if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) {
/**
* Gets views count.
*
* @param int $id The Post ID.
* @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7])
* @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999)
* @return string
*/
function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) {
$attr = array(
'id' => $id,
'range' => $range,
'number_format' => $number_format,
);
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) );
$views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $views ) {
$views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format );
wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' );
}
return $views;
}
}
if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) {
/**
* Do Query
*
* @param $instance
* @return array
*/
function jnews_view_counter_query( $instance ) {
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) );
$query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $query ) {
$query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance );
wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' );
}
return $query;
}
}
The post Horoscope Today 11 November : रमा एकादशी , दैनिक राशिफल appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>दिनांक : नवम्बर 11, 2020
वार : बुधवार
एकादशी तिथि प्रारम्भ – नवम्बर 11, 2020 को 03:22 ए एम बजे
एकादशी तिथि समाप्त – नवम्बर 12, 2020 को 12:40 ए एम बजे
पारण( व्रत तोड़ने की) तिथि: नवम्बर 12, 2020
पारण ( व्रत तोड़ने का) समय: 06:42 ए एम से 08:51 ए एम
सफलता और आर्थिक लाभ का योग बन रहा है | आपको अपने पार्टनर से भी लाभ मिलेगा और जिन जातकों की शादी की बात चल रही है वो भी तय होने की संभावना है |आप परिवार के साथ कही घूमने का प्रोग्राम बना सकते है |आपको कार्य मै सफलता मिलेगी और मान सम्मान की भी प्राप्ति होगी |
आपके जीवन में तरक्की के नए आयाम बनेगे आपको आर्थिक लाभ मिलेगे |आपका व्यवहार दूसरों का मन जीत लेगा |वाणी की मधुरता से आप पराए लोगों को भी अपना बनाने का हुनर जानते है |कार्य स्थल पर आपको उपलब्धि प्राप्त होंगी |लेकिन जीवनसाथी और माँ के स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी चिंता सताएंगी |
कार्यक्षेत्र मे भी आपका प्रदर्शन अच्छा रहेगा और आने वाले समय में ये आपको फायदा देगा |पार्टनर के साथ समय अच्छा बीतेगा |जिनकी शादी नहीं हुई है उनको उपयुक्त जीवनसाथी मिलेगा |आपका ध्यान अध्यात्म की और बढ़ेगा जिससे आपको मानसिक शांति का अनुभव प्राप्त होगा |छात्रों के लिए उपयुक्त समय है अपनी प्रतियोगी परीक्षाओ की त्यारी का |
आपके खर्चों मे व्यय अधिक बडेगा | पारिवारिक माहौल बेहतर रहेगा व्यपारिक यात्राओ से लाभ होगा | इस समय आप कोइ नए व्यवसाय की शुरुआत कर सकते है |दाम्पत्य जीवन सुखमय बीतेगा | परिवर्तन के योग बन रहे है जो भी निर्णय ले सोच समझ कर ले |जल्दबाजी मै कोई निर्णय न ले |
इस राशि के जातकों को आर्थिक लाभ ,व्यापारिक लाभ और सभी कार्यों मै सफलता मिलेगी | पारिवारिक कार्यों मे सफलता मिलेगी इस दौरान आप बचत को लेकर काफी प्रेरित रहेंगे लेकिन आर्थिक तौर पे आप को कई परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है | आप इस समय काफी रोमांटिक मूड मे रहेंगे |अपने पार्टनर के साथ अच्छा समय बिताएंगे |पारिवारिक सहयोग भी मिलेगा |प्रेम संबंध और दाम्पत्य जीवन बेहतर रहेगा |
आप का कार्यक्षेत्र हो व्यपार आपके स्थानतरण होने की पूरी संभावना है या जगह बदलाब की पूरी संभावना है |आपको अपने कार्य क्षेत्र मे अधिक परिश्रम करना पढ़ेगा |आर्थिक लाभ की संभावना है लेकिन अधिक परिश्रम के बाद | पारिवारिक माहौल सोहार्द पूर्ण रहेगा |दाम्पत्य जीवन मे प्रेम बना रहेगा |
आप कर्म पे भरोसा करे न की सब कुछ छोड़कर भाग्य के भरोसे बैठ जाए |आपको कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी |तभी आपके सब काम पूर्ण होंगे अगर आपको कार्य मे सफलता चाहिए तो कमर कस लीजिए क्योंकि कड़ी मेहनत का समय आ गया है |पार्टनर के साथ संभनद मधुर रहेंगे |दाम्पत्य जीवन मै सोहार्द बना रहेगा |स्वास्थ्य बेहतर रहेगा |
दाम्पत्य जीवन परेशानी मै बढ़ सकती है |दाम्पत्य जीवन मे काफी उत्तार चढ़ाव देखने को मिलेगा |इस समय जीवन साथी के साथ वाद –विवाद मे न पढे| जीवन साथी के स्वास्थ्य की चिंता सताएगी |आर्थिक नुकसान भी उठाना पढ़ सकता है सतर्क रहे |
आपको जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा और दाम्पत्य जीवन मे भी खुशहाली बनी रहेगी |आपके मित्रों का भी विस्तार होगा लेकिन ज्यादा काम करने के चक्कर मे अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न बरते |आपके व्यपार और नॉकरी मे तरक्की के योग है |आपको मानसिक सुख और शारीरिक सुख दोनों प्राप्त होंगे |आर्थिक लाभ मिलने के योग है |
थोड़े समय के लिए तो कुछ चीजे आपको सुख दे सकती है लेकिन ये सब कुछ समय के लिए गलत काम थोड़े दिन के लिए तो सुख दे सकते है लेकिन ज्यादा समय इन सब चीजों से उम्मीद न करे आप इस समय मै बच्चों के भविष्य के लिए भी चिंतित हो सकते है और उनके साथ कोई वेचरिक मतभेद भी हो सकता है |शत्रु भी आप पर इस समय हावी होंगे |
कार्य क्षेत्र मे स्थानतरण होने या बदलाव के योग बन रहे है |कोई भी निर्णय सोच समझ कर ले |आपको आर्थिक लाभ प्राप्त होगा |छात्रों के लिए ये समय बहुत बेहतर साबित होगा |जो लोग अविवाहित है वो विवाह मे बंधेगे |काफी रोमांटिक मूड रहेगा इन दिनों |कही घूमने जा सकते है |परिवरिक स्थिति अच्छी बनी रहेगी |मित्रों से मेल जोल बढ़ेगा |
आज आपको कई प्रकार के लाभ मिलेंगे जेसे माता का सुख ,धन लाभ ,विदेश से कोई शुभ समाचार इस दौरान आप यात्रा न करे और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखे | आप बचत के उपर काफी ध्यान देंगे |मित्रों और परिवार का भरपूर सहयोग मिलेगा |व्यपार के कुछ नए प्रस्ताव मिलेंगे |दाम्पत्य जीवन सुखमय बना रहेगा।
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]]>The post रमा एकादशी व्रत – महत्व और कथा appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>दिनांक : नवम्बर 11, 2020
वार : बुधवार
एकादशी तिथि प्रारम्भ – नवम्बर 11, 2020 को 03:22 ए एम बजे
एकादशी तिथि समाप्त – नवम्बर 12, 2020 को 12:40 ए एम बजे
पारण( व्रत तोड़ने की) तिथि: नवम्बर 12, 2020
पारण ( व्रत तोड़ने का) समय: 06:42 ए एम से 08:51 ए एम
अर्जुन ने कहा- “हे श्रीकृष्ण! आप मुझे कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनाइए। इस एकादशी का क्या नाम है तथा इसमें किस देवता का पूजन किया जाता है? इस एकादशी का व्रत करने से किस फल की प्राप्ति होती है?कृपा करके सब विस्तारपूर्वक बतायें”
भगवान श्रीकृष्ण ने कहा- “हे अर्जुन! कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम रमा एकादशी है। इसका व्रत करने से सभी पापों का शमन होता है। इसकी कथा इस प्रकार है,
पौराणिक काल में मुचुकुंद नाम का राजा राज्य करता था। सभी देवता उसके मित्र थे। वह बड़ा सत्यवादी तथा विष्णुभक्त था। उसका राज्य बिल्कुल निष्कंटक था। उसकी चन्द्रभागा नाम की एक कन्या थी, जिसका विवाह उसने राजा चन्द्रसेन के पुत्र सोभन से कर दिया। वह राजा एकादशी का व्रत बड़े ही भक्ति भाव से नियमपूर्वक करता था और उसके राज्य में सभी इस नियम का पालन करते थे।
एक बार की बात है कि सोभन अपनी ससुराल आया हुआ था। वह कार्तिक का महीना था। उसी मास में महापुण्यदायिनी रमा एकादशी आ गई। इस दिन सभी व्रत रखते थे। चन्द्रभागा ने सोचा कि मेरे पति तो बड़े कमजोर हृदय के हैं, वे एकादशी का व्रत कैसे करेंगे, जबकि पिता के यहां तो सभी को व्रत करने की आज्ञा है। मेरा पति अगर राजाज्ञा मान कर उपवास करेंगे तो बहुत कष्ट होगा। चन्द्रभागा को जिस बात का डर था वही हुआ। राजा मुचुकुंद ने आदेश जारी किया कि इस समय उनका दामाद राज्य में पधारा हुआ है, अतः सारी प्रजा विधानपूर्वक एकादशी का व्रत करे। उसे सुनकर सोभन अपनी पत्नी के पास गया और बोला – ‘हे प्रिय! तुम मुझे कुछ उपाय बतलाओ, क्योंकि मैं उपवास नहीं कर सकता, यदि मैं उपवास करूंगा तो अवश्य ही मर जाऊंगा।’
पति की बात सुन चन्द्रभागा ने कहा – ‘हे स्वामी! मेरे पिता के राज्य में एकादशी के दिन कोई भी भोजन नहीं कर सकता। यहां तक कि राज्य के पालतू जानवर हाथी, घोड़ा, ऊंट आदि भी अन्न, जल आदि ग्रहण नहीं करते, फिर भला मनुष्य कैसे भोजन कर सकते हैं? यदि आप उपवास नहीं कर सकते तो किसी दूसरे स्थान पर चले जाइए, क्योंकि यदि आप यहां रहेंगे तो आपको व्रत तो अवश्य ही करना पड़ेगा।’
पत्नी की बात सुन सोभन ने कहा – ‘हे प्रिय! तुम्हारी राय उचित है, परंतु मैं व्रत करने के डर से किसी दूसरे स्थान पर नहीं जाऊंगा, अब मैं व्रत अवश्य ही करूंगा, परिणाम चाहे कुछ भी और भाग्य के लिखे को भला कौन टाल सकता है।’
सभी के साथ सोभन ने भी एकादशी का व्रत किया और भूख और प्यास से अत्यंत व्याकुल होने लगा। सूर्य नारायण भी अस्त हो गए और जागरण के लिए रात्रि भी आ गई। वह रात सोभन को असहनीय दुख देने वाली थी। दूसरे दिन सूर्योदय होने से पूर्व ही भूख-प्यास के कारण सोभन के प्राण-पखेरू उड़ गए।
राजा ने सोभन के मृत शरीर को जल-प्रवाह करा दिया और अपनी पुत्री मायके में रहकर एकादशी का व्रत करने और भगवान विष्णु की कृपा पर भरोसा रखने को कहा। चन्द्रभागा अपने पिता की आज्ञानुसार अपने पिता के घर रहकर एकादशी के व्रत करने लगी।
उसके व्रत के प्रभाव से सोभन को जल से निकाल लिया गया और भगवान विष्णु की कृपा से उसे मंदराचल पर्वत पर धन-धान्य से परिपूर्ण तथा शत्रु रहित देवपुर नाम का एक उत्तम नगर प्राप्त हुआ। वह वहां का राजा बन गया। उन्हीं दिनों मुचुकुंद नगर में रहने वाला एक ब्राह्मण तीर्थयात्रा के लिए निकला हुआ था। घूमते-घूमते वह सोभन के राज्य में जा पहुंचा। राजा सोभन को देख ब्राह्मण को आश्चर्य हुआ और सोभन से कहा – ‘हे राजन! आपने तो रमा एकादशी के दिन अन्न-जल ग्रहण न करने के कारण प्राण त्याग दिए थे। मुझे बड़ा विस्मय हो रहा है कि ऐसा विचित्र और सुंदर नगर जिसको न तो मैंने कभी सुना और न कभी देखा है, आपको किस प्रकार प्राप्त हुआ?’
इस पर सोभन ने कहा – ‘हे ब्राह्मण! यह सब कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की रमा एकादशी के व्रत का फल है। इसी से मुझे यह अनुपम नगर प्राप्त हुआ है, किंतु यह अस्थिर है।’
सोभन की बात सुन ब्राह्मण बोला – ‘हे राजन! यह अस्थिर क्यों है और स्थिर किस प्रकार हो सकता है, सों आप मुझे समझाइए। यदि इसे स्थिर करने के लिए मैं कुछ कर सका तो अवश्य ही करूंगा।’ राजा सोभन ने कहा – ‘हे ब्राह्मण, मैंने वह व्रत विवश होकर तथा श्रद्धारहित किया था। उसके प्रभाव से मुझे यह अस्थिर नगर प्राप्त हुआ, परंतु यदि तुम इस वृत्तांत को मेरी पत्नी चन्द्रभागा से कहोगे तो वह इसको स्थिर बना सकती है।’
राजा सोभन की बात सुन ब्राह्मण अपने नगर को लौट आया और उसने चन्द्रभागा को सारा वृत्तांत कह सुनाया। इस पर राजकन्या चन्द्रभागा अचंभित हो कर बोली- ‘हे ब्राह्मण देव! आप क्या यह सब दृश्य प्रत्यक्ष देखकर आए हैं?’
चन्द्रभागा की बात सुन ब्राह्मण बोला – ‘हे राजकन्या! मैंने तेरे पति सोभन तथा उसके नगर को प्रत्यक्ष देखा है, किंतु वह नगर अस्थिर है। तू कोई ऐसा उपाय कर जिससे कि वह स्थिर हो जाए और तेरा पति तुझ से मिल सके।
ब्राह्मण की बात सुन चन्द्रभागा बोली – ‘हे ब्राह्मण देव! आप मुझे उस नगर में ले चलिए, मैं अपने पति को देखना चाहती हूं। मैं अपने व्रत के प्रभाव से उस नगर को स्थिर बना दूंगी।’
चन्द्रभागा के वचनों को सुनकर वह ब्राह्मण उसे मंदराचल पर्वत के पास वामदेव के आश्रम में ले गया। वामदेव ने उसकी कथा को सुनकर चन्द्रभागा का मंत्रों से अभिषेक किया। चन्द्रभागा मंत्रों तथा व्रत के प्रभाव से दिव्य देह धारण करके पति के पास चली गई। सोभन ने अपनी पत्नी चन्द्रभागा को देखकर उसे प्रसन्नतापूर्वक आसन पर अपने पास बैठा लिया।
चन्द्रभागा ने कहा – ‘हे स्वामी! अब आप मेरे पुण्य को सुनिए, जब मैं अपने पिता के घर में आठ वर्ष की थी, तब ही से मैं सारे एकादशी का व्रत विधि विधान से कर रही हूं। उन्हीं व्रतों के प्रभाव से आपका यह नगर स्थिर हो जाएगा। उसके पश्चात चन्द्रभागा दिव्य स्वरूप धारण करके तथा दिव्य वस्त्रालंकारो से सजकर अपने पति के साथ सुखपूर्वक रहने लगी।
हे अर्जुन! यह मैंने रमा एकादशी का माहात्म्य कहा है। जो मनुष्य रमा एकादशी के व्रत को करते हैं, उनके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। जो मनुष्य रमा एकादशी का माहात्म्य सुनते हैं, वह अंत समय में विष्णु लोक को जाते हैं।”
रमा एकादशी के दिन विष्णु भगवान के प्रति श्रद्धा रखें। प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। उसके बाद पूर्ण भक्ति भाव से विष्णु भगवान और माता लक्ष्मी का पूजन करें। भगवान को प्रसाद का भोग लगाएं और ध्यान रखें कि इस प्रसाद को भक्तों में वितरित करें।
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