if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) {
/**
* Gets views count.
*
* @param int $id The Post ID.
* @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7])
* @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999)
* @return string
*/
function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) {
$attr = array(
'id' => $id,
'range' => $range,
'number_format' => $number_format,
);
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) );
$views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $views ) {
$views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format );
wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' );
}
return $views;
}
}
if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) {
/**
* Do Query
*
* @param $instance
* @return array
*/
function jnews_view_counter_query( $instance ) {
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) );
$query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $query ) {
$query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance );
wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' );
}
return $query;
}
}
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]]>“ज्योतिर्लिंग” की पौराणिक कथा का उल्लेख शिव पुराण में मिलता है। एक बार त्रिदेव के बीच में बहस हुई थी कि कौन सर्वोच्च है, तब भगवान शिव ने प्रकाश के एक विशाल स्तंभ का निर्माण किया था और भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को दोनों दिशाओं में प्रकाश का अंत खोजने के लिए कहा था। जिस पर, भगवान ब्रह्मा ने झूठ बोला कि उन्हें अंत मिल गया, लेकिन भगवान विष्णु ने हार मान ली। भगवान शिव ने भगवान ब्रह्मा को शाप दिया कि भले ही वह ब्रह्माण्ड के निर्माता हैं, लेकिन उनकी पूजा नहीं की जाएगी। और माना जाता है कि ज्योतिर्लिंग भगवान शिव द्वारा निर्मित प्रकाश के उस अनंत स्तंभ से प्रकट हुए।
शिव पुराण की कोटि ‘रुद्रसंहिता’ में द्वादश ज्योतिर्लिंगों के सम्बन्ध निम्नलिखित श्लोक दिया गया है-
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्। उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम्॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्। सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे। हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः। सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥
एतेशां दर्शनादेव पातकं नैव तिष्ठति। कर्मक्षयो भवेत्तस्य यस्य तुष्टो महेश्वराः॥:
जो भी भक्त प्रतिदिन प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर इस द्वादश ज्योतिर्लिंगों श्लोक का पाठ करता है, अर्थात् उपर्युक्त श्लोक को पढ़ता हुआ, शिवलिंगों (Jyotirlinga) का ध्यान करता है, उसके सात जन्मों तक के पाप नष्ट हो जाते हैं और वो जिस कामना की पूर्ति के लिए नित्य इन नामों का पाठ करता है, शीघ्र ही उसे उस फल की प्राप्ति हो जाती है।
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग – गिर, गुजरात
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग – श्रीशैलम, आंध्र प्रदेश
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग – उज्जैन, मध्यप्रदेश
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग- ओंकारेश्वर, मध्यप्रदेश
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग – रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग – भीमाशंकर, महाराष्ट्र
काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग – वाराणसी, उत्तर प्रदेश
त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग – नासिक, महाराष्ट्र
बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग – देवघर, झारखंड
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग – द्वारका, गुजरात
रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग – रामेश्वरम, तमिलनाडु
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग – औरंगाबाद, महाराष्ट्र
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]]>जब रावण सीताजी का हरण करके लंका ले गया, तब सुग्रीव के साथ उसकी वानर सेना लेकर श्रीराम समुद्र तट पर आये। वहाँ वे विचार करने लगे कि हम किस प्रकार इस समुद्र को पार करेंगे और किस प्रकार रावण को परास्त कर सीता जी को मुक्त कराएँगे। इतने में ही श्रीराम को प्यास लगी। उन्होंने जल माँगा और वानर मीठा जल ले आये। प्रभु श्रीराम ने प्रसन्न होकर वह जल ले लिया। तभी उन्हें स्मरण हुआ कि – ‘ मैंने अपने स्वामी भगवान शंकर का दर्शन तो किया ही नहीं। फिर यह जल मैं कैसे ग्रहण कर सकता हूँ? ‘
इस प्रकार विचार कर उन्होंने उस जल को नहीं पिया। इसके बाद उन्होंने शिवलिंग बनाया और आवाहन आदि सोलह उपचारों का पालन करके उन्होंने विधिपूर्वक बड़े प्रेम से शंकर जी की पूजा अर्चना की। इसके बाद दिव्य स्तोत्रों के द्वारा यत्नपूर्वक भगवान शंकर को संतुष्ट करके श्रीराम ने उनसे प्रार्थना की। श्रीराम बोले – ” उत्तम व्रत का पालन करने वाले मेरे स्वामी महेश्वर ! आप मेरी सहायता कीजिये। आपके सहयोग के बिना मेरे कार्य की सिद्धि अत्यंत कठिन है। रावण भी आपका ही भक्त है, वह सबके लिए सर्वथा दुर्जय और महावीर है पर आपके दिए हुए वरदान के कारण सदा अहंकार से भरा रहता है और संसार को कष्ट देता है।”
श्रीराम के पूजन से प्रसन्न होकर माता पार्वती सहित भगवान शंकर अपने पार्षदगणों के साथ निर्मल रूप धारण करके वहाँ प्रकट हो गए। श्रीराम ने भगवान शिव का पूजन और विभिन्न प्रकार से स्तुति करके उनसे रावण के साथ होने वाले युद्ध में अपने लिए विजय की प्रार्थना की। तब भगवान शिव ने श्रीराम को युद्ध की आज्ञा और रावण पर विजय का वरदान दिया। भगवान शिव से विजय का वरदान पाकर नतमस्तक हो हाथ जोड़कर श्रीराम बोले –
” हे भोलेनाथ! यदि आप संतुष्ट हैं तो संसार के कल्याण के लिए आप सदा यहाँ निवास करें।“ श्रीराम के ऐसा कहने पर भगवान शिव वहाँ ज्योतिर्लिंग में स्थित हो गए और वह तीनों लोकों में रामेश्वर के नाम से प्रसिद्ध हुए। भगवान रामेश्वर सदा भोग और मोक्ष देनेवाले तथा भक्तों की इक्षा पूर्ण करने वाले हैं।
सुबह- 05:00 बजे फिर दोपहर 1 बजे
शाम को- 03:00 और रात्रि में 9 बजे
मंदिर में 26 प्रकार की पूजा विधि का उल्लेख किया गया है। जिनमें से 9 पूजा विधि प्रमुख हैं। जो निश्चित रकम का भुगतान करने पर करवाई जा सकती हैं।
रामेश्वरम् केवल धार्मिक महत्व का तीर्थ ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य की दृष्टि से भी यह स्थल दर्शनीय है। इस के समुद्र तट पर तरह-तरह की कोड़ियां, शंख और सीपें मिलती हैं।
रामेश्वरम जिला अच्छी तरह से मदुरै, कन्याकुमारी, चेन्नई और त्रिची जैसे बड़े शहरों से सड़क मार्ग से जुड़ा है। यह सड़क मार्ग से पांडिचेरी और तंजावुर से भी जुड़ा है। यात्रा के लिए आप जीप, ऑटो रिक्शा और यहां तक कि चक्र रिक्शा किराया पर करके भी जा सकते हैं।
रामेश्वरम चेन्नई, मदुरै, कोयंबटूर, त्रिची, तंजावुर और अन्य महत्वपूर्ण शहरों के साथ रेल द्वारा जुड़ा हुआ है। जो मांडापम रेल्वे स्टेशन से थो़ड़ी दूर चलने पर प्रारंभ हो जाता है जिसकी लंम्बाई 2 किमी है। रामेश्वरम तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई रेल्वे स्टेशन से 596 किलोमीटर दूर है जहां नियमित ट्रेन रामेश्वरम एक्सप्रेस चलाई जाती है।
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