if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) { /** * Gets views count. * * @param int $id The Post ID. * @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7]) * @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999) * @return string */ function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) { $attr = array( 'id' => $id, 'range' => $range, 'number_format' => $number_format, ); $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) ); $views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $views ) { $views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format ); wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' ); } return $views; } } if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) { /** * Do Query * * @param $instance * @return array */ function jnews_view_counter_query( $instance ) { $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) ); $query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $query ) { $query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance ); wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' ); } return $query; } } Navratri 2022 Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/navratri-2022/ Daily Dose of Astrology Thu, 29 Sep 2022 00:00:50 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://astrodeeva.com/wp-content/uploads/2022/03/cropped-Logo-32x32.png Navratri 2022 Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/navratri-2022/ 32 32 Navratri 2022 Day 4, Maa Kushmanda: माँ कूष्मांडा- जाने माता की कथा, मंत्र, पूजा विधि और आरती https://astrodeeva.com/navratri-2022-day-4-maa-kushmanda/ https://astrodeeva.com/navratri-2022-day-4-maa-kushmanda/#respond Thu, 29 Sep 2022 00:00:13 +0000 https://astrodeeva.com/?p=3559 माँ आदिशक्ति सम्पूर्ण जगत का कल्याण करती है | माँ भवानी के रूप इतने कल्याणकारी है की इनके दर्शन एवं पूजन से भक्तों के संकट नष्ट हो जाते है और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है | माँ आदिशक्ति के नौ स्वरूप है और वो अपने चौथे स्वरूप मे कूष्मांडा के नाम से जानी जाती है […]

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माँ आदिशक्ति सम्पूर्ण जगत का कल्याण करती है | माँ भवानी के रूप इतने कल्याणकारी है की इनके दर्शन एवं पूजन से भक्तों के संकट नष्ट हो जाते है और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है | माँ आदिशक्ति के नौ स्वरूप है और वो अपने चौथे स्वरूप मे कूष्मांडा के नाम से जानी जाती है | कूष्मांडा एक संस्कृत शब्द है और इस का शाब्दिक अर्थ (कुसुम का अर्थ है फूलों के समान हसीं और आँड का अर्थ है ब्रह्मांड ) वो देवी जिन्होंने अपनी मुस्कान से सम्पूर्ण ब्रह्मांड को अपने गर्भ से उत्पन्न किया है वही माँ कूष्मांडा है | माँ कूष्मांडा की आठ भुजाये है | जिनमे कमण्डल ,धनुष ,कमल का फूल ,अमृत से भरा कलश चक्र गदा वा कमल पुष्प की माल को अपने हाथों मे धारण किए हुए है |

माँ कूष्मांडा की कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब सृष्टि कि रचना नहीं हुई थी और हर जग अंधकार का राज था तब देवी कूष्माण्डा ने अपनी मुस्कुराहट से इस सृष्टि की उत्पति की। तब से देवी कूष्माण्डा का निवास सूर्यमंडल के मध्य में है और यह सूर्य मंडल को अपने संकेत से नियंत्रित करती हैं।

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नवरात्रि 2022 के चौथे दिन के शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त- 04:37 ए एम से 05:25 ए एम.
अभिजित मुहूर्त- 11:47 ए एम से 12:35 पी एम.
विजय मुहूर्त-02:11 पी एम से 02:58 पी एम.
गोधूलि मुहूर्त- 05:58 पी एम से 06:22 पी एम.
अमृत काल- 08:39 पी एम से 10:13 पी एम.
निशिता मुहूर्त-11:47 पी एम से 12:36 ए एम, 30 सितम्बर.
सर्वार्थ सिद्धि योग- 05:13 ए एम, सितम्बर 30 से 06:13 ए एम,  30 सितम्बर.
रवि योग- 06:13 ए एम से 05:13 ए एम,  30 सितम्बर.

माँ कूष्मांडा की पूजा का विधान

माँ कूष्मांडा को लाल रंग अति प्रिय है | माँ कुष्मांडा श्री दुर्गा का चौथा स्वरूप है | इनकी पूजा नवरात्र के चौथे दिन चतुर्थी को बड़े विधि विधान से करनी चाहिए | अतः नवरात्र के चौथे दिन ब्रह्म मुहुर्त मे उठ कर नियमित कार्यों से निर्वित होकर माँ की निमित विविध प्रकार की पूजन की सामग्री को संग्रहीत करके पूजन करना चाहिए और दुर्गसप्तशती का पाठ करें या ब्राह्मण से करवाएँ। माँ को लाल पुष्प रोली ,अक्षत और लाल महावर और लाल चूड़ी अवश्य चढ़ाये और मालपुए से माँ कुष्मांडा को भोग लगाना चाहिए |

माँ कूष्मांडा के मंत्र

ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥

प्रार्थना मंत्र

सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

स्तुति

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

ध्यान मंत्र

वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्। सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्विनीम्॥ भास्वर भानु निभाम् अनाहत स्थिताम् चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्। कमण्डलु, चाप, बाण, पद्म, सुधाकलश, चक्र, गदा, जपवटीधराम्॥ पटाम्बर परिधानां कमनीयां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्। मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल, मण्डिताम्॥ प्रफुल्ल वदनांचारू चिबुकां कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम्। कोमलाङ्गी स्मेरमुखी श्रीकंटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

स्त्रोत

दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दरिद्रादि विनाशनीम्। जयंदा धनदा कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥ जगतमाता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्। चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥ त्रैलोक्यसुन्दरी त्वंहि दुःख शोक निवारिणीम्। परमानन्दमयी, कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥

कवच मंत्र

हंसरै में शिर पातु कूष्माण्डे भवनाशिनीम्। हसलकरीं नेत्रेच, हसरौश्च ललाटकम्॥ कौमारी पातु सर्वगात्रे, वाराही उत्तरे तथा, पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम। दिग्विदिक्षु सर्वत्रेव कूं बीजम् सर्वदावतु॥

माँ कूष्मांडा की आरती

चौथा जब नवरात्र हो, कूष्मांडा को ध्याते। जिसने रचा ब्रह्माण्ड यह, पूजन है आध्शक्ति कहते जिन्हें, अष्टभुजी है रूप। इस शक्ति के तेज से कहीं छाव कही धुप॥ कुम्हड़े की बलि करती है तांत्रिक से स्वीकार। पेठे से भी रीज्ती सात्विक करे विचार॥ क्रोधित जब हो जाए यह उल्टा करे व्यवहार। उसको रखती दूर माँ, पीड़ा देती अपार॥ सूर्य चन्द्र की रौशनी यह जग में फैलाए। शरणागत की मैं आया तू ही राह दिखाए॥ नवरात्रों की माँ कृपा करदो माँ। नवरात्रों की माँ कृपा करदो माँ॥ जय माँ कुष्मांडा मैया।

ज्योतिषीय  पहलू

ज्योतिष के अनुसार माँ कूष्मांडा सूर्य मंडल में विराजित है और सूर्य का मार्गदर्शन करती है अतः इनकी उपासना करने से सूर्य के कुप्रभावों से बचा जा सकता है। माँ कभी अपने भक्तों को निराश नहीं करती।

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Navratri Havan : नवरात्रि हवन करने की सरल विधि https://astrodeeva.com/navratri-havan-simple-method-to-perform-navratri-havan/ https://astrodeeva.com/navratri-havan-simple-method-to-perform-navratri-havan/#respond Sun, 10 Apr 2022 00:51:32 +0000 https://astrodeeva.com/?p=3185 नवरात्रि में भक्त नौ दिनों तक देवी दुर्गा का व्रत रखते है और माता के विभिन्न स्वरूपों की उपासना करते हैं और नवमी तिथि को हवन(Navratri Havan) के साथ आराधना पूरी करते हैं। नवरात्रि के पावन पर्व के समापन में हवन का बहुत महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार हवन के बिना नौ दिनों की उपासना […]

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नवरात्रि में भक्त नौ दिनों तक देवी दुर्गा का व्रत रखते है और माता के विभिन्न स्वरूपों की उपासना करते हैं और नवमी तिथि को हवन(Navratri Havan) के साथ आराधना पूरी करते हैं। नवरात्रि के पावन पर्व के समापन में हवन का बहुत महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार हवन के बिना नौ दिनों की उपासना अधूरी रह जाती है। इस लेख में नवरात्रि के पावन पर्व पर देवी साधको के समक्ष आसान हवन (Navratri Havan) की विधि बता रहे है इस हवन को आप किसी पुरोहित के बिना भी कर सकते है। आशा है आप सभी इसका लाभ उठाएंगे।

हवन सामग्री (Navratri Havan Samagri)

  1. हवन कुंड, हवन सामग्री, काले,लाल, सफेद तिल, आम की लकड़ी, साबूत चावल, जौ, पीली सरसों, चना, काली उडद साबुत, गुगुल, अनारदाना, बेलपत्र, गुड़, शहद।
  2. गाय का घी, कर्पूर, दीपक, घी की आहुति के लिये लंबा लकड़ी अथवा स्टील का चम्मच, हवन सामग्री मिलाने के लिये बड़ा पात्र, गंगाजल, लोटा या आचमनी, अनारदाना, पान के पत्ते, फूल माला, फल, भोग के लिये मिष्ठान, खीर आदि।

हवन की विधि (Navratri Havan Vidhi)

  • हवन आरम्भ करने से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र हो सके तो लाल रंग के धारण कर लें।
  • इसके बाद ऊपर बताई 1 नंबर हवन सामग्री को पात्र में डालकर मिला लें। या बाजार में मिली सामग्री भी प्रयोग कर सकते है।
  • इसके बाद हवन के लिये वेदी सुविधा अनुसार खुली जगह पर बनाए अथवा बाजार में मिलने वाली हवान वेदी का प्रयोग करें हवन वेदी को इस प्रकार स्थापित करे जिसमे हवन करने वाले का मुख पूर्व या उत्तर दिशा में आये।
  • इसके बाद अपने ऊपर गंगा जल छिड़के और इसके बाद हवन पूजन सामग्री को भी गंगा जल से पवित्र कर लें।
  • इसके बाद एक मिट्टी का अथवा जो भी उपलब्ध हो दिया प्रज्वलित करें दीपक को सुरक्षित स्थान पर अक्षत डाल कर स्थापित करे हवन के दौरान बुझे ना इसका ध्यान रखे।
  • इसके बाद आम की लकड़ियों को हवन कुंड में रखे और कर्पूर की सहायता से जलाये।
  • इसके बाद हाथ अथवा आचमनी से हवन कुंड के ऊपर से 3 बार जल को घुमा कर अग्नि देव को प्रणाम करें। अग्नि देव का यथा उपलब्ध सामग्री से पूजन करे मिष्ठान का भोग लगाएं, पुष्प माला हवन कुंड पर चढ़ाए ना कि अग्नि में डाले, तदोपरांत अग्नि देव से मानसिक प्रार्थना करे है अग्नि देव में जिन देवी देवताओं के निमित्त हवन कर रहा हूँ उनका भाग उनतक पहुचाने का कष्ट करें।
  • इसके बाद सर्वप्रथम पंच देवो की आहुति निम्न प्रकार मंत्र बोलते हुए दे मंत्र के बाद स्वाहा अवश्य लगाए स्वाहा के साथ ही आहुति भी अग्नि में अर्पण करते जाए।
            ॐ गं गणपतये स्वाहा
            ॐ रुद्राय स्वाहा
            ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्वाहा
            ॐ सूर्याय स्वाहा
            ॐ अग्निदेवाय स्वाहा
( निम्न मंत्रो से केवल घी की आहुती दे तथा आहुति से शेष बचा घी एक कटोरी में जल भर कर रखे उसमे डालते जाए।)
  • इसके बाद निम्न मंत्रो से भी घी की आहुति दें तथा शेष घी की कटोरी के जल में डालते रहे।
          ॐ दुर्गा देवी नमः स्वाहा
          ॐ शैलपुत्री देवी नमः स्वाहा
          ॐ ब्रह्मचारिणी देवी नमः स्वाहा
          ॐ चंद्र घंटा देवी नमः स्वाहा
          ॐ कुष्मांडा देवी नमः स्वाहा
          ॐ स्कन्द देवी नमः स्वाहा
          ॐ कात्यायनी देवी नमः स्वाहा
          ॐ कालरात्रि देवी नमः स्वाहा
          ॐ महागौरी देवी नमः स्वाहा
          ॐ सिद्धिदात्री देवी नमः स्वाहा
(इन आहुतियों के बाद कम से कम 1 माला नवार्ण मंत्र से आहुति डाले)
नवार्ण मंत्र – ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे नमः स्वाहा
नवार्ण मंत्र से आहुति के बाद साधक गण जिन्हें सप्तशती मंत्रो से हवन नही करना वे बची हुई हवन सामग्री को पान के पत्ते पर रखकर साथ मे अनार दाना और ऊपर बताई नंबर 2 सामग्री लेकर अग्नि में घी की धार बना कर छोड़ दे तथा हाथ मे जल लेकर हवन कुंड के चारो तरफ घुमाकर जमीन पर छोड़ दे इसके बाद माता की आरती कर क्षमा प्रार्थना करले इसके बाद कटोरी वाले जल को पूरे घर मे छिड़क दें।

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दुर्गा सप्तशती पाठ व हवन ( Durga Saptashati Path And Navratri Havan)

  • प्रथम अध्याय –  एक पान देशी घी में भिगोकर 1 कमलगट्टा, 1 सुपारी, 2 लौंग, 2 छोटी इलायची, गुग्गुल, शहद यह सब चीजें सुरवा में रखकर खडे होकर आहुति देना।
  • द्वितीय अध्याय –  प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार, गुग्गुल विशेष।
  • तृतीय अध्याय –  प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार श्लोक सं. 38 शहद।
  • चतुर्थ अध्याय –  प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार, श्लोक सं.1 से 11 मिश्री व खीर विशेष।
(चतुर्थ अध्याय के मंत्र संख्या 24 से 27 तक इन 4 मंत्रों की आहुति नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से देह नाश होता है। इस कारण इन चार मंत्रों के स्थान पर ओंम नमः चण्डिकायै स्वाहा’ बोलकर आहुति देना तथा मंत्रों का केवल पाठ करना चाहिए इनका पाठ करने से सब प्रकार का भय नष्ट हो जाता है।)
  • पंचम अध्याय –  प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार, श्लोक सं. 9 मंत्र कपूर, पुष्प, व ऋतुफल ही है।
  • षष्टम अध्याय –  प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार, श्लोक सं. 23 भोजपत्र।
  • सप्तम अध्याय – प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार श्लोक सं. 10 दो जायफल श्लोक संख्या 19 में सफेद चन्दन श्लोक संख्या 27 में इन्द्र जौं।
  • अष्टम अध्याय – प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार श्लोक संख्या 54 एवं 62 लाल चंदन।
  • नवम अध्याय – प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार, श्लोक संख्या श्लोक संख्या 37 में 1 बेलफल 40 में गन्ना।
  • दशम अध्याय –  प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार, श्लोक संख्या 5 में समुन्द्र झाग 31 में कत्था।
  • एकादश अध्याय – प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार, श्लोक संख्या 2 से 23 तक पुष्प व खीर श्लोक संख्या 29 में गिलोय 31 में भोज पत्र 39 में पीली सरसों 42 में माखन मिश्री 44 मेें अनार व अनार का फूल श्लोक संख्या 49 में पालक श्लोक संख्या 54 एवं 55 मे फूल चावल और सामग्री।
  • द्वादश अध्याय – प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार, श्लोक संख्या 10 मेें नीबू काटकर रोली लगाकर और पेठा श्लोक संख्या 13 में काली मिर्च श्लोक संख्या 16 में बाल-खाल श्लोक संख्या 18 में कुशा श्लोक संख्या 19 में जायफल और कमल गट्टा श्लोक संख्या 20 में ऋीतु फल, फूल, चावल और चन्दन श्लोक संख्या 21 पर हलवा और पुरी श्लोक संख्या 40 पर कमल गट्टा, मखाने और बादाम श्लोक संख्या 41 पर इत्र, फूल और चावल
  • त्रयोदश अध्याय – प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार, श्लोक संख्या 27 से 29 तक फल व फूल।
नोट –  ऊपर दिए गए मंत्र संख्या अनुसार हवन (Navratri Havan) करें शेष मंत्रो में सामान्य हवन सामग्री का ही प्रयोग करे हवन के आरंभ एवं अंत मे यथा सामर्थ्य अधिक से अधिक नवार्ण मंत्र से आहुति डाले घी से दी गई आहुति को पात्र के जल में छोड़ते रहना है। नवार्ण आहुति के बाद पूर्ण आहुति के लिये एक सूखा नारियल (गोला) में सामग्री भर कर अग्नि में डाले तथा शेष बची सामग्री को नारियल पर घी की धार बांधते हुए उसी के ऊपर छोड़ दें आहुतियों के बाद अंत मे माता से प्रार्थना कर हाथ मे जल लेकर हवन कुंड के चारो तरफ घुमाकर जमीन पर छोड़ दे इसके बाद माता की आरती कर क्षमा प्रार्थना कर अग्नि से भस्मी निकालकर घर के सभी सदस्यों का तिलक करें। पात्र के घी मिश्रित जल को घर मे छिड़क दें। इससे नकारत्मक शक्तियां खत्म हो जाती है।

माँ दुर्गा की आरती ( Maa Durga Aarti)

जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय…
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय…
कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै ।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय…
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी ।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय…
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ ॐ जय…
शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ॐ जय…
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे ।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ॐ जय…
ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी ।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ॐ जय…
चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू ।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ॐ जय…
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता ।
भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ॐ जय…
भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी ।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ॐ जय…
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ॐ जय…
श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥ॐ जय…
हवन के उपरांत यथा सामर्थ्य कन्याओं को भोजन करा दक्षिणा दे तदोपरान्त स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करें।
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Chaitra Navratri 2022 : आज से चैत्र नवरात्र प्रारम्भ , जानिए तिथि और कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त https://astrodeeva.com/chaitra-navratri-2022-chaitra-navratri-starts-from-today-know-the-date-and-auspicious-time-for-setting-up-the-vase/ https://astrodeeva.com/chaitra-navratri-2022-chaitra-navratri-starts-from-today-know-the-date-and-auspicious-time-for-setting-up-the-vase/#comments Sat, 02 Apr 2022 00:30:51 +0000 https://astrodeeva.com/?p=3083 Chaitra Navratri 2022 नवरात्र या नौदुर्गा नाम के अनुसार नौ दिनो का भक्ति पूर्ण उत्सव होता है। इन नौ दिनो में माँ आदि शक्ति के नौ रूपों की आराधना की जाती है और उन्हें प्रसन्न किया जाता है । नवरात्र पर्व वर्ष में चार बार मनाया जाता है, जिनमे से दो मुख्य रूप से और […]

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Chaitra Navratri 2022 नवरात्र या नौदुर्गा नाम के अनुसार नौ दिनो का भक्ति पूर्ण उत्सव होता है। इन नौ दिनो में माँ आदि शक्ति के नौ रूपों की आराधना की जाती है और उन्हें प्रसन्न किया जाता है । नवरात्र पर्व वर्ष में चार बार मनाया जाता है, जिनमे से दो मुख्य रूप से और दो गुप्त रूप से मनाई जाती है। मुख्य रूप की नवरात्रि को चैत्र नवरात्रि(Chaitra Navratri) और शारदीय नवरात्रि(Shardiya Navaratri) कहते है। चैत्र नवरात्रि Chaitra Navratri) हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारम्भ होकर रामनवमी तक मनायी जाती है और शारदीय नवरात्रि आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारम्भ होकर नवमी तिथि तक मनायी जाती है।

Chaitra Navratri 2022 – माँ दुर्गा के नौ रूप 

वैसे तो दुर्गा जी के 108 नाम बताये जाते हैं लेकिन नवरात्रि में उन के नौ रूपों की स्तुति और पूजा-पाठ की जाती है। स्वयं ब्रह्मा जी ने माँ दुर्गा के नौ रूपों का उल्लेख संक्षेप में इस श्लोक द्वारा किया है।

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्।।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना:।।

माँ शैलपुत्री

Chaitra Navratri
Shailputri
प्रथम नवरात्र में माँ दुर्गा की शैलपुत्री के रूप में पूजा की जाती है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री शैलपुत्री की पूजा करने से मूलाधार चक्र जागृत हो जाता है और साधकों को सभी प्रकार की सिद्धियां स्वत: ही प्राप्त हो जाती हैं। माँ का वाहन सिंह है तथा इन्हें गाय का घी अथवा उससे बने पदार्थों का भोग लगाया जाता है।

माँ ब्रह्मचारिणी

दूसरे नवरात्र में माँ के ब्रह्मचारिणी एवं तपश्चारिणी रूप को पूजा जाता है। जो साधक माँ के इस रूप की पूजा करते हैं उन्हें तप, त्याग, वैराग्य, संयम और सदाचार की प्राप्ति होती है और जीवन में वे जिस बात का संकल्प कर लेते हैं उसे पूरा करके ही रहते हैं। माँ ब्रह्मचारिणी का कोई भी वाहन नहीं है पैर ही वाहन है माँ को शक्कर का भोग प्रिय है।

माँ चंद्रघंटा

माँ के इस रूप में मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चन्द्र बना होने के कारण इनका नाम चन्द्रघंटा पड़ा तथा तीसरे नवरात्र में माँ के इसी रूप की पूजा की जाती है तथा माँ की कृपा से साधक को संसार के सभी कष्टों से छुटकारा मिल जाता है। शेर पर सवारी करने वाली माता को दूध का भोग प्रिय है।

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माँ कुष्मांडा

Chaitra Navratri

अपने उदर से ब्रह्मांड को उत्पन्न करने वाली माँ  कुष्मांडा की पूजा चौथे नवरात्र में करने का विधान है। इनकी आराधना करने वाले भक्तों केसभी प्रकार के रोग एवं कष्ट मिट जाते हैं तथा साधक को माँ की भक्ति के साथ ही आयु, यश और बल की प्राप्ति भी सहज ही हो जाती है। माँ को भोग में मालपुआ अति प्रिय है।

माँ स्कंदमाता

पंचम नवरात्र में आदिशक्ति माँ दुर्गा की स्कंदमाता के रूप में पूजा होती है। कुमार कार्तिकेय की माता होने के कारण इनका नाम स्कंदमातापड़ा। इनकी पूजा करने वाले साधक संसार के सभी सुखों को भोगते हुए अंत में मोक्ष पद को प्राप्त होते हैं। उनके जीवन में किसी भी प्रकार कीवस्तु का कोई अभाव कभी नहीं रहता। इन्हें पद्मासनादेवी भी कहते हैं। माँ का वाहन सिंह है और इन्हें केले का भोग अति प्रिय ह

नवरात्र के पांचवे दिन आदिशक्ति माँ दुर्गा की स्कंदमाता के रूप में पूजा होती है। कुमार कार्तिकेय की माता होने के कारण इनका नाम स्कंदमाता पड़ा। इनकी पूजा करने वाले साधक संसार के सभी सुखों को भोगते हुए अंत में मोक्ष पद को प्राप्त होते हैं। उनके जीवन में किसी भी प्रकार की वस्तु का कोई अभाव कभी नहीं रहता। इन्हें पद्मासनादेवी भी कहते हैं। माँ का वाहन सिंह है और इन्हें केले का भोग अति प्रिय है।

माँ कात्यायनी

महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति माँ दुर्गा ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया और उनका कात्यायनी नाम पड़ा। छठे नवरात्र में माँ के इसी रूप की पूजा की जाती है। माँ की कृपा से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष आदि चारों फलों की जहां प्राप्ति होती है। वहीं वह आलौकिक तेज से अलंकृत होकर हर प्रकार के भय, शोक एवं संतापों से मुक्त होकर खुशहाल जीवन व्यतीत करता है। और माँ को शहद अति प्रिय है।

माँ कालरात्रि

सभी राक्षसों के लिए कालरूप बनकर आई माँ दुर्गा के इस रूप की पूजा सातवें नवरात्र में की जाती है। माँ के स्मरण मात्र से ही सभी प्रकार के भूत, पिशाच एवं भय समाप्त हो जाते हैं। माँ की कृपा से भानूचक्र जागृत होता है और भक्त हमेशा भयमुक्त रहता हैं। माँ गधे की  सवारी करती है और माँ को गुड़ का भोग अतिप्रिय है।

माँ महागौरी

आदिशक्ति माँ दुर्गा के महागौरी रूप की पूजा आठवें नवरात्र में की जाती है। माँ ने काली रूप में आने के पश्चात घोर तपस्या की और पुन: गौरवर्ण पाया और महागौरी कहलाई। माँ का वाहन बैल है और माँ को हलवे का भोग लगाया जाता है।

माँ सिद्धिदात्री

Chaitra Navratri 2022

शारदीय नवरात्र के नौवें दिन माँ के इस रूप की पूजा एवं आराधना की जाती है, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है माँ का यह रूप साधक को सभी प्रकार की माँ के इस रूप की पूजा एवं आराधना की जाती है, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है माँ का यह रूप साधक को सभी प्रकार की ऋद्धियां एवं सिद्धियां प्रदान करने वाला है। जिस पर माँ की कृपा हो जाती है उसके लिए जीवन में कुछ भी पाना असंभव नहीं रहता। माँ शेर परबिराजमान है माँ को खीर अति प्रिय है अत: माँ को खीर का भोग लगाना चाहिए।

ये भी पढ़ें – नवरात्र में क्या करें और क्या न करें 

चैत्र नवरात्र 2022 की तिथि ( Chaitra Navratri 2022 Dates)

02 अप्रैल 2022: चैत्र नवरात्रि प्रारंभ, घटस्थापनामाँ शैलपुत्री  पूजा

03 अप्रैल 2022: चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन- मां ब्रह्मचारिणी पूजा

04 अप्रैल 2022: चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन- मां चंद्रघंटा पूजा

05 अप्रैल 2022 : चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन- मां कुष्मांडा पूजा

06 अप्रैल 2022: चैत्र नवरात्रि का पांचवा दिन- मां स्कंदमाता पूजा

07 अप्रैल 2022: चैत्र नवरात्रि का छठा दिन- मां कात्यायनी पूजा

08 अप्रैल 2022: चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन- मां कालरात्रि पूजा

09 अप्रैल 2022 :चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन- मां महागौरी दुर्गा  दुर्गा अष्टमी पूजा, महाष्टमी

10 अप्रैल 2022 : राम नवमी, भगवान राम का जन्म दिवस और माँ सिद्धिदात्री  पूजा

11 अप्रैल 2022: चैत्र नवरात्रि पारण

चैत्र नवरात्र 2022 घटस्थापना (Chaitra Navratri 2022 ghatasthapana)

नवरात्रि के दौरान घटस्थापना एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। यह नौ दिनों के उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है। घटस्थापना देवी शक्ति का आह्वान है और शास्त्रों में नवरात्रि की शुरुआत में एक निश्चित अवधि के दौरान घटस्थापना करने के लिए नियमों और दिशानिर्देशों को अच्छी तरह से परिभाषित किया है। घटस्थापना करने का शुभ मुहूर्त प्रतिपदा के दिन एक तिहाई होता है। यदि किसी कारण इस मुहूर्त में घटस्थापना नहीं कर पाते तो अभिजीत मुहूर्त के दौरान घटस्थापना की जा सकती है।

चैत्र नवरात्र 2022 घटस्थापना शुभ मुहूर्त (Chaitra Navratri 2022 ghatasthapana shubh muhurat)

दिनांक – 02 अप्रैल 2022 के शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त – दोपहर 12 बजे से  दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक
घटस्थापना मुहूर्त – 06:10 ए एम से 08:31 ए एम (अवधि – 02 घण्टे 21 मिनट्स)
घटस्थापना अभिजित मुहूर्त – 12:00 पी एम से 12:50 पी एम (अवधि – 00 घण्टे 50 मिनट्स)
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ01 अप्रैल 2022 को 11:53 ए एम बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त02 अप्रैल 2022 को 11:58 ए एम बजे

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Navratri 2022 : नवरात्रि में व्रत क्यों करना चाहिए? https://astrodeeva.com/navratri-2022-why-one-should-fast-during-navratri/ https://astrodeeva.com/navratri-2022-why-one-should-fast-during-navratri/#respond Thu, 31 Mar 2022 10:30:25 +0000 https://astrodeeva.com/?p=3125 चैत्र नवरात्रि (Navratri 2022)एक नए मौसम की शुरुआत का प्रतीक है और इस दौरान उपवास करना शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो लोग इन नौ दिनों का उपवास करते हैं, उन्हें देवी दुर्गा अपनी कृपा प्रदान करती हैं। इस दौरान भक्तों को ध्यान करना चाहिए, देवी महात्म्य का पाठ करना चाहिए और […]

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चैत्र नवरात्रि (Navratri 2022)एक नए मौसम की शुरुआत का प्रतीक है और इस दौरान उपवास करना शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो लोग इन नौ दिनों का उपवास करते हैं, उन्हें देवी दुर्गा अपनी कृपा प्रदान करती हैं। इस दौरान भक्तों को ध्यान करना चाहिए, देवी महात्म्य का पाठ करना चाहिए और माँ दुर्गा के नौ रूपों में से प्रत्येक को समर्पित श्लोकों / मंत्रों का जाप करना चाहिए। नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान एक व्रती (उपवास रखने वाले व्यक्ति) को लहसुन, प्याज, गेहूं, चावल, दाल और मांस से परहेज़ करना चाहिए।

नवरात्रि (Navratri) के दौरान उपवास करने से आध्यात्मिक और आंतरिक शक्ति का संचार होता है। यह मन की बेचैनी को कम करता है और चीत को शांत कर जागरूकता और आनंद की अनुभती लाता है। ये आपकी इंद्रियों, शरीर, मन और आत्मा को शांत करने में आपकी मदद करते हैं।

ये भी पढ़ें : चैत्र नवरात्र प्रारम्भ , जानिए तिथि और कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

नवरात्रि के दौरान उपवास के लाभ (Benefits of fasting during Navratri)

  • आध्यात्मिक आत्म से जुड़ने के लिए एक आदर्श समय होने के अलावा, नवरात्रि का समय अपने आप को डिटॉक्स करने और पूर्व में जाने अनजाने में हुए पाप के लिए पश्चाताप करने का सबसे अच्छा समय होता है।
  • इन नौ दिनों के दौरान, लोग विभिन्न प्रकार के फल और खाद्य पदार्थ का सेवन करते हैं जो पौष्टिक होने के साथ-साथ इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट पूरे शरीर की सफाई के लिए फायदेमंद होते हैं।
  • जब आप उपवास करते हैं, तो आपके तरल पदार्थ का सेवन बढ़ जाता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है।

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  • गेहूं, चावल और दाल से परहेज करते हुए हल्के भोजन पदार्थ जैसे सिंघारे का आटा, कुट्टू का आटा, समा, साबूदाना आदि सामग्री को भोजन में लेने से लोग अपने पाचन तंत्र को बहुत जरूरी आराम देते हैं।
  • नवरात्रि उपवास के दौरान लोग टेबल सॉल्ट या प्रोसेस्ड/रिफाइंड नमक की जगह सेंधा नमक (रासायनिक के बिना शुद्ध नमक) लेते हैं जो पाचन में मदद करता है, प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, रक्तचाप को नियंत्रित करता है और पूरे दिन शरीर को सक्रिय रखता है।
  • उपवास के दौरान व्रती गर्मी पैदा करने वाले मसालों जैसे हल्दी, हिंग, गरम मसाला, राय / सरसों, लवंग (लौंग) के उपयोग से बचते हैं और खाना पकाने के लिए तिल/सरसों के तेल के उपयोग से भी बचते हैं। व्रत की रेसिपी बनाने के लिए मूंगफली के तेल या घी का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रकार, इनसे परहेज करके और जीरा (जीरा) और काली मिर्च (काली मिर्च) का उपयोग करने से शरीर ठंडा और तरोताजा रहता है।
  • ध्यान और प्रार्थना नवरात्रि व्रत के महत्वपूर्ण अंग हैं। ये आपकी इंद्रियों, शरीर, मन और आत्मा को शांत करने में आपकी मदद करते हैं। संक्षेप में, नवरात्रि के दौरान उपवास करने से व्यक्ति आत्म-संयम, आत्म-अनुशासन, और कम से कम आध्यात्मिक जागरण का अभ्यास कर सकता है।

 

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Ghat Sthapana 2022 – चैत्र नवरात्रि घट स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि https://astrodeeva.com/ghat-sthapana-2022-chaitra-navratri-ghat-establishment-auspicious-time-and-method-of-worship/ https://astrodeeva.com/ghat-sthapana-2022-chaitra-navratri-ghat-establishment-auspicious-time-and-method-of-worship/#comments Mon, 28 Mar 2022 11:30:14 +0000 https://astrodeeva.com/?p=3099 Chaitra Navratri 2022 – चैत्र महीना शुरू हो चुका है। यह हिंदू पंचांग के मुताबिक पहला महीना होता है। इसी महीने से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है। इस महीने में नवरात्रि भी पड़ती हैं, जिन्‍हें चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) कहते हैं। साल में कुल 4 नवरात्रि आती हैं, जिनकी शुरुआत चैत्र नवरात्रि से होती […]

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Chaitra Navratri 2022 – चैत्र महीना शुरू हो चुका है। यह हिंदू पंचांग के मुताबिक पहला महीना होता है। इसी महीने से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है। इस महीने में नवरात्रि भी पड़ती हैं, जिन्‍हें चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) कहते हैं। साल में कुल 4 नवरात्रि आती हैं, जिनकी शुरुआत चैत्र नवरात्रि से होती है। इन 9 दिनों के दौरान मां दुर्गा के 9 स्‍वरूपों की पूजा की जाती है। घट स्‍थापना(Ghat Sthapana) की जाती है और आखिर में कन्‍या पूजन किया जाता है। मां दुर्गा को सुख, समृद्धि और धन की देवी माना जाता है। इस साल चैत्र नवरात्रि का महापर्व 2 अप्रैल 2022 से शुरू होगा और 11 अप्रैल 2022 तक चलेगा।

भगवान विष्‍णु का रूप है कलश

नवरात्रि में कलश स्‍थापना या घट स्‍थापना (Ghat Sthapana) करने का बहुत महत्‍व होता है। इस कलश की नौ दिन तक पूजा की जाती है, अखंड ज्‍योति जलाई जाती है। कलश को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है। इसलिए मां दुर्गा की पूजा करने से पहले कलश की पूजा की जाती है। कलश स्‍थापना करके ही सारे देवी-देवताओं का आहवाहन किया जाता है। इसके साथ ही 9 दिन के व्रत की शुरुआत होती है।

 Ghat Sthapana 2022 – चैत्र नवरात्रि घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

इस साल चैत्र घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त 2 अप्रैल 2022, शनिवार की सुबह 06:10 बजे से 08:31 मिनट तक रहेगा। यानी कि कुल अवधि 02 घण्टे 31 मिनट की रहेगी। इसके अलावा घटस्थापना को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:08 बजे से 12:57 बजे तक रहेगा। वहीं प्रतिपदा तिथि 1 अप्रैल 2022 को सुबह 11:53 बजे से शुरू होगी और 2 अप्रैल 2022 को सुबह 11:58 पर खत्‍म होगी।

Also Read: दुर्गा सप्तशती सम्पूर्ण पाठ का फल पायें इस एक मंत्र के जाप से

Chaitra Navratri 2022- ऐसे करें कलश स्थापना

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन सुबह जल्‍दी उठकर स्‍नान करके साफ कपड़े पहन लें। इसके बाद घर के मंदिर की साफ-सफाई करके जिस जगह पर कलस्‍थापना करना है, वहां गंगाजल छिड़कें। फिर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर थोड़े चावल रखें। एक मिट्टी के पात्र में जौ बो दें। इस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें। कलश पर स्वास्तिक बनाकर इस पर कलावा बांधें। कलश में चारों ओर अशोक के पत्‍ते लगाएं। फिर कलश में साबुत सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें और एक नारियल पर चुनरी लपेटकर कलावा से बांधें। फिर इस नारियल को कलश के ऊपर पर रखते हुए देवी दुर्गा का आहवाहन करें। इसके बाद दीप जलाकर कलश की पूजा करें। ध्‍यान रखें कि कलश सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का ही हो। कलश स्‍टील सा किसी अन्‍य अशुद्ध धातु का नहीं होना चाहिए।

 

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Chaitra Navratri 2022 – चैत्र नवरात्र में किस देवी को लगायें कौन-सा भोग? https://astrodeeva.com/chaitra-navratri-2022-which-goddess-should-be-offered-which-bhog-in-chaitra-navratri/ https://astrodeeva.com/chaitra-navratri-2022-which-goddess-should-be-offered-which-bhog-in-chaitra-navratri/#respond Fri, 25 Mar 2022 12:30:40 +0000 https://astrodeeva.com/?p=2982 चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2022) के पावन व्रत आज से प्रारम्भ हो रहें हैं। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व में देवी दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है। इस व्रत के दौरान तिथि और देवी के अनुसार उन्हें अलग-अलग चीजों का भोग लगाया जाता है। 02 अप्रैल 2022 – Chaitra Navratri […]

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चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2022) के पावन व्रत आज से प्रारम्भ हो रहें हैं। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व में देवी दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है। इस व्रत के दौरान तिथि और देवी के अनुसार उन्हें अलग-अलग चीजों का भोग लगाया जाता है।

02 अप्रैल 2022 – Chaitra Navratri 2022 1st Day

चैत्र नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की जाती है। इस दिन माता को गाय के दूध से बने पकवानों का भोग लगाया जाता है। पिपरमिंट युक्त मीठा मसाला पान, अनार और गुड़ से बने पकवान भी देवी को अर्पण किए जाते हैं। वहीं फल में देवी शैलपुत्री को एक अनार का फल जरूर चढ़ाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि अनार चढ़ाने से देवी जल्द प्रसन्न होती हैं। अनार उनका प्रिय फल भी माना जाता है।

03 अप्रैल 2022 – Chaitra Navratri 2022 2nd Day

नवरात्र  के दूसरे दिन मां दुर्गा की ब्रह्मचारिणी के रूप में पूजा होती है। मातारानी को को चीनी, मिश्री और पंचामृत का भोग लगाया जाता है। देवी को इस दिन पान-सुपाड़ी भी चढ़ाएं। इस दिन प्रसाद के तौर पर देवी को 2 सेब का भोग लगाया जाता है।

04 अप्रैल 2022 – Chaitra Navratri 2022 3rd Day

नवरात्र के तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा को दूध या दूध से बनी चीजें अर्पित करनी चाहिए। गुड़ और लाल सेब भी मैय्या को बहुत पसंद है। ऐसा करने से सभी बुरी शक्तियां दूर भाग जाती हैं। देवी चंद्रघंटा को 3 केले भी अर्पण करें।

05 अप्रैल 2022 – Chaitra Navratri 2022 4th Day

नवरात्र के चौथे दिन माता के चौथे स्वरूप यानि इस दिन देवी कुष्मांडा की पूजा होती है। इनकी उपासना करने से जटिल से जटिल रोगों से मुक्ति मिलती है और सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इस दिन माता को मालपुए का भोग लगाएं। चौथे दिन देवी कुष्मांडा को 4 नाशपाती का भोग लगाया जाता है।

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06 अप्रैल 2022 – Chaitra Navratri 2022 5th Day

नवरात्र के पांचवे दिन देवी स्कंदमाता की की गई पूजा से भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति होती है। नवरात्र के पांचवे दिन देवी को लगाएं केले का भोग या फिर इसे प्रसाद के रूप में दान करें। इस दिन बुद्धि में वृद्धि के लिए माता को मंत्रों के साथ छह इलायची भी चढ़ाएं। फल में देवी स्कंदमाता को अंगूर के 5 गुच्छे चढ़ाएं।

07 अप्रैल 2022 – Chaitra Navratri 2022 6th Day

नवरात्र के छ्ठे दिन देवी कात्यायनी की आराधना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। शहद का भोग लगाकर मां कात्यायनी को प्रसन्न किया जाता है। कात्यायनी माता को फल में 6 अमरूद भी अर्पित कर उन्हें प्रसन्न करें।

08 अप्रैल 2022 – Chaitra Navratri 2022 7th Day

नवरात्र के सांतवे दिन कालरात्रि की पूजा  की जाती है। भूत-प्रेतों से मुक्ति दिलवाने वाली देवी कालरात्रि की उपासना करने से सभी दुख दूर होते हैं। माता को लगाएं गुड़ के नैवेद्य का भोग। नवरात्र के सांतवे दिन 7 चीकू का प्रसाद लगाएं।

09 अप्रैल 2022 – Chaitra Navratri 2022 8th Day

नवरात्र  के आंठवें दिन महागौरी के स्वरूप का वंदन किया जाता है। इस दिन देवी को नारियल प्रसाद चढ़ाने से घर में सुख-समृद्धि आती है। महागौरी की पूजा करने के बाद पूरी, हलवा और चना कन्याओं को खिलाना शुभ माना जाता है। महागौरी को फल में शरीफा का प्रसाद चढ़ाएं। इनकी पूजा से संतान संबंधी परेशानियों से छुटकारा मिलता है।

10 अप्रैल 2022 – Chaitra Navratri 2022 9th Day

नवरात्र के आखिरी दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री को जगत को संचालित करने वाली देवी कहा जाता है। इस दिन माता को हलवा, पूरी, चना, खीर, पुए आदि का भोग लगाएं। नवरात्र के आखिरी दिन मां सिद्धिदात्री को 9 संतरे का प्रसाद लगाना शुभ माना जाता है।

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Magh Gupt Navratri 2022- माघ गुप्त नवरात्र जानिए घटस्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि https://astrodeeva.com/magh-gupt-navratri-2022-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%98-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf/ https://astrodeeva.com/magh-gupt-navratri-2022-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%98-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf/#respond Tue, 01 Feb 2022 10:39:09 +0000 https://astrodeeva.com/?p=2733 हिन्दू धर्म में नवरात्र का अत्यधिक महत्व है। इन नौ दिनो में भक्त मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना करते हैं। देवी भागवत में चार प्रकार के नवरात्रि का उल्लेख है। शरद नवरात्रि(Sharadiya Navratri), चैत्र नवरात्रि(Chaitra Navratri),माघ नवरात्रि(Magh Gupt Navratri) और आषाढ़ (Ashadh Gupt Navratri)। शारदीय और चैत्र नवरात्रि को हर कोई व्यापक रूप […]

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हिन्दू धर्म में नवरात्र का अत्यधिक महत्व है। इन नौ दिनो में भक्त मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना करते हैं। देवी भागवत में चार प्रकार के नवरात्रि का उल्लेख है। शरद नवरात्रि(Sharadiya Navratri), चैत्र नवरात्रि(Chaitra Navratri),माघ नवरात्रि(Magh Gupt Navratri) और आषाढ़ (Ashadh Gupt Navratri)। शारदीय और चैत्र नवरात्रि को हर कोई व्यापक रूप से मनाता है जबकि माघ नवरात्रि और आषाढ़ नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि के रूप में जाना जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, माघ गुप्त नवरात्रि जनवरी-फरवरी महीने में मनाई जाती है। जबकि आषाढ़ गुप्त नवरात्र जून-जुलाई के महीने में आते हैं। माघ नवरात्री उत्तरी भारत में अधिक प्रसिद्ध है जबकि आषाढ़ नवरात्रि मुख्य रूप से दक्षिणी भारत में लोकप्रिय है।

माघ गुप्त नवरात्रि 2022 तिथि (Magh Gupt Navratri 2022)

नवरात्रि प्रारम्भ – 2 फरवरी 2022,बुधवार
नवरात्रि समाप्त – 10 फरवरी 2022, गुरुवार

घटस्थापना मुहूर्त – सुबह 07:09 ए एम से 08:31 ए एम तक
(अवधि – 01 घण्टा 22 मिनट्स)

घटस्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि पर है।
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ – 1 फरवरी 2022 को 11:15 ए एम बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त – 2 फरवरी 2022 को 08:31 ए एम बजे

February 2022 Vrat and Festival 

जैसे नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि के दौरान गुप्त अनुष्ठान किए जाते हैं। गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्त्व रखती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा को जितना गुप्त रखा जाता है, उतना ही ज्यादा फल प्राप्त होता है।

गुप्त नवरात्रि के दौरान पूजे जाने वाली मां दुर्गा के विभिन्न रूप हैं-

  • माँ कालिके
  • तारा देवी
  • त्रिपुर सुंदरी
  • भुवनेश्वरी
  • माता चित्रमस्ता
  • त्रिपुर भैरवी
  • माँ धूम्रवती
  • माता बगलामुखी
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गुप्त नवरात्रि पूजा विधि (Gupt Navratri Puja Vidhi)

गुप्त नवरात्रि के दौरान पूजा की सबसे प्रसिद्ध विधि तांत्रिक विद्या है जिसमें धन, बुद्धि और समृद्धि प्राप्त करने के लिए देवी दुर्गा की आराधना शामिल है। ऐसा माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा को शक्तिशाली मंत्र और गुप्त तंत्र विद्या व तांत्रिक साधनाओं के रूप में गुप्त पूजा की पेशकश की जाती है, जो भक्तों को सभी इच्छाओं और आशाओं को पूरा करने के लिए विशेष शक्तियां प्राप्त करने में मदद करती हैं। गुप्त नवरात्रि के दौरान तांत्रिक और अघोरी मां दुर्गा की आधी रात में पूजा करते हैं।

  • सर्वप्रथम मां दुर्गा की प्रतिमा या मूर्ति स्थापित की जाती है।
  • इसके उपरांत मां को लाल रंग का सिंदूर और सुनहरे गोटे वाली चुनरी अर्पित की जाती है।
  • इसके बाद मां के चरणों में पानी वाला नारियल, केले, सेब, खील, बताशे और श्रृंगार का सामान अर्पित किया जाता है।
  • मां दुर्गा को लाल पुष्प चढ़ाना शुभ माना जाता है।
  • सरसों के तेल से दीपक जलाकर ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ मंत्र का जाप करना चाहिए।

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