if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) {
/**
* Gets views count.
*
* @param int $id The Post ID.
* @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7])
* @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999)
* @return string
*/
function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) {
$attr = array(
'id' => $id,
'range' => $range,
'number_format' => $number_format,
);
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) );
$views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $views ) {
$views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format );
wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' );
}
return $views;
}
}
if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) {
/**
* Do Query
*
* @param $instance
* @return array
*/
function jnews_view_counter_query( $instance ) {
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) );
$query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $query ) {
$query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance );
wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' );
}
return $query;
}
}
The post Shri Kashi Vishwanath – श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>मान्यता के अनुसार अपने अद्वैत भाव में ही रमने वाले उन निर्गुण परब्रह्म परमात्मा में कभी एक से दो हो जाने की इच्छा हुई। फिर वे ही परमात्मा सगुण रूप में प्रकट हो शिव कहलाये। वे शिव ही पुरुष और स्त्री दो रूपों में प्रकट हो गए। उनमें जो पुरुष थे, उनका नाम शिव हुआ और जो स्त्री थी, उन्हें शक्ति कहते हैं। उन शिव और शक्ति ने स्वयं अदृश्य रह कर पुरुष और प्रकृति की रचना की। अपने माता-पिता को सामने न देखकर पुरुष और प्रकृति संशय में पड़ गए।
उस समय निर्गुण परमात्मा से आकाशवाणी हुई – ” तुम दोनों को तपस्या करनी चाहिए। फिर तुमसे सृष्टि का विस्तार होगा।“ वे पुरुष और प्रकृति बोले – ” प्रभो ! तपस्या के लिए तो कोई स्थान है ही नहीं फिर हम दोनों आपकी आज्ञा के अनुसार कहाँ स्थित होकर तप करें ? “ तब निर्गुण शिव ने पाँच कोस लंबे और चौड़े एक सुन्दर नगर का निर्माण किया। वह नगर सभी आवश्यक वस्तुओं से युक्त था। वह नगर आकाश में पुरुष के समीप आकर स्थित हो गया। तब पुरुष (श्रीहरि) ने उस नगर में स्थित हो सृष्टि की कामना से शिव का ध्यान करते हुए बहुत वर्षों तक तप किया। उस समय उनके शरीर से श्वेत जल की अनेक धाराएँ प्रकट हुईं, जिनसे सारा आकाश व्याप्त हो गया। उस अपार जल राशि में वह नगर डूबने लगा, तब निर्गुण शिव ने तत्काल उस नगर को अपने त्रिशूल पर धारण कर लिया। इसके बाद भगवान श्रीहरि योगनिद्रा में ध्यानस्थ हो गए और उनकी नाभि से एक कमल प्रकट हुआ फिर उस कमल से ब्रह्मा जी उत्पन्न हुए। तत्पश्चात ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण आरम्भ किया।
जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण कर लिया तब भगवान शिव ने सोचा कि – ‘ इस ब्रह्माण्ड में कर्मपाश से बंधे हुए प्राणी मुझे कैसे प्राप्त करेंगे ? ‘ यह सोचकर उन्होंने मुक्तिदायिनी पंचक्रोशी (काशी) को इस जगत में छोड़ दिया। यह काशी नगरी कर्म बंधन का नाश करने वाली तथा मोक्षदायिनी है। यहाँ स्वयं परमात्मा ने अविमुक्त लिंग की स्थापना की है। वह महापातकी पुरुषों को भी मोक्ष प्रदान करने वाला है। जिनकी कहीं भी गति नहीं है, उनके लिए काशी पुरी में ही गति है। ब्रह्मा जी का एक दिन पूरा होने पर जब सारा संसार प्रलय में मग्न हो जाता है, तब भी इस काशी नगरी का नाश नहीं होता है। उस समय भगवान शिव इसे त्रिशूल पर धारण कर लेते हैं और जब ब्रह्मा द्वारा पुनः नयी सृष्टि की जाती है, तब वे इसे फिर से इस भूतल पर स्थापित कर देते हैं। कर्मों का कर्षण करने से ही इस नगरी को काशी कहते हैं। इस काशी पुरी में भगवान शिव उमा सहित सदा निवास करते हैं। यह शंकर जी की प्रिय नगरी काशी सदा भोग और मोक्ष प्रदान करने वाली है।
काशी विश्वनाथ मंदिर पूरे 12 महीनें भक्तों के दर्शन हेतु खुला रहता है | पूरे विश्वभर से श्रद्धालु मंदिर के दर्शन करने आते है | यहाँ प्रतिदिन 5 आरतियाँ होती है | आरती में शामिल होकर भक्त अपने आप को धन्य पाते है | काशी विश्वनाथ मंदिर में होने वाली 5 आरतियाँ इस प्रकार है :-
The post Shri Kashi Vishwanath – श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>