if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) {
/**
* Gets views count.
*
* @param int $id The Post ID.
* @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7])
* @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999)
* @return string
*/
function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) {
$attr = array(
'id' => $id,
'range' => $range,
'number_format' => $number_format,
);
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) );
$views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $views ) {
$views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format );
wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' );
}
return $views;
}
}
if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) {
/**
* Do Query
*
* @param $instance
* @return array
*/
function jnews_view_counter_query( $instance ) {
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) );
$query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $query ) {
$query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance );
wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' );
}
return $query;
}
}Lakshmi puja Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव
https://astrodeeva.com/tag/lakshmi-puja/
Daily Dose of AstrologyMon, 27 Nov 2023 13:20:05 +0000en-US
hourly
1 https://wordpress.org/?v=7.0https://astrodeeva.com/wp-content/uploads/2022/03/cropped-Logo-32x32.pngLakshmi puja Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव
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3232घी या तेल कौन सा दीपक कब जलाना होता है शुभ ?
https://astrodeeva.com/when-is-it-auspicious-to-light-a-lamp-ghee-or-oil/
https://astrodeeva.com/when-is-it-auspicious-to-light-a-lamp-ghee-or-oil/#respondMon, 27 Nov 2023 13:20:05 +0000https://astrodeeva.com/?p=3661हिंदू धर्म में वास्तु शास्त्र का बहुत महत्व है, वास्तु शास्त्र में हमें दिशाओं के बारे में कई जानकारी मिलती है, साथ ही ये भी पता चलता है कि घर से निगेटिविटी दूर करके पॉजिटिविटी कैसे लाएं। ऐसा ही वास्तु घर के पूजाघर के लिए भी होता है। पूजाघर में दीपक का खास स्थान होता […]
हिंदू धर्म में वास्तु शास्त्र का बहुत महत्व है, वास्तु शास्त्र में हमें दिशाओं के बारे में कई जानकारी मिलती है, साथ ही ये भी पता चलता है कि घर से निगेटिविटी दूर करके पॉजिटिविटी कैसे लाएं। ऐसा ही वास्तु घर के पूजाघर के लिए भी होता है। पूजाघर में दीपक का खास स्थान होता है। दीपक को पॉजिटिविटी का प्रतीक माना जाता है, दीपक जलाने से घर की निगेटिव ऊर्जा खत्म होती है। लेकिन दीपक जलाने का भी खास तरीका है, अगर आप उन बातों का पालन नहीं करेंगे तो परेशानी खड़ी हो सकती है।
दीपक जलाते वक्त इस बात का ध्यान आपको रखना है कि दीपक हमेशा भगवान की मूर्ति या उनकी तस्वीर के सामने रखें, कभी भी कहीं पर भी दीपक न रखें। इसके अलावा अगर आप तेल का दीपक जला रहे हैं तो हमेशा अपने दांयी तरफ और घी का दीपक जला रहे हैं तो हमेशा बांयी तरफ रखना चाहिए।
दीपक की बाती का भी रखें ध्यान
दीपक जलाते समय दीपक की बाती का भी ध्यान रखें, सही बाती के इस्तेमाल से ही दीपक जलाने का फायदा है। अगर आप तेल का दीपक जला रहे हैं तो बाती लाल धागे से बनी हो, वहीं अगर घी का दीपक जला रहे हैं तो रुई की बाती का इस्तेमाल करें।
दीपक कभी पश्चिम दिशा में न जलाएं, इससे गरीबी आती है और तेजी से धन का नाश होता है। शाम के वक्त मुख्य दरवाजे पर दीपक जलाने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और आपका घर धन-धान्य से भर देती हैं।
दक्षिण दिशा मां लक्ष्मी और यम दोनों का निवास होता है। इसलिए दक्षिण दिशा में दीपक जलाकर आप एक साथ मां लक्ष्मी और यमराज दोनों को खुश कर सकते हैं। इतना तो आपको पता ही है मां लक्ष्मी के खुश होंगी तो धन आएगा और यमराज के खुश होंगे तो असमय मौत नहीं आएगी।
उत्तर दिशा में दीपक जलाने से घर में गरीबी आती है आप दीपक की लौ इस दिशा में कर सकते हैं। घर में सुबह-शाम दीपक जलाने से घर में सुख का माहौल रहता है और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
]]>https://astrodeeva.com/when-is-it-auspicious-to-light-a-lamp-ghee-or-oil/feed/0Ashta Lakshmi: माता लक्ष्मी के 8 स्वरूप
https://astrodeeva.com/ashta-lakshmi-8-forms-of-mata-lakshmi/
https://astrodeeva.com/ashta-lakshmi-8-forms-of-mata-lakshmi/#commentsFri, 15 Apr 2022 01:19:00 +0000https://astrodeeva.com/?p=3212Ashta Lakshmi – धर्मग्रंथों में माता लक्ष्मी को धन समृद्धि की देवी बताया गया है। इन्हें भगवान विष्णु की पत्नी और आदिशक्ति भी कहा गया। धन समृद्धि के लिए लोग इनकी पूजा अर्चना करते हैं लेकिन देवी लक्ष्मी एक नहीं पूरी 8 हैं और यह अलग-अलग माध्यमों से अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती हैं। इसलिए […]
]]>Ashta Lakshmi – धर्मग्रंथों में माता लक्ष्मी को धन समृद्धि की देवी बताया गया है। इन्हें भगवान विष्णु की पत्नी और आदिशक्ति भी कहा गया। धन समृद्धि के लिए लोग इनकी पूजा अर्चना करते हैं लेकिन देवी लक्ष्मी एक नहीं पूरी 8 हैं और यह अलग-अलग माध्यमों से अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती हैं। इसलिए धर्मग्रंथों में अष्ट लक्ष्मी का उल्लेख किया गया है। ये अष्ट लक्ष्मी (Ashta Lakshmi) अपने नाम के अनुसार फल देती हैं इसलिए आपको मनोकामना और सुख-समृद्धि की चाहत के अनुसार ही देवी लक्ष्मी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करनी चाहिए है। भक्त प्रति शुक्रवार और दीपावली को माँ लक्ष्मी के इन (Ashta Lakshmi) सभी रूपों की वंदना कर माता को प्रसन्न करके असीम सम्पदा और धन की प्राप्ति कर सकते है | आज मां लक्ष्मी के प्रिय दिन शुक्रवार को हम आपको अष्ट लक्ष्मी के सभी स्वरूपों और उनकी पूजा विधि के बारे में बता रहे हैं…
अष्ट लक्ष्मी के स्वरूप – Ashta Lakshmi Forms
पहला स्वरूप – आदिलक्ष्मी
देवी लक्ष्मी का पहला स्वरूप आदिलक्ष्मी का है इन्हें मूललक्ष्मी, आदिशक्ति भी कहा जाता है। श्रीमद्देवीभागवत पुराण के अनुसार महालक्ष्मी ने ही सृष्टि के आरंभ में त्रिदेवों को प्रकट किया और इन्हीं से महाकाली और महासरस्वती ने आकार लिया। इन्होंने स्वयं जगत के संचालन के लिए भगवान विष्णु के साथ रहना स्वीकार किया। यह देवी जीव-जंतुओं को प्राण प्रदान करती हैं, इनसे जीवन की उत्पत्ति हुई है। इनके भक्त मोह-माया से मुक्ति होकर मोक्ष को प्राप्त करते हैं। इनकी कृपा से लोक-परलोक में सुख-संपदा प्राप्त होती है।
दूसरा स्वरूप – धनलक्ष्मी
देवी लक्ष्मी का दूसरा स्वरूप हैं धनलक्ष्मी। इन्होंने भगवान विष्णु को कुबेर के कर्ज से मुक्ति दिलाने के लिए यह रूप धारण किया था। इस देवी का संबंध भगवान वेंकटेश से है जो भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं। वेंकटेश रूप में भगवान ने देवी पद्मावती से विवाह के लिए कुबेर से कर्ज लिया। इसी कर्ज को चुकाने में भगवान की सहायता के लिए देवी लक्ष्मी धनलक्ष्मी रूप में प्रकट हुईं। इनके पास धन से भरा कलश है और एक हाथ में कमल फूल है। इनकी पूजा और भक्ति आर्थिक परेशानियों और कर्ज से मुक्ति दिलाती है। कर्ज से परेशान लोगों को देवी लक्ष्मी के इस स्वरूप की पूजा करनी चाहिए।
तीसरा स्वरूप – धान्यलक्ष्मी
धान्य का अर्थ है अन्न संपदा। देवी लक्ष्मी का यह स्वरूप अन्न का भंडार बनाए रखती हैं। इन्हें माता अन्नपूर्णा का स्वरूप भी माना जाता है। यह देवी हर घर में अन्न रूप में विराजमान रहती हैं। इन्हें प्रसन्न करने का एक सरल तरीका है कि घर में अन्न की बर्बादी ना करें। जिन घरों में अन्न का निरादर नहीं होता है उस घर में यह देवी प्रसन्नता पूर्वक रहती हैं और अन्न धन का भंडार बना रहता है।
चौथा स्वरूप – गजलक्ष्मी
देवी लक्ष्मी अपने चौथे स्वरूप में गजलक्ष्मी रूप में पूजी जाती हैं। इस स्वरूप में देवी कमल पुष्प के ऊपर हाथी पर विराजमान हैं और इनके दोनों ओर हाथी सूंड में जल लेकर इनका अभिषेक करते हैं। देवी की चार भुजाएं हैं जिनमें देवी ने कमल का फूल, अमृत कलश, बेल और शंख धारण किया है। देवी गजलक्ष्मी को कृषि और उर्वरता की देवी माना गया है। राज को समृद्धि प्रदान करने वाली देवी होने के कारण इन्हें राजलक्ष्मी भी कहा जाता है। यह संतान सुख भी प्रदान करती हैं। कृषिक्षेत्र से जुड़े लोगों और संतान की इच्छा रखने वालों को देवी के इस स्वरूप की पूजा करनी चाहिए।
पांचवां स्वरूप – सन्तानलक्ष्मी
माता लक्ष्मी का पांचवां स्वरूप संतान लक्ष्मी का है। श्रीमद्देवीभागवत पुराण के अनुसार देवी आदिशक्ति का पांचवां स्वरूप स्कंदमाता का है जो अपनी गोद में बालक कुमार स्कंद को बैठाए हुई हैं। माता संतानलक्ष्मी का स्वरूप स्कंदमाता से मिलता-जुलता हुआ है और यह देवी लक्ष्मी का पांचवां स्वरूप हैं इसलिए स्कंदमाता और संतान लक्ष्मी को समान माना गया है। संतान लक्ष्मी माता की चार भुजाएं हैं जिनमें दो भुजाओं में माता ने कलश धारण किया है और नीचे के दोनों हाथों में तलवार और ढ़ाल है। यह देवी भक्तों की रक्षा अपने संतान के समान करती हैं। इनकी पूजा से योग्य संतान की प्राप्ति होती है। संतान से घर में सुख समृद्धि आती है।
छठा स्वरूप – वीरलक्ष्मी
अपने नाम के अनुसार यह देवी वीरों और साहसी लोगों की आराध्य हैं। यह युद्ध में विजय दिलाती हैं। इनकी आठ भुजाएं हैं जिनमें देवी ने विभिन्न अस्त्र-शस्त्र धारण किया हुआ है। माता वीर लक्ष्मी भक्तों की रक्षा करती हैं और अकाल मृत्यु से बचाती हैं। इनकी कृपा से सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इन्हें मां कात्यायिनी का स्वरूप भी माना जाता है जिन्होंने महिषासुर का वध करके भक्तों की रक्षा की।
सातवां स्वरूप – विजयलक्ष्मी
देवी का सातवां स्वरूप विजयलक्ष्मी का है इन्हें जयलक्ष्मी भी कहा जाता है। इस स्वरूप में माता सभी प्रकार की विजय प्रादान करने वाली हैं। अष्टभुजी यह माता भक्तों को अभय प्रदान करती हैं। कोर्ट-कचहरी में जीत का मामला हो या किसी क्षेत्र में आप संकट में फंसे हों तो देवी के इस स्वरूप की पूजा करनी चाहिए।
आठवां स्वरूप – विद्यालक्ष्मी
शिक्षा और ज्ञान से समृद्धि प्रदान करने वाली देवी लक्ष्मी माता का आठवां स्वरूप है। इनका स्वरूप मां दुर्गा से दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी माता से मिलता-जुलता है। इनकी साधना से शिक्षा के क्षेत्र में सफलता और ज्ञान की वृद्धि होती है। इनके साधक अपनी बुद्धि और ज्ञान से प्रसिद्धि पाते हैं।