if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) { /** * Gets views count. * * @param int $id The Post ID. * @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7]) * @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999) * @return string */ function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) { $attr = array( 'id' => $id, 'range' => $range, 'number_format' => $number_format, ); $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) ); $views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $views ) { $views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format ); wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' ); } return $views; } } if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) { /** * Do Query * * @param $instance * @return array */ function jnews_view_counter_query( $instance ) { $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) ); $query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $query ) { $query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance ); wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' ); } return $query; } } lakshmi Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/lakshmi/ Daily Dose of Astrology Mon, 27 Nov 2023 13:20:05 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://astrodeeva.com/wp-content/uploads/2022/03/cropped-Logo-32x32.png lakshmi Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/lakshmi/ 32 32 घी या तेल कौन सा दीपक कब जलाना होता है शुभ ? https://astrodeeva.com/when-is-it-auspicious-to-light-a-lamp-ghee-or-oil/ https://astrodeeva.com/when-is-it-auspicious-to-light-a-lamp-ghee-or-oil/#respond Mon, 27 Nov 2023 13:20:05 +0000 https://astrodeeva.com/?p=3661 हिंदू धर्म में वास्तु शास्त्र का बहुत महत्व है, वास्तु शास्त्र में हमें दिशाओं के बारे में कई जानकारी मिलती है, साथ ही ये भी पता चलता है कि घर से निगेटिविटी दूर करके पॉजिटिविटी कैसे लाएं। ऐसा ही वास्तु घर के पूजाघर के लिए भी होता है। पूजाघर में दीपक का खास स्थान होता […]

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हिंदू धर्म में वास्तु शास्त्र का बहुत महत्व है, वास्तु शास्त्र में हमें दिशाओं के बारे में कई जानकारी मिलती है, साथ ही ये भी पता चलता है कि घर से निगेटिविटी दूर करके पॉजिटिविटी कैसे लाएं। ऐसा ही वास्तु घर के पूजाघर के लिए भी होता है। पूजाघर में दीपक का खास स्थान होता है। दीपक को पॉजिटिविटी का प्रतीक माना जाता है, दीपक जलाने से घर की निगेटिव ऊर्जा खत्म होती है। लेकिन दीपक जलाने का भी खास तरीका है, अगर आप उन बातों का पालन नहीं करेंगे तो परेशानी खड़ी हो सकती है।
दीपक जलाते वक्त इस बात का ध्यान आपको रखना है कि दीपक हमेशा भगवान की मूर्ति या उनकी तस्वीर के सामने रखें, कभी भी कहीं पर भी दीपक न रखें। इसके अलावा अगर आप तेल का दीपक जला रहे हैं तो हमेशा अपने दांयी तरफ और घी का दीपक जला रहे हैं तो हमेशा बांयी तरफ रखना चाहिए।
दीपक की बाती का भी रखें ध्यान
दीपक जलाते समय दीपक की बाती का भी ध्यान रखें, सही बाती के इस्तेमाल से ही दीपक जलाने का फायदा है। अगर आप तेल का दीपक जला रहे हैं तो बाती लाल धागे से बनी हो, वहीं अगर घी का दीपक जला रहे हैं तो रुई की बाती का इस्तेमाल करें।
दीपक रखने की सही दिशा
दीपक कभी पश्चिम दिशा में न जलाएं, इससे गरीबी आती है और तेजी से धन का नाश होता है। शाम के वक्त मुख्य दरवाजे पर दीपक जलाने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और आपका घर धन-धान्य से भर देती हैं।
दक्षिण दिशा मां लक्ष्मी और यम दोनों का निवास होता है। इसलिए दक्षिण दिशा में दीपक जलाकर आप एक साथ मां लक्ष्मी और यमराज दोनों को खुश कर सकते हैं। इतना तो आपको पता ही है मां लक्ष्मी के खुश होंगी तो धन आएगा और यमराज के खुश होंगे तो असमय मौत नहीं आएगी।
उत्तर दिशा में दीपक जलाने से घर में गरीबी आती है आप दीपक की लौ इस दिशा में कर सकते हैं। घर में सुबह-शाम दीपक जलाने से घर में सुख का माहौल रहता है और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

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Ashta Lakshmi: माता लक्ष्मी के 8 स्वरूप https://astrodeeva.com/ashta-lakshmi-8-forms-of-mata-lakshmi/ https://astrodeeva.com/ashta-lakshmi-8-forms-of-mata-lakshmi/#comments Fri, 15 Apr 2022 01:19:00 +0000 https://astrodeeva.com/?p=3212 Ashta Lakshmi – धर्मग्रंथों में माता लक्ष्मी को धन समृद्धि की देवी बताया गया है। इन्हें भगवान विष्णु की पत्नी और आदिशक्ति भी कहा गया। धन समृद्धि के लिए लोग इनकी पूजा अर्चना करते हैं लेकिन देवी लक्ष्मी एक नहीं पूरी 8 हैं और यह अलग-अलग माध्यमों से अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती हैं। इसलिए […]

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Ashta Lakshmi – धर्मग्रंथों में माता लक्ष्मी को धन समृद्धि की देवी बताया गया है। इन्हें भगवान विष्णु की पत्नी और आदिशक्ति भी कहा गया। धन समृद्धि के लिए लोग इनकी पूजा अर्चना करते हैं लेकिन देवी लक्ष्मी एक नहीं पूरी 8 हैं और यह अलग-अलग माध्यमों से अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती हैं। इसलिए धर्मग्रंथों में अष्ट लक्ष्मी का उल्लेख किया गया है। ये अष्ट लक्ष्मी (Ashta Lakshmi) अपने नाम के अनुसार फल देती हैं इसलिए आपको मनोकामना और सुख-समृद्धि की चाहत के अनुसार ही देवी लक्ष्मी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करनी चाहिए है। भक्त प्रति शुक्रवार और दीपावली को माँ लक्ष्मी के इन (Ashta Lakshmi) सभी रूपों की वंदना कर माता को प्रसन्न करके असीम सम्पदा और धन की प्राप्ति कर सकते है | आज मां लक्ष्मी के प्रिय दिन शुक्रवार को हम आपको अष्ट लक्ष्मी के सभी स्वरूपों और उनकी पूजा विधि के बारे में बता रहे हैं…

अष्ट लक्ष्मी के स्वरूप – Ashta Lakshmi Forms

पहला स्वरूप – आदिलक्ष्मी 

देवी लक्ष्मी का पहला स्वरूप आदिलक्ष्मी का है इन्हें मूललक्ष्मी, आदिशक्ति भी कहा जाता है। श्रीमद्देवीभागवत पुराण के अनुसार महालक्ष्मी ने ही सृष्टि के आरंभ में त्रिदेवों को प्रकट किया और इन्हीं से महाकाली और महासरस्वती ने आकार लिया। इन्होंने स्वयं जगत के संचालन के लिए भगवान विष्णु के साथ रहना स्वीकार किया। यह देवी जीव-जंतुओं को प्राण प्रदान करती हैं, इनसे जीवन की उत्पत्ति हुई है। इनके भक्त मोह-माया से मुक्ति होकर मोक्ष को प्राप्त करते हैं। इनकी कृपा से लोक-परलोक में सुख-संपदा प्राप्त होती है।

दूसरा स्वरूप – धनलक्ष्मी 

देवी लक्ष्मी का दूसरा स्वरूप हैं धनलक्ष्मी। इन्होंने भगवान विष्णु को कुबेर के कर्ज से मुक्ति दिलाने के लिए यह रूप धारण किया था। इस देवी का संबंध भगवान वेंकटेश से है जो भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं। वेंकटेश रूप में भगवान ने देवी पद्मावती से विवाह के लिए कुबेर से कर्ज लिया। इसी कर्ज को चुकाने में भगवान की सहायता के लिए देवी लक्ष्मी धनलक्ष्मी रूप में प्रकट हुईं। इनके पास धन से भरा कलश है और एक हाथ में कमल फूल है। इनकी पूजा और भक्ति आर्थिक परेशानियों और कर्ज से मुक्ति दिलाती है। कर्ज से परेशान लोगों को देवी लक्ष्मी के इस स्वरूप की पूजा करनी चाहिए।

तीसरा स्वरूप – धान्यलक्ष्मी 

धान्य का अर्थ है अन्न संपदा। देवी लक्ष्मी का यह स्वरूप अन्न का भंडार बनाए रखती हैं। इन्हें माता अन्नपूर्णा का स्वरूप भी माना जाता है। यह देवी हर घर में अन्न रूप में विराजमान रहती हैं। इन्हें प्रसन्न करने का एक सरल तरीका है कि घर में अन्न की बर्बादी ना करें। जिन घरों में अन्न का निरादर नहीं होता है उस घर में यह देवी प्रसन्नता पूर्वक रहती हैं और अन्न धन का भंडार बना रहता है।

चौथा स्वरूप – गजलक्ष्मी 

देवी लक्ष्मी अपने चौथे स्वरूप में गजलक्ष्मी रूप में पूजी जाती हैं। इस स्वरूप में देवी कमल पुष्प के ऊपर हाथी पर विराजमान हैं और इनके दोनों ओर हाथी सूंड में जल लेकर इनका अभिषेक करते हैं। देवी की चार भुजाएं हैं जिनमें देवी ने कमल का फूल, अमृत कलश, बेल और शंख धारण किया है। देवी गजलक्ष्मी को कृषि और उर्वरता की देवी माना गया है। राज को समृद्धि प्रदान करने वाली देवी होने के कारण इन्हें राजलक्ष्मी भी कहा जाता है। यह संतान सुख भी प्रदान करती हैं। कृषिक्षेत्र से जुड़े लोगों और संतान की इच्छा रखने वालों को देवी के इस स्वरूप की पूजा करनी चाहिए।

पांचवां स्वरूप – सन्तानलक्ष्मी 

माता लक्ष्मी का पांचवां स्वरूप संतान लक्ष्मी का है। श्रीमद्देवीभागवत पुराण के अनुसार देवी आदिशक्ति का पांचवां स्वरूप स्कंदमाता का है जो अपनी गोद में बालक कुमार स्कंद को बैठाए हुई हैं। माता संतानलक्ष्मी का स्वरूप स्कंदमाता से मिलता-जुलता हुआ है और यह देवी लक्ष्मी का पांचवां स्वरूप हैं इसलिए स्कंदमाता और संतान लक्ष्मी को समान माना गया है। संतान लक्ष्मी माता की चार भुजाएं हैं जिनमें दो भुजाओं में माता ने कलश धारण किया है और नीचे के दोनों हाथों में तलवार और ढ़ाल है। यह देवी भक्तों की रक्षा अपने संतान के समान करती हैं। इनकी पूजा से योग्य संतान की प्राप्ति होती है। संतान से घर में सुख समृद्धि आती है।

छठा स्वरूप – वीरलक्ष्मी 

अपने नाम के अनुसार यह देवी वीरों और साहसी लोगों की आराध्य हैं। यह युद्ध में विजय दिलाती हैं। इनकी आठ भुजाएं हैं जिनमें देवी ने विभिन्न अस्त्र-शस्त्र धारण किया हुआ है। माता वीर लक्ष्मी भक्तों की रक्षा करती हैं और अकाल मृत्यु से बचाती हैं। इनकी कृपा से सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इन्हें मां कात्यायिनी का स्वरूप भी माना जाता है जिन्होंने महिषासुर का वध करके भक्तों की रक्षा की।

सातवां स्वरूप – विजयलक्ष्मी 

देवी का सातवां स्वरूप विजयलक्ष्मी का है इन्हें जयलक्ष्मी भी कहा जाता है। इस स्वरूप में माता सभी प्रकार की विजय प्रादान करने वाली हैं। अष्टभुजी यह माता भक्तों को अभय प्रदान करती हैं। कोर्ट-कचहरी में जीत का मामला हो या किसी क्षेत्र में आप संकट में फंसे हों तो देवी के इस स्वरूप की पूजा करनी चाहिए।

आठवां स्वरूप – विद्यालक्ष्मी 

शिक्षा और ज्ञान से समृद्धि प्रदान करने वाली देवी लक्ष्मी माता का आठवां स्वरूप है। इनका स्वरूप मां दुर्गा से दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी माता से मिलता-जुलता है। इनकी साधना से शिक्षा के क्षेत्र में सफलता और ज्ञान की वृद्धि होती है। इनके साधक अपनी बुद्धि और ज्ञान से प्रसिद्धि पाते हैं।

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Astro Tips – अपनी राशि के अनुसार करें ये विशेष उपाय, मां लक्ष्मी होगी प्रसन्न और बरसेगा धन https://astrodeeva.com/astro-tips-take-these-special-measures-as-per-your-wish-mother-lakshmi-will-be-happy-and-money-will-rain/ https://astrodeeva.com/astro-tips-take-these-special-measures-as-per-your-wish-mother-lakshmi-will-be-happy-and-money-will-rain/#comments Wed, 16 Feb 2022 04:42:38 +0000 https://astrodeeva.com/?p=2882 Astro Tips for wealth and prosperity – हमारी भौतिक जरूरतों को पूरा करने के लिए धन आवश्यक होता है। शास्त्रों में भी मनुष्य के लिए चार पुरूषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष बताए गए हैं। अर्थात यहां अर्थ का संबंध धन से है। धन मां लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है, कहते हैं जिस व्यक्ति के […]

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Astro Tips for wealth and prosperity – हमारी भौतिक जरूरतों को पूरा करने के लिए धन आवश्यक होता है। शास्त्रों में भी मनुष्य के लिए चार पुरूषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष बताए गए हैं। अर्थात यहां अर्थ का संबंध धन से है। धन मां लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है, कहते हैं जिस व्यक्ति के ऊपर मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है उसे ऐश्वर्य प्राप्त होता है। उसके जीवन में दरिद्रता नहीं आती है। जबकि इसके विपरीत मां लक्ष्मी के रूठने पर व्यक्ति के जीवन में दरिद्रता बनी रहती है। मां लक्ष्मी की कृपा दृष्टि पाने के लिए ज्योतिष शास्त्र में राशि के अनुसार, कुछ विशेष उपाय( Astro Tips) बताए गए हैं। ये उपाय बेहद सरल और कारगर होते हैं। यदि कोई जातक इन उपायों को विधिपूर्वक कर ले तो ऐसे जातकों की समस्त प्रकार की आर्थिक परेशानियां दूर हो सकती हैं। आप भी अपनी राशि के अनुसार धन प्राप्ति के ये उपाय कर मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

राशि अनुसार धन प्राप्ति के सरल उपाय (Astro Tips For Money)

 

 

Mesh

मेष राशि – मेष राशि के जातकों को धन प्राप्ति के लिए नित्य सुबह सूर्य देव के दर्शन करना चाहिए। पूजा में लक्ष्मीनारायण भगवान को गुड़ वाली खीर का भोग लगाना चाहिए। इस उपाय को करने लाभ होगा।

 

वृषभ राशि – वृष राशि के जातकों को नित्य सुबह भगवान शिव के दर्शन करना चाहिए और शुक्रवार के दिन शिवलिंग पर साबुत चावल अर्पित करना चाहिए। इस उपाय करने से धन से जुड़ी समस्याएं दूर हो सकती हैं।

 

 मिथुन राशि – मिथुन राशि वालों को नित्य सुबह देवी लक्ष्मी या देवी दुर्गा के दर्शन करना चाहिए। वहीं बुधवार के दिन गणपति जी को लाल फूल अर्पित करना चाहिए। इस उपाय को करने से बुध देव आपके विघ्नों को दूर करेंगे।

 

कर्क राशि – कर्क राशि के जातकों को नित्य सुबह भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन करना चाहिए और पूजा में उन्हें तुलसी पत्र, मिश्री माखन का भोग लगाना चाहिए। इस उपाय को करने से आपकी आर्थिक स्थिति समृद्ध होगी।

 

सिंह राशि – सिंह राशि वालों को नित्य सुबह भगवान सूर्य नारायण के दर्शन करें और लाल गुलाब हनुमान जी के चरणों से स्पर्श कराकर पर्स में रखें। आपको आर्थिक लाभ होगा।

 

कन्या राशि – कन्या राशि के जातकों को नित्य सुबह भगवान गणेश जी के दर्शन करने चाहिए और देवी दुर्गा जी को सफेद चावल अर्पित करें। यह उपाय आपके लिए कारगर सिद्ध होगा।

 

तुला राशि – तुला राशि के जातकों को भगवान लक्ष्मीनारायण जी को कमल का फूल अर्पित करना चाहिए और मंगलवार के दिन हनुमान जी पांच बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं।

 

 वृश्चिक राशि – वृश्चिक राशि के जातकों को तुलसी के पौधे को किसी विष्णु मंदिर में लगाना चाहिए। यदि आप व्यापारी वर्ग से आते हैं तो यात्रा करने से पहले श्री राम स्तुति का पाठ करें। आर्थिक लाभ की प्राप्ति हो सकती है।

Also Read: हस्तरेखा ज्योतिष – जानिए क्या कहता है आपकी हथेली का रंग

 

धनु राशि – धनु राशि के जातकों को सुबह हनुमान जी का दर्शन करना चाहिए और गुरुवार के दिन पीपल के नीचे मिठाई रखनी चाहिए। इसके साथ ही आपको रोजाना पीले चंदन का तिलक लगाना चाहिए।

 

मकर राशि – मकर राशि के जातकों को नित्य सुबह देवी गायत्री का दर्शन करना चाहिए और सभी महत्वपूर्ण काम से पहले सफेद फूल अपने साथ लेकर जाना चाहिए। यह उपाय आपको कामयाबी दिला सकता है।

 

कुंभ राशि – कुंभ राशि के जातकों को केले के पेड़ के नीचे शुद्ध देसी घी का दीपक जलाना चाहिए और सभी महत्वपूर्ण काम से पहले हनुमान जी को मीठा पान अर्पित करना चाहिए।

 

मीन राशि – मीन राशि के जातकों को भगवान विष्णु को केसर का तिलक करना चाहिए, फिर वही तिलक अपने माथे पर भी लगाएं। साथ ही देवी लक्ष्मी को पेठे का भोग लगाएं।

 

 

ये भी पढ़ें – Vastu Tips: घर में समृद्धि लानी है तो लगाएँ ये पेड़ -पौधे

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Magh Purnima 2022: माघ पूर्णिमा पर धन समृद्धि दायक को प्रसन्न करने योग्य सरल उपाय…. https://astrodeeva.com/magh-purnima-2022-simple-steps-to-please-the-giver-of-wealth-and-prosperity-on-magh-purnima/ https://astrodeeva.com/magh-purnima-2022-simple-steps-to-please-the-giver-of-wealth-and-prosperity-on-magh-purnima/#respond Tue, 15 Feb 2022 03:13:28 +0000 https://astrodeeva.com/?p=2875 हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 16 फरवरी को माघ मास की पूर्णिमा पड़ रही है। इसे माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) या माघी पूर्णिमा(Maghi Purnima) के नाम से जाना जाता है। इस दिन स्नान, दान और तर्पण का खास महत्व होता है। माघ माह में दान, पुण्य आदि के कार्य किए जाने से सभी तरह के […]

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हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 16 फरवरी को माघ मास की पूर्णिमा पड़ रही है। इसे माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) या माघी पूर्णिमा(Maghi Purnima) के नाम से जाना जाता है। इस दिन स्नान, दान और तर्पण का खास महत्व होता है। माघ माह में दान, पुण्य आदि के कार्य किए जाने से सभी तरह के संकट दूर हो होते है और मनुष्य सुख और समृद्धि को पाता है। आइए जानते है इस दिन कौन से सरल उपाय कर के समृद्धि दायक मां लक्ष्मी और श्री विष्णु को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है।

माघ पूर्णिमा के उपाय ( Magh Purnima Upay)

1. स्नान : पुराणों के अनुसार माघ पूर्णिमा के दिन स्वयं भगवान श्री विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं। इस दिन गंगा स्नान करने से विष्णु सहित देवी लक्ष्मी की कृपा मिलती है तथा धन-संपदा लक्ष्मी, यश, सुख-सौभाग्य तथा उत्तम संतान की प्राप्ति होती है।
2. मंत्र जाप : पूर्णिमा पर माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करना चाहिए। इससे घर में धन समृद्धि में बढ़ोतरी होती है। माघ माह में श्रीहरि भगवान विष्णु की माता लक्ष्मी के साथ पूजा करना चाहिए। इससे घर में सुख, शांति, धन और समृद्धि बनी रहती है।
3. पीली सामग्री करें दान : इस दिन देवी लक्ष्मी जी को पीले तथा लाल रंग की सामग्री अर्पित कर खीर का भोग लगाने से वे प्रसन्न होती हैं।
माघ पूर्णिमा के दिन कंबल, वस्त्र, तिल, अन्न, घी, नमक, गुड़, पांच तरह के अनाज, गाय आदि का दान करने से 32 गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है और धन समृद्धि बढ़ती है।
4. दीपदान : माघ पूर्णिमा (Magh Purnima) पर नदी के तट पर या नदी में दीपदान करने को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे देवी और देवता प्रसन्न होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। तुसली के नीचे घी का दीया जलाने से भी मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
5. श्रीसूक्त का पाठ : माघ पूर्णिमा के दिन देवी लक्ष्मी की विधिवत पूजा करके श्रीसूक्त का पाठ करना चाहिए। इससे देवी लक्ष्मी प्रसन्न होकर जातक को आशीर्वाद देती हैं।
6. विष्णु पूजा : माघ माह में श्रीहरि भगवान विष्णु की माता लक्ष्मी के साथ पूजा करना चाहिए। इससे घर में सुख, शांति, धन और समृद्धि बनी रहती है। उपरोक्त बताए गए व्रतों में भगवान विष्णु की पूजा होती है।
7. तर्पण : माघ माह में अमास्या और पूर्णिमा के दिन पितरों के निमित्त तर्पण करना चाहिए क्योंकि इस पवित्र माह में पितरों को मुक्ति मिलती है। यह पुण्य का सबसे बड़ा कार्य है। पितृदोष के कारण भी घर में सुख, शांति, धन और समृद्धि में बाधा उत्पन्न होती है।
8. पीपल और तुलसी की सेवा: माघ पूर्णिमा के दिन पीपल में माता लक्ष्मी का आगमन होता है। अत: इस दिन पीपल में जल अर्पित करके उसकी पूजा करें। इस दिन तुलसी को भी जल अर्पित करके उनकी पूजा करना चाहिए और भोग लगाना चाहिए। दोनों ही कार्यों से माता लक्ष्मी प्रसन्न होकर धन समृद्धि का वरदान देती हैं।
9. चंद्रदेव को अर्पित करें खीर: माघ पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को खीर अर्पित करने से चंद्रदेव की कृपा प्राप्त होती है और धन संबंधी समस्या का निवारण होता है।
10. माता लक्ष्मी को अर्पित करें कोड़ियां : आर्थिक तंगी दूर करने के लिए 11 कोड़ियों को हल्दी से रंगकर माता लक्ष्मी को अर्पित करें। फिर इनको लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रख दें।

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है।)

ये भी पढ़ें – एक मंत्र जो देता है सम्पूर्ण भागवत पाठ का फल

Vishnu Sahasranamam Stotram-विष्णु सहस्रनाम

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Diwali 2020: शुभ दीपावली, जाने पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि https://astrodeeva.com/diwali-2020-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%ad-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be/ https://astrodeeva.com/diwali-2020-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%ad-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be/#respond Sat, 14 Nov 2020 03:42:23 +0000 https://astrodeeva.com/?p=1362 हिन्दू धर्म में दीपावली एक ऐसा त्यौहार है जिसका हर हिन्दू वर्ष भर बेसब्री से इंतज़ार करता है और अपनी यथाशक्ति अनुसार इस पर्व को मनाता है। यह पर्व हर वर्ष हिन्दू  पंचांग  के अनुसार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्तजन माता लक्ष्मी, सरस्वती  और भगवान गणेश […]

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हिन्दू धर्म में दीपावली एक ऐसा त्यौहार है जिसका हर हिन्दू वर्ष भर बेसब्री से इंतज़ार करता है और अपनी यथाशक्ति अनुसार इस पर्व को मनाता है। यह पर्व हर वर्ष हिन्दू  पंचांग  के अनुसार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्तजन माता लक्ष्मी, सरस्वती  और भगवान गणेश की विधि विधान से पूजा कर उनको प्रसन्न करते है और उन से धन-संपत्ती, बुद्धि  और सुख-समृद्धि प्रदान करने की कामना करते हैं।

दीपावली 2020 शुभ मुहूर्त

दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजा को प्रदोष काल के दौरान किया जाना चाहिये, जो कि सूर्यास्त के बाद प्रारम्भ होता है और लगभग 2 घण्टे 24 मिनट तक रहता है। कुछ जानकार लक्ष्मी पूजा के लिए महानिशिता काल का सुझाव भी देते हैं। हमारे विचार में महानिशिता काल तांत्रिक समुदायों और पण्डितों के लिए अधिक उपयुक्त होता है। सामान्य जन के लिए प्रदोष काल मुहूर्त ही उपयुक्त माना गया है।

दिनांक – 14 नवम्बर 2020

वार – शनिवार

अमावस्या तिथि प्रारम्भ – 14 नवम्बर 2020 को 02:17 पी एम बजे

अमावस्या तिथि समाप्त – 15 नवम्बर 2020 को 10:36 ए एम बजे

प्रदोष काल – 05:28 पी एम से 08:07 पी एम

वृषभ लग्न – 05:28 पी एम से 07:24 पी एम

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त – 14 नवम्बर 2020 को 05:28 पी एम से 07:24 पी एम

दीपावली लक्ष्मी पूजा के लिये शुभ चौघड़िया मुहूर्त

अपराह्न मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) – 02:17 पी एम से 04:07 पी एम

सायाह्न मुहूर्त (लाभ) – 05:28 पी एम से 07:07 पी एम

रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) – 14 नवम्बर 08:47 पी एम से 15 नवम्बर 01:45 ए एम

उषाकाल मुहूर्त (लाभ) – 15 नवम्बर 05:04 ए एम से 06:44 ए एम

निशिता काल मुहूर्त

निशिता काल – 14 नवम्बर 11:39 पी एम से 15 नवम्बर 12:32 ए एम

सिंह लग्न – 14 नवम्बर 11:59 पी एम से 15 नवम्बर 02:16 ए एम

 

दीपावली पूजन सामग्री

दीवाली पूजन की सभी सामग्री लगभग घर में ही मिल जाती हैं लेकिन कुछ अतिरिक्त चीजों को बाहर से लाया जा सकता है। ये वस्तुएं हैं- लक्ष्मी, सरस्वती व गणेश जी की प्रतिमा या चित्र, रोली, कुमकुम, चावल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, अगरबत्तियां, मिट्टी तथा तांबे के दीपक, रुई, कलावा (मौलि), नारियल, शहद, दही, गंगाजल, गुड़, धनिया, फल, फूल( कमल और गुलाब के फूल भी मां को बहुत प्रिय हैं), जौ, गेहूँ, दूर्वा, चंदन, सिंदूर, घृत, पंचामृत, दूध, मेवे, खील, बताशे, गंगाजल, जनेऊ,वस्त्र, लाल कपड़ा,चौकी, कलश, कमल गट्टे की माला, शंख, आसन, थाली, चांदी का सिक्का, भोग व प्रसाद हेतु मिष्ठान्न।

 

दीपावली पूजन विधि

दीवाली की पूजा में सबसे पहले एक चौकी पर सफेद या लाल वस्त्र बिछा कर उस पर मां लक्ष्मी, सरस्वती व गणेश जी को प्रतिमा या चित्र को विराजमान करें। इसके बाद हाथ में थोड़ा सा जल लेकर उसे प्रतिमा के ऊपर निम्न मंत्र पढ़ते हुए छिड़कें।

ऊँ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा।

य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: वाह्याभंतर: शुचि:।।

इसके बाद में इसी तरह से स्वयं को तथा अपने पूजा के आसन को भी इसी तरह जल छिड़ककर पवित्र कर लें।

अब मां पृथ्वी को प्रणाम करके निम्न मंत्र बोलें तथा उनसे क्षमा प्रार्थना करते हुए अपने आसन पर विराजमान हों

पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग ऋषिः सुतलं छन्दः कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥

ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता। त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्‌॥ पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः

अब पुष्प या चम्मच से अपनी दायी अंजुलि में जल ले कर निम्न मंत्र बोलते हुए आचमन करें

ॐ केशवाय नमः

ॐ नारायणाय नमः

ॐ वासुदेवाय नमः

अब हृषिकेशाय नमः मंत्र कहते हुए हाथों को धो लें। इस प्रक्रिया को आचमन कहते हैं इससे विद्या, आत्म और बुद्धि तत्व का शोधन हो जाता है। तत्पश्चात तिलक लगाएँ। अब आप पूजा के लिये पूरी तरह पवित्र हैं।

ध्यान व संकल्प

अब मन को एकाग्र कर प्रभु में ध्यान लगाएँ और संकल्प करें।

संकल्प के लिये हाथ में अक्षत, पुष्प और जल लें साथ में कुछ द्रव्य यानि पैसे भी लें और संकल्प मंत्र का जाप करते हुए संकल्प करें कि “मैं अमुक व्यक्ति( अपना नाम), अमुक गोत्र( आप का गोत्र),अमुक स्थान( जिस शहर व स्थान में पूजा की जा रही है) , दिनांक, समय पर सपरिवार  मां लक्ष्मी, सरस्वती तथा गणेश जी का पूजन करने जा रहा हूं, जिससे मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त हों।”

 इसके बाद भगवान गणेश और माँ गौरी की पूजा करें। इसके बाद कलश पूजन करें। अब फिर नवग्रहों का पूजन कीजिए। हाथ में अक्षत और पुष्प ले कर नवग्रह स्तोत्र बोलिए। इसके बाद भगवती षोडश मातृकाओं ( १. गौरी, २. पद्मा, ३. शची, ४. मेधा, ५. सावित्री, ६. विजया, ७. जया, ८. देव सेना, ९. स्वधा, १०. स्वाहा, ११. मातरः, १२. लोकमातरः, १३. धृतिः, १४. पुष्टिः, १५. तुष्टिः, १६. आत्मनः कुलदेवताः ) का पूजन किया जाता है। इन सभी के पूजन के बाद मातृकाओं को गंध, अक्षत व पुष्प प्रदान करते हुए पूजन करें। अब मौलि लेकर गणपति जी , माता लक्ष्मी व सरस्वती को अर्पण कर और स्वयं के हाथ पर भी बंधवा लें। अब सभी देवी-देवताओं के तिलक लगाकर स्वयं को भी तिलक लगवाएं। इसके बाद मां महालक्ष्मी की पूजा आरंभ करें।

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लक्ष्मी पूजन

सर्व प्रथम माता लक्ष्मी का ध्यान करें और निम्न मंत्र बोलें

ॐ या सा पद्मासनस्था, विपुल-कटि-तटी, पद्म-दलायताक्षी।

गम्भीरावर्त-नाभिः, स्तन-भर-नमिता, शुभ्र-वस्त्रोत्तरीया।।

लक्ष्मी दिव्यैर्गजेन्द्रैः। मणि-गज-खचितैः, स्नापिता हेम-कुम्भैः।

नित्यं सा पद्म-हस्ता, मम वसतु गृहे, सर्व-मांगल्य-युक्ता।।

 अर्थात – भगवती लक्ष्मी कमल के आसन पर विराजमान हैं, कमल की पंखुड़ियों के समान सुन्दर बड़े-बड़े जिनके नेत्र हैं, जिनकी विस्तृत कमर और गहरे आवर्तवाली नाभि है, जो पयोधरों के भार से झुकी हुई और सुन्दर वस्त्र के उत्तरीय से सुशोभित हैं, जो मणि-जटित दिव्य स्वर्ण-कलशों के द्वारा स्नान किए हुए हैं, वे कमल-हस्ता सदा सभी मङ्गलों के सहित मेरे घर में निवास करें।

 

देवी की प्रतिष्ठा करें

हाथ में अक्षत लेकर बोलें “ॐ भूर्भुवः स्वः महालक्ष्मी, इहागच्छ इह तिष्ठ, एतानि पाद्याद्याचमनीय-स्नानीयं, पुनराचमनीयम्।

स्नान कराएं

ॐ मन्दाकिन्या समानीतैः, हेमाम्भोरुह-वासितैः स्नानं कुरुष्व देवेशि, सलिलं च सुगन्धिभिः।। ॐ लक्ष्म्यै नमः।।

इदं रक्त चंदनम् लेपनम् से रक्त चंदन लगाएं।

इदं सिन्दूराभरणं से सिन्दूर लगाएं।

ॐ मन्दार-पारिजाताद्यैः, अनेकैः कुसुमैः शुभैः। पूजयामि शिवे, भक्तया, कमलायै नमो नमः।। ॐ लक्ष्म्यै नमः, पुष्पाणि समर्पयामि।’ इस मंत्र से पुष्प चढ़ाएं फिर माला पहनाएं। अब लक्ष्मी देवी को इदं रक्त वस्त्र समर्पयामि कहकर लाल वस्त्र पहनाएं।

 

लक्ष्मी देवी की अंग पूजा

बायें हाथ में अक्षत लेकर दायें हाथ से थोड़ा-थोड़ा छोड़ते जायें—

ॐ चपलायै नम: पादौ पूजयामि।

ॐ चंचलायै नम: जानूं पूजयामि ।

ॐ कमलायै नम: कटि पूजयामि ।

ॐ कात्यायिन्यै नम: नाभि पूजयामि ।

ॐ जगन्मातरे नम: जठरं पूजयामि ।

ॐ विश्ववल्लभायै नम: वक्षस्थल पूजयामि ।

ॐ कमलवासिन्यै नम: भुजौ पूजयामि ।

ॐ कमल पत्राक्ष्य नम: नेत्रत्रयं पूजयामि ।

ॐ श्रियै नम: शिरं: पूजयामि।

 

अष्ट-सिद्धि पूजा

अङ्ग-देवताओं की पूजा करने के बाद पुनः बाएँ हाथ में अक्षत लेकर मंत्रोच्चारण करें.

ॐ अणिम्ने नम:। ॐ महिम्न नम:।

ॐ गरिम्णे नम:। ॐ लघिम्ने नम:।

ॐ प्राप्त्यै नम:। ॐ प्राकाम्यै नम:।

ॐ ईशितायै नम:। ॐ वशितायै नम:।

 

अष्टलक्ष्मी पूजन

पुनः बाएँ हाथ में अक्षत लेकर मंत्रोच्चारण करें.

ॐ आद्ये लक्ष्म्यै नम:। ॐ विद्यालक्ष्म्यै नम:।

ॐ सौभाग्य लक्ष्म्यै नम:। ॐ अमृत लक्ष्म्यै नम:।

ॐ लक्ष्म्यै नम:। ॐ सत्य लक्ष्म्यै नम:।

ॐ भोगलक्ष्म्यै नम:। ॐ योग लक्ष्म्यै नम:।

 

नैवैद्य अर्पण

पूजन के पश्चात देवी को “इदं नानाविधि नैवेद्यानि ॐ महालक्ष्मियै समर्पयामि” मंत्र से नैवैद्य अर्पित करें।

मिष्टान अर्पित करने के लिए मंत्र: “इदं शर्करा घृत समायुक्तं नैवेद्यं ॐ महालक्ष्मियै समर्पयामि” बालें।

प्रसाद अर्पित करने के बाद “इदं आचमनयं ॐ महालक्ष्मियै नम: ” मंत्र बोले और आचमन करायें.

अब पान सुपारी चढ़ायें: इदं ताम्बूल पुगीफल समायुक्तं ॐ महालक्ष्मियै समर्पयामि।

अब एक फूल लेकर लक्ष्मी देवी पर चढ़ाएं और बोलें: एष: पुष्पान्जलि ॐ महालक्ष्मियै नम:।

लक्ष्मी जी की पूजा के बाद भगवान विष्णु एवं शिव जी की पूजा करनी चाहिए और फिर गल्ले की पूजा करें। पूजन के पश्चात सपरिवार आरती और क्षमा प्रार्थना करें।

क्षमा प्रार्थना मंत्र

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम।

पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर।।

मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर।

यत्पूजितं माया देवं परिपूर्ण तदस्तु में।

अर्थात- हे ईश्वर मैं आपका “आवाह्न” करना नहीं जानता हूं न ही विसर्जन अर्थात् न ही आपको विदा करना जानता हूं मुझे आपकी पूजा भी करनी नहीं आती है। अगर मेरे से आप की पूजा में कोई भूल हो गयी है तो कृपा करके मुझे क्षमा करें। न मुझे मंत्र का ज्ञान है न ही क्रिया का, मैं तो आपकी भक्ति करना भी नहीं जानता। मैं यथा संभव पूजा कर रहा हूं, कृपा करके मेरी भूल को क्षमा कर दें और पूजा को पूर्णता प्रदान करें।

अब अपने बड़ों का आशीर्वाद लें और छोटों को भेंट व उपहार दें और सब के साथ पर्व मनाएँ।

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