if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) {
/**
* Gets views count.
*
* @param int $id The Post ID.
* @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7])
* @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999)
* @return string
*/
function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) {
$attr = array(
'id' => $id,
'range' => $range,
'number_format' => $number_format,
);
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) );
$views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $views ) {
$views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format );
wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' );
}
return $views;
}
}
if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) {
/**
* Do Query
*
* @param $instance
* @return array
*/
function jnews_view_counter_query( $instance ) {
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) );
$query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $query ) {
$query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance );
wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' );
}
return $query;
}
}
The post Vivah Panchami : क्यों नहीं करते विवाह पंचमी महोत्सव के दिन विवाह? appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>दिनांक – 07 दिसम्बर 2021
वार – बुधवार
पञ्चमी तिथि प्रारम्भ – 07 दिसम्बर 2021 को 11:40 पी एम बजे
पञ्चमी तिथि समाप्त – 08 दिसम्बर 2021 को 09:45 पी एम बजे
विवाह पंचमी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठ कर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
इसके बाद राम विवाह का संकल्प लें और भगवान श्री राम और माता सीता जी की मूर्ति या प्रतिमा स्थापित करें।
मूर्ति स्थापना के बाद भगवान राम को पीले वस्त्र और माता सीता को लाल वस्त्र अर्पित करें। “ॐ जानकीवल्लभाय नमः” इस मंत्र का 108 बार जाप करें और भगवान राम और सीता का गठबंधन करें।
इसके बाद भगवान राम और सीता जी की आरती उतारें और भोग लगाएं तथा पूरे घर में प्रसाद बांटकर आप भी ग्रहण करें।
विवाह पंचमी का महोत्सव भारत और नेपाल में पूरे धूम-धाम से मनाया जाता है। इस उत्सव को नेपाल के पौराणिक शहर जनकपुरधाम और अयोध्या में भव्य रूप से मनाया जाता है।
इस महोतवस्व के दौरान नेपाल के जनकपुरधाम में प्रभु श्रीराम तथा माता सीता के विवाह का आयोजन किया जाता है। शहर की साफ-सफाई कर जनकपुर के सभी मंदिरों को सजाया जाता है। इस दिन अयोध्या से आ रही बारात के स्वागत की जबरदस्त तैयारी की जाती है। नगर भ्रमण और स्वागत करने के लिए बच्चों को राम जी और लक्ष्मण जी की प्रतिमूर्ति के रूप में बनाया जाता है। इस दिन झांकी जानकी मंदिर पहुंचकर नगर भ्रमण करती है। महोत्सव के प्रथम दिन फुलवारी लीला ,दूसरे दिन धनुष यज्ञ, तीसरे दिन भगवान राम के तिलकोत्सव की रस्म, चौथे दिन मटकोर और पंचवे दिन विवाहोत्सव मनाया जाता है। जिससे त्रेता युग की अनुभूति होती है। विवाहोत्सव के अगले दिन राम कलेवा के साथ इस महोत्सव का समापन होता है।
हिन्दू धर्म में विवाह पंचमी का विशेष महत्व है। लेकिन इस दिन कई जगह खासकर भारत के मिथिलांचल और नेपाल में विवाह नहीं करने की परंपरा है। दरअसल, 36 गुण मिलने के बाद भी सीता जी का वैवाहिक जीवन अति दुखद रहा था इसी वजह से लोग विवाह पंचमी के दिन विवाह करना उचित नहीं मानते। मान्यता है कि 14 वर्ष के कठोर वनवास के उपरांत राम ने गर्भवती सीता का त्याग कर दिया था और इस वजह से माता सीता को महारानी का सुख नहीं मील पाया। इसलिए विवाह पंचमी के दिन लोग अपनी बेटियों का विवाह नहीं करते हैं। लोगों का मानना है कि विवाह पंचमी के दिन विवाह करने से कहीं सीता की तरह ही उनकी बेटी का वैवाहिक जीवन भी दुखमयी न हो जाए।
यह भी जाने : माता सीता की आरती
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]]>हिन्दू धर्म में रामायण का पाठ करने के अनेकों लाभ बताए गए हैं। मान्यता है की जो भी मनुष्य रामायण का पाठ करता है वो जीवन्नोंपरंत धर्म के मार्ग पर चलता है और उस के जीवन में सकारात्मकता का प्रवेश होता है तथा नकारात्मकता नष्ट हो जाती है, आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है और हरप्रकार के संकट दूर होते हैं।
रामायण सबसे पहले महर्षि वाल्मीकि द्वारा संस्कृत भाषा में लिखी गई जो “वाल्मीकि रामायण” के नाम से प्रसिद्ध है । उस के पश्चात तुलसीदासजी ने रामायण को अवधी में लिखा जो रामचरित मानस के नाम से प्रसिद्ध है । हालांकि रामचरितमानस की भाषा के बारे में विद्धान एकमत नहीं हैं, कोई इसे अवधि मानता है तो कोई भोजपुरी। तत् पश्चात अनेक विद्वानों ने रामायण को अनेक भाषाओं में अलग अलग नाम से लिखा।
आज के समय में महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण को पढ़ना और समझना साधारण मनुष्य के लिए कठिन है क्योंकि यह संस्कृत में है जबकि रामचरित मानस को आम बोल चाल की भाषा में लिखा गया है।
रामायण को संस्कृत काव्य की भाषा में लिखा गया जिसमें सर्ग और श्लोक होते हैं, जबकि रामचरित मानस में दोहो और चौपाइयों है। रामायण में 24000 हजार श्लोक और 500 सर्ग है। रामचरित मानस में श्लोक संख्या 27 है, चौपाई संख्या 4608 है, दोहा 1074 है, सोरठा संख्या 207 है और 86 छन्द है।
आज कल की भाग दौड़ भरी दिनचर्या में व्यक्ति के पास इतना समय नहीं है की वो रामायण का प्रतिदिन पाठ कर सके क्योंकि यह काफ़ी बड़ा है । इसी समस्या के समाधान के लिए आज हम आप को एक ऐसे श्लोक के बारे में बता रहे हैं जिसे “एकश्लोकि रामायण” कहा जाता है । मान्यताओं के अनुसार इस के पाठ से सम्पूर्ण रामायण के पाठ करने के समान फल प्राप्त होता है।
॥ एकश्लोकि रामायणम् ॥
आदौ राम तपोवनादि गमनं, हत्वा मृगं कांचनम्।
वैदीहीहरणं जटायुमरणं, सुग्रीवसंभाषणम्।।
बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं, लंकापुरीदाहनम्।
पश्चाद् रावण कुम्भकर्ण हननम्, एतद्धि रामायणम्।।
भावार्थ :
एक बार श्री राम वनवास में गए | वहां उन्होंने स्वर्ण मृग का पीछा किया और उसका वध किया | इसी दौरान उनकी पत्नी वैदेही यानि सीता जी का रावण द्वारा हरण किया गया | उनकी रक्षा करते हुए पक्षिराज जटायु ने अपने प्राण गवाएं | श्रीराम की मित्रता सुग्रीव से हुई | उन्होंने उसके दुष्ट भाई बालि का वध किया | समुद्र पर पुल बनाकर पार किया | लंकापुरी का दहन हुआ | इसके पश्चात् रावण और कुम्भकरण का वध किया | यही पूरी रामायण की संक्षिप्त कहानी है |
मंत्र जाप की विधि
प्रात: काल और संध्या काल में सम्पूर्ण रूप से शुद्ध हो कर ही एक श्लोकि रामायण का पाठ करें।
एक श्लोकि रामायण का पाठ आप किसी भी दिन कर सकते हैं।
कहा जाता है कि एक श्लोकि रामायण का पाठ 108 बार नित्य नियम से करना चाहिए अपितु १०८ बार सम्भव न हो तो 7,14 या 21 बार भी पाठ किया जा सकता है।
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