if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) { /** * Gets views count. * * @param int $id The Post ID. * @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7]) * @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999) * @return string */ function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) { $attr = array( 'id' => $id, 'range' => $range, 'number_format' => $number_format, ); $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) ); $views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $views ) { $views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format ); wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' ); } return $views; } } if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) { /** * Do Query * * @param $instance * @return array */ function jnews_view_counter_query( $instance ) { $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) ); $query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $query ) { $query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance ); wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' ); } return $query; } } Shani Chalisa Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/shani-chalisa/ Daily Dose of Astrology Sun, 29 May 2022 03:25:53 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://astrodeeva.com/wp-content/uploads/2022/03/cropped-Logo-32x32.png Shani Chalisa Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/shani-chalisa/ 32 32 Shani Jayanti 2022 : शनि जन्मोत्सव पर 30 साल बाद बन रहा अद्भुत संयोग, जाने जन्म की कथा और प्रमुख सिद्ध मंत्र https://astrodeeva.com/shani-jayanti-2022-after-30-years-on-shanis-birthday-a-wonderful-coincidence-is-being-made/ https://astrodeeva.com/shani-jayanti-2022-after-30-years-on-shanis-birthday-a-wonderful-coincidence-is-being-made/#comments Sun, 29 May 2022 03:25:53 +0000 https://astrodeeva.com/?p=3484 ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को शनि जयंती (Shani Jayanti) मनाई जाती है। माना जाता है ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को ही भगवान शनि का जन्म हुआ था। 20222 में शनि जयंती सोमवार, 30 मई को मनाई जाएगी। शनि देव के भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और विधि-विधान […]

The post Shani Jayanti 2022 : शनि जन्मोत्सव पर 30 साल बाद बन रहा अद्भुत संयोग, जाने जन्म की कथा और प्रमुख सिद्ध मंत्र appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.

]]>
ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को शनि जयंती (Shani Jayanti) मनाई जाती है। माना जाता है ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को ही भगवान शनि का जन्म हुआ था। 20222 में शनि जयंती सोमवार, 30 मई को मनाई जाएगी। शनि देव के भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और विधि-विधान के साथ शनि देव की उपासना करते हैं, इस दिन विशेष उपाय करने से शनि दोष से भी छुटकारा मिलता है।

शनि जयंती पर 30 साल बाद अद्भुत संयोग

इस वर्ष शनि जयंती का पर्व बेहद खास माना जा रहा है क्यों कि शनि जयंती के दिन सोमवती अमावस्या और वट सावित्री का त्योहार भी मनाया जाएगा ऐसा संयोग तकरीबन 30 साल बाद बन रहा है। इस दौरान शनि देव अपनी राशि कुंभ में रहेंगे और सर्वार्थ सिद्धि योग भी बनेगा।

शनि जन्मोत्सव – Shani Jayanti 2022

शनि जयंती का शुभ मुहूर्त शनि जयंती सोमवार, 30 मई को मनाई जाएगी, पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि रविवार, 29 मई को दोपहर 2 बजकर 54 मिनट से प्रारंभ होकर सोमवार, 30 मई को शाम 4 बजकर 59 मिनट पर समाप्त होगी।

शनि देव के जन्म की पौराणिक कथा ( Legend of Shani Jayanti)

स्कंद पुराण के काशीखंड के मुताबिक शनिदेव का जन्म सूर्य देव और संवर्णा की मिलन से हुआ था। सर्वप्रथम सूर्य देव का विवाह राजा दक्ष की कन्या संज्ञा से हुआ था। संज्ञा हमेशा सूर्य देव के तप से परेशान रहती थी। समय बीतने के साथ संज्ञा के गर्भ से यमराज, यमुना और वैवस्वत उत्पन्न हुए। लेकिन संज्ञा अब भी सूर्य देव के तप से परेशान थी। संज्ञा ने सूर्य देव के तप को कम करने के लिए एक तपस्या की। तप के प्रभाव से संज्ञा ने एक छाया नामक संवर्णा को पैदा किया। ऐसा करने के बाद संज्ञा अपने बच्चों की जिम्मेदारी सूर्य देव और संवर्णा को देकर अपने पिता के घर चले गई। संज्ञा ने अपनी परेशानी अपने पिता को बताई, सारी बात जानकर संज्ञा के पिता बहुत क्रोधित हुए और संज्ञा को डांट कर वापस भेज दिया। लेकिन अपने पति के घर वापस जाने के बजाय, संज्ञा जंगल में चले गई। उधर संज्ञा का जंगल में रहना तथा इधर संवर्णा और सूर्य देव का मिलन शनि देव, मनु और भद्रा नामक तीन संतानों के जन्म का कारण बना। इसी प्रकार शनि देव भी सूर्य के पुत्र है, इसीलिए , शनिदेव को भी सूर्यपुत्र कहा जाता है। कैसे करें शनिदेव की पूजा और किन बातों का रखें ध्यान….

शनि जयंती 2022 को शनिदेव को प्रसन्न करने के मंत्र 

  1. सूर्यपुत्रो दीर्घदेहो विशालाक्षः शिवप्रियः
    मंदचार प्रसन्नात्मा पीड़ां हरतु में शनिः
  2. नीलांजन समाभासं रवि पुत्रां यमाग्रजं।
    छाया मार्तण्डसंभूतं तं नामामि शनैश्चरम्।।
    प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
  3. ओम शं शनैश्चराय नमः।
  4. ओम शं शनैश्चराय नमः।
    ध्वजिनी धामिनी चैव कंकाली कलहप्रिया।
    कण्टकी कलही चाऽथ तुरंगी महिषी अजा।।
    शं शनैश्चराय नमः
  5. ओम शं शनैश्चराय नमः।
    कोणस्थ पिंगलो बभ्रु कृष्णौ रौद्रान्तको यमः।
    सौरि शनैश्चरा मंद पिप्पलादेन संस्थितः।।
    ओम शं शनैश्चराय नमः।

The post Shani Jayanti 2022 : शनि जन्मोत्सव पर 30 साल बाद बन रहा अद्भुत संयोग, जाने जन्म की कथा और प्रमुख सिद्ध मंत्र appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.

]]>
https://astrodeeva.com/shani-jayanti-2022-after-30-years-on-shanis-birthday-a-wonderful-coincidence-is-being-made/feed/ 1
Shani Chalisa – श्री शनि चालीसा https://astrodeeva.com/shani-chalisa-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%a8%e0%a4%bf-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a4%be/ https://astrodeeva.com/shani-chalisa-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%a8%e0%a4%bf-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a4%be/#respond Sat, 06 Feb 2021 00:26:50 +0000 https://astrodeeva.com/?p=1682 ||श्री शनि चालीसा|| Shani Dev Chalisa in Hindi ॥ दोहा ॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल । दीनन के दुःख दूर करि , कीजै नाथ निहाल ॥1॥  जय जय श्री शनिदेव प्रभु , सुनहु विनय महाराज ।   करहु कृपा हे रवि तनय , राखहु जन की लाज ॥2॥ अर्थ- हे माता पार्वती […]

The post Shani Chalisa – श्री शनि चालीसा appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.

]]>
||श्री शनि चालीसा||

Shani Dev Chalisa in Hindi

॥ दोहा ॥

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।

दीनन के दुःख दूर करि , कीजै नाथ निहाल ॥1॥

 जय जय श्री शनिदेव प्रभु , सुनहु विनय महाराज ।

  करहु कृपा हे रवि तनय , राखहु जन की लाज ॥2॥

अर्थ- हे माता पार्वती के पुत्र भगवान श्री गणेश, आपकी जय हो। आप कल्याणकारी है, सब पर कृपा करने वाले हैं, दीन लोगों के दुख दुर कर उन्हें खुशहाल करें भगवन। हे भगवान श्री शनिदेव जी आपकी जय हो, हे प्रभु, हमारी प्रार्थना सुनें, हे रविपुत्र हम पर कृपा करें व भक्तजनों की लाज रखें।

   जयति जयति शनिदेव दयाला । करत सदा भक्तन प्रतिपाला ॥

चारि भुजा, तनु श्याम विराजै । माथे रतन मुकुट छवि छाजै ॥

अर्थ- हे दयालु शनिदेव महाराज आपकी जय हो, आप सदा भक्तों के रक्षक हैं उनके पालनहार हैं। आप श्याम वर्णीय हैं व आपकी चार भुजाएं हैं। आपके मस्तक पर रतन जड़ित मुकुट आपकी शोभा को बढा रहा है।

परम विशाल मनोहर भाला । टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला ॥

    कुण्डल श्रवन चमाचम चमके । हिये माल मुक्तन मणि दमकै ॥

अर्थ- आपका बड़ा मस्तक आकर्षक है, आपकी दृष्टि टेढी रहती है। आपकी भृकुटी भी विकराल दिखाई देती है। आपके कानों में सोने के कुंडल चमचमा रहे हैं। आपकी छाती पर मोतियों व मणियों का हार आपकी आभा को और भी बढ़ा रहा है।

कर में गदा त्रिशूल कुठारा । पल बिच करैं अरिहिं संहारा ॥

         पिंगल, कृष्णो, छाया, नन्दन । यम, कोणस्थ, रौद्र, दुःख भंजन ॥

अर्थ- आपके हाथों में गदा, त्रिशूल व कुठार हैं, जिनसे आप पल भर में शत्रुओं का संहार करते हैं। पिंगल, कृष्ण, छाया नंदन, यम, कोणस्थ, रौद्र, दु:ख भंजन

सौरी, मन्द शनी दश नामा । भानु पुत्र पूजहिं सब कामा ॥

जापर प्रभु प्रसन्न हवैं जाहीं । रंकहुं राव करैं क्षण माहीं ॥

अर्थ- सौरी, मंद, शनि ये आपके दस नाम हैं। हे सूर्यपुत्र आपको सब कार्यों की सफलता के लिए पूजा जाता है। क्योंकि जिस पर भी आप प्रसन्न होते हैं, कृपालु होते हैं वह क्षण भर में ही रंक से राजा बन जाता है।

पर्वतहू तृण होइ निहारत । तृणहू को पर्वत करि डारत ॥

           राज मिलत वन रामहिं दीन्हयो । कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो ॥

अर्थ- पहाड़ जैसी समस्या भी उसे घास के तिनके सी लगती है लेकिन जिस पर आप नाराज हो जांए तो छोटी सी समस्या भी पहाड़ बन जाती है। हे प्रभु आपकी दशा के चलते ही तो राज के बदले भगवान श्री राम को भी वनवास मिला था। आपके प्रभाव से ही केकैयी ने ऐसा बुद्धि हीन निर्णय लिया।

वनहुं में मृग कपट दिखाई । मातु जानकी गई चुराई ॥

           लषणहिं शक्ति विकल करिडारा । मचिगा दल में हाहाकारा ॥

अर्थ- आपकी दशा के चलते ही वन में मायावी मृग के कपट को माता सीता पहचान न सकी और उनका हरण हुआ। उनकी सूझबूझ भी काम नहीं आयी। आपकी दशा से ही लक्ष्मण के प्राणों पर संकट आन खड़ा हुआ जिससे पूरे दल में हाहाकार मच गया था।

रावण की गति-मति बौराई । रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई ॥

     दियो कीट करि कंचन लंका । बजि बजरंग बीर की डंका ॥

अर्थ- आपके प्रभाव से ही रावण ने भी ऐसा बुद्धिहीन कृत्य किया व प्रभु श्री राम से शत्रुता बढाई। आपकी दृष्टि के कारण बजरंग बलि हनुमान का डंका पूरे विश्व में बजा व लंका तहस-नहस हुई।

        नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा । चित्र मयूर निगलि गै हारा ॥

हार नौलखा लाग्यो चोरी । हाथ पैर डरवायो तोरी ॥

अर्थ- आपकी नाराजगी के कारण राजा विक्रमादित्य को जंगलों में भटकना पड़ा। उनके सामने हार को मोर के चित्र ने निगल लिया व उन पर हार चुराने के आरोप लगे। इसी नौलखे हार की चोरी के आरोप में उनके हाथ पैर तुड़वा दिये गये।

भारी दशा निकृष्ट दिखायो । तेलहिं घर कोल्हू चलवायो ॥

       विनय राग दीपक महँ कीन्हयों । तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों ॥

अर्थ- आपकी दशा के चलते ही विक्रमादित्य को तेली के घर कोल्हू चलाना पड़ा। लेकिन जब दीपक राग में उन्होंनें प्रार्थना की तो आप प्रसन्न हुए व फिर से उन्हें सुख समृद्धि से संपन्न कर दिया।

  हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी । आपहुं भरे डोम घर पानी ॥

तैसे नल पर दशा सिरानी । भूंजी-मीन कूद गई पानी ॥

अर्थ- आपकी दशा पड़ने पर राजा हरिश्चंद्र की स्त्री तक बिक गई, स्वयं को भी डोम के घर पर पानी भरना पड़ा। उसी प्रकार राजा नल व रानी दयमंती को भी कष्ट उठाने पड़े, आपकी दशा के चलते भूनी हुई मछली तक वापस जल में कूद गई और राजा नल को भूखों मरना पड़ा।

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई । पारवती को सती कराई ॥

             तनिक विकलोकत ही करि रीसा । नभ उड़ि गतो गौरिसुत सीसा ॥

अर्थ- भगवान शंकर पर आपकी दशा पड़ी तो माता पार्वती को हवन कुंड में कूदकर अपनी जान देनी पड़ी। आपके कोप के कारण ही भगवान गणेश का सिर धड़ से अलग होकर आकाश में उड़ गया।

पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी । बची द्रोपदी होति उधारी ॥

     कौरव के भी गति मति मारयो । युद्ध महाभारत करि डारयो ॥

अर्थ- पांडवों पर जब आपकी दशा पड़ी तो द्रौपदी वस्त्रहीन होते होते बची। आपकी दशा से कौरवों की मति भी मारी गयी जिसके परिणाम में महाभारत का युद्ध हुआ।

     रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला । लेकर कूदि परयो पाताला ॥

शेष देव-लखि विनती लाई । रवि को मुख ते दियो छुड़ाई ॥

अर्थ- आपकी कुदृष्टि ने तो स्वयं अपने पिता सूर्यदेव को नहीं बख्शा व उन्हें अपने मुख में लेकर आप पाताल लोक में कूद गए। देवताओं की लाख विनती के बाद आपने सूर्यदेव को अपने मुख से आजाद किया।

वाहन प्रभु के सात सुजाना । जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना ॥

     जम्बुक सिह आदि नख धारी । सो फल ज्योतिष कहत पुकारी ॥

अर्थ- हे प्रभु आपके सात वाहन हैं। हाथी, घोड़ा, गधा, हिरण, कुत्ता, सियार और शेर जिस वाहन पर बैठकर आप आते हैं उसी प्रकार ज्योतिष आपके फल की गणना करता है।

 गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं । हय ते सुख सम्पत्ति उपजावै ॥

गर्दभ हानि करै बहु काजा । सिह सिद्ध्कर राज समाजा ॥

अर्थ- यदि आप हाथी पर सवार होकर आते हैं घर में लक्ष्मी आती है। यदि घोड़े पर बैठकर आते हैं तो सुख संपत्ति मिलती है। यदि गधा आपकी सवारी हो तो कई प्रकार के कार्यों में अड़चन आती है, वहीं जिसके यहां आप शेर पर सवार होकर आते हैं तो आप समाज में उसका रुतबा बढाते हैं, उसे प्रसिद्धि दिलाते हैं।

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै । मृग दे कष्ट प्राण संहारै ॥

जब आवहिं स्वान सवारी । चोरी आदि होय डर भारी ॥

अर्थ- वहीं सियार आपकी सवारी हो तो आपकी दशा से बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है व यदि हिरण पर आप आते हैं तो शारीरिक व्याधियां लेकर आते हैं जो जानलेवा होती हैं। हे प्रभु जब भी कुत्ते की सवारी करते हुए आते हैं तो यह किसी बड़ी चोरी की और ईशारा करती है।

तैसहि चारि चरण यह नामा । स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा ॥

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं । धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं ॥

अर्थ- इसी प्रकार आपके चरण भी सोना, चांदी, तांबा व लोहा आदि चार प्रकार की धातुओं के हैं। यदि आप लौहे के चरण पर आते हैं तो यह धन, जन या संपत्ति की हानि का संकेतक है।

समता ताम्र रजत शुभकारी । स्वर्ण सर्वसुख मंगल भारी ॥

    जो यह शनि चरित्र नित गावै । कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै ॥

अर्थ- वहीं चांदी व तांबे के चरण पर आते हैं तो यह सामान्यत शुभ होता है, लेकिन जिनके यहां भी आप सोने के चरणों में पधारते हैं, उनके लिये हर लिहाज से सुखदायक व कल्याणकारी होते है। जो भी इस शनि चरित्र को हर रोज गाएगा उसे आपके कोप का सामना नहीं करना पड़ेगा, आपकी दशा उसे नहीं सताएगी।

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला । करैं शत्रु के नशि बलि ढीला ॥

      जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई । विधिवत शनि ग्रह शांति कराई ॥

अर्थ- उस पर भगवान शनिदेव महाराज अपनी अद्भुत लीला दिखाते हैं व उसके शत्रुओं को कमजोर कर देते हैं। जो कोई भी अच्छे सुयोग्य पंडित को बुलाकार विधि व नियम अनुसार शनि ग्रह को शांत करवाता है।

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत । दीप दान दै बहु सुख पावत ॥

कहत राम सुन्दर प्रभु दासा । शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा ॥

अर्थ- शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष को जल देता है व दिया जलाता है उसे बहुत सुख मिलता है। प्रभु शनिदेव का दास रामसुंदर भी कहता है कि भगवान शनि के सुमिरन सुख की प्राप्ति होती है व अज्ञानता का अंधेरा मिटकर ज्ञान का प्रकाश होने लगता है।

 

॥ दोहा ॥

पाठ शनिश्चर देव को, की हों ‘भक्त’ तैयार ।

करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार ॥

अर्थ- भगवान शनिदेव के इस पाठ को ‘विमल’ ने तैयार किया है जो भी इस चालीसा का चालीस दिन तक पाठ करता है शनिदेव की कृपा से वह भवसागर से पार हो जाता है।

॥इति श्री शनि चालीसा॥

Shani Chalisa, Shani Stuti, Shani Aarti By Shailendra Bhartti I Full Audio

The post Shani Chalisa – श्री शनि चालीसा appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.

]]>
https://astrodeeva.com/shani-chalisa-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%a8%e0%a4%bf-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a4%be/feed/ 0