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हिंदू मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी एक ऐसे देवता है जो कलयुग में भी पृथ्वी पर विराजमान हैं। भगवान हनुमान की पूजा आराधना करने से मनुष्य हर प्रकार के भय से मुक्त हो जाता है। इनकी पूजा करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। ज्यादातर लोग हनुमान चालीसा(Hanuman Chalisa) का पाठ करते हैं। यह तो फायदेमंद होता ही है साथ ही अगर बजरंग बाण(Hanuman Bajrang Baan) का पाठ किया जाए तो इससे भक्तों को बजरंगबली की असीम कृपा प्राप्त होती है। इस पाठ को करने से आप कई तरह की समस्याओं से निजात पा सकते हैं।शास्त्रों में बजरंग बाण को बेहद प्रभावशाली माना गया है। भगवान हनुमान जी की कृपा पाने के लिए यह अत्यंत शुभ है। बजरंग बाण का मंत्र हनुमान जी की भक्ति, शक्ति और ऊर्जा का स्रोत माना जाता है।
इस लेख में हम हनुमान जी के बजरंग बाण के रात्रि में किये जाने वाले पाठ के विषय में बता रहे है। वैसे तो बजरंग बाण का नियमित रूप से पाठ आपको हर संकट से दूर रखता है। किन्तु अगर रात्रि में बजरंग बाण को इस प्रकार से सिद्ध किया जाये तो इसके चमत्कारी प्रभाव तुरंत ही आपके सामने आने लगते है। अगर आप चाहते है अपने शत्रु को परास्त करना या फिर व्यापर में उन्नति या किसी भी प्रकार के अटके हुए कार्य में पूर्णता तो रात्रि में नीचे बताए गए अनुसार बजरंग बाण पाठ को अवश्य करें।  हनुमान चालीसा की इन 5 चौपाइयों के जाप से, खत्म हो जायेंगे सभी कष्ट

बजरंग बाण सिद्ध करने की विधि 

किसी भी मंगलवार को रात्रि का 11 से रात्रि 1 बजे तक का समय सुनिश्चित कर ले, बजरंग बाण का पाठ आपको 11 से रात्रि 1 तक करना है, सबसे पहले आप एक चौकी को पूर्व दिशा की तरफ स्थापित करें अब इस चौकी पर एक पीला कपडा बिछा दे, अब आप इस मंत्र “ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ” को एक कागज पर लिख कर इसे फोल्ड करके इस चौकी पर रख दे।
अब आप चौकी के दायें तरफ एक मिटटी के दिए में घी का दीपक जला दे। आपको इस चौकी के सामने आसन पर बैठ जाना है। इस प्रकार आपका मुख पूर्व दिशा कर तरफ हो जायेगा और दीपक आपके बाएं तरफ होगा। अब आप परमपिता परमेश्वर का ध्यान करते हुए इस प्रकार बोले  “हे परमपिता परमेश्वर मै(अपना नाम बोले ) गोत्र (अपना गोत्र बोले ) आपकी कृपा से बजरंग बाण का यह पाठ कर रहा हु इसमें मुझे पूर्णता प्रदान करें।” अब आप ठीक 11 बजते ही ”ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ” मंत्र का जाप शुरू कर दे –
इस मंत्र को आप 15 मिनट तक जाप करें, ध्यान रहे मंत्र में जहाँ पर फट शब्द आता है वहाँ आप फट बोलने के साथ -साथ 2 उँगलियों से दुसरे हाथ की हथेली पर ताली बजानी है।
अब आप 11 बजकर 15 मिनट से और रात्रि 1 बजे तक लगातार बजरंग बाण (Hanuman Bajrang Baan) का पाठ करना प्रारंभ कर दे। ध्यान रहे बजरंग बाण पाठ आपको याद होना चाहिए। किताब से पढ़कर बिलकुल न करें जैसे ही 1 बजता है आप बजरंग बाण के पाठ को पूरा कर अब आप फिर से इस मंत्र
ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ” का जाप 15 मिनट तक करें। अब आप कागज पर लिखे हुए मंत्र को जला दे। इस प्रकार आपका यह बजरंग बाण का पाठ एक ही रात्रि में सिद्ध हो जाता है।

बजरंग बाण पाठ – Hanuman Bajrang Baan

दोहा
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥
सिया पति राम जय जय राम मेरे प्रभु राम जय जय राम।।
चौपाई
जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी।।
जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महासुख दीजै।।
जैसे कूदि सिन्धु महि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा।।
आगे जाई लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका।।
जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा।।
बाग़ उजारि सिन्धु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा।।
अक्षयकुमार को मारि संहारा। लूम लपेट लंक को जारा।।
लाह समान लंक जरि गई। जय जय जय धुनि सुरपुर में भई।।
अब विलम्ब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु उर अन्तर्यामी।।
जय जय लखन प्राण के दाता। आतुर होय दुख हरहु निपाता।।
जै गिरिधर जै जै सुखसागर। सुर समूह समरथ भटनागर।।
ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहिंं मारु बज्र की कीले।।
गदा बज्र लै बैरिहिं मारो। महाराज प्रभु दास उबारो।।
ऊँकार हुंकार महाप्रभु धावो। बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो।।
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा। ऊँ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा।।
सत्य होहु हरि शपथ पाय के। रामदूत धरु मारु जाय के।।
जय जय जय हनुमन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा।।
पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत हौं दास तुम्हारा।।
वन उपवन, मग गिरिगृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं।।
पांय परों कर ज़ोरि मनावौं। यहि अवसर अब केहि गोहरावौं।।
जय अंजनिकुमार बलवन्ता। शंकरसुवन वीर हनुमन्ता।।
बदन कराल काल कुल घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक।।
भूत प्रेत पिशाच निशाचर। अग्नि बेताल काल मारी मर।।
इन्हें मारु तोहिं शपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की।।
जनकसुता हरिदास कहावौ। ताकी शपथ विलम्ब न लावो।।
जय जय जय धुनि होत अकाशा। सुमिरत होत दुसह दुःख नाशा।।
चरण शरण कर ज़ोरि मनावौ। यहि अवसर अब केहि गोहरावौं।।
उठु उठु चलु तोहि राम दुहाई। पांय परों कर ज़ोरि मनाई।।
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता। ऊँ हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता।।
ऊँ हँ हँ हांक देत कपि चंचल। ऊँ सं सं सहमि पराने खल दल।।
अपने जन को तुरत उबारो। सुमिरत होय आनन्द हमारो।।
यह बजरंग बाण जेहि मारै। ताहि कहो फिर कौन उबारै।।
पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करै प्राण की।।
यह बजरंग बाण जो जापै। ताते भूत प्रेत सब कांपै।।
धूप देय अरु जपै हमेशा। ताके तन नहिं रहै कलेशा।।
दोहा
प्रेम प्रतीतहि कपि भजै, सदा धरैं उर ध्यान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्घ करैं हनुमान।।
सिया पति राम जय जय राम मेरे प्रभु राम जय जय राम।।

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हनुमान चालीसा की इन 5 चौपाइयों के जाप से, खत्म हो जायेंगे सभी कष्ट https://astrodeeva.com/%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%a8-5-%e0%a4%9a%e0%a5%8c%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%87/ https://astrodeeva.com/%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%a8-5-%e0%a4%9a%e0%a5%8c%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%87/#respond Fri, 04 Jun 2021 16:26:20 +0000 https://astrodeeva.com/?p=2128 पौराणिक कथा के अनुसार जब इन्द्र के वज्र से हनुमान जी मुर्छित हो गये थे तब पुत्र को छटपटाते देखकर पिता वायुदेव ने अपना वेग रोक दिया और उस समय हनुमान जी को देवताओं ने विभिन्न वरदान दिए थे। ब्रह्माजी ने हनुमानजी को वरदान दिया कि “इस बालक को कभी ब्रह्मशाप नहीं लगेगा और यह […]

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पौराणिक कथा के अनुसार जब इन्द्र के वज्र से हनुमान जी मुर्छित हो गये थे तब पुत्र को छटपटाते देखकर पिता वायुदेव ने अपना वेग रोक दिया और उस समय हनुमान जी को देवताओं ने विभिन्न वरदान दिए थे।

ब्रह्माजी ने हनुमानजी को वरदान दिया कि “इस बालक को कभी ब्रह्मशाप नहीं लगेगा और यह शत्रुओं के लिए भयंकर और मित्रो के लिए अभयदाता बनेगा एवं इच्छानुसार स्वरुप पा सकेगा।”

इन्द्रदेव ने हनुमान जी को वरदान दिया कि “मेरा वज्र भी इस बालक को नुकसान नहीं पहुंचा पायेगा।”

सूर्यदेव ने भी कहा कि “इस बालक को में अपना तेज प्रदान करता हूं।”

यमदेव ने वरदान दिया कि “यह बालक सदा निरोगी एवं मेरे दण्ड से मुक्त रहेगा”।

कुबेर ने आशीर्वाद दिया कि “युद्ध में हनुमान कभी विषादित नहीं होगा तथा राक्षस भी इनको कभी हरा नहीं पाएंगे”।

देवो के देव महादेव शिव ने भी अपना अभय वरदान हनुमान को दिया।

इन सभी वरदानों को प्राप्त कर, हनुमान जी कलयुग के प्रमुख एवं पूजनीय देवों में गिने जाते हैं। तुलसीदास जी द्वारा लिखित , काव्यात्मक कृति ‘हनुमान चालीसा’ खुद में हज़ारों और लाखों मन्त्रों के समान शक्तिशाली बताई गयी है। वैसे तो पूरी ही हनुमान चालीसा बहुत महत्वपूर्ण है किन्तु अगर हनुमान चालीसा की यह निम्न 5 चौपाइयां ही सही से निरंतर जाप की जाए, तो सभी दुखों से इंसान को मुक्त कर सकती हैं।

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आइये देखते हैं इन प्रमुख 5 चौपाइयों को और उनकी महिमा को-

1. भूत-पिशाच निकट नहीं आवे।
     महाबीर जब नाम सुनावे।।

यदि व्यक्ति को किसी भी प्रकार का भय सताता है तो नित्य रोज प्रातः और सायंकाल में 108 बार इस चौपाई का जाप किया जाये तो सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है।

2. नासे रोग हरे सब पीरा।
     जो सुमिरे हनुमंत बलबीरा।।

यदि व्यक्ति बिमारियों से घिरा रहता है या कोई बहुत बड़ी बीमारी से व्यक्ति ग्रसित है तो निरंतर सुबह-शाम 108 बार जप करना तथा मंगलवार को हनुमान जी की मूर्ति के सामने पूरी हनुमान चालीसा के पाठ से रोगों की पीड़ा खत्म हो जाती है।

3. अष्ट-सिद्धि नवनिधि के दाता।
     अस बर दीन जानकी माता।।

हनुमान जी आठ सिद्धि और नौ निधियों को देने वाले भगवान हैं। इनको ऐसा वरदान माता सीताजी ने दिया है। यदि जीवन में व्यक्ति को शक्तियों की प्राप्ति करनी है ताकि जीवन निर्वाह में मुश्किलों का कम सामना करना पड़े तो नित्य रोज, ब्रह्म महूर्त में घंटा-आधा घंटा, इन पंक्तियों के जप से लाभ प्राप्त हो सकता है।

4. बिद्यबान गुनी अति चातुर।
     रामकाज करीबे को आतुर।।

यदि किसी व्यक्ति को विद्या और धन चाहिए तो निम्न पंक्तियों के जप से हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है। विद्या और चतुराई को प्राप्त करने के लिए तो यह चौपाई राम-बाण है। प्रतिदिन 108 बार ध्यानपूर्वक जप करने से, व्यक्ति को धन सम्बंधित दुःख दूर हो जाते हैं।

5. भीम रूप धरि असुर संहारे।
     रामचंद्रजी के काज संवारे।।

यदि कोई व्यक्ति शत्रुओं से परेशान हैं या व्यक्ति के कार्य नहीं बन पा रहे हैं तो हनुमान चालीसा की इस चौपाई का कम से कम 108 बार जप करना चाहिए।

मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ ध्यानपूर्वक करने से सभी तरह के दुखों से मुक्ति प्राप्त हो जाती है।

 

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अंजनी पुत्र का नाम हनुमान कैसे पड़ा? https://astrodeeva.com/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8/ https://astrodeeva.com/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8/#respond Mon, 26 Apr 2021 19:58:12 +0000 https://astrodeeva.com/?p=1971 शक्ति के स्वामी, राम के सेवक भगवान हनुमान को इस धरती पर अमरत्व का वरदान मिला हुआ है। हर युग में वो इस धरती पर रहेंगे और अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते रहेंगे।  बचपन से ही स्वभाव में चंचल और अनुपम लीलाएं करने वाले हनुमान का नाम हनुमान कैसे पड़ा ! आइए, हम आपको […]

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शक्ति के स्वामी, राम के सेवक भगवान हनुमान को इस धरती पर अमरत्व का वरदान मिला हुआ है। हर युग में वो इस धरती पर रहेंगे और अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते रहेंगे।  बचपन से ही स्वभाव में चंचल और अनुपम लीलाएं करने वाले हनुमान का नाम हनुमान कैसे पड़ा ! आइए, हम आपको बताते हैं हनुमान का नाम हनुमान कैसे पड़ा !

बल और ब्रह्मचर्य के स्वामी हनुमान का जन्म राजा केसरी और उनकी पत्नी अंजना के घर हुआ था। इसलिए हनुमान को अंजनी पुत्र और केसरी नंदन भी कहते है। हनुमान को महादेव का अवतार भी कहा जाता है। हनुमान जी की माता अंजना भोलेनाथ की परम भक्त थीं,  उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें वरदान दिया था कि वो उनकी कोख से जन्म लेंगे।

हनुमान जी को राजा केसरी के पुत्र होने के कारण केसरी नंदन के नाम से बुलाया जाता है, तो नाम उऩका हनुमान कैसे पड़ गया? इसके पीछे एक रोचक कथा है।

एक बार की बात है, माता अंजना कुछ काम कर रही थीं। तभी बाल हनुमान माता से भोजन  की हठ करने लगे। माता अंजना कार्य में व्यस्त इसलिए उन्होंने हनुमान जी के कहा कि वो जाकर बगीचे से फल खा लें।  माता की अनुमति लेकर बाल हनुमान बगीचे में चले गये।

हनुमान जी बगीचे में घूमने लगे। माता द्वारा बताए फल के अनुरूप ही उन्हें आसमान में एक नारंगी रंग का फल दिखाई दिया। बाल हनुमान उड़े और मगन होकर उस फल को खा लिया। उनके को नारंगी फल खाते ही पूरे संसार में अंधकार छा गया, क्योंकि वो कोई फल नहीं था, बल्कि सूर्य देवता थे। सभी देवताओं ने बाल हनुमान से आग्रह किया कि वो सूर्य देव को छोड़ दें, लेकिन बाल मन एक बार हठ कर गया सो कर गया।

देवताओं के आग्रह पर भी जब हनुमान ने सूर्य देवता को नहीं उगला, तो इंद्र देव ने क्रोधित होकर हनुमान पर अपने वज्र से वार कर दिया। हनुमानजी सीधे धरती पर आ गिर। इस वज्रापात से बाल हनुमान का जबड़ा टूट गया। हनु का अर्थ होता है जबड़ा और मान का अर्थ होता है विरूपति। इसी कारण अंजनी पुत्र का नाम पड़ गया हनुमान।

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हनुमान जयंती 2021

भगवान राम पर हनुमान जी का कर्जा

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हनुमान जयंती- Hanuman Jayanti https://astrodeeva.com/%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%80-hanuman-jayanti/ https://astrodeeva.com/%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%80-hanuman-jayanti/#respond Mon, 26 Apr 2021 19:41:51 +0000 https://astrodeeva.com/?p=1968 हनुमान जी को  बजरंगबली, पवनपुत्र, आदि कई नामों से भी जाना जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार हनुमान जी को भगवान श्री राम का सबसे बड़ा भक्त माना जाता है। हिन्दू धर्म ग्रंथो के अनुसार इनका जन्म चैत्र माह की पूर्णिमा के दिन हुआ था। हनुमान जयंती(Hanuman Jayanti) पूरे भारत में बहुत उत्साह और […]

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हनुमान जी को  बजरंगबली, पवनपुत्र, आदि कई नामों से भी जाना जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार हनुमान जी को भगवान श्री राम का सबसे बड़ा भक्त माना जाता है। हिन्दू धर्म ग्रंथो के अनुसार इनका जन्म चैत्र माह की पूर्णिमा के दिन हुआ था। हनुमान जयंती(Hanuman Jayanti) पूरे भारत में बहुत उत्साह और उल्लास के साथ मनाई जाती है।

भक्तगण अपनी स्थानीय मान्यताओं एवं कैलेण्डर के आधार पर वर्ष में भिन्न-भिन्न समय पर हनुमान जयन्ती का त्यौहार मनाते हैं। उत्तर भारतीय राज्यों में चैत्र पूर्णिमा की हनुमान जयन्ती सर्वाधिक लोकप्रिय है।

आन्ध्र प्रदेश तथा तेलंगाना में, हनुमान जयन्ती 41 दिनों तक मनायी जाती है, जो चैत्र पूर्णिमा से प्रारम्भ होती है तथा वैशाख माह में कृष्ण पक्ष के दौरान दसवें दिन समाप्त होती है। आन्ध्र प्रदेश में भक्त चैत्र पूर्णिमा पर 41 दिनों की दीक्षा आरम्भ करते हैं तथा हनुमान जयन्ती के दिन इसका समापन करते हैं।

तमिलनाडु में, हनुमान जयन्ती को हनुमथ जयन्ती के नाम से जाना जाता है और मार्गशीर्ष अमावस्या के दौरान मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेण्डर में तमिल हनुमान जयन्ती जनवरी या दिसम्बर माह में आती है।

कर्नाटक में, मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष त्रयोदशी को हनुमान जयन्ती मनाई जाती है। इस शुभ दिन को हनुमान व्रतम के नाम से जाना जाता है।

हनुमान जयंती की कथा- Legend of Hanuman Jayanti

हनुमान जी को भगवान शिव का 11वां रूद्र अवतार माना जाता हैं| इनके जन्म के बारे में का पुराणों में उल्लेख है की जब अमरत्व की प्राप्ति के लिये देवताओं व असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था तब समुद्र से निकले अमृत को असुरों ने छीन लिया और आपस में ही लड़ने लगे। तब भगवान विष्णु मोहिनी के रूप में अवतरित हुए। मोहनी रूप देख देवता व असुर तो क्या स्वयं भगवान शिवजी कामातुर हो गए। इस समय भगवान शिव ने जो वीर्य त्याग किया उसे पवनदेव ने वानरराज केसरी की पत्नी अंजना के गर्भ में प्रविष्ट कर दिया। जिसके फलस्वरूप माता अंजना के गर्भ से केसरी नंदन मारुती संकट मोचन रामभक्त श्री हनुमान का जन्म हुआ।

अन्य पड़ें : भगवान राम पर हनुमान जी का कर्जा

हनुमान जयंती का महत्व- Significance of Hanuman Jayanti

हनुमान भगवान राम के आराध्य भक्त हैं। वह भगवान की भक्ति के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में बरकरार है। वह एक ब्रह्मचारी है और उन्हें बजरंग बली, पवनपुत्र, महावीर और मारुति जैसे कई नामों से जाना जाता है। हनुमान शक्ति, भक्ति, निस्वार्थ सेवा और समर्पण के प्रतीक है।

माना जाता है कि हनुमान जन्मोत्सव पर हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने से जीवन में संकटों से मुक्ति और सुख शान्ति की प्राप्ति होती है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि या मंगल ग्रह का अशुभ प्रभाव होता है, तो उसे विधिपूर्वक हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए। इनकी विधि पूर्वक पूजा करने से इन दोनों ग्रहों से जुड़ी समस्याएं भी दूर हो जाती हैं। साथ ही साथ नकारात्मक ऊर्जा, भूत-प्रेत बाधा जैसी परेशानियों से भी मुक्ति मिल जाती है। इस दिन हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ अवश्य करना चाहिए।

हनुमान जयंती का उत्सव और अनुष्ठान- Celebration and Ritual of Hanuman Jayanti

इस व्रत को रखने वालों के लिए कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है।

  • व्रत के लिए ब्रह्मचर्य का पालन करना जरुरी है हो सके तो जमीन पर ही सोए।
  • प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर प्रभू श्री राम, माता सीता व श्री हनुमान का स्मरण करें।
  • नित्य क्रिया से निवृत होकर स्नान कर हनुमान जी की प्रतिमा को स्थापित कर विधि- विधान से पूजा करें।
  • पूजा में हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है।
  • पूजा की सभी विधि सम्पन्न करने के बाद हनुमान जी की आरती उतारें। इस दिन स्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का अखंड पाठ भी करवाया जाता है।
  • पूजा करने के बाद प्रसाद के रुप में गुड़, भीगे या भुने चने एवं बेसन के लड्डू हनुमान जी को चढ़ाये जाते हैं।
  • पूजा सामग्री में सिंदूर, केसर युक्त चंदन, धूप, अगरबती, दीपक के लिए शुद्ध घी या चमेली के तेल का उपयोग कर सकते हैं।
  • पूजन में पुष्प के रूप में गैंदा, गुलाब, कनेर, सूरजमुखी आदि के लाल या पीले पुष्प अर्पित करें।
  • इस दिन हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाने से मनोकामना की शीघ्र पूर्ति होती है।

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भगवान राम पर हनुमान जी का कर्जा https://astrodeeva.com/%e0%a4%ad%e0%a4%97%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95/ https://astrodeeva.com/%e0%a4%ad%e0%a4%97%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95/#respond Sat, 20 Mar 2021 02:43:52 +0000 https://astrodeeva.com/?p=1791 राम जी लंका पर विजय प्राप्त करके आए तो कुछ दिन पश्चात राम जी ने विभीषण, जामवंत, सुग्रीव और अंगद आदि को अयोध्या से विदा कर दिया। तो सब ने सोचा हनुमान जी को प्रभु बाद में विदा करेंगे, लेकिन राम जी ने हनुमान जी को विदा ही नहीं किया। अब प्रजा में सुगबुगाहट होने […]

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राम जी लंका पर विजय प्राप्त करके आए तो कुछ दिन पश्चात राम जी ने विभीषण, जामवंत, सुग्रीव और अंगद आदि को अयोध्या से विदा कर दिया। तो सब ने सोचा हनुमान जी को प्रभु बाद में विदा करेंगे, लेकिन राम जी ने हनुमान जी को विदा ही नहीं किया।

अब प्रजा में सुगबुगाहट होने लगी कि क्या बात है कि सब अतिथि चले गए परन्तु अयोध्या से हनुमान जी नहीं गये।

अब दरबार में कानाफूसी शुरू हुई कि हनुमान जी से कौन जाने के लिए कहे , तो सबसे पहले माता सीता जी की बारी आई कि आप ही बोलो कि हनुमान जी चले जायें।

माता सीता बोलीं- मै तो लंका में विकल पड़ी थी, मेरा तो एक-एक दिन एक-एक यूग के समान बीत रहा था। वो तो हनुमान जी थे, जो प्रभु की मुद्रिका ले के आए, और धीरज बंधवाया कि…!

कछुक दिवस जननी धरु धीरा।

कपिन्ह सहित अइहहिं रघुबीरा।।

निसिचर मारि तोहि लै जैहहिं।

तिहुँ पुर नारदादि जसु गैहहिं॥

हनुमान को मैंने अपना पुत्र माना है, मैं तो अपने बेटे से बिल्कुल भी नहीं बोलूंगी अयोध्या छोड़कर जाने के लिए, आप किसी और से बुलावा लो।

अब बारी आई लक्ष्मण जी की। तो लक्ष्मण जी ने कहा, मै तो लंका के रणभूमि में वैसे ही मरणासन्न अवस्था में पड़ा था।  पूरा राम दल विलाप कर रहा था।

प्रभु प्रलाप सुनि कान बिकल भए बानर निकर।

आइ गयउ हनुमान जिमि करुना महँ बीर रस।।

ये तो जो आप सब के सामने खड़ा है, वो हनुमान जी का लक्ष्मण है। मैं किस मुंह से कैसे बोलूं, कि हनुमान जी अयोध्या से चले जाएं।

अब बारी आयी भरत जी की। भरत जी तो इतना रोये, कि राम जी को अयोध्या से निकलवाने का कलंक तो वैसे ही मुझ पर लगा है। आप सब मिलके हनुमान जी का और लगवा दो।

और दूसरी बात ये कि…!

बीतें अवधि रहहिं जौं प्राना।

अधम कवन जग मोहि समाना॥

मैंने तो नंदीग्राम में ही अपनी चिता लगा ली थी, वो तो हनुमान जी थे जिन्होंने आकर ये खबर दी कि…!

रिपु रन जीति सुजस सुर गावत।

सीता सहित अनुज प्रभु आवत॥

मैं तो बिल्कुल न बोलूं हनुमान जी से अयोध्या छोड़कर चले जाओ, आप किसी और से बुलवा लो।

अब बचा कौन..? सिर्फ शत्रुघ्न भैया। जैसे ही सब ने उनकी तरफ देखा,

तो शत्रुघ्न भैया बोल पड़े.. मैंने तो पूरी रामायण में कहीं नहीं बोला, तो आज ही क्यों बुलवा रहे हो, और वो भी हनुमान जी को अयोध्या से जाने के लिए। जिन्होंने ने माता सीता, लखन भैया, भरत भैया सब के प्राणों को संकट से उबारा हो, किसी अच्छे काम के लिए कहते तो बोल भी देता। मै तो बिल्कुल भी नहीं बोलूँगा।

अब बचे तो मेरे राम सरकार…

माता सीता ने कहा प्रभु! आप तो तीनों लोकों के स्वामी हो, और देखती हूं आप हनुमान जी से सकुचाते हैं। और आप खुद भी कहते हो कि…!

प्रति उपकार करौं का तोरा।

सनमुख होइ न सकत मन मोरा॥

आखिर आप के लिए क्या अदेय है प्रभु!

राम जी ने कहा, देवी मैं हनुमान जी का क़र्ज़दार जो हूं, , इसीलिए तो..

सनमुख होइ न सकत मन मोरा

देवी ! हनुमान जी का कर्ज़ा उतारना आसान नहीं है और इतना सामर्थ राम में नहीं है, जो “राम नाम” में है। क्योंकि कर्ज़ा उतारना भी तो बराबरी का ही पड़ेगा न…!

यदि सुनना चाहती हो तो सुनो – हनुमान जी का कर्ज़ा कैसे उतारा जा सकता है।

पहले हनुमान विवाह करें, लंकेश हरें इनकी जब नारी।

मुंदरी लै रघुनाथ चले, निज पौरुष लांघि अगम्य जे वारी।

आयि कहें, सुधि सोच हरें, तन से, मन से होई जाएं उपकारी।

तब रघुनाथ चुकायि सकें, ऐसी हनुमान की दिव्य उधारी।।

देवी ! इतना आसान नहीं है, हनुमान जी का कर्ज़ा चुकाना। मैंने ऐसे ही नहीं कहा था कि…!

  “सुनु सुत तोहि उरिन मैं नाहीं”

मैंने बहुत सोच विचार कर कहा था। लेकिन यदि आप कहती हो तो कल सभा में हनुमान जी से बोलूंगा कि वो भी कुछ मांग लें।

दूसरे दिन राज्य सभा में सब एकत्र हुए, सब बड़े उत्सुक थे कि हनुमान जी क्या मांगेंगे, और राम जी क्या देंगे।

राघव जी ने कहा– हनुमान सब लोगों ने मेरी बहुत सहायता की और मैंने, सब को कोई न कोई पद दे दिया। विभीषण और सुग्रीव को क्रमशः लंका और किष्कन्धा का राजपद, अंगद को युवराज पद। तो तुम भी अपनी इच्छा बताओ…?

हनुमान जी बोले – प्रभु आप ने जितने नाम गिनाए, उन सब को एक एक पद मिला है, और आप कहते हो…!

तैं मम प्रिय लछिमन ते दूना

तो फिर यदि मैं दो पद मांगू तो..?

सब लोग सोचने लगे बात तो हनुमान जी भी ठीक ही कह रहे हैं।

राम जी ने कहा ! ठीक है, मांग लो।

सब लोग बहुत खुश हुए कि आज हनुमान जी का कर्ज़ा चुकता हो जायेगा।

हनुमान जी ने कहा –  प्रभु जो पद आप ने सबको दिए हैं, उनके पद में राजमद हो सकता है, तो मुझे उस तरह के पद नहीं चाहिए, जिसमें राजमद की शंका हो।

राम जी ने पूछा – तो फिर…! आप को कौन सा पद चाहिए ?

हनुमान जी ने राम जी के दोनों चरण पकड़ लिए, प्रभु ..! हनुमान को तो बस यही दो पद चाहिए।

हनुमत सम नहीं कोउ बड़भागी।

नहीं कोउ रामचरण  अनुरागी।

 जानकी जी की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए राम जी बोले, लो उतर गया हनुमानजी का कर्जा! और अभी तक जिसको बोलना था, सब बोल चुके है, अब जो मै बोलता हूं उसे सब सुनो,

रामजी भरत भैया की तरफ देखते हुए बोले-

 हे! भरत भैया’ कपि से उऋण हम नाही”

हम चारों भाई चाहे जितनी बार जन्म ले लें, हनुमानजी से उऋण नहीं हो सकते।

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भक्त करने जा रहे हैं मंगलवार व्रत तो जानिए ये 8 काम की बातें, हनुमान जी चिंताओं से करेंगे मुक्त https://astrodeeva.com/do-hanuman-ji-fast-every-crisis-will-be-over-pur/ https://astrodeeva.com/do-hanuman-ji-fast-every-crisis-will-be-over-pur/#respond Tue, 02 Mar 2021 07:14:09 +0000 https://astrodeeva.com/?p=1732 हिंदू धर्म में मंगलवार के व्रत को बहुत महत्वपूर्ण बताया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि मंगलवार का व्रत करने से सभी प्रकार का भय दूर हो जाता है, इतना ही नहीं बल्कि मनुष्य की सभी चिंताएं भी खत्म हो जाती हैं। वर्तमान समय में ऐसे बहुत से लोग हैं जो महाबली हनुमान जी […]

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हिंदू धर्म में मंगलवार के व्रत को बहुत महत्वपूर्ण बताया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि मंगलवार का व्रत करने से सभी प्रकार का भय दूर हो जाता है, इतना ही नहीं बल्कि मनुष्य की सभी चिंताएं भी खत्म हो जाती हैं। वर्तमान समय में ऐसे बहुत से लोग हैं जो महाबली हनुमान जी की भक्ति करते हैं। मान्यता अनुसार अगर विधि विधान पूर्वक मंगलवार का व्रत किया जाए तो इससे बजरंगबली का विशेष आशीर्वाद मिलता है। शास्त्रों में इस बात का उल्लेख किया गया है कि जिन लोगों के ऊपर संकट मोचन हनुमान जी की कृपा दृष्टि बनी रहती है, उस व्यक्ति के जीवन की सभी समस्या दूर हो जाती हैं और व्यक्ति अपना जीवन सुखी पूर्वक व्यतीत करता है। आज हम आपको मंगलवार व्रत से जुड़ी हुई कुछ महत्वपूर्ण बातें बताने जा रहे हैं। अगर आप मंगलवार व्रत करने जा रहे हैं तो इन पर ध्यान जरूर दीजिए।

मंगलवार व्रत से जुड़ी हुई महत्वपूर्ण बातें

  • अगर आप महाबली हनुमान जी के भक्त हैं और मंगलवार का व्रत करने जा रहे हैं तो आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि मंगलवार के दिन आप सूर्य उदय से पहले ही उठ जाएँ।
  • मंगलवार को प्रातः काल उठकर आप अपने सभी नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नान कर लीजिए, इसके बाद आपको साफ-सुथरे कपड़े धारण करने होंगे।
  • अगर आप मंगलवार के दिन लाल रंग के वस्त्र धारण करते हैं तो यह बहुत ही शुभ माना जाता है, इसके बाद आप महाबली हनुमान जी को लाल पुष्प, सिंदूर, वस्त्र आदि अर्पित कीजिए।
  • मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा के दौरान श्रद्धा पूर्वक हनुमान प्रतिमा के समक्ष दीपक जलाएं और सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ कीजिए।
  • जो लोग मंगलवार का व्रत कर रहे हैं उनको इस बात का विशेष ध्यान देना होगा कि आप इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन कीजिए।
  • आप मंगलवार व्रत के दिन शाम के वक्त हनुमान जी को बेसन के लड्डू और खीर का भोग लगाएं, इसके बाद आप खुद नमक रहित भोजन का सेवन कीजिए।
  • अगर आप मंगलवार का व्रत करते हैं तो ऐसा माना जाता है कि इससे मांगलिक दोष से पीड़ित व्यक्तियों को लाभ मिलता है। मंगल ग्रह के दोष दूर हो जाते हैं।
  • मंगलवार का व्रत करने वाले व्यक्तियों को शनिदेव कभी भी परेशान नहीं करते हैं। यदि किसी व्यक्ति के ऊपर शनि की महादशा चल रही है या फिर कोई व्यक्ति शनि की साढ़ेसाती या ढैया से परेशान है तो मंगलवार का व्रत करना लाभकारी माना गया है। आपको इन सभी परेशानियों से छुटकारा प्राप्त होगा।

उपरोक्त मंगलवार का व्रत करने वाले भक्तों के लिए कुछ जरूरी काम की बातें बताई गई हैं। अगर आप इन बातों को ध्यान में रखते हुए मंगलवार व्रत करते हैं तो इससे बजरंगबली का आशीर्वाद आपके ऊपर हमेशा बना रहेगा और जीवन में चल रही सभी परेशानियां दूर होंगी। शास्त्रों के अनुसार महाबली हनुमान जी सबसे शक्तिशाली देवता माने गए हैं। कलयुग में यह अपने भक्तों से सबसे शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। जो भक्त अपने सच्चे मन से इनका स्मरण करता है, उसकी सहायता के लिए यह जरूर आते हैं। आप मंगलवार व्रत करके शुभ फल की प्राप्ति कर सकते हैं।

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