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हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/lalbagh/ Daily Dose of Astrology Sun, 12 Sep 2021 07:20:59 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://astrodeeva.com/wp-content/uploads/2022/03/cropped-Logo-32x32.png lalbagh Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/lalbagh/ 32 32 अष्‍टविनायक मंदिरों के दर्शन, मिलेगा विघ्‍नहर्ता का आर्शिवाद https://astrodeeva.com/%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%b5-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%b7/ https://astrodeeva.com/%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%b5-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%b7/#comments Wed, 19 Aug 2020 19:56:17 +0000 https://astrodeeva.com/?p=495 देश भर में अनेक प्रसिद्ध गणेश मंदिर हैं और गणपति महोत्सव के मौके पर उन सब मंदिरो में दर्शनो के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। अब हमआपको गणेश जी के 8 मंदिरो के बारे में बता रहें जो बहुत प्राचीन है। महाराष्ट्र के पुणे के विभिन्न स्थानो में गणेश जी के आठ मंदिर हैं, इन्हें अष्टविनायक कहा जाता है। इन मंदिरों में गणेश जी की स्वयंभू (अपने आप प्रकट हुई) प्रतिमा है और कहा जाता है की यहाँ भगवान गणेश स्वयं विराजते हैं और इन अष्ट स्वरूप के दर्शन मात्र से कई जन्मों का पुण्य मिलता है। गणपति महोत्सव के मौके पर अष्टविनायक यात्रा का अपना महत्व है। पुणे के आस-पास स्थित गणपति जी के आठ स्वयभू मंदिरों के दर्शन के लिए यूंतो हमेशा ही श्रद्धालुओं की भीड़ रहती हैं, लेकिन गणेशोत्सव के दौरान यहां का माहौल अलग ही निराला होता है। इन अष्टविनायकों के साथ कईदिलचस्प कहानियां जुड़ी हुई हैं। माना जाता है कि ब्रह्मा जी के वरदान के बाद श्री गणेश ने हर युग में अलग-अलग रुपों में अवतार लिया और लोगोंको आशीर्वाद दिया।  ।। अष्टविनायक मंत्र ।। स्वस्ति श्रीगणनायकं गजमुखं मोरेश्वरं सिद्धिदम् ॥१॥बल्लाळं मुरुडे विनायकमहं चिन्तामणिं थेवरे ॥२॥लेण्याद्रौ गिरिजात्मजं सुवरदं विघ्नेश्वरं ओझरे ॥३॥ग्रामे रांजणनामके गणपतिं कुर्यात् सदा मङ्गलम् ॥४॥ श्री मयूरेश्वर मंदिर (मोरगांव, पुणे) मयूरेश्वर (मोरेश्वर) मंदिर पुणे से ८० किलोमीटर मोरगाँव में स्थित है। इस मंदिर के चारों कोनों में मीनारें और दीवारें हैं। यहाँ चार द्वार हैं जो चारों युग ( सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग) के प्रतीक हैं। यहाँ गणेशजी बैठी हुई मुद्रा  विराजमान  है। कहते हैं कि इसी स्‍थान पर गणेश जी नेसिंधुरासुर नाम के राक्षस का वध मोर पर सवार होकर उससे युद्ध करते हुए किया था। इसी कारण उनको मयूरेश्वर कहा जाता है। ये भी पढ़े : Ganesh Chaturthi 2020: घर में गणपति स्थापना, जानें शुभ मुहूर्त एवं पूजन विधि सिद्धिविनायक मंदिर (करजत तहसील, अहमदनगर)  सिद्धिविनायक मंदिर पुणे से 200 किलोमीटर सिद्धटेक गाँव में स्थित है। सिद्धिविनायक अष्टविनायक में दूसरे गणेश हैं। पौराणिक मन्यताओ के अनुसारयहाँ भगवान विष्णु ने सिद्धियाँ प्राप्त की थी। यह मंदिर एक पहाड़ की चोटी पर स्थित है जिससे इस मंदिर की परिक्रमा करने के लिए पहाड़ कीपरिक्रमा करनी होती हैं। श्री बल्लालेश्वर मंदिर (पाली गाँव, रायगढ़) श्री बल्लालेश्वर मंदिर गोवा राजमार्ग पर नागोथाने से पहले से 11 किलोमीटर, मुंबई पुणे हाइवे बांद, पाली से टोयन में स्थित है। प्राचीन काल मेंबल्लाल नामक एक बालक था, वह गणेश जी का परमभक्त था उसने एक दिन पाली गाँव में विशेष पूजा का आयोजन किया और सभी बच्चों कोआमंत्रित किया। पूजा कई दिनों तक चली और बच्चों ने पूजा पूर्ण होने से पहले घर लोटने से माना कर दिया इससे बच्चों के माता पिता ने नाराजहोकर बल्लाल के पिता कल्याणी सेठ से शिकायत की तो उन्होंने जगंल जाकर जहाँ पूजा चल रही वहाँ बल्लाल को पीटा और गणेश जी की मुर्ती केसाथ उसे भी जंगल में फेंक दिया। बल्लाल गंभीर हालत में भी भगवान गणेश जी की पूजा करता रहा। इस भक्ति से प्रसन्न होकर गणेश जी ने उसेदर्शन दिए और वरदान माँगने को कहा, तब बल्लाल ने गणेश जी से आग्रह किया अब वे इसी स्थान पर निवास करें। तब से गणपति यहां निवास करने लगे। श्री वरदविनायक (कोल्हापुर, रायगढ़) श्री वरदविनायक का मंदिर महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में कोल्हापुर क्षेत्र के महाड़ में स्थित हैं। मान्यता है कि वरदविनायक गणेश अपने नाम के समानसभी भक्तों की मनोकामन पूर्ण करते हैं। इस मंदिर में नंददीप नाम का दीपक निरंतर वर्षों से प्रज्जवलित है। चिंतामणि गणपति (थेऊर गांव, पुणे) चिंतामणि गणपति मंदिर पुणे जिले के हवेली तालुका में स्थित है। इस मंदिर के निकट तीन नदियों (भीम, मूला और मुथा) का संगम है। मान्यता है किभगवान ब्रमहा जी ने अपने विचलित मन को शांत करने के लिए इसी स्थान पर तपस्या की थी। अगर आपका मन विचलित रहता हो और चिंताएंआपको घेरे रहती हों तो आप थेयूर आएं और श्री चिंतामणि गणपति की पूजा करें सभी चिंताओं से मुक्ति मिल जाएगी।  ये भी पढ़े: Ganesh Visarjan 2021: गणेश विसर्जन कब, कैसे, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि श्री गिरजात्मज गणपति (लेण्याद्री गांव, पुणे) गिरजात्मज गणेश मंदिर पुणे-नासिक राजमार्ग पर पुणे से 90 किलोमीटर लेण्याद्री गांव में स्थित है। यह एक पहाड़ पर है और बौद्ध गुफाओं के स्थान पर बनाया गया है। इस पहाड़ पर १८ बौद्ध गुफाएँ हैं जिसमें से ८वीं गुफा में गिरजात्मजविनायक मंदिर है। मंदिर तक पहुंचने के लिए 307 सिढ़ियों चढ़नी पड़ती हैं । पूरा मंदिर ही एक बड़े पत्थर को काट कर बनाया गया है । मंदिर कामुख्य द्वार दक्षिण की ओर है। विघ्नेश्वर गणपति मंदिर (ओझर)  विघ्नेश्वर गणपति मंदिर पुणे नासिक रोड पर नारायणगावं (जूनर या ओजर […]

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देश भर में अनेक प्रसिद्ध गणेश मंदिर हैं और गणपति महोत्सव के मौके पर उन सब मंदिरो में दर्शनो के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। अब हमआपको गणेश जी के 8 मंदिरो के बारे में बता रहें जो बहुत प्राचीन है।

महाराष्ट्र के पुणे के विभिन्न स्थानो में गणेश जी के आठ मंदिर हैं, इन्हें अष्टविनायक कहा जाता है। इन मंदिरों में गणेश जी की स्वयंभू (अपने आप प्रकट हुई) प्रतिमा है और कहा जाता है की यहाँ भगवान गणेश स्वयं विराजते हैं और इन अष्ट स्वरूप के दर्शन मात्र से कई जन्मों का पुण्य मिलता है।

गणपति महोत्सव के मौके पर अष्टविनायक यात्रा का अपना महत्व है। पुणे के आस-पास स्थित गणपति जी के आठ स्वयभू मंदिरों के दर्शन के लिए यूंतो हमेशा ही श्रद्धालुओं की भीड़ रहती हैं, लेकिन गणेशोत्सव के दौरान यहां का माहौल अलग ही निराला होता है। इन अष्टविनायकों के साथ कईदिलचस्प कहानियां जुड़ी हुई हैं। माना जाता है कि ब्रह्मा जी के वरदान के बाद श्री गणेश ने हर युग में अलग-अलग रुपों में अवतार लिया और लोगोंको आशीर्वाद दिया। 

।। अष्टविनायक मंत्र ।।


स्वस्ति श्रीगणनायकं गजमुखं मोरेश्वरं सिद्धिदम् ॥१॥
बल्लाळं मुरुडे विनायकमहं चिन्तामणिं थेवरे ॥२॥
लेण्याद्रौ गिरिजात्मजं सुवरदं विघ्नेश्वरं ओझरे ॥३॥
ग्रामे रांजणनामके गणपतिं कुर्यात् सदा मङ्गलम् ॥४॥

श्री मयूरेश्वर मंदिर (मोरगांव, पुणे)

मयूरेश्वर (मोरेश्वर) मंदिर पुणे से ८० किलोमीटर मोरगाँव में स्थित है। इस मंदिर के चारों कोनों में मीनारें और दीवारें हैं। यहाँ चार द्वार हैं जो चारों युग ( सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग) के प्रतीक हैं। यहाँ गणेशजी बैठी हुई मुद्रा  विराजमान  है। कहते हैं कि इसी स्‍थान पर गणेश जी नेसिंधुरासुर नाम के राक्षस का वध मोर पर सवार होकर उससे युद्ध करते हुए किया था। इसी कारण उनको मयूरेश्वर कहा जाता है।

ये भी पढ़े : Ganesh Chaturthi 2020: घर में गणपति स्थापना, जानें शुभ मुहूर्त एवं पूजन विधि

सिद्धिविनायक मंदिर (करजत तहसील, अहमदनगर) 

सिद्धिविनायक मंदिर पुणे से 200 किलोमीटर सिद्धटेक गाँव में स्थित है। सिद्धिविनायक अष्टविनायक में दूसरे गणेश हैं। पौराणिक मन्यताओ के अनुसारयहाँ भगवान विष्णु ने सिद्धियाँ प्राप्त की थी। यह मंदिर एक पहाड़ की चोटी पर स्थित है जिससे इस मंदिर की परिक्रमा करने के लिए पहाड़ कीपरिक्रमा करनी होती हैं।

श्री बल्लालेश्वर मंदिर (पाली गाँव, रायगढ़)

श्री बल्लालेश्वर मंदिर गोवा राजमार्ग पर नागोथाने से पहले से 11 किलोमीटर, मुंबई पुणे हाइवे बांद, पाली से टोयन में स्थित है। प्राचीन काल मेंबल्लाल नामक एक बालक था, वह गणेश जी का परमभक्त था उसने एक दिन पाली गाँव में विशेष पूजा का आयोजन किया और सभी बच्चों कोआमंत्रित किया। पूजा कई दिनों तक चली और बच्चों ने पूजा पूर्ण होने से पहले घर लोटने से माना कर दिया इससे बच्चों के माता पिता ने नाराजहोकर बल्लाल के पिता कल्याणी सेठ से शिकायत की तो उन्होंने जगंल जाकर जहाँ पूजा चल रही वहाँ बल्लाल को पीटा और गणेश जी की मुर्ती केसाथ उसे भी जंगल में फेंक दिया। बल्लाल गंभीर हालत में भी भगवान गणेश जी की पूजा करता रहा। इस भक्ति से प्रसन्न होकर गणेश जी ने उसेदर्शन दिए और वरदान माँगने को कहा, तब बल्लाल ने गणेश जी से आग्रह किया अब वे इसी स्थान पर निवास करें। तब से गणपति यहां निवास करने लगे।

श्री वरदविनायक (कोल्हापुर, रायगढ़)

श्री वरदविनायक का मंदिर महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में कोल्हापुर क्षेत्र के महाड़ में स्थित हैं। मान्यता है कि वरदविनायक गणेश अपने नाम के समानसभी भक्तों की मनोकामन पूर्ण करते हैं। इस मंदिर में नंददीप नाम का दीपक निरंतर वर्षों से प्रज्जवलित है।

चिंतामणि गणपति (थेऊर गांव, पुणे)

चिंतामणि गणपति मंदिर पुणे जिले के हवेली तालुका में स्थित है। इस मंदिर के निकट तीन नदियों (भीम, मूला और मुथा) का संगम है। मान्यता है किभगवान ब्रमहा जी ने अपने विचलित मन को शांत करने के लिए इसी स्थान पर तपस्या की थी। अगर आपका मन विचलित रहता हो और चिंताएंआपको घेरे रहती हों तो आप थेयूर आएं और श्री चिंतामणि गणपति की पूजा करें सभी चिंताओं से मुक्ति मिल जाएगी। 

ये भी पढ़े: Ganesh Visarjan 2021: गणेश विसर्जन कब, कैसे, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

श्री गिरजात्मज गणपति (लेण्याद्री गांव, पुणे)

गिरजात्मज गणेश मंदिर पुणे-नासिक राजमार्ग पर पुणे से 90 किलोमीटर लेण्याद्री गांव में स्थित है। यह एक पहाड़ पर है और बौद्ध गुफाओं के स्थान पर बनाया गया है। इस पहाड़ पर १८ बौद्ध गुफाएँ हैं जिसमें से ८वीं गुफा में गिरजात्मजविनायक मंदिर है। मंदिर तक पहुंचने के लिए 307 सिढ़ियों चढ़नी पड़ती हैं । पूरा मंदिर ही एक बड़े पत्थर को काट कर बनाया गया है । मंदिर कामुख्य द्वार दक्षिण की ओर है।

विघ्नेश्वर गणपति मंदिर (ओझर) 

विघ्नेश्वर गणपति मंदिर पुणे नासिक रोड पर नारायणगावं (जूनर या ओजर से होकर ) 85 किलोमीटर की दूरी पर है । ओजर अष्टविनायक सातवें मंदिरके लिए निर्धारित है । मंदिर विघनेश्वर कुकदेश्वर नदी के तट पर ओजर में है। पौराणिक कथा के अनुसार हेमवती के राजा अभिनंदना ने स्वर्ग की गददीपाने के लिए घोर तपस्या की उस की तपस्या में बाधा डालने के लिए इंद्र ने विघनासुर को भेजा। वह संतो और आम जनो को परेशान करने लगा तबगणपति जी ने लोगों के अनुरोध पर विघनासुर का वध इसी स्थान पर किया। जिसके बाद से ये मंदिर विघ्नेश्वर, विघ्नहर्ता और विघ्नहार के रूप में जानाजाने लगा है।

महागणपति मंदिर (राजणगांव)

महागणपति मंदिर पुणे-अहमदनगर राजमार्ग पर 50 किलोमीटर दूरी पे पुणे के रांजणगांव में स्थित है। यह मंदिर इतिहास के अनुसार 9 – 10वीं सदी केबीच माना जाता है। इस मंदिर का प्रवेश द्धार बहुत विशाल और सुंदर है। यहां गणपति की मूर्ति को माहोतक नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता हैकि महागणपति जी की असली मूर्ति मंदिर के अंदर एक तहखाने में रखी गई है. जब भारत पर मुगल हमला कर मंदिरों को लूट रहे थेउस वक्त मंदिर के तहखाने में मूर्ति को छिपा के रख दिया गया था. इस मंदिर का निर्माण भगवान शिव ने कराया था. कहते हैं कित्रिपुरासुर के साथ युद्ध से पहले शिव भगवान ने इस मंदिर में पूजा की थी.

 

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