if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) {
/**
* Gets views count.
*
* @param int $id The Post ID.
* @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7])
* @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999)
* @return string
*/
function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) {
$attr = array(
'id' => $id,
'range' => $range,
'number_format' => $number_format,
);
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) );
$views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $views ) {
$views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format );
wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' );
}
return $views;
}
}
if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) {
/**
* Do Query
*
* @param $instance
* @return array
*/
function jnews_view_counter_query( $instance ) {
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) );
$query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $query ) {
$query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance );
wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' );
}
return $query;
}
}
The post Pradosh Vrat 2021: तिथियाँ appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>जिस दिन त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल के समय व्याप्त होती है उसी दिन प्रदोष का व्रत किया जाता है। प्रदोष काल सूर्यास्त से प्रारम्भ हो जाता है। जब त्रयोदशी तिथि और प्रदोष साथ-साथ होते हैं वह समय शिव भक्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है।
जानते हैं वर्ष 2021 में जनवरी से दिसंबर के बीच किन-किन तिथियों में प्रदोष व्रत पड़ेगा।(Pradosh Vrat Dates in 2021)
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2021 प्रदोष के दिन Pradosh Vrat Dates in 2021 |
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तिथि |
प्रदोष काल समय |
योदशी तिथि |
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10 जनवरी 2021, रविवार प्रदोष व्रत 05:42 पी एम से 08:25 पी एम |
02 घण्टे 43 मिनट्स
|
पौष, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 04:52 पी एम, 10 जनवरी 2021 समाप्त – 02:32 पी एम, 11 जनवरी 2021 |
|
26 जनवरी 2021, मंगलवार भौम प्रदोष व्रत 05:56 पी एम से 08:35 पी एम |
02 घण्टे 39 मिनट्स
|
पौष, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ – 12:24 ए एम, 26 जनवरी 2021 समाप्त – 01:11 ए एम, 27 जनवरी 2021 |
|
9 फरवरी 2021, मंगलवार भौम प्रदोष व्रत 06:07 पी एम से 08:42 पी एम |
02 घण्टे 35 मिनट्स
|
माघ, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 03:19 ए एम, 9 फरवरी 2021 समाप्त – 02:05 ए एम, 10 फरवरी 2021 |
| 24 फरवरी 2021, बुधवार
प्रदोष व्रत 06:18 पी एम से 08:48 पी एम |
02 घण्टे 31 मिनट्स
|
माघ, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ – 06:05 पी एम, 24 फरवरी 2021 समाप्त – 05:18 पी एम, 25 फरवरी 2021 |
|
10 मार्च 2021, बुधवार प्रदोष व्रत 06:27 पी एम से 08:52 पी एम |
02 घण्टे 26 मिनट्स
|
फाल्गुन, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 02:40 पी एम, 10 मार्च 2021 समाप्त – 02:39 पी एम, 11 मार्च 2021 |
|
26 मार्च 2021, शुक्रवार प्रदोष व्रत 06:36 पी एम से 08:56 पी एम |
02 घण्टे 20 मिनट्स
|
फाल्गुन, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ – 08:21 ए एम, 26 मार्च 2021 समाप्त – 06:11 ए एम, 27 मार्च 2021 |
|
9 अप्रैल 2021, शुक्रवार प्रदोष व्रत 06:43 पी एम से 08:59 पी एम |
02 घण्टे 16 मिनट्स
|
चैत्र, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 03:15 ए एम, 9 अप्रैल 2021 समाप्त – 04:27 ए एम, 10 अप्रैल 2021 |
|
24 अप्रैल 2021, शनिवार शनि प्रदोष व्रत 07:17 पी एम से 09:03 पी एम |
01 घण्टा 46 मिनट्स
|
चैत्र, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ – 07:17 पी एम, 24 अप्रैल 2021 समाप्त – 04:12 पी एम, 25 अप्रैल 2021 |
|
8 मई 2021, शनिवार शनि प्रदोष व्रत 07:01 पी एम से 09:07 पी एम |
02 घण्टे 07 मिनट्स
|
वैशाख, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 05:20 पी एम, 8 मई 2021 समाप्त – 07:30 पी एम ,9 मई 2021 |
|
24 मई 2021, सोमवार सोम प्रदोष व्रत 07:10 पी एम से 09:13 पी एम |
02 घण्टे 03 मिनट्स
|
वैशाख, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ – 03:38 ए एम, 24 मई 2021 समाप्त – 12:11 ए एम, 25 मई 2021 |
|
7 जून 2021, सोमवार सोम प्रदोष व्रत 07:17 पी एम से 09:18 पी एम |
02 घण्टे 01 मिनट
|
ज्येष्ठ, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 08:48 ए एम, 7 जून 2021 समाप्त – 11:24 ए एम, 8 जून 2021 |
|
22 जून 2021, मंगलवार भौम प्रदोष व्रत 07:22 पी एम से 09:23 पी एम |
02 घण्टे 00 मिनट्स
|
ज्येष्ठ, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ – 10:22 ए एम, 22 जून 2021 समाप्त – 06:59 ए एम, 23 जून 2021 |
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7 जुलाई 2021, बुधवार प्रदोष व्रत 07:23 पी एम से 09:24 पी एम |
02 घण्टे 01 मिनट
|
आषाढ़, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 01:02 ए एम, 7 जुलाई 2021 समाप्त – 03:20 ए एम, 8 जुलाई 2021 |
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21 जुलाई 2021, बुधवार प्रदोष व्रत 07:18 पी एम से 09:22 पी एम |
02 घण्टे 04 मिनट्स
|
आषाढ़, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ – 04:26 पी एम, 21 जुलाई 2021 समाप्त – 01:32 पी एम, 22 जुलाई 2021 |
|
5 अगस्त 2021, बृहस्पतिवार प्रदोष व्रत 07:09 पी एम से 09:16 पी एम |
02 घण्टे 07 मिनट्स
|
श्रावण, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 05:09 पी एम, 5 अगस्त 2021 समाप्त – 06:28 पी एम, 5 अगस्त 2021 |
|
20 अगस्त 2021, शुक्रवार प्रदोष व्रत 06:56 पी एम से 08:50 पी एम |
01 घण्टा 54 मिनट्स
|
श्रावण, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ – 10:54 पी एम, 19 अगस्त 2021 समाप्त – 08:50 पी एम, 20 अगस्त 2021 |
|
4 सितम्बर 2021, शनिवार शनि प्रदोष व्रत 06:39 पी एम से 08:56 पी एम |
02 घण्टे 16 मिनट्स
|
भाद्रपद, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 08:24 ए एम, 4 सितम्बर 2021 समाप्त – 08:21 ए एम, 5 सितम्बर 2021 |
|
18 सितम्बर 2021, शनिवार शनि प्रदोष व्रत 06:23 पी एम से 08:44 पी एम |
02 घण्टे 21 मिनट्स
|
भाद्रपद, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ – 06:54 ए एम, 18 सितम्बर 2021 समाप्त – 05:59 ए एम, 19 सितम्बर 2021 |
|
4 अक्टूबर 2021, सोमवार सोम प्रदोष व्रत 06:04 पी एम से 08:30 पी एम |
02 घण्टे 27 मिनट्स
|
आश्विन, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 10:29 पी एम, 3 अक्टूबर 2021 समाप्त – 09:05 पी एम, 4 अक्टूबर 2021 |
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17 अक्टूबर 2021, रविवार प्रदोष व्रत 05:49 पी एम से 08:20 पी एम |
02 घण्टे 31 मिनट्स
|
आश्विन, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ – 05:39 पी एम, 17 अक्टूबर 2021 समाप्त – 06:07 पी एम, 18 अक्टूबर 2021 |
|
2 नवम्बर 2021, मंगलवार भौम प्रदोष व्रत 05:35 पी एम से 08:11 पी एम |
02 घण्टे 36 मिनट्स
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कार्तिक, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 11:31 ए एम, 2 नवम्बर 2021 समाप्त – 09:02 ए एम, 3 नवम्बर 2021 |
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16 नवम्बर 2021, मंगलवार भौम प्रदोष व्रत 05:27 पी एम से 08:07 पी एम |
02 घण्टे 40 मिनट्स
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कार्तिक, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ – 08:01 ए एम, 16 नवम्बर 2021 समाप्त – 09:50 ए एम, 17 नवम्बर 2021 |
|
02 दिसम्बर 2021, बृहस्पतिवार प्रदोष व्रत 05:24 पी एम से 08:07 पी एम |
02 घण्टे 43 मिनट्स
|
मार्गशीर्ष, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 11:35 पी एम, 01 दिसम्बर 2021 समाप्त – 08:26 पी एम, 02 दिसम्बर 2021 |
|
16 दिसम्बर 2021, बृहस्पतिवार प्रदोष व्रत 05:27 पी एम से 08:11 पी एम |
02 घण्टे 44 मिनट्स
|
मार्गशीर्ष, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ – 02:01 ए एम, 16 दिसम्बर 2021 समाप्त – 04:40 ए एम, 17 दिसम्बर 2021 |
|
31 दिसम्बर 2021, शुक्रवार प्रदोष व्रत 05:35 पी एम से 08:19 पी एम |
02 घण्टे 44 मिनट्स
|
पौष, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 10:39 ए एम, 31 दिसम्बर 2021 समाप्त – 07:17 ए एम, 01 जनवरी 2022 |
Also Read:
प्रदोष व्रत के नाम, उनका महत्व व कथा
स्कंद पुराण के अनुसार यहाँ है भगवान शिव की आरामगाह
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]]>जिस दिन त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल के समय व्याप्त होती है उसी दिन प्रदोष का व्रत किया जाता है। प्रदोष काल सूर्यास्त से प्रारम्भ हो जाता है। जब त्रयोदशी तिथि और प्रदोष साथ-साथ होते हैं वह समय शिव भक्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है।
मास – पौष
तिथि – कृष्ण त्रयोदशी
प्रारम्भ – 10 जनवरी 2021 04:52 पी एम
समाप्त – 11 जनवरी 2021 02:32 पी एम
प्रदोष काल – 10 जनवरी 2021 05:42 पी एम से 08:25 पी एम
प्रदोष व्रत में भगवान शिव का रुद्राभिषेक और उनका श्रृंगार करने का बहुत ही महत्व है। प्रदोष वाले दिन महादेव की पूजा अर्चना से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। विवाह में आ रही अड़चनें दूर होती है। संतान की इच्छा रखने वाले लोगों को इस दिन पंचगव्य से महादेव का अभिषेक करना चाहिए। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्ति और कारोबार मे सफलता की कामना हो उन्हें दूध से अभिषेक करने के बाद शिवलिंग पर फूलों की माला अर्पित करनी चाहिए। इस पूजा से उन्हें प्रत्येक काम में सफलता प्राप्त होगी।
सप्ताह के अलग-अलग दिन त्रयोदशी तिथि होने पर प्रदोष व्रत का नाम और फल भी भिन्न-भिन्न होता है।
रवि प्रदोष : त्रयोदशी तिथि अगर रविवार को हो उस दिन किए जाने वाले प्रदोष व्रत को रवि प्रदोष कहते हैं। इस प्रदोष व्रत को करने से भक्त के रोगों का नाश होता है और वो दीर्घायु होता है।
सोम प्रदोष या सौम्य प्रदोषम : त्रयोदशी तिथि अगर सोमवार को हो तो उस दिन किए जाने वाले प्रदोष व्रत को सोम प्रदोष या सौम्य प्रदोषम के नाम से जाना जाता है। सोमवार दिन शिव जी को समर्पित होने के कारण इस दिन व्रत करने से जातक की सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण होती हैं।
भौम प्रदोष: त्रयोदशी तिथि अगर मंगलवार को हो तो उस दिन किए जाने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष के नाम से जाना जाता है। उस व्रत को करने से जातक को शारीरिक और मानसिक बल प्राप्त होता है।
बुध प्रदोष: त्रयोदशी तिथि अगर बुधवार को हो तो उस दिन किए जाने वाले प्रदोष व्रत को बुध प्रदोष या बुध प्रदोषम कहते हैं। इस व्रत को करने से जातक की सभी इच्छायें पूर्ण होती है।
गुरु प्रदोष: त्रयोदशी तिथि अगर गुरुवार यानी बृहस्पतिवार को हो तो उस दिन किए जाने वाले प्रदोष व्रत को गुरु प्रदोष कहते हैं। इस व्रत को करने से जातक के शत्रुओं का नाश होता है और वो उन पर विजय प्राप्त करता है।
शुक्र प्रदोष: त्रयोदशी तिथि अगर शुक्रवार को हो तो उस दिन किए जाने वाले प्रदोष व्रत को शुक्र प्रदोष के नाम से जाना जाता है। इस व्रत को करने से जातक के सौभाग्य में व्रद्धि होती है और उसे धन-संपदा को प्राप्ति होती है।
शनि प्रदोष: त्रयोदशी तिथि अगर शनिवार को हो तो उस दिन किए जाने वाले प्रदोष व्रत को शनि प्रदोष कहते हैं। इस व्रत को करने से संतान की अभिलाषा रखने वाले जातक को संतान की प्राप्ति होती है।
The post Pradosh Vrat 2021: आज है साल का पहला प्रदोष व्रत appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
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