if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) {
/**
* Gets views count.
*
* @param int $id The Post ID.
* @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7])
* @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999)
* @return string
*/
function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) {
$attr = array(
'id' => $id,
'range' => $range,
'number_format' => $number_format,
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$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) );
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}
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if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) {
/**
* Do Query
*
* @param $instance
* @return array
*/
function jnews_view_counter_query( $instance ) {
$query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) );
$query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' );
if ( false === $query ) {
$query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance );
wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' );
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}
}
The post मिथुन राशिफल 2021- Mithun Rashifal 2021 appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>इन ग्रहों की स्थिति के कारण, आपको अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान, नौकरीपेशा लोगों को अपने सहकर्मियों से सहयोग न मिलने के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ेगा और उनके प्रमोशन में देरी होगी। वार्षिक राशिफल 2021 के अनुसार, व्यवसायी और व्यापारियों के लिए समय अच्छा रहेगा। लेकिन कोई भी बड़ा लेनदेन करते समय सतर्क रहें। इस वर्ष की शुरुआत आर्थिक जीवन में अनुकूल होगी, हालाँकि थोड़ी हानि होने की संभावना है, इससे आपको निराशा का सामना भी करना पड़ सकता है।
आपके स्वास्थ्य की बात करें तो यह वर्ष कमजोर परिणाम देगा। अष्टम भाव में शनि और बृहस्पति का संयोग आपको रक्त और वायु जनित स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से ग्रसित कर सकता है। इसके साथ ही अत्यधिक वसायुक्त खाद्य पदार्थ के कारण होने वाले रोग जैसे नेत्र रोग, अनिद्रा, अपच, गैस, गठिया आदि भी उत्पन्न हो सकते हैं। इसलिए, मिथुन राशि वाले जातकों को 2021 का सुझाव है कि वो अपनी पहली प्राथमिकता सेहत की देखभाल को रखें।
मिथुन राशि वाले जातकों के लिए वर्ष 2021 आर्थिक दृष्टि से एक मध्यम वर्ष होगा क्योंकि बृहस्पति और शनि आपके अष्टम भाव में युति बनाएँगे। बृहस्पति और शनि के गोचर के कारण धन हानि की संभावना है। आप की कुंडली में जब बृहस्पति का गोचर कुंभ राशि में होगा तो आप परिस्थितियों में कुछ सुधार महसूस करेंगे और इस समय आप को धन लाभ भी होगा। आपका पिछला कोई निवेश सार्थक होगा।
वर्ष 2021 में आपके के लिए जनवरी के अंत से लेकर फरवरी, अप्रैल, मई और सितंबर का महीना उत्तम फल दायी होगा। इस दौरान आप जो भी प्रयास करेंगे वो सफल होंगे और आप का आर्थिक पक्ष भी मज़बूत होगा। इस वर्ष आपकी कुंडली के द्वादश भाव में छाया ग्रह राहु की उपस्थिति आपके ख़र्चों में वृद्धि कर सकती है।
वर्ष 2021 मिथुन राशि के जातकों के लिए स्वास्थ्य की दृष्टि से कमजोर रहेगा, अष्टम भाव में शनि और बृहस्पति का संयोग आपको रक्त और वायु जनित स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से ग्रसित कर सकता है। इसलिए इस वर्ष चर्बी युक्त भोजन करने से परहेज़ करें और नियमित व्यायाम से अपनी सेहत का ध्यान रखें। जितना सम्भव हो धूल भारी जगहों पर जाने से बचें, अन्यथा स्वास संबंधित रोग आप को ग्रसित कर सकते हैं।
वर्ष 2021 मिथुन राशि के जातक जो नौकरी करते हैं उन के लिए कुछ अच्छे योग ला रहा है। इस वर्ष अगर आप एक टीम की तरह काम करेंगे/ करेंगी तो ये आप के करियर में अधिक लाभदायक होगा। इस वर्ष आप अपनी बुद्धिमत्ता के साथ अपना काम बहुत अच्छी तरह से पूरा करेंगे और नए काम को हाथ में लेंगे जिसे आप अपने योजनाओं और बुद्धिमत्ता से सफलतापूर्वक अपनी समय सीमा को पूरा करेंगे। आपकी यही कार्यकुशलता आपको ऑफिस में आपके वरिष्ठों का विश्वासपात्र बना देगी।
इस वर्ष की शुरुआत में कुछ चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन अप्रैल से परिस्थितियां बदल जाएंगी। आपको अपने कार्यक्षेत्र में भी सम्मान मिलेगा और इसके कारण आपको अच्छा पद मिल सकता है। यदि आप चाहें, तो आप एक अच्छा हस्तांतरण भी ले सकते हैं, क्योंकि अप्रैल मध्य से सितंबर तक आपको बहुत अच्छे अवसर प्राप्त होंगे।
मिथुन राशि के जातक जो व्यवसाय से जुड़े हुए हैं, वह 2021 को एक अच्छे अवसर के रूप में देखेंगे और अपनी योजनाओं और बुद्धिमत्ता से पूरा लाभ उठायेंगे। ग्रहों की स्थिति यह संकेत देती है कि आप अपने व्यवसाय के संबंध में बहुत परिपक्व दिखेंगे और अपने दिमाग का इस्तेमाल करके अपने व्यापार को नई दिशा पे लेजायेंगे। इस साल आपके बिजनेस पार्टनर के साथ आपका रिश्ता बिगड़ सकता है, लेकिन इसके बावजूद आप अपने बिजनेस में आगे बढ़ेंगे। वर्ष की शुरुआत में आपके और बिजनेस पाटर्नर के मध्य कुछ अनबन होने के कारण कुछ समस्याएँ आएंगी लेकिन जैसे-जैसे यह साल आगे बढ़ेगा, आप इस ग़लतफ़हमी को दूर करेंगे और आपका व्यवसाय सफलता की ऊँचाइयों को छूएगा। वर्ष का मध्य काल बृहस्पति की कृपा से आपके लिए सबसे अच्छा होगा। आप अपने व्यवसाय की वृद्धि के लिए कुछ नए लोगों से मिलेंगे और कुछ यात्राएँ भी कर सकते हैं। अगर आप हर चीज़ का सही तरीके से इस्तेमाल करते हैं, तो यह साल निस्संदेह आपके व्यवसाय को एक नया आकार देने में सक्षम होगा। सितंबर और नवंबर के बीच कुछ समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन धीरे-धीरे चीजें सुधर जाएंगी।
मिथुन राशिफल 2021 के अनुसार, इस राशि के विद्यार्थी जातकों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में कई बदलाव नजर आएँगे। खासतौर से वो छात्र जो विदेश जाकर पढ़ाई करने का सपना देख रहे हैं, उनके लिए यह वर्ष विशेष फलदायी साबित होगा। छात्रों के लिए सबसे ज्यादा उत्तम जनवरी, फरवरी और मई का महीना रहने वाला है। शनि देव की कृपा से आपको इस समय अपनी मेहनत का फल मिलेगा और आप हर परीक्षा में सफलता हासिल करेंगे।
राशिफल 2021 यह संकेत देता है कि उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों के लिए भी अप्रैल से सितंबर तक का समय विशेष फल दायी रहेगा। आपको इस दौरान हर विषय को समझने में मदद मिलेगी, जिससे आप अपने भविष्य के लिए कोई बड़ा फैसला भी ले सकते हैं। हालांकि इस वर्ष भर केतु आपकी राशि के छठे भाव में विराजमान रहेंगे, जिससे छात्रों को कई विषयों को समझने में कुछ परेशानी महसूस होंगी, परंतु इनसे निजात पाते हुए आप सफलता अर्जित करने में कामयाब होंगे।
यदि आप शादीशुदा हैं तो, वर्ष 2021 आपके वैवाहिक जीवन में कई परिवर्तन लेकर आने वाला है क्योंकि साल की शुरुआत में सूर्य और बुध देव आपके सप्तम भाव में विराजमान होंगे, जिसके चलते आपके और जीवन साथी के बीच प्रेम बढ़ेगा लेकिन इस दौरान जीवनसाथी में कुछ परिवर्तन भी आएँगे, जिसका प्रभाव आपके वैवाहिक जीवन पर पड़ सकता है। साथ ही संभावना है कि जीवन साथी का यह बदलता स्वभाव आपके दांपत्य जीवन पर भी असर डालेगा और इससे जीवनसाथी के अंदर अहंकार की वृद्धि होगी। इसके चलते आपके और उनके बीच विवाद हो सकता है। ऐसे में अपने वैवाहिक जीवन को सुलझाने और उसे अनुकूल बनाने का प्रयास करते रहें। इस वर्ष शनि और बृहस्पति की युति आपके ससुराल पक्ष के लिए अच्छी नहीं देखी जाएगी क्योंकि संभावना है कि ससुराल में किसी सदस्य को स्वास्थ्य हानि हो, जिस पर आपका भी धन खर्च हो सकता है।
आपके लिए जनवरी का महीना अच्छा रहेगा, क्योंकि इस दौरान शुक्र का गोचर आपकी राशि के सप्तम भाव में होगा। इस समय आपके और जीवनसाथी के बीच प्यार बढ़ेगा। आप दोनों किसी यात्रा पर जाने का प्लान करते नजर आएँगे। इसके बाद जून माह में भी आप दोनों का रिश्ता बेहतर होगा। इस समय आप दोनों हर विवाद को साथ मिलकर सुलझाने का प्रयास कर सकते हैं। आप साथी के साथ बातें साझा करते नजर आएँगे और ग्रहों की दृष्टि आप दोनों को नज़दीक लाने और आपके दांपत्य जीवन का विकास करने का कार्य करेगी। संतान पक्ष की बात करें तो संतान पक्ष को मिले-जुले परिणाम मिलेंगे। उन्हें अप्रैल और अगस्त में अनुकूल फलों की प्राप्ति होगी।
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]]>The post Shardiya Navaratri 2020: नवरात्रि, जानिए तिथि और शुभ मुहूर्त appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>वैसे तो दुर्गा जी के 108 नाम बताये जाते हैं लेकिन नवरात्रि में उन के नौ रूपों की स्तुति और पूजा-पाठ की जाती है। स्वयं ब्रह्मा जी ने माँ दुर्गा के नौ रूपों का उल्लेख संक्षेप में इस श्लोक द्वारा किया है।
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्।।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना:।।

प्रथम नवरात्र में माँ दुर्गा की शैलपुत्री के रूप में पूजा की जाती है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री शैलपुत्री की पूजा करने से मूलाधार चक्र जागृत होजाता है और साधकों को सभी प्रकार की सिद्धियां स्वत: ही प्राप्त हो जाती हैं। माँ का वाहन सिंह है तथा इन्हें गाय का घी अथवा उससे बने पदार्थोंका भोग लगाया जाता है।

दूसरे नवरात्र में माँ के ब्रह्मचारिणी एवं तपश्चारिणी रूप को पूजा जाता है। जो साधक माँ के इस रूप की पूजा करते हैं उन्हें तप, त्याग, वैराग्य, संयम और सदाचार की प्राप्ति होती है और जीवन में वे जिस बात का संकल्प कर लेते हैं उसे पूरा करके ही रहते हैं। माँ ब्रह्मचारिणी का कोई भी वाहन नहीं है पैर ही वाहन है माँ को शक्कर का भोग प्रिय है।
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माँ के इस रूप में मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चन्द्र बना होने के कारण इनका नाम चन्द्रघंटा पड़ा तथा तीसरे नवरात्र में माँ के इसी रूप की पूजा की जाती है तथा माँ की कृपा से साधक को संसार के सभी कष्टों से छुटकारा मिल जाता है। शेर पर सवारी करने वाली माता को दूध का भोग प्रिय है।

अपने उदर से ब्रह्मांड को उत्पन्न करने वाली माँ कुष्मांडा की पूजा चौथे नवरात्र में करने का विधान है। इनकी आराधना करने वाले भक्तों केसभी प्रकार के रोग एवं कष्ट मिट जाते हैं तथा साधक को माँ की भक्ति के साथ ही आयु, यश और बल की प्राप्ति भी सहज ही हो जाती है। माँ को भोग में मालपुआ अति प्रिय है।

पंचम नवरात्र में आदिशक्ति माँ दुर्गा की स्कंदमाता के रूप में पूजा होती है। कुमार कार्तिकेय की माता होने के कारण इनका नाम स्कंदमातापड़ा। इनकी पूजा करने वाले साधक संसार के सभी सुखों को भोगते हुए अंत में मोक्ष पद को प्राप्त होते हैं। उनके जीवन में किसी भी प्रकार कीवस्तु का कोई अभाव कभी नहीं रहता। इन्हें पद्मासनादेवी भी कहते हैं। माँ का वाहन सिंह है और इन्हें केले का भोग अति प्रिय है
पंचम नवरात्र में आदिशक्ति माँ दुर्गा की स्कंदमाता के रूप में पूजा होती है। कुमार कार्तिकेय की माता होने के कारण इनका नाम स्कंदमाता पड़ा। इनकी पूजा करने वाले साधक संसार के सभी सुखों को भोगते हुए अंत में मोक्ष पद को प्राप्त होते हैं। उनके जीवन में किसी भी प्रकार की वस्तु का कोई अभाव कभी नहीं रहता। इन्हें पद्मासनादेवी भी कहते हैं। माँ का वाहन सिंह है और इन्हें केले का भोग अति प्रिय है।
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महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति माँ दुर्गा ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया और उनका कात्यायनी नाम पड़ा। छठे नवरात्र में माँ के इसी रूप की पूजा की जाती है। माँ की कृपा से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष आदि चारों फलों की जहां प्राप्ति होती है। वहीं वह आलौकिक तेज से अलंकृत होकर हर प्रकार के भय, शोक एवं संतापों से मुक्त होकर खुशहाल जीवन व्यतीत करता है। और माँ को शहद अति प्रिय है।

सभी राक्षसों के लिए कालरूप बनकर आई माँ दुर्गा के इस रूप की पूजा सातवें नवरात्र में की जाती है। माँ के स्मरण मात्र से ही सभी प्रकार के भूत, पिशाच एवं भय समाप्त हो जाते हैं। माँ की कृपा से भानूचक्र जागृत होता है और भक्त हमेशा भयमुक्त रहता हैं। माँ गधे की सवारी करती है और माँ को गुड़ का भोग अतिप्रिय है।

आदिशक्ति माँ दुर्गा के महागौरी रूप की पूजा आठवें नवरात्र में की जाती है। माँ ने काली रूप में आने के पश्चात घोर तपस्या की और पुन: गौरवर्ण पाया और महागौरी कहलाई। माँ का वाहन बैल है और माँ को हलवे का भोग लगाया जाता है।

नौवें नवरात्र में माँ के इस रूप की पूजा एवं आराधना की जाती है, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है माँ का यह रूप साधक को सभी प्रकार कीऋद्धियां एवं सिद्धियां प्रदान करने वाला है। जिस पर माँ की कृपा हो जाती है उसके लिए जीवन में कुछ भी पाना असंभव नहीं रहता। माँ शेर परबिराजमान है माँ को खीर अति प्रिय है अत: माँ को खीर का भोग लगाना चाहिए।
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हर वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत श्राद्ध की सर्वपित्र अमावस्या के बाद ही हो जाती है। लेकिन इस वर्ष अधिकमास लगने के कारण नवरात्रि एक माह विलम्ब से शुरू होगी। इस बार शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूबर से शुरू होकर २५ अक्टूबर नवमी तिथि को सम्पन होगी।
17 अक्टूबर 2020: प्रतिपदा घटस्थापना
18 अक्टूबर 2020: द्वितीया मां ब्रह्मचारिणी पूजा
19 अक्टूबर 2020: तृतीय मां चंद्रघंटा पूजा
20 अक्टूबर 2020 : चतुर्थी मां कुष्मांडा पूजा
21 अक्टूबर 2020: पंचमी मां स्कंदमाता पूजा
22 अक्टूबर 2020: षष्ठी मां कात्यायनी पूजा
23 अक्टूबर 2020: सप्तमी मां कालरात्रि पूजा
24 अक्टूबर 2020 :अष्टमी मां महागौरी दुर्गा महा नवमी पूजा दुर्गा महा अष्टमी पूजा
25 अक्टूबर 2020 : नवमी मां सिद्धिदात्री नवरात्रि पारण
नवरात्रि के दौरान घटस्थापना एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। यह नौ दिनों के उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है। घटस्थापना देवी शक्ति का आह्वान है और शास्त्रों में नवरात्रि की शुरुआत में एक निश्चित अवधि के दौरान घटस्थापना करने के लिए नियमों और दिशानिर्देशों को अच्छी तरह से परिभाषित किया है। घटस्थापना करने का शुभ मुहूर्त प्रतिपदा के दिन एक तिहाई होता है। यदि किसी कारण इस मुहूर्त में घटस्थापना नहीं कर पाते तो अभिजीत मुहूर्त के दौरान घटस्थापना की जा सकती है।
दिनांक : 17 अक्टूबर 2020
घटस्थापना मुहूर्त – 06:23 ए एम से 10:12 ए एम
(अवधि – 03 घण्टे 49 मिनट्स)
घटस्थापना अभिजित मुहूर्त – 11:43 ए एम से 12:29 पी एम
(अवधि – 00 घण्टे 46 मिनट्स)
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]]>The post स्कंद पुराण के अनुसार यहाँ है भगवान शिव की आरामगाह appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.
]]>भगवान शिव को हेमेशा तपस्वी के रूप में जाना जाता है देवभूमि उत्तराखंड को महादेव की तपस्थली कहा जाता है। यहाँ हम आप को ऐसे तीर्थस्थान के बारे में बताने जा रहे हे जो की देश में ही नहीं अपितु विदेशों में भी प्रख्यात है, यहाँ हर वर्ष लाखों की संख्या में तीर्थयात्री आते हैं।

यह स्थान उत्तराखंड,पौड़ी जनपद के अंतर्गत लैन्सडौन डेरियाखाल – रिखणीखाल मार्ग पर स्थित चखुलाखाल गांव से 4 किलोमीटर की दूरी पर पर्वत श्रृंखलाओं के बीच एक बेहद ही मनमोहक शांत जगह है। यह स्थान देवदार के घने जंगलो के मध्य में स्थित ताड़केश्वर भगवान का पौराणिक मंदिर मौजूद है।


स्कंद पुराण के केदारखंड में इस स्थान का वर्णन मिलता है
समुद्र तल से 1800 मीटर की ऊँचाई पर स्थित इस स्थल को भगवान शिव का आरामगाह कहा जाता है। इस मंदिर परिसर में त्रिशुल के आकार के देवदार के वृक्ष हैं जो श्रद्धालुओं की आस्था को और भी ज्यादा मजबूत करते हैं।


पौराणिक कथा के अनुसार ताड़कासुर दैत्य का वध करने के बाद भगवान शिव ने इसी जगह पर आकर विश्राम किया। विश्राम के दौरान जब सूर्य की तेज किरणें भगवान शिव के चेहरे पर पड़ीं, तो मां पार्वती ने शिवजी के चारों ओर देवदार के सात वृक्ष लगाए। ये विशाल वृक्ष आज भी ताड़केश्वर धाम के अहाते में मौजूद हैं।

यहां तक पहुंचने के लिए कोटद्वार पौड़ी से चखुलियाखाल तक जीप-टैक्सी जाती रहती हैं। यहां से 5 किमी पैदल दूरी पर ताड़केश्वर धाम है। ये एक ऐसा मंदिर है, जहां हर साल देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां की खूबसूरती बेमिसाल है और इसे देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है। खासतौर पर श्रावण मास पर तो यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
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