if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) {
/**
* Gets views count.
*
* @param int $id The Post ID.
* @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7])
* @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999)
* @return string
*/
function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) {
$attr = array(
'id' => $id,
'range' => $range,
'number_format' => $number_format,
);
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) );
$views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $views ) {
$views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format );
wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' );
}
return $views;
}
}
if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) {
/**
* Do Query
*
* @param $instance
* @return array
*/
function jnews_view_counter_query( $instance ) {
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) );
$query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $query ) {
$query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance );
wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' );
}
return $query;
}
}
The post Maa Baglamukhi Jayanti 2023 : मां बगलामुखी जयंती, जाने कथा, पूजा-विधि व मंत्र appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>ऐसी मान्यता है कि इस तिथि को ही मां बगलामुखी अवतरित हुई थी। इस दिन भक्त मां बगलामुखी की विधि-विधान से पूजा की करते है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार मां बगलामुखी की पूजा करने से गंभीर बीमारियों से मुक्ति मिलती है, मुकदमों में जीत हासिल होती है, जमीनी विवाद सुलझ जाते हैं और शत्रुओं का नाश होता है।
हिंदू धर्म ग्रंथों में वर्णित पौराणिक कथा के अनुसार, सतयुग में एक बार भयंकर तूफान आया था जिसके कारण सृष्टि का विनाश होने लगा. तब भगवान विष्णु के तप के बाद हरिद्रा सरोवर से मां बगलामुखी जलक्रीड़ा करती हुई उत्पन्न हुईं थीं। तब नारायण भगवान ने सृष्टि के विनाश को रोकने के लिए मां बगलामुखी से प्रार्थना की। भगवान के तप और प्रार्थना से मां बगलामुखी तथास्तु कहकर अंतर्धान हो गई. जिस दिन यह घटना घटी उस दिन वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि थी। तभी से हर साल मां बगलामुखी की जयंती इसी तिथि को मनाई जाने लगी।
माँ बगलामुखी की पूजा हेतु इस दिन प्रात: काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर अपनी निद्रा त्याग कर नित्य कर्मों में निवृत्त होकर, पीले वस्त्र धारण करने चाहिए. साधना अकेले में, मंदिर में या किसी सिद्ध पुरुष के साथ बैठकर की जानी चाहिए. पूजा करने के हेतु पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करने के लिए आसन पर बैठें चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवती बगलामुखी का चित्र स्थापित करें.
इसके बाद आचमन कर हाथ धोएं। आसन पवित्रीकरण, स्वस्तिवाचन, दीप प्रज्जवलन के बाद हाथ में पीले चावल, हरिद्रा, पीले फूल और दक्षिणा लेकर संकल्प करें। इस पूजा में ब्रह्मचर्य का पालन करना आवशयक होता है मंत्र- सिद्ध करने की साधना में माँ बगलामुखी का पूजन यंत्र चने की दाल से बनाया जाता है और यदि हो सके तो ताम्रपत्र या चाँदी के पत्र पर इसे अंकित करें।
श्री ब्रह्मास्त्र-विद्या बगलामुख्या नारद ऋषये नम: शिरसि।
त्रिष्टुप् छन्दसे नमो मुखे। श्री बगलामुखी दैवतायै नमो ह्रदये।
ह्रीं बीजाय नमो गुह्ये। स्वाहा शक्तये नम: पाद्यो:।
ऊँ नम: सर्वांगं श्री बगलामुखी देवता प्रसाद सिद्धयर्थ न्यासे विनियोग:।
ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं बगलामुखी सर्वदृष्टानां मुखं स्तम्भिनि सकल मनोहारिणी अम्बिके इहागच्छ सन्निधि कुरू सर्वार्थ साधय साधय स्वाहा।
ऊँ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां
वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्ववां कीलय
बुद्धि विनाशय ह्रीं ओम् स्वाहा।
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