if ( ! function_exists( 'jnews_get_views' ) ) { /** * Gets views count. * * @param int $id The Post ID. * @param string|array $range Either an string (eg. 'last7days') or -since 5.3- an array (eg. ['range' => 'custom', 'time_unit' => 'day', 'time_quantity' => 7]) * @param bool $number_format Whether to format the number (eg. 9,999) or not (eg. 9999) * @return string */ function jnews_get_views( $id = null, $range = null, $number_format = true ) { $attr = array( 'id' => $id, 'range' => $range, 'number_format' => $number_format, ); $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $attr ) ); $views = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $views ) { $views = JNews_View_Counter()->counter->get_views( $id, $range, $number_format ); wp_cache_set( $query_hash, $views, 'jnews-view-counter' ); } return $views; } } if ( ! function_exists( 'jnews_view_counter_query' ) ) { /** * Do Query * * @param $instance * @return array */ function jnews_view_counter_query( $instance ) { $query_hash = 'query_hash_' . md5( serialize( $instance ) ); $query = wp_cache_get( $query_hash, 'jnews-view-counter' ); if ( false === $query ) { $query = JNews_View_Counter()->counter->query( $instance ); wp_cache_set( $query_hash, $query, 'jnews-view-counter' ); } return $query; } } Shani Dev Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/shani-dev/ Daily Dose of Astrology Sat, 18 Jun 2022 04:58:45 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://astrodeeva.com/wp-content/uploads/2022/03/cropped-Logo-32x32.png Shani Dev Archives - हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव https://astrodeeva.com/tag/shani-dev/ 32 32 Do not purchase these items on Saturday। समृद्धि लाना है तो शनिवार न खरीदें ये वस्तुएं https://astrodeeva.com/do-not-purchase-these-items-on-saturday-do-not-purchase-these-items-on-saturday%e0%a5%a4/ https://astrodeeva.com/do-not-purchase-these-items-on-saturday-do-not-purchase-these-items-on-saturday%e0%a5%a4/#respond Sat, 18 Jun 2022 04:58:45 +0000 https://astrodeeva.com/?p=3524 The post Do not purchase these items on Saturday। समृद्धि लाना है तो शनिवार न खरीदें ये वस्तुएं appeared first on हिंदू व्रत, त्योहार एवं उत्सव.

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Shani Rashi Parivartan 2022 : आज शनि बदल रहे है राशि, विस्तार से जाने आप पर इस का असर और उपाय https://astrodeeva.com/shani-rashi-parivartan-2022-today-saturn-is-changing-zodiac-sign-its-effect-on-you-and-its-remedy/ https://astrodeeva.com/shani-rashi-parivartan-2022-today-saturn-is-changing-zodiac-sign-its-effect-on-you-and-its-remedy/#respond Fri, 29 Apr 2022 06:54:04 +0000 https://astrodeeva.com/?p=3341 Shani Rashi Parivartan : ढाई वर्ष बाद कर्म और न्याय के देवता शनि देव अपनी ही राशि मकर से निकलकर अपनी दूसरी स्वराशि कुंभ में आज, शुक्रवार 29 अप्रैल 2022 को दोपहर 12 बजकर 12 मिनट पर प्रवेश करेंगे (Shani Rashi Parivartan) और प्रत्येक राशि को अपनी स्थिति अनुसार अपना प्रभाव देना प्रारंभ करेंगे। ऐसे में […]

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Shani Rashi Parivartan : ढाई वर्ष बाद कर्म और न्याय के देवता शनि देव अपनी ही राशि मकर से निकलकर अपनी दूसरी स्वराशि कुंभ में आज, शुक्रवार 29 अप्रैल 2022 को दोपहर 12 बजकर 12 मिनट पर प्रवेश करेंगे (Shani Rashi Parivartan) और प्रत्येक राशि को अपनी स्थिति अनुसार अपना प्रभाव देना प्रारंभ करेंगे। ऐसे में इस गोचर काल के दौरान हर राशि तो प्रभावित होगी ही, साथ ही इस गोचर का प्रभाव देश और दुनिया में भी कई बड़े बदलाव लेकर आएगा।
वैदिक ज्योतिष में शनि को एक शिक्षक के रूप में जाना जाता है और यह कर्म भाव का कारक होता है। यह शोक, कष्ट, दुर्घटनाएं और पुरानी बीमारियां भी दे सकता है लेकिन दुःख के बाद अंतिम परिणाम स्वरूप एक अच्छी सीख और सही व ग़लत के बीच के अंतर को समझाता भी है। भगवान यम शनि के साथ जुड़े हुए हैं और भगवान लोगों द्वारा किए गए कर्मों के हिसाब से मूल्यांकन करके दुनिया को संतुलित करते हैं।
ज्योतिष के अनुसार मकर और कुंभ राशि के स्वामी शनि है। ये दोनों राशियां शनि के लक्षणों का प्रतिनिधित्व करती हैं यानी कि परिपक्वता, व्यावहारिकता और कर्तव्यनिष्ठा। इसके अलावा, निष्पक्ष व्यवहार करने वाला शनि संतुलन की राशि यानि तुला राशि में उच्च का होता है। जिस के स्वामी शुक्र ग्रह है। इन राशियों पर शनि का प्रभाव तुलनात्मक रूप से सकारात्मक माना जाता है।
शनि ग्रह को नौ ग्रहो मे सबसे धीना माना जाता है अर्थात इसकी ग्रह चाल बहुत धीमी होती है और इसे एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करने में लगभग 2.5 वर्ष लगते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार यह एक हानिकर यानी नुकसान पहुंचाने वाला ग्रह है आमतौर पर इसकी दशा के प्रभाव में उदास, दुःखी और तनावपूर्ण महसूस करते हैं। शनि ग्रह के परिणाम धीमे लेकिन प्रबल होते हैं, हालांकि यह जातकों की जन्म कुंडली में शनि के स्थान पर निर्भर करता है। जातक की कुंडली में शनि किस भाव में स्थित है, इससे भी परिणाम प्रभावित होते हैं।
शनि को कर्म ग्रह कहा जाता है और यह अच्छे कर्म करने वालों को सकारात्मक परिणाम देता है तथा बुरे कर्मों या अवैध कार्यों में शामिल लोगों को नकारात्मक परिणाम देता है। शनिदेव आज 29 अप्रैल 2022 को दोपहर 12 बजकर 12 मिनट बजे कुंभ राशि में गोचर करेंगे। यहाँ से वक्री होकर 12 जुलाई 2022 को मकर राशि में प्रवेश करेगे।

शनि गोचर का राशियों पर प्रभाव (Effect of Shani Rashi Parivartan)

मेष राशि (Arise)
(चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)

राशि वालों पर शनि गोचर (Shani Rashi Parivartan) के दौरान आपको पेशेवर जीवन में अधिक संघर्ष करना पड़ सकता है तभी जाकर आपके सहकर्मी या संगठन के लोग आपकी क्षमताओं और योग्यताओं की क़दर कर सकते हैं। इस दौरान आपको अपनी क़ाबिलियत और ख़ुद को साबित करने के मौके भी मिल सकते हैं। साथ ही जो जातक प्रशासनिक नौकरी, लॉ फर्म और ईंधन उद्योग में हैं, उनके लिए यह अवधि अनुकूल रहने की संभावना है। जो जातक सिविल सेवक हैं इस दौरान वे अपने कार्य से अपनी सकारात्मक छवि बनाने में सफल रह सकते हैं। इसके साथ ही आपको बता दें कि शनि अप्रैल महीने में आपकी कुंडली के ‘आय और लाभ’ के ग्यारहवें भाव से गोचर करेगा। इस गोचर के दौरान आपके द्वारा की गई सारी मेहनत का फल मिलने की संभावना है। आपके वेतन में वृद्धि हो सकती है या फिर किसी प्रकार का प्रोत्साहन मिल सकता है। जो जातक फ्रेशर हैं और नौकरी की तलाश में हैं उन्हें इस दौरान उपयुक्त नौकरी मिलने की संभावना है और यदि आप अपना ख़ुद का कोई व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रहे हैं तो भी आपके लिए यह समय अनुकूल साबित हो सकता है। इस दौरान आप अपने कार्य को लेकर अधिक उत्साहपूर्ण हो सकते हैं, जिसकी वजह से आप इस दौरान थोड़ा कम सामाजिक रह सकते हैं। जो जातक सरकारी कर्मचारी हैं, उनके लिए भी यह समय अनुकूल रहने की संभावना है। इस दौरान आप अपने उच्च अधिकारियों से किसी प्रकार का सम्मान पा सकते हैं या आपके कार्यों की सराहना की जा सकती है। मगर याद रहे कि शनि जुलाई महीने में वापस आपके दसवें भाव में गोचर करेगा और इस दौरान शनि का प्रभाव आपके कार्यक्षेत्र में बदला हुआ नज़र आ सकता है। इस अवधि में आपको अपने वरिष्ठ अधिकारियों या प्रबंधन द्वारा आलोचनाओं का सामना करना पड़ सकता है। आपको यह सलाह दी जाती है कि किसी भी ग़ैरकानूनी गतिविधि या फिर रिश्वत जैसे कमाई के छिपे स्रोत से सावधान रहें। ऐसी परेशानियां आपके कार्यक्षेत्र में आपकी छवि व प्रतिष्ठा को ख़राब कर सकती हैं।
उपाय: प्रतिदिन नहाने के पानी में कुछ काले तिल डालकर प्रयोग करने से आप शनि के नकारात्मक प्रभाव को कम कर सकते हैं।

वृषभ राशि (Taurus)
(ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)

शनि के इस गोचर (Shani Rashi Parivartan) से वृषभ राशि के जातकों को अपनी सारी मेहनत का फल मिलने की संभावना है। शनि का आपके इस भाव में स्थित रहना आपके लिए बहुत फ़ायदेमंद साबित हो सकता है। इस दौरान लोगों को आपके कार्यों को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल हो सकता है, चाहे वो व्यक्तिगत स्तर का हो या फिर पेशेवर स्तर का। हालांकि, इन सकारात्मक परिणामों को देखने के लिए आपको थोड़ा इंतज़ार करना पड़ सकता है चूंकि शनि ग्रह की चाल बहुत धीमी होती है इसलिए जब शनि आपकी कुंडली में भाग्य के भाव में स्थित होगा तब वो धीरे-धीरे आपको अपने सकारात्मक प्रभाव दिखाएगा। इस दौरान आपकी धारणाओं में बदलाव आने की संभावना है मुमकिन है कि आप धार्मिक परंपराओं से ज़्यादा कर्म पर विश्वास कर सकते हैं। अप्रैल माह के अंत में शनि आपके दसवें भाव में गोचर करेगा जो कि आपके पेशेवर जीवन में कुछ अच्छे अवसर ला सकता है। जैसे कि इस दौरान आपको अपनी मनचाही नौकरी मिल सकती है। कार्यक्षेत्र में आपके संबंध अपने सहयोगियों व अन्य सदस्यों के साथ मजबूत हो सकते हैं और आपका ताल-मेल उनके साथ बहुत बेहतर रह सकता है। इसके बाद शनि आपके नौवें भाव में गोचर करेगा जो कि कार्यक्षेत्र में आपके लिए कुछ परेशानियां ला सकता है। इस दौरान आपका स्थानांतरण हो सकता है या फिर कुछ नए सहकर्मियों से मुलाक़ात हो सकती है। हालांकि, यह अवधि आपके अटके हुए कार्यों को गति प्रदान कर सकती है। यदि आपका कोई कार्य किसी वजह से अटका हुआ है तो इसकी प्रबल संभावना है कि इस दौरान आप का वह कार्य सम्पन्न हो सकता है और आप उसमें सफलता हासिल कर सकते हैं।
उपाय: बीच वाली उंगली में लोहे का छल्ला धारण करना आपके लिए बेहतर हो सकता है।

मिथुन राशि (Gemini)
(का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)

शनि की इस स्थिति (Shani Rashi Parivartan) की वजह से इस दौरान आपके अंदर गूढ़ रहस्य और विज्ञान को जानने की तीव्र इच्छा पैदा हो सकती है। इसके अलावा आपके अंदर दुःख और दर्द को कम करने के लिए वैकल्पिक उपचार करने की तरफ़ आपका झुकाव रह सकता है। इस दौरान आप अत्यधिक विचारशील हो सकते हैं, जिसकी वजह से किसी भी कार्य को लेकर आपकी प्रतिक्रिया काफ़ी धीमी रहने की आशंका है। आपको सलाह दी जाती है कि आप इस अवधि में लंबी सांस लेने जैसे व्यायाम और ध्यान को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। इससे आपको अपने अंतर्ज्ञान को विकसित करने में मदद मिल सकती है। साथ ही योग आपके जीवन में सामान्य स्वास्थ्य और जागरूकता लाने में सहायक सिद्ध हो सकता है। अप्रैल के महीने में शनि आपके नौवें भाव में गोचर करेगा जिसकी वजह से आपके पुराने रुके हुए कार्य में प्रगति आने की संभावना है। इस दौरान आप स्वभाव से काफ़ी धैर्यवन और शांत रह सकते हैं। साथ ही इस अवधि में काम के सिलसिले में विदेश यात्रा के भी प्रबल योग बन रहे हैं। इस अवधि में आप अपने करियर और आमदनी में वृद्धि के लिए जीतोड़ मेहनत और सकारात्मक प्रयास करते नज़र आ सकते हैं। हालांकि, आशंका है कि इस दौरान आपका आपके छोटे भाई-बहन या दोस्तों से किसी बात को लेकर मतभेद हो सकते हैं। जुलाई के महीने में शनि आपके आठवें भाव में पुनः गोचर करेगा जिसकी वजह से कुछ पुराने रोग आपके जीवन में वापस से उभर सकते हैं। आपको सलाह दी जाती है कि आप अपनी हड्डियों का ख़याल रखें चूंकि इस अवधि में हड्डी से जुड़ी चोट, समस्या या कोई गंभीर रोग आपको परेशान कर सकता है। आपको दांत दर्द और नाखूनों में भंगुरता जैसी समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है।
उपाय: अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रत्येक शनिवार के दिन भगवान शनि के सामने सरसों के तेल का दीया जलाएं।

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कर्क राशि ( Cancer)
(ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)

Shani Rashi Parivartan के कारण आप अपने वैवाहिक आनंद को लेकर अनिश्चितताओं का सामना कर सकते हैं और जीवनसाथी के साथ आपके संबंध इस दौरान बहुत ज़्यादा सौहार्दपूर्ण न रहने की आशंका है। इस अवधि में आप ऐसा महसूस कर सकते हैं कि आपका जीवनसाथी आपको नज़रअंदाज़ कर रहा है या फिर आपका ढंग से ख़याल नहीं रहा है। कर्क राशि के वह जातक जो विवाह करने के इच्छुक हैं उन्हें इस दौरान अपने जीवनसाथी को ढूँढने में कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। आशंका है कि इस अवधि में आप व्यवसाय में अपने साझेदार के साथ ताल-मेल बैठाने में असफल रह सकते हैं, जिसका नकारात्मक प्रभाव आपके व्यवसाय के उत्पादन पर पड़ सकता है। शनि का आपके आठवें भाव में गोचर आपके पेशेवर जीवन में समस्याओं की वृद्धि कर सकता है। आपके कर्मचारी या सहयोगी इस अवधि में आपके खिलाफ़ कोई साजिश रच सकते हैं। इस दौरान आप ख़ुद को अकेला, भटका हुआ और तनावपूर्ण महसूस कर सकते हैं क्योंकि पेशेवर जीवन में आपकी हर योजना विफल रहने की आशंका है। इसके अलावा निजी जीवन में भी आपके और आपके साझेदार या जीवनसाथी के बीच आपके मित्रों या फिर रिशतेदारों की वजह से ग़लतफ़हमियां पैदा हो सकती हैं। जुलाई के महीने में शनि आपके सातवें भाव में वापस गोचर करेगा। यह अवधि आपके वैवाहिक जीवन के दृष्टिकोण से अनुकूल रह सकती है। कर्क राशि के वह जातक जो एकल जीवन व्यतीत कर रहे हैं, उन्हें इस अवधि में मनपसंद जीवनसाथी मिलने की संभावना है। विवाहित कर्क राशि के जातकों के वैवाहिक जीवन में चल रहे पुराने मतभेद इस अवधि में ख़त्म हो सकते हैं। यह अवधि कर्क राशि के उन जातकों के भी अनुकूल रह सकती है जो वकील या फिर चिकित्सक के पेशे में हैं।
उपाय: शनिवार के दिन ज़रूरतमन्द और ग़रीब लोगों को चप्पल और काले कपड़े दान में दें।

सिंह राशि (Leo)
(मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)

शनि के गोचर (Shani Rashi Parivartan) के प्रभाव से सिंह राशि के वह जातक जो किसी कानूनी प्रक्रियाओं में उलझे हुए हैं, इस अवधि में संभावना है कि कानूनी फैसले उनके पक्ष में आएंगे। इस दौरान सिंह राशि के वह जातक जो किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें उनकी मेहनत का सकारात्मक फल प्राप्त हो सकता है। यह अवधि उन जातकों के लिए अच्छी नहीं रहने की आशंका है जो विवाहित हैं क्योंकि इस दौरान आपका आपके जीवनसाथी से छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा हो सकता है। इस दौरान आप दोनों एक दूसरे की बातों और विचारों को समझने या समझाने में असमर्थ रह सकते हैं, जिसकी वजह से आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि आप दोनों के संबन्धों में एक प्रकार की दूरी आ चुकी है। अप्रैल अंत के दौरान शनि का आपके सातवें भाव में गोचर होगा जो कि सिंह राशि के उन जातकों के लिए अनुकूल रह सकता है जो साझेदारी में कार्य करते हैं। इस दौरान आप अपने साझेदार के परिपक्व फैसले और सटीक सुझावों से लाभ प्राप्त कर सकते हैं। वे जातक जो किसी जीवनसाथी की तलाश में हैं, उन्हें इस अवधि में भाग्य का साथ मिल सकता है। जुलाई के महीने में शनि वापस आपके छठे भाव में गोचर करेगा। आपको सलाह दी जाती है कि इस दौरान अपने स्वास्थ्य का ख़ास ख़याल रखें चूंकि ऐसी आशंका है कि आपके जीवन में कोई पुराना रोग फिर से उभर सकता है। इसके अलावा आपको इस दौरान शल्य चिकित्सा और चोट लगने की भी आशंका है। यह समय उन जातकों के लिए भी अच्छा रहने की संभावना है जो कानून की पढ़ाई कर रहे हैं या फिर कानूनी मामलों से जुड़े किसी पेशे में हैं। सिंह राशि के वह जातक जो नौकरी में हैं उनके लिए भी यह समय अनुकूल रह सकता है। इस दौरान आपको अपनी कड़ी मेहनत का फल प्राप्त होने की संभावना है और साथ ही इस दौरान आपके वरिष्ठों के लिए आपकी मेहनत को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल साबित हो सकता है।
उपाय: काले कुत्ते को शाम में दूध और रोटी खिलाएं, ख़ासकर शनिवार के दिन।

कन्या राशि (Virgo)
(टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)

कन्या राशि के जातकों के लिए यह अवधि छात्रों के लिए बहुत अच्छी साबित नहीं हो सकती है क्योंकि इस दौरान उन्हें अपनी पढ़ाई में कुछ बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। यह भी हो सकता है कि उनकी एकाग्रता भंग हो जाए और उनके प्रदर्शन में भी कमी आ सकती है। हालांकि, जो जातक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए यह समय तुलनात्मक रूप से बेहतर रहने की संभावना है चूंकि इस दौरान उनमें संघर्ष करने की भावना उन्हें हर चुनौती का सामना करने में सक्षम बना सकती है। इस अवधि में जो लोग परिवार नियोजन के बारे में सोच रहे हैं, उन्हें थोड़ा इंतज़ार करना पड़ सकता है क्योंकि इस दौरान आपके द्वारा कई प्रयासों के बावजूद कोई अच्छी ख़बर न मिलने की आशंका है। जुलाई माह में शनि कन्या राशि के छठे भाव में गोचर करेगा, जो कि लॉ, चार्टर्ड अकाउंटेंसी और प्रशासनिक नौकरी की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए फ़ायदेमंद साबित हो सकता है। इस दौरान आपको अच्छे मौके मिलने की संभावना है। यह अवधि नौकरी वाले जातकों के भी अनुकूल है। इस दौरान आपको अपने कठिन परिश्रम और निरंतर प्रयासों के चलते किसी प्रकार का प्रोत्साहन या फिर वेतन में वृद्धि होने की संभावना है। जो जातक इस दौरान अपनी नौकरी में बदलाव करना चाहते हैं, उनके लिए भी यह अवधि सकारात्मक परिणाम दे सकती है। जुलाई माह के अंत में शनि आपके पांचवें भाव में गोचर करेगा। इस दौरान आपको सलाह दी जाती है कि अपने बच्चों की अच्छी तरह से देखभाल करें चूंकि इस अवधि में वे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर सकते हैं। आर्थिक लाभ के लिहाज से यह अवधि आपके लिए बहुत फ़ायदेमंद साबित हो सकती है क्योंकि इस दौरान आप अपने अटके हुए धन को सफलतापूर्वक निकालने में सक्षम हो सकते हैं या फिर किसी प्रकार का अप्रत्याशित लाभ मिल सकता है। इस अवधि में यदि आप किसी प्रकार का ऋण लेने की योजना बना रहे हैं तो इसकी पूरी संभावना है कि बिना किसी परेशानी के आपका ऋण आसानी से स्वीकृत हो जाए।
उपाय: मंगलवार और शनिवार की शाम को पीपल के पेड़ पर सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

तुला राशि (Libra)
(रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)

शनि के कुम्भ मे गोचर के दौरान आपके घर की सुख-शांति भंग रहने की आशंका है। घर के सदस्यों के बीच मतभेद हो सकते हैं या किसी बात को लेकर लड़ाई-झगड़ा भी सकता है जो कि आपको दुःख और निराशा की ओर लेकर जा सकता है। इस दौरान आपको अपने मन की शांति के लिए घर से दूर जाने का ख़याल भी आ सकता है। जो जातक इस अवधि में एक स्थान से दूसरे स्थान पर विस्थापित होने की योजना बना रहे हैं, उनका यह फ़ैसला सही साबित हो सकता है क्योंकि यह विस्थापन आपके जीवन में आनंद और ख़ुशी ला सकता है। इस अवधि में आपका अपनी माँ के साथ आपसी समझ को लेकर कोई समस्या हो सकती है। साथ ही, इस दौरान आपकी माँ को स्वास्थ्य संबंधी कोई गंभीर समस्या भी हो सकती है इसलिए आपको सलाह दी जाती है कि ऐसी स्थिति में तुरंत किसी चिकित्सक से संपर्क करें, ख़ुद से कोई उपचार करने में समय व्यर्थ करें। अप्रैल माह में शनि आपके पांचवें भाव से गोचर करेगा जो कि छात्रों के लिए कई सकारात्मक परिणाम ला सकता है। जो छात्र अपने घर से निकलकर बाहर पढ़ाई करने की योजना बना रहे हैं, इस दौरान उन्हें अच्छे अवसर प्राप्त होने की संभावना है, साथ ही आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें मनचाहा विश्वविद्यालय भी मिल सकता है। जो जातक ख़ुद के व्यवसाय में हैं, उन्हें इस दौरान अपने व्यवसाय से अच्छा लाभ मिलने की संभावना है। यदि आप अपने शौक और रुचि से जुड़ा कोई व्यवसाय करने की योजना बना रहे हैं तो यह समय आपके लिए लाभकारी रह सकता है क्योंकि इस व्यवसाय में आप पूरे मन और लगन के साथ सफलता प्राप्त करने का प्रयास कर सकते हैं। जुलाई महीने में शनि वापस आपके पांचवें भाव में गोचर करेगा। इस दौरान यदि आप अपना घर बनाने या ज़मीन ख़रीदने की योजना बनाते हैं तो आपको इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं चूंकि इस अवधि में आप एक अच्छा सौदा करने में सक्षम रह सकते हैं।
उपाय: शनिवार के दिन काले या नीले रंग के वस्त्र धारण करें।

वृश्चिक राशि (Scorpio)
(तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)

शनि गोचर का प्रभाव आपको कठिन परिश्रम करने के लिए अधिक सक्रिय बना सकता है। इस दौरान आपके सामर्थ्य, साहस और पराक्रम में वृद्धि हो सकती है। आपके संबंध अपने छोटे भाई-बहनों से बहुत अच्छे रहने की संभावना है और वे आपके हर प्रयास में आपका सहयोग कर सकते हैं। इस गोचर के दौरान आप साहसिक और खेल गतिविधियों में हिस्सा ले सकते हैं। साथ ही इस अवधि में आप अपनी शारीरिक फिटनेस का भी ख़ास ख़याल रख सकते हैं और इसके लिए आप अपना रुख कुछ आक्रामक व्यायामों की तरफ़ कर सकते हैं जैसे कि जिम, एथलेटिक्स या शक्ति योग इत्यादि। इस दौरान आपके संबंध अपने दोस्तों से बहुत अधिक सौहार्दपूर्ण नहीं रह सकते हैं और आप इन रिश्तों में थोड़ी खटास का सामना कर सकते हैं। जुलाई माह में शनि आपके चौथे भाव से गोचर करेगा जो कि पढ़ने वाले जातकों के अध्ययन में बाधाएं उत्पन्न कर सकता है। जो जातक ख़ुद का व्यवसाय चला रहे हैं, उन्हें इस अवधि में रुकावट या ठहराव का सामना करना पड़ सकता है। यदि आप किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं तो इस दौरान आपके स्वास्थ्य में सुधार होने की संभावना है। जुलाई माह में शनि वापस आपके तीसरे भाव में गोचर करेगा, इस अवधि के दौरान आप कुछ अनुत्पादक और थकाऊ यात्राओं की योजना बना सकते हैं। साथ ही अपने ख़र्चों को लेकर थोड़े लापरवाह हो सकते हैं, अनावश्यक चीज़ों में अधिक ख़र्च कर सकते हैं। आप इस दौरान अपने परिवार के सदस्यों पर भी ख़र्च कर सकते हैं जैसे कि आप उन्हें महंगे व फ़ैन्सी उपहार देकर ख़ुश करने का प्रयास कर सकते हैं।
उपाय: प्रत्येक शनिवार को भगवान शनि के मंदिर में काली दाल का दान करें।

धनु राशि (Sagittarius)
(ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)

शनि गोचर के दौरान धनु जातकों को आर्थिक रूप से लाभ मिलने की संभावना है। इस दौरान आपकी आमदनी में वृद्धि हो सकती है और आप अधिक बचत करने में सक्षम रह सकते हैं। जो जातक इस अवधि में विदेश जाने की योजना बना रहे हैं, उन्हें इस दौरान कई मौके मिल सकते हैं। यह अवधि इस स्थान से दूसरे स्थान में प्रवासन के लिए भी अनुकूल रह सकती है और यदि आप किसी संपत्ति में निवेश करने की योजना बना रहे हैं तो इसमें भी आपको सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। इस दौरान आपके संबंध अपने परिवार से विशेष रूप से अपनी माँ के साथ अधिक मजबूत रह सकते हैं। साथ ही जो लोग एकल जीवन व्यतीत कर रहे हैं, उन्हें इस दौरान अच्छे प्रस्ताव मिल सकते हैं और इस अवधि में आपकी सगाई होने की भी प्रबल संभावना है। इसके बाद शनि आपके तीसरे भाव में गोचर करेगा, जो कि आपकी धार्मिक प्रवृत्ति में वृद्धि ला सकता है। इस दौरान आपका झुकाव शास्त्रों के बारे में जानने की ओर रह सकता है और आप धार्मिक कार्यों में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले सकते हैं। यह अवधि उन विवाहित महिलाओं के लिए भी अनुकूल रह सकती है, जो इस दौरान गर्भ धारण करने की योजना बना रही हैं क्योंकि शनि इस अवधि में आपके संतान भाव पर दृष्टि डालेगा। इस समयावधि में आप अपने शौक और रुचि से संबंधित कोई व्यवसाय करने की योजना पर भी कार्य कर सकते हैं। अप्रैल माह में शनि आपके दूसरे भाव में गोचर करेगा, जिससे आपको इस दौरान किसी प्रकार का आकस्मिक लाभ या आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है। यह अवधि उन जातकों के लिए भी अनुकूल रह सकती है, जो किसी प्रकार का शोध कार्य कर रहे हैं। वे इस दौरान अपने प्रयासों में सकारात्मक फल प्राप्त कर सकते हैं।
उपाय: शनिवार के दिन किसी ज़रूरतमंद को सरसों का तेल का दान करें।

मकर राशि (Capricornus)
(भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)

मकर राशि के जातकों के लिए यह गोचर मकर राशि के जातकों के जीवन में अनुशासन व कठिन परिश्रम ला सकता है। इस दौरान आप एक से अधिक स्रोतों से आमदनी करने में सक्षम हो सकते हैं। जो जातक इस दौरान कानून, चार्टर्ड अकाउंटेंसी या सचिवालय की तैयारी कर रहे हैं, इस अवधि में वे अपनी तैयारी को लेकर अधिक दृश निश्चयी हो सकते हैं और अपने लक्ष्य की ओर अधिक केन्द्रित हो सकते हैं, जिससे वे अपनी पढ़ाई के विषयों में निपुणता हासिल कर सकते हैं। जो लोग पेट्रोलियम उद्योग से जुड़े हुए हैं, उन्हें भी इस अवधि में अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। इस दौरान आपको अपने स्वास्थ्य का ख़ास ख़याल रखने की ज़रूरत है क्योंकि इस अवधि में आप शरीर दर्द और जोड़ों के दर्द से ग्रसित हो सकते हैं। इसके बाद शनि आपके दूसरे भाव में गोचर करेगा और यह समय व्यापार करने वालों के लिए ख़ासकर उनके लिए जो अपने पारिवारिक व्यापार से जुड़े हुए हैं, उनके लिए बेहद लाभप्रद साबित हो सकता है। इस दौरान आप अपने काम से बहुत अच्छा मुनाफ़ा कमा सकते हैं। साथ ही आपको इस दौरान किसी अटके हुए संसाधन से भी अचानक लाभ मिलने की संभावना है। जुलाई माह में शनि वापस आपकी लग्न राशि में गोचर करेगा। इस दौरान जो जातक एकल जीवन व्यतीत कर रहे हैं और विवाह करने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए इस अवधि में मनपसंद व्यक्ति से विवाह के योग बन रहे हैं। यदि आप पूर्व में किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे थे तो इस दौरान उस समस्या से निदान पाने की प्रबल संभावना है। आपको बता दें कि इस अवधि में आपकी वाणी कठोर और उग्र हो सकती है इसलिए आपको सलाह दी जाती है कि किसी से भी बात करते समय थोड़ी सावधानी बरतें चूंकि आपके कठोर शब्द व उग्र वाणी से आपके प्रियजन भावनात्मक रूप से आहत हो सकते हैं।
उपाय: बीच वाली अंगुली यानि मध्यमा में लैपिस लाज़ुली अर्थात लाजवर्द स्टोनधारण करें।

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कुंभ राशि (Aquarius)
(गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)

कुम्भ जातको के लिए यह अवधि कुंभ राशि के उन छात्रों के लिए अनुकूल रहने की संभावना है जो विदेश में पढ़ाई करने के इच्छुक हैं चूंकि इस दौरान स्थानांतरण के प्रबल योग बन रहे हैं। कुंभ राष के वह जातक जो किसी पुरानी बीमारी से जूझ रहे हैं, उन्हें इस अवधि में बार-बार इलाज के लिए अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। इस दौरान आप स्वभाव से कंजूस रह सकते हैं और आप अपने आम ख़र्चों में कटौती कर सकते हैं। कुंभ राशि के जातकों को सलाह दी जाती है कि वे इस अवधि में अपने पैरों का विशेष ध्यान रखें क्योंकि आपको इस दौरान पैरों में छाले या फिर चोट लगने की आशंका है। आप काम के सिलसिले में विदेश जाने की योजना भी बना सकते हैं। अप्रैल के महीने में शनि आपकी लग्न राशि में गोचर करेगा। यह अवधि कुंभ राशि के विवाहित जातकों के लिए अनुकूल रहने की संभावना है क्योंकि इस दौरान आपका आपके जीवनसाथी के साथ बेहतर ताल-मेल रह सकता है। आप उनके साथ एक स्थिर और स्वस्थ रिश्ता साझा करते नज़र आ सकते हैं। पेशेवर जीवन में आपको साझेदारी में काम करने के कुछ अच्छे अवसर प्राप्त हो सकते हैं। हालांकि, आपके जीवन में इस दौरान आलस्य और सुस्ती हावी रह सकती है लेकिन समय के साथ आप कड़ी मेहनत के लिए अपनी कमर कस सकते हैं। आपके पुराने प्रयासों का फल आपको इस अवधि में प्राप्त होने की संभावना है। जुलाई माह में शनि वापस आपके बारहवें भाव में गोचर करेगा। यह अवधि कुंभ राशि के उन जातकों के लिए बेहतर साबित हो सकती है जो अंतर्राष्ट्रीय या बहुराष्ट्रीय कंपनियों में कार्यरत हैं चूंकि आप इस अवधि में अपने कार्यक्षेत्र में यश अर्जित कर सकते हैं जिसकी वजह से आपको प्रोत्साहन या फिर किसी प्रकार का लाभ होने की संभावना है।
उपाय: शनि स्तोत्र का पाठ करें और शनिवार का व्रत करें।

मीन राशि (Pisces)
(दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)

मीन राशि के जातकों के लिए यह अवधि आपके लिए बहुत मनोरंजक और आनंदपूर्ण हो सकती है। इस दौरान आप अपने दोस्तों और करीबियों के साथ किसी यात्रा की योजना बना सकते हैं। यह अवधि उन जातकों के अनुकूल नहीं रह सकती है जो ख़ुद का व्यापार चला रहे हैं और विशेष रूप से विदेशी व्यापार में शामिल हैं। इस दौरान मीन राशि के जो जातक व्यवसाय से जुड़े हैं, वे इस अवधि में अच्छी ख़ासी आमदनी कर सकते हैं। साथ ही आप अपने आस-पास के लोगों के बीच अपना प्रभाव डालने वाली हर सभा का हिस्सा बन सकते हैं और आप इस दौरान अधिक सामाजिक भी हो सकते हैं। छात्रों के लिए यह अवधि अच्छी रहने की संभावना है, इस दौरान वे अपने विषयों को अच्छी तरह समझने व याद करने में सक्षम हो सकते हैं। इसके बाद शनि आपके बारहवें भाव में गोचर करेगा। इस दौरान जातकों को कुछ आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है चूंकि इस अवधि में आपके खर्चे आपकी आमदनी से ज़्यादा हो सकते हैं। इस दौरान आपको कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है और आपको नींद न आने की शिकायत भी हो सकती है। आपको यह सलाह दी जाती है कि इस दौरान सड़क पैदल चलते समय अधिक सावधानी बरतने का प्रयास करें चूंकि इस अवधि में आपके साथ किसी प्रकार की छोटी दुर्घटना होने की आशंका है, जिससे आपको हड्डी में टूट या चोट की भी परेशानी हो सकती है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले जातकों के लिए यह समय अनुकूल रह सकता है क्योंकि आपकी ऊर्जा, एकाग्रता और गतिशीलता आपको किसी भी मुश्किल से मुश्किल प्रतियोगिता का सामना करने में मदद कर सकती है। इसके बाद शनि आपके ग्यारहवें भाव में गोचर करेगा। इस दौरान आप थोड़े सामाजिक हो सकते हैं। साथ ही कुछ नए दोस्त भी बना सकते हैं। इस अवधि में अपने संबंध आपके बड़े भाई-बहनों से मजबूत हो सकते हैं और उनसे आपको कुछ आर्थिक लाभ या किसी प्रकार की सहायता मिलने की भी संभावना है।
उपाय: शनिवार की शाम में मजदूरों को वस्त्र दान करें।

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शनि जयंती 2021 : जाने जन्म की कथा और प्रमुख सिद्ध मंत्र https://astrodeeva.com/%e0%a4%b6%e0%a4%a8%e0%a4%bf-%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%80-2021-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%a5/ https://astrodeeva.com/%e0%a4%b6%e0%a4%a8%e0%a4%bf-%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%80-2021-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%a5/#respond Thu, 10 Jun 2021 03:54:00 +0000 https://astrodeeva.com/?p=2153 आज 10 जून 2021 (गुरुवार), जेष्ठ कृष्ण पक्ष अमावस्या (विक्रम संवत 2078) को शनि जयंती मनाई जा रही है। पुराणों के अनुसार कर्म फल दाता शनि देव के सिर पर एक स्वर्ण मुकुट शोभित है, उनके गले में माला तथा शनि देव नीले वस्त्र धारण किए हुए हैं। शनिदेव की सवारी गिद्ध पर है। शनि […]

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आज 10 जून 2021 (गुरुवार), जेष्ठ कृष्ण पक्ष अमावस्या (विक्रम संवत 2078) को शनि जयंती मनाई जा रही है। पुराणों के अनुसार कर्म फल दाता शनि देव के सिर पर एक स्वर्ण मुकुट शोभित है, उनके गले में माला तथा शनि देव नीले वस्त्र धारण किए हुए हैं। शनिदेव की सवारी गिद्ध पर है। शनि देव के हाथों में धनुष, बाण तथा त्रिशूल है।

शनि देव के जन्म की पौराणिक कथा-

स्कंद पुराण के काशीखंड के मुताबिक शनिदेव का जन्म सूर्य देव और संवर्णा की मिलन से हुआ था। सर्वप्रथम सूर्य देव का विवाह राजा दक्ष की कन्या संज्ञा से हुआ था। संज्ञा हमेशा सूर्य देव के तप से परेशान रहती थी। समय बीतने के साथ संज्ञा के गर्भ से यमराज, यमुना और वैवस्वत उत्पन्न हुए। लेकिन संज्ञा अब भी सूर्य देव के तप से परेशान थी। संज्ञा ने सूर्य देव के तप को कम करने के लिए एक तपस्या की। तप के प्रभाव से संज्ञा ने एक छाया नामक संवर्णा को पैदा किया। ऐसा करने के बाद संज्ञा अपने बच्चों की जिम्मेदारी सूर्य देव और संवर्णा को देकर अपने पिता के घर चले गई। संज्ञा ने अपनी परेशानी अपने पिता को बताई, सारी बात जानकर संज्ञा के पिता बहुत क्रोधित हुए और संज्ञा को डांट कर वापस भेज दिया। लेकिन अपने पति के घर वापस जाने के बजाय, संज्ञा जंगल में चले गई। उधर संज्ञा का जंगल में रहना तथा इधर संवर्णा और सूर्य देव का मिलन शनि देव, मनु और भद्रा नामक तीन संतानों के जन्म का कारण बना। इसी प्रकार शनि देव भी सूर्य के पुत्र है, इसीलिए , शनिदेव को भी सूर्यपुत्र कहा जाता है।

शनि की क्रूर दृष्टि –

ब्रह्म पुराण के अनुसार सूर्य देव ने अपने पुत्र शनि का विवाह चित्ररथ की कन्या से करवाया था। शनि देव की पत्नी परम तेजस्विनी थी। एक रात वह पुत्र प्राप्ति की इच्छा से शनि के पास पहुंची, लेकिन उस समय शनि देव भगवान विष्णु के ध्यान में अत्यंत लीन अवस्था में थे। शनिदेव की पत्नी उनकी प्रतीक्षा करते-करते थक गई, लेकिन फिर भी शनि देव ने अपनी आंखें नहीं खोली, जिस कारण से उनका ऋतुकाल निष्फल हो गया। इसी वजह से उनकी पत्नी ने क्रुद्ध होकर उन्हें शाप दिया कि आज से जिसे भी तुम देखोंगे, वह नष्ट हो जाएगा। इसीलिए आज भी लोग मंदिरों में शनिदेव की मूर्ति को सामने से देखना बाध्य किया करते है। जिससे कि शनि देव की क्रूर दृष्टि हम पर भी न पड़े और हमारा भी कोई अनिष्ट न हो।

शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है, कैसे?

ज्योतिषानुसार माना जाता है कि हमारे शरीर में सभी नौ ग्रहों के तत्व मौजूद होते हैं। जब भी कोई व्यक्ति समाज में अपराध करता है, तो शनि देव के आदेश अनुसार, राहु और केतु उसे दंड देने के लिए सक्रिय हो जाते हैं। शनि के न्यायालय में दंड पहले दिया जाता है, और कार्यवाही बाद में होती है इस बात पर कि व्यक्ति के चाल-चलन आगे भी इसी प्रकार ठीक रहे, तो उसे दंड की अवधि पूर्ण होने पर, फिर से उसके जीवन को खुशहाल कर दिया जाएं या नहीं।

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शनि देव के कुछ प्रमुख सिद्ध मंत्र –

1.) शनि मंत्र, भगवान शनि देव की पूजा करते समय –

ओम् शं शनैश्चराय नमः।

2.) शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव कम करने हेतु अचूक शनि मंत्र – ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नमः।

3.) समस्त भय, रोग, दोष और बाधा दूर करने के साथ, आपके भीतर एक आध्यात्मिक शक्ति को जागृत करने वाला शनि गायत्री मंत्र –

ओम् भगभवाय विद्महे मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनि: प्रचोदयात।

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जानिए कैसे हुआ शनि देव का जन्म और कैसे हुई उनकी टेढ़ी नजर? https://astrodeeva.com/%e0%a4%b6%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be-birth-story-of-shanidev/ https://astrodeeva.com/%e0%a4%b6%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be-birth-story-of-shanidev/#respond Sat, 24 Apr 2021 03:55:46 +0000 https://astrodeeva.com/?p=1949 हिन्दू धर्म-ग्रंथो के अनुसार शनि न्यायधीश या दंडाधिकारी की भूमिका का निर्वहन करते हैं। वह अच्छे का परिणाम अच्छा और बुरे का बुरा फल प्रदान करने वाले हैं। अगर कोई शनि देव के कोप का शिकार होता है तो रूठे हुए शनिदेव को मनाया भी जा सकता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शनि जयंती का […]

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हिन्दू धर्म-ग्रंथो के अनुसार शनि न्यायधीश या दंडाधिकारी की भूमिका का निर्वहन करते हैं। वह अच्छे का परिणाम अच्छा और बुरे का बुरा फल प्रदान करने वाले हैं। अगर कोई शनि देव के कोप का शिकार होता है तो रूठे हुए शनिदेव को मनाया भी जा सकता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शनि जयंती का दिन शनिदेव को प्रसन्न करने के लिये सबसे उचित माना जाता है। आइये जानते हैं शनिदेव के जन्म की कहानी और क्यों रहते हैं शनिदेव नाराज।

शनि देव की जन्म कथा

स्कंदपुराण के काशीखंड में शनिदेव के जन्म के बारे में कथा मिलती वह कुछ इस प्रकार है। राजा दक्ष की कन्या संज्ञा का विवाह सूर्यदेव के साथ हुआ। सूर्यदेव का तेज बहुत अधिक था जिसे लेकर संज्ञा परेशान रहती थी। वह सोचा करती कि किसी भी तरह तपादि से सूर्यदेव की अग्नि को कम करना होगा। जैसे तैसे दिन बीतते गये संज्ञा के गर्भ से वैवस्वत मनु, यमराज और यमुना तीन संतानों ने जन्म लिया। संज्ञा अब भी सूर्यदेव के तेज से घबराती थी फिर एक दिन उन्होंने निर्णय लिया कि वे तपस्या कर सूर्यदेव के तेज को कम करेंगी लेकिन बच्चों के पालन और सूर्यदेव को इसकी भनक न लगे इसके लिये उन्होंने एक युक्ति निकाली।

संज्ञा ने अपने तप के प्रभाव से अपनी हमशक्ल को उत्पन्न किया और उसका नाम संवर्णा रखा। संज्ञा ने बच्चों और सूर्यदेव की जिम्मेदारी अपनी छाया संवर्णा को दी और कहा कि अब से मेरी जगह तुम सूर्यदेव की सेवा और बच्चों का पालन करते हुए नारीधर्म का पालन करोगी। लेकिन यह राज सिर्फ मेरे और तुम्हारे बीच ही बना रहना चाहिये।

अब संज्ञा वहां से चलकर पिता के घर पंहुची और अपनी परेशानी बताई तो पिता ने डांट फटकार लगाते हुए उसे वापस भेज दिया लेकिन संज्ञा वापस न जाकर वन में चली गई और घोड़ी का रूप धारण कर तपस्या में लीन हो गई। उधर सूर्यदेव को जरा भी आभास नहीं हुआ कि उनके साथ रहने वाली संज्ञा नहीं सवर्णा है। संवर्णा अपने धर्म का पालन करती रही उसे छाया रूप होने के कारण उन्हें सूर्यदेव के तेज से भी कोई परेशानी नहीं हुई। सूर्यदेव और संवर्णा के मिलन से भी मनु, शनिदेव और भद्रा (तपती) तीन संतानों ने जन्म लिया।

एक अन्य कथा के अनुसार शनिदेव का जन्म महर्षि कश्यप के अभिभावकत्व में कश्यप यज्ञ से हुआ। छाया शिव की भक्तिन थी। जब शनिदेव छाया के गर्भ में थे तो छाया ने भगवान शिव की कठोर तपस्या कि वे खाने-पीने की सुध तक उन्हें न रही। भूख-प्यास, धूप-गर्मी सहने के कारण उसका प्रभाव छाया के गर्भ मे पल रही संतान यानि शनि पर भी पड़ा और उनका रंग काला हो गया।

ये भी पढ़ें : शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शाम को जरूर करें ये उपाय

जब शनिदेव का जन्म हुआ तो रंग को देखकर सूर्यदेव ने छाया पर संदेह किया और उन्हें अपमानित करते हुए कह दिया कि यह मेरा पुत्र नहीं हो सकता। मां के तप की शक्ति शनिदेव में भी आ गई थी उन्होंने क्रोधित होकर अपने पिता सूर्यदेव को देखा तो सूर्यदेव बिल्कुल काले हो गये, उनके घोड़ों की चाल रूक गयी।

परेशान होकर सूर्यदेव को भगवान शिव की शरण लेनी पड़ी इसके बाद भगवान शिव ने सूर्यदेव को उनकी गलती का अहसास करवाया। सूर्यदेव अपने किये का पश्चाताप करने लगे और अपनी गलती के लिये क्षमा याचना कि इस पर उन्हें फिर से अपना असली रूप वापस मिला। लेकिन पिता पुत्र का संबंध जो एक बार खराब हुआ फिर न सुधरा आज भी शनिदेव को अपने पिता सूर्य का विद्रोही माना जाता है।

क्यों है शनिदेव की दृष्टि टेढ़ी?

ब्रह्मपुराण के अनुसार जब शनिदेव जवान हुए तो चित्ररथ की कन्या से इनका विवाह हुआ। शनिदेव की पत्नी सती, साध्वी और परम तेजस्विनी थी लेकिन शनिदेव भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में इतना लीन रहते थे कि उन्होंने अपनी पत्नी को जैसे भुला ही दिया।

एक रात ऋतु स्नान कर संतान प्राप्ति की इच्छा लिये उनकी पत्नी शनि के पास आयी लेकिन शनि देव हमेशा कि तरह भक्ति में लीन थे। वे प्रतीक्षा कर-कर के थक गई और उनका ऋतुकाल निष्फल हो गया। आवेश में आकर उन्होंने शनि देव को शाप दे दिया कि जिस पर भी उनकी नजर पड़ेगी वह नष्ट हो जायेगा।

ध्यान टूटने पर शनिदेव को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने अपनी पत्नी को मनाने की कोशिश की लेकिन तीर कमान से छूट चुका था जो वापस नहीं आ सकता था अपने श्राप के प्रतिकार की ताकत उनमें नहीं थी। इसलिये माना जाता है की इस श्राप के कारण शनि देव अपना सिर नीचा करके रहने लगे।

शनि देव से जुड़ी कुछ महत्त्वपूर्ण बातें

  • शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है।
  • शनि देव का वाहन गिद्ध, कुत्ता, भैंस आदि हैं।
  • शनिवार को तेल, काले तिल, काले कपड़े आदि दान करने से शनि देव प्रसन्न रहते हैं।
  • एक कथानुसार हनुमान जी ने शनि देव को रावण की कैद से मुक्त कराया था। तभी से हनुमान जी की आराधना करने वाले जातकों को शनि देव नहीं सताते।
  • शनि देव की गति मंद यानि बेहद धीमी है। इसी कारण एक राशि में करीब साढ़ेसात साल तक रहते हैं।

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Shani Chalisa – श्री शनि चालीसा https://astrodeeva.com/shani-chalisa-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%a8%e0%a4%bf-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a4%be/ https://astrodeeva.com/shani-chalisa-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%a8%e0%a4%bf-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a4%be/#respond Sat, 06 Feb 2021 00:26:50 +0000 https://astrodeeva.com/?p=1682 ||श्री शनि चालीसा|| Shani Dev Chalisa in Hindi ॥ दोहा ॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल । दीनन के दुःख दूर करि , कीजै नाथ निहाल ॥1॥  जय जय श्री शनिदेव प्रभु , सुनहु विनय महाराज ।   करहु कृपा हे रवि तनय , राखहु जन की लाज ॥2॥ अर्थ- हे माता पार्वती […]

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||श्री शनि चालीसा||

Shani Dev Chalisa in Hindi

॥ दोहा ॥

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।

दीनन के दुःख दूर करि , कीजै नाथ निहाल ॥1॥

 जय जय श्री शनिदेव प्रभु , सुनहु विनय महाराज ।

  करहु कृपा हे रवि तनय , राखहु जन की लाज ॥2॥

अर्थ- हे माता पार्वती के पुत्र भगवान श्री गणेश, आपकी जय हो। आप कल्याणकारी है, सब पर कृपा करने वाले हैं, दीन लोगों के दुख दुर कर उन्हें खुशहाल करें भगवन। हे भगवान श्री शनिदेव जी आपकी जय हो, हे प्रभु, हमारी प्रार्थना सुनें, हे रविपुत्र हम पर कृपा करें व भक्तजनों की लाज रखें।

   जयति जयति शनिदेव दयाला । करत सदा भक्तन प्रतिपाला ॥

चारि भुजा, तनु श्याम विराजै । माथे रतन मुकुट छवि छाजै ॥

अर्थ- हे दयालु शनिदेव महाराज आपकी जय हो, आप सदा भक्तों के रक्षक हैं उनके पालनहार हैं। आप श्याम वर्णीय हैं व आपकी चार भुजाएं हैं। आपके मस्तक पर रतन जड़ित मुकुट आपकी शोभा को बढा रहा है।

परम विशाल मनोहर भाला । टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला ॥

    कुण्डल श्रवन चमाचम चमके । हिये माल मुक्तन मणि दमकै ॥

अर्थ- आपका बड़ा मस्तक आकर्षक है, आपकी दृष्टि टेढी रहती है। आपकी भृकुटी भी विकराल दिखाई देती है। आपके कानों में सोने के कुंडल चमचमा रहे हैं। आपकी छाती पर मोतियों व मणियों का हार आपकी आभा को और भी बढ़ा रहा है।

कर में गदा त्रिशूल कुठारा । पल बिच करैं अरिहिं संहारा ॥

         पिंगल, कृष्णो, छाया, नन्दन । यम, कोणस्थ, रौद्र, दुःख भंजन ॥

अर्थ- आपके हाथों में गदा, त्रिशूल व कुठार हैं, जिनसे आप पल भर में शत्रुओं का संहार करते हैं। पिंगल, कृष्ण, छाया नंदन, यम, कोणस्थ, रौद्र, दु:ख भंजन

सौरी, मन्द शनी दश नामा । भानु पुत्र पूजहिं सब कामा ॥

जापर प्रभु प्रसन्न हवैं जाहीं । रंकहुं राव करैं क्षण माहीं ॥

अर्थ- सौरी, मंद, शनि ये आपके दस नाम हैं। हे सूर्यपुत्र आपको सब कार्यों की सफलता के लिए पूजा जाता है। क्योंकि जिस पर भी आप प्रसन्न होते हैं, कृपालु होते हैं वह क्षण भर में ही रंक से राजा बन जाता है।

पर्वतहू तृण होइ निहारत । तृणहू को पर्वत करि डारत ॥

           राज मिलत वन रामहिं दीन्हयो । कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो ॥

अर्थ- पहाड़ जैसी समस्या भी उसे घास के तिनके सी लगती है लेकिन जिस पर आप नाराज हो जांए तो छोटी सी समस्या भी पहाड़ बन जाती है। हे प्रभु आपकी दशा के चलते ही तो राज के बदले भगवान श्री राम को भी वनवास मिला था। आपके प्रभाव से ही केकैयी ने ऐसा बुद्धि हीन निर्णय लिया।

वनहुं में मृग कपट दिखाई । मातु जानकी गई चुराई ॥

           लषणहिं शक्ति विकल करिडारा । मचिगा दल में हाहाकारा ॥

अर्थ- आपकी दशा के चलते ही वन में मायावी मृग के कपट को माता सीता पहचान न सकी और उनका हरण हुआ। उनकी सूझबूझ भी काम नहीं आयी। आपकी दशा से ही लक्ष्मण के प्राणों पर संकट आन खड़ा हुआ जिससे पूरे दल में हाहाकार मच गया था।

रावण की गति-मति बौराई । रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई ॥

     दियो कीट करि कंचन लंका । बजि बजरंग बीर की डंका ॥

अर्थ- आपके प्रभाव से ही रावण ने भी ऐसा बुद्धिहीन कृत्य किया व प्रभु श्री राम से शत्रुता बढाई। आपकी दृष्टि के कारण बजरंग बलि हनुमान का डंका पूरे विश्व में बजा व लंका तहस-नहस हुई।

        नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा । चित्र मयूर निगलि गै हारा ॥

हार नौलखा लाग्यो चोरी । हाथ पैर डरवायो तोरी ॥

अर्थ- आपकी नाराजगी के कारण राजा विक्रमादित्य को जंगलों में भटकना पड़ा। उनके सामने हार को मोर के चित्र ने निगल लिया व उन पर हार चुराने के आरोप लगे। इसी नौलखे हार की चोरी के आरोप में उनके हाथ पैर तुड़वा दिये गये।

भारी दशा निकृष्ट दिखायो । तेलहिं घर कोल्हू चलवायो ॥

       विनय राग दीपक महँ कीन्हयों । तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों ॥

अर्थ- आपकी दशा के चलते ही विक्रमादित्य को तेली के घर कोल्हू चलाना पड़ा। लेकिन जब दीपक राग में उन्होंनें प्रार्थना की तो आप प्रसन्न हुए व फिर से उन्हें सुख समृद्धि से संपन्न कर दिया।

  हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी । आपहुं भरे डोम घर पानी ॥

तैसे नल पर दशा सिरानी । भूंजी-मीन कूद गई पानी ॥

अर्थ- आपकी दशा पड़ने पर राजा हरिश्चंद्र की स्त्री तक बिक गई, स्वयं को भी डोम के घर पर पानी भरना पड़ा। उसी प्रकार राजा नल व रानी दयमंती को भी कष्ट उठाने पड़े, आपकी दशा के चलते भूनी हुई मछली तक वापस जल में कूद गई और राजा नल को भूखों मरना पड़ा।

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई । पारवती को सती कराई ॥

             तनिक विकलोकत ही करि रीसा । नभ उड़ि गतो गौरिसुत सीसा ॥

अर्थ- भगवान शंकर पर आपकी दशा पड़ी तो माता पार्वती को हवन कुंड में कूदकर अपनी जान देनी पड़ी। आपके कोप के कारण ही भगवान गणेश का सिर धड़ से अलग होकर आकाश में उड़ गया।

पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी । बची द्रोपदी होति उधारी ॥

     कौरव के भी गति मति मारयो । युद्ध महाभारत करि डारयो ॥

अर्थ- पांडवों पर जब आपकी दशा पड़ी तो द्रौपदी वस्त्रहीन होते होते बची। आपकी दशा से कौरवों की मति भी मारी गयी जिसके परिणाम में महाभारत का युद्ध हुआ।

     रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला । लेकर कूदि परयो पाताला ॥

शेष देव-लखि विनती लाई । रवि को मुख ते दियो छुड़ाई ॥

अर्थ- आपकी कुदृष्टि ने तो स्वयं अपने पिता सूर्यदेव को नहीं बख्शा व उन्हें अपने मुख में लेकर आप पाताल लोक में कूद गए। देवताओं की लाख विनती के बाद आपने सूर्यदेव को अपने मुख से आजाद किया।

वाहन प्रभु के सात सुजाना । जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना ॥

     जम्बुक सिह आदि नख धारी । सो फल ज्योतिष कहत पुकारी ॥

अर्थ- हे प्रभु आपके सात वाहन हैं। हाथी, घोड़ा, गधा, हिरण, कुत्ता, सियार और शेर जिस वाहन पर बैठकर आप आते हैं उसी प्रकार ज्योतिष आपके फल की गणना करता है।

 गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं । हय ते सुख सम्पत्ति उपजावै ॥

गर्दभ हानि करै बहु काजा । सिह सिद्ध्कर राज समाजा ॥

अर्थ- यदि आप हाथी पर सवार होकर आते हैं घर में लक्ष्मी आती है। यदि घोड़े पर बैठकर आते हैं तो सुख संपत्ति मिलती है। यदि गधा आपकी सवारी हो तो कई प्रकार के कार्यों में अड़चन आती है, वहीं जिसके यहां आप शेर पर सवार होकर आते हैं तो आप समाज में उसका रुतबा बढाते हैं, उसे प्रसिद्धि दिलाते हैं।

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै । मृग दे कष्ट प्राण संहारै ॥

जब आवहिं स्वान सवारी । चोरी आदि होय डर भारी ॥

अर्थ- वहीं सियार आपकी सवारी हो तो आपकी दशा से बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है व यदि हिरण पर आप आते हैं तो शारीरिक व्याधियां लेकर आते हैं जो जानलेवा होती हैं। हे प्रभु जब भी कुत्ते की सवारी करते हुए आते हैं तो यह किसी बड़ी चोरी की और ईशारा करती है।

तैसहि चारि चरण यह नामा । स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा ॥

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं । धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं ॥

अर्थ- इसी प्रकार आपके चरण भी सोना, चांदी, तांबा व लोहा आदि चार प्रकार की धातुओं के हैं। यदि आप लौहे के चरण पर आते हैं तो यह धन, जन या संपत्ति की हानि का संकेतक है।

समता ताम्र रजत शुभकारी । स्वर्ण सर्वसुख मंगल भारी ॥

    जो यह शनि चरित्र नित गावै । कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै ॥

अर्थ- वहीं चांदी व तांबे के चरण पर आते हैं तो यह सामान्यत शुभ होता है, लेकिन जिनके यहां भी आप सोने के चरणों में पधारते हैं, उनके लिये हर लिहाज से सुखदायक व कल्याणकारी होते है। जो भी इस शनि चरित्र को हर रोज गाएगा उसे आपके कोप का सामना नहीं करना पड़ेगा, आपकी दशा उसे नहीं सताएगी।

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला । करैं शत्रु के नशि बलि ढीला ॥

      जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई । विधिवत शनि ग्रह शांति कराई ॥

अर्थ- उस पर भगवान शनिदेव महाराज अपनी अद्भुत लीला दिखाते हैं व उसके शत्रुओं को कमजोर कर देते हैं। जो कोई भी अच्छे सुयोग्य पंडित को बुलाकार विधि व नियम अनुसार शनि ग्रह को शांत करवाता है।

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत । दीप दान दै बहु सुख पावत ॥

कहत राम सुन्दर प्रभु दासा । शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा ॥

अर्थ- शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष को जल देता है व दिया जलाता है उसे बहुत सुख मिलता है। प्रभु शनिदेव का दास रामसुंदर भी कहता है कि भगवान शनि के सुमिरन सुख की प्राप्ति होती है व अज्ञानता का अंधेरा मिटकर ज्ञान का प्रकाश होने लगता है।

 

॥ दोहा ॥

पाठ शनिश्चर देव को, की हों ‘भक्त’ तैयार ।

करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार ॥

अर्थ- भगवान शनिदेव के इस पाठ को ‘विमल’ ने तैयार किया है जो भी इस चालीसा का चालीस दिन तक पाठ करता है शनिदेव की कृपा से वह भवसागर से पार हो जाता है।

॥इति श्री शनि चालीसा॥

Shani Chalisa, Shani Stuti, Shani Aarti By Shailendra Bhartti I Full Audio

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