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]]>ब्रह्माजी ने हनुमानजी को वरदान दिया कि “इस बालक को कभी ब्रह्मशाप नहीं लगेगा और यह शत्रुओं के लिए भयंकर और मित्रो के लिए अभयदाता बनेगा एवं इच्छानुसार स्वरुप पा सकेगा।”
इन्द्रदेव ने हनुमान जी को वरदान दिया कि “मेरा वज्र भी इस बालक को नुकसान नहीं पहुंचा पायेगा।”
सूर्यदेव ने भी कहा कि “इस बालक को में अपना तेज प्रदान करता हूं।”
यमदेव ने वरदान दिया कि “यह बालक सदा निरोगी एवं मेरे दण्ड से मुक्त रहेगा”।
कुबेर ने आशीर्वाद दिया कि “युद्ध में हनुमान कभी विषादित नहीं होगा तथा राक्षस भी इनको कभी हरा नहीं पाएंगे”।
देवो के देव महादेव शिव ने भी अपना अभय वरदान हनुमान को दिया।
इन सभी वरदानों को प्राप्त कर, हनुमान जी कलयुग के प्रमुख एवं पूजनीय देवों में गिने जाते हैं। तुलसीदास जी द्वारा लिखित , काव्यात्मक कृति ‘हनुमान चालीसा’ खुद में हज़ारों और लाखों मन्त्रों के समान शक्तिशाली बताई गयी है। वैसे तो पूरी ही हनुमान चालीसा बहुत महत्वपूर्ण है किन्तु अगर हनुमान चालीसा की यह निम्न 5 चौपाइयां ही सही से निरंतर जाप की जाए, तो सभी दुखों से इंसान को मुक्त कर सकती हैं।
1. भूत-पिशाच निकट नहीं आवे।
महाबीर जब नाम सुनावे।।
यदि व्यक्ति को किसी भी प्रकार का भय सताता है तो नित्य रोज प्रातः और सायंकाल में 108 बार इस चौपाई का जाप किया जाये तो सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है।
2. नासे रोग हरे सब पीरा।
जो सुमिरे हनुमंत बलबीरा।।
यदि व्यक्ति बिमारियों से घिरा रहता है या कोई बहुत बड़ी बीमारी से व्यक्ति ग्रसित है तो निरंतर सुबह-शाम 108 बार जप करना तथा मंगलवार को हनुमान जी की मूर्ति के सामने पूरी हनुमान चालीसा के पाठ से रोगों की पीड़ा खत्म हो जाती है।
3. अष्ट-सिद्धि नवनिधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।
हनुमान जी आठ सिद्धि और नौ निधियों को देने वाले भगवान हैं। इनको ऐसा वरदान माता सीताजी ने दिया है। यदि जीवन में व्यक्ति को शक्तियों की प्राप्ति करनी है ताकि जीवन निर्वाह में मुश्किलों का कम सामना करना पड़े तो नित्य रोज, ब्रह्म महूर्त में घंटा-आधा घंटा, इन पंक्तियों के जप से लाभ प्राप्त हो सकता है।
4. बिद्यबान गुनी अति चातुर।
रामकाज करीबे को आतुर।।
यदि किसी व्यक्ति को विद्या और धन चाहिए तो निम्न पंक्तियों के जप से हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है। विद्या और चतुराई को प्राप्त करने के लिए तो यह चौपाई राम-बाण है। प्रतिदिन 108 बार ध्यानपूर्वक जप करने से, व्यक्ति को धन सम्बंधित दुःख दूर हो जाते हैं।
5. भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्रजी के काज संवारे।।
यदि कोई व्यक्ति शत्रुओं से परेशान हैं या व्यक्ति के कार्य नहीं बन पा रहे हैं तो हनुमान चालीसा की इस चौपाई का कम से कम 108 बार जप करना चाहिए।
मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ ध्यानपूर्वक करने से सभी तरह के दुखों से मुक्ति प्राप्त हो जाती है।
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]]>The post अंजनी पुत्र का नाम हनुमान कैसे पड़ा? appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>बल और ब्रह्मचर्य के स्वामी हनुमान का जन्म राजा केसरी और उनकी पत्नी अंजना के घर हुआ था। इसलिए हनुमान को अंजनी पुत्र और केसरी नंदन भी कहते है। हनुमान को महादेव का अवतार भी कहा जाता है। हनुमान जी की माता अंजना भोलेनाथ की परम भक्त थीं, उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें वरदान दिया था कि वो उनकी कोख से जन्म लेंगे।
हनुमान जी को राजा केसरी के पुत्र होने के कारण केसरी नंदन के नाम से बुलाया जाता है, तो नाम उऩका हनुमान कैसे पड़ गया? इसके पीछे एक रोचक कथा है।
एक बार की बात है, माता अंजना कुछ काम कर रही थीं। तभी बाल हनुमान माता से भोजन की हठ करने लगे। माता अंजना कार्य में व्यस्त इसलिए उन्होंने हनुमान जी के कहा कि वो जाकर बगीचे से फल खा लें। माता की अनुमति लेकर बाल हनुमान बगीचे में चले गये।
हनुमान जी बगीचे में घूमने लगे। माता द्वारा बताए फल के अनुरूप ही उन्हें आसमान में एक नारंगी रंग का फल दिखाई दिया। बाल हनुमान उड़े और मगन होकर उस फल को खा लिया। उनके को नारंगी फल खाते ही पूरे संसार में अंधकार छा गया, क्योंकि वो कोई फल नहीं था, बल्कि सूर्य देवता थे। सभी देवताओं ने बाल हनुमान से आग्रह किया कि वो सूर्य देव को छोड़ दें, लेकिन बाल मन एक बार हठ कर गया सो कर गया।
देवताओं के आग्रह पर भी जब हनुमान ने सूर्य देवता को नहीं उगला, तो इंद्र देव ने क्रोधित होकर हनुमान पर अपने वज्र से वार कर दिया। हनुमानजी सीधे धरती पर आ गिर। इस वज्रापात से बाल हनुमान का जबड़ा टूट गया। हनु का अर्थ होता है जबड़ा और मान का अर्थ होता है विरूपति। इसी कारण अंजनी पुत्र का नाम पड़ गया हनुमान।
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]]>भक्तगण अपनी स्थानीय मान्यताओं एवं कैलेण्डर के आधार पर वर्ष में भिन्न-भिन्न समय पर हनुमान जयन्ती का त्यौहार मनाते हैं। उत्तर भारतीय राज्यों में चैत्र पूर्णिमा की हनुमान जयन्ती सर्वाधिक लोकप्रिय है।
आन्ध्र प्रदेश तथा तेलंगाना में, हनुमान जयन्ती 41 दिनों तक मनायी जाती है, जो चैत्र पूर्णिमा से प्रारम्भ होती है तथा वैशाख माह में कृष्ण पक्ष के दौरान दसवें दिन समाप्त होती है। आन्ध्र प्रदेश में भक्त चैत्र पूर्णिमा पर 41 दिनों की दीक्षा आरम्भ करते हैं तथा हनुमान जयन्ती के दिन इसका समापन करते हैं।
तमिलनाडु में, हनुमान जयन्ती को हनुमथ जयन्ती के नाम से जाना जाता है और मार्गशीर्ष अमावस्या के दौरान मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेण्डर में तमिल हनुमान जयन्ती जनवरी या दिसम्बर माह में आती है।
कर्नाटक में, मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष त्रयोदशी को हनुमान जयन्ती मनाई जाती है। इस शुभ दिन को हनुमान व्रतम के नाम से जाना जाता है।
हनुमान जी को भगवान शिव का 11वां रूद्र अवतार माना जाता हैं| इनके जन्म के बारे में का पुराणों में उल्लेख है की जब अमरत्व की प्राप्ति के लिये देवताओं व असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था तब समुद्र से निकले अमृत को असुरों ने छीन लिया और आपस में ही लड़ने लगे। तब भगवान विष्णु मोहिनी के रूप में अवतरित हुए। मोहनी रूप देख देवता व असुर तो क्या स्वयं भगवान शिवजी कामातुर हो गए। इस समय भगवान शिव ने जो वीर्य त्याग किया उसे पवनदेव ने वानरराज केसरी की पत्नी अंजना के गर्भ में प्रविष्ट कर दिया। जिसके फलस्वरूप माता अंजना के गर्भ से केसरी नंदन मारुती संकट मोचन रामभक्त श्री हनुमान का जन्म हुआ।
हनुमान भगवान राम के आराध्य भक्त हैं। वह भगवान की भक्ति के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में बरकरार है। वह एक ब्रह्मचारी है और उन्हें बजरंग बली, पवनपुत्र, महावीर और मारुति जैसे कई नामों से जाना जाता है। हनुमान शक्ति, भक्ति, निस्वार्थ सेवा और समर्पण के प्रतीक है।
माना जाता है कि हनुमान जन्मोत्सव पर हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने से जीवन में संकटों से मुक्ति और सुख शान्ति की प्राप्ति होती है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि या मंगल ग्रह का अशुभ प्रभाव होता है, तो उसे विधिपूर्वक हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए। इनकी विधि पूर्वक पूजा करने से इन दोनों ग्रहों से जुड़ी समस्याएं भी दूर हो जाती हैं। साथ ही साथ नकारात्मक ऊर्जा, भूत-प्रेत बाधा जैसी परेशानियों से भी मुक्ति मिल जाती है। इस दिन हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ अवश्य करना चाहिए।
इस व्रत को रखने वालों के लिए कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है।
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]]>The post भगवान राम पर हनुमान जी का कर्जा appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>अब प्रजा में सुगबुगाहट होने लगी कि क्या बात है कि सब अतिथि चले गए परन्तु अयोध्या से हनुमान जी नहीं गये।
अब दरबार में कानाफूसी शुरू हुई कि हनुमान जी से कौन जाने के लिए कहे , तो सबसे पहले माता सीता जी की बारी आई कि आप ही बोलो कि हनुमान जी चले जायें।
माता सीता बोलीं- मै तो लंका में विकल पड़ी थी, मेरा तो एक-एक दिन एक-एक यूग के समान बीत रहा था। वो तो हनुमान जी थे, जो प्रभु की मुद्रिका ले के आए, और धीरज बंधवाया कि…!
कछुक दिवस जननी धरु धीरा।
कपिन्ह सहित अइहहिं रघुबीरा।।
निसिचर मारि तोहि लै जैहहिं।
तिहुँ पुर नारदादि जसु गैहहिं॥
हनुमान को मैंने अपना पुत्र माना है, मैं तो अपने बेटे से बिल्कुल भी नहीं बोलूंगी अयोध्या छोड़कर जाने के लिए, आप किसी और से बुलावा लो।
अब बारी आई लक्ष्मण जी की। तो लक्ष्मण जी ने कहा, मै तो लंका के रणभूमि में वैसे ही मरणासन्न अवस्था में पड़ा था। पूरा राम दल विलाप कर रहा था।
प्रभु प्रलाप सुनि कान बिकल भए बानर निकर।
आइ गयउ हनुमान जिमि करुना महँ बीर रस।।
ये तो जो आप सब के सामने खड़ा है, वो हनुमान जी का लक्ष्मण है। मैं किस मुंह से कैसे बोलूं, कि हनुमान जी अयोध्या से चले जाएं।
अब बारी आयी भरत जी की। भरत जी तो इतना रोये, कि राम जी को अयोध्या से निकलवाने का कलंक तो वैसे ही मुझ पर लगा है। आप सब मिलके हनुमान जी का और लगवा दो।
और दूसरी बात ये कि…!
बीतें अवधि रहहिं जौं प्राना।
अधम कवन जग मोहि समाना॥
मैंने तो नंदीग्राम में ही अपनी चिता लगा ली थी, वो तो हनुमान जी थे जिन्होंने आकर ये खबर दी कि…!
रिपु रन जीति सुजस सुर गावत।
सीता सहित अनुज प्रभु आवत॥
मैं तो बिल्कुल न बोलूं हनुमान जी से अयोध्या छोड़कर चले जाओ, आप किसी और से बुलवा लो।
अब बचा कौन..? सिर्फ शत्रुघ्न भैया। जैसे ही सब ने उनकी तरफ देखा,
तो शत्रुघ्न भैया बोल पड़े.. मैंने तो पूरी रामायण में कहीं नहीं बोला, तो आज ही क्यों बुलवा रहे हो, और वो भी हनुमान जी को अयोध्या से जाने के लिए। जिन्होंने ने माता सीता, लखन भैया, भरत भैया सब के प्राणों को संकट से उबारा हो, किसी अच्छे काम के लिए कहते तो बोल भी देता। मै तो बिल्कुल भी नहीं बोलूँगा।
अब बचे तो मेरे राम सरकार…
माता सीता ने कहा प्रभु! आप तो तीनों लोकों के स्वामी हो, और देखती हूं आप हनुमान जी से सकुचाते हैं। और आप खुद भी कहते हो कि…!
प्रति उपकार करौं का तोरा।
सनमुख होइ न सकत मन मोरा॥
आखिर आप के लिए क्या अदेय है प्रभु!
राम जी ने कहा, देवी मैं हनुमान जी का क़र्ज़दार जो हूं, , इसीलिए तो..
सनमुख होइ न सकत मन मोरा
देवी ! हनुमान जी का कर्ज़ा उतारना आसान नहीं है और इतना सामर्थ राम में नहीं है, जो “राम नाम” में है। क्योंकि कर्ज़ा उतारना भी तो बराबरी का ही पड़ेगा न…!
यदि सुनना चाहती हो तो सुनो – हनुमान जी का कर्ज़ा कैसे उतारा जा सकता है।
पहले हनुमान विवाह करें, लंकेश हरें इनकी जब नारी।
मुंदरी लै रघुनाथ चले, निज पौरुष लांघि अगम्य जे वारी।
आयि कहें, सुधि सोच हरें, तन से, मन से होई जाएं उपकारी।
तब रघुनाथ चुकायि सकें, ऐसी हनुमान की दिव्य उधारी।।
देवी ! इतना आसान नहीं है, हनुमान जी का कर्ज़ा चुकाना। मैंने ऐसे ही नहीं कहा था कि…!
“सुनु सुत तोहि उरिन मैं नाहीं”
मैंने बहुत सोच विचार कर कहा था। लेकिन यदि आप कहती हो तो कल सभा में हनुमान जी से बोलूंगा कि वो भी कुछ मांग लें।
दूसरे दिन राज्य सभा में सब एकत्र हुए, सब बड़े उत्सुक थे कि हनुमान जी क्या मांगेंगे, और राम जी क्या देंगे।
राघव जी ने कहा– हनुमान सब लोगों ने मेरी बहुत सहायता की और मैंने, सब को कोई न कोई पद दे दिया। विभीषण और सुग्रीव को क्रमशः लंका और किष्कन्धा का राजपद, अंगद को युवराज पद। तो तुम भी अपनी इच्छा बताओ…?
हनुमान जी बोले – प्रभु आप ने जितने नाम गिनाए, उन सब को एक एक पद मिला है, और आप कहते हो…!
तैं मम प्रिय लछिमन ते दूना
तो फिर यदि मैं दो पद मांगू तो..?
सब लोग सोचने लगे बात तो हनुमान जी भी ठीक ही कह रहे हैं।
राम जी ने कहा ! ठीक है, मांग लो।
सब लोग बहुत खुश हुए कि आज हनुमान जी का कर्ज़ा चुकता हो जायेगा।
हनुमान जी ने कहा – प्रभु जो पद आप ने सबको दिए हैं, उनके पद में राजमद हो सकता है, तो मुझे उस तरह के पद नहीं चाहिए, जिसमें राजमद की शंका हो।
राम जी ने पूछा – तो फिर…! आप को कौन सा पद चाहिए ?
हनुमान जी ने राम जी के दोनों चरण पकड़ लिए, प्रभु ..! हनुमान को तो बस यही दो पद चाहिए।
हनुमत सम नहीं कोउ बड़भागी।
नहीं कोउ रामचरण अनुरागी।
जानकी जी की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए राम जी बोले, लो उतर गया हनुमानजी का कर्जा! और अभी तक जिसको बोलना था, सब बोल चुके है, अब जो मै बोलता हूं उसे सब सुनो,
रामजी भरत भैया की तरफ देखते हुए बोले-
“हे! भरत भैया’ कपि से उऋण हम नाही”
हम चारों भाई चाहे जितनी बार जन्म ले लें, हनुमानजी से उऋण नहीं हो सकते।
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]]>उपरोक्त मंगलवार का व्रत करने वाले भक्तों के लिए कुछ जरूरी काम की बातें बताई गई हैं। अगर आप इन बातों को ध्यान में रखते हुए मंगलवार व्रत करते हैं तो इससे बजरंगबली का आशीर्वाद आपके ऊपर हमेशा बना रहेगा और जीवन में चल रही सभी परेशानियां दूर होंगी। शास्त्रों के अनुसार महाबली हनुमान जी सबसे शक्तिशाली देवता माने गए हैं। कलयुग में यह अपने भक्तों से सबसे शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। जो भक्त अपने सच्चे मन से इनका स्मरण करता है, उसकी सहायता के लिए यह जरूर आते हैं। आप मंगलवार व्रत करके शुभ फल की प्राप्ति कर सकते हैं।
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