if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) { /** * Gets views count. * * @param int $id The Post ID. * @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7]) * @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999) * @return string */ function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) { $attr = array( 'id' => $id, 'range' => $range, 'number_format' => $number_format, ); $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) ); $views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $views ) { $views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format ); wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' ); } return $views; } } if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) { /** * Do Query * * @param $instance * @return array */ function jnews_view_counter_query( $instance ) { $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) ); $query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $query ) { $query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance ); wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' ); } return $query; } } Marriage Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/marriage/ Daily Dose of Astrology Sat, 19 Feb 2022 10:55:13 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://astrodeeva.com/wp-content/uploads/2022/03/cropped-Logo-32x32.png Marriage Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/marriage/ 32 32 Vivah Sanskar: हिंदू विवाह संस्कार में सात फेरों संग सात वचन, जानिए हर वचन का महत्व https://astrodeeva.com/vivah-sanskar-know-the-importance-of-every-word-with-seven-rounds-in-hindu-marriage-ceremony/ https://astrodeeva.com/vivah-sanskar-know-the-importance-of-every-word-with-seven-rounds-in-hindu-marriage-ceremony/#respond Sat, 19 Feb 2022 10:55:13 +0000 https://astrodeeva.com/?p=2898 वैदिक संस्कृति के अनुसार सोलह संस्कारों को जीवन के सबसे महत्त्वपूर्ण संस्कार माने जाते हैं। विवाह संस्कार (Vivah Sanskar) उन्हीं में से एक है जिसके बिना मानव जीवन पूर्ण नहीं हो सकता। हिंदू धर्म में विवाह संस्कार (Vivah Sanskar) को सोलह संस्कारों में से एक संस्कार माना गया है। Vivah Sanskar – विवाह का शाब्दिक […]

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वैदिक संस्कृति के अनुसार सोलह संस्कारों को जीवन के सबसे महत्त्वपूर्ण संस्कार माने जाते हैं। विवाह संस्कार (Vivah Sanskar) उन्हीं में से एक है जिसके बिना मानव जीवन पूर्ण नहीं हो सकता। हिंदू धर्म में विवाह संस्कार (Vivah Sanskar) को सोलह संस्कारों में से एक संस्कार माना गया है।

Vivah Sanskar – विवाह का शाब्दिक अर्थ 

विवाह = वि + वाह, अत: इसका शाब्दिक अर्थ है – विशेष रूप से (उत्तरदायित्व का) वहन करना। पाणिग्रहण संस्कार (Vivah Sanskar) को सामान्य रूप से हिंदू विवाह के नाम से जाना जाता है। अन्य धर्मों में विवाह पति और पत्नी के बीच एक प्रकार का करार होता है जिसे कि विशेष परिस्थितियों में तोड़ा भी जा सकता है, परंतु हिंदू विवाह पति और पत्नी के बीच जन्म-जन्मांतरों का सम्बंध होता है जिसे किसी भी परिस्थिति में नहीं तोड़ा जा सकता। अग्नि के सात फेरे लेकर और ध्रुव तारा को साक्षी मान कर दो तन, मन तथा आत्मा एक पवित्र बंधन में बंध जाते हैं। हिंदू विवाह में पति और पत्नी के बीच शारीरिक संम्बंध से अधिक आत्मिक संम्बंध होता है और इस संम्बंध को अत्यंत पवित्र माना गया है।

Vivah Sanskar- सात फेरे और सात वचन

विवाह एक ऐसा मौक़ा होता है जब दो इंसानो के साथ-साथ दो परिवारों का जीवन भी पूरी तरह बदल जाता है। हिंदू विवाह में विवाह की परंपराओं में सात फेरों का भी एक चलन है। जो सबसे मुख्य रस्म होती है। हिन्दू धर्म के अनुसार सात फेरों के बाद ही शादी की रस्म पूर्ण होती है। सात फेरों में दूल्हा व दुल्हन दोनों से सात वचन लिए जाते हैं। यह सात फेरे ही पति-पत्नी के रिश्ते को सात जन्मों तक बांधते हैं। हिंदू विवाह संस्कार के अंतर्गत वर-वधू अग्नि को साक्षी मानकर इसके चारों ओर घूमकर पति-पत्नी के रूप में एक साथ सुख से जीवन बिताने के लिए प्रण करते हैं और इसी प्रक्रिया में दोनों सात फेरे लेते हैं, जिसे सप्तपदी भी कहा जाता है। और यह सातों फेरे या पद सात वचन के साथ लिए जाते हैं। हर फेरे का एक वचन होता है, जिसे पति-पत्नी जीवनभर साथ निभाने का वादा करते हैं। यह सात फेरे ही हिन्दू विवाह की स्थिरता का मुख्य स्तंभ होते हैं।

सात फेरों के सात वचन

विवाह के बाद कन्या वर के वाम अंग में बैठने से पूर्व उससे सात वचन लेती है। कन्या द्वारा वर से लिए जाने वाले सात वचन इस प्रकार है।

प्रथम वचन

तीर्थव्रतोद्यापन यज्ञकर्म मया सहैव प्रियवयं कुर्या:,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति वाक्यं प्रथमं कुमारी !!

(यहाँ कन्या वर से कहती है कि यदि आप कभी तीर्थयात्रा को जाओ तो मुझे भी अपने संग लेकर जाना। कोई व्रत-उपवास अथवा अन्य धर्म कार्य आप करें तो आज की भांति ही मुझे अपने वाम भाग में अवश्य स्थान दें। यदि आप इसे स्वीकार करते हैं तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।)

किसी भी प्रकार के धार्मिक कृ्त्यों की पूर्णता हेतु पति के साथ पत्नि का होना अनिवार्य माना गया है। जिस धर्मानुष्ठान को पति-पत्नि मिल कर करते हैं, वही सुखद फलदायक होता है। पत्नि द्वारा इस वचन के माध्यम से धार्मिक कार्यों में पत्नि की सहभागिता, उसके महत्व को स्पष्ट किया गया है।

मैरिज अरेंज्ड या लव होगी जाने अंक ज्योतिष से

द्वितीय वचन

पुज्यौ यथा स्वौ पितरौ ममापि तथेशभक्तो निजकर्म कुर्या:,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं द्वितीयम !!

(कन्या वर से दूसरा वचन मांगती है कि जिस प्रकार आप अपने माता-पिता का सम्मान करते हैं, उसी प्रकार मेरे माता-पिता का भी सम्मान करें तथा कुटुम्ब की मर्यादा के अनुसार धर्मानुष्ठान करते हुए ईश्वर भक्त बने रहें तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।)

यहाँ इस वचन के द्वारा कन्या की दूरदृष्टि का आभास होता है। आज समय और लोगों की सोच कुछ इस प्रकार की हो चुकी है कि अमूमन देखने को मिलता है–गृहस्थ में किसी भी प्रकार के आपसी वाद-विवाद की स्थिति उत्पन होने पर पति अपनी पत्नि के परिवार से या तो सम्बंध कम कर देता है अथवा समाप्त कर देता है। उपरोक्त वचन को ध्यान में रखते हुए वर को अपने ससुराल पक्ष के साथ सदव्यवहार के लिए अवश्य विचार करना चाहिए।

तृतीय वचन

जीवनम अवस्थात्रये मम पालनां कुर्यात,
वामांगंयामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं तृ्तीयं !!

(तीसरे वचन में कन्या कहती है कि आप मुझे ये वचन दें कि आप जीवन की तीनों अवस्थाओं (युवावस्था, प्रौढावस्था, वृद्धावस्था) में मेरा पालन करते रहेंगे, तो ही मैं आपके वामांग में आने को तैयार हूँ।)

चतुर्थ वचन

कुटुम्बसंपालनसर्वकार्य कर्तु प्रतिज्ञां यदि कातं कुर्या:,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं चतुर्थं !!

(कन्या चौथा वचन ये माँगती है कि अब तक आप घर-परिवार की चिन्ता से पूर्णत: मुक्त थे। अब जबकि आप विवाह बंधन में बँधने जा रहे हैं तो भविष्य में परिवार की समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति का दायित्व आपके कंधों पर है। यदि आप इस भार को वहन करने की प्रतीज्ञा करें तो ही मैं आपके वामांग में आ सकती हूँ।)

इस वचन में कन्या वर को भविष्य में उसके उतरदायित्वों के प्रति ध्यान आकृ्ष्ट करती है। विवाह पश्चात कुटुम्ब पौषण हेतु पर्याप्त धन की आवश्यकता होती है। अब यदि पति पूरी तरह से धन के विषय में पिता पर ही आश्रित रहे तो ऐसी स्थिति में गृहस्थी भला कैसे चल पाएगी। इसलिए कन्या चाहती है कि पति पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर होकर आर्थिक रूप से परिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ति में सक्षम हो सके। इस वचन द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि पुत्र का विवाह तभी करना चाहिए जब वो अपने पैरों पर खडा हो, पर्याप्त मात्रा में धनार्जन करने लगे।

पंचम वचन

स्वसद्यकार्ये व्यवहारकर्मण्ये व्यये मामापि मन्त्रयेथा,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: पंचमत्र कन्या !!

(इस वचन में कन्या जो कहती है वो आज के परिपेक्ष में अत्यंत महत्व रखता है। वो कहती है कि अपने घर के कार्यों में, विवाहादि, लेन-देन अथवा अन्य किसी हेतु खर्च करते समय यदि आप मेरी भी मन्त्रणा लिया करें तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।)

यह वचन पूरी तरह से पत्नि के अधिकारों को रेखांकित करता है। बहुत से व्यक्ति किसी भी प्रकार के कार्य में पत्नी से सलाह करना आवश्यक नहीं समझते। अब यदि किसी भी कार्य को करने से पूर्व पत्नी से मंत्रणा कर ली जाए तो इससे पत्नी का सम्मान तो बढता ही है, साथ साथ अपने अधिकारों के प्रति संतुष्टि का भी आभास होता है।

षष्ठम वचन

न मेपमानमं सविधे सखीनां द्यूतं न वा दुर्व्यसनं भंजश्चेत,
वामाम्गमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं च षष्ठम !!

(कन्या कहती है कि यदि मैं अपनी सखियों अथवा अन्य स्त्रियों के बीच बैठी हूँ तब आप वहाँ सबके सम्मुख किसी भी कारण से मेरा अपमान नहीं करेंगे। यदि आप जुआ अथवा अन्य किसी भी प्रकार के दुर्व्यसन से अपने आप को दूर रखें तो ही मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।)

वर्तमान परिपेक्ष्य में इस वचन में गम्भीर अर्थ समाहित हैं। विवाह पश्चात कुछ पुरुषों का व्यवहार बदलने लगता है। वे जरा जरा सी बात पर सबके सामने पत्नी को डाँट-डपट देते हैं। ऐसे व्यवहार से पत्नी का मन कितना आहत होता होगा। यहाँ पत्नी चाहती है कि बेशक एकांत में पति उसे जैसा चाहे डांटे किन्तु सबके सामने उसके सम्मान की रक्षा की जाए, साथ ही वो किन्हीं दुर्व्यसनों में फँसकर अपने गृ्हस्थ जीवन को नष्ट न कर ले।

सप्तम वचन

परस्त्रियं मातृसमां समीक्ष्य स्नेहं सदा चेन्मयि कान्त कुर्या,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: सप्तममत्र कन्या !!

(अन्तिम वचन के रूप में कन्या ये वर मांगती है कि आप पराई स्त्रियों को माता के समान समझेंगें और पति-पत्नि के आपसी प्रेम के मध्य अन्य किसी को भागीदार न बनाएंगें। यदि आप यह वचन मुझे दें तो ही मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।)

विवाह पश्चात यदि व्यक्ति किसी बाह्य स्त्री के आकर्षण में बँध पगभ्रष्ट हो जाए तो उसकी परिणिति क्या होती है। इसलिए इस वचन के माध्यम से कन्या अपने भविष्य को सुरक्षित रखने का प्रयास करती है।

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अक्सर युवाओं के दिमाग में अपनी शादी को लेकर काफी उलझने पैदा होती हैं और कई सवाल खड़े हो जाते हैं। उनमे से सबसे पहला सवाल होता है कि, क्या लव मैरिज होगी या अरेंज्ड। वैसे तो वक्त से पहले इस बात का पता लगा पाना कोई आसान बात नहीं है। लेकिन फिर भी चलिए हम आपकी इस मुश्किल को थोड़ा कम कर देते हैं। दरअसल कुंडली के अलावा भी एक ऐसी विद्या है जिससे आप अपनी शादी की लव या अरेंज्ड मैरिज के बारे में पता लगा सकते हैं। इसे कहते हैं Numerology यानि अंक ज्योतिष। इसके जरिए हम आपको आपके मूलांक (जिस तारीख को आपका जन्मदिन आता है) के अनुसार बताने का प्रयास करेंगे …

मूलांक 1

अंक 1 सूर्य का माना जाता है। अंक ज्योतिष की मानें तो मूलांक 1 वाले लोग काफी शर्मीले स्वभाव के होते हैं। ऐसे लोग कभी प्यार के लिए पहल नहीं करते। इनके शर्मीले स्वभाव के कारण ये लव मैरिज से अछूते रह जाते हैं।

मूलांक 2

अंक 2 चन्द्रमा का होता है। 2 मूलांक वाले लोगों को प्यार काफी धीरे-धीरे होता है। ये बहुत ही इमोशनल होतो हैं। यदि ये एक बार अपने प्रेम के लिए सीरियस हो जाएं तो प्रेम विवाह करके ही मानते हैं।

मूलांक 3

मूलांक 3 गुरु का माना जाता है। तीन मूलांक वाले लोग लव मैरिज में अकसर सफल रहते हैं। हालांकि इन्हें थोड़े सहयोग की जरूरत होती है जिसके बाद यह अपने प्यार को शादी तक ले जाते हैं। इनका वैवाहिक जीवन सफल रहता है।

मूलांक 4

अंक 4 राहु का माना जाता है जो कि एक से अधिक लोगों के साथ प्रेम करता है। अत: ये लोग कभी भी प्रेम विवाह के प्रति गंभीर नहीं रहते। ये अगर स्वभाव को बदलें तो अच्छे प्रेमी बन सकते हैं।

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मूलांक 5

अंक 5 बुध का माना जाता है। ऐसे लोग पारंपरिक रिश्तों को निभाने में यकीन रखते हैं। ये लोग परिवार की सहमति से ही विवाह करते हैं। इनकी कुंडली में सफल वैवाहिक जीवन एवं प्रेम विवाह का प्रबल योग रहता है।

मूलांक 6

6 का अंक शुक्र का प्रेम विवाह के लिए ही बना है। मूलांक 6 वाले एक से अधिक प्रेम संबंधों में रहते हैं। इसलिए कभी-कभी सही इंसान को खो देते हैं। इस मूलांक के 80 परसेंट लोगों की लव मैरिज ही होती है।

मूलांक 7

7 का अंक केतु का माना जाता है। ये लोग संकुचित स्वभाव के एवं काम से काम रखने वाले होते हैं। ये प्रेम विवाह करना तो चाहते हैं लेकिन अपने स्टेट्स के अनुसार। प्रेम में भी लाभ-हानि का गणित इनको नुकसान देता है।

मूलांक 8

8 का अंक शनि का होता है। ऐसे लोगों के बहुत कम प्रेम संबंध रहते हैं। लेकिन अपने प्यार को निभाने में दृढ़ होते हैं। एक बार जो ठान लिया उसे पा कर ही रहते हैं। यदि किसी से प्रेम कर लें तो फिर मरते दम तक प्यार निभाते हैं।

मूलांक 9

9 का अंक मंगल का माना जाता है। मंगल प्रधान व्यक्ति किसी भी तरह का विवाद नहीं चाहता। इनका प्रेम विवाह थोड़ा मुश्किल है। प्रेम में विवाद तो होता ही है, अत: ये लोग प्रेम के प्रति उदासीन रहते हैं। दिल में इच्छा बहुत होती है।

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Remedies For Late Marriage : शादी में हो रही है देरी तो अपनाए ये उपाय https://astrodeeva.com/remedies-for-late-marriage-hindi/ https://astrodeeva.com/remedies-for-late-marriage-hindi/#comments Thu, 19 Nov 2020 03:56:40 +0000 https://astrodeeva.com/?p=1400 विवाह मानव जीवन का एक महत्वपूर्ण घटना है। सभी सांसारिक कारकों के साथ-साथ , एक जन्म कुंडली में ग्रहों का भी विवाह के समय पर प्रभाव पड़ता है। कई योग्य लड़कियों और लड़कों की शादी में विलंब का सामना करना पड़ता है और उन्हें लगता है कि वे योग्य नहीं हैं और उपयुक्त विवाह योग्य […]

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विवाह मानव जीवन का एक महत्वपूर्ण घटना है। सभी सांसारिक कारकों के साथ-साथ , एक जन्म कुंडली में ग्रहों का भी विवाह के समय पर प्रभाव पड़ता है। कई योग्य लड़कियों और लड़कों की शादी में विलंब का सामना करना पड़ता है और उन्हें लगता है कि वे योग्य नहीं हैं और उपयुक्त विवाह योग्य विकल्पों से बाहर चल रहे हैं। यह कुछ निश्चित ग्रह और उनके स्थान हैं जो विशिष्ट प्रकार के ‘दोषों’ को जन्म देते हैं, जिससे विवाह में बाधा उत्पन्न होती है।

ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, लग्न कुण्डली में 7 वां घर जातक की शादी की संभावनाओं को निर्धारित करता है। विशेष रूप से, शुक्र और बुध ग्रह का विवाह, प्रेम और रिश्तों के साथ मजबूत संबंध है। इसलिए, जातक और उनके माता-पिता को समय पर ग्रह स्थितियों और दोषों के बारे में पता कर विवाह के लिए उचित ज्योतिषीय उपाय कर लेना चाहिए।

हिन्दू ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, एक लड़की और लड़के के बीच संगतता को उनके जन्म कुंडली के माध्यम से जांचना होगा। इस जाँच से समय रहते ये पता किया जा सकता है की भविष्य में यह संबंध कैसे होगा और लड़की और लड़के के बीच में कितना तालमेल रेहेगा।

कुछ जातकों को उनकी जन्म कुंडली में ग्रहों की स्तिथि के कारण विवाह में विलंब का सामना करना पड़ सकता है और उन्हें उपयुक्त जीवन साथी नहीं मिल पाता। हमने ज्योतिषशास्त्र में दिए गये प्रभावी उपायों को पहचानकर उन्हें सूचीबद्ध किया है,  जिसको करने से जातक अपने विवाह में आने वाली बाधा को दूर करने और जीवन में आगे बढ़ने में मदद पा हैं।

ज्योतिषियों द्वारा विवाह में देरी से बचने के लिए सर्वोत्तम उपाय

 नीचे दिए गए उपायों का पालन करके लोग विवाह में देरी से बच सकते हैं:

  • जातक को देवी लक्ष्मी और भगवान गणपति की पूजा करनी होती है।
  • गुरुवार के दिन बालिकाओं को मिष्ठान और सौंदर्य प्रसाधन भेंट करने से व्यक्ति के ग्रह स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
  • मनचाहा फल पाने के लिए व्यक्ति को रोजाना शिवलिंग पर पवित्र जल चढ़ना चहिये।
  • प्रतिदिन शिव और पार्वती की एक साथ पूजा करना बहुत शुभ होता है विवाह में आ रहे विलंब को दूर करता है।
  • जब भी संभव हो, हल्दी की एक चुटकी के साथ मिश्रित पानी का उपयोग करके स्नान करना चाहिए। यह शादी में आ रहे विलंब को दूर करने के लिए सबसे आसान और प्रभावी उपायों में से एक है।
  • समय पर शादी की इच्छा रखने वाले लड़कों को आशीर्वाद के लिए भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए; यह एक बहुत प्रभावी उपाय साबित होता है।
  • लड़कियों को हर सोमवार उपवास रखना चाहिए और शिवलिंग पर दूध अर्पित करने से उन्हें मनचाहा वर प्राप्त होता है।
  • विष्णु लक्ष्मी मंदिर में गुरुवार के दिन 5 लड्डू चढ़ाने चाहिए और जल्द से जल्द शादी करने की प्रार्थना करनी चाहिए।
  • साथी को खोज की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए, जातक अपने तकिया या गद्दे के नीचे भगवान शिव और पार्वती की छवि भी एक साथ रख सकते हैं।
  • विवाह में विलंब को दूर करने के लिए, शुभ महूर्त और पूजा के दौरान केले के पेड़ की जड़ लाएं। पूजा के बाद जड़ को पीले कपड़े में लपेट लें।

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विवाह में विलंब को दूर करने के लिए मंत्र

विवाह में विलंब को दूर करने के लिए लड़कियां नीचे लिखे मंत्र का पाठ कर सकती हैं। इस मंत्र को दिन में 108 बार मंदिर में या किसी शांत स्थान पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके पाठ करना चाहिए। इस अत्यंत प्रभावी मंत्र के जाप से विलंब को दूर करने में मदद मिलती  है।

|| ॐ नमो भगवते रुक्मिणी वल्लभाय नमः ||

!! Om Namo Bhagwate Rukmini Vallaabhaye Namaha!!

 

लड़के विवाह में विलंब को दूर करने के लिए और सुन्दर, सुलोचना, सभी गुणों से युक्त, मनचाही और घर को बसाने वाली पत्नी पाने के लिए इस दुर्गा सप्तशती मंत्र का प्रतिदिन 108  बार जाप करना चाहिए।

पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानु सारिणीम् । तारिणींदुर्गसं सारसागरस्य कुलोद्भवाम् ॥

“Patni Manoramam Dehi Manovrittanusarinim | Tarinim Durgasansarsagarasya Kulodbhawam ||”

 

समय पर शादी की इच्छा रखने वाले लड़की या लड़के को दुर्गा सप्तशतीम व्यक्ति के इस मित्र का 108 बार का जाप करना चहिये और सात बार जल से भरे तांबे के बर्तन से आरती करने से विवाह में विलंब को दूर करने में मदद मिलती है।

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

“Ya Devi Sarva Bhuteshu Ma Gauri Rupen Samsihita | Namastasaye Namastasye Namastayaye Namohnamah|.”

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जीन जातकों के विवाह में विलंब हो रहा है उन्हें गुरुवार के दिन विष्णु मूर्ति की पूजा करनी चाहिए और नीचे दिए गए मंत्र का कम से कम तीन बार जाप करना चाहिए। इसके अलावा, इस दिन नमक से परहेज करना उचित है।

|| ॐ बृं बृहस्पतये नम: ||

”Om Brim Brihaspataye Namah.”

 

विवाह की इच्छा रखने वाले लड़की या लड़के को सोमवार के दिन शिवलिंग पर दूध और जल अभिषेक करना चहिये और बेलपत्र भी चढ़ाते हुए शिव मंत्र का १०८ बार जाप करने से विवाह में विलंब दूर होता है और मनचाह जीवनसाथी प्राप्त होता है।

|| ॐ नमः शिवाय : ||

“Om Namah Shivaya”

 

जातक को हर गुरुवार पीले वस्त्र पहनना चाहिए। साथ ही, 9 गुरूवार नीचे दिए गए मंत्र के जाप के साथ शिवलिंग पर दूध और जल अर्पित करने से चमत्कारी प्रभाव होता है।

|| ॐ पार्वतीपतये नमः ||

Om Parvati Pataye Namah”

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