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Chaitra Navratri 2022 नवरात्र या नौदुर्गा नाम के अनुसार नौ दिनो का भक्ति पूर्ण उत्सव होता है। इन नौ दिनो में माँ आदि शक्ति के नौ रूपों की आराधना की जाती है और उन्हें प्रसन्न किया जाता है । नवरात्र पर्व वर्ष में चार बार मनाया जाता है, जिनमे से दो मुख्य रूप से और दो गुप्त रूप से मनाई जाती है। मुख्य रूप की नवरात्रि को चैत्र नवरात्रि(Chaitra Navratri) और शारदीय नवरात्रि(Shardiya Navaratri) कहते है। चैत्र नवरात्रि Chaitra Navratri) हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारम्भ होकर रामनवमी तक मनायी जाती है और शारदीय नवरात्रि आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारम्भ होकर नवमी तिथि तक मनायी जाती है।

Chaitra Navratri 2022 – माँ दुर्गा के नौ रूप 

वैसे तो दुर्गा जी के 108 नाम बताये जाते हैं लेकिन नवरात्रि में उन के नौ रूपों की स्तुति और पूजा-पाठ की जाती है। स्वयं ब्रह्मा जी ने माँ दुर्गा के नौ रूपों का उल्लेख संक्षेप में इस श्लोक द्वारा किया है।

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्।।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना:।।

माँ शैलपुत्री

Chaitra Navratri
Shailputri
प्रथम नवरात्र में माँ दुर्गा की शैलपुत्री के रूप में पूजा की जाती है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री शैलपुत्री की पूजा करने से मूलाधार चक्र जागृत हो जाता है और साधकों को सभी प्रकार की सिद्धियां स्वत: ही प्राप्त हो जाती हैं। माँ का वाहन सिंह है तथा इन्हें गाय का घी अथवा उससे बने पदार्थों का भोग लगाया जाता है।

माँ ब्रह्मचारिणी

दूसरे नवरात्र में माँ के ब्रह्मचारिणी एवं तपश्चारिणी रूप को पूजा जाता है। जो साधक माँ के इस रूप की पूजा करते हैं उन्हें तप, त्याग, वैराग्य, संयम और सदाचार की प्राप्ति होती है और जीवन में वे जिस बात का संकल्प कर लेते हैं उसे पूरा करके ही रहते हैं। माँ ब्रह्मचारिणी का कोई भी वाहन नहीं है पैर ही वाहन है माँ को शक्कर का भोग प्रिय है।

माँ चंद्रघंटा

माँ के इस रूप में मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चन्द्र बना होने के कारण इनका नाम चन्द्रघंटा पड़ा तथा तीसरे नवरात्र में माँ के इसी रूप की पूजा की जाती है तथा माँ की कृपा से साधक को संसार के सभी कष्टों से छुटकारा मिल जाता है। शेर पर सवारी करने वाली माता को दूध का भोग प्रिय है।

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माँ कुष्मांडा

Chaitra Navratri

अपने उदर से ब्रह्मांड को उत्पन्न करने वाली माँ  कुष्मांडा की पूजा चौथे नवरात्र में करने का विधान है। इनकी आराधना करने वाले भक्तों केसभी प्रकार के रोग एवं कष्ट मिट जाते हैं तथा साधक को माँ की भक्ति के साथ ही आयु, यश और बल की प्राप्ति भी सहज ही हो जाती है। माँ को भोग में मालपुआ अति प्रिय है।

माँ स्कंदमाता

पंचम नवरात्र में आदिशक्ति माँ दुर्गा की स्कंदमाता के रूप में पूजा होती है। कुमार कार्तिकेय की माता होने के कारण इनका नाम स्कंदमातापड़ा। इनकी पूजा करने वाले साधक संसार के सभी सुखों को भोगते हुए अंत में मोक्ष पद को प्राप्त होते हैं। उनके जीवन में किसी भी प्रकार कीवस्तु का कोई अभाव कभी नहीं रहता। इन्हें पद्मासनादेवी भी कहते हैं। माँ का वाहन सिंह है और इन्हें केले का भोग अति प्रिय ह

नवरात्र के पांचवे दिन आदिशक्ति माँ दुर्गा की स्कंदमाता के रूप में पूजा होती है। कुमार कार्तिकेय की माता होने के कारण इनका नाम स्कंदमाता पड़ा। इनकी पूजा करने वाले साधक संसार के सभी सुखों को भोगते हुए अंत में मोक्ष पद को प्राप्त होते हैं। उनके जीवन में किसी भी प्रकार की वस्तु का कोई अभाव कभी नहीं रहता। इन्हें पद्मासनादेवी भी कहते हैं। माँ का वाहन सिंह है और इन्हें केले का भोग अति प्रिय है।

माँ कात्यायनी

महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति माँ दुर्गा ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया और उनका कात्यायनी नाम पड़ा। छठे नवरात्र में माँ के इसी रूप की पूजा की जाती है। माँ की कृपा से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष आदि चारों फलों की जहां प्राप्ति होती है। वहीं वह आलौकिक तेज से अलंकृत होकर हर प्रकार के भय, शोक एवं संतापों से मुक्त होकर खुशहाल जीवन व्यतीत करता है। और माँ को शहद अति प्रिय है।

माँ कालरात्रि

सभी राक्षसों के लिए कालरूप बनकर आई माँ दुर्गा के इस रूप की पूजा सातवें नवरात्र में की जाती है। माँ के स्मरण मात्र से ही सभी प्रकार के भूत, पिशाच एवं भय समाप्त हो जाते हैं। माँ की कृपा से भानूचक्र जागृत होता है और भक्त हमेशा भयमुक्त रहता हैं। माँ गधे की  सवारी करती है और माँ को गुड़ का भोग अतिप्रिय है।

माँ महागौरी

आदिशक्ति माँ दुर्गा के महागौरी रूप की पूजा आठवें नवरात्र में की जाती है। माँ ने काली रूप में आने के पश्चात घोर तपस्या की और पुन: गौरवर्ण पाया और महागौरी कहलाई। माँ का वाहन बैल है और माँ को हलवे का भोग लगाया जाता है।

माँ सिद्धिदात्री

Chaitra Navratri 2022

शारदीय नवरात्र के नौवें दिन माँ के इस रूप की पूजा एवं आराधना की जाती है, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है माँ का यह रूप साधक को सभी प्रकार की माँ के इस रूप की पूजा एवं आराधना की जाती है, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है माँ का यह रूप साधक को सभी प्रकार की ऋद्धियां एवं सिद्धियां प्रदान करने वाला है। जिस पर माँ की कृपा हो जाती है उसके लिए जीवन में कुछ भी पाना असंभव नहीं रहता। माँ शेर परबिराजमान है माँ को खीर अति प्रिय है अत: माँ को खीर का भोग लगाना चाहिए।

ये भी पढ़ें – नवरात्र में क्या करें और क्या न करें 

चैत्र नवरात्र 2022 की तिथि ( Chaitra Navratri 2022 Dates)

02 अप्रैल 2022: चैत्र नवरात्रि प्रारंभ, घटस्थापनामाँ शैलपुत्री  पूजा

03 अप्रैल 2022: चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन- मां ब्रह्मचारिणी पूजा

04 अप्रैल 2022: चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन- मां चंद्रघंटा पूजा

05 अप्रैल 2022 : चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन- मां कुष्मांडा पूजा

06 अप्रैल 2022: चैत्र नवरात्रि का पांचवा दिन- मां स्कंदमाता पूजा

07 अप्रैल 2022: चैत्र नवरात्रि का छठा दिन- मां कात्यायनी पूजा

08 अप्रैल 2022: चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन- मां कालरात्रि पूजा

09 अप्रैल 2022 :चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन- मां महागौरी दुर्गा  दुर्गा अष्टमी पूजा, महाष्टमी

10 अप्रैल 2022 : राम नवमी, भगवान राम का जन्म दिवस और माँ सिद्धिदात्री  पूजा

11 अप्रैल 2022: चैत्र नवरात्रि पारण

चैत्र नवरात्र 2022 घटस्थापना (Chaitra Navratri 2022 ghatasthapana)

नवरात्रि के दौरान घटस्थापना एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। यह नौ दिनों के उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है। घटस्थापना देवी शक्ति का आह्वान है और शास्त्रों में नवरात्रि की शुरुआत में एक निश्चित अवधि के दौरान घटस्थापना करने के लिए नियमों और दिशानिर्देशों को अच्छी तरह से परिभाषित किया है। घटस्थापना करने का शुभ मुहूर्त प्रतिपदा के दिन एक तिहाई होता है। यदि किसी कारण इस मुहूर्त में घटस्थापना नहीं कर पाते तो अभिजीत मुहूर्त के दौरान घटस्थापना की जा सकती है।

चैत्र नवरात्र 2022 घटस्थापना शुभ मुहूर्त (Chaitra Navratri 2022 ghatasthapana shubh muhurat)

दिनांक – 02 अप्रैल 2022 के शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त – दोपहर 12 बजे से  दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक
घटस्थापना मुहूर्त – 06:10 ए एम से 08:31 ए एम (अवधि – 02 घण्टे 21 मिनट्स)
घटस्थापना अभिजित मुहूर्त – 12:00 पी एम से 12:50 पी एम (अवधि – 00 घण्टे 50 मिनट्स)
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ01 अप्रैल 2022 को 11:53 ए एम बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त02 अप्रैल 2022 को 11:58 ए एम बजे

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Ghat Sthapana 2022 – चैत्र नवरात्रि घट स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि https://astrodeeva.com/ghat-sthapana-2022-chaitra-navratri-ghat-establishment-auspicious-time-and-method-of-worship/ https://astrodeeva.com/ghat-sthapana-2022-chaitra-navratri-ghat-establishment-auspicious-time-and-method-of-worship/#comments Mon, 28 Mar 2022 11:30:14 +0000 https://astrodeeva.com/?p=3099 Chaitra Navratri 2022 – चैत्र महीना शुरू हो चुका है। यह हिंदू पंचांग के मुताबिक पहला महीना होता है। इसी महीने से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है। इस महीने में नवरात्रि भी पड़ती हैं, जिन्‍हें चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) कहते हैं। साल में कुल 4 नवरात्रि आती हैं, जिनकी शुरुआत चैत्र नवरात्रि से होती […]

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Chaitra Navratri 2022 – चैत्र महीना शुरू हो चुका है। यह हिंदू पंचांग के मुताबिक पहला महीना होता है। इसी महीने से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है। इस महीने में नवरात्रि भी पड़ती हैं, जिन्‍हें चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) कहते हैं। साल में कुल 4 नवरात्रि आती हैं, जिनकी शुरुआत चैत्र नवरात्रि से होती है। इन 9 दिनों के दौरान मां दुर्गा के 9 स्‍वरूपों की पूजा की जाती है। घट स्‍थापना(Ghat Sthapana) की जाती है और आखिर में कन्‍या पूजन किया जाता है। मां दुर्गा को सुख, समृद्धि और धन की देवी माना जाता है। इस साल चैत्र नवरात्रि का महापर्व 2 अप्रैल 2022 से शुरू होगा और 11 अप्रैल 2022 तक चलेगा।

भगवान विष्‍णु का रूप है कलश

नवरात्रि में कलश स्‍थापना या घट स्‍थापना (Ghat Sthapana) करने का बहुत महत्‍व होता है। इस कलश की नौ दिन तक पूजा की जाती है, अखंड ज्‍योति जलाई जाती है। कलश को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है। इसलिए मां दुर्गा की पूजा करने से पहले कलश की पूजा की जाती है। कलश स्‍थापना करके ही सारे देवी-देवताओं का आहवाहन किया जाता है। इसके साथ ही 9 दिन के व्रत की शुरुआत होती है।

 Ghat Sthapana 2022 – चैत्र नवरात्रि घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

इस साल चैत्र घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त 2 अप्रैल 2022, शनिवार की सुबह 06:10 बजे से 08:31 मिनट तक रहेगा। यानी कि कुल अवधि 02 घण्टे 31 मिनट की रहेगी। इसके अलावा घटस्थापना को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:08 बजे से 12:57 बजे तक रहेगा। वहीं प्रतिपदा तिथि 1 अप्रैल 2022 को सुबह 11:53 बजे से शुरू होगी और 2 अप्रैल 2022 को सुबह 11:58 पर खत्‍म होगी।

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Chaitra Navratri 2022- ऐसे करें कलश स्थापना

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन सुबह जल्‍दी उठकर स्‍नान करके साफ कपड़े पहन लें। इसके बाद घर के मंदिर की साफ-सफाई करके जिस जगह पर कलस्‍थापना करना है, वहां गंगाजल छिड़कें। फिर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर थोड़े चावल रखें। एक मिट्टी के पात्र में जौ बो दें। इस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें। कलश पर स्वास्तिक बनाकर इस पर कलावा बांधें। कलश में चारों ओर अशोक के पत्‍ते लगाएं। फिर कलश में साबुत सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें और एक नारियल पर चुनरी लपेटकर कलावा से बांधें। फिर इस नारियल को कलश के ऊपर पर रखते हुए देवी दुर्गा का आहवाहन करें। इसके बाद दीप जलाकर कलश की पूजा करें। ध्‍यान रखें कि कलश सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का ही हो। कलश स्‍टील सा किसी अन्‍य अशुद्ध धातु का नहीं होना चाहिए।

 

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Magh Gupt Navratri 2022- माघ गुप्त नवरात्र जानिए घटस्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि https://astrodeeva.com/magh-gupt-navratri-2022-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%98-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf/ https://astrodeeva.com/magh-gupt-navratri-2022-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%98-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf/#respond Tue, 01 Feb 2022 10:39:09 +0000 https://astrodeeva.com/?p=2733 हिन्दू धर्म में नवरात्र का अत्यधिक महत्व है। इन नौ दिनो में भक्त मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना करते हैं। देवी भागवत में चार प्रकार के नवरात्रि का उल्लेख है। शरद नवरात्रि(Sharadiya Navratri), चैत्र नवरात्रि(Chaitra Navratri),माघ नवरात्रि(Magh Gupt Navratri) और आषाढ़ (Ashadh Gupt Navratri)। शारदीय और चैत्र नवरात्रि को हर कोई व्यापक रूप […]

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हिन्दू धर्म में नवरात्र का अत्यधिक महत्व है। इन नौ दिनो में भक्त मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना करते हैं। देवी भागवत में चार प्रकार के नवरात्रि का उल्लेख है। शरद नवरात्रि(Sharadiya Navratri), चैत्र नवरात्रि(Chaitra Navratri),माघ नवरात्रि(Magh Gupt Navratri) और आषाढ़ (Ashadh Gupt Navratri)। शारदीय और चैत्र नवरात्रि को हर कोई व्यापक रूप से मनाता है जबकि माघ नवरात्रि और आषाढ़ नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि के रूप में जाना जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, माघ गुप्त नवरात्रि जनवरी-फरवरी महीने में मनाई जाती है। जबकि आषाढ़ गुप्त नवरात्र जून-जुलाई के महीने में आते हैं। माघ नवरात्री उत्तरी भारत में अधिक प्रसिद्ध है जबकि आषाढ़ नवरात्रि मुख्य रूप से दक्षिणी भारत में लोकप्रिय है।

माघ गुप्त नवरात्रि 2022 तिथि (Magh Gupt Navratri 2022)

नवरात्रि प्रारम्भ – 2 फरवरी 2022,बुधवार
नवरात्रि समाप्त – 10 फरवरी 2022, गुरुवार

घटस्थापना मुहूर्त – सुबह 07:09 ए एम से 08:31 ए एम तक
(अवधि – 01 घण्टा 22 मिनट्स)

घटस्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि पर है।
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ – 1 फरवरी 2022 को 11:15 ए एम बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त – 2 फरवरी 2022 को 08:31 ए एम बजे

February 2022 Vrat and Festival 

जैसे नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि के दौरान गुप्त अनुष्ठान किए जाते हैं। गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्त्व रखती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा को जितना गुप्त रखा जाता है, उतना ही ज्यादा फल प्राप्त होता है।

गुप्त नवरात्रि के दौरान पूजे जाने वाली मां दुर्गा के विभिन्न रूप हैं-

  • माँ कालिके
  • तारा देवी
  • त्रिपुर सुंदरी
  • भुवनेश्वरी
  • माता चित्रमस्ता
  • त्रिपुर भैरवी
  • माँ धूम्रवती
  • माता बगलामुखी
  • मातंगी
  • कमला देवी
गुप्त नवरात्रि पूजा विधि (Gupt Navratri Puja Vidhi)

गुप्त नवरात्रि के दौरान पूजा की सबसे प्रसिद्ध विधि तांत्रिक विद्या है जिसमें धन, बुद्धि और समृद्धि प्राप्त करने के लिए देवी दुर्गा की आराधना शामिल है। ऐसा माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा को शक्तिशाली मंत्र और गुप्त तंत्र विद्या व तांत्रिक साधनाओं के रूप में गुप्त पूजा की पेशकश की जाती है, जो भक्तों को सभी इच्छाओं और आशाओं को पूरा करने के लिए विशेष शक्तियां प्राप्त करने में मदद करती हैं। गुप्त नवरात्रि के दौरान तांत्रिक और अघोरी मां दुर्गा की आधी रात में पूजा करते हैं।

  • सर्वप्रथम मां दुर्गा की प्रतिमा या मूर्ति स्थापित की जाती है।
  • इसके उपरांत मां को लाल रंग का सिंदूर और सुनहरे गोटे वाली चुनरी अर्पित की जाती है।
  • इसके बाद मां के चरणों में पानी वाला नारियल, केले, सेब, खील, बताशे और श्रृंगार का सामान अर्पित किया जाता है।
  • मां दुर्गा को लाल पुष्प चढ़ाना शुभ माना जाता है।
  • सरसों के तेल से दीपक जलाकर ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ मंत्र का जाप करना चाहिए।

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Chaitra Navratri 2021 – चैत्र नवरात्र में किस देवी को लगायें कौन-सा भोग? https://astrodeeva.com/chaitra-navratri-2021-%e0%a4%9a%e0%a5%88%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8-%e0%a4%a6/ https://astrodeeva.com/chaitra-navratri-2021-%e0%a4%9a%e0%a5%88%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8-%e0%a4%a6/#respond Thu, 15 Apr 2021 09:58:34 +0000 https://astrodeeva.com/?p=1906 चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2021) के पावन व्रत चल रहें हैं। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व में देवी दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है। इस व्रत के दौरान तिथि और देवी के अनुसार उन्हें अलग-अलग चीजों का भोग लगाया जाता है। 13 अप्रैल चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2021) के पहले […]

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चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2021) के पावन व्रत चल रहें हैं। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व में देवी दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है। इस व्रत के दौरान तिथि और देवी के अनुसार उन्हें अलग-अलग चीजों का भोग लगाया जाता है।

13 अप्रैल चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2021) के पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की जाती है। इस दिन माता को गाय के दूध से बने पकवानों का भोग लगाया जाता है। पिपरमिंट युक्त मीठा मसाला पान, अनार और गुड़ से बने पकवान भी देवी को अर्पण किए जाते हैं। वहीं फल में देवी शैलपुत्री को एक अनार का फल जरूर चढ़ाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि अनार चढ़ाने से देवी जल्द प्रसन्न होती हैं। अनार उनका प्रिय फल भी माना जाता है।

14 अप्रैल नवरात्र (Chaitra Navratri 2021) के दूसरे दिन मां दुर्गा की ब्रह्मचारिणी के रूप में पूजा होती है। मातारानी को को चीनी, मिश्री और पंचामृत का भोग लगाया जाता है। देवी को इस दिन पान-सुपाड़ी भी चढ़ाएं। इस दिन प्रसाद के तौर पर देवी को 2 सेब का भोग लगाया जाता है।

15 अप्रैल नवरात्र (Chaitra Navratri 2021) के तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा को दूध या दूध से बनी चीजें अर्पित करनी चाहिए। गुड़ और लाल सेब भी मैय्या को बहुत पसंद है। ऐसा करने से सभी बुरी शक्तियां दूर भाग जाती हैं। देवी चंद्रघंटा को 3 केले भी अर्पण करें।

16 अप्रैल नवरात्र (Chaitra Navratri 2021) के चौथे दिन माता के चौथे स्वरूप यानि इस दिन देवी कुष्मांडा की पूजा होती है। इनकी उपासना करने से जटिल से जटिल रोगों से मुक्ति मिलती है और सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इस दिन माता को मालपुए का भोग लगाएं। चौथे दिन देवी कुष्मांडा को 4 नाशपाती का भोग लगाया जाता है।

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17 अप्रैल नवरात्र (Chaitra Navratri 2021) के पांचवे दिन देवी स्कंदमाता की की गई पूजा से भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति होती है। नवरात्र के पांचवे दिन देवी को लगाएं केले का भोग या फिर इसे प्रसाद के रूप में दान करें। इस दिन बुद्धि में वृद्धि के लिए माता को मंत्रों के साथ छह इलायची भी चढ़ाएं। फल में देवी स्कंदमाता को अंगूर के 5 गुच्छे चढ़ाएं।

18 अप्रैल नवरात्र (Chaitra Navratri 2021) के छ्ठे दिन देवी कात्यायनी की आराधना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। शहद का भोग लगाकर मां कात्यायनी को प्रसन्न किया जाता है। कात्यायनी माता को फल में 6 अमरूद भी अर्पित कर उन्हें प्रसन्न करें।

19 अप्रैल नवरात्र (Chaitra Navratri 2021) के सांतवे दिन कालरात्रि की पूजा  की जाती है। भूत-प्रेतों से मुक्ति दिलवाने वाली देवी कालरात्रि की उपासना करने से सभी दुख दूर होते हैं। माता को लगाएं गुड़ के नैवेद्य का भोग। नवरात्र के सांतवे दिन 7 चीकू का प्रसाद लगाएं।

20 अप्रैल नवरात्र (Chaitra Navratri 2021) के आंठवें दिन महागौरी के स्वरूप का वंदन किया जाता है। इस दिन देवी को नारियल प्रसाद चढ़ाने से घर में सुख-समृद्धि आती है। महागौरी की पूजा करने के बाद पूरी, हलवा और चना कन्याओं को खिलाना शुभ माना जाता है। महागौरी को फल में शरीफा का प्रसाद चढ़ाएं। इनकी पूजा से संतान संबंधी परेशानियों से छुटकारा मिलता है।

21 अप्रैल नवरात्र (Chaitra Navratri 2020) के आखिरी दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री को जगत को संचालित करने वाली देवी कहा जाता है। इस दिन माता को हलवा, पूरी, चना, खीर, पुए आदि का भोग लगाएं। नवरात्र के आखिरी दिन मां सिद्धिदात्री को 9 संतरे का प्रसाद लगाना शुभ माना जाता है।

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Gupt Navratri – गुप्त नवरात्र 2021 https://astrodeeva.com/gupt-navratri-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-2021/ https://astrodeeva.com/gupt-navratri-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-2021/#comments Sun, 07 Feb 2021 05:20:17 +0000 https://astrodeeva.com/?p=1691 हिन्दू धर्म में नवरात्र का अत्यधिक महत्व है। इन नौ दिनो में भक्त मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना करते हैं। देवी भागवत में चार प्रकार के नवरात्रि का उल्लेख है। शरद नवरात्रि(Sharadiya Navratri), चैत्र नवरात्रि(Chaitra Navratri),माघ नवरात्रि(Magh Gupt Navratri) और आषाढ़ (Ashadh Gupt Navratri)। शारदीय और चैत्र नवरात्रि को हर कोई व्यापक रूप […]

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हिन्दू धर्म में नवरात्र का अत्यधिक महत्व है। इन नौ दिनो में भक्त मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना करते हैं। देवी भागवत में चार प्रकार के नवरात्रि का उल्लेख है। शरद नवरात्रि(Sharadiya Navratri), चैत्र नवरात्रि(Chaitra Navratri),माघ नवरात्रि(Magh Gupt Navratri) और आषाढ़ (Ashadh Gupt Navratri)। शारदीय और चैत्र नवरात्रि को हर कोई व्यापक रूप से मनाता है जबकि माघ नवरात्रि और आषाढ़ नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि के रूप में जाना जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, माघ गुप्त नवरात्रि जनवरी-फरवरी महीने में मनाई जाती है। जबकि आषाढ़ गुप्त नवरात्र जून-जुलाई के महीने में आते हैं। माघ नवरात्री उत्तरी भारत में अधिक प्रसिद्ध है जबकि आषाढ़ नवरात्रि मुख्य रूप से दक्षिणी भारत में लोकप्रिय है।

मस्तक पर तिलक का दिन ओर रंग का असर

जैसे नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि के दौरान गुप्त अनुष्ठान किए जाते हैं। गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्त्व रखती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा को जितना गुप्त रखा जाता है, उतना ही ज्यादा फल प्राप्त होता है।

गुप्त नवरात्रि के दौरान पूजे जाने वाली मां दुर्गा के विभिन्न रूप हैं-

  • माँ कालिके
  • तारा देवी
  • त्रिपुर सुंदरी
  • भुवनेश्वरी
  • माता चित्रमस्ता
  • त्रिपुर भैरवी
  • माँ धूम्रवती
  • माता बगलामुखी
  • मातंगी
  • कमला देवी

गुप्त नवरात्रि पूजा विधि (Gupt Navratri Puja Vidhi)

गुप्त नवरात्रि के दौरान पूजा की सबसे प्रसिद्ध विधि तांत्रिक विद्या है जिसमें धन, बुद्धि और समृद्धि प्राप्त करने के लिए देवी दुर्गा की आराधना शामिल है। ऐसा माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा को शक्तिशाली मंत्र और गुप्त तंत्र विद्या व तांत्रिक साधनाओं के रूप में गुप्त पूजा की पेशकश की जाती है, जो भक्तों को सभी इच्छाओं और आशाओं को पूरा करने के लिए विशेष शक्तियां प्राप्त करने में मदद करती हैं। गुप्त नवरात्रि के दौरान तांत्रिक और अघोरी मां दुर्गा की आधी रात में पूजा करते हैं।

  • सर्वप्रथम मां दुर्गा की प्रतिमा या मूर्ति स्थापित की जाती है।
  • इसके उपरांत मां को लाल रंग का सिंदूर और सुनहरे गोटे वाली चुनरी अर्पित की जाती है।
  • इसके बाद मां के चरणों में पानी वाला नारियल, केले, सेब, खील, बताशे और श्रृंगार का सामान अर्पित किया जाता है।
  • मां दुर्गा को लाल पुष्प चढ़ाना शुभ माना जाता है।
  • सरसों के तेल से दीपक जलाकर ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ मंत्र का जाप करना चाहिए।

गुप्त नवरात्रि 2021 तिथि (Gupt Navratri 2021)

नवरात्रि प्रारम्भ – 12 फरवरी 2021 दिन शुक्रवार

नवरात्रि समाप्त – 21 फरवरी 2021 दिन रविवार

घटस्थापना मुहूर्त – सुबह 08:34 ए एम से 09:59 ए एम तक।

(अवधि – 01 घण्टा 25 मिनट्स)

घटस्थापना अभिजित मुहूर्त – दोपहर 12:13 पी एम से 12:58 पी एम तक ।

(अवधि – 44 मिनट्स)

Also Read: Varshik Rashifal 2021 in Hindi

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माँ दुर्गा के नौ रूप-Navaratri https://astrodeeva.com/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%8c-%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%aa-navaratri/ https://astrodeeva.com/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%8c-%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%aa-navaratri/#respond Tue, 15 Dec 2020 04:00:50 +0000 https://astrodeeva.com/?p=1499 The post माँ दुर्गा के नौ रूप-Navaratri appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.

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