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/**
* Gets views count.
*
* @param int $id The Post ID.
* @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7])
* @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999)
* @return string
*/
function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) {
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'range' => $range,
'number_format' => $number_format,
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if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) {
/**
* Do Query
*
* @param $instance
* @return array
*/
function jnews_view_counter_query( $instance ) {
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) );
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The post Pradosh Vrat 2021: तिथियाँ appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>जिस दिन त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल के समय व्याप्त होती है उसी दिन प्रदोष का व्रत किया जाता है। प्रदोष काल सूर्यास्त से प्रारम्भ हो जाता है। जब त्रयोदशी तिथि और प्रदोष साथ-साथ होते हैं वह समय शिव भक्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है।
जानते हैं वर्ष 2021 में जनवरी से दिसंबर के बीच किन-किन तिथियों में प्रदोष व्रत पड़ेगा।(Pradosh Vrat Dates in 2021)
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2021 प्रदोष के दिन Pradosh Vrat Dates in 2021 |
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तिथि |
प्रदोष काल समय |
योदशी तिथि |
|
10 जनवरी 2021, रविवार प्रदोष व्रत 05:42 पी एम से 08:25 पी एम |
02 घण्टे 43 मिनट्स
|
पौष, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 04:52 पी एम, 10 जनवरी 2021 समाप्त – 02:32 पी एम, 11 जनवरी 2021 |
|
26 जनवरी 2021, मंगलवार भौम प्रदोष व्रत 05:56 पी एम से 08:35 पी एम |
02 घण्टे 39 मिनट्स
|
पौष, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ – 12:24 ए एम, 26 जनवरी 2021 समाप्त – 01:11 ए एम, 27 जनवरी 2021 |
|
9 फरवरी 2021, मंगलवार भौम प्रदोष व्रत 06:07 पी एम से 08:42 पी एम |
02 घण्टे 35 मिनट्स
|
माघ, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 03:19 ए एम, 9 फरवरी 2021 समाप्त – 02:05 ए एम, 10 फरवरी 2021 |
| 24 फरवरी 2021, बुधवार
प्रदोष व्रत 06:18 पी एम से 08:48 पी एम |
02 घण्टे 31 मिनट्स
|
माघ, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ – 06:05 पी एम, 24 फरवरी 2021 समाप्त – 05:18 पी एम, 25 फरवरी 2021 |
|
10 मार्च 2021, बुधवार प्रदोष व्रत 06:27 पी एम से 08:52 पी एम |
02 घण्टे 26 मिनट्स
|
फाल्गुन, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 02:40 पी एम, 10 मार्च 2021 समाप्त – 02:39 पी एम, 11 मार्च 2021 |
|
26 मार्च 2021, शुक्रवार प्रदोष व्रत 06:36 पी एम से 08:56 पी एम |
02 घण्टे 20 मिनट्स
|
फाल्गुन, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ – 08:21 ए एम, 26 मार्च 2021 समाप्त – 06:11 ए एम, 27 मार्च 2021 |
|
9 अप्रैल 2021, शुक्रवार प्रदोष व्रत 06:43 पी एम से 08:59 पी एम |
02 घण्टे 16 मिनट्स
|
चैत्र, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 03:15 ए एम, 9 अप्रैल 2021 समाप्त – 04:27 ए एम, 10 अप्रैल 2021 |
|
24 अप्रैल 2021, शनिवार शनि प्रदोष व्रत 07:17 पी एम से 09:03 पी एम |
01 घण्टा 46 मिनट्स
|
चैत्र, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ – 07:17 पी एम, 24 अप्रैल 2021 समाप्त – 04:12 पी एम, 25 अप्रैल 2021 |
|
8 मई 2021, शनिवार शनि प्रदोष व्रत 07:01 पी एम से 09:07 पी एम |
02 घण्टे 07 मिनट्स
|
वैशाख, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 05:20 पी एम, 8 मई 2021 समाप्त – 07:30 पी एम ,9 मई 2021 |
|
24 मई 2021, सोमवार सोम प्रदोष व्रत 07:10 पी एम से 09:13 पी एम |
02 घण्टे 03 मिनट्स
|
वैशाख, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ – 03:38 ए एम, 24 मई 2021 समाप्त – 12:11 ए एम, 25 मई 2021 |
|
7 जून 2021, सोमवार सोम प्रदोष व्रत 07:17 पी एम से 09:18 पी एम |
02 घण्टे 01 मिनट
|
ज्येष्ठ, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 08:48 ए एम, 7 जून 2021 समाप्त – 11:24 ए एम, 8 जून 2021 |
|
22 जून 2021, मंगलवार भौम प्रदोष व्रत 07:22 पी एम से 09:23 पी एम |
02 घण्टे 00 मिनट्स
|
ज्येष्ठ, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ – 10:22 ए एम, 22 जून 2021 समाप्त – 06:59 ए एम, 23 जून 2021 |
|
7 जुलाई 2021, बुधवार प्रदोष व्रत 07:23 पी एम से 09:24 पी एम |
02 घण्टे 01 मिनट
|
आषाढ़, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 01:02 ए एम, 7 जुलाई 2021 समाप्त – 03:20 ए एम, 8 जुलाई 2021 |
|
21 जुलाई 2021, बुधवार प्रदोष व्रत 07:18 पी एम से 09:22 पी एम |
02 घण्टे 04 मिनट्स
|
आषाढ़, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ – 04:26 पी एम, 21 जुलाई 2021 समाप्त – 01:32 पी एम, 22 जुलाई 2021 |
|
5 अगस्त 2021, बृहस्पतिवार प्रदोष व्रत 07:09 पी एम से 09:16 पी एम |
02 घण्टे 07 मिनट्स
|
श्रावण, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 05:09 पी एम, 5 अगस्त 2021 समाप्त – 06:28 पी एम, 5 अगस्त 2021 |
|
20 अगस्त 2021, शुक्रवार प्रदोष व्रत 06:56 पी एम से 08:50 पी एम |
01 घण्टा 54 मिनट्स
|
श्रावण, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ – 10:54 पी एम, 19 अगस्त 2021 समाप्त – 08:50 पी एम, 20 अगस्त 2021 |
|
4 सितम्बर 2021, शनिवार शनि प्रदोष व्रत 06:39 पी एम से 08:56 पी एम |
02 घण्टे 16 मिनट्स
|
भाद्रपद, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 08:24 ए एम, 4 सितम्बर 2021 समाप्त – 08:21 ए एम, 5 सितम्बर 2021 |
|
18 सितम्बर 2021, शनिवार शनि प्रदोष व्रत 06:23 पी एम से 08:44 पी एम |
02 घण्टे 21 मिनट्स
|
भाद्रपद, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ – 06:54 ए एम, 18 सितम्बर 2021 समाप्त – 05:59 ए एम, 19 सितम्बर 2021 |
|
4 अक्टूबर 2021, सोमवार सोम प्रदोष व्रत 06:04 पी एम से 08:30 पी एम |
02 घण्टे 27 मिनट्स
|
आश्विन, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 10:29 पी एम, 3 अक्टूबर 2021 समाप्त – 09:05 पी एम, 4 अक्टूबर 2021 |
|
17 अक्टूबर 2021, रविवार प्रदोष व्रत 05:49 पी एम से 08:20 पी एम |
02 घण्टे 31 मिनट्स
|
आश्विन, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ – 05:39 पी एम, 17 अक्टूबर 2021 समाप्त – 06:07 पी एम, 18 अक्टूबर 2021 |
|
2 नवम्बर 2021, मंगलवार भौम प्रदोष व्रत 05:35 पी एम से 08:11 पी एम |
02 घण्टे 36 मिनट्स
|
कार्तिक, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 11:31 ए एम, 2 नवम्बर 2021 समाप्त – 09:02 ए एम, 3 नवम्बर 2021 |
|
16 नवम्बर 2021, मंगलवार भौम प्रदोष व्रत 05:27 पी एम से 08:07 पी एम |
02 घण्टे 40 मिनट्स
|
कार्तिक, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ – 08:01 ए एम, 16 नवम्बर 2021 समाप्त – 09:50 ए एम, 17 नवम्बर 2021 |
|
02 दिसम्बर 2021, बृहस्पतिवार प्रदोष व्रत 05:24 पी एम से 08:07 पी एम |
02 घण्टे 43 मिनट्स
|
मार्गशीर्ष, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 11:35 पी एम, 01 दिसम्बर 2021 समाप्त – 08:26 पी एम, 02 दिसम्बर 2021 |
|
16 दिसम्बर 2021, बृहस्पतिवार प्रदोष व्रत 05:27 पी एम से 08:11 पी एम |
02 घण्टे 44 मिनट्स
|
मार्गशीर्ष, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ – 02:01 ए एम, 16 दिसम्बर 2021 समाप्त – 04:40 ए एम, 17 दिसम्बर 2021 |
|
31 दिसम्बर 2021, शुक्रवार प्रदोष व्रत 05:35 पी एम से 08:19 पी एम |
02 घण्टे 44 मिनट्स
|
पौष, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ – 10:39 ए एम, 31 दिसम्बर 2021 समाप्त – 07:17 ए एम, 01 जनवरी 2022 |
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प्रदोष व्रत के नाम, उनका महत्व व कथा
स्कंद पुराण के अनुसार यहाँ है भगवान शिव की आरामगाह
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]]>The post Pradosh Vrat: प्रदोष व्रत भगवान भोलेनाथ की कृपा को प्राप्त करने के लिए सबसे उत्तम व्रत appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>सप्ताह के अलग-अलग दिन त्रयोदशी तिथि होने पर प्रदोष व्रत का नाम और फल भी भिन्न-भिन्न होता है।
रवि प्रदोष : त्रयोदशी तिथि अगर रविवार को हो उस दिन किए जाने वाले प्रदोष व्रत को रवि प्रदोष कहते हैं। इस प्रदोष व्रत को करने से भक्त के रोगों का नाश होता है और वो दीर्घायु होता है।
सोम प्रदोष या सौम्य प्रदोषम : त्रयोदशी तिथि अगर सोमवार को हो तो उस दिन किए जाने वाले प्रदोष व्रत को सोम प्रदोष या सौम्य प्रदोषम के नाम से जाना जाता है। सोमवार दिन शिव जी को समर्पित होने के कारण इस दिन व्रत करने से जातक की सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण होती हैं।
भौम प्रदोष: त्रयोदशी तिथि अगर मंगलवार को हो तो उस दिन किए जाने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष के नाम से जाना जाता है। उस व्रत को करने से जातक को शारीरिक और मानसिक बल प्राप्त होता है।
बुध प्रदोष: त्रयोदशी तिथि अगर बुधवार को हो तो उस दिन किए जाने वाले प्रदोष व्रत को बुध प्रदोष या बुध प्रदोषम कहते हैं। इस व्रत को करने से जातक की सभी इच्छायें पूर्ण होती है।
गुरु प्रदोष: त्रयोदशी तिथि अगर गुरुवार यानी बृहस्पतिवार को हो तो उस दिन किए जाने वाले प्रदोष व्रत को गुरु प्रदोष कहते हैं। इस व्रत को करने से जातक के शत्रुओं का नाश होता है और वो उन पर विजय प्राप्त करता है।
शुक्र प्रदोष: त्रयोदशी तिथि अगर शुक्रवार को हो तो उस दिन किए जाने वाले प्रदोष व्रत को शुक्र प्रदोष के नाम से जाना जाता है। इस व्रत को करने से जातक के सौभाग्य में व्रद्धि होती है और उसे धन-संपदा को प्राप्ति होती है।
शनि प्रदोष: त्रयोदशी तिथि अगर शनिवार को हो तो उस दिन किए जाने वाले प्रदोष व्रत को शनि प्रदोष कहते हैं। इस व्रत को करने से संतान की अभिलाषा रखने वाले जातक को संतान की प्राप्ति होती है।
प्रदोष व्रत में भगवान शिव का रुद्राभिषेक और उनका श्रृंगार करने का बहुत ही महत्व है। प्रदोष वाले दिन महादेव की पूजा अर्चना से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। विवाह में आ रही अड़चनें दूर होती है। संतान की इच्छा रखने वाले लोगों को इस दिन पंचगव्य से महादेव का अभिषेक करना चाहिए। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्ति और कारोबार मे सफलता की कामना हो उन्हें दूध से अभिषेक करने के बाद शिवलिंग पर फूलों की माला अर्पित करनी चाहिए। इस पूजा से उन्हें प्रत्येक काम में सफलता प्राप्त होगी।
पौराणिक कथा के अनुसार एक नगर में एक ब्राह्मणी रहती थी। उसके पति का स्वर्गवास हो गया था। उसका अब कोई आश्रयदाता नहीं था इसलिए प्रात: होते ही वह अपने पुत्र के साथ भीख मांगने निकल पड़ती थी। भिक्षाटन से ही वह स्वयं व पुत्र का पेट पालती थी।
एक दिन ब्राह्मणी घर लौट रही थी तो उसे एक लड़का घायल अवस्था में कराहता हुआ मिला। ब्राह्मणी दयावश उसे अपने घर ले आई। वह लड़का विदर्भ का राजकुमार था। शत्रु सैनिकों ने उसके राज्य पर आक्रमण कर उसके पिता को बंदी बना लिया था और राज्य पर नियंत्रण कर लिया था इसलिए वह मारा-मारा फिर रहा था। राजकुमार ब्राह्मण-पुत्र के साथ ब्राह्मणी के घर रहने लगा।
एक दिन अंशुमति नामक एक गंधर्व कन्या ने राजकुमार को देखा तो वह उस पर मोहित हो गई। अगले दिन अंशुमति अपने माता-पिता को राजकुमार से मिलाने लाई। उन्हें भी राजकुमार भा गया। कुछ दिनों बाद अंशुमति के माता-पिता को शंकर भगवान ने स्वप्न में आदेश दिया कि राजकुमार और अंशुमति का विवाह कर दिया जाए उन्होंने वैसा ही किया।
ब्राह्मणी प्रदोष व्रत करती थी। उसके व्रत के प्रभाव और गंधर्वराज की सेना की सहायता से राजकुमार ने विदर्भ से शत्रुओं को खदेड़ दिया और पिता के राज्य को पुन: प्राप्त कर आनंदपूर्वक रहने लगा।
राजकुमार ने ब्राह्मण-पुत्र को अपना प्रधानमंत्री बनाया। ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत के महात्म्य से जैसे राजकुमार और ब्राह्मण-पुत्र के दिन फिरे, वैसे ही शंकर भगवान अपने दूसरे भक्तों के दिन भी फेरते हैं। अत: प्रदोष का व्रत करने वाले सभी भक्तों को यह कथा अवश्य पढ़नी अथवा सुननी चाहिए।
स्कन्द पुराण में प्रदोष व्रत करने की सही विधि का वर्णन किया गया है। आप दो प्रकार से इस व्रत कर सकते है।
व्रतधारी जातक शिव मंदिर जाकर या घर में भी पूजा कर सकता हैं। वो पांच रंगों से रंगोली बनाकर मंडप तैयार कर पूजन की सभी सामग्री एकत्रित करें। फिर कलश अथवा लोटे में शुद्ध जल भरकर रख लें।
इसके बाद कुश के आसन पर बैठकर शिवजी की पूजा विधि-विधान से करें और ॐ नम: शिवाय मंत्र का जाप करते हुए शिवजी का जलाभिषेक करें।
इसके बाद दोनों हाथ जोड़कर शिवजी का ध्यान करें। शिवजी का ध्यान करते समय उनसे भक्ति भाव से प्रार्थना करें-
“त्रिनेत्रधारी, मस्तक पर चंद्रमा का आभूषण धारण करने वाले पिंगल वर्ण के जटाजूटधारी, करोड़ों चंद्रमा के समान कांतिवान, नीले कंठ तथा अनेक रुद्राक्ष मालाओं से सुशोभित, रत्नजड़ित सिंहासन पर विराजमान, वरदहस्त, त्रिशूलधारी, नागों के कुंडल पहने, व्याघ्र चर्म धारण किए हुए भगवान शिव हमारे सारे कष्टों को दूर कर सुख-समृद्धि प्रदान करें।”
इस प्रकार ध्यानमग्न होकर प्रदोष व्रत की कथा सुनें अथवा सुनाएं।
कथा समाप्ति के बाद हवन सामग्री मिलाकर “ॐ ह्रीं क्लीं नम: शिवाय स्वाहा” मंत्र से 11 या 21 या 108 बार आहुति दें।
तत्पश्चात शिवजी की आरती करें तथा प्रसाद वितरित करके भोजन ग्रहण करें।
व्रत करने वाले व्यक्ति को कम-से-कम 11 अथवा 26 त्रयोदशी व्रत के बाद उद्यापन करना चाहिए।
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]]>The post Horoscope 30 August 2020: रवि प्रदोष व्रत , जाने आप का दैनिक़ राशिफल appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>प्रदोष व्रत भगवान शंकर को बहुत प्रिय है। यह हर माह में दो बार आता है एक शुक्ल पक्ष में और दूसरा कृष्ण पक्ष में। प्रदोष व्रत का नाम पड़ने वाले वार(दिन) से होता है और हर प्रदोष व्रत के अलग-अलग फल होते हैं।
इस बार प्रदोष व्रत आज रविवार को है, इसलिए इसका नाम रवि प्रदोष व्रत है और इस व्रत को कर के दीर्घायु और शांति प्राप्त कर सकते हैं।
आज का राशिफल
आज सर्वार्थ सिद्धि और त्रिपुष्कर योग के चलते दिन भरपूर सफलता देने वाला रहेगा |
मेष राशि : आज इस राशि के जातक अत्यधिक व्यस्त रहेंगे जिसके कारण घर पे समय नहीं दे पाएंगे। लेकिन अपने सभी महत्वपूर्ण काम आप समय से निपटा लेंगे | हर बात को आप सोच समझकर करने के निर्णय को लेकर दूसरों से अलग साबित होते है | कार्य क्षेत्र मे सहकर्मियों से कुछ परेशानीयां उत्पन्न हो सकती है | गुस्से पे नियंत्रण रखे |
शुभ अंक : 3
शुभ रंग : बादामी
वर्षभ राशि : आज के दिन कुछ लाभदायक यात्रा हो सकती है | आज भाग्य आपका साथ देगा इसलिए समय का भरपूर लाभ उठाये | आर्थिक लाभ प्राप्त हो सकता है | किसी भी प्रकार के लेंन –देंन से दूर रहे ,काम पे ध्यान केंद्रित करे | व्यवसाय मे कोई महत्वपूर्ण निर्णय ले सकते है ,जो की आगे चलकर फायेदेमंद हो सकता है |
शुभ अंक : 8
शुभ रंग : हरा
मिथुन राशि: आज का दिन उत्तम रहेगा | आज कुछ नई नीतियां बनाएंगे जो की आपके लिए फायेदेमंद साबित होंगे | कही किसी रूप मे निवेश करने की सोच रहे है तो ये आपके लिए लाभ दायक साबित होगा | व्यवसाय मे कुछ परिवर्तन कर सकते है जो की अभी नहीं पर आने वाले समय की मांग है और आपके लिए लाभदायक भी है |
शुभ अंक : 6
शुभ रंग : धानी
कर्क राशि : आज का दिन आपके लिए अच्छा रहेगा। पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरा करने में समय बिताएंगे। काम के सिलसिले में भी दिन अच्छा रहेगा। अपनी तरफ से पूरी मेहनत करेंगे और काम को सही समय पर पूरा करके देना आपको पसंद आएगा। इनकम बढ़ेगी। खर्चों में कमी आएगी। सेहत थोड़ी कमजोर हो सकती है। विरोधियों से परेशान होने की जरूरत नहीं | काम के सिलसिले में दिन ठीक-ठाक है लेकिन अपने आत्मसम्मान को अपना अभिमान ना बनने दें नहीं तो दिक्कत उठानी पड सकती है ।
शुभ अंक : 9
शुभ रंग : लाल
सिंह राशि : आपके लिए आज का दिन बहुत अच्छा रहेगा। व्यापार में सफलता मिलेगी। कामों में तेजी आएगी। गृहस्थ जीवन खुशनुमा रहेगा , धन संबंधी मामलों में कुछ सफलता मिल सकती है। इस हफ्ते व्यर्थ की उलझनों से अपने आप को दूर रखें। सेहत से जुड़ी समस्याओं में सुधार देखने को मिलेगा। छात्र वर्ग को यह सप्ताह कुछ दिक्कतें दे सकता है, लेकिन कार्य पूर्ण होंगे। आपका आत्मविश्वास बढ़ा-चढ़ा रहेगा, कार्यक्षेत्र में कोई शुभ समाचार मिल सकता है, नकारात्मकता से बचें |
शुभ अंक : 5
शुभ रंग : नारंगी
कन्या राशि : सभी कार्यों में सफलता मिलेगी। आपको आय के नए स्रोत मिल सकते हैं। सरकारी कार्यों से जुड़े जातकों के लिए दिन लाभ देने वाला रहेगा। पारिवारिक व वैवाहिक जीवन सामान्य बना रहेगा, क्रोध से बचें। कामकाज को लेकर कुछ आलस्य महसूस करेंगे। लोगों के साथ तालमेल बनाकर चलें |
शुभ अंक : 2
शुभ रंग : लाल
तुला राशि : आज कुछ लाभ देने वाले काम मिल सकते हैं। आपको अपनी सुख-सुविधाओं में कुछ कमी देखने को मिल सकती है। अपनी माता की सेहत का ध्यान रखें, घरेलू कार्यों पर आपका धन खर्च हो सकता है। छात्र वर्ग को आलस्य परेशान करेगा। संतान की सेहत चिंता दे सकती है। भाई और मित्रों से धन का लाभ मिल सकता है |
शुभ अंक : 1
शुभ रंग : गुलाबी
वृच्छिक राशि : आज मिश्रित फलों की प्राप्ति होगी। इस सप्ताह भाग्य का सहयोग आपको कई परेशानियों से बचाएगा। नौकरी कर रहे जातकों के लिए आने वाला समय कुछ अच्छे लाभ दे सकता है। आज किसी बात को लेकर मन में भ्रम बना रह सकता है और मांसपेशियों में दर्द व खिंचाव की तकलीफ हो सकती है। बातचीत के दौरान अपनी वाणी पर संयम बनाए रखें, माता की सेहत का ध्यान रखें |
शुभ अंक : 5
शुभ रंग : पीला
धनु राशि : धन का लाभ मिलेगा जो आपकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाएगा। कार्यक्षेत्र में मनमाफिक रूप से आपके कार्य संपन्न होंगे। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपका तालमेल अच्छा बना रहेगा और उनसे आपको लाभ भी मिलेगा। सेहत का ध्यान रखें, मौसमी बीमारी परेशान कर सकती हैं। किसी के लिए गलत बोलने से बचें |
शुभ अंक : 6
शुभ रंग : बेंगनी
मकर राशि : व्यापार के संदर्भ में शुभ समाचार प्राप्त हो सकते हैं। मकान-जमीन से जुड़ी किसी समस्या का हल इस हफ्ते मिल सकता है। बड़े भाई व मित्रों के साथ सकारात्मक रुख बनाकर रखें, संतान को लेकर कोई चिंता आपको परेशान कर सकती है। जीवनसाथी को किसी तरह का लाभ मिल सकता है। आज धन खर्च की अधिकता रहेगी, शारीरिक व मानसिक परेशानी हो सकती है |
शुभ अंक : 9
शुभ रंग : नीला
कुम्भ राशि : आज का दिन अच्छा है | किसी दोस्त से मिलने का मौका मिल सकता है। अपने कार्य को सिद्ध कर पाएंगे | सेहत में उतार-चढ़ाव बना रहेगा जिस पर आप को ध्यान देना जरूरी होगा, नहीं तो कोई बड़ी बीमारी आ सकती है। पारिवारिक जीवन खुशनुमा रहेगा। काम के सिलसिले में भी आपका खूब मन लगेगा जिससे आपकी इनकम बढ़ेगी |
शुभ अंक : 3
शुभ रंग : केसरिया
मीन राशि : आज का दिन अच्छा है। काम में सफलता मिलने से हर्ष होगा। हर काम में सफलता मिलेगी। आर्थिक लाभ प्राप्त होगा | पारिवारिक दायित्वों को निभाएंगे। कोई प्रॉपर्टी खरीदने का विचार मन में आ सकता है। गृहस्थ जीवन सामान्य रहेगा | मानसिक चिंता के कारण कुछ दिक्कतें होंगी। माताजी का स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। परिवार में तनाव बढ़ेगा |
शुभ अंक : 7
शुभ रंग : सफ़ेद
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