैlभाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता श्री बलरामजी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन श्री बलरामजी का जन्म हुआ था।

हल षष्ठी की कथा( Legend Of Hal Shashthi)

एक ग्वालिन थी वो दूध दही बेचकर अपना जीवन चालन करती थी। वह गर्भवती थी। एक दिन जब वह दूध बेचने जा रही थी तो उसे प्रसव का दर्द शुरू हुआ। वह समीप पर एक पेड़ के नीचे बैठ गई जहाँ उसने एक पुत्र को जन्म दिया। गोवालिन को दूध ख़राब होने की चिंता थी, इसलिए अपने बेटे को पेड़ के नीचे सुलाकर वो गाँव में दूध बेचने चली गई। उस दिन हर छठ व्रत में सभी को भेंस का दूध चाहिए था। ग्वालिन के पास केवल गाय का दूध था उसने झूठ बोलकर सभी को भेस का दूध बताकर पूरा गाय का दूध बेच दिया। इससे हर छठ माता क्रोधित हो गई। और उसके बेटे के प्राण हरदम। जब ग्वालिन आई उसे अपनी करनी पर बहुत संताप हुआ और उसने गाँव में जाकर सभी के सामने अपने गुनाह को स्वीकार कर लिया। सभी से पैर पकड़कर क्षमा मांगी। उसके इस तरह से विलाप को देख कर उसे सभी ने माफ़ कर दिया। जिससे हर छठ माता प्रसन्न हो गई। और उसका बेटा जीवित हो गया। तब से ही पुत्र की लंबी उम्र के लिए हर छठ माता का व्रत एवम पूजा की जाती हैं।

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जन्माष्टमी 2021: बन रहा है 101 साल बाद या दुर्लभ संयोग, त्यौहार कब और कैसे मनायें https://astrodeeva.com/%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%ae%e0%a5%80-2021-%e0%a4%ac%e0%a4%a8-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-101-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2/ https://astrodeeva.com/%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%ae%e0%a5%80-2021-%e0%a4%ac%e0%a4%a8-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-101-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2/#respond Mon, 30 Aug 2021 04:17:25 +0000 https://astrodeeva.com/?p=2388 हिन्दू मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु जी को ही श्री राम और श्री कृष्ण के रूप में पूजा जाता है | भगवान श्री कृष्ण मानव योनि के सभी पड़ाव से होकर (जन्म , मृत्यु , दुख और प्रसंता ,आनंद आदि ) गुजरे है | पुराणों के अनुसार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्री कृष्ण का कंस के कारगर […]

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हिन्दू मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु जी को ही श्री राम और श्री कृष्ण के रूप में पूजा जाता है | भगवान श्री कृष्ण मानव योनि के सभी पड़ाव से होकर (जन्म , मृत्यु , दुख और प्रसंता ,आनंद आदि ) गुजरे है | पुराणों के अनुसार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्री कृष्ण का कंस के कारगर मे देवकी और वासुदेव जी के यहाँ मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र मे जन्म हुआ था |

जन्माष्टमी पर्व का महत्व

इस दिन कई लोग व्रत रखते हैं। भजन-कीर्तन करते हैं। विधिपूर्वक कृष्ण भगवान की पूजा अर्चना की जाती है। कृष्ण भगवान के जन्म की कथा सुनी जाती है। लोग अपने घरों को सजाते हैं। इस दिन कृष्ण जी के मंदिरों में एक अलग ही रौनक देखने को मिलती है। कई जगह कृष्ण जी की लीलाओं का प्रदर्शन भी किया जाता है। क्योंकि भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था इसलिए रात में ही भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप को नहलाया जाता है और उन्हें नए वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। इस दिन बाल गोपाल को पालने में झुलाने की भी परंपरा है।

जन्माष्टमी 2021

भगवान श्री कृष्ण जी के जन्मोत्सव को जन्माष्टमी के रूप मे मनाया जाता है | इस वर्ष ये त्यौहार 30 अगस्त 2021 को मनाया जाएगा और दही-हांडी का त्यौहार 31 अगस्त 2021 को मनाया जाएगा | ज्योतिष शास्त्र की गणना के अनुसार, इस वर्ष 101 साल बाद जयंती योग का यह अत्यंत दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस बार इसी जयंती योग में जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जायेगा। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, श्रीकृष्ण जी का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, दिन सोमवार, रोहिणी नक्षत्र व वृष राशि में मध्य रात्रि को हुआ था। ज्योतिष शास्त्र की गणना के अनुसार, इस बार भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 30 अगस्त को दिन सोमवार, भादो माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। चंद्रमा वर्ष राशि में रहेंगे। रोहिणी नक्षत्र का प्रवेश भी 30 अगस्त को सुबह 6 बजकर 39 मिनट पर हो जाएगा। अष्टमी तिथि भी सोमवार की मध्यरात्रि 31 अगस्त, 01 बजकर 59 मिनट तक रहेगी। तत्पश्चात बाद नवमी लग जाएगी। इस प्रकार से देखें तो अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और सोमवार दिन तीनों का एक साथ मिलना दुर्लभ है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 101 साल बाद या दुर्लभ संयोग बना है। पंचांग के मुताबिक़, अष्टमी तिथि 29 अगस्त को रात्रि 11 बजकर 25 मिनट पर लग जाएगी।

जन्माष्टमी का मुहूर्त

भगवान श्रीकृष्ण का 5248वाँ जन्मोत्सव

निशीथ पूजा – 11:59 पी एम से 12:44 ए एम, अगस्त 31( 45 मिनट )

पारण -09:44 ए एमअगस्त 31 के बाद

अष्टमी तिथि  प्रारम्भ -अगस्त 29, 2021 को 11:25 पी एम बजे अष्टमी तिथि समाप्त -अगस्त 31, 2021 को 01:59 ए एम बजे

रोहिणी नक्षत्र प्रारम्भ – अगस्त 30, 2021 को 06:39 ए एम बजे
रोहिणी नक्षत्र समाप्त – अगस्त 31, 2021 को 09:44 ए एम बजे

जन्माष्टमी पूजा विधि

जन्माष्टमी पर्व के दिन प्रातः काल उठकर नित्य कर्मों से निर्वत होकर घर पर ही स्नान आदि से निर्वत होकर जन्माष्टमी व्रत का संकल्प लिया जाता है | जन्माष्टमी पर पूरा दिन भक्त उपवास रखते है फिर शाम को फिर से  सन्नान आदि से निर्वत होकर मंदिर को सजाते है और मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म समय के उपरांत दक्षिणवर्ती शंख से स्नान कराके और शृंगार करके उनको झूले पे विठाते है और शासत्रानुसार विधि पूर्वक पूजा करते है | मान्यता है कि जो कोई भी श्रद्धा से भगवान वासुदेव जी की पूजा करता है उस के सारे कष्ट मिट जाते हैं और उस सारी मनोकामना पूर्ण होती है।

Vishnu Sahasranamam Stotram-विष्णु सहस्रनाम

भोग प्रसाद 

इस दिन धनिया पंजीरी और माखन मिश्री का भोग लगाया जाता है | मथुरा मे बाँके बिहारी जी के मंदिर मे 56 भोग को चड़ाया जाता है और उसे बाद मै भक्तों मे प्रसाद के रूप में बाँट दिया जाता है |

दही-हांडी 

जन्माष्टमी के अगले दिन दही हांडी का त्यौहार मनाया जाता है ये त्यौहार महाराष्ट्र और गुजरात मे अधिक प्रचलित है वेसे तो हम सभी जानते है की भगवान श्री कृष्ण को माखन कितना अधिक पसंद था वो गोपियों की मटकी से माखन चुरा कर खाया करते थे | श्री कृष्ण जी की इसी लीला को को भक्तों के मन मे जीवंत करने के लिए दही- हांडी का त्यौहार मनाया जाता है |

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जन्माष्टमी 2020 का त्यौहार कब और कैसे मनायें https://astrodeeva.com/%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%ae%e0%a5%80-2020-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%ac/ https://astrodeeva.com/%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%ae%e0%a5%80-2020-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8c%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%ac/#comments Sat, 08 Aug 2020 06:45:13 +0000 https://astrodeeva.com/?p=401 हिन्दू मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु जी को ही श्री राम और श्री कृष्ण के रूप में पूजा जाता है | भगवान श्री कृष्ण मानव योनि के सभी पड़ाव से होकर (जन्म , मृत्यु , दुख और प्रसंता ,आनंद आदि ) गुजरे है | पुराणों के अनुसार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्री कृष्ण का कंस के कारगर […]

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हिन्दू मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु जी को ही श्री राम और श्री कृष्ण के रूप में पूजा जाता है | भगवान श्री कृष्ण मानव योनि के सभी पड़ाव से होकर (जन्म , मृत्यु , दुख और प्रसंता ,आनंद आदि ) गुजरे है | पुराणों के अनुसार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्री कृष्ण का कंस के कारगर मे देवकी और वासुदेव जी के यहाँ मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र मे जन्म हुआ था |

जन्माष्टमी 2020

भगवान श्री कृष्ण जी के जन्मोत्सव को जन्माष्टमी के रूप मे मनाया जाता है | इस वर्ष ये त्यौहार 11 अगस्त 2020 को मनाया जाएगा और दही-हांडी का त्यौहार 12 अगस्त 2020 को मनाया जाएगा | 

जन्माष्टमी का मुहूर्त

निशीथ पूजा – 00:05 से 00:45 ( 45 मिनट )

 पारण -11:15 ( 12 अगस्त ) के बाद

 अष्टमी तिथि आरंभ -09:06 ( 11 अगस्त )

अष्टमी तिथि समाप्त -11:00 (12 अगस्त )

रोहिणी समाप्त –रोहिणी नक्षत्र रहित जन्माष्टमी 

जन्माष्टमी पूजा विधि 

 जन्माष्टमी पर्व के दिन प्रातः काल उठकर नित्य कर्मों से निर्वत होकर घर पर ही स्नान आदि से निर्वत होकर जन्माष्टमी व्रत का संकल्प लिया जाता है | जन्माष्टमी पर पूरा दिन भक्त उपवास रखते है फिर शाम को फिर से  सन्नान आदि से निर्वत होकर मंदिर को सजाते है और मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म समय के उपरांत दक्षिणवर्ती शंख से स्नान कराके और शृंगार करके उनको झूले पे विठाते है और शासत्रानुसार विधि पूर्वक पूजा करते है | मान्यता है कि जो कोई भी श्रद्धा से भगवान वासुदेव जी की पूजा करता है उस के सारे कष्ट मिट जाते हैं और उस सारी मनोकामना पूर्ण होती है।

भोग प्रसाद 

इस दिन धनिया पंजीरी और माखन मिश्री का भोग लगाया जाता है | मथुरा मे बाँके बिहारी जी के मंदिर मे 56 भोग को चड़ाया जाता है और उसे बाद मै भक्तों मे प्रसाद के रूप में बाँट दिया जाता है |

दही-हांडी 

जन्माष्टमी के अगले दिन दही हांडी का त्यौहार मनाया जाता है ये त्यौहार महाराष्ट्र और गुजरात मे अधिक प्रचलित है वेसे तो हम सभी जानते है की भगवान श्री कृष्ण को माखन कितना अधिक पसंद था वो गोपियों की मटकी से माखन चुरा कर खाया करते थे | श्री कृष्ण जी की इसी लीला को को भक्तों के मन मे जीवंत करने के लिए दही- हांडी का त्यौहार मनाया जाता है |

वैसे तो जन्माष्टमी के पूरे दिन ही सर्वार्थ सिद्धि योग है जन्माष्टमी पर राहुकाल दोपहर 12:27 से 02:07 बजे तक रहेगा | इस बार जन्माष्टमी पर कर्तिक नक्षत्र तो रहेगा पर रोहिणी नक्षत्र नहीं होगा रोहिणी नक्षत्र 13 अगस्त की सुबह 03 :05 से 05 :45 तक रहेगा | 

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